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                <title>High Court - Amrit Vichar</title>
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                <description>High Court RSS Feed</description>
                
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                <title>करेंट अफेयर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">-    हाल ही में न्यायमूर्ति लीसा गिल ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। शपथ ग्रहण समारोह आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित किया गया था। राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने 25 अप्रैल को जस्टिस गिल को शपथ दिलाई। जस्टिस गिल ने जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की जगह ली है, जो 24 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए। </p>
<p style="text-align:justify;">-    हाल ही में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता नई दिल्ली के भारत मंडपम में हस्ताक्षरित किया गया। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580427/current-affairs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/untitled-design-(22)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">-    हाल ही में न्यायमूर्ति लीसा गिल ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। शपथ ग्रहण समारोह आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित किया गया था। राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने 25 अप्रैल को जस्टिस गिल को शपथ दिलाई। जस्टिस गिल ने जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की जगह ली है, जो 24 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए। </p>
<p style="text-align:justify;">-    हाल ही में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता नई दिल्ली के भारत मंडपम में हस्ताक्षरित किया गया। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम के रूप में देखा जा सकता है। इसका उद्देश्य व्यापार बाधाओं को दूर करना, बाजार तक पहुंच में सुधार करना और दीर्घकालिक आर्थिक अवसर पैदा करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">-    हाल ही में भारत ने एक बड़े आर्थिक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है, क्योंकि नीति आयोग ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के लिए एक नई दो-चरणों वाली रणनीति पेश की है। डीपीआई का यह नया चरण 2047 तक देश को $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखता है। इस रोडमैप का शीर्षक ‘DPI@2047: The Roadmap to Prosperity’ है, जो यह बताता है कि कैसे डिजिटल सिस्टम अलग-अलग क्षेत्रों में समावेशी विकास, इनोवेशन और उत्पादकता को बढ़ावा देंगे। इस विज़न का लक्ष्य प्रति व्यक्ति आय को $18,000 तक पहुंचाना भी है, जो बड़े पैमाने पर आर्थिक सशक्तिकरण का संकेत देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">-    हाल ही में भारत के क्रिकेट दिग्गज विराट कोहली ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में 9000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने यह उपलब्धि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेले गए मैच के दौरान हासिल की। </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 09:00:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी दावे और हाईकोर्ट की नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em><strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हाल ही में तल्ख टिप्पणी की है। वह सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।</strong></em></p>
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<strong>विवेक सक्सेना, अयोध्या</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘राम भरोसे’ बताया जाना महज एक टिप्पणी नहीं, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की जर्जर स्थिति का एक आईना है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में एक मरीज के शव के साथ लापरवाही के मामले में न्यायालय की यह तल्ख टिप्पणी (2021) और हाल ही में वेंटिलेटर की उपलब्धता पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580591/government-claims-regarding-health-services-and-the-high-court-s-displeasure"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><em><strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हाल ही में तल्ख टिप्पणी की है। वह सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats11.jpg" alt="cats" width="201" height="287"></img>
<strong>विवेक सक्सेना, अयोध्या</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘राम भरोसे’ बताया जाना महज एक टिप्पणी नहीं, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की जर्जर स्थिति का एक आईना है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में एक मरीज के शव के साथ लापरवाही के मामले में न्यायालय की यह तल्ख टिप्पणी (2021) और हाल ही में वेंटिलेटर की उपलब्धता पर सवाल (2026) उठाती है। यह दर्शाते हैं कि समय बदलने के बावजूद जमीनी हकीकत में खास सुधार नहीं हुआ है। यह टिप्पणी राज्य सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि स्वास्थ्य सेवा, जो नागरिकों का मौलिक अधिकार है, वह नौकरशाही की ढिलाई और संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हाल ही में जो तल्ख टिप्पणी की है, वह न केवल समयोचित है, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मरीजों को समय पर महत्वपूर्ण देखभाल उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो सांख्यिकीय दावों का कोई महत्व नहीं रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति राजन रॉय और मनजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या कोई अस्पताल हलफनामे में यह कह सकता है कि आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि ऐसा आश्वासन नहीं दिया जा सकता है, तो वेंटिलेटर की उपलब्धता पर प्रस्तुत आंकड़े अर्थहीन हो जाते हैं। खंडपीठ का यह सवाल कि ‘अगर जरूरत पड़ने पर मरीजों को वेंटिलेटर नहीं मिल सकता, तो आंकड़ों का क्या फायदा?’ सीधे तौर पर स्वास्थ्य प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने साफ किया है कि वेंटिलेटर की संख्या के कागज पर मौजूद आंकड़े तब तक अर्थहीन हैं, जब तक कि वे जीवन के नाजुक क्षण में मरीज तक तुरंत न पहुंच सकें। जब वेंटिलेटर की कमी के कारण मौतें होती हैं, तो प्रशासनिक हलफनामे केवल खानापूरी बनकर रह जाते हैं। न्यायालय का यह कहना कि ‘वास्तविक मांग का आकलन करने और जीवन रक्षक उपचार के लिए आवश्यक वेंटिलेटरों की संख्या निर्धारित करने के लिए एक तंत्र का स्पष्ट अभाव है’, भी स्वास्थ्य प्रणाली की अक्षमता को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने राज्य सरकार से स्वास्थ्य के लिए आवंटित बजट और चिकित्सा बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाकर एक बड़ा मुद्दा उठाया है। यह केवल वेंटिलेटर खरीदने भर का मामला नहीं है, बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक जनशक्ति (डॉक्टर, तकनीशियन) और बुनियादी ढांचा (ऑक्सीजन, बिजली) सुनिश्चित करने का भी है। अक्सर देखा जाता है कि वेंटिलेटर तो उपलब्ध होते हैं, लेकिन या तो वे खराब होते हैं या उन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं होते। पीठ का इस बात पर जोर देना कि वेंटिलेटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि उनकी कमी के कारण किसी की जान न जाए, यह दर्शाता कि देश-प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने अपने समक्ष रखे गए आंकड़ों पर भी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तविक मांग का आकलन करने और जीवन रक्षक उपचार के लिए आवश्यक वेंटिलेटरों की संख्या निर्धारित करने के लिए एक तंत्र का स्पष्ट अभाव है। अदालत ने राज्य सरकार से स्वास्थ्य सेवा के लिए आवंटित राज्य बजट के अनुपात को स्पष्ट करने और चिकित्सा अवसंरचना की स्थिति के संबंध में विवरण तो मांगा ही है। साथ ही राज्य को अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदंडों को पूरा करने से संतुष्ट न रहने का निर्देश भी दिया है, जैसे कि अस्पताल के बिस्तरों के 10-15 प्रतिशत के बराबर वेंटिलेटर बनाए रखना।</p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं न्यायालय ने निजी अस्पतालों की फीस और उनकी सेवाओं की निगरानी के लिए विनियामक ढांचे के अभाव पर भी चिंता जताई है। स्पष्ट कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी अस्पताल मरीजों के जीवन को दांव पर न लगाए। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि वेंटिलेटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि इनकी कमी के कारण किसी की जान न जाए। अदालत ने अपने सामने पेश किए गए आंकड़ों पर असंतोष व्यक्त किया। राज्य सरकार से पूछा कि स्वास्थ्य सेवा के लिए राज्य के बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और चिकित्सा ढांचे की मौजूदा स्थिति के बारे में पूरी जानकारी देने को कहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने राज्य सरकार को अपने नजरिए पर फिर से विचार करने की नसीहत देते हुए यह भी कहा कि सरकार को सिर्फ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करके ही संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान, पीठ ने राज्य सरकार से यह भी जानकारी मांगी कि क्या निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक ढांचा मौजूद है? विशेष रूप से उपचार और सेवाओं की निगरानी के लिए ली जाने वाली फीस के संबंध में। सरकारी डॉक्टरों के कम वेतन पर भी चिंता जताई गई, कहा कि इससे डॉक्टर निजी अस्पतालों की ओर पलायन करते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ता है। </p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने राष्ट्रीय नगर निगम (एनएमसी) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मामले में पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह टिप्पणी एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य सेवा एक संवैधानिक अधिकार है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 05:14:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह ने सुरक्षा घेरा वापस लिए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़। </strong>पिछले दिनों आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है कि पंजाब सरकार को उनकी सुरक्षा बहाल करने का निर्देश दिया जाए। पूर्व क्रिकेटर सिंह ने राघव चड्ढा समेत आप के छह राज्यसभा सदस्यों के साथ 24 अप्रैल को भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने उनका सुरक्षा घेरा वापस ले लिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब पुलिस की सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने जालंधर में सिंह के आवास के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580487/rajya-sabha-member-harbhajan-singh-moved-the-high-court-after-his-security-cover-was-withdrawn"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/हरभजन-सिंह.