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                <title>Donald Trump - Amrit Vichar</title>
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                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Bakra Eid 2026: बकरीद पर नहीं दी जाएगी ''डोनाल्ड ट्रंप'' नाम के भैंसे की कुर्बानी, बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस वजह से लिया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong> बांग्लादेश में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर अधिकारियों ने ''डोनाल्ड ट्रंप'' नाम के एक दुर्लभ भैंसे की कुर्बानी रुकवाई और उसे राजधानी के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में रखने का फैसला किया है। यह भैंसा एल्बिनो (रंगहीनता) नामक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित है, जिसके कारण शरीर में 'मेलेनिन' रंगद्रव्य बहुत कम या बिल्कुल नहीं बनता है। इस भैंसे के लहराते सुनहरे बाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'सिग्नेचर हेयरस्टाइल' से काफी मिलते-जुलते हैं जिसके कारण इसका नाम ''डोनाल्ड ट्रंप'' रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">  पुलिस के अनुसार, सरकार के निर्देश के बाद बृहस्पतिवार को कुर्बानी दिए जाने से कुछ घंटे</p>
<p style="text-align:justify;">जमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583279/bakrid-2026--the-buffalo-named-%22donald-trump%22-will-not-be-sacrificed-on-bakrid--bangladeshi-authorities-took-this-decision-for-this-reason"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats522.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong> बांग्लादेश में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर अधिकारियों ने ''डोनाल्ड ट्रंप'' नाम के एक दुर्लभ भैंसे की कुर्बानी रुकवाई और उसे राजधानी के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में रखने का फैसला किया है। यह भैंसा एल्बिनो (रंगहीनता) नामक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित है, जिसके कारण शरीर में 'मेलेनिन' रंगद्रव्य बहुत कम या बिल्कुल नहीं बनता है। इस भैंसे के लहराते सुनहरे बाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'सिग्नेचर हेयरस्टाइल' से काफी मिलते-जुलते हैं जिसके कारण इसका नाम ''डोनाल्ड ट्रंप'' रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> पुलिस के अनुसार, सरकार के निर्देश के बाद बृहस्पतिवार को कुर्बानी दिए जाने से कुछ घंटे पहले ही इस 700 किलोग्राम वजनी भैंसे को कब्जे में ले लिया। इस भैंसे के मालिक मोनिरुज जमान ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, ''आज दोपहर पुलिसकर्मी आए और कहा कि सरकार ने संरक्षण के लिए भैंसे को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया है। चूंकि हम सरकार के साथ कोई विवाद नहीं चाहते, इसलिए हमने उसे उन्हें सौंप दिया।'' </p>
<p style="text-align:justify;">जमान ने बताया कि अधिकारियों ने उनसे कहा कि सरकार या तो उन्हें मुआवजा देगी या उनकी भैंसे के बदले में एक और भैंसा, गाय या बैल उपलब्ध कराएगी। जमान ने ढाका के बाहरी इलाके केरानीगंज स्थित अपने घर पर कुर्बानी देने के लिए तीन दिन पहले इसे खरीदा था। केरानीगंज थाना प्रभारी रुहुल कुद्दुस ने कहा कि पशुधन विभाग के अधिकारियों का मानना ​​है कि भैंसे की उम्र काफी कम है और उसे कई और वर्षों तक पाला जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">भैंसे के पूर्व मालिक एवं किसान जिया उद्दीन मृधा ने पहले कहा था कि उनके भाई ने भैंसे का नाम ''डोनाल्ड ट्रम्प'' रखा था क्योंकि उसके असामान्य सुनहरे बाल अमेरिकी राष्ट्रपति के बालों से मिलते जुलते थे। उन्होंने बताया कि यह भैंसा बिकने से पहले ही आगंतुकों और सोशल मीडिया पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईद की कुर्बानी के लिए लाए गए हजारों पशुओं में यह ''ट्रंप'' नाम का भैंसा अपने सुनहरे बालों, रंग के कारण काफी अलग और आकर्षक लग रहा है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:06:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान वार्ता के बीच व्हाइट हाउस पर हमला... 25 राउंड फायरिंग, घटना के वक्त राष्ट्रपति ट्रंप परिसर में थे मौजूद, जवाबी कार्रवाई में मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटनः</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की सुरक्षा जांच चौकी के पास अधिकारियों पर गोलीबारी करने वाले एक व्यक्ति की सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में मौत हो गई है। संघीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 'यूएस सीक्रेट सर्विस' ने शनिवार देर रात एक बयान में कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावर पूर्वी समयानुसार (ईटी) शाम छह बजे के कुछ देर बाद एक जांच चौकी के पास पहुंचा, उसने ''अपने बैग से हथियार निकाला और वहां तैनात अधिकारियों पर गोलीबारी शुरू कर दी।''</p>
<p style="text-align:justify;">'सीक्रेट सर्विस' के अनुसार अधिकारियों ने जवाबी गोलीबारी की जिसमें आरोपी घायल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582952/attack-on-the-white-house-amid-iran-talks----25-rounds-fired--president-trump-was-present-on-the-premises-at-the-time-of-the-incident--he-died-in-retaliatory-fire"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(19)8.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटनः</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की सुरक्षा जांच चौकी के पास अधिकारियों पर गोलीबारी करने वाले एक व्यक्ति की सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में मौत हो गई है। संघीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 'यूएस सीक्रेट सर्विस' ने शनिवार देर रात एक बयान में कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावर पूर्वी समयानुसार (ईटी) शाम छह बजे के कुछ देर बाद एक जांच चौकी के पास पहुंचा, उसने ''अपने बैग से हथियार निकाला और वहां तैनात अधिकारियों पर गोलीबारी शुरू कर दी।''</p>
