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                <title>Delhi High Court - Amrit Vichar</title>
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                <description>Delhi High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आबकारी नीति :  न्यायमूर्ति शर्मा ने मामले से खुद को अलग करने से इनकार किया, केजरीवाल की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली :</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार करते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक घंटे से अधिक समय तक हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के न्यायाधीश पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, और न्यायाधीश किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579446/justice-sharma-refuses-to-recuse-himself-from-the-case--dismisses-kejriwal-s-plea"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली :</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार करते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक घंटे से अधिक समय तक हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के न्यायाधीश पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, और न्यायाधीश किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को बिना किसी आधार के किसी संस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि किसी न्यायाधीश पर व्यक्तिगत हमला न्यायपालिका पर ही हमला होता है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति शर्मा ने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें हटाने की याचिकाओं में वर्णित विवरण अनुमानों और "कथित झुकावों" पर आधारित था। न्यायाधीश ने कहा, "यह अदालत अपने और संस्था के लिए खड़ी रहेगी... मैं खुद को इस मामले से अलग नहीं करूंगी।"</p>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में अपनी रिहाई के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका की सुनवाई कर रही न्यायाधीश के खिलाफ कई आपत्तियां उठाई थीं, जिनमें यह भी शामिल था कि उन्होंने पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था और मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर राहत देने से भी इनकार कर दिया था। केजरीवाल के अलावा, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी न्यायाधीश को मामले से अलग करने के लिए आवेदन दायर किए थे। </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 22:03:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एपस्टीन फाइल्स केस : हरदीप पुरी की बेटी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इंकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक सामाजिक कार्यकर्ता की अपील खारिज कर दी जिसमें उसने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने उसे अपनी शिकायतें एकल न्यायाधीश के समक्ष रखने को कहा, जिन्होंने यह आदेश दिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने एकल न्यायाधीश से कहा कि अंतरिम आदेश को जारी रखने या निरस्त करने के मुद्दे पर यथाशीघ्र अंतिम निर्णय लिया जाए। अदालत ने अपीलकर्ता कुणाल शुक्ला को एकल न्यायाधीश के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577679/epstein-files-case--high-court-refuses-to-hear-petition-filed-against-hardeep-puri-s-daughter"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/039.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक सामाजिक कार्यकर्ता की अपील खारिज कर दी जिसमें उसने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने उसे अपनी शिकायतें एकल न्यायाधीश के समक्ष रखने को कहा, जिन्होंने यह आदेश दिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने एकल न्यायाधीश से कहा कि अंतरिम आदेश को जारी रखने या निरस्त करने के मुद्दे पर यथाशीघ्र अंतिम निर्णय लिया जाए। अदालत ने अपीलकर्ता कुणाल शुक्ला को एकल न्यायाधीश के समक्ष हिमायनी पुरी की निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, "मामले को 23 अप्रैल को एकल न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। एकल न्यायाधीश पक्षों की सुनवाई के बाद, बिना किसी पूर्व टिप्पणी से प्रभावित हुए, यथाशीघ्र निषेधाज्ञा या स्थगन हटाने के आवेदन पर अंतिम फैसला करेंगे।" शुक्ला ने अपनी अपील में आरोप लगाया कि एकल न्यायाधीश ने 17 मार्च को बिना नोटिस दिए या जवाब दाखिल करने का समय दिए बगैर आदेश पारित कर उन्हें संबंधित पोस्ट को सोशल मीडिया पर प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से रोक दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">हिमायनी पुरी ने अपने मुकदमे में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने और कई संस्थाओं को कथित मानहानिकारक सामग्री प्रसारित करने से रोकने की मांग करते हुए दावा किया था कि उन्हें एप्स्टीन और उसके अपराधों से जोड़ने के लिए एक सुनियोजित व दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान चलाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:29:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अल्पसंख्यक आयोग में रिक्तियां : दिल्ली हाईकोर्ट ने समयसीमा को लेकर केंद्र पर नाराजगी जताई </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक ''समयसीमा'' बताने में नाकाम रहने को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर नाराजगी जाहिर की। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस बात पर गौर करते देते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के उप सचिव को दो सप्ताह के भीतर इस चूक का स्पष्टीकरण देने को कहा कि उसने रिक्तियों को भरने की समयसीमा के संबंध में विशेष रूप से एक हलफनामा मांगा था। </p>
