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                <title>अंतरिक्ष यात्री - Amrit Vichar</title>
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                <description>अंतरिक्ष यात्री RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चीन का चांग-6 चंद्रमा की सतह पर उतरा, जांच के लिए मिट्टी इकट्ठा करेगा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बीजिंग। </strong>चीन का चांग-6 नाम का चन्द्र जांच लैंडिंग मॉड्यूल मिट्टी इकट्ठा करने के लिए चंद्रमा के पीछे की ओर सफलतापूर्वक उतर गया है। चीनी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने रविवार को चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) के हवाले से खबर दी है।</p>
<p>सीएनएसए ने कहा कि 3 मई को चीन के वाहक रॉकेट लॉन्ग मार्च-5 वाई 8 को चांग'ई-6 चंद्र जांच के साथ हैनान द्वीप पर वेनचांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से पृथ्वी-चंद्रमा पारगमन कक्षा में प्रक्षेपित किया गया था। यदि मिशन सफल रहा तो चांग'ई-6 मानव इतिहास में पहली बार चंद्रमा के पिछले हिस्से से मिट्टी पृथ्वी पर लाएगा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/470603/chinas-chang-6-will-land-on-the-lunar-surface-and-collect"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-06/chang&#039;e-6.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीजिंग। </strong>चीन का चांग-6 नाम का चन्द्र जांच लैंडिंग मॉड्यूल मिट्टी इकट्ठा करने के लिए चंद्रमा के पीछे की ओर सफलतापूर्वक उतर गया है। चीनी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने रविवार को चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) के हवाले से खबर दी है।</p>
<p>सीएनएसए ने कहा कि 3 मई को चीन के वाहक रॉकेट लॉन्ग मार्च-5 वाई 8 को चांग'ई-6 चंद्र जांच के साथ हैनान द्वीप पर वेनचांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से पृथ्वी-चंद्रमा पारगमन कक्षा में प्रक्षेपित किया गया था। यदि मिशन सफल रहा तो चांग'ई-6 मानव इतिहास में पहली बार चंद्रमा के पिछले हिस्से से मिट्टी पृथ्वी पर लाएगा। सीएनएसए ने कहा कि लगभग दो किलोग्राम (चार पाउंड) मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर पहुंचाए जाएंगे।</p>
<p>चांग'ई-6 में एक कक्षीय मॉड्यूल एक पुनः प्रवेश वाहन और एक लॉन्च मॉड्यूल शामिल है। यह एक लैंडिंग कैमरा, एक पैनोरमिक कैमरा, एक खनिज वर्णक्रमीय विश्लेषण उपकरण और एक चंद्र मिट्टी संरचना विश्लेषण उपकरण के पेलोड से सुसज्जित है। चंद्र जांच अंतरराष्ट्रीय पेलोड ले जा रही है, जिसमें पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह की सतह पर रेडॉन गैस और उसके क्षय उत्पादों की एकाग्रता को मापने के लिए फ्रांसीसी डिटेक्टर डीओआरएन, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एनआईएलएस नकारात्मक आयन विश्लेषक, इटली के लेजर कॉर्नर रिफ्लेक्टर और पाकिस्तान के आईसीयूबीई-क्यू उपग्रह शामिल हैं। </p>
<p><strong>अंतरिक्ष यात्री को लेकर जाने वाली पहली बोइंग उड़ान अंतिम क्षण में स्थगित </strong><br />फ्लोरिडा (अमेरिका)। अंतरिक्ष यात्री को लेकर जा रही बोइंग की पहली उड़ान का प्रक्षेपण कम्प्यूटर प्रणाली की खामी के कारण आखिरी क्षण में शनिवार को एक बार फिर स्थगित कर दिया गया। कंपनी के स्टारलाइनर कैप्सूल में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो अंतरिक्ष यात्री सवार थे तभी उड़ान से पहले अंतिम मिनटों को नियंत्रित करने वाली कम्प्यूटर प्रणाली ने तीन मिनट 50 सेकंड पर उल्टी गिनती खुद रोक दी। उड़ान भरने में कुछ ही समय शेष रहने के कारण समस्या को ठीक करने का समय नहीं था और अंतत: प्रक्षेपण को स्थगित कर दिया गया।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/470581/more-than-50-people-were-arrested-in-londons-wembley-stadium">लंदन के वेम्बली स्टेडियम में 50 से अधिक लोगों को किया गया गिरफ्तार, जानें पूरा मामला</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 11:24:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO 2040 तक चंद्रमा पर भेजेगा पहला अंतरिक्ष यात्री, जोर-शोर से हो रहा है काम </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>तिरुवनंतपुरम। </strong>चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2040 तक चंद्रमा पर पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की अपनी योजना पर जोर-शोर से काम कर रहा है।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी वर्तमान में देश के पहले मानवयुक्त मिशन गगनयान पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा कि मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के चार पायलट बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में प्रशिक्षण ले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/425665/isro-will-send-the-first-astronaut-to-the-moon-by"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/capture89.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>तिरुवनंतपुरम। </strong>चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2040 तक चंद्रमा पर पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की अपनी योजना पर जोर-शोर से काम कर रहा है।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी वर्तमान में देश के पहले मानवयुक्त मिशन गगनयान पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा कि मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के चार पायलट बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में प्रशिक्षण ले रहे हैं। ‘</p>
<p>मनोरमा ईयरबुक 2024’ के लिए एक विशेष आलेख में सोमनाथ ने लिखा, “इसरो का लक्ष्य गगनयान कार्यक्रम के साथ अंतरिक्ष अन्वेषण में अगला कदम उठाना है, जिसमें 2 से 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को तीन दिन तक कम पृथ्वी की कक्षा (एलईओ) में भेजने की योजना है, जिसके बाद उन्हें भारतीय जलक्षेत्र में पूर्वनिर्धारित जगह पर सुरक्षित रूप से उतारा जाएगा।’’</p>
<p>मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है, जिसमें एक मानव-रेटेड (मानवों को सुरक्षित रूप से परिवहन करने में सक्षम) लॉन्च वाहन (एचएलवीएम 3), एक क्रू मॉड्यूल (सीएम) और सर्विस मॉड्यूल (एसएम), और मानव के रहने के अनुकूल एक ऑर्बिटल मॉड्यूल है।</p>
<p>एकीकृत एयर ड्रॉप टेस्ट, पैड एबॉर्ट टेस्ट और यान की प्रायोगिक उड़ानों के अलावा दो समान गैर-चालक दल मिशन (जी1 और जी2) मानवयुक्त मिशन से पहले होंगे। क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष में चालक दल के लिए पृथ्वी जैसे वातावरण वाला रहने योग्य स्थान है और इसे सुरक्षित पुन: प्रवेश के लिए डिजाइन किया गया है। सुरक्षा उपायों में आपात स्थिति के लिए क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) भी शामिल है।</p>