<p style="text-align:justify;">'सीक्रेट सर्विस' के अनुसार अधिकारियों ने जवाबी गोलीबारी की जिसमें आरोपी घायल हो गया। उसने बताया कि आरोपी को क्षेत्र के एक अस्पताल ले जाया गया जहां बाद में उसकी मौत हो गई। इस दौरान एक राहगीर को भी गोली लगी है लेकिन कानून प्रवर्तन के एक अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वह संदिग्ध द्वारा शुरू में चलाई गई गोलियों से घायल हुआ या अधिकारियों द्वारा की गई गोलीबारी के दौरान उसे गोली लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">'सीक्रेट सर्विस' ने कहा कि उसका कोई भी अधिकारी इस दौरान घायल नहीं हुआ और घटना के समय 'व्हाइट हाउस' में मौजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुरक्षित हैं। 'व्हाइट हाउस' में शनिवार को मौजूद पत्रकारों ने कई गोलियां चलने की आवाज सुनाई देने की सूचना दी और उन्हें संवाददाता सम्मेलन कक्ष के भीतर जाने को कहा गया। 'सीक्रेट सर्विस' ने इससे पहले सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा था कि उसे ''17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू एनडब्ल्यू के पास गोली चलने की खबरों'' की जानकारी है। यह स्थान 'व्हाइट हाउस' से एक ब्लॉक दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग ने 'एक्स' पर एक 'पोस्ट' साझा कर बताया कि 'सीक्रेट सर्विस' के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और उसने लोगों को उस क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी। यह स्थान उस जगह के पास है जहां पिछले साल नवंबर में एक बंदूकधारी ने वेस्ट वर्जीनिया नेशनल गार्ड के दो सदस्यों पर घात लगाकर हमला किया था। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेः </strong><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/582936/cyprus-president-s-visit-to-india-concludes--both-nations-announce-strategic-partnership--focus-on-several-key-issues"><span class="t-red">साइप्रस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा समाप्त :</span> दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी का किया ऐलान, कई अहम मुद्दों पर रहा फोकस</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582952/attack-on-the-white-house-amid-iran-talks----25-rounds-fired--president-trump-was-present-on-the-premises-at-the-time-of-the-incident--he-died-in-retaliatory-fire</link>
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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 09:58:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Ivanka Trump :  ट्रंप के घर का ब्लूप्रिंट लेकर घूम रहा था IRGC का आतंकी, बेटी इवांका को मारने की प्लानिंग का खुलासा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप को कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े एक आतंकवादी ने मारने की साजिश रची थी। गौरतलब है कि आईआरजीसी की आधिकारिक स्थापना मई 1979 में ईरानी क्रांति के बाद रुहोल्ला खोमैनी द्वारा एक सैन्य शाखा के रूप में की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">द न्यूयॉर्क पोस्ट ने खुफिया सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में दावा है कि हत्या की यह साज़िश 2020 के उस अमेरिकी ड्रोन हमले को लेकर उपजे गुस्से से जुड़ी हुई है, जिसमें ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी मारे गए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">सुलेमानी ईरान के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582901/ivanka-trump--irgc-terrorist-found-carrying-blueprints-of-trump-s-residence--plot-to-assassinate-daughter-ivanka-exposed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(23)18.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप को कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े एक आतंकवादी ने मारने की साजिश रची थी। गौरतलब है कि आईआरजीसी की आधिकारिक स्थापना मई 1979 में ईरानी क्रांति के बाद रुहोल्ला खोमैनी द्वारा एक सैन्य शाखा के रूप में की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">द न्यूयॉर्क पोस्ट ने खुफिया सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में दावा है कि हत्या की यह साज़िश 2020 के उस अमेरिकी ड्रोन हमले को लेकर उपजे गुस्से से जुड़ी हुई है, जिसमें ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी मारे गए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">सुलेमानी ईरान के आईआरजीसी की बाहरी संचालन शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी थे। संदिग्ध की पहचान इराकी नागरिक मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी के रूप में हुई है। उस पर आरोप है कि उसके ईरान-समर्थित गुटों से संबंध थे, जिनमें आईआरजीसी और इराकी अर्धसैनिक नेटवर्क 'कताइब हिज़्बुल्लाह' से जुड़े समूह शामिल हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि उसे 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया था और बाद में अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया, जहाँ अब उस पर यूरोप और उत्तरी अमेरिका में कथित हमलों या हमलों के प्रयासों से जुड़े आतंकवाद के कई आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों का आरोप है कि अल-सादी ने न केवल ऑनलाइन स्पष्ट धमकियाँ दीं, बल्कि उसने निगरानी-शैली की तैयारी भी की, जिसमें इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित आवास का नक्शा (ब्लूप्रिंट) अपने पास रखना भी शामिल था। </p>
<p style="text-align:justify;">द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अल-सादी ने पहले ऑनलाइन चेतावनियाँ जारी की थीं कि वह अमेरिका के उच्च-प्रोफ़ाइल लक्ष्यों की निगरानी कर रहा है। जाँचकर्ताओं द्वारा उद्धृत ऑनलाइन पोस्ट में, उसने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि न तो कड़ी सुरक्षा वाले आवास और न ही गुप्त सेवा की सुरक्षा उसे जवाबी कार्रवाई से बचा पाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर चरमपंथी गतिविधियों के एक व्यापक पैटर्न में शामिल होने का भी आरोप है, जिसमें एम्स्टर्डम, लंदन, टोरंटो और ब्रुसेल्स जैसे शहरों में यहूदी और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने वाले कथित हमले या हमलों के प्रयास शामिल हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">साद दाऊद अल-सादी ने ऑनलाइन धमकियाँ पोस्ट करते हुए कहा था कि न तो तुम्हारे महल और न ही गुप्त सेवा तुम्हारी रक्षा कर पाएगी। रिपोर्ट में अल-सादी को इराक-ईरान के उग्रवादी नेटवर्क से जुड़ा एक उच्च-रैंकिंग वाला व्यक्ति बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की बेटी और उनके पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस की पूर्व सलाहकार इवांका ट्रंप इस साज़िश का निशाना थीं। अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्ट में उल्लिखित विवरणों के अलावा, आरोपों का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582868/us-secretary-of-state-marco-rubio-arrives-in-kolkata--visits--mother-house--during-4-day-india-tour--set-to-meet-pm-modi-as-well"><span