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                <title>lok sabha session - Amrit Vichar</title>
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                <title> भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि... लोकसभा में बोले पीएम मोदी- पश्चिम एशिया के कारण उपजे संकट का मिलकर करना है मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट को गम्भीर चिंता का विषय बताते हुए सोमवार को कहा कि कच्चे तेल एवं गैस की जरुरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है इसलिए भारत पर इसका असर स्वभाविक है लेकिन इस चुनौती का मिलकर और एकजुटता के साथ मुक़ाबला करने की जरूरत है। </p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर वक्तव्य देते हुए कहा कि इस संकट के कारण भारत की चिंताएं स्वाभाविक है लेकिन भारत को एकजुट रहकर चुनौतियों का मुकाबला करना आता है। कोरोना संकट के समय की इसी तरह की चुनौती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576152/pm-modi-addresses-lok-sabha-on-the-middle-east-crisis--says--%22india-faces-unprecedented-challenges---%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/59.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट को गम्भीर चिंता का विषय बताते हुए सोमवार को कहा कि कच्चे तेल एवं गैस की जरुरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है इसलिए भारत पर इसका असर स्वभाविक है लेकिन इस चुनौती का मिलकर और एकजुटता के साथ मुक़ाबला करने की जरूरत है। </p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर वक्तव्य देते हुए कहा कि इस संकट के कारण भारत की चिंताएं स्वाभाविक है लेकिन भारत को एकजुट रहकर चुनौतियों का मुकाबला करना आता है। कोरोना संकट के समय की इसी तरह की चुनौती का हमने एकजुट रहकर सामना किया था और अब इस चुनौती का मुकाबला भी उसी तरह एकजुटता से करना होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिमी एशिया के देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा, "इन देशों में हमारे मिशन भारतीयों की मदद में जुटे हैं। प्रभावित देशों में हमारे मिशन लगातार भारतीयों की मदद में लगे हुए हैं। चाहे वहां काम करने वाले भारतीय हों या वहां गए पर्यटक, सभी को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। भारतीय मिशन नियमित रूप से इसको लेकर सलाह जारी कर रहे हैं। भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24/7 सहायता कक्ष और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं। इनके माध्यम से सभी प्रभावित लोगों को नवीनतम जानकारी दी जा रही है।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा "संकट के समय में भारत और विदेश में भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस युद्ध की शुरुआत से ही प्रभावित देशों में रहने वाले प्रत्येक भारतीय को सहायता प्रदान की गई है। मैंने पश्चिम एशियाई देशों के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। यह दुखद स्थिति है कि संघर्ष के दौरान कुछ लोगों ने अपनी जान गंवाई है और कुछ घायल हुए हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने युद्धग्रस्त और संघर्ष से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध का ज़िक्र करते हुए कहा, "जिस क्षेत्र में संघर्ष चल रहा है, वह विश्व के अन्य देशों के साथ हमारे व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी है। यह क्षेत्र विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरुरतों के लिए हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा यह क्षेत्र हमारे लिए इस कारण से भी महत्वपूर्ण है कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय काम करते हैं। वहां वाणिज्यिक जहाज चलते हैं। भारतीय चालक दल के सदस्यों की संख्या भी बहुत अधिक है। इन विभिन्न कारणों से, भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। इन सब स्थितियों को देखते हुए आवश्यक है कि संसद से इस संकट को लेकर हमारी एक आवाज और आम सहमति दुनिया तक पहुंचे।" </p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने कहा कि उनकी सरकार पश्चिम एशिया की चिंताजनक स्थिति को लेकर लगातार संसद को अवगत करा रही है। उनका कहना था कि पिछले दो-तीन हफ्तों में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सदन को स्थिति का विस्तृत विवरण दिया है। यह संघर्ष तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और इसीलिए दुनिया इस संघर्ष के शीघ्र समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">संकट की स्थिति में भारतीय कूटनीति पर उन्होंने कहा "वर्तमान वैश्विक माहौल में भारत की भूमिका स्पष्ट है। शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मैंने पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात की है। मैंने सभी से तनाव कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने का आग्रह किया है। भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन अवसंरचना पर हमलों की निंदा की है। वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को अवरुद्ध करना अस्वीकार्य है। </p>