<p>परीक्षण वाहन (टीवी-डी1) की पहली विकास उड़ान 21 अक्टूबर, 2023 को लॉन्च की गई थी और इसने ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। इसके बाद क्रू मॉड्यूल को अलग किया गया और बंगाल की खाड़ी से भारतीय नौसेना ने इसे सुरक्षित प्राप्त किया। सोमनाथ ने कहा, ‘‘इस परीक्षण उड़ान की सफलता बाद के मानव रहित मिशन और 2025 में लॉन्च होने वाले अंतिम मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए महत्वपूर्ण है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत का पहला सौर अन्वेषण मिशन आदित्य एल1 भी इसरो का एक महत्वपूर्ण मिशन है। यह लैग्रेंज पॉइंट-1 नामक स्थान से सूर्य पर अध्ययन करेगा, जो चंद्र और सौर अनुसंधान दोनों में देश की क्षमता का प्रदर्शन करेगा। सोमनाथ ने कहा कि अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज प्वाइंट-1 (एल-1) की ओर अपने इच्छित पथ पर है, जहां इसे जनवरी 2024 में हेलो कक्षा में स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>चंद्रयान-3 मिशन की सफलता पर, उन्होंने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जिसके चलते प्रधानमंत्री ने 23 अगस्त (चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग) को ‘भारत में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ घोषित किया। कुछ महत्वाकांक्षी आगामी मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी), पुन: इस्तेमाल वाला प्रक्षेपण यान (आरएलवी) कार्यक्रम, एक्स-रे एस्ट्रोनोमी मिशन एक्सपीओएसएटी (एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट), स्पेस डॉकिंग प्रयोग और एलओएक्स- मीथेन इंजन शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘एक साथ, ये परिवर्तनकारी पहल भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक नयी अंतरिक्ष गाथा को परिभाषित करती हैं।’’ उन्होंने कहा कि एसएसएलवी, तीन चरण वाला एक प्रक्षेपण यान है, जो 500 किलोग्राम के उपग्रह को 500 किमी की समतल कक्षा में लॉन्च कर सकता है और कई उपग्रहों को समायोजित कर सकता है।</p>
<p>सोमनाथ ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर भारत की उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ को चालू करने और ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ और मंगल ग्रह लैंडर की विशेषता वाले अंतरग्रहीय अन्वेषण जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आने वाले वर्षों में नयी ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <a href="https://www.amritvichar.com/article/425656/shivraj-singh-chauhan-said-i-would-rather-die-than">बोले शिवराज सिंह चौहान- अपने लिए कुछ मांगने के बजाय पसंद करूंगा मर जाना </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 18:28:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन के शेनझोउ-15 के अंतरिक्ष यात्री छह महीने के मिशन के बाद लौटे सुरक्षित </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जिउक्वान।</strong> चीन के शेनझोउ-15 अंतरिक्ष यान में सवार तीन अंतरिक्ष यात्री अपने छह महीने के अंतरिक्ष स्टेशन मिशन को पूरा करने के बाद रविवार को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए। चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार शेनझोऊ-15 अंतरिक्ष यात्री फी जुनलॉन्ग, डेंग क्विंगमिंग और झांग लू को लेकर सुबह छह बजकर 33 मिनट पर (बीजिंग समय) पर उत्तरी चीन के आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र में डोंगफेंग लैंडिंग साइट पर उतरा। </p>
<p>एजेंसी ने घोषणा की कि सभी अंतरिक्ष यात्री स्वस्थ है और शेनझोउ-15 मानवयुक्त मिशन सफल रहा। अंतरिक्ष यात्रियों को यान के सामने कुर्सियों पर बिठाया गया। अक्टूबर 2005</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/375234/china-s-shenzhou-15-astronauts-return-safely-after-six-month-mission"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-06/इं.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जिउक्वान।</strong> चीन के शेनझोउ-15 अंतरिक्ष यान में सवार तीन अंतरिक्ष यात्री अपने छह महीने के अंतरिक्ष स्टेशन मिशन को पूरा करने के बाद रविवार को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए। चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार शेनझोऊ-15 अंतरिक्ष यात्री फी जुनलॉन्ग, डेंग क्विंगमिंग और झांग लू को लेकर सुबह छह बजकर 33 मिनट पर (बीजिंग समय) पर उत्तरी चीन के आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र में डोंगफेंग लैंडिंग साइट पर उतरा। </p>
<p>एजेंसी ने घोषणा की कि सभी अंतरिक्ष यात्री स्वस्थ है और शेनझोउ-15 मानवयुक्त मिशन सफल रहा। अंतरिक्ष यात्रियों को यान के सामने कुर्सियों पर बिठाया गया। अक्टूबर 2005 में अंतरिक्ष मिशन शेनझोउ-6 में शामिल मिशन कमांडर फी ने कहा, हमने सभी निर्धारित कार्यों को पूरा कर लिया है और मातृभूमि लौटने के बाद अच्छा महसूस कर रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि 25 साल की तैयारी के बाद अंतरिक्ष में उड़ान भरने का मौका मिलने पर वह पूरे देश के लोगों के समर्थन और प्रोत्साहन के लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा, मैं हमेशा सपनों और दृढ़ता की शक्ति में विश्वास करता हूं। चाहे मेरी उम्र कितनी भी हो जाएं। मुझे खुशी है कि देश को मेरी जरूरत है। अंतरिक्ष यात्री झांग ने कहा, मैं बहुत उत्साहित था जब मैं अंतरिक्ष स्टेशन पर था, मैं अक्सर खिड़की से देखता था, और अपनी मातृभूमि और गृहनगर को खोजने की कोशिश करता था। उल्लेखनीय है कि चीन ने 29 नवंबर, 2022 को मानवयुक्त अंतरिक्ष यान शेनझोउ-15 लॉन्च किया था। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/375229/india-is-no-longer-a-country-that-trudged-along-relatively-slowly--s-jaishankar">भारत अब वह देश नहीं रहा, जो अपेक्षाकृत धीमी गति से घिसट-घिसट कर चलता था: एस जयशंकर</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/375234/china-s-shenzhou-15-astronauts-return-safely-after-six-month-mission</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2023 09:41:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Artemis : NASA के Astronauts के लिए यह Last Mission क्यों हो सकता है ?</title>
