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                <title>Haldwani - Amrit Vichar</title>
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                <title> Uttrakhand: चोरगलिया क्षेत्र में खनन कारोबारी ने खुद को मारी गोली, मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> हल्द्वानी शहर के चोरगलिया थाना क्षेत्र से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। गजेपुर गांव निवासी खनन कारोबारी कमलेश बेलवाल (35) ने सोमवार की देर रात अपने घर में लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल लाए लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, घटना से पहले घर में किसी बात को लेकर पारिवारिक कहासुनी हुई थी। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने पर कमलेश बेलवाल ने आवेश में आकर अपनी लाइसेंसी पिस्टल उठाई और खुद को गोली मार ली। गोली की आवाज सुनते ही परिजन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573336/mining-businessman-shot-himself-in-chorgalia-area--died"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/goli2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> हल्द्वानी शहर के चोरगलिया थाना क्षेत्र से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। गजेपुर गांव निवासी खनन कारोबारी कमलेश बेलवाल (35) ने सोमवार की देर रात अपने घर में लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल लाए लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, घटना से पहले घर में किसी बात को लेकर पारिवारिक कहासुनी हुई थी। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने पर कमलेश बेलवाल ने आवेश में आकर अपनी लाइसेंसी पिस्टल उठाई और खुद को गोली मार ली। गोली की आवाज सुनते ही परिजन कमरे की ओर दौड़े, जहां वह खून से लथपथ हालत में पड़े मिले। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पारिवारिक विवाद की वजह और घटना की परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल की जा रही है।</p>
<p><strong>पारिवारिक कलह का अंदेशा</strong><br />हल्द्वानी। ग्राम प्रहरी और मृतक के रिश्तेदार दयाकिशन पांडे ने बताया कि अभी तक यही सामने आया है कि घर में क्लेश की वजह से घटना हुई है। मृतक की तीन साल की बेटी भी है और उसका अच्छा-खासा कारोबार था। घर में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं थी। एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि गोली की आवाज सुनकर सब लोग सन्न रह गए। जब मौके पर जाकर देखा तो कमलेश के सिर से खून बह रहा है। बताया जा रहा है कि गोली सिर में मारी है। इधर पोस्टमार्टम हाउस पर भारी भीड़ थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 10:00:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेरा शहर मेरी प्रेरणा : परंपरा बदली, पहचान नहीं...नई अर्थव्यवस्था का मजबूत केंद्र बरेली</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली। </strong>एक समय था जब कुमाऊं की रोजमर्रा की जरूरतों की सबसे बड़ी सप्लाई बरेली से ही पूरी होती थी। हल्द्वानी, काठगोदाम, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ तक हर तरह का सामान अनाज, कपड़ा, दवाइयां, मसाले, निर्माण सामग्री बरेली की मंडियों से ही निकलता था। पहाड़ों की रोजमर्रा की जरूरतें, निर्माण सामग्री, कपड़ा, दवाइयां, मसाले, अनाज, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुएं बरेली की मंडियों से ही निकलकर काठगोदाम और हल्द्वानी होते हुए पहाड़ों तक पहुंचती थीं। लंबे समय तक यह संबंध इतना मजबूत था कि बरेली को कुमाऊं की आर्थिक जीवन-रेखा तक कहा जाता था। </p>
<p>वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561745/tradition-changed--identity-not----bareilly--a-strong-centre-of-the-new-economy"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/pehchan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली। </strong>एक समय था जब कुमाऊं की रोजमर्रा की जरूरतों की सबसे बड़ी सप्लाई बरेली से ही पूरी होती थी। हल्द्वानी, काठगोदाम, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ तक हर तरह का सामान अनाज, कपड़ा, दवाइयां, मसाले, निर्माण सामग्री बरेली की मंडियों से ही निकलता था। पहाड़ों की रोजमर्रा की जरूरतें, निर्माण सामग्री, कपड़ा, दवाइयां, मसाले, अनाज, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुएं बरेली की मंडियों से ही निकलकर काठगोदाम और हल्द्वानी होते हुए पहाड़ों तक पहुंचती थीं। लंबे समय तक यह संबंध इतना मजबूत था कि बरेली को कुमाऊं की आर्थिक जीवन-रेखा तक कहा जाता था। </p>
<p>वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, तो वह पुरानी व्यापारिक परंपरा में बदलाव आने लगा, जिसके बाद कुमाऊं के बाजार अपने नए व्यापारिक केंद्र खोजने लगे और व्यापार का एक बड़ा हिस्सा बरेली की पकड़ से दूर चला गया। कई लोगों को लगा कि इससे बरेली की बाजार पहचान कमजोर हो जाएगी। लेकिन बरेली की असली ताकत केवल उसकी भौगोलिक स्थिति नहीं, बल्कि उसकी अनुकूलन क्षमता है। बरेली ने अपनी पहचान बनाए रखने के लिए नए क्षेत्रों में खुद को और मजबूत किया। आज यह शहर फिर से पश्चिम यूपी की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनकर उभर रहा है। </p>