<p style="text-align:justify;">भारत इस युद्ध जैसे माहौल में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रहा है। भारत ने हमेशा मानवता के कल्याण और शांति का समर्थन किया है। मैं दोहराता हूं कि इस समस्या का एकमात्र समाधान संवाद और कूटनीति है। हमारे सभी प्रयास तनाव कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इस युद्ध में किसी के भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हित में नहीं है इसलिए हमारा प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है। जब ऐसे संकट उत्पन्न होते हैं, तो कुछ तत्व उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, इसलिए, सभी कानून और व्यवस्था एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या रणनीतिक प्रतिष्ठान हों, सबकी सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।" </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने वैकल्पिक ऊर्जा बढाने के लिए भारत के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में, देश ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को लगभग 03 गीगावाट से बढ़ाकर 140 गीगावाट कर दिया है। पिछले एक वर्ष में, देश भर में लगभग 40 लाख रूफटॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री सूर्यगढ़ मुफ्त बिजली योजना ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">गोवर्धन योजना के तहत, देश में 200 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र भी चालू हो गए हैं। ये सभी प्रयास देश के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहे हैं। सरकार ने शांति अधिनियम के माध्यम से देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करके भविष्य की तैयारियों को और मजबूत किया है। हाल ही में, लघु जलविद्युत विकास योजना को भी मंजूरी दी गई है, जिससे अगले पांच वर्षों में 1500 मेगावाट की नई जलविद्युत क्षमता जुड़ेगी। श्री मोदी ने एथेनॉल का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत कर दी है जिसका लाभ देश को बड़े स्तर पर मिल रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के बावजूद सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति पर गंभीर असर न पड़े, इसके लिए प्रयास किए हैं। देश अपनी एलपीजी की 60 प्रतिशत आवश्यकता आयात करता है। आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण सरकार ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही एलपीजी का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। देश भर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहे, इसके लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 14:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लोकसभा की मंजूरी: 71 पुराने कानूनों की विदाई, विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> अप्रचलित और पुराने हो चुके 71 कानूनों को समाप्त करने या संशोधित करने के प्रावधान वाले ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ को लोकसभा ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को लेकर कुछ विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह विधेयक जल्दबाजी में नहीं, सोच-विचार करके लाया गया है और विकसित भारत की दिशा में बढ़ता कदम है।’’ उन्होंने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार कानून बनाए जा रहे हैं, अनावश्यक कानूनों को निरस्त किया जा रहा है तथा कुछ कानूनों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563757/lok-sabhas-approval-farewell-to-71-old-laws-a-big"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(55)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> अप्रचलित और पुराने हो चुके 71 कानूनों को समाप्त करने या संशोधित करने के प्रावधान वाले ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ को लोकसभा ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को लेकर कुछ विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह विधेयक जल्दबाजी में नहीं, सोच-विचार करके लाया गया है और विकसित भारत की दिशा में बढ़ता कदम है।’’ उन्होंने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार कानून बनाए जा रहे हैं, अनावश्यक कानूनों को निरस्त किया जा रहा है तथा कुछ कानूनों में आवश्यकतानुसार संशोधन किया जा रहा है। मेघवाल ने कहा कि उक्त विधेयक गुलामी के अंशों से मुक्ति पाने, विकसित भारत, विरासत पर गर्व करने, एकजुट रहने और कर्तव्य भाव को बढ़ाने के प्रधानमंत्री मोदी के ‘पंच प्रण’ के तहत लाया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमारे शासनकाल में अगर हमें लगेगा कि हमें लोगों को व्यापार सुगमता के लिए प्रोत्साहित करना है, लोगों को समान अधिकार देने हैं, नागरिकों को सुविधा देनी है तो निश्चित रूप से मोदी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी।’’ मेघवाल के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से छह अधिनियमों को निरस्त किया जाएगा और 65 में संशोधन किया जाएगा। कानून मंत्री ने कहा कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने कहा कि कानूनों को क्यों समाप्त किया जा रहा है और क्या सरकार जल्दबाजी में कानून लेकर आती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस सांसदों से पूछना चाहता हूं कि संप्रग-एक और दो सरकारों में 2004 से 2014 के बीच या तो वे काम करना भूल गए या किसी और काम में लग गए, इसलिए इन्होंने एक भी कानून को निरस्त नहीं किया। इससे पहले तो कानून निरस्त होते रहे। यह भी एक विधायी कामकाज है।’’</p>