<p>अदालत ने कहा, ''हम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575879/vacancies-in-minority-commission--delhi-high-court-expresses-displeasure-with-centre-over-timeline"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक ''समयसीमा'' बताने में नाकाम रहने को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर नाराजगी जाहिर की। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस बात पर गौर करते देते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के उप सचिव को दो सप्ताह के भीतर इस चूक का स्पष्टीकरण देने को कहा कि उसने रिक्तियों को भरने की समयसीमा के संबंध में विशेष रूप से एक हलफनामा मांगा था। </p>
<p>अदालत ने कहा, ''हम यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि हलफनामे में दिए गए कथन आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली समयसीमा को किस प्रकार बयां करते हैं।'' उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कहा, ''देखिये, अदालत के आदेश को कितनी लापरवाही से लिया गया है। अदालत की अवहेलना की गई है। यह अधिकारी कौन है?... अधिकारी द्वारा दाखिल हलफनामा देखिए। हमें उसे तलब कर उससे पूछना होगा कि समयसीमा का क्या मतलब होता है। बेहतर होगा कि आप उसे अपने कक्ष में बुलाएं।'' </p>
<p>अदालत ने पाया कि हलफनामे में ''केवल यही कहा गया है'' कि मंत्रालय ने रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त बायोडाटा और नामांकन की जांच की जा रही है। हलफनामे में कहा गया है कि प्रस्तावों की जांच की जा रही है और यह मामला सक्षम प्राधिकार के समक्ष विचारधीन है। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी। </p>
<p>छह फरवरी को अदालत ने केंद्र को आयोग में रिक्त पदों को भरने के मुद्दे पर एक ''बेहतर हलफनामा'' दाखिल करने और नियुक्ति प्रक्रिया के विवरण के साथ-साथ इसके पूरा होने की समयसीमा बताने को कहा था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अवर सचिव द्वारा इस मुद्दे पर दाखिल की गई वस्तु स्थिति रिपोर्ट ''बिल्कुल निरर्थक और अस्पष्ट'' थी। </p>
<p>उच्च न्यायालय ने 30 जनवरी को, आयोग में रिक्त पदों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उसने पाया कि आयोग पिछले साल अप्रैल से बिना अध्यक्ष या सदस्य के है। अदालत ने केंद्र से सभी रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा था। उच्च न्यायालय, आयोग में रिक्त पदों को लेकर याचिकाकर्ता मुजाहिद नफीस द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575879/vacancies-in-minority-commission--delhi-high-court-expresses-displeasure-with-centre-over-timeline</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:32:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> 24 घंटे में हटाएं सोशल मीडिया पोस्ट... Epstein मामले में मंत्री हरदीप पुरी की बेटी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को दोषी अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का मंगलवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया मंचों पर किसी भी तरह से ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से भी रोका। हिमायनी पुरी द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई कर रहीं न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो मंच ऐसी सामग्री को हटा देंगे या उस (सामग्री) तक पहुंच को अवरुद्ध कर देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575470/epstein-files-case--delete-social-media-posts-within-24-hours----delhi-high-court-issues-major-decision-on-petition-filed-by-minister-hardeep-puri-s-daughter"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(32)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को दोषी अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का मंगलवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया मंचों पर किसी भी तरह से ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से भी रोका। हिमायनी पुरी द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई कर रहीं न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो मंच ऐसी सामग्री को हटा देंगे या उस (सामग्री) तक पहुंच को अवरुद्ध कर देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि हिमायनी पुरी के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि अंतरिम राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। उच्च न्यायालय ने कहा, ''परिणामस्वरूप, अगली सुनवाई की तारीख तक निम्नलिखित निर्देश जारी किए जाते हैं।'' अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई अगस्त में तय की। वादी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि वित्त पेशेवर के रूप में उनकी मुवक्किल की ''वैश्विक प्रतिष्ठा'' है जिसकी रक्षा करने की जरूरत है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ''पूरी तरह से झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मानहानिकारक सामग्री उन उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रकाशित और साझा की गई थी जो स्वयं को ''पत्रकार'' या 'कंटेंट क्रिएटर' बताते हैं। जेठमलानी ने अदालत को यह भी बताया कि वादी न्यूयॉर्क की निवासी हैं और उन्होंने अदालत से वैश्विक स्तर पर मानहानिकारक सामग्री को अवरुद्ध करने का आदेश पारित करने का आग्रह किया। मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि इस तरह के आदेश किसी भी देश में पारित नहीं किए गए हैं और आपत्तिजनक सामग्री को देश-विशेष के आधार पर ही ब्लॉक किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अदालत को बताया