                                    <description><![CDATA[अपोलो युग और 2020 के मध्य के बीच सबसे अधिक प्रासंगिक अंतर कंप्यूटर शक्ति और रोबोटिक्स में एक अद्भुत सुधार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/316866/artemis-why-this-could-be-the-last-mission-for-nasa-astronauts"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/जहर-खाकर-ssp-दफ्तर-पहुंचा-पति-(1)9.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>(मार्टिन रीस, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय) कैंब्रिज (यूके), 24 नवंबर (द कन्वरसेशन)। </strong> नील आर्मस्ट्रांग ने 1969 में चंद्रमा पर अपना ऐतिहासिक एक छोटा कदम उठाया था। और ठीक तीन साल बाद, अंतिम अपोलो अंतरिक्ष यात्री हमारे आकाशीय पड़ोसी को छोड़ आए। तब से, सैकड़ों अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा गया, लेकिन मुख्य रूप से पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए। </p>
<p>वास्तव में, किसी ने भी पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय नहीं की है। हालाँकि, अमेरिका के आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य इस दशक में मनुष्यों को फिर चंद्रमा पर ले जाना है- आर्टेमिस एक अपनी पहली परीक्षण उड़ान के हिस्से के रूप में पृथ्वी पर वापस आते हुए, चंद्रमा के चारों ओर घूम रहा है। </p>
<p>अपोलो युग और 2020 के मध्य के बीच सबसे अधिक प्रासंगिक अंतर कंप्यूटर शक्ति और रोबोटिक्स में एक अद्भुत सुधार है। इसके अलावा, महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध स्पर्धा के रूप में बड़े पैमाने पर व्यय को उचित नहीं ठहराया जा सकता। हमारी हालिया पुस्तक द एंड ऑफ एस्ट्रोनॉट्स में, डोनाल्ड गोल्डस्मिथ और मैं तर्क देते हैं कि ये परिवर्तन परियोजना को कमजोर करते हैं। </p>
<p>आर्टेमिस मिशन नासा के एकदम नए स्पेस लॉन्च सिस्टम का उपयोग कर रहा है, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है - डिजाइन में सैटर्न वी रॉकेट के समान है जिसने एक दर्जन अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। अपने पूर्ववर्तियों की तरह, आर्टेमिस बूस्टर तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को समुद्र में गिरने से पहले भारी भारोत्तोलन शक्ति बनाने के लिए जोड़ता है। </p>
<p>चूंकि इसे दोबारा कभी उपयोग नहीं किया जाता है इसलिए प्रत्येक लॉन्च की अनुमानित लागत दो अरब डॉलर और चार अरब डॉलर के बीच होती है। यह इसके स्पेसएक्स प्रतिद्वंद्वी स्टारशिप के विपरीत है, जो कंपनी को पहले चरण में इसे फिर से प्राप्त करने और पुन: उपयोग करने में सक्षम बनाता है।<br /><br /></p>
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<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Here's to you, Oppy. 🥂<br /><br />Before you say <a href="https://twitter.com/hashtag/GoodNightOppy?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#GoodNightOppy</a>, learn more about our Opportunity <a href="https://twitter.com/NASAMars?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASAMars</a> rover, and how a planned 90-day mission turned into a 15-year journey of exploration and discovery: <a href="https://t.co/KTf5ECdUrO">https://t.co/KTf5ECdUrO</a> <a href="https://t.co/70f9CjxGrb">pic.twitter.com/70f9CjxGrb</a></p>
— NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/1595505493794906112?ref_src=twsrc%5Etfw">November 23, 2022</a></blockquote>

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</p>
<p><strong>रोबोटिक्स के लाभ</strong><br />मंगल ग्रह पर रोवर्स की गतिविधियों से रोबोटिक अन्वेषण में प्रगति को जाना जा सकता है, जहां परसर्वरेंस, नासा के नवीनतम प्रॉस्पेक्टर, पृथ्वी से केवल सीमित मार्गदर्शन के साथ चट्टानी इलाके में खुद अपना रास्ता ढूंढ सकते हैं। सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सुधार से रोबोट स्वयं विशेष रूप से दिलचस्प साइटों की पहचान करने में सक्षम होंगे, जहां से पृथ्वी पर लौटने के लिए नमूने एकत्र किए जा सकते हैं। अगले एक या दो दशकों के भीतर, मंगल ग्रह की सतह का रोबोटिक अन्वेषण लगभग पूरी तरह से स्वायत्त हो सकता है, जिसमें मानव उपस्थिति थोड़ा लाभ प्रदान करती है। </p>
<p>इसी तरह, इंजीनियरिंग परियोजनाओं- जैसे कि खगोलविदों का चंद्रमा के दूर की ओर एक बड़े रेडियो टेलीस्कोप के निर्माण का सपना, जो पृथ्वी के हस्तक्षेप से मुक्त हो- को अब मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। ऐसी परियोजनाओं का निर्माण पूरी तरह से रोबोट द्वारा किया जा सकता है। </p>
<p>अंतरिक्ष यात्रियों को तो रहने के लिए एक ठीक-ठाक जगह और सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जबकि रोबोट स्थायी रूप से अपने कार्य स्थल पर रह सकते हैं। इसी तरह, यदि दुर्लभ सामग्रियों के लिए चंद्र मिट्टी या क्षुद्रग्रहों का खनन आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो जाता है, तो यह भी रोबोटों के साथ अधिक सस्ते और सुरक्षित रूप से किया जा सकता है।</p>
<p>रोबोट थोड़े अतिरिक्त खर्च के साथ बृहस्पति, शनि और उनके आकर्षक विविध चंद्रमाओं का भी पता लगा सकते हैं, क्योंकि कई वर्षों की यात्रा रोबोट के लिए छह महीने की मंगल यात्रा की तुलना में थोड़ी अधिक चुनौती पेश करती है। इनमें से कुछ चंद्रमा वास्तव में अपने उप-सतही महासागरों में जीवन युक्त हो सकते हैं। अगर हम मनुष्यों को वहां भेजें, तो यह अपने आप में एक बुरा विचार हो सकता है क्योंकि वे उस दुनिया को पृथ्वी के सूक्ष्म जीवों से दूषित कर सकते हैं। <br /><br /><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(45,194,107);"><a style="color:rgb(45,194,107);" href="https://www.amritvichar.com/article/316801/europe-s-space-agency-selected-a-disabled-person-to-send-to-space">जॉन मैकफॉल ने 19 साल की उम्र में खो दिया था दाहिना पैर, अब अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ चयन</a></span><br /><br /></strong><strong>जोखिमों का प्रबंधन<br /></strong>अपोलो अंतरिक्ष यात्री नायक थे। उन्होंने उच्च जोखिम को स्वीकार किया और प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल किया। इसकी तुलना में, आर्टेमिस कार्यक्रम की 90 अरब डॉलर की लागत के बावजूद, 2020 के दशक में चंद्रमा की छोटी यात्राएं लगभग नियमित लगती है। चंद्रमा की यात्रा पर होने वाले विशाल व्यय को देखते हुए, मानव और रोबोट यात्रा के बीच लागत अंतर किसी भी दीर्घकालिक प्रवास के लिए बहुत बड़ा होगा। चंद्रमा की तुलना में सैकड़ों गुना आगे मंगल की यात्रा न केवल अंतरिक्ष यात्रियों को कहीं अधिक जोखिम में डाल देगी, बल्कि आपातकालीन सहायता को भी कम संभव बना देगी। </p>