<p>मेघवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने सुधारों की प्रक्रिया में मई 2014 से अब तक 1,577 अप्रचलित कानूनों को निरस्त किया है, जिनमें 1,562 पूरी तरह समाप्त किये जा चुके हैं और 15 को संशोधित करके लागू किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में किये जा रहे एक संशोधन पर कांग्रेस के एक सांसद की आपत्ति का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इस अधिनियम में अनजाने में हुई गलती से ‘प्रिबेंशन’ (रोकथाम) शब्द हो गया, उसकी जगह हम ‘प्रेपरेशन’ (तैयारी करना) शब्द ला रहे हैं। सामान्य सा विधेयक है और हम केवल सुधार कर रहे हैं। इसमें किसी को क्या आपत्ति हो सकती है।’’ मेघवाल ने भारतीय उत्तराधिकार कानून, 1925 में संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें प्रावधान है कि कलकत्ता, मद्रास और बंबई के न्याय क्षेत्राधिकार की कोई वसीयत होगी तो उसमें हिंदू, सिख, जैन, बौध और पारसी समुदाय के लोगों को प्रशासन पत्र (प्रोबेट) लेना होगा, और मुस्लिम करेगा तो नहीं लेना होगा।</p>
<p>कानून मंत्री ने कहा, ‘‘यह भेदभावपूर्ण प्रावधान था जिसे हम हटा रहे हैं। संविधान कहता है कि जाति, धर्म के आधार पर भेद नहीं करेंगे। कोई भेदभावपूर्ण प्रवधान है तो नरेन्द्र मोदी जी के शासन में किताबों (कानून की) में नहीं रह सकता।’’ इससे पहले विधेयक को चर्चा और पारित किए जाने के मेघवाल ने कहा कि सरकार से समाज हित में कानून बनाने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन एक समय आता है जब ऐसा लगता है कि उस कानून की उपयोगिता नहीं है या वह अपनी प्रासंगिकता खो चुका है तो ऐसे कानूनों का निरसन किया जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 17:06:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा: पाकिस्तान घुटनों पर था, तो युद्धविराम की जरूरत ही क्या थी... दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार को घेरा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि फौज ने तो अपना काम किया लेकिन देश में बैठे शासक ने अपना काम किया कि नहीं यह है चर्चा का विषय है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के समय विपक्ष ने पूरा समर्थन दिया। सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई लेकिन उसमें प्रधानमंत्री शामिल नहीं हुए।</p>
<h5><strong>आपरेशन सिंदूर में हमारी फौज ने अपना लोहा मनवाया</strong></h5>
<p>आपरेशन सिंदूर में हमारी फौज ने अपना लोहा मनवाया और जब दुनिया मानने लगी कि भारत की फौज का अपर हैंड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547939/discussion-on--operation-sindoor--in-lok-sabha--if-pakistan-was-on-its-knees--then-what-was-the-need-for-a-ceasefire----deepender-hooda-government-cornered"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/cats552.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि फौज ने तो अपना काम किया लेकिन देश में बैठे शासक ने अपना काम किया कि नहीं यह है चर्चा का विषय है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के समय विपक्ष ने पूरा समर्थन दिया। सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई लेकिन उसमें प्रधानमंत्री शामिल नहीं हुए।</p>
<h5><strong>आपरेशन सिंदूर में हमारी फौज ने अपना लोहा मनवाया</strong></h5>
<p>आपरेशन सिंदूर में हमारी फौज ने अपना लोहा मनवाया और जब दुनिया मानने लगी कि भारत की फौज का अपर हैंड है लेकिन एकाएक युद्धविराम कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अगर घुटनों पर था तो युद्धविराम की क्या जरूरत थी। अफसोस की बात है कि युद्धविराम की घोषणा अमेरिकी की तरफ से किया गया था। अमेरिका का बार बार कहना कि उन्होंने युद्धविराम कराया और यह व्यापार के दवाब में कराया गया आश्चर्य में डालने वाला है। </p>
<h5><strong>दुनिया के एक देश ने पाकिस्तान की निंदा नहीं की</strong></h5>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि आपने स्वीकार किया कि हम सिर्फ आतंकवादियों को निशाना बनाया जबकि पाकिस्तान की सेना और आतंकवादी एक है। सरकार की यह रणनीतिक भूल हुई। पाकिस्तान के साथ टकराव के दौरान दुनिया के कितने देशों ने हमारा साथ दिया यह सरकार को बताना चाहिए। वहीं पाकिस्तान का कुछ देशों ने खुलकर साथ दिया। विदेश नीति के स्तर पर सरकार विफल रही। पाकिस्तान के साथ हमारा टकराव चल रहा था और दूसरी तरह उसे आईएमएफ से लोन दिया गया और हमारी सरकार कुछ नहीं कर पाई है, यह हमारी विदेश नीति की विफलता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान को एक बराबर तौल दिया यह भी विदेश नीति की एक और विफलता है। एक आतंकवाद का पोषण करने वाला देश हमारे बराबर कैसे हो सकता है।  </p>
<h5><strong>पाकिस्तान ने पर्यटकों को निशाना बनाया, लेकिन हमने आतंकवादियों को मारा- बैजयंत पांडा</strong></h5>
<p>लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बैजयंत पांडा ने कहा कि पाकिस्तान का आतंकवाद के साथ लंबा इतिहास रहा है। भारत ने हर बार शांति का हाथ बढ़ाया लेकिन पाकिस्तान ने हर बार आतंकवाद का रास्ता अपनाया। पाकिस्तान लगातार आतंकवादियों को पनाह देता रहा। </p>