कि वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया सामग्री को हटाने का मुद्दा उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष लंबित है। फिलहाल सोशल मीडिया सामग्री हटाने के आदेश को भारत तक सीमित रखते हुए अदालत ने उपयोगकर्ताओं और सोशल मीडिया मंचों को समन जारी किए और उन्हें मुख्य मामले के साथ-साथ अंतरिम राहत से जुड़ी अर्जी पर भी अपना जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत के बाहर अपलोड की गई सामग्री को सोशल मीडिया मंच भारत में ब्लॉक करेंगे। प्रतिवादियों में से एक के वकील ने दलील दी कि उसका वीडियो ''पत्रकारीय स्वतंत्रता'' के तहत बनाया गया है और स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि मामले पर विचार की आवश्यकता है और प्रतिवादियों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हिमायनी पुरी ने अपने मुकदमे में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है और कई संस्थाओं को मानहानिकारक सामग्री फैलाने से रोकने का आदेश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें एप्स्टीन और उसके अपराधों से जोड़ने के लिए एक ''समन्वित और दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान'' चलाया गया। उन्होंने आरोपियों से बिना शर्त माफी मांगने और अपने पोस्ट वापस लेने की भी मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में कहा गया है, ''22 फरवरी 2026 के आसपास से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मंचों, जिनमें 'एक्स', यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन, डिजिटल समाचार पोर्टल और अन्य वेब आधारित प्रकाशन शामिल हैं, पर झूठे, भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट, लेख, वीडियो और सामग्री प्रकाशित और प्रसारित की गई।'' हिमायनी पुरी ने दावा किया कि वह एक सफल वित्त और निवेश पेशेवर हैं और उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री की बेटी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके मुकदमे के अनुसार, प्रतिवादियों ने यह ''निराधार आरोप'' फैलाए कि हिमायनी पुरी के जेफ्री एप्स्टीन के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यावसायिक, वित्तीय या व्यक्तिगत संबंध थे। याचिका में कहा गया कि ये सभी आरोप पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन हैं। एप्स्टीन फाइल्स हजारों पन्नों के दस्तावेज का एक संग्रह है, जो एप्स्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल के खिलाफ यौन तस्करी से जुड़ी दो आपराधिक जांचों से संबंधित है। इनमें यात्रा रिकॉर्ड, रिकॉर्डिंग और ईमेल शामिल हैं और 2019 में हिरासत में एप्स्टीन की मौत के बाद से ये लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 16:36:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉर्डेलिया क्रूज मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुक्रवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था। </p>
<p>फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा, ''याचिका स्वीकार की जाती है।'' फैसले की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है। केंद्र सरकार ने 19 जनवरी को पारित सीएटी के उस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573519/cordelia-cruise-case-delhi-high-court-approves-disciplinary-action-against"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/samir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुक्रवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था। </p>
<p>फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा, ''याचिका स्वीकार की जाती है।'' फैसले की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है। केंद्र सरकार ने 19 जनवरी को पारित सीएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 18 अगस्त, 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए 'चार्ज मेमोरेंडम' (आरोपपत्र) को रद्द कर दिया गया था। </p>
<p>वर्ष 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2021 में मुंबई के स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ कांड में फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। सीएटी के समक्ष वानखेड़े ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए एक मूल आवेदन दायर किया। </p>
<p>एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बाद भी कथित रूप से उसके कानूनी विभाग से गोपनीय जानकारी मांगने के लिए अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई थी। यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने एनसीबी के विधिक अधिकारी से जांच की ''दिशा मोड़ने'' का ''आश्वासन'' भी मांगा था।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले सीएटी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने सीएटी से 14 जनवरी को या अगले 10 दिनों के भीतर मुख्य मामले पर फैसला करने के लिए ''ईमानदारी से प्रयास'' करने को कहा था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/573519/cordelia-cruise-case-delhi-high-court-approves-disciplinary-action-against</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 14:17:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अभिनेत्री काजोल के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एआई और डीपफेक पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल के पक्ष में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने काजोल के नाम, तस्वीर, आवाज और उनकी पूरी पहचान के गलत इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और सोशल मीडिया के जरिए मशहूर हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। यह व्यक्ति की गरिमा पर सीधा हमला है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573345/high-court-gives-major-decision-in-favor-of-actress-kajol--bans-ai-and-deepfake"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/kajol.