<p>यहां तक ​​​​कि अंतरिक्ष यात्रा के प्रति अति उत्साही भी स्वीकार करते हैं कि मंगल की पहली चालक दल की यात्रा से पहले लगभग दो दशक बीत सकते हैं। निश्चित रूप से रोमांच चाहने वाले ऐसे साहसी लोग होंगे जो स्वेच्छा से कहीं अधिक जोखिम स्वीकार करेंगे - कुछ ने अतीत में प्रस्तावित एकतरफा यात्रा के लिए भी हामी भरी है। </p>
<p>यह अपोलो युग और आज के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर का संकेत देता है: एक मजबूत, निजी अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी क्षेत्र का उदय। निजी क्षेत्र की कंपनियां अब नासा के साथ प्रतिस्पर्धी हैं, इसलिए उच्च जोखिम वाली, कम कीमत वाली मंगल ग्रह की यात्राएं, अरबपतियों और निजी प्रायोजकों द्वारा वित्तपोषित, इच्छुक स्वयंसेवकों द्वारा तैयार की जा सकती हैं। </p>
<p>अंतत: जनता इस बात से खुश हो सकती है कि इन बहादुर साहसी लोगों की यात्रा का खर्च उसे नहीं उठाना होगा। यह देखते हुए कि निचली कक्षा से परे मानव अंतरिक्ष यान पूरी तरह से उच्च जोखिम को स्वीकार करने के लिए तैयार निजी-वित्त पोषित मिशनों में स्थानांतरित होने की संभावना है, इस बात को लेकर संदेह है कि क्या नासा की बहु-अरब डॉलर की आर्टेमिस परियोजना सरकार के पैसे खर्च करने का एक अच्छा तरीका है। <br /><br /><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/316185/nasa-released-the-picture-of-earth-taken-from-the-moon--have-you-seen-it">चांद से खींची गई पृथ्वी की तस्वीर NASA ने की जारी, आपने देखी क्या?</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/316866/artemis-why-this-could-be-the-last-mission-for-nasa-astronauts</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Nov 2022 14:41:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जॉन मैकफॉल ने 19 साल की उम्र में खो दिया था दाहिना पैर, अब अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ चयन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पेरिस।</strong> यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने एक सड़क हादसे में अपने पैर गंवाने वाले एक व्यक्ति को अंतरिक्ष यात्रियों के अपने नए समूह में शामिल कर इतिहास रच दिया है। जॉन मैकफॉल (41) ने 19 साल की उम्र में अपना दाहिना पैर खो दिया था। उन्होंने कहा कि उनका चयन इतिहास में एक बड़ा पड़ाव साबित होगा। उन्होंने बुधवार को कहा,  ईएसए एक शारीरिक रूप से अक्षम अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने को प्रतिबद्ध है...यह पहली बार है कि किसी अंतरिक्ष एजेंसी ने इस तरह की परियोजना शुरू करने का प्रयास किया और वास्तव में मानवता के नाम एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/316801/europe-s-space-agency-selected-a-disabled-person-to-send-to-space"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/john-mcfall.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पेरिस।</strong> यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने एक सड़क हादसे में अपने पैर गंवाने वाले एक व्यक्ति को अंतरिक्ष यात्रियों के अपने नए समूह में शामिल कर इतिहास रच दिया है। जॉन मैकफॉल (41) ने 19 साल की उम्र में अपना दाहिना पैर खो दिया था। उन्होंने कहा कि उनका चयन इतिहास में एक बड़ा पड़ाव साबित होगा। उन्होंने बुधवार को कहा,  ईएसए एक शारीरिक रूप से अक्षम अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने को प्रतिबद्ध है...यह पहली बार है कि किसी अंतरिक्ष एजेंसी ने इस तरह की परियोजना शुरू करने का प्रयास किया और वास्तव में मानवता के नाम एक बड़ा संदेश दिया है। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Joining the ESA class of 2022 astronauts is John McFall, from the United Kingdom, as an astronaut with a physical disability. <a href="https://twitter.com/hashtag/ESAastro2022?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ESAastro2022</a><br /><br />👉<a href="https://t.co/E0SLagZTjv">https://t.co/E0SLagZTjv</a> <a href="https://t.co/0Yr5W8xv5D">pic.twitter.com/0Yr5W8xv5D</a></p>
— ESA (@esa) <a href="https://twitter.com/esa/status/1595429538816823298?ref_src=twsrc%5Etfw">November 23, 2022</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>मैकफॉल ने कहा,  'मैं खुद को लेकर आश्वस्त हूं। करीब 20 साल पहले मैं अपना पैर खो बैठा था, मुझे पैरालंपिक में जाने का मौका मिला और उससे भावनात्मक रूप से मैं काफी बेहतर हुआ। जीवन में आई हर चुनौती से मुझे आत्मविश्वास और बल मिला। खुद पर भरोसा करने का जज़्बा मिला कि मैं कुछ भी कर सकता हूं...' उन्होंने कहा, 'मैंने कभी अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना नहीं देखा था। जब ईसीए ने घोषणा की कि वह एक पहल के लिए दिव्यांग व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं तभी मेरे मन में इसको लेकर रुचि जागी।'  इस पहल को व्यवहार्य बनाए जाने संबंधी अध्ययन तीन साल तक चलेगा। एक ‘पैरास्ट्रोनॉट’ (दिव्यांग अंतरिक्ष यात्री) के लिए बुनियादी बाधाओं का पता लगाया जाएगा, जिसमें शारीरिक अक्षमता मिशन प्रशिक्षण को कैसे प्रभावित कर सकती है और यदि ‘स्पेससूट’ और विमान में किसी तरह के खास बदलाव की जरूरत है तो इसका भी पता लगाया जाएगा। </p>
<p>ईएसए के मानव एवं रोबोटिक अन्वेषण के निदेशक डेविड पार्कर ने कहा कि अभी 'काफी लंबा सफर तय' करना है। हालांकि इस नई भर्ती को उन्होंने एक महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा बताया। पार्कर ने कहा कि शायद पहली बार 'पैरास्ट्रोनॉट' शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन  'मैं इस शब्द पर अपने हक का कोई दावा नहीं करता।' उन्होंने कहा, 'हम कह रहे हैं कि जॉन मैकफॉल पहले 'पैरास्ट्रोनॉट' हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि मिशन के सफल रहने पर भी मैकफॉल को अंतरिक्ष में जाने में अभी पांच साल तक का समय लग सकता है। पेरिस में एक संवाददाता सम्मेलन में पांच अंतरिक्ष यात्रियों के एक समूह की घोषणा की गई, जिसमें मैकफॉल शामिल हैं। सूची में दो महिलाओं फ्रांस की सोफी एडेनोट और ब्रिटेन की रोज़मेरी कूगन का नाम भी है। </p>
