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                <title>Prayagraj Court - Amrit Vichar</title>
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                <description>Prayagraj Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपियों को जारी किया नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>अभिनेत्री आकांक्षा दूबे की संदिग्ध स्थिति में मौत के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कथित आरोपियों- समरजीत सिंह उर्फ समर सिंह और संजय सिंह को नोटिस जारी किया तथा इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 मई तय की। भोजपुरी अभिनेत्री की मृत्यु के मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग करते हुए दायर की गयी एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि अभिनेत्री की मृत्यु खुदकुशी नहीं थी, बल्कि हत्या थी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने वाराणसी के सारनाथ थाने के प्रभारी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581345/high-court-issues-notices-to-accused-in-actress-akanksha-dubey-s-death-case"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/akanksha-dubey.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>अभिनेत्री आकांक्षा दूबे की संदिग्ध स्थिति में मौत के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कथित आरोपियों- समरजीत सिंह उर्फ समर सिंह और संजय सिंह को नोटिस जारी किया तथा इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 मई तय की। भोजपुरी अभिनेत्री की मृत्यु के मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग करते हुए दायर की गयी एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि अभिनेत्री की मृत्यु खुदकुशी नहीं थी, बल्कि हत्या थी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने वाराणसी के सारनाथ थाने के प्रभारी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा और हलफनामा दाखिल करने में विफल रहने पर वह अगली तिथि पर अदालत के समक्ष पेश होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व, शुक्रवार का दिन निर्णय देने के लिए तय किया गया था, लेकिन अदालत ने कहा कि कुछ बिंदुओं पर नए सिरे से सुनवाई आवश्यक है, इसलिए अगली तिथि 22 मई तय की। वर्ष 2023 में आकांक्षा दुबे का शव सारनाथ के एक होटल में पाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिनेत्री की मां ने समर सिंह और संजय सिंह पर अपनी बेटी की हत्या करने का आरोप लगाया । हालांकि, पुलिस ने यह विचार व्यक्त किया था कि यह खुदकुशी का मामला है। पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआई से इस मामले की जांच कराने की मांग करते हुए मौजूदा याचिका दायर की गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 21:09:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को शुक्रवार को राहत देते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सिमरन गुप्ता नाम की एक महिला द्वारा दायर इस याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने यह आदेश पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने संभल की एक अदालत के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। संभल की अदालत ने 2025 में राहुल गांधी की कथित विवादास्पद टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग खारिज कर दी थी जिसे याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580536/prayagraj--petition-seeking-registration-of-fir-against-rahul-gandhi-dismissed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/राहुल-गांधी.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को शुक्रवार को राहत देते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सिमरन गुप्ता नाम की एक महिला द्वारा दायर इस याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने यह आदेश पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने संभल की एक अदालत के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। संभल की अदालत ने 2025 में राहुल गांधी की कथित विवादास्पद टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग खारिज कर दी थी जिसे याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता के मुताबिक, राहुल गांधी ने 2025 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के उद्घाटन के दौरान कथित तौर पर कहा था कि हम भाजपा, आरएसएस और भारत सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस टिप्पणी से देशभर में लोगों की भावनाएं आहत हुईं क्योंकि राहुल गांधी की टिप्पणी देशद्रोह के समान है जो देश को अस्थिर करने की मंशा से जानबूझकर की गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:49:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : अदालत और जजों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले दो भाई गिरफ्तार, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज। </strong>प्रयागराज में सोशल मीडिया पर अदालत और जजों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कैंट थाना पुलिस ने दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 29 वर्षीय दीपक कुमार और 26 वर्षीय देविंदर कुमार के रूप में हुई है, जो उरई, जालौन जिले के निवासी हैं। दोनों भाई खेती-किसानी का कार्य करते हैं। </p>