class="t-red">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा शुरू,</span> कोलकाता के 'मदर हाउस' का किया दौरा, PM मोदी से करेंगे मुलाकात</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582901/ivanka-trump--irgc-terrorist-found-carrying-blueprints-of-trump-s-residence--plot-to-assassinate-daughter-ivanka-exposed</link>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:52:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय: मतभेद का मतलब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ट्रंप और नेतन्याहू के बीच टकराव पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक वास्तविकताओं और अमेरिका-इजराइल संबंधों के भीतर बढ़ती वैचारिक दूरी बताता है। साफ है कि अमेरिका अब इजराइल की हर सैन्य प्राथमिकता को बिना शर्त स्वीकार नहीं करने वाला। यह मतभेद ईरान के लिए रणनीतिक अवसर देता है। तेहरान को लगता है कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच पूर्ण सामंजस्य नहीं है, तो वह वार्ता में अधिक कठोर रुख अपनाएगा। </p>
<p>लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि ट्रंप और नेतन्याहू लगभग समान सोच वाले हैं— दोनों कठोर राष्ट्रवाद, सैन्य शक्ति और ईरान-विरोध की राजनीति के प्रतीक रहे, किंतु</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582883/editorial--the-meaning-of-disagreement"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/sampadkiy16.jpg" alt=""></a><br /><p>ट्रंप और नेतन्याहू के बीच टकराव पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक वास्तविकताओं और अमेरिका-इजराइल संबंधों के भीतर बढ़ती वैचारिक दूरी बताता है। साफ है कि अमेरिका अब इजराइल की हर सैन्य प्राथमिकता को बिना शर्त स्वीकार नहीं करने वाला। यह मतभेद ईरान के लिए रणनीतिक अवसर देता है। तेहरान को लगता है कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच पूर्ण सामंजस्य नहीं है, तो वह वार्ता में अधिक कठोर रुख अपनाएगा। </p>
<p>लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि ट्रंप और नेतन्याहू लगभग समान सोच वाले हैं— दोनों कठोर राष्ट्रवाद, सैन्य शक्ति और ईरान-विरोध की राजनीति के प्रतीक रहे, किंतु युद्ध और कूटनीति के वास्तविक क्षण अक्सर मित्रताओं की सीमाएं उजागर कर देते हैं। तनाव का बड़ा कारण लक्ष्य और प्राथमिकताओं का अंतर है। इजराइल के लिए ईरान एक प्रत्यक्ष, भौगोलिक और अस्तित्वगत खतरा है। </p>
<p>तेहरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह, हमास और अन्य क्षेत्रीय नेटवर्क इजराइल की सुरक्षा रणनीति के केंद्र में हैं। नेतन्याहू मानते हैं कि यदि ईरान को अभी निर्णायक रूप से नहीं रोका गया, तो वह अपनी मिसाइल, ड्रोन और परमाणु क्षमता को इतना मजबूत कर लेगा कि भविष्य में उसे नियंत्रित करना लगभग असंभव हो जाएगा, इसलिए इजराइल युद्ध को ‘विकल्प’ नहीं, बल्कि ‘पूर्व-निवारक आवश्यकता’ के रूप में देखता है। इसके विपरीत अमेरिका की प्राथमिकताएं कहीं अधिक व्यापक और जटिल हैं। ट्रंप लंबे, महंगे और अनिश्चित युद्धों से बचना चाहते हैं। इराक और अफगानिस्तान के अनुभवों ने अमेरिकी समाज को युद्ध से थका दिया है। </p>
<p>अमेरिकी जनता पश्चिम एशिया में एक और व्यापक सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में दिखाई नहीं देती। ट्रंप यह भी समझते हैं कि पूर्ण युद्ध तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दे सकता है, इसलिए वे सैन्य दबाव बनाए रखते हुए भी अंतिम क्षण तक समझौते और शक्ति-प्रदर्शन के मिश्रण की नीति अपनाना चाहते हैं। यही कारण है कि युद्ध के शुरुआती दौर से ही ट्रंप और नेतन्याहू के दृष्टिकोण में अंतर दिखाई देता रहा। इजराइल त्वरित और निर्णायक सैन्य कार्रवाई चाहता रहा, जबकि अमेरिका कई बार संयम, वार्ता और ‘नियंत्रित दबाव’ की रणनीति की ओर झुकता दिखा।</p>
<p>ट्रंप की राजनीतिक मजबूरियां भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। वे एक ओर अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते हैं, दूसरी ओर युद्ध-विरोधी घरेलू भावना को भी नाराज नहीं कर सकते। यदि वे बहुत नरम दिखते हैं, तो रिपब्लिकन खेमे का कट्टर राष्ट्रवादी वर्ग असंतुष्ट होगा; यदि वे पूर्ण युद्ध में उतरते हैं तो आर्थिक और राजनीतिक जोखिम बढ़ेंगे, इसलिए उनकी नीति लगातार दबाव और सीमित संयम के बीच झूलती दिखाई देती है। ट्रंप का यह कहना कि ईरान ‘युद्ध और शांति की दहलीज पर खड़ा है’, अतिशयोक्ति नहीं लगता। </p>
<p>वास्तव में पूरा क्षेत्र इसी अस्थिर संतुलन पर टिका हुआ है। भारत के लिए यह परिस्थिति संवेदनशील है। उसके गहरे संबंध ईरान, इसराइल और अमेरिका तीनों से हैं। ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, पश्चिम एशिया में भारतीय प्रवासी, रक्षा सहयोग और व्यापार सभी दांव पर हैं, इसलिए हमें संतुलित, व्यावहारिक और बहुध्रुवीय कूटनीति अपनानी होगी। भारत के हित युद्ध में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता में निहित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Editorials</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582883/editorial--the-meaning-of-disagreement</link>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 08:02:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G-7 Meeting :  फ्रांस जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी को दिया है न्योता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और अपराध के खिलाफ लड़ाई पर चर्चा करने के लिए 15 से 17 जून तक फ्रांस में होने वाली जी-7 बैठक में भाग लेंगे। अमेरिकी मीडिया संस्थानट एक्सियोस की रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित जी-7 बैठक, ट्रंप के 80वें जन्मदिन के एक दिन बाद होने वाली है। उनका जन्मदिन व्हाइट हाउस के लॉन में विशेष रूप से निर्मित यूएफसी 'केजफाइट्स' के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि जी-7 की बैठक में कोई वास्तविक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582583/g-7-meeting--world-leaders-will-gather-in-france--president-emmanuel-macron-has-invited-pm-modi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(4)16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और अपराध के खिलाफ लड़ाई पर चर्चा करने के लिए 15 से 17 जून तक फ्रांस में होने वाली जी-7 बैठक में भाग लेंगे। अमेरिकी मीडिया संस्थानट एक्सियोस की रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित जी-7 बैठक, ट्रंप के 80वें जन्मदिन के एक