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                <title>चंद्रमा - Amrit Vichar</title>
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                <description>चंद्रमा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हल्द्वानी: अक्षय तृतीया: चंद्रमा उच्च राशि वृषभ, सूर्य मेष व शनि कुंभ में रहकर देंगे फल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> चिरंजीवी तिथि अक्षय तृतीया का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। इस तिथि में मांगलिक कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म और त्रेता, कल्पादि युगादि की शुरुआत हुई थी। साथ ही इसे धनतेरस के रूप में मनाये जाने की परंपरा भी है।</p>
<p>शुक्रवार को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि वैदिक पंचाग के अनुसार बैसाख शुक्ल पक्ष की तृतीया ही अक्षय तृतीया कहलाती है। तृतीया तिथि  10 मई शुक्रवार की प्रातः 4:57 बजे से शुरू होगी जो 11 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/464329/haldwani-akshaya-tritiya-moon-will-be-in-exalted-sign-taurus"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-05/akshaya-tritiya-2024-1715062144872.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> चिरंजीवी तिथि अक्षय तृतीया का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। इस तिथि में मांगलिक कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म और त्रेता, कल्पादि युगादि की शुरुआत हुई थी। साथ ही इसे धनतेरस के रूप में मनाये जाने की परंपरा भी है।</p>
<p>शुक्रवार को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि वैदिक पंचाग के अनुसार बैसाख शुक्ल पक्ष की तृतीया ही अक्षय तृतीया कहलाती है। तृतीया तिथि  10 मई शुक्रवार की प्रातः 4:57 बजे से शुरू होगी जो 11 मई की रात्रि 2: 50 बजे तक विद्यमान रहेगी। इस दिन प्रातः काल 10:45 बजे तक रोहिणी नक्षत्र और इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।</p>
<p>बताया कि  चन्द्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, सूर्य मेष राशि में और शनिदेव कुंभ राशि में रहते हुए फल प्रदान करेंगे। इन सभी संयोगों के अतिरिक्त सुकर्मा, गजकेसरी और शश योग बन रहे हैं। ताराप्रसाद दिव्य पंचागम् के रचनाकार व ज्योतिषाचार्य डॉ. रमेशचंद्र जोशी ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन वैवाहिक  कार्यक्रम के लिये ग्रह, नक्षत्र, नाड़ी आदि का दोष नहीं माना जाता है।</p>
<p>बताया कि इस तिथि को अबूझ मुहूर्त मानकर विवाह भी किये जाते हैं। इस दिन सोना-चांदी खरीदने के साथ ही पीतल के बर्तन, चने की दाल, जौ, मिट्टी का घड़ा और सेंधा नमक आदि खरीदना शुभ माना जाता है।  मत्स्य  पुराण के अनुसार लक्ष्मी पूजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, गन्ना, हाथ के पंखे, घड़ा, दही, सत्तू, खरबूजा, पानी आदि का दान करना अत्यंत लाभदायक रहता है।  </p>
<p><span style="color:rgb(248,6,6);"><strong>शुभ मूहुर्त</strong></span><br />प्रातःकाल 5:48 बजे दोपहर 12:24 बजे तक पूजा का मूहुर्त रहेगा। अभिजीति मुहूर्त में पूजा करना चाहें तो प्रातः 11:50 बजे से 12:44 बजे तक कर सकते हैं। दोनों शुभ नक्षत्रों में खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है।  साथ ही चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, सूर्य मेष राशि में और  शनिदेव कुंभ राशि में रहते हुये फल प्रदान करेंगे। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी का पूजन श्रद्धा पूर्वक करने से उत्तम फल मिलता है। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के पूजन का विधान है ।  </p>
<p><span style="color:rgb(248,6,6);"><strong>पूजा विधि</strong></span><br /> प्रातः काल घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र पहनकर अपने मंदिर की सफाई  करें और एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गंगा जल से पवित्र करें। इसके बाद भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी के चित्र या मूर्ति का शुद्धोपचार कर  इसके समक्ष घी का दीपक और धूप बत्ती जलाएं। भगवान गणेश का ध्यान करते हुये भगवान विष्णु, महालक्ष्मी को रोली, कुमकुम, फूल, नैवेद्य, मेवा, पान, सुपारी और  फल अर्पित करें और पूजन कर आरती करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 20:06:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO 2040 तक चंद्रमा पर भेजेगा पहला अंतरिक्ष यात्री, जोर-शोर से हो रहा है काम </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>तिरुवनंतपुरम। </strong>चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2040 तक चंद्रमा पर पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की अपनी योजना पर जोर-शोर से काम कर रहा है।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी वर्तमान में देश के पहले मानवयुक्त मिशन गगनयान पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा कि मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के चार पायलट बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में प्रशिक्षण ले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/425665/isro-will-send-the-first-astronaut-to-the-moon-by"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/capture89.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>तिरुवनंतपुरम। </strong>चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2040 तक चंद्रमा पर पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की अपनी योजना पर जोर-शोर से काम कर रहा है।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी वर्तमान में देश के पहले मानवयुक्त मिशन गगनयान पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा कि मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के चार पायलट बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में प्रशिक्षण ले रहे हैं। ‘</p>
<p>मनोरमा ईयरबुक 2024’ के लिए एक विशेष आलेख में सोमनाथ ने लिखा, “इसरो का लक्ष्य गगनयान कार्यक्रम के साथ अंतरिक्ष अन्वेषण में अगला कदम उठाना है, जिसमें 2 से 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को तीन दिन तक कम पृथ्वी की कक्षा (एलईओ) में भेजने की योजना है, जिसके बाद उन्हें भारतीय जलक्षेत्र में पूर्वनिर्धारित जगह पर सुरक्षित रूप से उतारा जाएगा।’’</p>