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल के पक्ष में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने काजोल के नाम, तस्वीर, आवाज और उनकी पूरी पहचान के गलत इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और सोशल मीडिया के जरिए मशहूर हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। यह व्यक्ति की गरिमा पर सीधा हमला है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच की जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनाया। इस मामले में काजोल ने कई वेबसाइट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज, एआई चैटबॉट साइट्स और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। इन अज्ञात लोगों को कानूनी भाषा में 'जॉन डो' कहा जाता है, जिनकी पहचान अभी सामने नहीं आई है, लेकिन जो ऑनलाइन गलत गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">काजोल की याचिका में आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में उनकी तस्वीरों और नाम का इस्तेमाल करके ऑनलाइन मर्चेंडाइज बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा, एआई की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही थीं। कुछ वेबसाइट्स पर उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए अश्लील एआई चैटबॉट चलाए जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि काजोल भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की एक जानी-मानी और सम्मानित अभिनेत्री हैं, जिनका करियर लगभग चार दशकों का रहा है। उन्हें पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी पहचान एक मजबूत ब्रांड है, जिसे उन्होंने सालों की मेहनत से बनाया है। इस पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करना कानून के खिलाफ है और ऐसे मामलों में अदालत का हस्तक्षेप जरूरी है, ताकि किसी भी तरह का गलत फायदा उठाने से रोका जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि जो वेबसाइट्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस काजोल के नाम और तस्वीर वाले सामान बेच रहे थे, अगर ऐसा सामान घटिया क्वालिटी का हुआ, तो इससे काजोल की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है। जज ज्योति सिंह ने अपने आदेश में कहा, ''सभी दस्तावेज और शिकायत को देखने के बाद यह साफ है कि काजोल का मामला मजबूत है। अगर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती, तो उन्हें नुकसान हो सकता था, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं है।'' अदालत ने इस पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस आदेश के तहत अदालत ने सभी आरोपियों और अज्ञात लोगों को काजोल की पहचान के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। इसमें उनका नाम, फोटो, आवाज, चेहरा, हाव-भाव और उनकी पहचान से जुड़ा हर पहलू शामिल है। खासतौर पर एआई, जनरेटिव एआई, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग और चैटबॉट जैसे टूल्स के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई गई है। कोर्ट ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और मर्चेंडाइज बेचने वालों को आदेश दिया है कि वे 72 घंटे के भीतर काजोल से जुड़े सभी गलत प्रोडक्ट्स को हटाएं और संबंधित लिंक डिलीट करें। </p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स को भी आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब को भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन और यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी आदेश दिया गया है कि वे अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट होस्ट करने वाली वेबसाइट्स को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक करें। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 18:26:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> सपोर्ट में आया पूरा बॉलीवुड ....तिहाड़ में बंद राजपाल यादव की पत्नी का आया बयान, सभी ने दिया साथ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने बुधवार को कहा कि 'चेक बाउंस' मामलों में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद फिल्म उद्योग के कई लोग हास्य कलाकार के समर्थन में आगे आए हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा और समय देने की याचिका खारिज किए जाने के बाद राजपाल यादव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। अभिनेता को करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। यादव को 'मुझसे शादी करोगी', 'वक्त', 'फिर हेरा फेरी', 'पार्टनर', 'भूल भुलैया', 'हंगामा' और 'चुप चुप के' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570859/film-stars-extended-a-helping-hand----rajpal-yadav-s-wife--who-is-in-tihar-jail--issued-a-statement--and-everyone-expressed-support"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(30)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने बुधवार को कहा कि 'चेक बाउंस' मामलों में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद फिल्म उद्योग के कई लोग हास्य कलाकार के समर्थन में आगे आए हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा और समय देने की याचिका खारिज किए जाने के बाद राजपाल यादव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। अभिनेता को करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। यादव को 'मुझसे शादी करोगी', 'वक्त', 'फिर हेरा फेरी', 'पार्टनर', 'भूल भुलैया', 