<p>एक समय था जब कुमाऊं के व्यापारिक केंद्र हल्द्वानी और काठगोदाम बरेली की मंडियों पर निर्भर थे। पहाड़ों में निर्माण कार्य से लेकर त्योहारों और शादी-विवाह की सजावटी चीजें, हर तरह का सामान बरेली से जाता था। इस अवधि में बरेली की ग्रेन मंडी, खैराती लाल मार्केट, सर्राफा मार्केट, सिविल लाइन्स और कोहाड़ापीर जैसे इलाकों की गिनती उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्रों में होती थी। सामान की खरीद-फरोख्त का रूटीन इतना तयशुदा था कि बरेली के बाजारों पर कुमाऊं की मांग सीधा असर डालती थी। पहाड़ों के लोगों का बरेली सिर्फ व्यापार के लिए नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, खरीदारी और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आना आम था।  </p>
<p>उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद दो बड़े बदलाव हुए। पहला प्रशासनिक और कर व्यवस्था का बंटवारा हुआ और दूसरा कुमाऊं में व्यापारिक केंद्रों का विकास होने लगा। नई राज्य सरकार ने हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर और पंतनगर जैसे क्षेत्रों को विकसित किया। इससे स्वाभाविक रूप से बरेली पर निर्भरता घटने लगी। पहले जहां पहाड़ों की जरुरत के लिए हर बड़े व्यापारी को बरेली का रुख करना पड़ता था, वहीं अब हल्द्वानी और रुद्रपुर में ही बड़े गोदाम, मंडियां और कारोबारी प्रतिष्ठान बनने लगे। टैक्स संरचना बदलने से बरेली से माल भेजना अब पहले जैसा सहज नहीं रह गया। इन कारणों से बरेली का वह पारंपरिक एकाधिकार धीरे-धीरे टूटने लगा। यह बदलाव पूरी तरह स्वाभाविक था। </p>
<p> कुमाऊं का बाजार बरेली से काफी दूर होता चला गया। लेकिन बरेली की असली क्षमता इसी मोड़ पर सामने आई। शहर ने बदलते समय के साथ खुद को ढाल लिया और नए क्षेत्रों में व्यापारिक विकास की राह को तलाशना शुरू किया और एक नई रफ्तार के साथ नई ऊंचाई पाया। बरेली की पुरानी मंडियों ने खुद को आधुनिक व्यापारिक जरूरतों के अनुसार ढाला। अनाज, फल-सब्जी और किराना व्यापार आज भी क्षेत्र में मजबूत स्तंभ हैं। इसके अलावा कपड़ा और सर्राफा बाजार का फैलाव बरेली को पश्चिम यूपी का प्रमुख रिटेल और थोक केंद्र बनाए रखता है।</p>
<p>उप्र उद्योग व्यापार मंडल के संयुक्त महामंत्री राजेश जसोरिया उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद बरेली के व्यापार में 20 से 25 प्रतिशत की गिरावट आई। समय के साथ बरेली ने नए केंद्रों की खोज की और खुद को भी बदला लेकिन अपनी परंपरा से दूर नहीं हुआ। बरेली आसपास के सभी नए बाजारों की खोज की और उनमें अपनी गहरी पैठ बनाकर अपनी व्यापारिक क्षमता को साबित किया। </p>
<p>आईआईए बरेली के सचिव रजत मल्होत्रा ने बताया कि एक थे, तब हमारा काम एक ही सिस्टम से होता था। उस समय काम आसान था, लेकिन नए ग्राहकों तक पहुंच सीमित थी। जब उत्तराखंड राज्य बना तो हमें दोनों जगहों पर अलग-अलग काम बढ़ाने का मौका मिला। अब हमारे पास दोनों राज्यों के लिए सप्लाई चैन, तेज डिलीवरी  मौजूद हैं।  </p>
<p>ज्वेलर्स एंड बुलियन ए. के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल मिंटू ने बताया कि उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद से बरेली के सर्राफा करोबार में काफी बदलाव आया है, जहां कुमाऊं का मुख्य बाजार बरेली था वहीं आज बरेली अन्य क्षेत्रों के लिए भी बड़ा बाजार बन गया है। कुमाऊं को अलग हुए 25 साल हो गए, लेकिन अब भी कारोबार चल रहा है। बरेली ने खुद को बदला और नए बाजारों की तलाश की। </p>
<p>चेयरमैन उप्रदेश व्यापार मंडल दर्शनलाल भाटिया ने बताया कि  25 साल पहले बरेली से अलग हुए उत्तराखंड के कपड़ों की जरूरतों को बरेली ही पूरा करता रहा, लेकिन उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद से यहां के कपड़ा कारोबार में गिरावट तो आई लेकिन दिल्ली और लखनऊ के मध्य होने से बरेली को अन्य स्थानों के व्यापारी मिले, जिससे कपड़ा उद्योग पर कोई विेशेष असर नहीं पड़ा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Nov 2025 16:02:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छोटे से गांव से निकली 'अनंत' प्रतिभा... ''अजेय-द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी'' में Anant Vijay Joshi ने शानदार किरदार निभाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी अनंत विजय जोशी इन दिनों सुर्खियों में हैं। वजह है उनकी नई फ़िल्म ''अजेय-द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ अ योगी'' है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका निभाई है। यह फ़िल्म 19 सितम्बर को देशभर में रिलीज़ हो चुकी है और दर्शकों से बेहतरीन प्रतिक्रिया पा रही है।</p>
<h4><strong>अल्मोड़ा से मुंबई तक का सफ़र</strong></h4>
<p>मूल रूप से अल्मोड़ा ज़िले के हवालबाग विकासखंड के स्यूरा गांव से ताल्लुक रखने वाले अनंत का बचपन साधारण रहा लेकिन सपने हमेशा बड़े रहे। उनके पिता गोपाल दत्त जोशी, जो हजरतपुर (फ़िरोज़ाबाद) की ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री में नौकरी करते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/554640/anant-vijay-joshi-played-a-brilliant-character-in-anant-pratibha"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/muskan-dixit-(26)9.png" alt=""></a><br /><p>उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी अनंत विजय जोशी इन दिनों सुर्खियों में हैं। वजह है उनकी नई फ़िल्म ''अजेय-द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ अ योगी'' है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका निभाई है। यह फ़िल्म 19 सितम्बर को देशभर में रिलीज़ हो चुकी है और दर्शकों से बेहतरीन प्रतिक्रिया पा रही है।</p>
<h4><strong>अल्मोड़ा से मुंबई तक का सफ़र</strong></h4>