<p>उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने पर्यटकों को निशाना बनाया जबकि हमने आतंकवादियों को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में हमारा मकसद नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं था हमने सिर्फ आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया है।” उन्होंने कहा कि आपरेशन सिंदूर का पूरा श्रेय सेना को जाता है जिसने इतनी सफलता से अपने लक्ष्य को पूरा किया और मात्र 22 मिनट में आपरेशन पूरा किया। इस अभियान में पूरा देश सेना के साथ खड़ी रही।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब रक्षा के क्षेत्र में घरेलू उत्पादों में मेड इन इंडिया की सभी प्रशंसा कर रहे हैं लेकिन विपक्ष को यह कामयाबी नहीं दिखाई देती है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों ने पहलगाम आतंकवादी घटना की निंदा की है। ब्रिक्स समेत कई संगठनों ने पहलगाम हमले की निंदा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 19:42:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>TMC MP Abhishek Banerjee को चुभी Loksabha Speaker Om Birla की ये बात। सदन में नहीं चलेगा पक्षपात !</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/482696/tmc-mp-abhishek-banerjee-was-hurt-by-this-statement-of"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/tmc.webp" alt=""></a><br /><div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/9jYJJOOFZhk" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 27 Jul 2024 19:14:57 +0530</pubDate>
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                <title>Sansad में फायर हुए AAP MP Sanjay Singh | Nirav Modi के गले में टांगो Nameplate | Parliament Debate</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/482637/hang-nameplate-around-the-neck-of-aap-mp-sanjay-singh"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/sanjay-singh.jpg" alt=""></a><br /><div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/Rhi4j5sRYMg" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 27 Jul 2024 16:21:12 +0530</pubDate>
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                <title>संसद सत्र 24 जून से शुरू हो कर तीन जुलाई तक चलेगा: किरेन रिजिजू</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को कहा कि 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा जिसमें नवनिर्वाचित संसद सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी। सत्र के पहले तीन दिन में नवनिर्वाचित सदस्य शपथ लेंगे तथा सदन के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। सत्र तीन जुलाई को संपन्न होगा।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 जून को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी और अगले पांच वर्ष के लिए नई सरकार के कामकाज की रूपरेखा पेश करेंगी। रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/472893/kiren-rijiju-parliament-session-will-start-from-june-24-and"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-06/demo-image-v---2024-06-12t104733.267.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को कहा कि 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा जिसमें नवनिर्वाचित संसद सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी। सत्र के पहले तीन दिन में नवनिर्वाचित सदस्य शपथ लेंगे तथा सदन के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। सत्र तीन जुलाई को संपन्न होगा।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 जून को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी और अगले पांच वर्ष के लिए नई सरकार के कामकाज की रूपरेखा पेश करेंगी। रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून 2024 से तीन जुलाई 2024 तक नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ, अध्यक्ष के चुनाव, राष्ट्रपति के अभिभाषण और उस पर चर्चा के लिए बुलाया जा रहा है।’’ </p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्यसभा का 264वां सत्र 27 जून को शुरू होगा और तीन जुलाई को संपन्न होगा। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी 27 जून को राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद संसद में अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों का परिचय देंगे। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आक्रामक विपक्ष द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की जा सकती है। प्रधानमंत्री संसद के दोनों सदनों में, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देंगे। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-<span style="color:rgb(186,55,42);"><a class="post-title-lg" style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/472882/chandrababu-will-take-oath-as-the-chief-minister-of-andhra">चंद्रबाबू नायडू आज चौथी बार लेंगे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ, प्रधानमंत्री मोदी भी रहेंगे मौजूद</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jun 2024 10:47:44 +0530</pubDate>
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