<p>मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है, जिसमें एक मानव-रेटेड (मानवों को सुरक्षित रूप से परिवहन करने में सक्षम) लॉन्च वाहन (एचएलवीएम 3), एक क्रू मॉड्यूल (सीएम) और सर्विस मॉड्यूल (एसएम), और मानव के रहने के अनुकूल एक ऑर्बिटल मॉड्यूल है।</p>
<p>एकीकृत एयर ड्रॉप टेस्ट, पैड एबॉर्ट टेस्ट और यान की प्रायोगिक उड़ानों के अलावा दो समान गैर-चालक दल मिशन (जी1 और जी2) मानवयुक्त मिशन से पहले होंगे। क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष में चालक दल के लिए पृथ्वी जैसे वातावरण वाला रहने योग्य स्थान है और इसे सुरक्षित पुन: प्रवेश के लिए डिजाइन किया गया है। सुरक्षा उपायों में आपात स्थिति के लिए क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) भी शामिल है।</p>
<p>परीक्षण वाहन (टीवी-डी1) की पहली विकास उड़ान 21 अक्टूबर, 2023 को लॉन्च की गई थी और इसने ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। इसके बाद क्रू मॉड्यूल को अलग किया गया और बंगाल की खाड़ी से भारतीय नौसेना ने इसे सुरक्षित प्राप्त किया। सोमनाथ ने कहा, ‘‘इस परीक्षण उड़ान की सफलता बाद के मानव रहित मिशन और 2025 में लॉन्च होने वाले अंतिम मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए महत्वपूर्ण है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत का पहला सौर अन्वेषण मिशन आदित्य एल1 भी इसरो का एक महत्वपूर्ण मिशन है। यह लैग्रेंज पॉइंट-1 नामक स्थान से सूर्य पर अध्ययन करेगा, जो चंद्र और सौर अनुसंधान दोनों में देश की क्षमता का प्रदर्शन करेगा। सोमनाथ ने कहा कि अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज प्वाइंट-1 (एल-1) की ओर अपने इच्छित पथ पर है, जहां इसे जनवरी 2024 में हेलो कक्षा में स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>चंद्रयान-3 मिशन की सफलता पर, उन्होंने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जिसके चलते प्रधानमंत्री ने 23 अगस्त (चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग) को ‘भारत में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ घोषित किया। कुछ महत्वाकांक्षी आगामी मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी), पुन: इस्तेमाल वाला प्रक्षेपण यान (आरएलवी) कार्यक्रम, एक्स-रे एस्ट्रोनोमी मिशन एक्सपीओएसएटी (एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट), स्पेस डॉकिंग प्रयोग और एलओएक्स- मीथेन इंजन शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘एक साथ, ये परिवर्तनकारी पहल भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक नयी अंतरिक्ष गाथा को परिभाषित करती हैं।’’ उन्होंने कहा कि एसएसएलवी, तीन चरण वाला एक प्रक्षेपण यान है, जो 500 किलोग्राम के उपग्रह को 500 किमी की समतल कक्षा में लॉन्च कर सकता है और कई उपग्रहों को समायोजित कर सकता है।</p>
<p>सोमनाथ ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर भारत की उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ को चालू करने और ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ और मंगल ग्रह लैंडर की विशेषता वाले अंतरग्रहीय अन्वेषण जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आने वाले वर्षों में नयी ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <a href="https://www.amritvichar.com/article/425656/shivraj-singh-chauhan-said-i-would-rather-die-than">बोले शिवराज सिंह चौहान- अपने लिए कुछ मांगने के बजाय पसंद करूंगा मर जाना </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 18:28:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Om Parkash chaubey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने, 2040 तक भारतीय को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य रखें वैज्ञानिक: पीएम मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मेादी ने मंगलवार को वैज्ञानिकों से कहा कि वे 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने और 2040 तक पहले भारतीय को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य रखें। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। मोदी ने गगनयान मिशन की तैयारियों और 21 अक्टूबर को निर्धारित अंतरिक्ष यात्री बचाव प्रणाली परीक्षण यान की पहली प्रदर्शन उड़ान की समीक्षा संबंधी बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। </p>
<p>बयान में कहा गया, ‘‘बैठक में मिशन की तैयारी की समीक्षा की गई और 2025 में इसके प्रक्षेपण की पुष्टि की गई।’’ प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान भारत के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/411524/scientists-should-aim-to-establish-a-space-station-by-2035--send-an-indian-to-the-moon-by-2040--pm-modi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-10/दी5555.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मेादी ने मंगलवार को वैज्ञानिकों से कहा कि वे 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने और 2040 तक पहले भारतीय को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य रखें। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। मोदी ने गगनयान मिशन की तैयारियों और 21 अक्टूबर को निर्धारित अंतरिक्ष यात्री बचाव प्रणाली परीक्षण यान की पहली प्रदर्शन उड़ान की समीक्षा संबंधी बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। </p>
<p>बयान में कहा गया, ‘‘बैठक में मिशन की तैयारी की समीक्षा की गई और 2025 में इसके प्रक्षेपण की पुष्टि की गई।’’ प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों के भविष्य की रूपरेखा तैयार की और वैज्ञानिकों से शुक्र ऑर्बिटर मिशन और मंगल लैंडर सहित विभिन्न अंतरग्रहीय मिशन की दिशा में काम करने का आग्रह किया। बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री ने हालिया चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 मिशन सहित भारतीय अंतरिक्ष पहल की सफलता के मद्देनजर निर्देश दिया कि भारत को अब 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर पहले भारतीय को भेजने सहित नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।’’ </p>