<p>वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी 'नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (नासा) के प्रवक्ता डैन हूओट ने कहा कि  ईसीए के पैरा-एस्ट्रोनॉट के चयन को नासा बड़ी दिलचस्पी से देख रहा है। उन्होंने कहा, हालांकि नासा की चयन प्रक्रिया अब भी वैसी ही है, लेकिन एजेंसी ईएसए जैसे भागीदारों से आने वाले 'नए अंतरिक्ष यात्रियों' के साथ भविष्य में काम करने की उम्मीद कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नासा अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मानती है और किसी भी तरह की चिकित्सकीय स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है। हालांकि हूओट ने कहा कि भविष्य में 'सहायक तकनीक' के जरिए 'ऐसे उम्मीदवारों' की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित किए जाने से स्थिति बदल सकती है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें :  <a href="https://www.amritvichar.com/article/316783/fugitive-nirav-modi-is-afraid-of-coming-to-india--seeks-permission-to-appeal-in-uk-supreme-court-against-extradition-order">भारत आने से डर रहा भगोड़ा नीरव मोदी, प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ UK सुप्रीम कोर्ट में अपील की मांगी अनुमति</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Nov 2022 12:06:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अंतरिक्ष विज्ञानी निकोल मान ने की धरती मां की खूबसूरती की तारीफ</title>
                                    <description><![CDATA[केप केनवरल (अमेरिका)। अंतरिक्ष जाने वाली अमेरिका की पहली मूल जातीय महिला ने बुधवार को कहा कि वह अंतरिक्ष से धरती मां की खूबसूरती और सौम्यता को देखकर आह्लादित हैं जिससे ‘‘सकारात्मक ऊर्जा’’ निकल रही है। अंतरिक्ष में उनका पांच महीने का अभियान अभी जारी है। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की अंतरिक्ष विज्ञानी …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/302553/first-native-american-woman-to-go-to-space-astonished-by-the-beauty-of-mother-earth"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/untitled-3-10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>केप केनवरल (अमेरिका)।</strong> अंतरिक्ष जाने वाली अमेरिका की पहली मूल जातीय महिला ने बुधवार को कहा कि वह अंतरिक्ष से धरती मां की खूबसूरती और सौम्यता को देखकर आह्लादित हैं जिससे ‘‘सकारात्मक ऊर्जा’’ निकल रही है। अंतरिक्ष में उनका पांच महीने का अभियान अभी जारी है।</p>
<p>नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की अंतरिक्ष विज्ञानी निकोल मान ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से कहा कि उन्हें अपने परिवार और जनजातीय समुदाय से ढेर सारी दुआएं और आशीर्वाद मिल रहा है। वह ‘वेलाकी ऑफ द राउंड वैली इंडियन ट्राइब्स इन नॉर्दन कैलिफोर्निया’ की सदस्य हैं। वह 2013 में नासा का हिस्सा बनीं।</p>
<p>मान ने कहा कि सकारात्मक ऊर्जा कितनी महत्वपूर्ण होती है, इसे लेकर वह हमेशा से अपनी मां की सलाह पर अमल करती रहीं हैं, विशेष रूप से प्रक्षेपण के पहले दिन। उन्होंने कहा, ‘‘शायद कुछ लोगों के लिए इसे समझना मुश्किल है क्योंकि इसे केवल महसूस किया जा सकता है। लेकिन यह सकारात्मक ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है और आप उस ऊर्जा को नियंत्रित कर सकते हैं जो आपके दृष्टिकोण को नियंत्रित करने में मदद करती है।’’</p>
<p>45 वर्षीय मान एक मरीन कर्नल और प्रशिक्षित पायलट हैं। वह कैलिफोर्निया के पेटलुमा में पैदा हुई थीं। उन्होंने कहा कि यह जानना महत्वपूर्ण है कि अंतरिक्ष स्टेशन पर सभी प्रकार के लोग हैं। यह वर्तमान में तीन अमेरिकियों, तीन रूसी और एक जापानी अंतरिक्ष यात्री का घर है। अंतरिक्ष में 2002 में जाने वाले पहले मूल-जातीय समुदाय के अमेरिकी नागरिक चिकासॉ नेशन के अंतरिक्ष यात्री जॉन हेरिंगटन (अब सेवानिवृत्त) थे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/hurricanes-fiona-cause-heavy-damage-in-atlantic-canada/">कनाडा में फियोना तूफान से भारी नुकसान, 660 मिलियन कनाडाई डॉलर की बीमाकृत की हुई क्षति</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Oct 2022 14:47:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Yoga in Space: महिला ने अंतरिक्ष में किया &amp;#8216;गरुड़ासन&amp;#8217;, आप भी देखें Video</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्तोफोरेती (Samantha Cristoforetti) ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर शेयर किया है। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और आए दिन स्पेस के शानदार लम्हों को दुनिया के साथ साझा करती है। इस वायरल क्लिप में अंतरिक्ष यात्री को जीरो ग्रेविटी में इलास्टिक बैंड …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>वॉशिंगटन।</strong> इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्तोफोरेती (Samantha Cristoforetti) ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर शेयर किया है। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और आए दिन स्पेस के शानदार लम्हों को दुनिया के साथ साझा करती है। इस वायरल क्लिप में अंतरिक्ष यात्री को जीरो ग्रेविटी में इलास्टिक बैंड के साथ योग की मुद्राए करते देख सकते हैं। वह ‘गरुड़ासन’ करती हुईं नजर आ रही हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Show me how you spin on Earth! <a href="https://twitter.com/hashtag/Spinning?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Spinning</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Physics?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Physics</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/SpaceTok?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#SpaceTok</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/MissionMinerva?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MissionMinerva</a> <a href="https://twitter.com/esa?ref_src=twsrc%5Etfw">@esa</a> <a href="https://twitter.com/esaspaceflight?ref_src=twsrc%5Etfw">@esaspaceflight</a> <a href="https://t.co/z8fiOFCPl3">pic.twitter.com/z8fiOFCPl3</a></p>
<p>— Samantha Cristoforetti (@AstroSamantha) <a href="https://twitter.com/AstroSamantha/status/1545774174903406592?ref_src=twsrc%5Etfw">July 9, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्तोफोरेती ने 27 सितंबर को यह वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि भारहीनता में योग? पूरा किया। यह थोड़ा पेचीदा था, लेकिन कुछ क्रिएटिव आजादी और सही आसान के साथ आप कर सकते हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Yoga in weightlessness? Done!<br />It’s a bit tricky, but with the right poses (thanks <a href="https://twitter.com/CosmicKidsYoga?ref_src=twsrc%5Etfw">@CosmicKidsYoga</a>!) and some creative freedom you can do it. Take a look!  <a href="https://t.co/XXEOcFzg4L">https://t.co/XXEOcFzg4L</a><a href="https://twitter.com/hashtag/MissionMinerva?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MissionMinerva</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/CosmicKids?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#CosmicKids</a> <a href="https://t.co/H2hGPSAWmD">https://t.co/H2hGPSAWmD</a></p>