<p>बताया गया कि हाल ही में फेसबुक अकाउंट "अश्विनी अंबेडकर" नाम से अदालत और जजों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर कैंट थाने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574690/prayagraj--two-brothers-arrested-for-making-derogatory-remarks-against-the-court-and-judges--know-the-entire-matter"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/arest2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज। </strong>प्रयागराज में सोशल मीडिया पर अदालत और जजों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कैंट थाना पुलिस ने दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 29 वर्षीय दीपक कुमार और 26 वर्षीय देविंदर कुमार के रूप में हुई है, जो उरई, जालौन जिले के निवासी हैं। दोनों भाई खेती-किसानी का कार्य करते हैं। </p>
<p>बताया गया कि हाल ही में फेसबुक अकाउंट "अश्विनी अंबेडकर" नाम से अदालत और जजों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने फेसबुक आईडी की जानकारी जुटाकर आरोपियों की पहचान की और पुलिस टीम ने जालौन पहुंचकर दोनों को गिरफ्तार कर प्रयागराज ले आई। </p>
<p>पूछताछ के दौरान आरोपियों ने आपत्तिजनक टिप्पणी के पीछे कोई विशेष कारण नहीं बताया। कैंट थाने में इस मामले में अपराध संख्या 52/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(1)(बी), 352, 356 तथा आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को झटका, यौन शोषण के मामले में दर्ज होगी FIR, कोर्ट का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एडीजे रेप एवं पोक्सो स्पेशल कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">एडीजे (पोक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज कर विधिवत विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। यह अर्जी शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत दाखिल की गई थी। आरोप है कि संबंधित आश्रम में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572707/prayagraj--shock-to-swami-avimukteshwarananda--fir-to-be-filed-in-sexual-exploitation-case--court-orders"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/cats180.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एडीजे रेप एवं पोक्सो स्पेशल कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">एडीजे (पोक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज कर विधिवत विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। यह अर्जी शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत दाखिल की गई थी। आरोप है कि संबंधित आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;">आवेदक ने अदालत में कथित साक्ष्य के रूप में सीडी भी प्रस्तुत करने का दावा किया है। 13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया था और सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब आदेश जारी होने के बाद मामले में विधिक कार्रवाई आगे बढ़ेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा है कि उन्हें न्यायालय से न्याय मिला है और वे प्रयागराज से वाराणसी स्थित विद्या मठ तक पैदल यात्रा निकाल कर लोगों के सामने तथ्य रखने की बात कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यह मामला न्यायालय के आदेश पर दर्ज किया जा रहा है और आरोपों की सत्यता की जांच पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट होगी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 17:38:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : कथित हिस्ट्रीशीटर के घर का अवैध समय में दौरा न करने का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज, अमृत विचार : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित हिस्ट्रीशीटर के घर का असमय दौरा करने पर रोक लगाते हुए कहा कि पुलिस हिस्ट्रीशीटर आदि के घरों का अवैध समय पर दौरा नहीं कर सकते हैं। उक्त आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर और न्यायमूर्ति अनिल कुमार (दशम) की एक खंडपीठ ने समुंदर पांडेय नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल अपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान याचिका में याची ने अपने खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने को चुनौती देते हुए कोर्ट को बताया कि अप्रासंगिक सामग्रियों के आधार पर हिस्ट्रीशीट खोली गई है।  