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                <title>नासा - Amrit Vichar</title>
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                <description>नासा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नासा की नई अंतरिक्ष दूरबीन प्रक्षेपित, पूरे आकाश और करोड़ों आकाशगंगाओं का करेगी अध्ययन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस (अमेरिका)।</strong> नासा की नवीनतम अंतरिक्ष दूरबीन को मंगलवार को प्रक्षेपित किया गया जो पूरे आकाश का अध्ययन करेगी। यह शुरुआत से लेकर अब तक करोड़ों आकाशगंगाओं और उनकी साझा ब्रह्मांडीय चमक (कॉस्मिक ग्लो) का व्यापक अध्ययन करेगी। </p>
<p>स्पेसएक्स ने कैलिफोर्निया से स्फीरेक्स वेधशाला को प्रक्षेपित किया। सूर्य का अध्ययन करने के लिए सूटकेस के आकार के चार उपग्रह भी साथ में भेजे गए। कुल 48.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्फीरेक्स मिशन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अरबों वर्षों में आकाशगंगाएं कैसे बनीं और विकसित हुईं तथा कैसे ब्रह्मांड का इतनी तेजी से विस्तार हुआ।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/527287/nasas-new-space-binoculars-will-study-the-entire-sky-and"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/नासा-की-नई-अंतरिक्ष-दूरबीन-प्रक्षेपित.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस (अमेरिका)।</strong> नासा की नवीनतम अंतरिक्ष दूरबीन को मंगलवार को प्रक्षेपित किया गया जो पूरे आकाश का अध्ययन करेगी। यह शुरुआत से लेकर अब तक करोड़ों आकाशगंगाओं और उनकी साझा ब्रह्मांडीय चमक (कॉस्मिक ग्लो) का व्यापक अध्ययन करेगी। </p>
<p>स्पेसएक्स ने कैलिफोर्निया से स्फीरेक्स वेधशाला को प्रक्षेपित किया। सूर्य का अध्ययन करने के लिए सूटकेस के आकार के चार उपग्रह भी साथ में भेजे गए। कुल 48.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्फीरेक्स मिशन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अरबों वर्षों में आकाशगंगाएं कैसे बनीं और विकसित हुईं तथा कैसे ब्रह्मांड का इतनी तेजी से विस्तार हुआ। स्फीरेक्स उन तारों के बीच बर्फीले बादलों में पानी और जीवन के अन्य तत्वों की खोज करेगा जहां नए सौर मंडल उभर रहे हैं। </p>
<p>‘कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के मिशन के मुख्य वैज्ञानिक जेमी बॉक ने कहा कि ब्रह्मांडीय चमक ब्रह्मांड के इतिहास में अब तक जितना भी प्रकाश उत्सर्जित हुआ है, उसे अपने अंदर समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि यह ब्रह्मांड को देखने का एक बहुत ही अलग तरीका है, जिससे वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि अतीत में प्रकाश के कौन से स्रोत छूट गए थे। बॉक ने कहा कि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि सामूहिक चमक का अवलोकन करके वे शुरुआती आकाशगंगाओं से प्रकाश संबंधी जानकारी जुटा सकेंगे तथा यह जान सकेंगे कि वे कैसे बनीं। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/527285/donald-trump-said-accepting-a-ceasefire-agreement-with-ukraine-depends">डोनाल्ड ट्रंप ने कहा-यूक्रेन के साथ युद्धविराम समझौते को स्वीकार करना रूस पर निर्भर</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 15:39:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुनीता विलियम्स समेत दो अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के संबंध में नासा शनिवार को करेगा फैसला </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>केप केनवरल (अमेरिका)। </strong>अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) इस सप्ताहांत में यह फैसला करेगी कि बोइंग का नया कैप्सूल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से सुनीता विलियम्स समेत उन दो अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के लिए सुरक्षित है या नहीं, जो जून से पृथ्वी पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। नासा प्रशासक बिल नेल्सन और अन्य शीर्ष अधिकारी शनिवार को बैठक करेंगे जिसके बाद इस संबंध में घोषणा होने की संभावना है। </p>
<p>अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने पांच जून को बोइंग के स्टारलाइनर से अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी। इस परीक्षण उड़ान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/487694/nasa-will-take-a-decision-on-saturday-regarding-bringing-back"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-08/सुनीता-विलियम्स.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>केप केनवरल (अमेरिका)। </strong>अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) इस सप्ताहांत में यह फैसला करेगी कि बोइंग का नया कैप्सूल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से सुनीता विलियम्स समेत उन दो अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के लिए सुरक्षित है या नहीं, जो जून से पृथ्वी पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। नासा प्रशासक बिल नेल्सन और अन्य शीर्ष अधिकारी शनिवार को बैठक करेंगे जिसके बाद इस संबंध में घोषणा होने की संभावना है। </p>
<p>अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने पांच जून को बोइंग के स्टारलाइनर से अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी। इस परीक्षण उड़ान के दौरान ‘थ्रस्टर’ में खराबी आ गई और ‘हीलियम’ रिसाव के कारण नासा ने कैप्सूल को स्टेशन पर ही खड़ा रखा और इंजीनियर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आगे क्या किया जाना चाहिए। ‘स्पेसएक्स’ अंतरिक्ष यात्रियों को वापस ला सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें अगले फरवरी तक वहां रहना पड़ेगा। उन्हें स्टेशन पर पहुंचने के एक या दो सप्ताह बाद वापस लौटना था। यदि नासा यह निर्णय लेता है कि ‘स्पेसएक्स’ से अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी ही उचित मार्ग है, तो स्टारलाइनर सितंबर में पृथ्वी पर खाली ही लौट आएगा। </p>