'हंगामा' और 'चुप चुप के' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म उद्योग से अभिनेता सोनू सूद, गुरमीत चौधरी और संगीतकार राव इंदरजीत यादव सहित कई लोगों ने परिवार को आर्थिक सहायता की पेशकश की तथा अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील की। राधा यादव ने कहा, "सब लोग उनके साथ खड़े हैं। फिल्म उद्योग ने बहुत सहयोग किया है। जो भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, हम सबका बहुत धन्यवाद करते हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">राजपाल यादव के 25 वर्षों से मैनेजर रहे गोल्डी जैन ने कहा कि प्रमुख अभिनेताओं से लेकर निर्देशकों और निर्माताओं तक, कई लोगों ने सहायता की पेशकश की है। मीडिया में आई एक खबर में दावा किया गया कि अभिनेता सलमान खान, अजय देवगन, वरुण धवन और फिल्म निर्माता डेविड धवन ने भी आर्थिक मदद की पेशकश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैन ने कहा, "लोगों ने मदद के लिए पहल की है। सभी ने मदद का वादा किया है, इसका मतलब सिर्फ आर्थिक मदद नहीं है। यह सही है कि (सलमान, अजय, वरुण और डेविड धवन) इन लोगों ने फोन किया है। किस रूप में और कैसे मदद करेंगे, यह अभी तय होना बाकी है। वे सभी राजपाल भाई के शुभचिंतक हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "जमानत पर सुनवाई कल है और अगर सब ठीक रहा तो हम संवाददाता सम्मेलन करेंगे।" यादव ने वर्ष 2010 में अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'अता पता लापता' के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्मसमर्पण से पहले यादव ने 'बॉलीवुड हंगामा' से कहा था कि उनके पास बकाया राशि चुकाने के लिए पैसे या कोई अन्य साधन नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने प्रसिद्ध सहकर्मियों से मदद मांगी, तो अभिनेता ने कहा था, "इंडस्ट्री में हर कोई अपने लिए है।" </p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में कहा कि यादव को उनके खिलाफ दर्ज सातों मामलों में प्रत्येक में 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना है और निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले जमा की गई राशि शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी की जाए। अभिनेता सोनू सूद उद्योग जगत से सबसे पहले यादव के समर्थन में आगे आए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वह राजपाल यादव को अपनी एक फिल्म में लेंगे और इसके लिए अग्रिम भुगतान के रूप में 'साइनिंग अमाउंट' दे रहे हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के स्नातक यादव कई लोकप्रिय बॉलीवुड कॉमेडी फिल्मों का अहम हिस्सा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूद ने अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील करते हुए कहा, "भविष्य के काम के बदले समायोजित होने वाला एक छोटा-सा 'साइनिंग अमाउंट' कोई दान नहीं, बल्कि सम्मान है। जब हममें से कोई कठिन दौर से गुजर रहा हो... यही तरीका है दिखाने का कि हम सिर्फ एक इंडस्ट्री नहीं, उससे बढ़कर हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/570392/taskmaster-is-bhansali-----madhuri-dixit-spoke-about-her-work-experience--describing-devdas-as-visually-rich-and-a-classic"><span class="t-red">टास्कमास्टर है भंसाली.... </span>माधुरी दीक्षित ने काम करने के अनुभव पर की बात, देवदास को बताया विजुअली रिच और क्लासिक्स</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/570859/film-stars-extended-a-helping-hand----rajpal-yadav-s-wife--who-is-in-tihar-jail--issued-a-statement--and-everyone-expressed-support</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:43:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ghuskhor Pandit Controversy : दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर नेटफ्लिक्स से हटेगी 'घूसखोर पंडत' की सारी प्रचार-सामग्री, निर्देशक नीरज पांडे ने दी सफाई...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई। </strong>नेटफ्लिक्स पर टीजर रिलीज के साथ विवादों में घिरी अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म “घूसखोर पंडत” सुर्खियों में है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज में रोष का माहौल है और देश के कई राज्यों से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठ रही है। अब मामले में नया अपडेट आया है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता विनीत जिंदल की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म के नाम और उससे जुड़ी सभी प्रचार-सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटाने की घोषणा की है।</p>
<p>इसके अलावा, फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने मामले पर अपना पक्ष भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570273/ghuskhor-pandit-controversy--all-promotional-material-for--ghuskhor-pandit--to-be-removed-from-netflix-following-delhi-high-court-s-order--director-neeraj-pandey-issues-clarification"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(12)4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई। </strong>नेटफ्लिक्स पर टीजर रिलीज के साथ विवादों में घिरी अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म “घूसखोर पंडत” सुर्खियों में है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज में रोष का माहौल है और देश के कई राज्यों से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठ रही है। अब मामले में नया अपडेट आया है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता विनीत जिंदल की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म के नाम और उससे जुड़ी सभी प्रचार-सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटाने की घोषणा की है।</p>