<p>मूल रूप से अल्मोड़ा ज़िले के हवालबाग विकासखंड के स्यूरा गांव से ताल्लुक रखने वाले अनंत का बचपन साधारण रहा लेकिन सपने हमेशा बड़े रहे। उनके पिता गोपाल दत्त जोशी, जो हजरतपुर (फ़िरोज़ाबाद) की ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री में नौकरी करते थे और उनकी माता मधु जोशी, बेटे की इस सफलता पर गर्व से भर जाते हैं। पिता जोशी बताते हैं कि अनंत का जन्म आगरा में हुआ। अनंत बचपन से ही अपने स्कूल के कार्यक्रमों में छा जाते थे। मंच पर आते ही जैसे कोई और ही किरदार बन जाता था। इंटर तक की पढ़ाई फ़िरोज़ाबाद में पूरी करने के बाद अनंत ने आम्रपाली यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी से स्नातक किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें अभिनय का अवसर मिला और लाइफ़ ओके चैनल के शो 'ज़िंदगी अभी बाक़ी है मेरे घोस्ट' से उनकी पहचान शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा।</p>
<h4><strong>टीवी और ओटीटी की दुनिया में पहचान</strong></h4>
<p>अनंत ने स्टार प्लस के लोकप्रिय शो 'क्या कसूर है अमला का', सोनी टीवी का चर्चित सीरियल 'पवित्र रिश्ता' और 'तारा फ्रॉम सतारा' जैसे धारावाहिकों में अभिनय किया। वहीं, ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स पर उन्होंने 'गंदी बात', 'वर्जिन भास्कर', 'पौरुषपुर' जैसी वेब सीरीज़ में अपनी अलग छाप छोड़ी। नेटफ़्लिक्स की फ़िल्म 'कटहल' और सीरीज़ 'कोबाल्ट ब्लू', 'ये काली काली आंखें', 'मामला लीगल है' ने उनके करियर को और मज़बूती दी।</p>
<h4><strong>लगातार नई ऊंचाइयों की ओर</strong></h4>
<p>अनंत ने बहुचर्चित फिल्म '12वीं फेल' में दमदार रोल निभाया था। उनका किरदार इस फिल्म के मुख्य अभिनेता के दोस्त प्रीतम पांडे के रूप में रहा था। अब 'अजेय' फिल्म के बाद दर्शक अनंत को और नई फ़िल्मों में देखने वाले हैं। 31 अक्टूबर को उनकी अगली फ़िल्म ‘वन टू चा चा चा’ रिलीज़ होने जा रही है। इसके अलावा वह मशहूर अदाकारा नीना गुप्ता के साथ फ़िल्म 'अमीरी' में नज़र आएंगे। उनकी एक और हिंदी फ़िल्म 'द बर्ड' की शूटिंग भी पूरी हो चुकी है। इस समय अनंत एक नई फ़िल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं, लेकिन उनकी नज़रें हमेशा आगे की मंज़िल पर टिकी रहती हैं।</p>
<h4><strong>परिवार और पहाड़ का गर्व</strong></h4>
<p>हल्द्वानी की हर्ष कॉलोनी, फतेहपुर में रह रहे अनंत का परिवार आज गर्व से भर उठा है। पिता कहते हैं- ''यह हमारे लिए ही नहीं, पूरे पहाड़ के लिए गर्व की बात है कि हमारे बेटे ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है।'' अनंत की यात्रा इस बात का सबूत है कि छोटे गांव की पगडंडियों से भी बड़े सपनों की उड़ान भरी जा सकती है। आज वह केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/554627/ind-vs-pak--pakistani-captain-salman-agha-s-furious-statement-before-the-final--openly-challenges-the-indian-team"><span class="t-red">Ind Vs Pak: </span>फाइनल से पहले पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा का बौखलाहट भरा बयान, भारतीय टीम को दी खुली चुनौती</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/554640/anant-vijay-joshi-played-a-brilliant-character-in-anant-pratibha</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 14:54:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोग कहते हैं, लावारिस शवों का वारिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>किसी लावारिस शव का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने से बड़ा पुनीत कार्य और क्या होगा। यही सोच थी, जिसे अपने साथियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया। इस काम से मन को बड़ी शांति और संतुष्टि मिलती है। बीते 15 माह में 208 से ज्यादा लावारिस शवों का सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार कराया है।</p>
<p>हल्द्वानी शहर के तिकोनिया में मेरा निवास है। कोविड-19 महामारी के दौरान जब अधिकांश लोग अनजाने खौफ के कारण घरों में कैद थे, तब  मैं टीम के साथ सड़कों पर मौजूद था। दर्जनों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार और सैनिटाइजेशन का कार्य कराया। मेरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/551637/people-say-the-heir-of-unclaimed-dead-bodies"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/मौत31.jpg" alt=""></a><br /><p>किसी लावारिस शव का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने से बड़ा पुनीत कार्य और क्या होगा। यही सोच थी, जिसे अपने साथियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया। इस काम से मन को बड़ी शांति और संतुष्टि मिलती है। बीते 15 माह में 208 से ज्यादा लावारिस शवों का सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार कराया है।</p>
<p>हल्द्वानी शहर के तिकोनिया में मेरा निवास है। कोविड-19 महामारी के दौरान जब अधिकांश लोग अनजाने खौफ के कारण घरों में कैद थे, तब  मैं टीम के साथ सड़कों पर मौजूद था। दर्जनों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार और सैनिटाइजेशन का कार्य कराया। मेरा यह काम न किसी गैर सरकारी या स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) के अंतर्गत आता है, न ही मैं किसी तरह का कोई सरकारी अनुदान या मदद लेता हूं। बेशक इस काम में समाज के विभिन्न वर्गों का आर्थिक सहयोग मिलता है। पहले हल्द्वानी के टनकपुर रोड स्थित मुक्तिधाम में लकड़ी की चिता सजाकर अंतिम संस्कार करते थे, लेकिन अब विद्युत शवदाह गृह में भी लावारिस शवों को सम्मानजनक विदाई दी जाती है।</p>
<h3><strong>मैं अकेला ही चला था...</strong></h3>
<p>मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया... मेरी शुरू से ही लोगों की निस्वार्थ मदद करने की सोच रही है। कोई मुझे लावारिस शवों का वारिस कहता है तो कोई और कुछ। बस यही बातें मेरा उत्साह बढ़ाती हैं। अब काफी लोग मुझसे जुड़ने लगे हैं। नगर आयुक्त ऋचा सिंह, नवीन मंडी सचिव दिग्विजय सिंह देव, वन विभाग के रेंजर मुकुल शर्मा, संतोष बल्यूटिया, अमित रस्तोगी, हरीश चन्द्र जोशी, वंश गौनियां, विजय पालीवाल, दिलीप कपूर, संजय जायसवाल, राजपाल लैधा, मयंक शर्मा, इंजीनियर दिनेश सिंह, बीडी छिमवाल, अशोक कटारिया, राम रतन पांगती सहयोग करते हैं।</p>