<p>नासा ने कहा कि इंजीनियर ‘स्टारलाइनर थ्रस्टर’ के लिए एक नए कंप्यूटर मॉडल का आकलन कर रहे हैं। नासा ने कहा कि अंतिम फैसला करते समय हर प्रकार के जोखिम का विश्लेषण किया जाएगा। बोइंग ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अंतरिक्ष और जमीन पर ‘थ्रस्टर’ के व्यापक परीक्षण से पता चला है कि स्टारलाइनर अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने में सक्षम है। यह बोइंग की पहली परीक्षण उड़ान थी जिसमें चालक दल सवार था। ‘स्पेस शटल’ के सेवा से हटने के बाद नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों की अंतरिक्ष स्टेशन पर आवाजाही का काम बोइंग और स्पेसएक्स को सौंपा है। ‘स्पेसएक्स’ 2020 से यह काम कर रहा है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/487529/decision-to-establish-strategic-partnership-between-india-and-poland%C2%A0">PM Modi In Poland : पोलैंड में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, बोले- हमने रिश्ते को रणनीतिक साझीदारी में बदलने का फैसला किया</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Aug 2024 12:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में फंसीं सुनीता विलियम्स! बोइंग के कैप्सूल ने दिया धोखा...एलन मस्क करेंगे मदद</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स नासा बुच विल्मो के साथ स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से स्पेस में गई थी। जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर एक सप्ताह बिताने के बाद 13 जून को वापस पृथ्वी पर लौटना था, लेकिन अभी तक वो लौटी नहीं हैं। उनके साथ एक और अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर भी वहां फंस गए हैं। दोनों 5 जून को स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष गए थे। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर कब तक लौटेंगे? अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अब तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।</p>
<p>बोइंग ने एक बयान में कहा कि स्पेस कैप्सूल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/476160/sunita-williams-stuck-in-space-boeings-capsule-cheated-elon-musk"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-06/sunita-williams-space.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स नासा बुच विल्मो के साथ स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से स्पेस में गई थी। जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर एक सप्ताह बिताने के बाद 13 जून को वापस पृथ्वी पर लौटना था, लेकिन अभी तक वो लौटी नहीं हैं। उनके साथ एक और अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर भी वहां फंस गए हैं। दोनों 5 जून को स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष गए थे। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर कब तक लौटेंगे? अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अब तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।</p>
<p>बोइंग ने एक बयान में कहा कि स्पेस कैप्सूल में थ्रस्टर फेलियर और लीक वॉल्व जैसी कुछ तकनीकी समस्याएं आ गई थीं और इसे ठीक करने के लिए ही विलियम्स और बुच की वापसी टालनी पड़ी है। 59 साल की सुनीता विलियम्स इससे पहले दो बार अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं। इससे पहले वो 2006 और 2012 में अंतरिक्ष जा चुकी हैं। नासा के मुताबिक, उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 322 दिन बिताए हैं।</p>
<p>एक रिपोर्ट के मुताबिक, नासा और बोइंग दोनों को ही हीलियम लीक के बारे में जानते थे। उसके बावजूद उन्होंने इस लीकेज को मिशन के लिए मामूली खतरा माना। स्टारलाइनर बोइंग का ही स्पेसक्राफ्ट है नासा और बोइंग के इस फैसले के कारण सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में फंस गए हैं। दावा ये भी किया जा रहा है कि इसी लीकेज के कारण लॉन्चिंग को पहले टाल दिया गया था। पहले ये मिशन 7 मई को लॉन्च होने वाला था।</p>
<p>स्टारलाइनर की फ्यूल कैपेसिटी 45 दिन की है। इस मिशन को शुरू हुए 18 दिन गुजर चुके हैं और अब सिर्फ 27 दिन बाकी हैं। फिलहाल, नासा और बोइंग दोनों ही सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को सुरक्षित वापस लाने के लिए जुटे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नासा को दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए नया रॉकेट भेजने के लिए मजबूर किया जा सकता है। ऐसे में उन्होंने उम्मीद कि जा रही है कि इस मिशन को पूरा करने के लिए एलन मस्क के स्पेसएक्स की मदद ली जा सकती है।</p>
<p><strong>नासा ले सकती है मस्क की मदद</strong><br />वहीं ब्रिटिश टैबलॉयड डेलीमेल ने एक्सपर्ट्स से बातचीत के हवाले से बताया कि नासा को उन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए नया रॉकेट भेजने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मिशन को पूरा करने के लिए एलन मस्क के स्पेसएक्स की मदद ली जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/476160/sunita-williams-stuck-in-space-boeings-capsule-cheated-elon-musk</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 15:52:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा जल्द ही भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को आधुनिक प्रशिक्षण मुहैया कराएगी : एरिक गार्सेटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के शीर्ष राजनयिक एरिक गार्सेटी ने कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के लिए संयुक्त प्रयासों को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को जल्द ही आधुनिक प्रशिक्षण मुहैया कराएगी। </p>