<p>इसके अलावा, फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने मामले पर अपना पक्ष भी रखा है। अधिवक्ता विनीत जिंदल द्वारा याचिका में दावा किया गया है कि टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जानबूझकर अपमानजनक बनाया गया है। अब फैसले के बाद फिल्म से जुड़ी सारी प्रचार सामग्री को हटाने का निर्देश दे दिया गया है।</p>
<h5><strong>निर्देशक नीरज पांडे ने दी सफाई</strong></h5>
<p>“घूसखोर पंडत” के निर्देशक नीरज पांडे ने फिल्म को लेकर बढ़ते विवाद पर सफाई दी है और उनका कहना है कि फिल्म का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा, "हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, और 'पंडित' शब्द का प्रयोग केवल एक काल्पनिक पात्र के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कार्यों और विकल्पों पर केंद्रित है और किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी या प्रतिनिधित्व नहीं करती है।"</p>
<p>उन्होंने आगे लिखा, "एक फिल्म निर्माता के रूप में, मैं अपने काम को गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ करता हूं। यह फिल्म, मेरी पिछली फिल्मों की तरह, पूरी ईमानदारी से बनाई गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना है। हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है, और हम उन भावनाओं को समझते हैं। इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, हमने फिलहाल सभी प्रचार सामग्री हटाने का निर्णय लिया है, क्योंकि हमारा मानना ​​है कि फिल्म को पूरी तरह से देखा जाना चाहिए और उस कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए जिसे हम बताना चाहते हैं, न कि आंशिक झलक के आधार पर। मैं जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म साझा करने के लिए उत्सुक हूं।" कुल मिलाकर अब फिल्म विवादों के बीच सीधा नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। हालांकि फिल्म किस दिन रिलीज होगी, उसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/570273/ghuskhor-pandit-controversy--all-promotional-material-for--ghuskhor-pandit--to-be-removed-from-netflix-following-delhi-high-court-s-order--director-neeraj-pandey-issues-clarification</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 13:32:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया जामिया के पूर्व कुलपति इकबाल हुसैन का निलंबन, जानें क्या कहा  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>दिल्ली उच्च न्यायाललय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर इक़बाल हुसैन के निलंबन को निरस्त करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ चलायी गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई न तो उनके पक्ष में थी और न ही संस्थान के पक्ष में। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंड पीठ ने प्रोफेसर हुसैन की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उनके निलंबन को चुनौती दी गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जेएमआई विश्वविद्यालय ने सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि उसने छह सितंबर 2024 के निलंबन आदेश को पहले ही वापस ले लिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569766/the-delhi-high-court-has-revoked-the-suspension-of-former-jamia-vice-chancellor-iqbal-husain--read-on-to-find-out-what-the-court-said"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(18).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>दिल्ली उच्च न्यायाललय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर इक़बाल हुसैन के निलंबन को निरस्त करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ चलायी गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई न तो उनके पक्ष में थी और न ही संस्थान के पक्ष में। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंड पीठ ने प्रोफेसर हुसैन की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उनके निलंबन को चुनौती दी गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जेएमआई विश्वविद्यालय ने सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि उसने छह सितंबर 2024 के निलंबन आदेश को पहले ही वापस ले लिया है और इसके लिए 20 जनवरी 2026 को एक नया आदेश जारी किया गया था। न्यायालय ने इसी बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रोफेसर हुसैन को उनकी अकादमिक और शैक्षिक जिम्मेदारियां फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी। साथ ही न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जब तक अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे एस्टेट ऑफिसर के तौर पर काम नहीं करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने कहा कि विभागीय जांच डेढ़ साल से ज़्यादा समय से लंबित थी और माना कि इतनी लंबी जांच से बेवजह परेशानी होती है। इसलिए, पीठ ने विश्वविद्यालय को छह हफ़्ते के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश दिया। यह मामला जेएमआई की कार्यकारी परिषद के एक फैसले से जुड़ा है, जिसमें विधि संकाय के पूर्व डीन और सेवा न्यायशास्त्र के जाने-माने विशेषज्ञ प्रोफेसर हुसैन से विश्वविद्यालय के जमीन खरीदने के पहले अधिकार के बारे में राय देने को कहा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोफेसर हुसैन ने जमीन खरीदने के खिलाफ सलाह देते हुए सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को अपनी मौजूदा जमीन का सही इस्तेमाल करना चाहिए और मेडिकल कॉलेज एवं दूसरे अकादमिक