दिन बाद होने वाली है। उनका जन्मदिन व्हाइट हाउस के लॉन में विशेष रूप से निर्मित यूएफसी 'केजफाइट्स' के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि जी-7 की बैठक में कोई वास्तविक हस्ताक्षरित समझौता नहीं होगा, बल्कि इसका उद्देश्य आम सहमति बनाना है जिस पर भविष्य के समझौते आधारित हो सकें। एक्सियोस ने कहा कि हालांकि एजेंडे में ईरान का मुद्दा शामिल होने की संभावना है, लेकिन ट्रंप द्वारा व्यापार के बारे में अधिक बात करने की उम्मीद है, विशेष रूप से अमेरिकी सहायता को ऐसे व्यापार से जोड़ने के बारे में जो "निवेशक और प्राप्तकर्ता दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी हो।" </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के अमेरिका में विकसित एआई उपकरणों को अपनाने को बढ़ावा देने, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं पर चीन की पकड़ को कम करने पर सहमति जताने, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध आप्रवासन से लड़ने, अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देने, नियामक बाधाओं को कम करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने - विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन के उत्पादन पर बोलने की उम्मीद है। मैक्रों ने फरवरी में अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी फ्रेंच एल्प्स में स्थित एवियन-लेस-बैंस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><br />ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582533/vietnam-visit--bilateral-talks-between-defense-minister-rajnath-singh-and-defense-minister-general-phan--major-resolution-on-indo-pacific-security"><span class="t-red">वियतनाम यात्रा :</span> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री जनरल फान के बीच द्विपक्षीय वार्ता, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर बड़ा संकल्प</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582583/g-7-meeting--world-leaders-will-gather-in-france--president-emmanuel-macron-has-invited-pm-modi</link>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:29:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘ड्रैगन’ के दबाव में क्यों आए ‘अंकल सैम'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><em><strong>रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होंगे। जो डोनाल्ड ट्रंप को चीन की तरफ से बड़ा जवाब होगा।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/069.jpg" alt="0" width="149" height="202" />
<strong>नवीन गुप्ता, बरेली</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे से वापस जा चुके हैं। इस दौरे से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं। ट्रंप को लगा था कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ईरान के विरुद्ध राजी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चीन को रूस से दूर ले जाने की उनकी कोशिश भी नाकामयाब हो गई। रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582329/why-did--uncle-sam--bow-to--the-dragon-s--pressure"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats287.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><em><strong>रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होंगे। जो डोनाल्ड ट्रंप को चीन की तरफ से बड़ा जवाब होगा।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/069.jpg" alt="0" width="149" height="202"></img>
<strong>नवीन गुप्ता, बरेली</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे से वापस जा चुके हैं। इस दौरे से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं। ट्रंप को लगा था कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ईरान के विरुद्ध राजी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चीन को रूस से दूर ले जाने की उनकी कोशिश भी नाकामयाब हो गई। रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होंगे। जो डोनाल्ड ट्रंप को चीन की तरफ से बड़ा जवाब होगा। हां, ट्रंप के इस दौरे से एक बात तो स्पष्ट रूप से साफ हो गई कि अमेरिका अब चीन के आगे न सिर्फ झुकने के लिए तैयार है, बल्कि कुछ मुद्दों पर उसकी हां में हां मिलाने को तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ताइवान की सुरक्षा का मुद्दा। चीन ने ताइवान का साथ देने पर अमेरिकी राष्ट्रपति को आंखें क्या दिखाईं, ट्रंप ने तत्काल बयान दे दिया कि वे ताइवान को आजाद होता नहीं देखना चाहते। उनके इस बयान से चीन तो खुश हो गया, लेकिन अमेरिका के खास दोस्त जापान भी ताइवान के साथ मायूस हुआ है, हालांकि ताइवान के राष्ट्रपति ने अपने चिरपरिचत अंदाज में ट्रंप और जिनपिंग को यह बता दिया कि उन्हें अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका देश पहले से ही संप्रभु राष्ट्र है और रहेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के दौरे ने पूरी दुनिया को यह बता दिया कि अब अमेरिकी पहल पर गठित किए गए चार देशों के समूह क्वाड का अस्तित्व मिटने वाला है। साथ ही अमेरिका को अब भारत की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं रह गई है। पहले अमेरिका चीन को दबाने के लिए भारत की हर स्तर पर सहायता करता था, लेकिन अब उसे प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रहा है, ऐसे में भारत को झुकाने में पूरी ऊर्जा लगाने में जुटा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दौर था तब चीन को अमेरिका अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता था और उसकी सभी सरकारें चीन के खिलाफ भारत को विकल्प के रूप में तैयार करतीं थीं, इसीलिए चीन के मुकाबले अमेरिका भारत को मजबूत आर्थिक ताकत बनाने में मदद कर रहा था। भारत जितना सामरिक और व्यापारिक रूप से मजबूत होता, चीन का दबदबा उतना ही कम होता, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अब अमेरिका की कूटनीति को बदल दिया है। उनका लक्ष्य चीन को नहीं, बल्कि भारत को रोकना है, ताकि वह आर्थिक रूप से समृद्ध राष्ट्र न बन सके और चीन की तरह उसके मुकाबले न खड़ा हो पाए। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी नीति में आए बदलाव को भारत की कूटनीति के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि अमेरिका अब भी चीन के मुकाबले उसे मजबूत करेगा। अमेरिका ने पहले चीन के लिए अपने बाजार को खोले रखा। उसकी व्यापार नीति का समर्थन किया। परिणाम स्वरूप चीन पूरी दुनिया में व्यापारिक रूप से मजबूत हो गया, तो अमेरिका को समझ में आया कि उसने अपने लिए ही गड्ढा खोद लिया, इसलिए उसने भारत को आगे बढ़ाने की कोशिश की पर अब खुद ही कह रहा है कि वह भारत को प्रतिद्वद्वी के रूप में खड़ा होते हुए नहीं देखना चाहता है। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी नीति को भारत समझ चुका है, इसीलिए वह दुनिया के तमाम देशों और संगठनों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है, लेकिन भारत के लिए एक मुश्किल खड़ी होने जा रही है, वह है अमेरिका और चीन द्वारा जी-2 के रूप में बनाया जा रहा गठजोड़। अमेरिका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र हो या अन्य कोई मंच, जो भी फैसले लेने हों, दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां चीन और अमेरिका ही मिलकर लें। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की इस कोशिश पर निगाह तो पूरी दुनिया की है। अब देखना है कि उनके द्वारा फेंके गए इस जाल में चीन कितना फंसता है, इसीलिए ट्रंप ने टकराव का रास्ता छोड़कर चीन को महाशक्ति के रूप में स्वीकार कर लिया है। वह चाहते हैं कि ईरान के मुद्दे पर चीन पूरी तरह चुप्पी साध ले। चीन और अमेरिका की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए बहुत अच्छा नहीं होगा, क्योंकि चीन तो पहले से ही पाकिस्तान की हर क्षेत्र में मदद कर रहा है और अमेरिका भी पाकिस्तान को शह  दे रहा है। रूस भी धीरे-धीरे पाकिस्तान के करीब जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में भारत के लिए फिलहाल अपनी कूटनीति को और धार देनी होगी। उधर, 19 से 20 मई तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन आ रहे हैं। चीन के साथ रूस कई अहम समझौते करने वाला है। अब देखना यह है कि ट्रंप चीन पर जो प्रभाव छोड़ गए हैं, जी-2 का उनके द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर वे कितना पानी फेर पाते हैं। दोनों देशों के बीच अमेरिका-ईरान तनाव, यूक्रेन युद्ध और ताइवान विवाद जैसे बड़े भू-राजनीतिक मुद्दों पर यहां चर्चा होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि ट्रंप ने खुद ही चीन के दबाव में ताइवान को आजादी का एलान न करने की चेतावनी दे दी है, ऐसे में चीन, रूसी राष्ट्रपति से भी चाहेगा कि वे ताइवान के मुद्दे पर खुलकर उसके साथ बयान दें, ताकि वह भविष्य में ताइवान को अपने में मिला सके। पुतिन का यह दौरा चीन-रूस मैत्री संधि की 25वीं सालगिरह पर होने जा रहा है। ऐसे में पुतिन भी जिनपिंग को खुश करने के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अब बात करें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी वाले समूह क्वाड की, तो अब अमेरिका चीनी दबाव में इसे निष्प्रभावी करने पर उतारू हो गया है। इसका लाभ चीन को मिलेगा, क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसके मुकाबले के लिए यह संगठन मजबूत हो। जापान पर वह पहले से ही आंखें तरेर रहा है और युद्ध की धमकी देता रहा है। रही बात भारत की तो वह पाकिस्तान का साथ देकर उसे कमजोर करने की भरपूर कोशिश कर ही रहा है। देखना होगा कि पुतिन भारत के लिए चीन में कितनी जमीन तैयार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582329/why-did--uncle-sam--bow-to--the-dragon-s--pressure</link>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 05:07:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने अमेरिका पर लगाया लापरवाह सैन्य दुस्साहस का आरोप, ट्रंप बोले- 'युद्धविराम अब भी बरकरार'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>तेहरान। </strong>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि जब कभी राजनयिक समाधान का विकल्प मौजूद होता है तो वह लापरवाह सैन्य अभियान का मार्ग चुनता है। यह जानकारी बीबीसी ने शनिवार को दी। अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ईरान के लोग दबाव के आगे कभी नहीं झुकेंगे। उनका बयान दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले शुरू करने का आरोप लगाने के एक दिन बाद और अमेरिका द्वारा और अधिक ईरानी जहाजों पर गोलीबारी करने के बाद आया है। झड़पों के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581372/iran-accuses-the-us-of-reckless-military-adventurism--trump-says--%22the-ceasefire-remains-in-place-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(9)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तेहरान। </strong>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि जब कभी राजनयिक समाधान का विकल्प मौजूद होता है तो वह लापरवाह सैन्य अभियान का मार्ग चुनता है। यह जानकारी बीबीसी ने शनिवार को दी। अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ईरान के लोग दबाव के आगे कभी नहीं झुकेंगे। उनका बयान दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले शुरू करने का आरोप लगाने के एक दिन बाद और अमेरिका द्वारा और अधिक ईरानी जहाजों पर गोलीबारी करने के बाद आया है। झड़पों के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि युद्धविराम बरकरार है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसका उद्देश्य फरवरी में अमेरिका और इज़रायल के साथ शुरू हुए ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत को संभव बनाना है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा ईरान से अमेरिकी प्रस्तावों पर जवाब देने की उम्मीद है। इटली की यात्रा के दौरान रुबियो ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि यह एक गंभीर प्रस्ताव है और मैं वास्तव में यही चाहता हूं।" </p>
<p style="text-align:justify;">ईरान, अमेरिका और इज़रायल के हमलों के प्रतिशोध में होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है और खाड़ी में अमेरिकी सहयोगियों पर हमले कर रहा है। विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी महत्वपूर्ण जलमार्ग से होता है जिसके अवरुद्ध होने से कीमतों में भारी उछाल आया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, ट्रम्प ने फरवरी से इस क्षेत्र में फंसे लगभग 2,000 जहाजों को मुक्त कराने में मदद करने के लिए एक अमेरिकी सैन्य अभियान शुरू किया और फिर उसे रोक दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका, ईरान पर अमेरिकी शर्तों को मानने के लिए दबाव डालने के उद्देश्य से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी भी बनाए हुए है और इस कदम से तेहरान नाराज है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी बंदरगाह में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे दो ईरानी ध्वज वाले खाली तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया जो चल रही अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहे थे। बयान