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़। </strong>पिछले दिनों आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है कि पंजाब सरकार को उनकी सुरक्षा बहाल करने का निर्देश दिया जाए। पूर्व क्रिकेटर सिंह ने राघव चड्ढा समेत आप के छह राज्यसभा सदस्यों के साथ 24 अप्रैल को भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने उनका सुरक्षा घेरा वापस ले लिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब पुलिस की सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने जालंधर में सिंह के आवास के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती कर दी। आप के कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और अशोक मित्तल के घरों के बाहर प्रदर्शन किया था और जालंधर तथा लुधियाना में उनके घरों की दीवारों पर स्प्रे पेंट से 'गद्दार' लिख दिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">हरभजन ने अपनी याचिका में कहा है कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) ने उन्हें खतरे का कोई ताजा आकलन किए बिना और उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए बिना 'बहुत ही मनमाने तरीके से' उनका सुरक्षा घेरा वापस ले लिया। याचिका में आधिकारिक प्रतिवादियों को सुरक्षा घेरा बहाल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि पंजाब पुलिस द्वारा उनका सुरक्षा घेरा वापस लिए जाने के फौरन बाद 25 और 26 अप्रैल को हिंसक भीड़ ने उनके घर पर हमला कर दिया और इस दौरान स्थानीय पुलिस मौजूद थी, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। </p>
<p style="text-align:justify;">याचिका के अनुसार, ''दिलचस्प बात यह है कि 25 अप्रैल की सुबह, याचिकाकर्ता के आवास पर तैनात सभी पुलिसकर्मी चले गए और जालंधर के उपायुक्त ने आम आदमी पार्टी के सदस्यों को याचिकाकर्ता के आवास पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी। दोपहर लगभग 2:30 बजे, एक भीड़ याचिकाकर्ता के आवास पर पहुंची और घर की बाहरी दीवारों पर 'गद्दार' लिख दिया।'' </p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में बताया गया है कि सिंह उस समय किसी निजी आयोजन के लिए मुंबई में थे और उनके एक रिश्तेदार ने घर पर भीड़ के हमले के बारे में फोन से जानकारी दी। याचिकाकर्ता ने कहा कि एडीजीपी ने सुरक्षा घेरा वापस लेने का आदेश जारी करते हुए जालंधर के पुलिस आयुक्त को जरूरी सुरक्षा बंदोबस्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:22:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कागजी आंकड़ों से नहीं बचेगा जीवन : हाईकोर्ट ने चेताया-वेंटिलेटर नहीं तो रिकॉर्ड किस काम के?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने कहा है कि यदि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं, तो वेंटिलेटरों की संख्या के संबंध में प्रस्तुत आंकड़ों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि चिकित्सा सुविधाओं के लिए कुल बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और अस्पतालों में सुविधाओं की स्थिति क्या है। मामले की अगली सुनवायी 25 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579655/paper-data-will-not-save-lives--high-court-warns-%E2%80%93-what-is-the-use-of-records-if-there-is-no-ventilator"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने कहा है कि यदि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं, तो वेंटिलेटरों की संख्या के संबंध में प्रस्तुत आंकड़ों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि चिकित्सा सुविधाओं के लिए कुल बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और अस्पतालों में सुविधाओं की स्थिति क्या है। मामले की अगली सुनवायी 25 मई को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"> यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने वी द पीपल संस्था की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। न्यायालय ने कहा कि प्रश्न यह है कि क्या कोई भी अस्पताल इस स्थिति में है कि वह शपथपत्र पर यह कह सके कि जब भी किसी मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है, तो अस्पताल उसे उचित समय के भीतर वेंटिलेटर उपलब्ध करा देगा और यदि ऐसा नहीं है, तो शपथपत्र में दिए गए आंकड़ों का कोई अर्थ नहीं रह जाता, प्रयास यह होना चाहिए कि पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वेंटिलेटर की अनुपलब्धता के कारण किसी की मृत्यु न हो। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रस्तुत आंकड़े इस पहलू पर संतोषजनक नहीं हैं, वस्तुतः ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य में यह निर्धारित करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है कि अस्पताल में वेंटिलेटर की मांग क्या है और जीवन बचाने हेतु कितने वेंटिलेटर उपलब्ध होने चाहिए, जब तक यह व्यवस्था विकसित नहीं की जाती, तब तक इस प्रकार के आंकड़े देना निरर्थक होगा। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे विषय पर पुनर्विचार करे और सिर्फ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों जैसे कि अस्पतालों में कुल बेड का 10 से 15 प्रतिशत वेंटिलेटर की उपलब्धता से संतुष्ट न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने निजी अस्पतालों व  क्लिनिकों के नियमन तथा उनकी फीस और सेवाओं की निगरानी व्यवस्था की जानकारी भी मांगी। न्यायालय ने कहा कि सरकार यह भी स्पष्ट करे कि क्या किसी कानून, नियम या अन्य किसी प्रावधान के तहत निजी अस्पतालों और  क्लिनिकों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक व्यवस्था है, विशेषकर मरीजों के उपचार के लिए वसूले जाने वाले शुल्क के संबंध में।