<p><strong>लेखक : हेमंत गौनिया, </strong><br /><strong>तिकोनिया, हल्द्वानी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 10:13:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चल सको तो चलो, गांव बुलाते हैं... सेवानिवृत IAS रमेशचंद्र पाठक ने खेत-खलिहान को समर्पित किया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खेत में पटेला लगाने की तस्वीरें वायरल हुई थीं। इसके साथ ही, गढ़वाल के एक कर्नल की खेती-बाड़ी की चर्चा भी खूब हो रही है। कुछ इन्हीं की तरह हैं, उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल के सेवानिवृत आईएएस अधिकारी रमेशचंद्र पाठक, वह पिछले 12 वर्षों से चुपचाप पैतृक गांव मल्ला डौणू, तहसील बेरीनाग, जिला पिथौरागढ़ की मिट्टी से रिश्ता निभा रहे हैं।</p>
<p><strong>- आईएएस अधिकारी के रूप में बड़े पदों पर रहने के बाद अन्य अधिकारियों के तरह महानगरों के बजाय गांव लौटने और खेती करने के पीछे की वजह?</strong></p>
<p>- एक सामान्य किसान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/551636/if-you-can-walk-lets-call-the-village"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/muskan-dixit-(6)22.png" alt=""></a><br /><p>पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खेत में पटेला लगाने की तस्वीरें वायरल हुई थीं। इसके साथ ही, गढ़वाल के एक कर्नल की खेती-बाड़ी की चर्चा भी खूब हो रही है। कुछ इन्हीं की तरह हैं, उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल के सेवानिवृत आईएएस अधिकारी रमेशचंद्र पाठक, वह पिछले 12 वर्षों से चुपचाप पैतृक गांव मल्ला डौणू, तहसील बेरीनाग, जिला पिथौरागढ़ की मिट्टी से रिश्ता निभा रहे हैं।</p>
<p><strong>- आईएएस अधिकारी के रूप में बड़े पदों पर रहने के बाद अन्य अधिकारियों के तरह महानगरों के बजाय गांव लौटने और खेती करने के पीछे की वजह?</strong></p>
<p>- एक सामान्य किसान परिवार में मेरा जन्म हुआ। पिता ईश्वरी दत्त पाठक और मां खष्टी देवी खेती ही करते थे। मैं हमेशा जमीन से जुड़़ा रहा। सेवाकाल में भी बराबर गांव आता-जाता रहा इसलिए अपनी मिट्टी से प्रेम बना रहा। </p>
<p><strong>- अपनी शिक्षा के बारे में बताएं?</strong></p>
<p>- बचपन में छानी यानी झोपड़ी में पढ़ाई की। 13 वर्ष में हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी। इंटर तक की पढ़ाई स्कॉलरशिप और 'पुअर ब्वॉयज फंड' से हुई। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए आगे की पढ़ाई के लिए पिता ने जमीन गिरवी रख दी। दो विषयों से एमए करने के साथ एलएलबी किया।</p>
<p><strong>- पिथौरागढ़ के दुर्गम गांव में रहने के बावजूद आईएएस बनने का विचार कैसे आया?</strong></p>
<p>- 1974 में बागेश्वर में बैंक से वेतन निकालते समय एक अखबार में यूपीपीसीएस का विज्ञापन देखा। बिना ज्यादा जानकारी के फॉर्म भर दिया। लेकिन तब यह भी पता नहीं था कि डिप्टी कलेक्टर क्या होता है। बिना किसी तैयारी के पहले प्रयास में ही प्री और रिटर्न निकाल लिया। लेकिन परीक्षा में पूर्ण रूप से सफलता नहीं मिली। इसके बाद परीक्षा को गंभीरता से लिया। पढ़ाने के साथ खुद पढ़ना शुरू किया। 1977 में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन हो गया। </p>
<p><strong>- आप किन-किन महत्वपूर्ण पदों पर रहे?</strong></p>
<p>- उत्तराखंड बनने के बाद राज्य के पहले लेबर कमिश्नर के रूप में काम करने के साथ ही, गन्ना आयुक्त, डीएम चंपावत, समाज कल्याण निदेशक, सचिव, परिवहन आयुक्त जैसे पदों पर कार्य किया। <br />- अभी किस उपज की खेती की है।<br />- अभी खेतों में धान, उड़द, भट्ट की बुआई की है। गुड़ाई भी खुद ही करते हैं। खेती में लागत अधिक है, फिर भी इसे अपनाया है।  <br />- प्रशासनिक अनुभव गांव में कुछ काम आया। <br />-  सेवानिवृत्ति के बाद अपनी प्रशासनिक क्षमता व अनुभव के जरिए गांव में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रयास किए। आज गांव में शहर जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं।</p>
<p><strong>- पहाड़ के गांवों से पलायन क्यों हो रहा है?</strong></p>
<p>-  पलायन रोकने का सबसे सशक्त उपाय है, महिलाओं और बेटियों को खेती-बाड़ी से जोड़ना और गांव के प्रति गर्व की भावना पैदा करना। अगर एक पूर्व आईएएस अधिकारी गांव में रहकर अपने खेत में काम कर सकता है, तो बाकी क्यों नहीं? पलायन तब तक नहीं रुकेगा, जब तक हम युवाओं और महिलाओं को गांव से जोड़ने के ठोस प्रयास नहीं करेंगे। मेरे जैसे न जाने कितने लोगों ने गांव में पढ़ाई कर उच्च पद हासिल किए और आज भी कर रहे हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई के नाम पर पलायन सिर्फ आरामतलब जिंदगी जीने का एक बहाना है।<br />-     आज के युवाओं के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे। <br />-  यही कि समय सबसे बड़ा धन है, इसे गंवाए नहीं। मेहनत, सादगी और आत्मसंस्कार ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। अपना आहार, विहार, विचार व संस्कार अच्छा रखें जीवन आनंदमय रहेगा। </p>