<p>— Samantha Cristoforetti (@AstroSamantha) <a href="https://twitter.com/AstroSamantha/status/1574800076316221441?ref_src=twsrc%5Etfw">September 27, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">We had a spectacular view of the <a href="https://twitter.com/hashtag/Soyuz?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Soyuz</a> launch! <br />Sergey, Dmitry and Frank will come knocking on our door in just a couple of hours… looking forward to welcoming them to their new home! <a href="https://twitter.com/hashtag/MissionMinerva?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MissionMinerva</a> <a href="https://t.co/b6PP8L6AEl">pic.twitter.com/b6PP8L6AEl</a></p>
<p>— Samantha Cristoforetti (@AstroSamantha) <a href="https://twitter.com/AstroSamantha/status/1572600896038526977?ref_src=twsrc%5Etfw">September 21, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>कुछ रोज पहले अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्तोफोरेती ने यह तस्वीरें साझा की थीं। उन्होंने कैप्शन में बताया था कि सोयुज रॉकेट के लॉन्च का शानदार दृश्य! गौरतलब है कि इस रूसी रॉकेट का लॉन्च बुधवार को कजाकिस्तान से हुआ था, जिससे नासा के 1 और 2 रूसी अंतरिक्षयात्री आईएसएस भेजे गए हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/italian-astronaut-samantha-cristoforetti-share-a-picture-of-earth-taken-at-night-from-the-iss/">क्या आप बता पाएंगे! पृथ्वी की इस फोटो में देखो- कितने देश दिख रहे? : अंतरिक्षयात्री ने पूछा</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/290279/yoga-in-space-woman-samantha-cristoforetti-did-garudasana-in-space-see-video</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 15:33:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे तीन अंतरिक्ष यात्री</title>
                                    <description><![CDATA[केप केनवरल (अमेरिका)। रूसी अतंरिक्षयान के प्रक्षेपण के बाद बुधवार को तीन नए अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे। कजाकिस्तान से प्रक्षेपित अंतरिक्षयान सोयूज निर्दिष्ट कक्षा में पहुंचा और इसके तीन घंटे के बाद वह अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गया। A Russian Soyuz MS-22 spacecraft has docked with the International Space Station (ISS), two Russian …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>केप केनवरल (अमेरिका)।</strong> रूसी अतंरिक्षयान के प्रक्षेपण के बाद बुधवार को तीन नए अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे। कजाकिस्तान से प्रक्षेपित अंतरिक्षयान सोयूज निर्दिष्ट कक्षा में पहुंचा और इसके तीन घंटे के बाद वह अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">A Russian Soyuz MS-22 spacecraft has docked with the International Space Station (ISS), two Russian astronauts and an American astronaut ， 21 sep <a href="https://twitter.com/hashtag/russia?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#russia</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/spacecraft?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#spacecraft</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/space?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#space</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/astronaut?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#astronaut</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/spacestation?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#spacestation</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Rocket?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Rocket</a> <a href="https://t.co/dqk2XSBlOM">pic.twitter.com/dqk2XSBlOM</a></p>
<p>— Hunter.sell.steelcoil (@yfl0814) <a href="https://twitter.com/yfl0814/status/1572856384114544640?ref_src=twsrc%5Etfw">September 22, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>इस अंतरिक्ष यान से अमेरिका के फ्रैंक रूबियो, रूस के सर्गेई प्रोकोपयेव तथा दिमित्री पेतेलिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे हैं और वहां वह छह माह रहेंगे। रूबियो चिकित्सक हैं और मियामी से सेना के पूर्व पैराशूटर हैं और वह दोनों देशों के बीच चालक दल की अदला बदली संबंधी समझौते के तहत अंतरिक्ष पहुंचे हैं। गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पैदा हुए तनाव के बावजूद यह समझौता जुलाई में हुआ था। यह समझौता अंतरिक्ष में रूस और अमेरिका के जारी सहयोग का संकेत देता है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/earthquake-tremors-felt-again-in-mexicos-capital-earth-shook-with-a-magnitude-of-6-8/">मैक्सिको की राजधानी में फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, 6.8 की तीव्रता से हिली धरती</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/286375/three-astronauts-reached-the-international-space-station-by-russian-spacecraft</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Sep 2022 13:57:42 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kalpana Chawla Death Anniversary: छोटे से गांव में जन्‍मी कल्‍पना कैसे पहुंची थी अंतरिक्ष तक, जानें इनके जीवन से जुड़ी बातें.</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। एक फरवरी का दिन दुनिया के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के दिल में एक टीस बनकर बसा है। 2003 में एक फरवरी को अमेरिका का अंतरिक्ष शटल कोलंबिया अपना अंतरिक्ष मिशन समाप्त करने के बाद धरती के वातावरण में वापस लौटने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें सवार सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/167579/space-shuttle-columbia-crashes-kalpana-chawla-dies"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/untitled-20.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> एक फरवरी का दिन दुनिया के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के दिल में एक टीस बनकर बसा है। 