याची ने कोर्ट को यह भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/545252/prayagraj-directed-not-to-visit-the-alleged-history-sheeters-house"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/अदालत-का-फैसला1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज, अमृत विचार : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित हिस्ट्रीशीटर के घर का असमय दौरा करने पर रोक लगाते हुए कहा कि पुलिस हिस्ट्रीशीटर आदि के घरों का अवैध समय पर दौरा नहीं कर सकते हैं। उक्त आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर और न्यायमूर्ति अनिल कुमार (दशम) की एक खंडपीठ ने समुंदर पांडेय नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल अपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान याचिका में याची ने अपने खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने को चुनौती देते हुए कोर्ट को बताया कि अप्रासंगिक सामग्रियों के आधार पर हिस्ट्रीशीट खोली गई है।  याची ने कोर्ट को यह भी बताया कि हिस्ट्रीशीट की आड़ में पुलिस द्वारा उसे परेशान किया जा रहा है और नियमित समय पर पुलिसकर्मी याची के घर में दौरा करने आते हैं और उन्हें पुलिस थाने में ले जाते हैं, जिससे उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है और उनके  पारिवारिक जनों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। इस पर कोर्ट ने संबंधित प्रयागराज के पुलिस आयुक्त और स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को याची के घर अवैध समय में दौरा न करने का निर्देश दिया और मामले को आगामी 11 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:- <a href="https://www.amritvichar.com/article/545251/panic-among-villagers-when-leopard-video-appears-in-laharpur-in">सीतापुर के लहरपुर में दिखा तेंदुआ, वीडियो सामने आने पर ग्रामीणों में दहशत </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/545252/prayagraj-directed-not-to-visit-the-alleged-history-sheeters-house</link>
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                <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 23:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज: जिला न्यायाधीश ने ग्राम न्यायालय कोरांव का किया निरीक्षण, दिया यह आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोरांव/प्रयागराज, अमृत विचार। </strong>जनपद न्यायाधीश प्रयागराज संजीव कुमार ने ग्राम न्यायालय का आज निरीक्षण किया। इस दौरान वहां उन्हें पता चला कि अभी तक ग्राम न्यायालय में बाबू की नियुक्ति नहीं है। अलमारी और रैक नहीं उपलब्ध कराए गए हैं जिससे ग्राम न्यायालय के संचालन व कार्य में दिक्कतें हो रही हैं।</p>
<p>उन्होंने तत्काल ग्राम न्यायालय में बाबू की नियुक्ति कराने तथा अलमारी व रैक उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन दिया। जनपद न्यायाधीश संजीव कुमार ने ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी अभय दीप विश्वकर्मा, एसडीएम आकांक्षा सिंह, तहसीलदार विनोद बरनवाल व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राम बहादुर सिंह पटेल, मंत्री लक्ष्मीकांत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/543967/prayagraj--district-judge-inspected-the-village-court-of-koraon--gave-this-assurance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/cats494.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोरांव/प्रयागराज, अमृत विचार। </strong>जनपद न्यायाधीश प्रयागराज संजीव कुमार ने ग्राम न्यायालय का आज निरीक्षण किया। इस दौरान वहां उन्हें पता चला कि अभी तक ग्राम न्यायालय में बाबू की नियुक्ति नहीं है। अलमारी और रैक नहीं उपलब्ध कराए गए हैं जिससे ग्राम न्यायालय के संचालन व कार्य में दिक्कतें हो रही हैं।</p>
<p>उन्होंने तत्काल ग्राम न्यायालय में बाबू की नियुक्ति कराने तथा अलमारी व रैक उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन दिया। जनपद न्यायाधीश संजीव कुमार ने ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी अभय दीप विश्वकर्मा, एसडीएम आकांक्षा सिंह, तहसीलदार विनोद बरनवाल व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राम बहादुर सिंह पटेल, मंत्री लक्ष्मीकांत शुक्ल समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बैठकर समस्याओं को जाना और उन्हें तत्काल दूर कराने की बात कही। </p>
<p>ग्राम न्यायालय कोरांव के न्यायाधिकारी अभय दीप विश्वकर्मा ने बताया कि हर तीसरे महीने में ग्राम न्यायालय का मुआयना जनपद न्यायाधीश करते है। निरीक्षण का आशय ग्राम न्यायालय में क्या समस्याएं हैं, उनको दूर करना तथा मामलों के निस्तारण के लिए आवश्यक दिशा निर्देश देना होता है। उन्होंने कहा कि ग्राम न्यायालय के संचालन में जो भी दिक्कतें थी उन्हें जनपद न्यायाधीश को अवगत करा दिया गया है।</p>