में कहा गया कि अमेरिकी सेना ने नियमों का पालन न करने वाले जहाजों के चिमनियों पर सटीक गोलाबारी करके उन्हें ईरान में प्रवेश करने से रोक दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना 70 से अधिक टैंकरों को ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या बाहर निकलने से रोक रही है। गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई झड़पों के बाद अमेरिका ने नए हमले किए, जिसके लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को दोषी ठहराया। सेंटकॉम ने ईरान पर अपने तीन युद्धपोतों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला करने का आरोप लगाया जिसे उसने बिना उकसावे का हमला करार दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि अमेरिका ने कई छोटी नावों, मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट कर दिया और कहा कि ईरानी हमलावरों को भारी नुकसा पहुंचा। इस बीच, ईरान के शीर्ष सैन्य कमान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास आ रहे एक ईरानी तेल टैंकर और एक अन्य जहाज को निशाना बनाया और कई तटीय क्षेत्रों पर हवाई हमले किए। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/581292/iranian-attack-on-us-ships-in-hormuz-foiled--trump-says--%22they-messed-with-us--we-blew-them-up-%22"><span class="t-red">होर्मुज में अमेरिकी पोतों पर ईरानी हमला नाकाम, </span>ट्रंप बोले -'उन्होंने हमसे खिलवाड़ किया, हमने उन्हें उड़ा दिया' </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/581372/iran-accuses-the-us-of-reckless-military-adventurism--trump-says--%22the-ceasefire-remains-in-place-%22</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/581372/iran-accuses-the-us-of-reckless-military-adventurism--trump-says--%22the-ceasefire-remains-in-place-%22</guid>
                <pubDate>Sat, 09 May 2026 12:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय:मुश्किल में महाबली</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाबली मुश्किल में हैं। ट्रंप की कठिनाइयां बढ़ती जा रही हैं। पुतिन द्वारा ट्रंप को ईरान पर दोबारा हमला न करने की चेतावनी और ईरान का परमाणु कार्यक्रम पर समझौता न करने के एलान तथा अमेरिका मुक्त भविष्य के आह्वान ने ट्रंप तथा अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए दुविधा की स्थिति पैदा कर दी है। ट्रंप को एक ओर घरेलू राजनीति में कठोर नेता की छवि बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। यदि अमेरिका आक्रामक कार्रवाई करता है, तो क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ेगा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580647/editorial--the-mighty-one-in-trouble"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/sampadkiy.jpg" alt=""></a><br /><p>महाबली मुश्किल में हैं। ट्रंप की कठिनाइयां बढ़ती जा रही हैं। पुतिन द्वारा ट्रंप को ईरान पर दोबारा हमला न करने की चेतावनी और ईरान का परमाणु कार्यक्रम पर समझौता न करने के एलान तथा अमेरिका मुक्त भविष्य के आह्वान ने ट्रंप तथा अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए दुविधा की स्थिति पैदा कर दी है। ट्रंप को एक ओर घरेलू राजनीति में कठोर नेता की छवि बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। यदि अमेरिका आक्रामक कार्रवाई करता है, तो क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ेगा और यदि संयम दिखाता है, तो उसकी वैश्विक साख पर प्रश्न उठेंगे। </p><p>पश्चिम एशिया में अमेरिका, रूस और ईरान के बीच उभरता त्रिकोणीय तनाव केवल क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का प्रश्न नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों की नई जटिलता का संकेत है। अमेरिका के खाड़ी देशों में कतर, बहरीन और यूएई में सैन्य अड्डे उसकी शक्ति-प्रदर्शन की रीढ़ हैं। इनकी सुरक्षा पर संदेह का मतलब उसके लिए केवल सैन्य चुनौती नहीं, बल्कि कूटनीतिक प्रतिष्ठा का भी प्रश्न बन जाता है। हालिया घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया कि अमेरिका उन्हें पूर्ण सुरक्षा की गारंटी देने की स्थिति में नहीं है, जिससे ट्रंप की छवि पर बुरा असर पड़ा है। ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती अमेरिकी कांग्रेस की स्वीकृति के बिना युद्ध जैसी कार्रवाई जारी रखना है। </p><p>यह संवैधानिक बाध्यता है, जिसे दरकिनार करना आसान नहीं, इसलिए वे सीमित सैन्य कदमों या कार्यकारी अधिकारों का सहारा लेकर संतुलन बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ट्रंप खाड़ी से तो नहीं निकलेंगे, क्योंकि इस वापसी से चीन और रूस के लिए प्रभाव बढ़ाने का अवसर खुल जाएगा, पर इस दुविधा से बाहर निकलने के लिए ट्रंप के पास तीन विकल्प हैं— पहला, सीमित सैन्य कार्रवाई कर दबाव बनाना; दूसरा, कूटनीतिक वार्ता के जरिए तनाव कम करना; और तीसरा, रणनीतिक ‘डि-एस्केलेशन’ यानी धीरे-धीरे क्षेत्रीय संलिप्तता कम करना। फिलहाल यदि रूस ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को सुरक्षित रखने का ‘तीसरा पक्ष’ बनता है, तो यह एक नई कूटनीतिक व्यवस्था की शुरुआत हो सकती है, लेकिन इसके बदले यूक्रेन युद्ध समाप्त करने जैसी अमेरिकी शर्तें यथार्थवादी नहीं हैं। पुतिन अमेरिकी दबाव में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता नहीं खोएंगे।  </p><p>ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती ‘जुबानी जंग’ दरअसल मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति है। ईरान ‘अमेरिका-मुक्त भविष्य’ की बात कर अपनी जनता और क्षेत्रीय सहयोगियों को संदेश दे रहा है, जबकि अमेरिका आक्रामक बयान देकर अपने सहयोगियों को आश्वस्त करना चाहता है। जहां तक आशंकित युद्ध या स्थाई युद्धविराम का प्रश्न है, वर्तमान संकेत ‘नियंत्रित तनाव’ की ओर इशारा करते हैं। गंभीर आर्थिक और राजनीतिक परिणाम देखते हुए अमेरिका और इजराइल दोनों व्यापक युद्ध के हामी नहीं हैं। बयानबाजी के बावजूद अस्थायी युद्धविराम जारी रहने की संभावना अधिक है। पश्चिम एशिया में वर्तमान स्थिति ‘न तो युद्ध, न पूर्ण शांति’ की है। ट्रंप की रणनीति अब केवल शक्ति-प्रदर्शन नहीं, बल्कि संतुलन साधने की कला पर निर्भर करेगी। यदि कूटनीति और संयम का रास्ता नहीं अपनाया गया, तो यह गतिरोध किसी बड़े संघर्ष में बदल सकता है, जिसका प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580647/editorial--the-mighty-one-in-trouble</link>