<p><strong>प्रस्तुति :हरीश उप्रेती करन, </strong><br /><strong>हल्द्वानी<br /><br /></strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः </strong><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/551634/cloudburst-causes-devastation-in-jammu-and-kashmir--three-dead--many-missing--rescue-operation-begins">जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से तबाहीः तीन की मौत, कई लापता, शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन</a></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>रंगोली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 09:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामपुर: पतंगबाजी पड़ी जान पर भारी...छत से गिरकर युवक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>टांडा,अमृत विचार। </strong>नगर के युवक की उत्तराखंड के हल्द्वानी में छत से पतंग उड़ाते समय मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।</p>
<p>नगर के मोहल्ला भब्बलपुरी निवासी हामिद पुत्र जाहिद अली 30 उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित मलिक के बगीचे में किराये के मकान पर रहता था, गुरुवार को छत पर पतंग उडाने के लिए गया था। तभी अचानक पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने के कारण वह छत से घर की तीसरी मंजिल से गिरने के कारण बुरी तरह घायल हो गया था। अधिक खून बह जाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547609/rampur-kite-flying-and-death-of-a-young-man-falls"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/छत-से-गिरकर-मौत.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टांडा,अमृत विचार। </strong>नगर के युवक की उत्तराखंड के हल्द्वानी में छत से पतंग उड़ाते समय मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।</p>
<p>नगर के मोहल्ला भब्बलपुरी निवासी हामिद पुत्र जाहिद अली 30 उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित मलिक के बगीचे में किराये के मकान पर रहता था, गुरुवार को छत पर पतंग उडाने के लिए गया था। तभी अचानक पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने के कारण वह छत से घर की तीसरी मंजिल से गिरने के कारण बुरी तरह घायल हो गया था। अधिक खून बह जाने से युवक नें मौके पर ही दम तोड़ दिया। </p>
<p>आसपास के लोगों नें युवक के गिरने की जानकारी पुलिस को दी। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने मामले से परिवार को अवगत कराकर शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिवार वालों ने बताया कि हामिद हल्द्वानी में ऑटो रिक्शा चलाता था। मृतक की शादी दो साल पहले हुई थी। उसके एक लड़की भी है। हामिद के गिरने की खबर आई तो परिवार में कोहराम मच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                            <category>रामपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/547609/rampur-kite-flying-and-death-of-a-young-man-falls</link>
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                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 11:16:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तराखंड: अनियंत्रित होकर नहर में गिरी कार, हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>हल्द्वानी। </strong>उत्तराखंड के हल्द्वानी में भारी बारिश के दौरान एक अनियंत्रित कार के नहर में गिरने से एक नवजात शिशु समेत परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गयी और तीन अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह हादसा सुबह करीब साढ़े सात बजे उस समय हुआ, जब उधमसिंह नगर जिले के किच्छा थानाक्षेत्र के बरा गांव का रहने वाला एक परिवार चार दिन पहले जन्में बच्चे को लेकर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल से कार में सवार होकर घर लौट रहा था। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, कार रास्ते में दमकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/543508/uttarakhand--car-went-out-of-control-and-fell-into-the-canal--four-members-of-the-same-family-died-in-the-accident"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/news-post--(34)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हल्द्वानी। </strong>उत्तराखंड के हल्द्वानी में भारी बारिश के दौरान एक अनियंत्रित कार के नहर में गिरने से एक नवजात शिशु समेत परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गयी और तीन अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह हादसा सुबह करीब साढ़े सात बजे उस समय हुआ, जब उधमसिंह नगर जिले के किच्छा थानाक्षेत्र के बरा गांव का रहने वाला एक परिवार चार दिन पहले जन्में बच्चे को लेकर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल से कार में सवार होकर घर लौट रहा था। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, कार रास्ते में दमकल विभाग के पास अनियंत्रित होकर एक नहर में जा गिरी। पुलिस ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचीं तथा राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस के मुताबिक, हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गयी, जिनमें नवजात शिशु के अलावा उसके पिता राकेश (32), नानी कमला देवी (50) और बच्ची की ताई नीतू (36) शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि नवजात की मां रमा (27) दुर्घटना में घायल हो गयी है जबकि अन्य घायलों की पहचान नीतू के पति रमेश (39) और कार चालक श्यामलाल (40) के रूप में हुई है। </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, घायलों को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस ने बताया कि शुरूआती जांच में दुर्घटना का कारण कार की तेज गति और चालक का वाहन पर से नियंत्रण खोना बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने शोक संदेश में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/543507/decision-was-taken-in-view-of-the-safety-of-river">उत्तराखंड: गंगा का जलस्तर बढ़ने से ऋषिकेश में ‘रिवर राफ्टिंग’ बंद, पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए लिए गया फैसला </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/543508/uttarakhand--car-went-out-of-control-and-fell-into-the-canal--four-members-of-the-same-family-died-in-the-accident</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 16:40:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी : अमेजन से वर्दी मंगाकर बन गई दरोगा, असली पुलिस ने मुकदमा ठोंका</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> अमेजन से वर्दी मंगाई और प्लास्टिक की पिस्टल लेकर महिला दरोगा बन गई। उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में एक के बाद एक वीडियो यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिए। वर्दी में धड़ाधड़ गालियां देकर अश्लीलता फैलाना इस महिला को भारी पड़ गया। इस नकली महिला दरोगा के खिलाफ असली पुलिस ने न सिर्फ मुकदमा दर्ज किया, बल्कि महिला को अपने किए पर माफी भी मांगनी पड़ी। </p>
<p>चकलुवा कालाढूंगी निवासी जयश्री देवी पत्नी हरीश मेहरा का यू-ट्यूब चैनल है। वह चैनल पर लगातार वीडियो पोस्ट कर रही थी, लेकिन न तो फॉलोअर की संख्या बढ़ रही थी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/510434/haldwani-became-real-inspector-by-ordering-uniform-from-amazon-police"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/553.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> अमेजन से वर्दी मंगाई और प्लास्टिक की पिस्टल लेकर महिला दरोगा बन गई। उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में एक के बाद एक वीडियो यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिए। वर्दी में धड़ाधड़ गालियां देकर अश्लीलता फैलाना इस महिला को भारी पड़ गया। इस नकली महिला दरोगा के खिलाफ असली पुलिस ने न सिर्फ मुकदमा दर्ज किया, बल्कि महिला को अपने किए पर माफी भी मांगनी पड़ी। </p>
<p>चकलुवा कालाढूंगी निवासी जयश्री देवी पत्नी हरीश मेहरा का यू-ट्यूब चैनल है। वह चैनल पर लगातार वीडियो पोस्ट कर रही थी, लेकिन न तो फॉलोअर की संख्या बढ़ रही थी और न ही लाइक मिल रहे थे। ऐसे में यू-ट्यूब से पैसे कैसे मिलते। जयश्री ने इसका तोड़ निकाला। उसने अमेजन से उत्तराखंड पुलिस की वर्दी ऑर्डर की और प्लास्टिक की पिस्टल कमर में खोंस कर दरोगा बन गई। वर्दी में उसने कई वीडियो पोस्ट किए, जो अश्लील थे। वह अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही है। मामला एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा तक पहुंचा तो उन्होंने जयश्री के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। आनन-फानन में कालाढूंगी थानाध्यक्ष पंकज जोशी ने महिला को तलाश निकाला। पुलिस ने सारे आपत्तिजनक वीडियो डिलीट कराए और उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204 और 205 के तहत मुकदमा दर्ज किया। जिसके बाद महिला ने वीडियो बनाकर अपनी गलती पर माफी मांगी। एसएसपी ने बताया कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल न हो, जिससे पुलिस विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था की छवि धूमिल हो। ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <a href="https://www.amritvichar.com/article/510410/prd-jawan-cheated-of-lakhs-in-the-name-of-selling">हल्द्वानी : जमीन बेचने के नाम पर पीआरडी जवान से लाखों की ठगी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 21:30:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी : जमीन बेचने के नाम पर पीआरडी जवान से लाखों की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> जमीन बेचने के नाम पर जालसाजों ने एक पीआरडी जवान से 11 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह रकम जवान ने बयाने के तौर पर दी थी, लेकिन जालसाजों ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। पीआरडी जवान की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। </p>
<p>चंडाक पिथौरागढ़ निवासी पीआरडी जवान देवेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि दो साल पहले वह ऊधम सिंह नगर निवासी उपेंद्र देऊपा और देहरादून निवासी पवन सिंह के संपर्क में आया। दोनों ने उसे जय सिंह भगवानपुर हल्द्वानी में एक प्लॉट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/510410/prd-jawan-cheated-of-lakhs-in-the-name-of-selling"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/thagi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> जमीन बेचने के नाम पर जालसाजों ने एक पीआरडी जवान से 11 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह रकम जवान ने बयाने के तौर पर दी थी, लेकिन जालसाजों ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। पीआरडी जवान की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। </p>