<p>उन्होंने समस्याओं को दूर कराने की बात कही है। ग्राम न्यायालय को सुसज्जित एवं आकर्षक रूप से निर्मित होने को लेकर ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी से निर्माण कार्यदाई संस्था व ठेकेदार राजा चौबे की सराहना की। जनपद न्यायाधीश ने कहा कि इतना भव्य और आकर्षक ग्राम न्यायालय शायद ही कहीं निर्मित हुआ हो। जनपद न्यायाधीश द्वारा ग्राम न्यायालय का मुआयना करने के दौरान एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय, थाना प्रभारी कोरांव राकेश कुमार वर्मा समेत भारी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 20:46:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>High Court: ‘संविधान बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज (उप्र)। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को मुक्त भाव से अपने धर्म का अनुपालन और उसका प्रचार प्रसार करने का अधिकार देता है, लेकिन यह बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021’ के तहत आरोपी चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज करते हुए की।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन आरोपियों ने पैसा और मुफ्त इलाज की पेशकश कर लोगों का ईसाई धर्म में परिवर्तन करने का प्रयास किया। अदालत ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/538723/constitution-does-not-support-conversion-by-force-or-deception"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/2025-(2)15.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज (उप्र)। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को मुक्त भाव से अपने धर्म का अनुपालन और उसका प्रचार प्रसार करने का अधिकार देता है, लेकिन यह बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021’ के तहत आरोपी चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज करते हुए की।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन आरोपियों ने पैसा और मुफ्त इलाज की पेशकश कर लोगों का ईसाई धर्म में परिवर्तन करने का प्रयास किया। अदालत ने यह कहते हुए इस मामले को निरस्त करने से मना कर दिया कि ये आरोप गंभीर हैं। याचिका खारिज करते हुए अदालत ने सात मई के अपने आदेश में कहा, “भारत का संवैधानिक प्रारूप, संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। इस अनुच्छेद में “मुक्त भाव से” धर्म का आचरण और प्रचार करने का हर व्यक्ति को मौलिक अधिकार है। मुक्त भाव, धार्मिक आस्था और अभिव्यक्ति की स्वैच्छिक प्रकृति को रेखांकित करता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, “संविधान बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता और ना ही यह धर्म के प्रचार की आड़ में बलपूर्वक या भ्रामक व्यवहार को ढाल प्रदान करता है।” अदालत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक ताना-बाना को अवरुद्ध ना करे और ना ही व्यक्ति और सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाले, यह सुनिश्चित करने के लिए ये सीमाएं आवश्यक हैं। वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए कानून पर अदालत ने कहा, “इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य बहकाकर, बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव डालकर, लालच देकर, धोखे से या शादी करके विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन को रोकना है।”</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने इस मुद्दे पर भी गौर किया कि क्या एक पुलिस अधिकारी (एसएचओ) को 2021 के कानून की धारा चार के तहत “पीड़ित व्यक्ति” माना जा सकता है। यह धारा आमतौर पर केवल पीड़ित या उसके करीबी रिश्तेदार को शिकायत दर्ज कराने की अनुमति देती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एसएचओ इस तरह की प्राथमिकी दर्ज कर सकता है क्योंकि इस कानून को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के साथ पढ़ा जाना चाहिए जोकि पुलिस को संज्ञेय अपराधों में कार्रवाई की अनुमति देता है। <span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेः <a href="https://www.amritvichar.com/article/538722/jammu-and-kashmir--two-aides-of-terrorists-caught-by-the-army-in-shopian--recovered-with-arms-and-ammunition">जम्मू-कश्मीर: शोपियां में सेना के हाथ लगे आतंकियों के दो मददगार, हथियार और गोला-बारूद बरामद</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/538723/constitution-does-not-support-conversion-by-force-or-deception</link>
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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 09:14:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : निर्माणाधीन पुलिस चौकी पर प्रमुख सचिव से मांगा हलफनामा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुंढ़ापांडे थाना क्षेत्र के हाईवे पर निर्माणाधीन पुलिस चौकी के मामले में मुरादाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अधिवक्ता द्वारा दाखिल अनुपालन हलफनामे से असंतुष्ट होकर प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सिराज मुस्तफा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि चौकी के निर्माण की जिम्मेदारी कोई भी विपक्षी नहीं ले रहा है, इसलिए सचिव से इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536294/prayagraj-sought-affidavit-from-principal-secretary-at-police-post-under"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/कोर्ट-इलाहाबाद-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुंढ़ापांडे थाना क्षेत्र के हाईवे पर निर्माणाधीन पुलिस चौकी के मामले में मुरादाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अधिवक्ता