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                <title>Sanjiv Khanna - Amrit Vichar</title>
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                <description>Sanjiv Khanna RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट के 21 न्यायाधीशों ने सार्वजनिक की अपनी संपत्ति, जानिए किसके पास क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना समेत अधिकतर न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। शीर्ष अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर 33 न्यायाधीशों में से 21 ने सोमवार को अपनी संपत्ति घोषित की। न्यायाधीशों अपने खुद के अलावा जीवनसाथी की संपत्ति भी सार्वजनिक कर दी।</p>
<p>न्यायाधीशों ने एक अप्रैल को पूर्ण न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए सोमवार रात शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपनी-अपनी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा घोषित किया। उपलब्ध जानकारी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536903/21-out-of-33-supreme-court-judges-have-made-their-assets-public--know-who-owns-what"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना समेत अधिकतर न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। शीर्ष अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर 33 न्यायाधीशों में से 21 ने सोमवार को अपनी संपत्ति घोषित की। न्यायाधीशों अपने खुद के अलावा जीवनसाथी की संपत्ति भी सार्वजनिक कर दी।</p>
<p>न्यायाधीशों ने एक अप्रैल को पूर्ण न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए सोमवार रात शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपनी-अपनी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा घोषित किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य न्यायाधीश खन्ना के पास दक्षिण दिल्ली में तीन बेडरूम का डीडीए फ्लैट, दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में दो पार्किंग स्पेस के साथ चार बेडरूम का फ्लैट/अपार्टमेंट है, जिसका क्षेत्रफल 2446 वर्ग फीट है। इसी प्रकार गुरुग्राम के सेक्टर 49 के सिसपाल विहार में 2016 वर्ग फीट के क्षेत्रफल वाले चार बेडरूम के फ्लैट/अपार्टमेंट में उनकी 56 फीसदी हिस्सेदारी है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश के पास हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में अविभाजित भूमि के साथ घर के आंशिक मालिक देव राज खन्ना (एचयूएफ) में भी उनका हिस्सा है। न्यायमूर्ति खन्ना द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार, उनके पास सावधि जमा और बैंक खातों में 55.75 लाख रुपये और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ- खाता वर्ष 1989 में खोला गया) में 1.06 करोड़ रुपये हैं। उनके पास 1,77,89,000 रुपये का जीपीएफ है। उन्होंने 29,625 रुपये के वार्षिक प्रीमियम और 14,000 रुपये के शेयरों के साथ भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मनी बैक पॉलिसी ली है। उनके ऊपर कोई देनदारी और ऋण नहीं है।</p>
<p>नामित मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई के बैंक खातों में 19.63 लाख रुपये और पीपीएफ खाते में 6.59 लाख रुपये हैं। उनके पास अमरावती, महाराष्ट्र में एक आवासीय घर (मृत पिता से विरासत में मिला), बांद्रा, मुंबई, महाराष्ट्र में एक आवासीय अपार्टमेंट (स्वयं) और डिफेंस कॉलोनी, नयी दिल्ली में एक आवासीय अपार्टमेंट (स्वयं) है। न्यायमूर्ति गवई के पास महाराष्ट्र के अमरावती और नागपुर के केदापुर और कटोल में कृषि भूमि भी है (जो उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली है)।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश के तौर पर न्यायमूर्ति गवई का उत्तराधिकारी बनने जा रहे न्यायमूर्ति सूर्य कांत के पास चंडीगढ़ के सेक्टर 10 में एक कनाल का मकान है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है), पंचकूला जिले के गोलपुरा गांव में साढ़े 13 एकड़ (लगभग) कृषि भूमि है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है), गुरुग्राम के सुशांत लोक-1 में 300 वर्ग गज का प्लॉट है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है), जीके-1, नई दिल्ली में 285 वर्ग गज के मकान में भूतल और बेसमेंट है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है)।</p>
<p>उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर 18-सी में 192 वर्ग गज का मकान (स्वयं/पति/पत्नी के संयुक्त स्वामित्व में), गुरुग्राम के डीएलएफ-II में 250 वर्ग गज का मकान (स्वयं) घोषित किया है। उनके पास 12 एकड़ की कृषि भूमि में 1/3 हिस्सा और हिसार जिले के पेटवार गांव में एक मकान है, इसके अलावा हिसार के अर्बन एस्टेट-II में 250 वर्ग गज के मकान (पिता से विरासत में मिला) में भी 1/3 हिस्सा है।</p>