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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 08:05:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय:अशोभनीय टिप्पणी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत ‘नरक का द्वार’ है, जैसी टिप्पणी कूटनीतिक मर्यादाओं के विपरीत है, इस तरह की भाषा उस परिपक्व वैश्विक नेतृत्व की अपेक्षाओं पर प्रश्न चिह्न लगाती है, जिसकी जिम्मेदारी किसी भी महाशक्ति के नेता पर होती है। ट्रंप ने बात पलटते हुए भारत को महान बताया, यह बात अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कही और यह नहीं बताया कि ट्रंप ने कब और कहां कहा, इसकी प्रमाणिकता संदिग्ध है। </p>
<p>विदेश मंत्रालय द्वारा ट्रंप के बयान को ‘अज्ञानतापूर्ण, अनुचित और खराब सोच वाला’ बताया जाना एक संतुलित और संस्थागत प्रतिक्रिया है, किंतु देश के बारे में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579902/editorial--indecent-comment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/sampadkiy17.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत ‘नरक का द्वार’ है, जैसी टिप्पणी कूटनीतिक मर्यादाओं के विपरीत है, इस तरह की भाषा उस परिपक्व वैश्विक नेतृत्व की अपेक्षाओं पर प्रश्न चिह्न लगाती है, जिसकी जिम्मेदारी किसी भी महाशक्ति के नेता पर होती है। ट्रंप ने बात पलटते हुए भारत को महान बताया, यह बात अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कही और यह नहीं बताया कि ट्रंप ने कब और कहां कहा, इसकी प्रमाणिकता संदिग्ध है। </p>
<p>विदेश मंत्रालय द्वारा ट्रंप के बयान को ‘अज्ञानतापूर्ण, अनुचित और खराब सोच वाला’ बताया जाना एक संतुलित और संस्थागत प्रतिक्रिया है, किंतु देश के बारे में ऐसी ओछी टिप्पणी के विरोध में उच्च राजनीतिक स्तर से प्रत्यक्ष टिप्पणी का अभाव भी अपने आप में अलग संकेत देता है। भारत की यह चुप्पी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी परिपक्व कूटनीति का हिस्सा मानी जानी चाहिए। भारत और अमेरिका के संबंध दशकों से साझा हितों, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक संतुलन पर आधारित रहे हैं। ऐसे में किसी एक व्यक्ति के विवादास्पद बयान को द्विपक्षीय रिश्तों के व्यापक ढांचे पर हावी होने देना व्यावहारिक नहीं होगा, इसीलिए भारत अक्सर ‘व्यक्ति नहीं, नीति’ के स्तर पर प्रतिक्रिया देता है। </p>
<p>यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप का यह पहला विवादास्पद बयान नहीं है। उन्होंने पहले भी भारत के व्यापार, कश्मीर और आंतरिक राजनीति पर असामान्य टिप्पणियां की हैं, जिनमें कई बार बाद में यू-टर्न भी लिया गया। यह उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा है, जहां तीखे बयान देकर घरेलू राजनीति में चर्चा बटोरी जाती है और फिर परिस्थितियों के अनुसार नरमी दिखाई जाती है। ट्रंप ने भारत जैसी ही टिप्पणी चीन के बारे में भी की, वहां की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत अधिक तीखी और प्रत्यक्ष रही। यह दोनों देशों की कूटनीतिक शैली का अंतर दर्शाता है, जहां चीन सार्वजनिक आक्रामकता दिखाता है, वहीं भारत संयमित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाता है। </p>
<p>ट्रंप के बयान अक्सर अगंभीर और विरोधाभासी होते हैं। एक ओर वे भारत के प्रधानमंत्री को ‘अच्छा मित्र’ बताते हैं, तो दूसरी ओर उनका राजनीतिक करियर ‘तबाह करने’ जैसी बातें करते हैं। यह असंगति उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक रणनीति दोनों को उजागर करती है। कई अमेरिकी विश्लेषक इसे ‘पॉपुलिस्ट पॉलिटिक्स’ का हिस्सा मानते हैं, जहां उत्तेजक बयान देकर जनभावनाओं को भुनाया जाता है, खासकर तब जब घरेलू मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ रही हों।</p>
<p>भारत को चाहिए कि वह ऐसी परिस्थितियों में अपनी गरिमा बनाए रखते हुए अमेरिका और ट्रंप को स्पष्ट संदेश भी दे। सरकार आवश्यक होने पर अधिक मुखर और दृढ़ रुख अपनाए, ताकि भविष्य में कोई भी नेता भारत के प्रति इस तरह की टिप्पणी करने से पहले दो बार सोचे। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि द्विपक्षीय संबंध किसी व्यक्ति विशेष की बयानबाज़ी के बजाय संस्थागत मजबूती पर टिके रहें। कुल मिलाकर ट्रंप का बयान भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करता। यह एक क्षणिक राजनीतिक अभिव्यक्ति है, न कि स्थायी कूटनीतिक दृष्टिकोण। भारत को संयम, आत्मविश्वास और रणनीतिक स्पष्टता के साथ आगे बढ़ते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी वैश्विक छवि और हित किसी भी असंगत बयान से प्रभावित न हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579902/editorial--indecent-comment</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 08:05:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान पर 'जबरन वसूली' का आरोप लगा बोले ट्रंप- अमेरिकी सेना तत्काल प्रभाव से होर्मुज की पूर्ण घेराबंदी करेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर 'जबरन वसूली' का आरोप लगाते हुए घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना तत्काल प्रभाव से होर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण घेराबंदी शुरू करेगी और यह घेराबंदी तब तक नहीं खुलेगी जब तक ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं नहीं त्याग देता।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर कहा कि ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खोलने का वादा किया था, लेकिन जानबूझकर उन्होंने ऐसा नहीं किया। इससे दुनिया भर के देशों और लोगों को चिंता और परेशानी का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578506/accusing-iran-of--extortion---trump-declares--the-us-military-will-impose-a-complete-blockade-of-hormuz-with-immediate-effect"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(66)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर 'जबरन वसूली' का आरोप लगाते हुए घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना तत्काल प्रभाव से होर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण घेराबंदी शुरू करेगी और यह घेराबंदी तब तक नहीं खुलेगी जब तक ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं नहीं त्याग देता।