<p>भारत में अमेरिका के राजदूत गार्सेटी ने ‘‘अमेरिका-भारत वाणिज्यिक अंतरिक्ष सम्मेलन : अमेरिका और भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप के लिए अवसरों की शुरुआत’’ कार्यक्रम में ये टिप्पणियां की। इस कार्यक्रम का आयोजन बेंगलुरु में ‘यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ (यूएसआईबीसी) और ‘यूएस कमर्शियल सर्विस’ (यूएससीएस) ने किया है। </p>
<p>यूएसआईबीसी ने यहां जारी एक बयान में गार्सेटी के हवाले से कहा, ‘‘नासा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के लिए संयुक्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/468626/nasa-will-soon-provide-modern-training-to-indian-astronauts-garcetti%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-05/एरिक-गार्सेटी1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के शीर्ष राजनयिक एरिक गार्सेटी ने कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के लिए संयुक्त प्रयासों को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को जल्द ही आधुनिक प्रशिक्षण मुहैया कराएगी। </p>
<p>भारत में अमेरिका के राजदूत गार्सेटी ने ‘‘अमेरिका-भारत वाणिज्यिक अंतरिक्ष सम्मेलन : अमेरिका और भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप के लिए अवसरों की शुरुआत’’ कार्यक्रम में ये टिप्पणियां की। इस कार्यक्रम का आयोजन बेंगलुरु में ‘यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ (यूएसआईबीसी) और ‘यूएस कमर्शियल सर्विस’ (यूएससीएस) ने किया है। </p>
<p>यूएसआईबीसी ने यहां जारी एक बयान में गार्सेटी के हवाले से कहा, ‘‘नासा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के लिए संयुक्त प्रयास बढ़ाने के उद्देश्य से जल्द ही भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को आधुनिक प्रशिक्षण मुहैया कराएगी। उम्मीद है कि यह इस साल या उसके बाद शुरू होगी। जल्द ही हम पारिस्थितिकी तंत्र, पृथ्वी की सतह, प्राकृतिक खतरों, समुद्र के बढ़ते स्तर और ‘क्रायोस्फेयर’ समेत सभी संसाधनों पर नजर रखने के लिए इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ‘निसार’ उपग्रह प्रक्षेपित करेंगे।’’ बेंगलुरु में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में गार्सेटी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. सोमनाथ एस. और नासा के प्रतिनिधि समेत अमेरिका और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/468626/nasa-will-soon-provide-modern-training-to-indian-astronauts-garcetti%C2%A0</link>
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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 11:30:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा के अंतरिक्ष यान ने भारत के चंद्रयान-3 के लैंडर का चंद्रमा की सतह पर लगाया पता </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के, चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे अंतरिक्ष यान ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन के तहत भेजे गए विक्रम लैंडर की चंद्रमा पर स्थिति का सफलतापूर्वक पता लगा लिया है। अमेरिकी एजेंसी ने यह जानकारी दी। </p>
<p>नासा ने बताया कि लेजर रोशनी को लूनर रेकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) और विक्रम लैंडर पर एक छोटे रेट्रोरिफ्लेक्टर के बीच प्रसारित और परावर्तित किया गया, जिससे चंद्रमा की सतह पर लक्ष्य का सटीकता के साथ पता लगाने की एक नई शैली का तरीका मिल गया। लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में मंज़िनस क्रेटर के पास एलआरओ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/437699/nasa-spacecraft-detects-indias-chandrayaan-3-lander-on-the-lunar-surface"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-01/लैद.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के, चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे अंतरिक्ष यान ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन के तहत भेजे गए विक्रम लैंडर की चंद्रमा पर स्थिति का सफलतापूर्वक पता लगा लिया है। अमेरिकी एजेंसी ने यह जानकारी दी। </p>
<p>नासा ने बताया कि लेजर रोशनी को लूनर रेकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) और विक्रम लैंडर पर एक छोटे रेट्रोरिफ्लेक्टर के बीच प्रसारित और परावर्तित किया गया, जिससे चंद्रमा की सतह पर लक्ष्य का सटीकता के साथ पता लगाने की एक नई शैली का तरीका मिल गया। लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में मंज़िनस क्रेटर के पास एलआरओ से 100 किलोमीटर दूर था, जब एलआरओ ने पिछले साल 12 दिसंबर को इसकी ओर लेजर तरंगें भेजीं। </p>
<p>ऑर्बिटर ने विक्रम पर लगे एक छोटे रेट्रोरिफ्लेक्टर से वापस लौटकर आई रोशनी दर्ज की जिसके बाद नासा के वैज्ञानिकों को पता चला कि उनकी तकनीक काम कर गई है। किसी वस्तु की ओर लेजर तरंगों को भेजना और प्रकाश को वापस लौटने में लगने वाले समय की माप, जमीन से पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों के स्थानों का पता लगाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है। </p>
<p>वैज्ञानिकों ने बताया कि चंद्रमा पर ‘रिवर्स तकनीक’ का उपयोग करने के कई लाभ हैं। इस तकनीक में एक गतिमान अंतरिक्ष यान से लेजर तंरगों को, लक्ष्य के सटीक स्थान को निर्धारित करने के लिए एक स्थिर अंतरिक्ष यान में भेजा जाता है। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में टीम का नेतृत्व करने वाले जियाओली सन ने कहा, ‘‘हमने प्रदर्शित किया है कि हम चंद्रमा की कक्षा से सतह पर अपने रेट्रोरिफ्लेक्टर का पता लगा सकते हैं।’’ रेट्रोरिफ्लेक्टर बताता है कि रोशनी स्रोत की ओर परावर्तित होती है जिससे वस्तु का पता लगाया जा सकता है। </p>