<p>इसमें बताया गया कि इस सोच को साकार करने के लिए अंतरिक्ष विभाग चंद्र अन्वेषण के लिए एक खाका तैयार करेगा। बयान में कहा गया, ‘‘इसमें चंद्रयान मिशन की एक श्रृंखला, अगली पीढ़ी के एक प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) का विकास, एक नए लॉन्च पैड का निर्माण, मानव-केंद्रित प्रयोगशालाओं और संबंधित प्रौद्योगिकियों की स्थापना शामिल होगी।’’ अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान मिशन का एक समग्र अवलोकन पेश किया, जिसमें ‘ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल’ और प्रणाली दक्षता जैसी अब तक विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकियों के बारे में बताया गया। </p>
<p>इस बात पर गौर किया गया कि ‘ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल’ (एचएलवीएम3) के तीन मानव रहित मिशन सहित लगभग 20 प्रमुख परीक्षणों की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त किया और अंतरिक्ष अन्वेषण में नई ऊंचाइयां छूने को लेकर देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/411519/meri-mati-mera-desh-campaign-will-honor-the-heroes-who">मेरी माटी मेरा देश' अभियान: देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 'वीरों' का होगा सम्मान</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/411524/scientists-should-aim-to-establish-a-space-station-by-2035--send-an-indian-to-the-moon-by-2040--pm-modi</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 15:27:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Moazzam Beg]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3: चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब 14 दिवसीय कार्य शुरू करेगा रोवर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु। </strong>चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब रोवर मॉड्यूल इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए 14 दिवसीय कार्य शुरू करेगा। उसके विभिन्न कार्यों में चंद्रमा की सतह के बारे में और जानकारी हासिल करने के लिए वहां प्रयोग करना भी शामिल है। ‘विक्रम’ लैंडर के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर अपना काम पूरा करने के बाद अब रोवर ‘प्रज्ञान’ के चंद्रमा की सतह पर कई प्रयोग करने के लिए लैंडर मॉड्यूल से बाहर निकलने की संभावना है।</p>
<p>  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, लैंडर और रोवर में पांच वैज्ञानिक</p>
<p><strong>ये</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/397757/chandrayaan-3--after-successful-soft-landing-on-the-surface-of-the-moon--rover-will-now-start-work-for-14-days"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/पर-क.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु। </strong>चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब रोवर मॉड्यूल इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए 14 दिवसीय कार्य शुरू करेगा। उसके विभिन्न कार्यों में चंद्रमा की सतह के बारे में और जानकारी हासिल करने के लिए वहां प्रयोग करना भी शामिल है। ‘विक्रम’ लैंडर के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर अपना काम पूरा करने के बाद अब रोवर ‘प्रज्ञान’ के चंद्रमा की सतह पर कई प्रयोग करने के लिए लैंडर मॉड्यूल से बाहर निकलने की संभावना है।</p>
<p> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, लैंडर और रोवर में पांच वैज्ञानिक उपक्रम (पेलोड) हैं जिन्हें लैंडर मॉड्यूल के भीतर रखा गया है। इसरो ने कहा कि चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए रोवर की तैनाती चंद्र अभियानों में नयी ऊंचाइयां हासिल करेगी। लैंडर और रोवर दोनों का जीवन काल एक-एक चंद्र दिवस है जो पृथ्वी के 14 दिन के समान है। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/397735/the-success-of-chandrayaan-3-is-the-result-of-the-hard-work-of-generations-of-isro-leadership-and-scientists--s--somnath">इसरो के नेतृत्व और वैज्ञानिकों की पीढ़ियों की मेहनत का है नतीजा है चंद्रयान-3 की सफलता: एस. सोमनाथ</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 23:16:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Moazzam Beg]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ : योगी ने दी इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> देश के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान - 3 की चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में इस बड़ी सफलता के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई दी है1</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष अनुसंधान में महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर 'नए आत्मनिर्भर भारत' के सामर्थ्य और हौसले की नई उड़ान 'चंद्रयान-3' की स्वर्णिम सफलता पर हमें गर्व है।<br /><br />आदरणीय प्रधानमंत्री जी के विजनरी नेतृत्व में अर्जित इस उपलब्धि हेतु <a href="https://twitter.com/isro?ref_src=twsrc%5Etfw">@isro</a> की टीम का हार्दिक अभिनंदन!<br /><br />सभी को बधाई!<br /><br />जय हिंद!🇮🇳 <a href="https://t.co/sfe2iY8ahR">pic.twitter.com/sfe2iY8ahR</a></p>
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/1694340240477937714?ref_src=twsrc%5Etfw">August 23, 2023</a></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/397744/yogi-congratulated-isro-scientists-and-countrymen"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/योगी-आदित्यनाथ.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> देश के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान - 3 की चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में इस बड़ी सफलता के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई दी है1</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष अनुसंधान में महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर 'नए आत्मनिर्भर भारत' के सामर्थ्य और हौसले की नई उड़ान 'चंद्रयान-3' की स्वर्णिम सफलता पर हमें गर्व है।<br /><br />आदरणीय प्रधानमंत्री जी के विजनरी नेतृत्व में अर्जित इस उपलब्धि हेतु <a href="https://twitter.com/isro?ref_src=twsrc%5Etfw">@isro</a> की टीम का हार्दिक अभिनंदन!<br /><br />सभी को बधाई!<br /><br />जय हिंद!🇮🇳 <a href="https://t.co/sfe2iY8ahR">pic.twitter.com/sfe2iY8ahR</a></p>