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल केवल लखनऊ तक सीमित न रहें, बल्कि अन्य जिलों में भी विकसित किए जाएं। सरकारी डॉक्टरों के कम वेतन के कारण उनके निजी क्षेत्र में जाने की प्रवृत्ति पर भी कोर्ट ने चिंता जताई। कहा कि सरकारी डॉक्टरों को दिए जा रहे वेतन की पर्याप्तता का प्रश्न भी विचारणीय है, विशेषकर निजी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को दिए जा रहे वेतन की तुलना में। यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में कम वेतन के कारण अनेक डॉक्टर निजी अस्पतालों की ओर पलायन कर जाते हैं, जिससे आम नागरिक उनके अनुभव और सेवाओं से वंचित रह जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:24:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनिल अंबानी को बड़ा झटका : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कीं याचिकाएं, हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने तीन बैंकों द्वारा उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ''फर्जी'' घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने साथ ही अंबानी को बैंकों के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति दी। पीठ ने एकल पीठ से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578885/major-blow-to-anil-ambani--supreme-court-dismisses-petitions-challenging-high-court-order"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने तीन बैंकों द्वारा उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ''फर्जी'' घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने साथ ही अंबानी को बैंकों के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति दी। पीठ ने एकल पीठ से अनुरोध किया कि वह इन बैंक द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ अंबानी की याचिका पर शीघ्र निर्णय करे। </p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश अंबानी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ खातों को ''फर्जी'' घोषित करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही खंडपीठ ने तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ऑडिट कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा दिसंबर 2025 में एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया था। एकल पीठ के आदेश में इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की जा रही वर्तमान और भविष्य की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगाई गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा था कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण 'फॉरेंसिक ऑडिट' पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है। अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी जिनमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को ''फर्जी'' खाते घोषित करने की मांग की गई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578885/major-blow-to-anil-ambani--supreme-court-dismisses-petitions-challenging-high-court-order</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 13:55:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ हाईकोर्ट परिसर में हंगामा: छत पर चढ़ी महिला को पुलिस ने नीचे उतारा, समझाकर भेजा वापस </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट लखनऊ पीठ के भवन की छत पर गोंडा की महिला नवजात बच्चे के साथ चढ़ गई। वह लगातार कूदने की धमकी दे रही थी। शोर-शराब सुनकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता और सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह उसे नीचे उतारा। इसके बाद समझाकर घर वापस भेजा।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक महिला गोंडा के छपिया की रहने वाली है। पूछताछ में बताया कि उसकी शादी नरायनपुर निवासी गैर संप्रदाय के मो. साबिर अली हुई है। एक तीन माह का बच्चा भी है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने गोंडा के छपिया थाने में पति व अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ 2024 में रिपोर्ट दर्ज कराया था। इसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578282/uproar-at-lucknow-high-court-complex--police-bring-down-woman-who-climbed-onto-roof--counsel-her-and-send-her-back"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/वायरल-तस्वीर-(15)9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट लखनऊ पीठ के भवन की छत पर गोंडा की महिला नवजात बच्चे के साथ चढ़ गई। वह लगातार कूदने की धमकी दे रही थी। शोर-शराब सुनकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता और सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह उसे नीचे उतारा। इसके बाद समझाकर घर वापस भेजा।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक महिला गोंडा के छपिया की रहने वाली है। पूछताछ में बताया कि उसकी शादी नरायनपुर निवासी गैर संप्रदाय के मो. साबिर अली हुई है। एक तीन माह का बच्चा भी है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने गोंडा के छपिया थाने में पति व अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ 2024 में रिपोर्ट दर्ज कराया था। इसी से परेशान होकर शुक्रवार को वह अधिवक्ता के उच्च न्यायालय स्थित चैम्बर में बात करने आई थी। बात न बनने पर वह छत पर चढ़ गई और नीचे कूदने का प्रयास करने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी, चौकी प्रभारी और अन्य लोगों ने उन्हें सुरक्षित बचाया। विभूतिखंड इंस्पेक्टर अमर सिंह ने बताया कि मामले को लेकर किसी पक्ष से कोई शिकायत नहीं मिली है। मामले की जांच की जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/578279/government-in-mission-mode-for-farmer-registry--camps-in-every-gram-panchayat--special-focus-on-villages-with-low-coverage"><span class="t-red">किसान रजिस्ट्री के लिए मिशन मोड में सरकार: </span>हर ग्राम पंचायत में कैंप, कम कवरेज वाले गांवों पर विशेष फोकस</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578282/uproar-at-lucknow-high-court-complex--police-bring-down-woman-who-climbed-onto-roof--counsel-her-and-send-her-back</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 12:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हनीट्रैप की घटनाएं अत्यंत चिंताजनकः हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराजः </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को उन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जो पुरुषों से धन वसूली के लिए कथित तौर पर महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं। उच्च न्यायालय ने बिजनौर के फौजिया एवं अन्य की रिट याचिका पर 30 मार्च को यह आदेश दिया। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के मामले समाज में अत्यंत हानिकारक परिस्थिति को उजागर करते हैं। पीठ ने इसे बहुत गंभीर मामला बताते हुए मोहपाश के आरोपी कुछ पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों के खिलाफ धन वसूली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577348/honeytrap-incidents-are-extremely-worrying--high-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(11)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराजः </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को उन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जो पुरुषों से धन वसूली के लिए कथित तौर पर महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं। उच्च न्यायालय ने बिजनौर के फौजिया एवं अन्य की रिट याचिका पर 30 मार्च को यह आदेश दिया। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के मामले समाज में अत्यंत हानिकारक परिस्थिति को उजागर करते हैं। पीठ ने इसे बहुत गंभीर मामला बताते हुए मोहपाश के आरोपी कुछ पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों के खिलाफ धन वसूली के एक मामले को रद्द करने के अनुरोध पर विचार करने से इनकार कर दिया।<br /> <br />उच्च न्यायालय ने कहा, "हम इस रिट याचिका को वापस लेने की याचिकाकर्ताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हैं, लेकिन हमारा विचार है कि इसकी मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा गहन जांच किए जाने की आवश्यकता है।" अदालत ने कहा, "यदि इस तरह का गिरोह या कोई अन्य गिरोह भी काम कर रहा है और महिलाओं के जरिए मोहपाश में फंसाकर निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहा तो पुलिस महानिरीक्षक कड़ी निगरानी बनाए रखने को सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को अलर्ट करें। यदि इस तरह के अपराध जारी रहते हैं तो एक सभ्य दुनिया में रहना मुश्किल हो जाएगा।" </p>
<p>बिजनौर पुलिस द्वारा दर्ज इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिजनौर में एक होटल में एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद उसे आरोपियों द्वारा ब्लैकमेल किया गया। उस महिला द्वारा कुछ वीडियो क्लिप रिकॉर्ड किए गए थे। आरोपियों ने इस मामले को निपटाने के लिए 8-10 लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने इस मामले की सूचना पुलिस को दे दी जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद आरोपियों ने यह रिट याचिका दायर कर अदालत का रुख किया और प्राथमिकी रद्द करने की मांग की। </p>
<p>हालांकि, अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसके बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस ले ली। अदालत ने इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक (मेरठ जोन) और अपर मुख्य सचिव (गृह) को भेजने का निर्देश दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577348/honeytrap-incidents-are-extremely-worrying--high-court</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:15:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानिए कौन है देशभर में 1100 से अधिक बार बम से उड़ने की धमकी देने वाला आरोप? दिल्ली पुलिस ने किया है अरेस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। दिल्ली पुलिस ने देश भर के स्कूलों, उच्च न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों को 1,100 से ज़्यादा फर्जी कॉल कर बम से उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस टीमों के बीच गुरुवार को एक समन्वित अभियान में संदिग्ध श्रीनिवास लुइस (47) को उसके किराए के घर से हिरासत में लिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के हफ्तों में, दिल्ली उच्च न्यायालय , दिल्ली विधानसभा और कई शिक्षण संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों सहित कई संस्थाओं को बम की धमकी मिली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576961/find-out-who-is-the-accused-behind-over-1-100-bomb-threats-issued-across-the-country%E2%80%94arrested-by-the-delhi-police"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/043.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। दिल्ली पुलिस ने देश भर के स्कूलों, उच्च न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों को 1,100 से ज़्यादा फर्जी कॉल कर बम से उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस टीमों के बीच गुरुवार को एक समन्वित अभियान में संदिग्ध श्रीनिवास लुइस (47) को उसके किराए के घर से हिरासत में लिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के हफ्तों में, दिल्ली उच्च न्यायालय , दिल्ली विधानसभा और कई शिक्षण संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों सहित कई संस्थाओं को बम की धमकी मिली थी, जिसके बाद तुरंत जांच शुरू की गई। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लुइस मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला है और कथित तौर पर अपनी मां के साथ किराये के मकान में रहता है। वह एक सेवानिवृत सरकारी कर्मचारी हैं, और अभी बेरोज़गार है। उन्होंने संकेत दिया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि वह मानसिक तनाव में हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि आरोपी ने शुरुआती पूछताछ के दौरान कथित तौर पर देश भर में 1,100 से ज़्यादा धमकी भरे संदेश भेजने की बात कबूल की है। पुलिस ने पुष्टि की कि धमकियां ईमेल और दूसरे संचार चैनल से भेजी गई थीं, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में कई प्राथमिकी दर्ज की गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की थी। तकनीकी जांच और सुराग जोड़ते-जोड़ते पुलिस कर्नाटक तक पहुंची और वहां से लुइस को हिरासत में ले लिया तथा अब उसे दिल्ली लाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 16:20:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP : बेघर घुमंतू परिवारों को हाईकोर्ट से बड़ी उम्मीद, अनदेखी करने पर कैसरगंज तहसीलदार पर 50 हजार का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ/बहराइच, अमृत विचार :</strong> पीढ़ियों से दर-बदर भटकते बेघर घुमंतू परिवारों की ये अंतहीन दौड़ एक अदद घर (आवास) से खत्म हो सकती है, लेकिन सिस्टम इतना उदार नहीं है। ग्राम सभा की जमीन का पट्टा आवंटित करके प्रधानमंत्री आवास पाने के लिए सालों से संघर्ष कर रहे बहराइच के घुमंतू समुदाय के पांच परिवारों को हाईकोर्ट से उम्मीद की एक किरण मिली है। पट्टा आवंटन में लापरवाही बरतने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कैसरगंज की तहसीलदार मीना गौड़ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। स्पष्ट निर्देश के साथ कि जुर्माना राशि तहसीलदार के वेतन से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573460/span-classt-redup-span-kaiserganj-tehsildar-fined-rs-50000-for-ignoring"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ/बहराइच, अमृत विचार :</strong> पीढ़ियों से दर-बदर भटकते बेघर घुमंतू परिवारों की ये अंतहीन दौड़ एक अदद घर (आवास) से खत्म हो सकती है, लेकिन सिस्टम इतना उदार नहीं है। ग्राम सभा की जमीन का पट्टा आवंटित करके प्रधानमंत्री आवास पाने के लिए सालों से संघर्ष कर रहे बहराइच के घुमंतू समुदाय के पांच परिवारों को हाईकोर्ट से उम्मीद की एक किरण मिली है। पट्टा आवंटन में लापरवाही बरतने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कैसरगंज की तहसीलदार मीना गौड़ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। स्पष्ट निर्देश के साथ कि जुर्माना राशि तहसीलदार के वेतन से की जाएगी। </p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-02/whatsapp-image-2026-02-26-at-10.07.25-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-02-26 at 10.07.25 PM" width="295" height="305"></img>
हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">प्रकरण कैसरगंज तहसील के बांसगांव से जुड़ा है। गांव में घुमंतू समुदाय के 5 परिवार झोपड़-पट्टी डालकर रह रहे हैं। पीएम आवास के तौर पर इन्होंने अपने घर का ख्वाब देखा। तहसील प्रशासन के पास अर्जी लगाई कि ग्राम सभा की जमीन का पट्टा दे दिया जाए, ताकि वे पीएम आवास के लिए आवेदन कर सकें। एक परिवार के मुखिया विकलांग हैं। स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के बाद इन परिवारों ने कानूनी सहारा लिया। </p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह जोकि मूलरूप से बहराइच के निवासी हैं-इन परिवारों का सहारा बने। उन्होंने हाईकोर्ट में घुमंतू परिवारों की पैरवी की। चूंकि गांव में ग्राम सभा की भूमि उपलब्ध थी। इसलिए इन परिवारों को स्थायी बसेरा दिलाना असंभव भी नहीं है। लेकिन ग्राम सभा और जिम्मेदार अधिकारी अनदेखी का रवैया अपनाए रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने 15 जुलाई 2025 को स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि ग्राम सभा की भूमि से अवैध पट्टा कब्जा हटाकर पट्टा आवंटन पर विचार किया जाए। इसके बावजूद मामला दबा दिया गया। इस बीच ग्राम सभा की भूमि के एक गाटे के कब्जेदार ने दूसरे को भूमि उपहार में दे दी। इसी साल 27 जनवरी को हाईकोर्ट में यह मामला फिर सुना गया। हाईकोर्ट ने तहसीलदार को नोटिस जारी करते हुए 26 फरवरी को सुनवाई की तारीख मुकर्रर की थी। न्यायालय से नोटिस जारी होने के बाद तहसीलदार ने आनन फानन में 29 जनवरी को अवैध कब्जेदारों को 67 का नोटिस जारी करते हुए भूमि खाली कराने का निर्देश दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">26 फरवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तहसीलदार पेश हुईं। हाईकोर्ट ने कार्यवाही की वस्तुस्थिति जानी। लापरवाही पाए जाने पर तहसीलदार मीना गौड़ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। ये कहते हुए कि जुर्माने की राशि सरकार द्वारा वहन नहीं की जाएगी, बल्कि तहसीलदार के वेतन से भरपाई होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">घुमंतू समुदायों के लिए पैरवी करने वाले एडवोकेट आशीष कुमार सिंह के मुताबिक, माननीय हाईकोर्ट ने छह सप्ताह के अंदर इस प्रकरण का निस्तारण करने का आदेश दिया है। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बेघर परिवारों को अपना घर मिलने की उम्मीद जगी है।</p>
<h5><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/573401/roadways--major-preparations-for-holi--uninterrupted-night-bus-services-will-operate--instructions-issued-for-these-routes"><span class="t-red">होली पर रोडवेज की बड़ी तैयारी: </span>निर्बाध रात्रिकालीन बस सेवाएं होंगी संचालित, इन रूटों पर चलने के निर्देश </a></strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बहराइच</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/573460/span-classt-redup-span-kaiserganj-tehsildar-fined-rs-50000-for-ignoring</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 21:52:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> यौन शोषण मामले में फसें अविमुक्तेश्वरानंद पर लटकी जेल की तलवार,  सुनवाई पर बोले-आरोप बेबुनियाद </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>बटुकों के यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय के सूत्रों ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका 'कोर्ट नंबर 72' में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी-झूंसी) विमल किशोर मिश्रा ने बताया कि कथित पीड़ित बटुकों का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफा में जांच अधिकारी को सौंप दी गई