<p>नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की साझेदारी के तहत विक्रम पर लगे रेट्रोरिफ्लेक्टर विकसित किए गए। नासा के एक बयान में सन ने कहा, ‘‘अगला कदम तकनीक में सुधार करना है ताकि इनका नियमित तौर पर उपयोग उन मिशन में किया जा सके जो भविष्य में इन रेट्रोरिफ्लेक्टर का उपयोग करना चाहते हैं।’’ केवल दो इंच या पांच सेंटीमीटर चौड़े, नासा के छोटे लेकिन शक्तिशाली रेट्रोरिफ्लेक्टर में आठ क्वार्ट्ज-कोणीय-क्यूब प्रिज्म हैं जो एक गुंबद के आकार के एल्यूमीनियम फ्रेम में स्थापित हैं। इसे लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर ऐरे भी कहा जाता है। </p>
<p>नासा ने वैज्ञानिकों के हवाले से बताया कि यह उपकरण सरल और टिकाऊ है। इसके लिए बिजली या रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती और यह दशकों तक काम कर सकता है। नासा ने कहा कि इसका विन्यास रेट्रोरिफ्लेक्टर को किसी भी दिशा से आने वाले प्रकाश को वापस उसके स्रोत तक प्रतिबिंबित करने में समक्ष बनाता है। </p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि सूटकेस के आकार के रेट्रोरिफ्लेक्टर ने पृथ्वी पर प्रकाश को प्रतिबिंबित करके खुलासा किया कि चंद्रमा प्रति वर्ष 3.8 सेंटीमीटर की दर से हमारे ग्रह से दूर जा रहा है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 लैंडर पर लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर ऐरे (एलआरए) ने चंद्रमा पर संदर्भ के लिए सटीक रूप से स्थित एक मार्कर यानी ‘फिडुशियल पॉइंट’ के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं -</strong><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/437689/newsclick-hr-head-withdraws-petition-filed-in-sc-against-his">‘न्यूजक्लिक’ के एचआर प्रमुख ने यूएपीए के तहत अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ SC में दायर याचिका ली वापस</a></strong></span></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jan 2024 17:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरज के सबसे नजदीक से गुजरा नासा का सूर्ययान, तेज स्पीड से अंतरिक्ष में लगा रहा चक्कर, बनाए ये दो रिकॉर्ड  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने दो नए रिकॉर्ड बना डाले हैं। पार्कर सोलर प्रोब ने सूरज के चारों तरफ 17वां चक्कर लगाते हुए दो नए रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इसमें पहला तो ये कि वो सूरज के बेहद नजदीक गया और दूसरा उसकी स्पीड का। वह बहुत तेज गति में अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा है। बता दें पार्कर सोलर प्रोब सूरज की सतह से मात्र 72.60 लाख किलोमीटर दूरी से निकला। वहीं पार्कर सोलर प्रोब इस समय 6.35 लाख किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल रहा है।  </p>
<p>पार्कर सोलर प्रोब ने ये दोनों रिकॉर्ड दो दिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/406992/nasa-s-surya-probe-passed-closest-to-the-sun--circling-in-space-at-high-speed--made-these-two-records"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-09/सीरस.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने दो नए रिकॉर्ड बना डाले हैं। पार्कर सोलर प्रोब ने सूरज के चारों तरफ 17वां चक्कर लगाते हुए दो नए रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इसमें पहला तो ये कि वो सूरज के बेहद नजदीक गया और दूसरा उसकी स्पीड का। वह बहुत तेज गति में अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा है। बता दें पार्कर सोलर प्रोब सूरज की सतह से मात्र 72.60 लाख किलोमीटर दूरी से निकला। वहीं पार्कर सोलर प्रोब इस समय 6.35 लाख किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल रहा है।  </p>
<p>पार्कर सोलर प्रोब ने ये दोनों रिकॉर्ड दो दिन पहले यानी 27 सितंबर 2023 को बनाए हैं। तब वह सूरज के करीब 17वीं बार गया था। सूरज की सतह से यह अब तक की सबसे कम दूरी थी। इस यात्रा में शुक्र ग्रह की ग्रैविटी ने मदद की। उसने 21 अगस्त 2023 को शुक्र के बगल से फ्लाईबाई किया था।</p>
<p>वहीं शुक्र ग्रह की ग्रैविटी का फायदा उठाते हुए पार्कर सोलर प्रोब ने सूरज के नजदीक जाकर दिखाया। अपनी तेज गति में वहां से निकल भी गया। नासा ने बताया है कि पार्कर सोलर प्रोब के सभी हिस्से सही सलामत हैं। उसकी सेहत ठीक है। सभी सिस्टम सही से काम कर रहे हैं। वहीं प्रोब 4 से 19 अक्टूबर के बीच धरती को अपने नए रिकॉर्ड का डेटा भी भेजेगा। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/406954/the-search-for-connections-between-two-of-the-universe-s-most-spectacular-events-remains-inconclusive">ब्रह्मांड की दो सबसे शानदार घटनाओं के बीच संबंधों की खोज रही बेनतीजा</a></span></strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/406992/nasa-s-surya-probe-passed-closest-to-the-sun--circling-in-space-at-high-speed--made-these-two-records</link>
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                <pubDate>Fri, 29 Sep 2023 17:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा ने अपने वोयाजर-2 अंतरिक्ष यान से एक बार फिर संपर्क किया स्थापित </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>केप केनवरल।</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने 'वोयाजर-2' यान से शुक्रवार को एक बार फिर संपर्क स्थापित कर लिया। दो हफ्ते पहले धरती से गलत कमांड भेजे जाने के कारण 'वोयाजर-2' का एंटीना पृथ्वी की विपरीत दिशा में झुक गया था, जिससे लगभग 46 साल पुराने इस अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट गया था। नासा के 'डीप स्पेस नेटवर्क' ने 'वोयाजर-2' के एंटीना को पृथ्वी की तरफ मोड़ने के इरादे से ऑस्ट्रेलिया के अपने विशाल रेडियो डिश एंटीना के सबसे ताकतवर ट्रांसमिटर से बुधवार को एक नया कमांड भेजा था। </p>