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/1694340240477937714?ref_src=twsrc%5Etfw">August 23, 2023</a></blockquote>

</div>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा “ चंद्रयान 3 की सफलतम सॉफ्ट लैंडिग नये भारत के सामर्थ्य और शक्ति का जोरदार प्रदर्शन् है। प्रधानमंत्री मोदी जी के विजनरी नेतृत्व और मार्गदर्शन में इसरो के वैज्ञानिकों ने वह कर दिखाया है जो अब तक किसी ने नहीं किया”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा “ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में जो अब तक दुनिया के लिए असंभव था, विजनरी नेतृत्व में हमारे वैज्ञानिकों ने वह संभव करके दिखाया है। वसुधैव कुटुंबकम के पवित्र भाव के साथ आज की सफलता के लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों को ढेर सारी बधाई। पूरे प्रदेश और देशवासियों को इस सफलता की हृदय से शुभकामनाएं , जय हिंद।”</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने भी चंद्रयान 3 मिशन की सफलता पर देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने अपने बधाई संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने एक और सफलता का बड़ा कदम बढ़ाया है। भारत ने जो कर दिखाया उसकी विश्व में किसी को उम्मीद नहीं थी। आज भारत के लिए बहुत बड़े गर्व का दिन है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/397743/in-the-case-of-land-acquired-for-prayagraj-new-kanpur#gsc.tab=0">प्रयागराज : न्यू कानपुर सिटी के लिए अधिगृहित भूमि के मामले में प्राधिकरण से जवाब तलब</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 21:44:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रमा के और करीब पहुंचा चंद्रयान-3, अब प्रणोदन और लैंडर मॉड्यूल को अलग करने की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु। </strong>भारत के महत्वाकांक्षी तीसरे चंद्रमा मिशन के तहत चंद्रयान-3 बुधवार को, पृथ्वी के इकलौते उपग्रह की पांचवी और अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया, तथा चंद्रमा की सतह के और भी करीब आ गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि इसके साथ ही चंद्रयान-3 ने चंद्रमा तक पहुंचने की अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब यह प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल को अलग करने की तैयारी करेगा।</p>
<p>राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्वीट किया, ‘‘आज की सफल प्रक्रिया संक्षिप्त अवधि के लिए आवश्यक थी। इसके तहत चंद्रमा की 153 किलोमीटर x 163 किलोमीटर की कक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/395747/chandrayaan-3-reaches-closer-to-the-moon--now-preparing-to-separate-the-propulsion-and-lander-modules"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/जे98.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु। </strong>भारत के महत्वाकांक्षी तीसरे चंद्रमा मिशन के तहत चंद्रयान-3 बुधवार को, पृथ्वी के इकलौते उपग्रह की पांचवी और अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया, तथा चंद्रमा की सतह के और भी करीब आ गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि इसके साथ ही चंद्रयान-3 ने चंद्रमा तक पहुंचने की अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब यह प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल को अलग करने की तैयारी करेगा।</p>
<p>राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्वीट किया, ‘‘आज की सफल प्रक्रिया संक्षिप्त अवधि के लिए आवश्यक थी। इसके तहत चंद्रमा की 153 किलोमीटर x 163 किलोमीटर की कक्षा में चंद्रयान-3 स्थापित हो गया, जिसका हमने अनुमान किया था। इसके साथ ही चंद्रमा की सीमा में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो गई। अब प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर को अलग होने के लिए तैयार हैं।’’ </p>
<p>इसरो ने कहा कि 17 अगस्त को चंद्रयान-3 के प्रणोदन मॉड्यूल से लैंडर मॉड्यूल को अलग करने की योजना है। 14 जुलाई को प्रक्षेपण के बाद चंद्रयान-3 ने पांच अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया, जिसके बाद इसने छह, नौ और 14 अगस्त को चंद्रमा की अगली कक्षाओं में प्रवेश किया तथा उसके और निकट पहुंचता गया। चंद्रयान-3 को चंद्रमा के ध्रुवों पर स्थापित करने का अभियान आगे बढ़ रहा है। इसरो चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचाने का प्रयास कर रहा है और चंद्रमा से उसकी दूरी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। चंद्रयान-3 के 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/395744/rain-wreaks-havoc-in-himachal--60-killed-in-landslides-and-floods--more-than-9-thousand-damaged-in-monsoon-season">हिमाचल में बारिश का कहर: भूस्खलन और बाढ़ से मरने वालों की संख्या हुई 60, मानसून सीजन में 9 हजार से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/395747/chandrayaan-3-reaches-closer-to-the-moon--now-preparing-to-separate-the-propulsion-and-lander-modules</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 10:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Moazzam Beg]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से निकला बाहर, चंद्रमा की ओर बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को चंद्रयान-3 को कक्षा में ऊपर उठाने की प्रक्रिया ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, ‘‘चंद्रयान-3 ने पृथ्वी के आसपास अपनी कक्षाओं का चक्कर पूरा कर लिया है और अब वह चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है।’’ उसने कहा, ‘‘इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क में चंद्रयान-3 को चंद्रमा के करीब ले जाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इसरो ने चंद्रयान का ट्रांसलूनर कक्षा में प्रवेश कराया।’’ </p>