2003 में एक फरवरी को अमेरिका का अंतरिक्ष शटल कोलंबिया अपना अंतरिक्ष मिशन समाप्त करने के बाद धरती के वातावरण में वापस लौटने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें सवार सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी। इस हादसे में भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की भी जान चली गई।</p> <p><img class="alignnone wp-image-342959 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-02/untitled-18-1.jpg" alt="" width="750" height="506"></img></p> <p>कोलंबिया में मिशन विशेषज्ञ के तौर पर गईं कल्पना भारत में हरियाणा के करनाल की रहने वाली और वह पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली पहली महिला थीं। करनाल की बेटी कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। उनकी यादें अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले बच्चों को आज भी प्रेरित करती हैं। इसी सोच के साथ नेशनल एयरोनोटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) द्वारा हर साल विशेष शैक्षिक पर्यटन का आयोजन किया जाता है। कल्पना के स्कूल टैगोर बाल निकेतन के मेधावी बच्चों के लिए नासा 1998 से इस दौरे का आयोजन कर रहा है। इस तरह ये बच्चे आने वाले युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को आश्वस्त करते हैं।</p> <p><img class="alignnone wp-image-342962 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-02/untitled-18-2.jpg" alt="" width="650" height="540"></img></p> <p><strong>प्यार से परिवार वाले कहते थे मोंटू</strong><br /> करनाल में बनारसी लाल चावला के घर 17 मार्च 1962 को जन्मीं कल्पना अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। घर में सब उन्हें प्यार से मोंटू कहते थे। शुरुआती पढ़ाई करनाल के टैगोर बाल निकेतन में हुई। जब वह 8वीं क्लास में पहुंचीं तो उन्होंने अपने पिता से इंजीनियर बनने की इच्छा जाहिर की। कल्पना के पिता उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे। परिजनों का कहना है कि बचपन से ही कल्पना की दिलचस्पी अंतरिक्ष और खगोलीय परिवर्तन में थी। वह अक्सर अपने पिता से पूछा करती थीं कि ये अंतरिक्षयान आकाश में कैसे उड़ते हैं? क्या मैं भी उड़ सकती हूं? इस पर उनके पिता उनकी इस बात को हंसकर टाल दिया करते थे।</p> <p><img class="alignnone wp-image-342965" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-02/untitled-19.jpg" alt="" width="695" height="463"></img></p> <p><strong>कब से भरी अपने सपनों की उड़ान </strong><br /> कल्पना अपने सपनों को साकार करने 1982 में अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई के लिए अमेरिका रवाना हुई। फिर साल 1988 में वो नासा अनुसंधान के साथ जुड़ीं। जिसके बाद 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया। उन्होंने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान एस टी एस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की। कल्पना ने अपना पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 को शुरू किया था। जिसकी इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी। अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की इसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज कीं।</p> <p><img src="https://pbs.twimg.com/media/FKfB5BXVQAIj1Om?format=jpg&amp;name=small" alt="Image"></img></p> <p>कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी। ये दूसरी और आखिरी उड़ान 16 जनवरी, 2003 को स्पेस शटल कोलम्बिया से शुरू हुई। यह 16 दिन का अंतरिक्ष मिशन था, जो पूरी तरह से विज्ञान और अनुसंधान पर आधारित था। जब वे कोलंबिया मिशन का हिस्सा बनीं तो उनके अपने शहर करनाल के निवासियों सहित सभी भारतीयों को एक अलग ही गर्व का अनुभव हुआ। लेकिन इसी बीच 1 फरवरी, 2003 का कभी न भूला देने वाला दिन आया, जब कल्पना और मिशन में शामिल 6 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों का यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया और कल्पना अंतरिक्ष में ही रह गईं।</p> <p><img src="https://pbs.twimg.com/media/FKeR31OagAAr3Cz?format=jpg&amp;name=small" alt="Image"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इतिहास</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Feb 2022 17:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूरा हुआ चीनी का सबसे लंबा स्पेस मिशन सफर, 90 दिन बाद पृथ्वी पर लौटे चीनी अंतरिक्ष यात्री</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग। चीन के अब तक के सबसे लंबे मिशन में, देश के अंतरिक्ष स्टेशन पर 90 दिनों तक रहने के बाद चीनी अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को पृथ्वी पर लौट आए। अ्रंतरिक्ष यात्री नी हाइशेंग, लियू बोमिंग और टैंग होंगबो स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे के बाद ‘शेनझोउ-12’ अंतरिक्ष यान के जरिए पृथ्वी पर …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/113765/chinese-astronauts-return-to-earth-after-90-days-aboard-the-countrys-space-station"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-09/untitled-6-5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीजिंग।</strong> चीन के अब तक के सबसे लंबे मिशन में, देश के अंतरिक्ष स्टेशन पर 90 दिनों तक रहने के बाद चीनी अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को पृथ्वी पर लौट आए।</p>
<p>अ्रंतरिक्ष यात्री नी हाइशेंग, लियू बोमिंग और टैंग होंगबो स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे के बाद ‘शेनझोउ-12’ अंतरिक्ष यान के जरिए पृथ्वी पर लौटे। गुरुवार को सुबह वे अंतरिक्ष स्टेशन से रवाना हुए थे। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने गोबी रेगिस्तान में अंतरिक्ष यान को उतरते हुए दिखाया।</p>