द्वारा दाखिल अनुपालन हलफनामे से असंतुष्ट होकर प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सिराज मुस्तफा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि चौकी के निर्माण की जिम्मेदारी कोई भी विपक्षी नहीं ले रहा है, इसलिए सचिव से इस मुद्दे पर जांच कर हलफनामा अपेक्षित है, जिससे पुलिस चौकी के निर्माण का रहस्य उजागर हो सके। बता दें कि पिछली सुनवाई में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुरादाबाद द्वारा दी गई जानकारी में कोर्ट को बताया गया कि पुलिस चौकी का निर्माण स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत किया गया है जबकि गुरुवार को सुनवाई के दौरान मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्मार्ट सिटी योजना के द्वारा दाखिल शपथ पत्र में उल्लिखित है कि पुलिस चौकी का निर्माण स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत नहीं किया जा रहा है और इसका उनसे कोई सरकार नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने भी पहले ही इस संदर्भ में किसी भी तरह की जानकारी अथवा स्वीकृति से इनकार किया है, इसलिए कोर्ट ने विपक्षी संख्या एक अर्थात प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से इस संबंध में जांच कर शपथपत्र दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह खुलासा किया जाए कि कौन सी एजेंसी सार्वजनिक सड़क पर पुलिस चौकी का निर्माण कर रही है और किस प्राधिकरण के तहत यह निर्माण हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले को जुलाई, 2025 के दूसरे सप्ताह में नए सिरे से सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है, साथ ही मामले में पूर्व पारित अंतरिम आदेश जारी रहेगा। मालूम हो कि याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि चूंकि भूमि राजस्व रिकॉर्ड में पीडब्ल्यूडी रोड के रूप में दर्ज है और इसलिए इस पर कोई निर्माण करने की अनुमति नहीं है। इसका उपयोग केवल सड़क के रूप में किया जा सकता है। याची ने यह भी बताया कि निर्माण याची की चहारदीवारी और गेट से मात्र 10 फीट की दूरी पर है, इसलिए निर्माण के कारण उसे अपने प्लॉट पर आने-जाने में भी समस्या हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:-<span style="color:rgb(186,55,42);"><a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/536292/ssp-inspected-the-policemen-prepared-for-badaun-riot#gsc.tab=0">बदायूं : दंगा को लेकर तैयार किए गए पुलिसकर्मी, एसएसपी ने किया मुआयना</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 20:19:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज: महाकुंभ में सड़कों की सुंदरता को निखारने के लिए काटे जाएंगे 900 पेड़, अदालत से ली गई अनुमति </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार। </strong>प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ को लेकर बड़ी तैयारी की जा रही है। महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण भी किया जा रहा है। ग्रीन सिटी के रूप में दिखने वाली संगमनगरी में महाकुंभ अधिक सुंदर बनाने के लिए नौ सौ से अधिक पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है।  </p>
<p>महाकुंभ में सड़कों के चौड़ीकरण, सुंदरीकरण परियोजनाओं का रूप देने के लिए काफी जद्दोजहद के बाद इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिली है। सौ से अधिक पेड़ों को उखाड़ा जा चुका है। बताया जा रहा है कि अगर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/456713/900-trees-will-be-cut-in-prayagraj-mahakumbh-to-enhance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-04/27---2024-04-08t220002.683.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार। </strong>प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ को लेकर बड़ी तैयारी की जा रही है। महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण भी किया जा रहा है। ग्रीन सिटी के रूप में दिखने वाली संगमनगरी में महाकुंभ अधिक सुंदर बनाने के लिए नौ सौ से अधिक पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है।  </p>
<p>महाकुंभ में सड़कों के चौड़ीकरण, सुंदरीकरण परियोजनाओं का रूप देने के लिए काफी जद्दोजहद के बाद इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिली है। सौ से अधिक पेड़ों को उखाड़ा जा चुका है। बताया जा रहा है कि अगर इन पेड़ों को उखाड़कर शिफ्टिंग तकनीक का सहारा लिया गया होता तो शायद तो इन पेड़ों की जीवन दिया जा सकता था। एक तरफ शासन और प्रशासन हरियाली लाने की कवायद  कर रही है तो वहीं स्मार्ट सिटी के तहत सड़कों के चौड़ीकरण, नाला, सीवर लाइन को लेकर हरे भरे पेड़ों को नष्ट किये जा रहे हैं। दो सौ से अधिक बरगद, सहजन, नीम, पीपल और पाकड़ जैसे आक्सीजन देने वाले पेड़ों को उखाड़ दिया गया। </p>
<p>पीडीए के सचिव अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जिन पेड़ों को नहीं बचाया जा सकता है उन्हें ही काटा जा रहा है। इसके लिए हाईकोर्ट के निर्देशन में बनी कमेटी से अनुमति लिया गया है। पेड़ों की शिफ्टिंग कराने के लिए अभियंताओं से वार्ता की जाएगी। इस कमेटी में डीएम नवनीत सिंह चहल भी शामिल हैं। जितने पेड़ कटेंगे उनकी तुलना में 10 गुना अधिक पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि ग्रीन कुंभ हरा भरा और सकार हो सके। </p>