<p>इसरो ने कहा, ‘‘अगला कदम : चंद्रमा है। जब वह चंद्रमा पर पहुंचेगा तो पांच अगस्त 2023 को लूनर-ऑर्बिट इंसर्शन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/391731/chandrayaan-3-came-out-of-the-earth-s-orbit--headed-towards-the-moon"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/रोक.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को चंद्रयान-3 को कक्षा में ऊपर उठाने की प्रक्रिया ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, ‘‘चंद्रयान-3 ने पृथ्वी के आसपास अपनी कक्षाओं का चक्कर पूरा कर लिया है और अब वह चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है।’’ उसने कहा, ‘‘इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क में चंद्रयान-3 को चंद्रमा के करीब ले जाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इसरो ने चंद्रयान का ट्रांसलूनर कक्षा में प्रवेश कराया।’’ </p>
<p>इसरो ने कहा, ‘‘अगला कदम : चंद्रमा है। जब वह चंद्रमा पर पहुंचेगा तो पांच अगस्त 2023 को लूनर-ऑर्बिट इंसर्शन (चंद्र-कक्षा अंतर्वेश) की योजना है।’’ इसरो के एक अधिकारी एक न्यूज एजेंसी को बताया कि मंगलवार को ट्रांसलूनर-इंजेक्शन (टीएलआई) के बाद चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल गया और अब वह उस पथ पर अग्रसर है जो उसे चंद्रमा के करीब ले जाएगा। </p>
<p>इसरो ने कहा है कि वह आगामी 23 अगस्त को चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने की कोशिश करेगा। इससे पहले, चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किए जाने के बाद से उसे कक्षा में ऊपर उठाने की प्रक्रिया को पांच बार सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/391729/16-workers-killed--three-injured-as-crane-collapses-during-samridhi-expressway-construction-in-maharashtra">महाराष्ट्र में समृद्धि एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान क्रेन गिरने से 16 श्रमिकों की मौत, तीन अन्य घायल</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/391731/chandrayaan-3-came-out-of-the-earth-s-orbit--headed-towards-the-moon</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 08:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Moazzam Beg]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PRL वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के लिए बनाया 3D थर्मोफिजिकल मॉडल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चेन्नई।</strong> अहमदाबाद में स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) में वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह के तापमान का पता लगाने के लिए एक व्यापक त्रि-आयामी थर्मोफिजिकल मॉडल तैयार किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि ऐसा मॉडल आज तक किसी देश की प्रयोगशाला में नहीं बना है। इस मॉडल के माध्यम से वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह और उप-सतह पर तापमान को मापने में सक्षम हो सकेंगे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/347979/world-obesity-day-2023-by-the-year-2035-half-of">World obesity day 2023 : साल 2035 तक आधी आबादी को हो जाएगी ये बड़ी बीमारी, दुनिया को डराने वाली रिपोर्ट</a></span></strong></p>
<p>चंद्र विज्ञान और अन्वेषण पहलुओं दोनों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/347981/prl-scientists-made-3d-thermophysical-model-for-moon"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/falling_star_dust_nwu_1656982291893.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चेन्नई।</strong> अहमदाबाद में स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) में वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह के तापमान का पता लगाने के लिए एक व्यापक त्रि-आयामी थर्मोफिजिकल मॉडल तैयार किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि ऐसा मॉडल आज तक किसी देश की प्रयोगशाला में नहीं बना है। इस मॉडल के माध्यम से वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह और उप-सतह पर तापमान को मापने में सक्षम हो सकेंगे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/347979/world-obesity-day-2023-by-the-year-2035-half-of">World obesity day 2023 : साल 2035 तक आधी आबादी को हो जाएगी ये बड़ी बीमारी, दुनिया को डराने वाली रिपोर्ट</a></span></strong></p>
<p>चंद्र विज्ञान और अन्वेषण पहलुओं दोनों के लिए इस मॉडल के माध्यम से सबसे बाहरी और धूल की परत की प्रकृति को नियंत्रित करने सहित कई अनुप्रयोग कर सकते हैं। इसरो ने कहा कि वैश्विक स्तर पर इस सतही परत की प्रकृति का ज्ञान उपसतह ताप प्रसार की मॉडल गणना के साथ संयुक्त रूप से उपसतह सीमा का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है, जो सौर सूर्यातप के प्रभाव को दर्शाता है।</p>
<p>यह मॉडल चंद्रमा पर किसी भी स्थान के स्थानीय तापीय वातावरण को समझने में भी मदद करेगा जो भविष्य के मानव अन्वेषण और चंद्र आवास के लिए एक आवश्यक पहलू है। इसरो ने कहा कि यह कार्य चंद्र अन्वेषण में हाल ही में मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस भेजने के नियोजित प्रयासों के मद्देनजर महत्व प्राप्त करता है। </p>
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                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Mar 2023 13:45:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Om Parkash chaubey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: क्यों आती है अमावस्या की रात</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दक्ष प्रजापति की 27 नक्षत्र बेटियां थी जिनकी शादी चंद्र देवता से हुई थी। सब ही बहुत खूबसूरत थी लेकिन उन मे से सबसे ज्यादा तेजस्वी थी रोहिणी नक्षत्र जिसके प्रति चंद्र देवता का अलग झुकाव था। चंद्र देवता रोहिणी के साथ ही अधिकतर समय बिताना पसंद करते थे जिस कारण दूसरी नक्षत्र पत्नियों चमक हल्की पड़ती जा रही थी।</p>