है। </p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट की विषयवस्तु पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573437/avimukteshwarananda--caught-in-a-sexual-abuse-case--faces-the-threat-of-jail-time--he-stated-at-the-hearing-that-the-allegations-were-baseless"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(33)14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>बटुकों के यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय के सूत्रों ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका 'कोर्ट नंबर 72' में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी-झूंसी) विमल किशोर मिश्रा ने बताया कि कथित पीड़ित बटुकों का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफा में जांच अधिकारी को सौंप दी गई है। </p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट की विषयवस्तु पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि सीलबंद लिफाफे में मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी। इक्कीस फरवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी के आवेदन पर एक विशेष पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी थाने के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">आशुतोष ब्रह्मचारी ने बुधवार को कथित पीड़ित बटुकों को मीडिया के समक्ष पेश किया था। एक बटुक ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर यौन शोषण करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;">शंकराचार्य का दावा : मैंने भी आशुतोष ब्रह्मचारी पर मुकदमा दर्ज कराया </h5>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने खुद के ऊपर प्राथमिकी दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। शंकराचार्य ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 के तहत आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया, "पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 में यह प्रावधान है कि अगर कोई आपके खिलाफ फर्जी मुकदमा करता है तो आप भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिन दो नाबालिग लड़कों का यौन शोषण का आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कराया है, वे लंबे समय से आशुतोष के पास ही रह रहे हैं। उन्होंने दोनों लड़कों के मेडिकल परीक्षण में उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि होने का दावा भी किया।</p>
<p style="text-align:justify;">शंकराचार्य ने खुद पर लगे यौन शोषण के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि माघ मेले मेले के दौरान वह सीसीटीवी कैमरा और मीडिया के कैमरे के सामने रहे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा जिन लड़कों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है वह कभी उनके गुरुकुल में दाखिल तक नहीं हुए। </p>
<p style="text-align:justify;">अपने मठ में शीश महल और स्विमिंग पूल होने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा, "हमारा छोटा सा मठ है। उसमें 150 से 200 लोग कैसे रहते हैं यह हम ही लोग जानते हैं। यहां कोई भी गुप्त स्थान, शीश महल अथवा स्विमिंग पूल नहीं है। जब हमारे गुरु जी यहां रहते थे तब उनको डॉक्टर ने व्यायाम करने के लिए कहा था, तब उनके लिए व्यवस्था बनाई गई थी और यह व्यवस्था अब बंद पड़ी हुई है।" </p>
<p style="text-align:justify;">अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों का राज है, वे आरोप लगाते हैं और जांच को प्रभावित करते हैं। शंकराचार्य ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में अपने फोन पर एक व्हाट्सएप ग्रुप दिखाया और आरोप लगाया कि इसे उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडेय उर्फ ​​आशुतोष ब्रह्मचारी नाम के एक व्यक्ति ने बनाया है और उस ग्रुप में उनके खिलाफ मामले से जुड़ी जानकारी साझा की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिन दो नाबालिग लड़कों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कराया है वह लंबे समय से आशुतोष के पास ही रह रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों लड़कों के मेडिकल परीक्षण में उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। शंकराचार्य ने कहा, "अगर उन बच्चों के साथ कुछ भी गलत हुआ है, तो यह उनके साथ रहने वालों ने ही किया होगा। हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं था। लेकिन अगर कोई कहानी बनाना चाहता है, तो वह कुछ भी बना सकता है।"</p>
<p style="text-align:justify;">शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी तथा दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ पिछली 21 फरवरी को प्रयागराज के झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि पिछले साल शंकराचार्य और अन्य आरोपियों ने अपने गुरुकुल और हाल ही में संपन्न माघ मेले सहित धार्मिक सभाओं में एक नाबालिग समेत दो लोगों का यौन शोषण किया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/573434/last-chance--upload-information-on-the-human-resource-portal--departmental-action-will-be-taken-against-employees-who-fail-to-provide-property-details"><span class="t-red">आखिरी मौका!</span> मानव सम्पदा पोर्टल पर अपलोड करें जानकारी, संपत्ति विवरण न देने वाले कर्मचारियों पर होगी विभागीय कार्रवाई </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/573437/avimukteshwarananda--caught-in-a-sexual-abuse-case--faces-the-threat-of-jail-time--he-stated-at-the-hearing-that-the-allegations-were-baseless</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 16:02:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Phensedyl Cough Syrup Case: विभोर राणा और विशाल सिंह की जमानत खारिज, फेन्सिडिल कफ सिरप मामले में पहले हाईकोर्ट ने दी थी अंतरिम जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, विधि संवाददाता।</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फेन्सिडिल कफ सिरप मामले में दो अभियुक्तों विभोर राणा व विशाल सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायालय ने दोनों को 18 दिसंबर को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद दोनों अभियुक्तों को आत्म समर्पण करना होगा।</p>