<p>चंडाक पिथौरागढ़ निवासी पीआरडी जवान देवेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि दो साल पहले वह ऊधम सिंह नगर निवासी उपेंद्र देऊपा और देहरादून निवासी पवन सिंह के संपर्क में आया। दोनों ने उसे जय सिंह भगवानपुर हल्द्वानी में एक प्लॉट दिखाया। उपेंद्र ने बताया था कि जमीन पवन सिंह की है। देवेंद्र को प्लॉट पसंद आया तो 16,60,500 में सौदा तय कर लिया। बतौर बयाना देवेंद्र ने पहली किस्त के रूप में पांच लाख रुपये चेक का उपेंद्र को दे दिया। दूसरी किस्त के रूप में फिर पांच लाख का चेक और एक लाख तीसरी किस्त दे दी। 11 लाख रुपये देने के बाद देवेंद्र ने रजिस्ट्री कराने को तो वह आनाकानी करने लगे। पैसे वापस मांगने पर आरोपी जाने से मारने की धमकी देने लगे। मुखानी थानाध्यक्ष विजय मेहता ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर उपेंद्र और पवन के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <a href="https://www.amritvichar.com/article/510408/haldwani-assistant-controller-of-weights-and-measures-arrested-red-handed">हल्द्वानी : सहायक नियंत्रक बाट-माप रंगे हाथ 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 20:20:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी : सहायक नियंत्रक बाट-माप रंगे हाथ 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> विजिलेंस ने एक और सरकारी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। ऊधमसिंह नगर जिले में कार्यरत सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान (बाट और माप) ने कांटे-बाट बेचने वाले से 10 हजार रुपये मांग थे। रिश्वत न देने पर उसका लाइसेंस निरस्त करने की धमकी दी थी।</p>
<p>विजिलेंस हल्द्वानी के अनुसार एक व्यक्ति ने उन्हें लिखित शिकायत दी कि उसका ऊधमसिंह नगर जिले में वजन तौलने वाले कांटे और बाट बेचने का काम है। जिसका लाइसेंस संबंधित विभाग से लेना पड़ता है। उसने कांटे-बाट की मरम्मत के लाइसेंस के लिए सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान शांति भंडारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/510408/haldwani-assistant-controller-of-weights-and-measures-arrested-red-handed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/rishwat.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> विजिलेंस ने एक और सरकारी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। ऊधमसिंह नगर जिले में कार्यरत सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान (बाट और माप) ने कांटे-बाट बेचने वाले से 10 हजार रुपये मांग थे। रिश्वत न देने पर उसका लाइसेंस निरस्त करने की धमकी दी थी।</p>
<p>विजिलेंस हल्द्वानी के अनुसार एक व्यक्ति ने उन्हें लिखित शिकायत दी कि उसका ऊधमसिंह नगर जिले में वजन तौलने वाले कांटे और बाट बेचने का काम है। जिसका लाइसेंस संबंधित विभाग से लेना पड़ता है। उसने कांटे-बाट की मरम्मत के लाइसेंस के लिए सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान शांति भंडारी (उप-संभाग, ऊधमसिंह नगर) के पास आवेदन किया। शांति भंडारी ने लाइसेंस तो दे दिया लेकिन उससे 10 हजार रुपये बतौर ईनाम मांगे। रुपये न देने पर लाइसेंस निरस्त करने धमकी दी। आरोप है कि पीड़ित को आरोपी बार-बार परेशान कर रही थी। विजिलेंस को प्रथम दृष्टया मामला सही लगा। सीओ विजिलेंस हल्द्वानी अनिल कुमार मनराल ने ट्रैप गठित किया और सोमवार को आरोपी को शिवपुरम कॉलोनी, निकट चीनी मिल किच्छा स्थित कार्यालय से रंगे हाथ 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास प्रभारी वरिष्ठ विधिक माप विभाग, किच्छा का भी अतिरिक्त प्रभार है। आरोपी को पकड़कर टीम हल्द्वानी ले आई है। जहां उससे पूछताछ की जा रही है। निदेशक सतर्कता डॉ. वीके मुरूगेशन ने ट्रैप टीम को नगद इनाम देने की घोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 20:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी : दिव्यांशु ने सरप्राइज देने बुलाया था, सुमित को जंगल में लटकी मिली लाश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> एक ऐप के जरिये दिव्यांशु पांडे और सुमित यादव की दोस्ती हुई। मुलाकातें हुईं तो दोस्ती जिगरी हो गई। करीब एक साल तक दोनों के बीच सब ठीक रहा, लेकिन फिर दोस्ती में दरार आने लगी। दोस्ती टूटी तो दिव्यांशु का दिल टूट गया। उसने अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए जान देने का फैसला कर लिया। सुमित को सरप्राइज देने जंगल में बुलाया। सुमित जंगल पहुंचा तो वहां दिव्यांशु की लाश लटक रही थी।</p>
<p>दौलिया डी क्लास हल्दूचौड़ निवासी 20 वर्षीय दिव्यांशु की लाश बीती 7 दिसंबर को दमकल से सटे जंगल में लटकी मिली थी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/510398/haldwani-divyanshu-had-called-sumit-to-surprise-him-dead-body"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/शव-मिला-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> एक ऐप के जरिये दिव्यांशु पांडे और सुमित यादव की दोस्ती हुई। मुलाकातें हुईं तो दोस्ती जिगरी हो गई। करीब एक साल तक दोनों के बीच सब ठीक रहा, लेकिन फिर दोस्ती में दरार आने लगी। दोस्ती टूटी तो दिव्यांशु का दिल टूट गया। उसने अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए जान देने का फैसला कर लिया। सुमित को सरप्राइज देने जंगल में बुलाया। सुमित जंगल पहुंचा तो वहां दिव्यांशु की लाश लटक रही थी।</p>
<p>दौलिया डी क्लास हल्दूचौड़ निवासी 20 वर्षीय दिव्यांशु की लाश बीती 7 दिसंबर को दमकल से सटे जंगल में लटकी मिली थी। इस मामले में बरेली रोड निवासी सुमित यादव के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस पिछले करीब 24 घंटे से सुमित व उसके एक दोस्त से पूछताछ कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सुमित और दिव्यांशु की एक ऐप के जरिये मुलाकात हुई थी। ऐप से दोनों ने मोबाइल नंबर की अदला-बदली की। डेढ़ साल पहले शुरू हुआ ये सिलसिला लंबे समय तक सिर्फ मैसेज के जरिये चलता रहा। करीब एक साल पहले दोनों नैनीताल रोड स्थित एक पार्क में मिले और मुलाकातों का सिलसिला आम हो गया। दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। दोनों एक दूसरे को तोहफे भी देते थे।</p>
<p>कुछ समय सुमित की एक अन्य लड़के से दोस्ती हो गई। सुमित का दिव्यांशु से मेल-मिलाप कम हो गया। इसी वजह से दोनों में तकरार हो गई। नौबत यहां तक पहुंच कि सुमित ने दिव्यांशु का फोन उठाना और मैसेज के जवाब देना भी बंद कर दिया। हालांकि जब दोनों में गहरी दोस्ती थी तो वह उसी जंगल में मिलते थे, जहां दिव्यांशु का शव मिला। इधर, दोनों में बढ़ती तल्खी से दिव्यांशु को अंदाजा हो गया कि अब उनकी दोस्ती टूट चुकी है। 7 सितंबर को दिव्यांशु उसी जंगल में पहुंचा, जहां दोनों मिलते थे। दिव्यांशु ने जंगल से सुमित को फोन किया और कहाकि उसके लिए जंगल में एक सरप्राइज है। </p>