<p>इसके बाद 26 नक्षत्र बेटियां अपने पिताजी के पास चंद्र देवता की शिकायत लेकर गई। जिसके पश्चयात प्रजापति अत्यंत क्रोधित हुए और चंद्र देवता को श्राप दिया की जिस तेज पर वो घमंड करते है वो खत्म हो जाएगी। श्राप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/340252/why-does-haldwani-come-on-the-night-of-amavasya"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-02/moon-phases-explained.png" alt=""></a><br /><p>दक्ष प्रजापति की 27 नक्षत्र बेटियां थी जिनकी शादी चंद्र देवता से हुई थी। सब ही बहुत खूबसूरत थी लेकिन उन मे से सबसे ज्यादा तेजस्वी थी रोहिणी नक्षत्र जिसके प्रति चंद्र देवता का अलग झुकाव था। चंद्र देवता रोहिणी के साथ ही अधिकतर समय बिताना पसंद करते थे जिस कारण दूसरी नक्षत्र पत्नियों चमक हल्की पड़ती जा रही थी।</p>
<p>इसके बाद 26 नक्षत्र बेटियां अपने पिताजी के पास चंद्र देवता की शिकायत लेकर गई। जिसके पश्चयात प्रजापति अत्यंत क्रोधित हुए और चंद्र देवता को श्राप दिया की जिस तेज पर वो घमंड करते है वो खत्म हो जाएगी। श्राप का असर दिखना शुरू हो गया था और चंद्र देवता की चमक धीरे-धीरे खत्म होती दिखाई दे रही थी। </p>
<p>चंद्र देवता दुख के कारण ढलते हुए दिखाई दे रहे थे तो वह अपनी पत्नियों को छोड़ कर समुद्र किनारे चले गए और उन्होंने वहां रेत से शिवलिंग बना कर स्थापित किया और ध्यान करने लग गए। महादेव उनके सामने प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। </p>
<p>चंद्र देवता ने अपनी चमक वापस मांगी लेकिन शिव जी ने कहा की ऐसा संभव नहीं हो सकता क्योंकि प्रजाति दक्ष का श्राप बहुत प्रभावशाली है। महादेव ने कहा तुम्हें तुम्हारी पूरी मिलेगी लेकिन महीने में सिर्फ एक दिन बाकी दिन तुम अपने पूर्ण प्रभाव में नहीं उभरोगे। तत्पश्चायात चंद्रमा के अमावस और पूर्णिमा का सिलसिला शुरू हो गया।<img src="https://www.amritvichar.com/media/2023-02/somnath-mahadev-mandir-2-16341755064x3.jpg" alt="Somnath-mahadev-mandir-2-16341755064x3"></img></p>
<p>चंद्र देवता को सोम भी बोलते है और शिव जी को नाथ के नाम भी जाना जाता है इसलिए जहां उन्होंने शिवलिंग की स्थापना करी वह जगह सोमनाथ कहलाती है।  </p>
<h6 class="tag_h1 node_title"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/340255/mukhani-police-arrested-absconding-rs-10000-reward-accused-and-sent#gsc.tab=0">यह भी पढ़ें: हल्द्वानीः फरार चल रहे दस हजार के इनामी को गिरफ्तार कर भेजा जेल</a></strong></span></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/340252/why-does-haldwani-come-on-the-night-of-amavasya</link>
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                <pubDate>Sun, 05 Feb 2023 14:48:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shweta Kalakoti]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा नासा का ओरियन कैप्सूल, बनाएगा नया रिकॉर्ड </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कैनवेरल (अमेरिका)। </strong>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के चारों ओर हजारों मील की दूरी तक फैली एक विहंगम कक्षा में प्रवेश कर गया है। कैप्सूल और इसमें रखी तीन परीक्षण डमी ने प्रक्षेपण के एक सप्ताह से अधिक समय बाद चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया। यह लगभग एक सप्ताह तक इस व्यापक लेकिन स्थिर कक्षा में रहेगा। </p>
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<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">LIVE NOW: The <a href="https://twitter.com/NASA_Orion?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASA_Orion</a> spacecraft is performing a burn to enter a distant retrograde orbit around the Moon, an orbit that is high altitude from the surface of the Moon and opposite the direction of the Moon travels around</p></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/317554/nasa-s-orion-capsule-reaches-moon-s-orbit--will-create-new-record"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/image-from-social-media18.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कैनवेरल (अमेरिका)। </strong>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के चारों ओर हजारों मील की दूरी तक फैली एक विहंगम कक्षा में प्रवेश कर गया है। कैप्सूल और इसमें रखी तीन परीक्षण डमी ने प्रक्षेपण के एक सप्ताह से अधिक समय बाद चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया। यह लगभग एक सप्ताह तक इस व्यापक लेकिन स्थिर कक्षा में रहेगा। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">LIVE NOW: The <a href="https://twitter.com/NASA_Orion?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASA_Orion</a> spacecraft is performing a burn to enter a distant retrograde orbit around the Moon, an orbit that is high altitude from the surface of the Moon and opposite the direction of the Moon travels around Earth. <a href="https://twitter.com/hashtag/Artemis?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Artemis</a> <a href="https://t.co/gknxQkBWFc">https://t.co/gknxQkBWFc</a></p>
— NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/1596255141161709569?ref_src=twsrc%5Etfw">November 25, 2022</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>यह शुक्रवार तक पृथ्वी से 2,38,000 मील (3,80,000 किलोमीटर) दूर था और इसके आगामी कुछ दिन में करीब 2,70,000 मील (4,32,000 किलोमीटर) की अधिकतम दूरी पर पहुंच जाने की उम्मीद है। यह लोगों को ले जाने के लिए बनाए गए कैप्सूल द्वारा तय की गई दूरी का नया रिकॉर्ड बनाएगा। ओरियन के प्रबंधक जिम जेफ्रे ने कहा, 'इसका मकसद आगे जाने के लिए खुद को चुनौती देना, लंबे समय तक बने रहना तथा जो हमने पहले खोजा है उसकी सीमा से आगे बढ़ना है।'</p>
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<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Talk about showing both sides of the story. Nice frontback, Orion.<br /><br />On flight day 9, <a href="https://twitter.com/NASA_Orion?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASA_Orion</a> took these images looking forward to the Moon, and back home toward Earth.<br /><br />More full-res images: <a href="https://t.co/pUudalErEr">https://t.co/pUudalErEr</a><br />Track <a href="https://twitter.com/hashtag/Artemis?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Artemis</a> I in real time: <a href="https://t.co/fCVt3jyqwy">https://t.co/fCVt3jyqwy</a> <a href="https://t.co/bnY0uXbWnh">pic.twitter.com/bnY0uXbWnh</a></p>
— NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/1596209269330051072?ref_src=twsrc%5Etfw">November 25, 2022</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>पचास साल पहले नासा के अपोलो कार्यक्रम के बाद से यह पहली बार है जब कोई कैप्सूल चंद्रमा पर पहुंचा है और चार अरब डॉलर की लागत वाली यह परीक्षण उड़ान काफी महत्वपूर्ण है। कैप्सूल ने 16 नवंबर को फ्लोरिडा स्थित केनेडी अंतरिक्ष केंद्र से नासा के अब तक के सर्वाधिक शक्तिशाली रॉकेट के जरिए उड़ान भरी थी। इस मिशन के सफल होने पर नासा 2024 में अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के आसपास भेजने के मिशन को अंजाम देगा। इसके बाद नासा 2025 में एक यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारने की कोशिश करेगा।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें :  <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/317400/it-is-normal-to-be-deeply-saddened-by-the-death-of-a-pet--what-to-do-to-overcome-it">पालतू जानवर के निधन पर गहरा दुःख होना सामान्य, इससे उबरने के लिए क्या करें?</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/317554/nasa-s-orion-capsule-reaches-moon-s-orbit--will-create-new-record</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/317554/nasa-s-orion-capsule-reaches-moon-s-orbit--will-create-new-record</guid>
                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 10:53:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केवल चंद्र की धरती पर पैरों के निशान छोड़ने के लिए नहीं&amp;#8230; नई अंतरिक्ष दौड़ की शुरुआत का प्रतीक है ‘आर्टेमिस 1 मिशन’</title>
                                    <description><![CDATA[सिडनी। नासा ने इस शनिवार, तीन सितंबर को आर्टेमिस 1 चंद्र मिशन शुरू करने की योजना बनाई, क्योंकि सप्ताह की शुरुआत में पहले प्रयास में इंजन में समस्या के कारण अंतिम समय में इसे रद्द कर दिया गया था। यह मिशन 1972 के बाद पहली बार मानव को चंद्रमा पर भेजने की दिशा में एक …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>सिडनी।</strong> नासा ने इस शनिवार, तीन सितंबर को आर्टेमिस 1 चंद्र मिशन शुरू करने की योजना बनाई, क्योंकि सप्ताह की शुरुआत में पहले प्रयास में इंजन में समस्या के कारण अंतिम समय में इसे रद्द कर दिया गया था। यह मिशन 1972 के बाद पहली बार मानव को चंद्रमा पर भेजने की दिशा में एक रोमांचक कदम है। लेकिन इस बार यह केवल चंद्र की धरती पर हमारे पैरों के निशान छोड़ने के बारे में नहीं है बल्कि यह चंद्र संसाधनों के लिए एक नई अंतरिक्ष दौड़ की शुरुआत का प्रतीक है। इस बार हर कोई चांद पर खनन करना चाहता है।</p>
<p><strong>चंद्रमा पर लौटें</strong><br />
आर्टेमिस कार्यक्रम के बारे में बहुत कुछ नया और प्रेरक है। आर्टेमिस 1 कार्यक्रम का पहला मिशन है और यह चंद्रमा की कक्षा में जाने के लिए प्रायोगिक उड़ान भरेगा और बिना चालक दल के 42-दिवसीय यात्रा के बाद पृथ्वी पर लौटेगा। इस यात्रा में एक नए लॉन्च वाहन, स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) का उपयोग किया जाएगा, जो वर्तमान में दुनिया में सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। बोर्ड पर पुरुष और महिला के प्रतिरूप वाले तीन पुतले होंगे। नासा इन पुतलों का उपयोग प्रक्षेपण यान के आराम और सुरक्षा और मनुष्यों के लिए स्पेसफ्लाइट कैप्सूल का परीक्षण करने के लिए करेगा। बोर्ड पर कई अन्य प्रयोग भी किए गए हैं और जब कैप्सूल चंद्रमा के पास होगा तो डाटा प्रदान करने के लिए छोटे उपग्रहों की एक श्रृंखला प्रक्षेपित की जाएगी। इस मिशन से मिले सबक को आर्टेमिस 2 पर लागू किया जाएगा, जो मिशन 2024 के लिए योजनाबद्ध की गई है और इसमें एक महिला और पुरुष को चंद्रमा पर भेजे जाने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>एक नयी अंतरिक्ष दौड़?</strong><br />
हालांकि, चंद्रमा पर मानव का फिर से कदम रखना केवल खोज और ज्ञान की खोज के बारे में नहीं है। जिस तरह 1960 के दशक की अंतरिक्ष दौड़ शीत युद्ध की भूराजनीति से प्रेरित थी, उसी तरह आज के अंतरिक्ष कार्यक्रम आज की भू-राजनीति पर आधारित हैं। अमेरिका आर्टेमिस का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य मित्र राष्ट्र शामिल हैं। चीन और रूस अपने-अपने मून कार्यक्रम पर सहयोग कर रहे हैं। वे 2026 में मनुष्य को चंद्रमा पर उतारने की योजना बना रहे हैं। भारत भी रोबोटिक मून लैंडर्स और लूनर स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम पर काम कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी इस साल नवंबर में एक चंद्र लैंडर प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है। इस दौड़ का दीर्घकालिक लक्ष्य चंद्र संसाधनों का अधिग्रहण करना है।</p>
<p><strong>चंद्रमा पर संसाधन</strong><br />
चंद्रमा के दक्षिणी क्षेत्रों में पानी की बर्फ का पता चला है और आशा है कि ईंधन के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली कुछ गैसों का भी खनन किया जा सकता है। इन संसाधनों का उपयोग चंद्र आधारों (लूनार बेस) पर और चंद्रमा के निकट दीर्घकालिक मानव निवास स्थान के निर्माण में किया जा सकता है, साथ ही साथ चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन जैसे कि नासा के पूर्वनियोजित ‘गेटवे’ के निर्माण में किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए ऑस्ट्रेलियाई उद्योग का समर्थन कर रही है और मंगल ग्रह पर अमेरिका की बाद की यात्राओं की योजना बना रही है। चंद्र खनन प्रयासों में सहायता के लिए ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक भी चंद्र रोवर विकसित कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नियम क्या हैं?</strong><br />