<p>चौबीस मई को सेवानिवृत्त होने वाले न्यायमूर्ति ए एस ओका की संपत्तियों में पीपीएफ में 92.35 लाख रुपये, एफडी में 21.76 लाख रुपये, 2022 मॉडल की मारुति बलेनो कार और 5.1 लाख रुपये का कार लोन शामिल है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने नोएडा में 2-बीएचके अपार्टमेंट, इलाहाबाद में एक बंगला और उत्तर प्रदेश में विरासत में मिली कृषि भूमि घोषित की है। उनके पास 1.5 करोड़ रुपये का निवेश भी है।</p>
<p>न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन ने 120 करोड़ रुपये का निवेश किया है और पिछले 10 वर्षों में 91 करोड़ रुपये का कर चुकाया है। शीर्ष न्यायालय में सीधे पदोन्नति (उच्च न्यायालय से नहीं) पाने वाले न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने 2010 में सफदरजंग विकास क्षेत्र, नयी दिल्ली में एक बिल्डर फ्लोर हाउस खरीदा था। उनके पास 2014 में खरीदा गया (सफदरजंग विकास क्षेत्र, नयी दिल्ली) में एक बिल्डर फ्लोर हाउस भी है। वर्ष 2016 में गुलमोहर पार्क, नयी दिल्ली में खरीदे गए एक बिल्डर फ्लोर हाउस में उनके पास संयुक्त स्वामित्व (पति/पत्नी के साथ 50 फीसदी हिस्सा) है।</p>
<p>जिन 12 न्यायाधीशों ने अभी तक अपनी संपत्ति घोषित नहीं की है, वे हैं- न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले, न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 May 2025 15:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वक्फ कानून पर अब 15 मई को गवई की बेंच करेगी सुनवाई, CJI खन्ना हियरिंग से हुए अलग, जानें क्या कहा... </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगले प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई के नेतृत्व वाली पीठ 15 मई को विचार करेगी। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ जैसे ही सुनवाई के लिए बैठी, सीजेआई ने कहा, ‘‘कुछ ऐसे पहलू हैं, जिनसे आप (केंद्र) निपट चुके हैं, लेकिन उस पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।मैं इस अंतरिम चरण में कोई निर्णय या आदेश सुरक्षित नहीं रखना चाहता। इस मामले की सुनवाई यथोचित रूप से शीघ्र करनी होगी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536719/now-the-hearing-on-wakf-law-will-be-held-on-15-may--cji-khanna-recused-himself-from-the-case--know-what-he-said"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/cats109.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगले प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई के नेतृत्व वाली पीठ 15 मई को विचार करेगी। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ जैसे ही सुनवाई के लिए बैठी, सीजेआई ने कहा, ‘‘कुछ ऐसे पहलू हैं, जिनसे आप (केंद्र) निपट चुके हैं, लेकिन उस पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।मैं इस अंतरिम चरण में कोई निर्णय या आदेश सुरक्षित नहीं रखना चाहता। इस मामले की सुनवाई यथोचित रूप से शीघ्र करनी होगी और यह मेरे समक्ष नहीं होगी।’’ </p>
<p>न्यायमूर्ति खन्ना 13 मई को सीजेआई के पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं और उनकी सेवानिवृत्ति के एक दिन बाद न्यायमूर्ति गवई अगले सीजेआई के रूप में उनका स्थान लेंगे। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई की सेवानिवृत्ति का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम आपके (सीजेआई) सामने आकर इस मामले को उठाना पसंद करते, क्योंकि हर सवाल का जवाब होता है। हालांकि, हम आपको परेशान नहीं कर सकते, क्योंकि समय नहीं है।’’ </p>
<p>विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘माननीय न्यायाधीश को (सेवानिवृत्ति के बारे में) याद दिलाना कष्टदायक है।’’ सीजेआई ने जवाब दिया, ‘‘नहीं नहीं, मैं इसका इंतजार कर रहा हूं।’’ इससे पहले, केंद्र ने 17 अप्रैल को शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि वह 5 मई तक न तो वक्फ संपत्तियों को ‘‘वक्फ बाय यूजर’’ के रूप में चिह्नित करेगा, और न ही केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्ड में कोई नियुक्तियां करेगा। केंद्र ने पीठ को यह आश्वासन देते हुए कहा कि संसद द्वारा ‘‘उचित विचार-विमर्श’’ के साथ पारित किए गए कानून पर सरकार का पक्ष सुने बिना रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। </p>
<p>पांच याचिकाओं को अब ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के संबंध में’ शीर्षक दिया गया है और इनमें एआईएमआईएम प्रमुख एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल है। केंद्र ने 25 अप्रैल को अपने हलफनामे में संशोधित अधिनियम को सही ठहराया और संसद द्वारा पारित कानून पर अदालत द्वारा किसी भी ‘‘पूर्ण रोक’’ का विरोध किया। </p>