<p>नासा के मुताबिक, 'वोयाजर-2' के एंटीना को महज दो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/392768/nasa-once-again-established-contact-with-its-voyager-2-spacecraft"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/वायज.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>केप केनवरल।</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने 'वोयाजर-2' यान से शुक्रवार को एक बार फिर संपर्क स्थापित कर लिया। दो हफ्ते पहले धरती से गलत कमांड भेजे जाने के कारण 'वोयाजर-2' का एंटीना पृथ्वी की विपरीत दिशा में झुक गया था, जिससे लगभग 46 साल पुराने इस अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट गया था। नासा के 'डीप स्पेस नेटवर्क' ने 'वोयाजर-2' के एंटीना को पृथ्वी की तरफ मोड़ने के इरादे से ऑस्ट्रेलिया के अपने विशाल रेडियो डिश एंटीना के सबसे ताकतवर ट्रांसमिटर से बुधवार को एक नया कमांड भेजा था। </p>
<p>नासा के मुताबिक, 'वोयाजर-2' के एंटीना को महज दो डिग्री घुमाने की जरूरत थी। एजेंसी के अनुसार, पृथ्वी से लगभग 19 अरब किलोमीटर दूर अंतरिक्ष की कक्षा में मौजूद 'वोयाजर-2' तक कमांड पहुंचने में 18 घंटे से अधिक समय लगा। उसने बताया कि यान से अगले 18 घंटे में संपर्क स्थापित हो गया और वह धरती पर संदेश भेजने लगा।</p>
<p> कैलिफोर्निया की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अधिकारियों ने कहा कि कड़ी मेहनत रंग लाई और यान से एक बार फिर डेटा प्राप्त होने लगा। प्रोजेक्ट मैनेजर सुजैन डॉडल ने 'द एसोसिएटेड प्रेस' से कहा, "मैंने राहत की सांस ली। कुर्सी पर बैठे-बैठे मेरी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। 'वोयाजर-2' से एक बार फिर संपर्क स्थापित हो गया है।" बाहरी सौर मंडल के रहस्यों को खंगालने के लिए 'वोयाजर-2' को पहली बार वर्ष 1977 में अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था। डॉड ने कहा कि दो हफ्ते की यह अवधि संभवतः सबसे लंबी अवधि है, जब नासा को यान से कोई डेटा नहीं प्राप्त हुआ। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/392732/sunak-may-remain-absent-in-the-meeting-of-the-united-nations-general-assembly">ऋषि सुनक United Nations General Assembly की बैठक में रह सकते हैं अनुपस्थित</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/392768/nasa-once-again-established-contact-with-its-voyager-2-spacecraft</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 08:48:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस महीने के अंत में आसमान में दिखेगा ग्रहों का मेला, अद्भुत होगा नजारा, नासा करेगा लाइव टेलीकॉस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन। </strong>नासा (National Aeronautics and Space Administration) के वैज्ञानिक बिल कुक ने सीबीएस न्यूज़ को बताया है कि 28 मार्च की रात 5 ग्रह आकाश में 50 डिग्री की रेखा में दिखेंगे। चांद के पास बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और यूरेनस दिखेंगे और बुध व यूरेनस को देखने के लिए दूरबीन की ज़रूरत होगी। संयोजन 28 मार्च से पहले और बाद के दिनों में भी दिखेगा।</p>
<p>इस महीने के आखिर में अंतरिक्ष में एक अनोखी घटना होने वाली है। इस घटना को पृथ्वी से आसानी से देखा जा सकता है। दरअसल, 28 मार्च को बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और यूरेनस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/354599/5-planets-will-be-seen-in-a-line-in-the-sky-next-week"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/image-from-social-media10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन। </strong>नासा (National Aeronautics and Space Administration) के वैज्ञानिक बिल कुक ने सीबीएस न्यूज़ को बताया है कि 28 मार्च की रात 5 ग्रह आकाश में 50 डिग्री की रेखा में दिखेंगे। चांद के पास बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और यूरेनस दिखेंगे और बुध व यूरेनस को देखने के लिए दूरबीन की ज़रूरत होगी। संयोजन 28 मार्च से पहले और बाद के दिनों में भी दिखेगा।</p>
<p>इस महीने के आखिर में अंतरिक्ष में एक अनोखी घटना होने वाली है। इस घटना को पृथ्वी से आसानी से देखा जा सकता है। दरअसल, 28 मार्च को बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और यूरेनस 50 डिग्री के एक छोटे से क्षेत्र में एकत्रित होंगे। इस दौरान इन सौर मंडल के इन पांचों ग्रहों को पृथ्वी से नंगी आंखों से देखा जा सकता है। यूनीलाड की रिपोर्ट के अनुसार, बुध क्षितिज से -1.3 मैग्नीट्यूड, बृहस्पति को -2.1 मैग्नीट्यूड पर देखा जा सकता है। अगर इस नजारे को साफ देखना हो तो खगोलविज्ञानी दूरबीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह घटना सूर्यास्त के तुरंत बाद काफी साफ नजर आएगी।</p>
<p><strong>कैसे देख सकते हैं ग्रहों का मेला?</strong><br />एजुकेशनल एस्ट्रोनॉमी ऐप स्टार वॉक के अनुसार, क्षितिज से ठोड़ा सा ऊपर जाने पर मेष राशि के साथ-साथ -4.0 के मैग्नीट्यूड पर शुक्र ग्रह को देखा जा सकता है। हालांकि, यूरेनस को देखना आसान नहीं होगा। इस ग्रह की हल्की झलक क्षितिज से 5.8 मैग्नीट्यूड पर देखी जा सकती है। इस घटना को काफी दुर्लभ बताया जा रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया में इस घटना को देखने को लेकर उत्साह बना हुआ है। कई खगोलप्रेमियों ने विशेष आयोजन करने का भी ऐलान किया है, जिसमें आम लोगों को इस घटना का लाइव टेलिकॉस्ट किया जाएगा।</p>