<p><strong>वर्जन -</strong><br /><strong>महाकुंभ की सड़क परियोजनाओं में तीन हजार पेड़ चिह्नित किए गए थे, लेकिन काफी प्रयास के बाद अब सिर्फ नौ सौ ही काटे जाएंगे। इसके बदले में अरैल से फाफामऊ के बीच दो लाख से अधिक पौधे लगाए जायेंगे।  जितने पेड़ कटेंगे, उससे 10 गुना अधिक लगाए जाएंगे।</strong><br /><strong>-विजय किरन आनंद, कुंभ मेलाधिकारी </strong></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -<a href="https://www.amritvichar.com/article/456707/eid-moon-sighting-2024-eid-moon-not-sighted-in-saudi#gsc.tab=0">Eid Moon Sighting 2024: सऊदी अरब में नहीं दिखाई दिया ईद का चांद, जानें कब मनाई जाएगी ईद?</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/456713/900-trees-will-be-cut-in-prayagraj-mahakumbh-to-enhance</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Apr 2024 22:00:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज: तीन मासूम सहित पत्नी को आत्मदाह के लिए पति ने उकसाया, कोर्ट ने सुनाई 9 वर्ष की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार।</strong> इलाहाबाद जिला अदालत ने तीन मासूम समेत पत्नी को आत्मदाह के लिए उकसाने वाले पति को दोषी करार करते हुए नौ वर्ष के कठोर कारावास के साथ पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दस साल पहले पहले कोरांव थाना क्षेत्र के वैदवार गांव में हुई तीन मासूम बच्चों सहित पत्नी को आत्मदाह के लिए पति द्वारा उकसाने के मामले में दोषी पति को कोर्ट ने नौ वर्ष की सजा सुनाई है। इस मामले में अर्थदंड की 90 प्रतिशत धनराशि बतौर मुआवजा मृतका के भाई को दी जाएगी। यह फैसला जिला जज संतोष राय की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/449093/prayagraj-husband-instigated-wife-along-with-three-innocent-children-to"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-03/27---2024-03-08t200020.974.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार।</strong> इलाहाबाद जिला अदालत ने तीन मासूम समेत पत्नी को आत्मदाह के लिए उकसाने वाले पति को दोषी करार करते हुए नौ वर्ष के कठोर कारावास के साथ पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दस साल पहले पहले कोरांव थाना क्षेत्र के वैदवार गांव में हुई तीन मासूम बच्चों सहित पत्नी को आत्मदाह के लिए पति द्वारा उकसाने के मामले में दोषी पति को कोर्ट ने नौ वर्ष की सजा सुनाई है। इस मामले में अर्थदंड की 90 प्रतिशत धनराशि बतौर मुआवजा मृतका के भाई को दी जाएगी। यह फैसला जिला जज संतोष राय की अदालत ने दस वर्ष पहले कोरांव थाना क्षेत्र के वैदवार गांव में हुई निर्मम घटना के मामले में विचार करने के बाद सुनाया।</p>
<p>यह घटना वर्ष 2014 के जून की है। मृतका शीला देवी से पति विजय कुमार बिंद का उसके अवैध संबंधों को लेकर 19 तारीख की रात विवाद हुआ था। पति की रोज-रोज की प्रताड़ना से तंग शीला देवी ने अपने मासूम तीन बच्चों पांच वर्षीय दीपा, 10 वर्ष की रूपा और दुधमुंहे डेढ़ वर्ष के बेटे प्रदीप के साथ घर में ही खुद को आग के हवाले कर दिया था। </p>
<p>मामले की सूचना पाकर शीला के घर पहुंचे भाई संतोष कुमार ने विजय के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करवाया। उसने बताया कि विजय के अवैध संबंधों का विरोध करने पर आये दिन शीला के साथ मारपीट और तरह-तरह से प्रताड़ित करता था। इससे तंग आकर मृतका ने मासूम समेत आत्मदाह कर लिया। घटना में शीला और दीपा की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि रूपा और प्रदीप ने इलाज़ के दौरान दम तोड़ा था।</p>
<p>पुलिस की विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस  दौरान अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने चार गवाह पेश करते हुए कठोर सजा देने की दलील पेश की गई। कोर्ट ने दोषी पति को नौ वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -<a href="https://www.amritvichar.com/article/449091/bahraich-troubled-by-the-harassment-of-a-female-doctor-the#gsc.tab=0">बहराइच: महिला डॉक्टर की प्रताड़ना से परेशान हो युवक ने लगाया फंदा, ब्लैकमेल कर मांग रही थी दो लाख रुपए</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 20:00:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : उचित कानूनी सलाह के अभाव में पारित हो रहे अवैध आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण से जुड़े एक मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि उचित कानूनी सहायता के अभाव में अधिकारी गलत और अवैध आदेश पारित कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में पारित अपने आदेश को उलटते हुए नए आदेश पारित किए, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा खारिज किए गए आदेश का ही हवाला देते हुए नए आदेश पारित किया जा रहे हैं, यह स्थिति गंभीर है। कोर्ट ने इस संदर्भ में चिंता जताते हुए कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में राज्य पर भारी जुर्माना लगाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/442444/prayagraj-illegal-orders-are-being-passed-in-the-absence-of"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-02/36-(70).