<p>केवल मुख्य प्रौद्योगिकी में असली रूप से महारत हासिल करने से चीन दूसरे देशों पर निर्भरता से मुक्त हो सकेगा। अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना चीन की एयरोस्पेस तकनीक दुनिया में सबसे आगे स्थल में आने का प्रतीक है। चीन पूरे दुनिया को अपनी क्षमता साबित कर रहा है। साथ ही चीन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ाने की इच्छा की पुष्टि की। भविष्य में चीन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ अंतरिक्ष सहयोग का एक नया युग आरंभ करेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Sep 2021 14:31:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय-अमेरिकी राजा चारी सहित तीन अंतरिक्ष यात्री &amp;#8216;स्पेसएक्स-क्रू&amp;#8217; अभियान के लिए चयनित</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी वायुसेना के भारतीय-अमेरिकी कर्नल राजा चारी को नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजे जाने वाले ‘स्पेसएक्स क्रू-3’ अभियान का कमांडर चुना गया है। चारी के परिवार का ताल्लुक हैदराबाद से रहा है। इस अभियान में चारी (43) कमांडर के तौर पर सेवा देंगे, जबकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/56225/three-astronauts-including-indian-american-king-chari-selected-for-spacex-crew-mission"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2020-12/राजाचारी.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी वायुसेना के भारतीय-अमेरिकी कर्नल राजा चारी को नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजे जाने वाले ‘स्पेसएक्स क्रू-3’ अभियान का कमांडर चुना गया है। चारी के परिवार का ताल्लुक हैदराबाद से रहा है। इस अभियान में चारी (43) कमांडर के तौर पर सेवा देंगे, जबकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के टॉम मार्शबर्न पायलट होंगे और ईएसए के मैथियस मॉरर आईएसएस भेजे जाने वाले ‘स्पेसएक्स क्रू-3’ मिशन के लिए अभियान विशेषज्ञ के तौर पर सेवा देंगे। ‘स्पेसएक्स क्रू-3’ को अगले साल प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है।</p>
<p>नासा के एक बयान में सोमवार को कहा गया कि चालक दल (क्रू) के चौथे सदस्य को बाद में शामिल किया जाएगा। नासा और इसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद ऐसा किया जाएगा। चारी ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा, ”अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की तैयारियों के लिए अंतरिक्ष यात्री मैथियस और मार्शबर्न के साथ प्रशिक्षण लेने को लेकर उत्साहित हूं तथा गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।” नासा ने कहा कि चारी के लिए यह पहली अंतरिक्ष उड़ान होगी, जो 2017 में नासा के अंतरिक्ष यात्री बने हैं। उनका जन्म मिलवाकी में हुआ था लेकिन वह आयोवा के सेडार फाल्स को अपना गृह नगर मानते हैं।</p>
<p>नासा ने बयान में कहा है कि वह अमेरिकी वायुसेना में कर्नल हैं और परीक्षण पायलट के व्यापक अनुभव के साथ अभियान में शामिल हुए हैं। उन्होंने अपने करियर में 2,500 से अधिक घंटे तक उड़ान भरी है। चारी को इस महीने की शुरूआत में ‘आर्टेमिस टीम’ का सदस्य चुना गया था और वह अब भविष्य के एक चंद्र अभियान पर जाने के लिए योग्य हैं। चारी के पिता श्रीनिवास चारी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए युवावस्था में हैदराबाद से अमेरिका आए थे। चारी, मार्शबर्न और मॉरर जब ऑर्बिटिंग लैबोरैट्री में पहुंचेंगे, तब वे अगले छह महीने के पड़ाव के लिए अभियान क्रू सदस्य बन जाएंगे।</p>
<p>नासा के मुताबिक क्रू-1 के अंतरिक्षयात्री अभी आईएसएस में हैं और क्रू-2 के अंतरिक्षयात्रियों के भी जल्द ही अभियान पर रवाना होने की उम्मीद है। इससे आईएसएस में अंतरिक्षयात्रियों की संख्या बढ़ जाएगी और वहां के अनूठे वातावरण में विज्ञान प्रयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्पेसएक्स के मानव अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली का चक्रीय आधार यह तीसरा चालक दल (क्रू) अभियान है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य अमेरिकी एयरोस्पेस उद्योग के साथ साझेदारी के तहत आईएसएस तक अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती तरीके से पहुंचाना है। नासा का स्पेसएक्स के साथ कुल छह क्रू मिशन के लिए अनुबंध है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Dec 2020 16:44:09 +0530</pubDate>
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                <title>दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला पर रखा गया आईएसएस बाउंड स्पेसक्राफ्ट का नाम</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी एयरोस्पेस और रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी नॉथ्रेप ग्रुमैन ने दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर एक स्पेसक्राफ्ट का नाम रखा है। कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं। स्पेसक्राफ्ट का नाम एस.एस. कल्पना चावला रखा जाएगा, यह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) तक कार्गो ले जाएगा। कंपनी ने …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/39793/iss-bound-spacecraft-named-after-late-astronaut-kalpana-chawla"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2020-09/kalpna-chawla.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी एयरोस्पेस और रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी नॉथ्रेप ग्रुमैन ने दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर एक स्पेसक्राफ्ट का नाम रखा है। कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं। स्पेसक्राफ्ट का नाम एस.एस. कल्पना चावला रखा जाएगा, यह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) तक कार्गो ले जाएगा।</p>
<p>कंपनी ने कहा, “पूर्व अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर एनजी -14 सिग्नस स्पेसक्राफ्ट का नाम रखने को लेकर नॉथ्र्राॅप ग्रुमैन को गर्व है।” सिग्नस स्पेसक्राफ्ट ‘एस.एस. कल्पना चावला’ को ले जाने वाले एंटेरास रॉकेट का प्रक्षेपण 29 सितंबर को वर्जीनिया के वॉलॉप्स द्वीप से होने वाला है।</p>
<p>नॉथ्र्राॅप ग्रुमैन ने कहा कि यह कंपनी की परंपरा रही है कि प्रत्येक सिग्नस का नाम एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर रखा जाए, जिसने मानव अंतरिक्ष यान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। कल्पना चावला का जन्म 1 जुलाई, 1961 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। वह पहली बार 1997 में अंतरिक्ष में गई थी और राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली दूसरी भारतीय सदस्य बनीं।</p>
<p>उन्होंने 1982 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की और 1984 में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस-आलिर्ंगटन से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। उन्हें 1988 में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी से सम्मानित किया गया।</p>
<p>नासा के अनुसार, चावला ने एसटीएस-87 (1997) और एसटीएस-107 (2003) में उड़ान भरी थी और 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट में अंतरिक्ष में प्रवेश किया था। साल 2003 में कोलंबिया अंतरिक्ष यान आपदा में उनकी मृत्यु हो गई। पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश के दौरान टेक्सस में शटल विध्वंस हो गया था। यह हादसा निर्धारित लैंडिंग से मात्र 16 मिनट पहले हुआ था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2020 17:05:13 +0530</pubDate>
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