<p><strong>नासा करेगा लाइव टेलीकॉस्ट</strong><br />अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस घटना पर नजर बनाए हुए है। नासा के एक अधिकारी ने बताया है कि इस घटना का लाइव टेलिकॉस्ट किया जाएगा। इसे नासा के जिससे आम लोगों के बीच अंतरिक्ष को लेकर रुचि बढ़ सके। नासा ने बताया है कि घटना के समय ये सभी ग्रह एक सीध में नहीं होंगे, लेकिन इनका नजदीक होना अत्यंत दुर्लभ है। इससे पहले तीन और चार ग्रहों को एक पास देखा जा चुका है। नासा के अनुसार, जो लोग 28 मार्च को इस घटना को देखने से चूक जाएंगे, वे बाद में टेलिस्कोप का उपयोग कर देख सकते हैं। हालांकि, उसके लिए आपको विशेषज्ञता की जरूरत होगी।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/354332/the-biggest-storm-in-the-solar-system-is-happening--nasa-released-the-picture">घट रहा सौर मंडल का सबसे बड़ा तूफान! नासा ने जारी की तस्वीर... क्या आपने देखी?</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/354599/5-planets-will-be-seen-in-a-line-in-the-sky-next-week</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Mar 2023 14:40:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NASA का स्पेसएक्स क्रू-5 आईएसएस से निकलकर आज धरती पर लौटेगा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लॉस एंजिलिस। </strong>अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का स्पेसएक्स क्रू-5 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से निकलकर शनिवार को पृथ्वी पर लौटेगा। नासा के अनुसार स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान शनिवार अपराह्न 2:05 बजे आईएसएस से धरती के लिए रवाना होगा। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यान फ्लोरिडा के तट से दूर अटलांटिक महासागर या मैक्सिको की खाड़ी में रात में करीब 9:02 बजे उतरेगा। उन्होंने बताया कि नासा के अंतरिक्ष यात्री निकोल मान और जोश कसाडा, जापान एयरस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री कोइची वकाटा और रोकोस्मोस के कॉस्मोनॉट अन्ना किकिना छह महीने विज्ञान मिशन पर काम करेंगे। उन्होंने बताया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/349934/nasa-s-spacex-crew-5-will-leave-the-iss-and-return-to-earth-today"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/श्पसे.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लॉस एंजिलिस। </strong>अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का स्पेसएक्स क्रू-5 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से निकलकर शनिवार को पृथ्वी पर लौटेगा। नासा के अनुसार स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान शनिवार अपराह्न 2:05 बजे आईएसएस से धरती के लिए रवाना होगा। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यान फ्लोरिडा के तट से दूर अटलांटिक महासागर या मैक्सिको की खाड़ी में रात में करीब 9:02 बजे उतरेगा। उन्होंने बताया कि नासा के अंतरिक्ष यात्री निकोल मान और जोश कसाडा, जापान एयरस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री कोइची वकाटा और रोकोस्मोस के कॉस्मोनॉट अन्ना किकिना छह महीने विज्ञान मिशन पर काम करेंगे। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यान भी महत्वपूर्ण अनुसंधान के बाद पृथ्वी पर लौट आयेंगा। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/349932/russia-trying-to-topple-government-in-moldova--white-house">मोल्दोवा में सरकार गिराने की कोशिश कर रहा है रूस: व्हाइट हाउस</a></span></strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Mar 2023 09:23:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NASA लॉन्च करेगा अंतरिक्ष स्टेशन में नया विज्ञान मिशन, जानिए खासियत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लॉस एंजिल्स। </strong>अमेरिकी अंतरिक्ष केंद्र नासा ने दिल की बीमारियों, अंतरिक्ष में जीवन और अन्य चीजों का अध्ययन करने के लिए मार्च में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में एक नया विज्ञान मिशन शुरू करने की योजना बनाई है। एजेंसी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। यह नासा का 27वां स्पेसएक्स वाणिज्यिक पुन: आपूर्ति सेवा मिशन होगा। बिना चालक दल के ड्रैगन अंतरिक्ष यान द्वारा किया जाने वाला मिशन, फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा। <br /><br />नासा के अनुसार मिशन अंतरिक्ष में हृदय कैसे बदलता है, इसकी जांच करने, छात्र द्वारा डिजाइन किए गए कैमरा माउंट का परीक्षण करने,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/349168/nasa-will-launch-a-new-science-mission-in-the-space-station-know-the-specialty"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/1ert-(4)9.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लॉस एंजिल्स। </strong>अमेरिकी अंतरिक्ष केंद्र नासा ने दिल की बीमारियों, अंतरिक्ष में जीवन और अन्य चीजों का अध्ययन करने के लिए मार्च में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में एक नया विज्ञान मिशन शुरू करने की योजना बनाई है। एजेंसी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। यह नासा का 27वां स्पेसएक्स वाणिज्यिक पुन: आपूर्ति सेवा मिशन होगा। बिना चालक दल के ड्रैगन अंतरिक्ष यान द्वारा किया जाने वाला मिशन, फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा। <br /><br />नासा के अनुसार मिशन अंतरिक्ष में हृदय कैसे बदलता है, इसकी जांच करने, छात्र द्वारा डिजाइन किए गए कैमरा माउंट का परीक्षण करने, बायोफिल्म निर्माण को नियंत्रित करने वाली सतहों की तुलना करने और अंतरिक्ष में जीवन का अध्ययन करने सहित अनुसंधान का संचालन करेगा। <br /><br /><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/348927/pan-aadhaar-link-whether-aadhaar-number-is-linked-to-pan-or-not-find-online-address-like-this-with-a-very-simple-process#gsc.tab=0">PAN Aadhaar Link : पैन से आधार नंबर लिंक है या नहीं? बेहद सिंपल