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण से जुड़े एक मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि उचित कानूनी सहायता के अभाव में अधिकारी गलत और अवैध आदेश पारित कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में पारित अपने आदेश को उलटते हुए नए आदेश पारित किए, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा खारिज किए गए आदेश का ही हवाला देते हुए नए आदेश पारित किया जा रहे हैं, यह स्थिति गंभीर है। कोर्ट ने इस संदर्भ में चिंता जताते हुए कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में राज्य पर भारी जुर्माना लगाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। </p>
<p>कोर्ट का मानना है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण तथा अन्य गंभीर मामलों में आदेश पारित करने वाले सचिवों को उचित कानूनी सहायता दी जानी चाहिए। इस उद्देश्य के लिए राज्य के पास कुशल अधिवक्ताओं का एक पैनल होना चाहिए। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने अब्दुल रहमान उर्फ नन्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया।इस आदेश की एक प्रति सचिव (गृह) उत्तर प्रदेश सरकार को अग्रेषित करने का निर्देश दिया गया है। </p>
<p>दरअसल याची को प्रारंभिक निरोध आदेश की तिथि से 3 महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखने का निर्देश दिया गया था। 3 महीने की समाप्ति के बाद याची की हिरासत अवैध हो जाती है। मौजूदा मामले में निरोध आदेश को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व पारित आदेश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा विस्तारित किया गया, जिसे याची के अधिवक्ता ने अवैध करार दिया। अंत में कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 12(1) के प्रावधानों के संदर्भ में माना कि निरोध आदेश को बढ़ाने का आदेश बिना किसी कानूनी अधिकार के पारित किया गया है, जो बरकरार रखने योग्य नहीं है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -<a href="https://www.amritvichar.com/article/442442/lucknow-up-bjp-president-called-the-white-paper-the-mirror#gsc.tab=0">लखनऊ : यूपी BJP अध्यक्ष ने श्वेत पत्र को बताया सच्चाई का आईना, कांग्रेस को लेकर कही ये बड़ी बात</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Feb 2024 22:52:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : अतीक अशरफ हत्याकांड के आरोपियों की हुई पेशी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार।</strong> जिला अदालत में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के आरोपी तीनों शूटरों की बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई गई। वर्तमान में तीनों शूटर प्रतापगढ़ के जिला कारागार में बंद हैं, जबकि उनकी सुनवाई इलाहाबाद के जिला जज संतोष राय की कोर्ट में चल रही है। तीनों आरोपियों पर एसआईटी की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 3 नवंबर को सूचीबद्ध की गई है। </p>
<p>सुनवाई के दौरान तीनों शूटर्स पर आरोप तय नहीं हो सका है। मालूम हो कि इसी वर्ष 15</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/413415/prayagraj-atiq-ashraf-murder-case-accused-presented"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-10/27-(83).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार।</strong> जिला अदालत में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के आरोपी तीनों शूटरों की बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई गई। वर्तमान में तीनों शूटर प्रतापगढ़ के जिला कारागार में बंद हैं, जबकि उनकी सुनवाई इलाहाबाद के जिला जज संतोष राय की कोर्ट में चल रही है। तीनों आरोपियों पर एसआईटी की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 3 नवंबर को सूचीबद्ध की गई है। </p>
<p>सुनवाई के दौरान तीनों शूटर्स पर आरोप तय नहीं हो सका है। मालूम हो कि इसी वर्ष 15 अप्रैल को अतीक और अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या हुई थी। पुलिस मेडिकल टेस्ट के लिए दोनों भाइयों को मोतीलाल नेहरू मंडलीय अस्पताल में पहुंची थी और वहां पर मौजूद लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। सभी आरोपियों के पास मीडिया का फर्जी आईडी कार्ड था। घटनास्थल से ही तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -<a href="https://www.amritvichar.com/article/413411/azam-khan-do-not-be-afraid-security-will-be-complete#gsc.tab=0">आजम खां डरें नहीं, पूरी होगी सुरक्षा : दयाशंकर सिंह</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/413415/prayagraj-atiq-ashraf-murder-case-accused-presented</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 20:04:39 +0530</pubDate>
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