अगले पांच वर्षों में हम चंद्रमा पर इस नयी दौड़ के आसपास भारी राजनीतिक तनाव बढ़ने की उम्मीद कर सकते हैं। एक प्रश्न जिसका उत्तर अब तक नहीं मिला है, वह है: चंद्रमा पर गतिविधियों को कौन से नियम नियंत्रित करेंगे? 1967 की ‘बाह्य अंतरिक्ष संधि’ अंतरिक्ष में ‘‘संप्रभुता, कब्जे या किसी अन्य माध्यम से’’ उपयोग को प्रतिबंधित करती है। यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि खनन या संसाधन को निकालने के अन्य तरीके इस प्रतिबंध के अंतर्गत आते हैं या नहीं।</p>
<p><strong>तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां</strong><br />
नासा ने इस नए चंद्र प्रयास के लिए ‘‘आर्टेमिस’’ नाम चुना है। आर्टेमिस चंद्रमा की ग्रीक देवी है और अपोलो की जुड़वां बहन है (नासा के 1960 के चंद्रमा अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का नाम)। आर्टेमिस ने घोषणा की थी कि वह कभी शादी नहीं करना चाहती क्योंकि वह किसी भी पुरुष की संपत्ति नहीं बनना चाहती थी। भले ही चंद्रमा के स्वामित्व का दावा नहीं किया जा सकता है, लेकिन हम इस बात को लेकर प्रतिस्पर्धा देखेंगे कि क्या इसके कुछ हिस्सों का खनन किया जा सकता है। निस्संदेह वैज्ञानिक और इंजीनियर चंद्रमा पर फिर से जाने के क्रम में तकनीकी चुनौतियों का समाधान करेंगे। कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का समाधान करना अधिक कठिन साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/launch-of-nasas-artemis-1-postponed-for-the-second-time/">NASA Artemis-1: दूसरी बार टली NASA के ‘आर्टेमिस-1’ की लॉन्चिंग, जानिए आखिर क्यों हुआ ऐसा?</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/276183/the-artemis-1-mission-marks-the-beginning-of-a-new-space-race-to-mine-the-moon</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Sep 2022 14:06:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>आज ही चंद्रमा पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्‍ट्रांग का हुआ था निधन, जानें 25 अगस्त की ऐतिहासिक घटनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[Aaj Ka Itihas: आज का इतिहास में आज हम जानेंगे 25 अगस्त से जुडी घटनाओं के बारे में। चाँद पर पहली बार कदम रखने वाले दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग का निधन हुआ था। 20 जुलाई 1969 को चांद पर अपोलो 11 मिशन से गए नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन गए थे। एक …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/270453/neil-armstrong-who-took-the-first-step-on-the-moon-died-know-todays-historical-events"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/capture-1091.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Aaj Ka Itihas</strong><strong>:</strong> आज का इतिहास में आज हम जानेंगे 25 अगस्त से जुडी घटनाओं के बारे में। चाँद पर पहली बार कदम रखने वाले दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग का निधन हुआ था।</p>
<p>20 जुलाई 1969 को चांद पर अपोलो 11 मिशन से गए नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन गए थे। एक अंतरिक्ष यात्री और वैमानिक इंजिनियर नील आर्मस्ट्रांग साल 1971 में नासा (द नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) से रिटायर्ड हुए। इसके बाद उन्होंने कई बिजनेस के लिए एक कॉर्पोरेट प्रवक्ता के तौर पर कार्य किया। आर्मस्ट्रांग ने पब्लिक इंवेंट्स में अपनी बात रखी। एक साइंस सीरीज की मेजबानी की। इसके अलावा कॉलेज में पढ़ाया भी। 5 अगस्त 1930 में जन्मे आर्मस्ट्रांग का साल 2012 में 82 साल की उम्र में निधन हो गया।</p>
<p><strong>जानें 25 अगस्त को देश और दुनिया के इतिहास में आज के दिन कौन -कौन सी खास घटनाएं हुईं थीं….</strong></p>
<p>1351 – सुल्तान फिरोजशाह तुगलक तृतीय की ताजपोशी हुई।</p>
<p>1768 – ब्रिटेन के जेम्स कुक अपनी पहली साहसिक समुद्री यात्रा पर निकले थे। इसी यात्रा में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की खोज और प्रशांत महासागर के जलमार्ग बताने वाले नक्शे तैयार किए।</p>
<p>1819 – स्‍कॉटिश आविष्‍कारक जेम्‍स वॉट का निधन।</p>
<p>1903 – ऑस्ट्रेलियाई संसद में न्यायपालिका अधिनियम पारित किया गया।</p>
<p>1916 – टोटनबर्ग के युद्ध में रूस ने जर्मनी को पराजित किया।</p>
<p>1921 – अमेरिका ने जर्मनी के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p>1957 – भारत ने फ्रांस में हुई पोलो वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में जीत दर्ज कर विश्व विजेता का खिताब हासिल किया।</p>
<p>1963 – तत्कालीन सोवियत रूस के नेता जोसेफ स्टालिन के 16 विरोधियों को फांसी पर चढ़ा दिया गया।</p>
<p>1977 – सर एडमंड हिलेरी का सागर से हिमालय अभियान हल्दिया बंदरगाह से शुरू हुआ।</p>
<p>1997 – मासूमा इब्तेकार ईरान की पहली महिला उपराष्ट्रपति नियुक्त।</p>
<p>2001 – लंदन में आस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर शेनवार्न टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 400 टेस्ट विकेट लेने वाले पहले स्पिन गेंदबाज बने।</p>
<p>2003 – स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप केप केनवरल, फ्लोरिडा में शुरू किया।</p>
<p>2006 – पूर्व यूक्रेनी प्रधानमंत्री पाव्‍लो लाज़रेंको काले धन को वैध, तार धोखाधड़ी, और जबरन वसूली के लिए संघीय जेल में नौ साल की सजा हुई।</p>
<p>2011 – श्रीलंका सरकार ने लिट्टे से संघर्ष शुरू होने के बाद देश में घोषित आपातकाल को 30 वर्ष बाद वापस ले लिया।</p>
<p>2012 – वोयेजर 1 सौरमंडल से बाहर अंत‍रिक्ष में दाखिल होने वाला पहला मानवनिर्मित यान बना।</p>
<p>2012 – चंद्रमा पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्‍ट्रांग का निधन।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://amritvichar.com/the-city-of-calcutta-was-established-today-know-the-history-of-24-august/">आज ही हुई थी कलकत्ता शहर की स्थापना, जानिए अतीत के पन्नों में दर्ज 24 अगस्त का इतिहास</a></strong></p>
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                                                            <category>इतिहास</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Aug 2022 11:31:00 +0530</pubDate>
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