विकास जैसी जरूरी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बचाने चाहिए। उनके विचार का कार्यकारी परिषद के ज़्यादातर सदस्यों ने समर्थन किया, जिसके बाद यह तय हुआ कि विश्वविद्यालय जमीन नहीं खरीदेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोफेसर हुसैन ने परिषद के निर्देश पर काम करते हुए औपचारिक रूप से जमीन मालिक को फैसले की जानकारी दी और कहा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। प्रोफेसर हुसैन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अद्वैत घोष ने अधिवक्ता अंकुर चिब्बर के साथ मिलकर कहा कि कार्यकारी परिषद के फैसले के मुताबिक काम करने के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर द्वेष की वजह से प्रोफेसर को निलंबित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रोफेसर हुसैन पर कोई गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। उच्च न्यायालय ने अपील का निपटारा करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही को समय पर पूरा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और संबंधित विश्वविद्यालय अधिकारियों को तुरंत आदेश की जानकारी देने का निर्देश दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 13:03:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधि छात्रा को दिल्ली HC ने लगाई फटकार, टी20 विश्व कप में बांग्लादेश को खेलने से रोकने के लिए दायर की थी याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक विधि छात्रा को आगामी पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को रोकने के उद्देश्य से जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने के लिए फटकार लगाई। याचिका में छात्रा ने बांग्लादेश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी के खिलाफ अत्याचार के कारण वहां की टीम को खेलने की इजाजत न दिये जाने का अनुरोध किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति तभी दे, जब यह पुष्टि हो जाए कि देश किसी भी मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568587/delhi-hc-reprimands-law-student-for-petitioning-to-prevent-bangladesh-from-participating-in-the-t20-world-cup"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(82)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक विधि छात्रा को आगामी पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को रोकने के उद्देश्य से जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने के लिए फटकार लगाई। याचिका में छात्रा ने बांग्लादेश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी के खिलाफ अत्याचार के कारण वहां की टीम को खेलने की इजाजत न दिये जाने का अनुरोध किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति तभी दे, जब यह पुष्टि हो जाए कि देश किसी भी मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं कर रहा है। सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिका के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने याचिकाकर्ता की वकील देवयानी सिंह से पूछा, "यह किस तरह की याचिका है? जो भी विचार आपके मन में आता है, वही रिट याचिका का विषय बन जाता है?"</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में आईसीसी से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित उत्पीड़न, लक्षित हिंसा, भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या, मंदिर को अपवित्र करने और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच, परीक्षण और दस्तावेजीकरण करने और एक निर्धारित समय सीमा के भीतर इस माननीय न्यायालय को एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित करने का भी अनुरोध किया गया था। पीठ ने इस बात की जांच की कि क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन करने वाली आईसीसी को उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन किया जा सकता है और याचिकाकर्ता को जनहित याचिका पर आगे बढ़ने में सावधानी बरतने की सलाह दी। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपना समय और अदालत के संसाधनों को बर्बाद करने के बजाय "रचनात्मक कार्य" करने और "कुछ अच्छे मुद्दे उठाने" के लिए कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, "आप कानून की छात्रा हैं। यह सब क्या है? जरा सोचिए। इस तरह की याचिकाएं दायर करके आप अदालत का समय बेवजह बर्बाद कर रही हैं। समय बर्बाद करने के बजाय कुछ रचनात्मक काम कीजिए। अगर आप जिद करती हैं, तो हम आप पर भारी जुर्माना लगा देंगे।" अंततः अदालत ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 16:43:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका : रेप पीड़िता के पिता की मौत के मामले में खारिज की जमानत याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को बताया कि कुलदीप सिंह सेंगर एवं अन्य को निचली अदालत ने इस मामले में चार मार्च 2020 को दोषी ठहराया था। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने सेंगर को 10 वर्ष का कठोर कारावास, जुर्माना और मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। कुलदीप सिंह सेंगर ने निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी। याचिका में कहा गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568320/kuldeep-singh-sengar-suffers-major-setback-from-delhi-high-court--bail-rejected-in-case-of-rape-victim-s-father-s-death"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/cats227.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को बताया कि कुलदीप सिंह सेंगर एवं अन्य को निचली अदालत ने इस मामले में चार मार्च 2020 को दोषी ठहराया था। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने सेंगर को 10 वर्ष का कठोर कारावास, जुर्माना और मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। कुलदीप सिंह सेंगर ने निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि जब तक इस आदेश के खिलाफ उसकी अपील लंबित है तब तक सजा को निलंबित किया जाना चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">सीबीआई ने अपीलकर्ता की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उच्च न्यायालय ने कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा दायर सजा निलंबन की याचिका को खारिज कर दिया है। उल्लेखनीय है कि नाबालिग लड़की से बलात्कार से संबंधित मामले में उच्चतम न्यायालय ने अभियुक्त को जमानत देने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से 23 दिसंबर को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले, सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बताते चलें, उन्नाव दुष्कर्म मामले ने देशभर में भारी आक्रोश पैदा किया था। दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उसके कारावास की सजा सुनाई थी, साथ ही 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>उन्नाव</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568320/kuldeep-singh-sengar-suffers-major-setback-from-delhi-high-court--bail-rejected-in-case-of-rape-victim-s-father-s-death</link>
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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उन्नाव रेप केस : पीड़िता ने और साक्ष्य, दस्तावेज पेश करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का किया रुख </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप  मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ कुलदीप सेंगर की ओर से दायर अपील में और तथ्य रिकॉर्ड पर लाने के लिए पीड़िता ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। भाजपा से निष्कासित किये जा चुके सेंगर की अपील के सिलसिले में दायर अपनी अर्जी में पीड़िता ने कहा कि वह अदालत के समक्ष ऐसे तथ्य और दस्तावेज पेश करना चाहती है जो ''हालिया घटनाक्रमों'' के साथ-साथ खुद उसे और उसके परिवार के खतरे को दर्शाते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अर्जी में यह भी अनुरोध किया गया है कि उन्नाव स्थित उसके स्कूल के दो अधिकारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567861/unnao-rape-case--the-victim-has-approached-the-delhi-high-court-to-present-further-evidence-and-documents"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-10/विधायक-कुलदीप-सिंह-सेंगर.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप  मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ कुलदीप सेंगर की ओर से दायर अपील में और तथ्य रिकॉर्ड पर लाने के लिए पीड़िता ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। भाजपा से निष्कासित किये जा चुके सेंगर की अपील के सिलसिले में दायर अपनी अर्जी में पीड़िता ने कहा कि वह अदालत के समक्ष ऐसे तथ्य और दस्तावेज पेश करना चाहती है जो ''हालिया घटनाक्रमों'' के साथ-साथ खुद उसे और उसके परिवार के खतरे को दर्शाते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अर्जी में यह भी अनुरोध किया गया है कि उन्नाव स्थित उसके स्कूल के दो अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएं, ताकि उसकी (पीड़िता की) जन्मतिथि सत्यापित हो सके। पीड़िता ने आरोप लगाया कि सेंगर ने जांच को प्रभावित किया और मुकदमे में उसकी उम्र से संबंधित फर्जी और झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, जिन्हें अपील में भी आधार बनाया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने पाया कि अपील सुनवाई के अंतिम चरण में है और पीड़िता की अर्जी पर विचार के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की। पीठ ने पीड़िता के वकील को 31 जनवरी तक अर्जी के साथ संबंधित दस्तावेज दाखिल करने को कहा और सेंगर तथा सीबीआई को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के 23 दिसंबर 2025 के आदेश में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था। आदेश में कहा गया था कि वह पहले ही सात साल पांच महीने कारावास में बिता चुका है। सजा के निलंबन का आदेश न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ द्वारा पारित किया गया था। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने 29 दिसंबर 2025 को इस आदेश पर रोक लगा दी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">बलात्कार मामले में दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने संबंधी अपील के लंबित रहने तक उच्च न्यायालय ने सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया है। सेंगर ने बलात्कार मामले में दिसंबर 2019 के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। सेंगर ने 2017 में नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया था। </p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सेंगर 10 साल की कैद की सजा काट रहे हैं और उन्हें उस मामले में जमानत नहीं मिली है। बलात्कार का मामला और इससे जुड़े अन्य मामले एक अगस्त 2019 को शीर्ष अदालत के निर्देश पर उत्तर प्रदेश की एक अदालत से दिल्ली स्थानांतरित किए गए थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>उन्नाव</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567861/unnao-rape-case--the-victim-has-approached-the-delhi-high-court-to-present-further-evidence-and-documents</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 18:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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