प्रॉसेस से ऐसे लगाएं ऑनलाइन पता</a></span><br /></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Mar 2023 09:41:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी के बारे में नई खोजों के लिए नासा और आईबीएम ने मिलाया हाथ </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>नासा और आईबीएम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऐसे मॉडल विकसित करने के लिए साझेदारी की है जो पृथ्वी के बारे में आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी आसानी से जुटाने में मदद करने के साथ ही दुनिया को बदलते पर्यावरण के लिहाज से ढलने में मददगार हो सकते हैं। नासा ने एक बयान में कहा कि इस संयुक्त उपक्रम में पहली बार नासा के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के आंकड़ों में एआई फाउंडेशन मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/339387/us-imposes-visa-ban-on-taliban--support-of-women-of-afghanistan">US ने तालिबान पर लगाया वीजा प्रतिबंध, अफगानिस्तान की महिलाओं का किया समर्थन</a></span></strong></p>
<p>फाउंडेशन मॉडल ऐसे एआई मॉडल होते हैं जिन्हें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/339449/nasa-and-ibm-join-hands-for-new-discoveries-about-earth"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-02/नासा4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>नासा और आईबीएम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऐसे मॉडल विकसित करने के लिए साझेदारी की है जो पृथ्वी के बारे में आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी आसानी से जुटाने में मदद करने के साथ ही दुनिया को बदलते पर्यावरण के लिहाज से ढलने में मददगार हो सकते हैं। नासा ने एक बयान में कहा कि इस संयुक्त उपक्रम में पहली बार नासा के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के आंकड़ों में एआई फाउंडेशन मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/339387/us-imposes-visa-ban-on-taliban--support-of-women-of-afghanistan">US ने तालिबान पर लगाया वीजा प्रतिबंध, अफगानिस्तान की महिलाओं का किया समर्थन</a></span></strong></p>
<p>फाउंडेशन मॉडल ऐसे एआई मॉडल होते हैं जिन्हें बिना लेबल वाले आंकड़ों के व्यापक सेट पर प्रशिक्षित किया जाता है और जिनका उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जा सकता है। नासा के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर में वरिष्ठ अनुसंधान विज्ञानी राहुल रामचंद्रन ने कहा, फाउंडेशन मॉडल की खूबसूरती ही यही है कि उनका इस्तेमाल अनेक अनुप्रयोगों के लिए सक्षम तरीके से किया जा सकता है। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/339314/iran-blames-israel-for-drone-attack--warns-of-retaliation">ईरान ने ड्रोन हमला के लिए इजराइल को ठहराया जिम्मेदार, जवाबी कार्रवाई करने की दी चेतावनी</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Feb 2023 19:42:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Artemis : NASA के Astronauts के लिए यह Last Mission क्यों हो सकता है ?</title>
                                    <description><![CDATA[अपोलो युग और 2020 के मध्य के बीच सबसे अधिक प्रासंगिक अंतर कंप्यूटर शक्ति और रोबोटिक्स में एक अद्भुत सुधार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/316866/artemis-why-this-could-be-the-last-mission-for-nasa-astronauts"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/जहर-खाकर-ssp-दफ्तर-पहुंचा-पति-(1)9.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>(मार्टिन रीस, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय) कैंब्रिज (यूके), 24 नवंबर (द कन्वरसेशन)। </strong> नील आर्मस्ट्रांग ने 1969 में चंद्रमा पर अपना ऐतिहासिक एक छोटा कदम उठाया था। और ठीक तीन साल बाद, अंतिम अपोलो अंतरिक्ष यात्री हमारे आकाशीय पड़ोसी को छोड़ आए। तब से, सैकड़ों अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा गया, लेकिन मुख्य रूप से पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए। </p>
<p>वास्तव में, किसी ने भी पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय नहीं की है। हालाँकि, अमेरिका के आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य इस दशक में मनुष्यों को फिर चंद्रमा पर ले जाना है- आर्टेमिस एक अपनी पहली परीक्षण उड़ान के हिस्से के रूप में पृथ्वी पर वापस आते हुए, चंद्रमा के चारों ओर घूम रहा है। </p>
<p>अपोलो युग और 2020 के मध्य के बीच सबसे अधिक प्रासंगिक अंतर कंप्यूटर शक्ति और रोबोटिक्स में एक अद्भुत सुधार है। इसके अलावा, महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध स्पर्धा के रूप में बड़े पैमाने पर व्यय को उचित नहीं ठहराया जा सकता। हमारी हालिया पुस्तक द एंड ऑफ एस्ट्रोनॉट्स में, डोनाल्ड गोल्डस्मिथ और मैं तर्क देते हैं कि ये परिवर्तन परियोजना को कमजोर करते हैं। </p>
<p>आर्टेमिस मिशन नासा के एकदम नए स्पेस लॉन्च सिस्टम का उपयोग कर रहा है, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है - डिजाइन में सैटर्न वी रॉकेट के समान है जिसने एक दर्जन अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। अपने पूर्ववर्तियों की तरह, आर्टेमिस बूस्टर तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को समुद्र में गिरने से पहले भारी भारोत्तोलन शक्ति बनाने के लिए जोड़ता है। </p>