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर कहा कि ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खोलने का वादा किया था, लेकिन जानबूझकर उन्होंने ऐसा नहीं किया। इससे दुनिया भर के देशों और लोगों को चिंता और परेशानी का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन उसके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प के अनुसार, ईरान पानी में माइन्स (सुरंगों) होने का डर दिखाकर दुनिया को डरा रहा है, लेकिन अमेरिका ऐसी किसी भी जबरन वसूली के आगे कभी नहीं झुकेगा। अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन सभी जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोकें जिन्होंने ईरान को अवैध टोल (कर) का भुगतान किया है। अवैध टोल देने वाले किसी भी जहाज को सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यदि किसी ईरानी ने अमेरिकी सेना या शांतिपूर्ण जहाजों पर गोलीबारी की, तो उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घेराबंदी में अन्य देश भी शामिल होंगे। श्री ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायु सेना और रडार सिस्टम पहले ही बेकार हो चुके हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सेना 'लॉक्ड एंड लोडेड' है और वह ईरान के बचे हुए हिस्से को भी खत्म करने के लिए तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक करीब 20 घंटे तक चली। श्री ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की, लेकिन बैठक में कई बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578506/accusing-iran-of--extortion---trump-declares--the-us-military-will-impose-a-complete-blockade-of-hormuz-with-immediate-effect</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 20:29:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का ईरान को सख्त चेतावनी! Strait of Hormuz से गुजरने वाले टैंकरों पर शुल्क लेना तुरंत बंद करो</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क लेना बंद करने को कहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, ''ऐसी खबरें हैं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क ले रहा है - उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए और अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही की अनुमति देकर ''बहुत ही खराब काम कर रहा है, कुछ लोग इसे अपमानजनक कहेंगे।'' ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578125/trump-s-stern-warning-to-iran--immediately-stop-charging-tankers-passing-through-the-strait-of-hormuz"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(7)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क लेना बंद करने को कहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, ''ऐसी खबरें हैं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क ले रहा है - उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए और अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही की अनुमति देकर ''बहुत ही खराब काम कर रहा है, कुछ लोग इसे अपमानजनक कहेंगे।'' ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, ''यह हमारे समझौते के अनुरूप नहीं है।'' उन्होंने शुल्क का विवरण नहीं दिया। वॉल स्ट्रीट जर्नल पर जमकर हमला बोलते हुए ट्रंप ने इसे "दुनिया के सबसे खराब और सबसे गलत संपादकीय बोर्डों में से एक" बताया, क्योंकि जर्नल ने कहा था कि ट्रंप ने ईरान में "समय से पहले जीत" की घोषणा कर दी है। उन्होंने आगे कहा, "दरअसल, यह एक जीत है, और इसमें समय से पहले की कोई बात नहीं है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि उन्हीं की वजह से "ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा"। उन्होंने कहा, "बहुत जल्द आप देखेंगे कि तेल का प्रवाह शुरू हो जाएगा, चाहे ईरान की मदद से हो या उसके बिना, और मेरे लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।" ट्रंप ने कहा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल हमेशा की तरह "अपनी कही बात को वापस लेने के लिए मजबूर होगा।" उन्होंने कहा कि वे आलोचना करने में तो हमेशा तत्पर रहते हैं, लेकिन अपनी गलती मानने से कभी कतराते नहीं, जो कि ज्यादातर समय होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:22:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का बड़ा डिप्लोमेटिक ब्रेकथ्रू: अमेरिका-ईरान के बीच 2 हफ्ते का युद्धविराम, खुलेगा Strait of Hormuz!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटनः </strong>अमेरिका और ईरान युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान एक निर्णायक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा वाशिंगटन समयानुसार 18:32 बजे की जो कि श्री ट्रंप द्वारा तय की गई रात आठ बजे की समय सीमा के अंदर थी। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ईरान घोषित समयसीमा के भीतर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो ईरानी सभ्यता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577878/trump-s-major-diplomatic-breakthrough--2-week-ceasefire-between-us-and-iran--strait-of-hormuz-to-open"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(3)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटनः </strong>अमेरिका और ईरान युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान एक निर्णायक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा वाशिंगटन समयानुसार 18:32 बजे की जो कि श्री ट्रंप द्वारा तय की गई रात आठ बजे की समय सीमा के अंदर थी। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ईरान घोषित समयसीमा के भीतर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो ईरानी सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मेत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उनका देश दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। इस दौरान होर्मुज जलडमरुमध्य को खोल दिया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, युद्ध विराम पर सहमति पाकिस्तान के मध्य्थता से हुई है और इजरायल भी इसपर सहमत है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>युद्धविराम समझौते के बाद ईरान में प्रदर्शनकारियों ने जताया आक्रोश</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">युद्धविराम की घोषणा के बाद बुधवार की सुबह ईरान की राजधानी की सड़कों पर सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने ''अमेरिका मुर्दाबाद, इजराइल मुर्दाबाद, समझौता करने वाले मुर्दाबाद!'' के नारे लगाए। आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की लेकिन वे लगातार नारे लगाते रहे। उन्होंने सड़क पर अमेरिकी और इजराइल के झंडे भी जलाए। यह ईरान में कट्टरपंथियों के निरंतर गुस्से को दर्शाता है। कई लोगों का मानना है कि कट्टरपंथी अमेरिका के खिलाफ विनाशकारी युद्ध की तैयारी में जुटे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 10:01:31 +0530</pubDate>
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