<p>यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने विभोर राणा और विशाल सिंह की ओर से पृथक-पृथक दाखिल जमानत याचिकाओं पर पारित किया है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन के अनुसार कई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573373/phensedyl-cough-syrup-case--bail-of-vibhor-rana-and-vishal-singh-rejected--high-court-had-earlier-granted-interim-bail-in-phensedyl-cough-syrup-case"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, विधि संवाददाता।</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फेन्सिडिल कफ सिरप मामले में दो अभियुक्तों विभोर राणा व विशाल सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायालय ने दोनों को 18 दिसंबर को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद दोनों अभियुक्तों को आत्म समर्पण करना होगा।</p>
<p>यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने विभोर राणा और विशाल सिंह की ओर से पृथक-पृथक दाखिल जमानत याचिकाओं पर पारित किया है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन के अनुसार कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि फेंसेडिल कफ सिरप और अन्य दवाओं को नशे के लिए प्रयोग करने के लिए इसका अवैध भंडारण किया जा रहा है और अवैध तरीके से इसे बिहार,खरखंड,पश्चिम बंगाल, असम और बांग्लादेश भेजा जा रहा है। इस पर शासन ने 12 फरवरी 2024 को एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम का गठन किया।</p>
<p>बताया गया 8 अप्रैल 2024 को एसटीएफ को जानकारी मिली की एक ट्रक में ट्रांसपोर्ट नगर से भारी मात्र में कफ सिरप लोड करके कूच बिहार पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा है,इस पर एसटीएफ की टीम ने सुल्तानपुर रोड पर उस ट्रक को पकड़ लिया और 52 गत्ते कफ सिरप बरामद किया था। ट्रक से पकड़े गए चालक धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ की गई तो एसटीएफ को पता चला कि पूरे मामले में विभोर राणा और विशाल सिंह की संलिप्तता है। इस पर एसटीएफ ने 11 नवंबर 2025 को सहारनपुर से विभोर राणा और उसके साथियों को गिरफ्तार किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>वाराणसी</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 09:57:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title> Uttrakhand: अदालत परिसरों की सुरक्षा होगी अभेद्य, बगैर आईडी प्रवेश नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्धानी, अमृत विचार। </strong>तमाम भवनों को बम से उड़ाने की मिल रहीं धमकियों के मद्देनजर प्रदेश में सभी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर व्यापक सुरक्षा ऑडिट कर कमियों के त्वरित निराकरण के आदेश दिए गए हैं। बिना पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं मिलेगा। विशेषकर उच्च न्यायालय में प्रवेश केवल वैध आईडी या हाईकोर्ट बार की संस्तुति पर ही संभव होगा।</p>
<p><strong>पर्याप्त पुलिस और पीएसी बल की तैनाती</strong><br />हल्द्वानी। निर्णय लिया गया है कि सभी न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पीएसी बल की तैनाती की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573338/court-premises-will-be-impenetrable--no-entry-without-id"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/gh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्धानी, अमृत विचार। </strong>तमाम भवनों को बम से उड़ाने की मिल रहीं धमकियों के मद्देनजर प्रदेश में सभी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर व्यापक सुरक्षा ऑडिट कर कमियों के त्वरित निराकरण के आदेश दिए गए हैं। बिना पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं मिलेगा। विशेषकर उच्च न्यायालय में प्रवेश केवल वैध आईडी या हाईकोर्ट बार की संस्तुति पर ही संभव होगा।</p>
<p><strong>पर्याप्त पुलिस और पीएसी बल की तैनाती</strong><br />हल्द्वानी। निर्णय लिया गया है कि सभी न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पीएसी बल की तैनाती की जाएगी। प्रवेश द्वारों पर बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था लागू की जाएगी तथा आगंतुकों की प्रभावी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में लगातार मिल रही धमकियों के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।</p>
<p><strong>अदालत परिसरों की सुरक्षा होगी अभेद्य, बगैर आईडी प्रवेश नहीं</strong><br />तमाम भवनों को बम से उड़ाने की मिल रहीं धमकियों के मद्देनजर प्रदेश में सभी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर व्यापक सुरक्षा ऑडिट कर कमियों के त्वरित निराकरण के आदेश दिए गए हैं। बिना पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं मिलेगा। विशेषकर उच्च न्यायालय में प्रवेश केवल वैध आईडी या हाईकोर्ट बार की संस्तुति पर ही संभव होगा।</p>
<p><strong>पर्याप्त पुलिस और पीएसी बल की तैनाती</strong><br />हल्द्वानी। निर्णय लिया गया है कि सभी न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पीएसी बल की तैनाती की जाएगी। प्रवेश द्वारों पर बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था लागू की जाएगी तथा आगंतुकों की प्रभावी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में लगातार मिल रही धमकियों के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:06:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
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