<p>चूंकि इसे दोबारा कभी उपयोग नहीं किया जाता है इसलिए प्रत्येक लॉन्च की अनुमानित लागत दो अरब डॉलर और चार अरब डॉलर के बीच होती है। यह इसके स्पेसएक्स प्रतिद्वंद्वी स्टारशिप के विपरीत है, जो कंपनी को पहले चरण में इसे फिर से प्राप्त करने और पुन: उपयोग करने में सक्षम बनाता है।<br /><br /></p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Here's to you, Oppy. 🥂<br /><br />Before you say <a href="https://twitter.com/hashtag/GoodNightOppy?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#GoodNightOppy</a>, learn more about our Opportunity <a href="https://twitter.com/NASAMars?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASAMars</a> rover, and how a planned 90-day mission turned into a 15-year journey of exploration and discovery: <a href="https://t.co/KTf5ECdUrO">https://t.co/KTf5ECdUrO</a> <a href="https://t.co/70f9CjxGrb">pic.twitter.com/70f9CjxGrb</a></p>
— NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/1595505493794906112?ref_src=twsrc%5Etfw">November 23, 2022</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p><strong>रोबोटिक्स के लाभ</strong><br />मंगल ग्रह पर रोवर्स की गतिविधियों से रोबोटिक अन्वेषण में प्रगति को जाना जा सकता है, जहां परसर्वरेंस, नासा के नवीनतम प्रॉस्पेक्टर, पृथ्वी से केवल सीमित मार्गदर्शन के साथ चट्टानी इलाके में खुद अपना रास्ता ढूंढ सकते हैं। सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सुधार से रोबोट स्वयं विशेष रूप से दिलचस्प साइटों की पहचान करने में सक्षम होंगे, जहां से पृथ्वी पर लौटने के लिए नमूने एकत्र किए जा सकते हैं। अगले एक या दो दशकों के भीतर, मंगल ग्रह की सतह का रोबोटिक अन्वेषण लगभग पूरी तरह से स्वायत्त हो सकता है, जिसमें मानव उपस्थिति थोड़ा लाभ प्रदान करती है। </p>
<p>इसी तरह, इंजीनियरिंग परियोजनाओं- जैसे कि खगोलविदों का चंद्रमा के दूर की ओर एक बड़े रेडियो टेलीस्कोप के निर्माण का सपना, जो पृथ्वी के हस्तक्षेप से मुक्त हो- को अब मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। ऐसी परियोजनाओं का निर्माण पूरी तरह से रोबोट द्वारा किया जा सकता है। </p>
<p>अंतरिक्ष यात्रियों को तो रहने के लिए एक ठीक-ठाक जगह और सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जबकि रोबोट स्थायी रूप से अपने कार्य स्थल पर रह सकते हैं। इसी तरह, यदि दुर्लभ सामग्रियों के लिए चंद्र मिट्टी या क्षुद्रग्रहों का खनन आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो जाता है, तो यह भी रोबोटों के साथ अधिक सस्ते और सुरक्षित रूप से किया जा सकता है।</p>
<p>रोबोट थोड़े अतिरिक्त खर्च के साथ बृहस्पति, शनि और उनके आकर्षक विविध चंद्रमाओं का भी पता लगा सकते हैं, क्योंकि कई वर्षों की यात्रा रोबोट के लिए छह महीने की मंगल यात्रा की तुलना में थोड़ी अधिक चुनौती पेश करती है। इनमें से कुछ चंद्रमा वास्तव में अपने उप-सतही महासागरों में जीवन युक्त हो सकते हैं। अगर हम मनुष्यों को वहां भेजें, तो यह अपने आप में एक बुरा विचार हो सकता है क्योंकि वे उस दुनिया को पृथ्वी के सूक्ष्म जीवों से दूषित कर सकते हैं। <br /><br /><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(45,194,107);"><a style="color:rgb(45,194,107);" href="https://www.amritvichar.com/article/316801/europe-s-space-agency-selected-a-disabled-person-to-send-to-space">जॉन मैकफॉल ने 19 साल की उम्र में खो दिया था दाहिना पैर, अब अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ चयन</a></span><br /><br /></strong><strong>जोखिमों का प्रबंधन<br /></strong>अपोलो अंतरिक्ष यात्री नायक थे। उन्होंने उच्च जोखिम को स्वीकार किया और प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल किया। इसकी तुलना में, आर्टेमिस कार्यक्रम की 90 अरब डॉलर की लागत के बावजूद, 2020 के दशक में चंद्रमा की छोटी यात्राएं लगभग नियमित लगती है। चंद्रमा की यात्रा पर होने वाले विशाल व्यय को देखते हुए, मानव और रोबोट यात्रा के बीच लागत अंतर किसी भी दीर्घकालिक प्रवास के लिए बहुत बड़ा होगा। चंद्रमा की तुलना में सैकड़ों गुना आगे मंगल की यात्रा न केवल अंतरिक्ष यात्रियों को कहीं अधिक जोखिम में डाल देगी, बल्कि आपातकालीन सहायता को भी कम संभव बना देगी। </p>
<p>यहां तक ​​​​कि अंतरिक्ष यात्रा के प्रति अति उत्साही भी स्वीकार करते हैं कि मंगल की पहली चालक दल की यात्रा से पहले लगभग दो दशक बीत सकते हैं। निश्चित रूप से रोमांच चाहने वाले ऐसे साहसी लोग होंगे जो स्वेच्छा से कहीं अधिक जोखिम स्वीकार करेंगे - कुछ ने अतीत में प्रस्तावित एकतरफा यात्रा के लिए भी हामी भरी है। </p>
<p>यह अपोलो युग और आज के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर का संकेत देता है: एक मजबूत, निजी अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी क्षेत्र का उदय। निजी क्षेत्र की कंपनियां अब नासा के साथ प्रतिस्पर्धी हैं, इसलिए उच्च जोखिम वाली, कम कीमत वाली मंगल ग्रह की यात्राएं, अरबपतियों और निजी प्रायोजकों द्वारा वित्तपोषित, इच्छुक स्वयंसेवकों द्वारा तैयार की जा सकती हैं। </p>
<p>अंतत: जनता इस बात से खुश हो सकती है कि इन बहादुर साहसी लोगों की यात्रा का खर्च उसे नहीं उठाना होगा। यह देखते हुए कि निचली कक्षा से परे मानव अंतरिक्ष यान पूरी तरह से उच्च जोखिम को स्वीकार करने के लिए तैयार निजी-वित्त पोषित मिशनों में स्थानांतरित होने की संभावना है, इस बात को लेकर संदेह है कि क्या नासा की बहु-अरब डॉलर की आर्टेमिस परियोजना सरकार के पैसे खर्च करने का एक अच्छा तरीका है। <br /><br /><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/316185/nasa-released-the-picture-of-earth-taken-from-the-moon--have-you-seen-it">चांद से खींची गई पृथ्वी की तस्वीर NASA ने की जारी, आपने देखी क्या?</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/316866/artemis-why-this-could-be-the-last-mission-for-nasa-astronauts</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Nov 2022 14:41:18 +0530</pubDate>
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