<p>दिव्यांशु के बुलाने पर सुमित अपने एक दोस्त के साथ जंगल पहुंच गया। उसने दोस्त को सड़क पर ही इंतजार करने को कहा और खुद दिव्यांशु से मिलने जंगल में चला गया। वह अंदर पहुंचा तो पेड़ से दिव्यांशु की लाश लटक रही थी। दिव्यांशु ने फंदा बनाने के लिए उस लाल टी-शर्ट का इस्तेमाल किया, जिसे सुमित ने उसे तोहफे में दी थी। दिव्यांशु की लाश देखते ही सुमित उल्टे पांव भागा और सड़क पर खड़े दोस्त को जानकारी दी। दोनों जंगल में पहुंचे और दिव्यांशु के घर वीडियो कॉल कर पूरी घटना दिखाई। जिसके बाद वहीं पड़े हेक्सा ब्लेड से फंदा काटकर शव को नीचे उतारा। कोतवाल राजेश कुमार यादव का कहना है कि सुमित और उसके दोस्त से पूछताछ की जा रही है। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट आने के मौत की सही वजह सामने आएगी। हालांकि शुरुआती जांच और पूछताछ में आत्महत्या की बात सामने आ रही है। </p>
<p><strong>मौत से तीन दिन पहले जलाए सारे तोहफे</strong><br />दिव्यांशु और सुमित अच्छे दोस्त थे। सुमित अक्सर दिव्यांशु को तोहफे दिया करता था। कभी शर्ट, कभी जैकेट और कभी टैडी बीयर। दिव्यांशु को जब इस बात का यकीन हो गया कि अब दोस्ती में पड़ी दरार नहीं भरेगी तो उसने सुमित के दिए सारे तोहफे जला दिए। जिसके बाद उसने सुमित को फोन कर इसकी जानकारी भी दी। हालांकि सुमित ने यह कभी नहीं सोचा था कि उसकी वजह से और अपनी दोस्ती साबित करने के लिए दिव्यांशु आत्मघाती कदम उठा लेगा। </p>
<p><strong>पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई मौत की पुष्टि</strong><br />अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को नहीं मिली है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी को बताया गया। पुलिस भी इस बात को मान रही है कि दिव्यांशु की हत्या नहीं हुई। क्योंकि जिस पेड़ से दिव्यांशु की लाश लटकी मिली थी, उस पर हत्या करने के बाद किसी को लटकाना अकेले व्यक्ति के बस की बात नहीं है। पुलिस ने जो पंचनामा भरा है, उसमें भी शरीर पर किसी ऐसी चोट का जिक्र नहीं है, जिससे हत्या की बात साबित की जा सके। </p>
<p><strong>जंगल से लकड़ी चोरी करने वालों की थी ब्लेड</strong><br />सुमित ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वह ब्लेड खरीद कर नहीं लाया था। बल्कि कई लोग जंगल से लकड़ियां चोरी करते हैं और इसके लिए वह हेक्सा ब्लेड का इस्तेमाल करते हैं। हेक्सा ब्लेड के इस्तेमाल से शोर नहीं होता और चोर आसानी से लकड़ी काट कर ले जाते हैं। घटना के दिन उसे जंगल में वो हेक्सा ब्लेड पड़ा मिला, जिससे उसने फंदा काटकर शव को नीचे उतारा था। फिर उसने वीडियो कॉल कर दिव्यांशु के घरवालों को धमकाया कि अगर उसे फंसाया तो वह उन्हें छोड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 19:40:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी : बाइक फिसल कर ट्रॉली से टकराई, इकलौते बेटे की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> बर्थ-डे पार्टी से लौट रहे बाइक सवार तीन दोस्त हादसे का शिकार हो गए। तेज रफ्तार बाइक अचानक फिसल गई और सड़क किनारे खड़ी ट्रॉली से टकरा गई। घटना में दो दोस्त घायल हो गए, जबकि तीसरे की मौत हो गई। मृतक अपनी मां का इकलौता बेटा था और मां ने उसे बर्थ-डे पार्टी में जाने से मना किया था।</p>
<p>ईसाईनगर लामाचौड़ मुखानी निवासी अनुराग गवन (15 वर्ष) पुत्र स्व.रविंद्र गवन लामाचौड़ इंटर कॉलेज में 9वीं का छात्र था। उसके पिता की दो वर्ष पहले मौत हो गई। मां गाय का दूध बेचकर घर चलाती और बेटे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/510396/haldwani-only-son-dies-after-bike-skids-and-collides-with"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/मौत10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> बर्थ-डे पार्टी से लौट रहे बाइक सवार तीन दोस्त हादसे का शिकार हो गए। तेज रफ्तार बाइक अचानक फिसल गई और सड़क किनारे खड़ी ट्रॉली से टकरा गई। घटना में दो दोस्त घायल हो गए, जबकि तीसरे की मौत हो गई। मृतक अपनी मां का इकलौता बेटा था और मां ने उसे बर्थ-डे पार्टी में जाने से मना किया था।</p>
<p>ईसाईनगर लामाचौड़ मुखानी निवासी अनुराग गवन (15 वर्ष) पुत्र स्व.रविंद्र गवन लामाचौड़ इंटर कॉलेज में 9वीं का छात्र था। उसके पिता की दो वर्ष पहले मौत हो गई। मां गाय का दूध बेचकर घर चलाती और बेटे को पढ़ाती थी। बताया जा रहा है कि रविवार शाम अनुराग ने मां से कहा कि वह अपने एक दोस्त की बर्थ-डे पार्टी में जा रहा है। मां ने उसे मना किया, लेकिन वह नहीं माना और मां से लड़कर चला गया। रात गुजर गई, लेकिन वह लौट कर नहीं आया। रात करीब 3 बजे अनुराग अपने अन्य दो दोस्तों के साथ बाइक से वापस घर लौट रहा था। लामाचौड़ में उनकी तेज रफ्तार बाइक अचानक फिसल गई और सड़क किनारे खड़ी ट्राली से टकरा गई। तीनों युवक घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आनन-फानन में घायलों को सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने अनुराग को मृत घोषित कर दिया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे पुलिस ने अनुराग की मां को मौत की सूचना दी। जिसके बाद घर में कोहराम मच गया। पहले पति और फिर इकलौते बेटे की अचानक मौत से वह सदमे में चली गई है। मुखानी थानाध्यक्ष विजय मेहता ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 19:29:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
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