<p>‘‘वक्फ बाय यूजर’’ संपत्तियों के प्रावधान को उचित ठहराते हुए इसने कहा कि किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप ‘‘न्यायिक आदेश द्वारा विधायी व्यवस्था’’ का निर्माण करेगा। ‘वक्फ बाय यूजर’ से तात्पर्य ऐसी प्रथा से है, जिसमें किसी संपत्ति को धार्मिक या धर्मार्थ बंदोबस्ती (वक्फ) के रूप में मान्यता उसके ऐसे प्रयोजनों के लिए दीर्घकालिक, निर्बाध उपयोग के आधार पर दी जाती है, भले ही मालिक द्वारा वक्फ की कोई औपचारिक और लिखित घोषणा न की गई हो। </p>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद केंद्र ने पिछले महीने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया था। विधेयक को लोकसभा ने 288 सदस्यों के समर्थन से मंजूरी दे दी, जबकि 232 सांसद इसके विरोध में थे। राज्यसभा में इसके पक्ष में 128 तथा विपक्ष में 95 सदस्यों ने मतदान किया था। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/536690/the-supreme-court-rejected-the-petition-of-the-woman-who-claimed-possession-of-the-red-fort--know-what-it-said-----send-feedbac#gsc.tab=0">लाल किले पर कब्जे का दावा करने वाली महिला की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, जानें क्या कहा....</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 May 2025 16:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यायमूर्ति बागची 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में लेंगे शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची सोमवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना उच्चतम न्यायालय परिसर में एक समारोह में शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में न्यायमूर्ति बागची को पद की शपथ दिलाएंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति बागची के शपथ लेने के बाद, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 के मुकाबले 33 हो जाएंगी। न्यायमूर्ति बागची का शीर्ष अदालत में कार्यकाल छह वर्ष से अधिक का होगा। इस दौरान वह भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में भी काम करेंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति के.वी विश्वनाथन के 25 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/527651/justice-bagchi-will-take-oath-as-judge-of-supreme-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/demo-image-v---2025-03-15t215834.183.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची सोमवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना उच्चतम न्यायालय परिसर में एक समारोह में शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में न्यायमूर्ति बागची को पद की शपथ दिलाएंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति बागची के शपथ लेने के बाद, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 के मुकाबले 33 हो जाएंगी। न्यायमूर्ति बागची का शीर्ष अदालत में कार्यकाल छह वर्ष से अधिक का होगा। इस दौरान वह भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में भी काम करेंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति के.वी विश्वनाथन के 25 मई 2031 को सेवानिवृत्त होने पर, न्यायमूर्ति बागची दो अक्टूबर 2031 को अपनी सेवानिवृत्ति तक भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद संभालेंगे। उनका जन्म तीन अक्टूबर, 1966 को हुआ था। केंद्र सरकार ने 10 मार्च को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए न्यायमूर्ति बागची के नाम को मंजूरी दी थी।</p>
<p>प्रधान न्यायाधीश खन्ना की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने छह मार्च को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनके नाम की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति बागची को 27 जून 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्हें चार जनवरी 2021 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था।</p>
<p>न्यायमूर्ति बागची को आठ नवंबर 2021 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में वापस भेज दिया गया और तब से वह वहीं कार्यरत हैं। उन्होंने 13 वर्षों से अधिक समय तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, न्यायमूर्ति बागची ने कानून के विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.amritvichar.com/article/527649/the-death-of-husband-and-wife-in-the-family-shouts">गीजर से निकली गैस के संपर्क में आने से पति-पत्नी की मौत, परिवार में मची चीख-पुकार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 22:00:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishal Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: साथ रहने के आदेश का पालन न करने पर भी पति से गुजारा भत्ता पा सकती है पत्नी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक महिला को अपने पति के साथ रहने के आदेश का पालन नहीं करने के बाद भी उस स्थिति में पति से भरण-पोषण का अधिकार दिया जा सकता है जब उसके पास साथ रहने से इनकार करने का वैध और पर्याप्त कारण हो। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने इस सवाल पर कानूनी विवाद का निपटारा कर दिया कि क्या वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश रखने वाला पति महिला द्वारा साथ रहने के आदेश का पालन न किए जाने की स्थिति में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/516063/important-decision-of-supreme-court--wife-can-get-alimony-from-husband-even-if-he-does-not-follow-the-order-of-living-together"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक महिला को अपने पति के साथ रहने के आदेश का पालन नहीं करने के बाद भी उस स्थिति में पति से भरण-पोषण का अधिकार दिया जा सकता है जब उसके पास साथ रहने से इनकार करने का वैध और पर्याप्त कारण हो। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने इस सवाल पर कानूनी विवाद का निपटारा कर दिया कि क्या वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश रखने वाला पति महिला द्वारा साथ रहने के आदेश का पालन न किए जाने की स्थिति में कानून के आधार पर अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से मुक्त है। </p>
<p>पीठ ने कहा कि इस संबंध में कोई सख्त नियम नहीं हो सकता और यह हमेशा मामले की परिस्थितियों पर निर्भर होना चाहिए। इसने कहा कि यह व्यक्तिगत मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा और उपलब्ध सामग्री तथा सबूतों के आधार पर यह तय करना होगा कि क्या साथ रहने के आदेश के बावजूद पत्नी के पास पति के साथ रहने से इनकार करने का वैध और पर्याप्त कारण है। </p>
<p>न्यायालय ने कहा, ‘‘इस संबंध में कोई सख्त नियम नहीं हो सकता और यह निश्चित रूप से प्रत्येक विशेष मामले में प्राप्त होने वाले विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर होना चाहिए।’’ पीठ ने यह आधिकारिक फैसला झारखंड के एक अलग रह रहे दंपति के मामले में दिया जिनका विवाह एक मई 2014 को हुआ था, लेकिन अगस्त 2015 में अलग हो गए। </p>
<p>पति ने दाम्पत्य अधिकारों की बहाली के लिए रांची में पारिवारिक अदालत का रुख किया और दावा किया कि पत्नी ने 21 अगस्त 2015 को ससुराल छोड़ दिया और उसे वापस लाने के बार-बार प्रयासों के बावजूद वह वापस नहीं लौटी। उसकी पत्नी ने पारिवारिक अदालत के समक्ष अपने लिखित आवेदन में आरोप लगाया कि उसके पति ने उसे प्रताड़ित किया और मानसिक पीड़ा दी तथा चार पहिया वाहन खरीदने के लिए पांच लाख रुपये के दहेज की मांग की। </p>
<p>पारिवारिक अदालत ने 23 मार्च, 2022 को यह कहते हुए वैवाहिक अधिकारों की बहाली का फैसला सुनाया कि पति उसके साथ रहना चाहता है। हालांकि, पत्नी ने आदेश का पालन नहीं किया और इसके बजाय परिवार अदालत में भरण-पोषण के लिए याचिका दायर की। पारिवारिक अदालत ने पति को आदेश दिया कि वह अलग रह रही पत्नी को प्रति माह 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता प्रदान करे। </p>
<p>बाद में, पति ने इस आदेश को झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जिसमें कहा गया कि उसकी पत्नी वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश के बावजूद ससुराल नहीं लौटी और उसने अपील के माध्यम से चुनौती देने का विकल्प नहीं चुना। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं है। </p>
<p>आदेश से व्यथित होकर पत्नी ने शीर्ष अदालत के समक्ष आदेश को चुनौती दी, जिसने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय को उक्त फैसले और उसके निष्कर्षों को इतना अनुचित महत्व नहीं देना चाहिए था। इसने कहा कि इस तथ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि संबंधित महिला को घर में शौचालय का उपयोग करने या ससुराल में खाना पकाने के लिए उचित सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति नहीं थी जो उससे दुर्व्यवहार का संकेत है।</p>
<p> पीठ ने कहा, ‘‘तदनुसार, रांची में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा पारित 4 अगस्त, 2023 के फैसले को रद्द करते हुए अपील स्वीकार की जाती है।’’ इसने कहा कि पारिवारिक अदालत के 15 फरवरी, 2022 के आदेश को बरकरार रखा जाता है और पति को अपनी अलग रह रही पत्नी को 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता प्रदान करने का निर्देश दिया जाता है। न्यायालय ने कहा, ‘‘यह आवेदन दाखिल करने की तारीख,तीन अगस्त, 2019 से देय होगा। भरण-पोषण का बकाया तीन समान किस्तों में भुगतान किया जाएगा।’’ </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/515994/priyanka-gandhi-said-on-the-falling-value-of-rupee-against-dollar--prime-minister-should-answer-the-people-of-the-country">डालर के मुकाबले रुपए की गिरती कीमत पर बोलीं प्रियंका गांधी- देश की जनता को जवाब दें प्रधानमंत्री</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2025 21:36:49 +0530</pubDate>
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