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                <title>Rampur Raza Library - Amrit Vichar</title>
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                <description>Rampur Raza Library RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अयोध्या : फारसी में लिखे गये रामायण की पांडुलिपि राम कथा संग्रहालय को उपलब्ध कराने की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या।</strong> रामपुर रजा पुस्तकालय 17वीं शताब्दी में फारसी में लिखे गये रामायण की पांडुलिपियां अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को उपलब्ध कराएगा। ये दुर्लभ पांडुलिपियां जहांगीर के शासनकाल में मुल्ला मसीह पानीपती द्वारा फारसी में अनुवादित हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण कृति- किस्सा-ए-राम सीता है जिसे 1825 में अहमद खान गफलत द्वारा रची गई थी। रजा पुस्तकालय में विभिन्न भाषाओं में 17,000 दुर्लभ पांडुलिपियां और 83,000 छपी हुई पुस्तकें मौजूद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, यहां रामायण की 13 पांडुलिपियां और आठ पुस्तकें उपलब्ध हैं जो सैकड़ों वर्षों पहले की हैं। इस पुस्तकालय के संग्रह प्रभारी सैयद तारिक अजहर के मुताबिक, इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576213/ayodhya--preparations-underway-to-provide-persian-manuscript-of-the-ramayana-to-the-ram-katha-museum"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/राम-मंदिर-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या।</strong> रामपुर रजा पुस्तकालय 17वीं शताब्दी में फारसी में लिखे गये रामायण की पांडुलिपियां अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को उपलब्ध कराएगा। ये दुर्लभ पांडुलिपियां जहांगीर के शासनकाल में मुल्ला मसीह पानीपती द्वारा फारसी में अनुवादित हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण कृति- किस्सा-ए-राम सीता है जिसे 1825 में अहमद खान गफलत द्वारा रची गई थी। रजा पुस्तकालय में विभिन्न भाषाओं में 17,000 दुर्लभ पांडुलिपियां और 83,000 छपी हुई पुस्तकें मौजूद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, यहां रामायण की 13 पांडुलिपियां और आठ पुस्तकें उपलब्ध हैं जो सैकड़ों वर्षों पहले की हैं। इस पुस्तकालय के संग्रह प्रभारी सैयद तारिक अजहर के मुताबिक, इस संग्रह में एक रत्न वाल्मिकी रामायण है जिसे मुगल शासक फारुख सियार के शासनकाल में 1715 में सुमेर चंद द्वारा फारसी भाषा में अनूठे ढंग से अनुवाद और चित्रित किया गया था। रामपुर रजा पुस्तकालय और अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के बीच ऐतिहासिक पांडुलिपियों पर गठबंधन की तैयारी शुरू हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या में भगवान राम के जीवन से जुड़ी विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल आकार ले रही है। रजा पुस्तकालय के निदेशक पुष्कर मिश्रा ने सोमवार को रामकथा संग्रहालय के संयोजक संजीव कुमार से मुलाकात की और कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। मिश्रा ने बताया, "अयोध्या रामायण पर अनुसंधान का एक नया केंद्र बनेगा क्योंकि पांडुलिपियां और दुर्लभ रामायण रामपुर पुस्तकालय से यहां आएंगे।"</p>
<p style="text-align:justify;">मिश्रा ने कहा, "कुछ समय पहले, इस संग्रहालय के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने देशभर के संस्थानों से राम कथा से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियां, प्राचीन वस्तुएं और अन्य सूचना इस संग्रहालय के साथ साझा करने की अपील की थी।" उन्होंने कहा, "इस दिशा में रामपुर रजा पुस्तकालय ने न केवल 16वीं और 17वीं शताब्दियों की राम साहित्य की पांडुलिपियों की मूल प्रतियां, बल्कि इनकी सांकेतिक प्रतिलिपियों भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।"</p>
<p style="text-align:justify;">मिश्रा ने बताया कि भगवद् गीता का फारसी में अनुवाद और इसकी अलंकृत पांडुलिपि रजा पुस्तकालय में मौजूद है जिसमें सोने के पत्ते के साथ कलात्मक कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अमूल्य विरासत और इससे जुड़ी पेंटिंग की अयोध्या में संयुक्त रूप से प्रदर्शनी लगाने का भी प्रस्ताव दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामपुर : संस्कृत, अरबी और फारसी पांडुलिपियों का भंडार रजा लाइब्रेरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रामपुर, अमृत विचार।</strong> रजा लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य रहे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर बातचीत की। पूर्व मंत्री नवेद मियां से बातचीत के दौरान रजा लाइब्रेरी के डायरेक्टर डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि इस संस्थान को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध रामपुर रजा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय में 18 से अधिक भाषाओं, विशेषकर संस्कृत, अरबी और फारसी  पांडुलिपियों का भंडार है।</p>
<p>लाइब्रेरी में लगभग 17,000 पाण्डुलिपियां और दुर्लभ वस्तुएं हैं, जिनमें 35 एलबमों के 1000 लघुचित्र, 84 कैलीग्राफी एलबमों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/519795/rampur-sanskrit-arabic-and-persian-manuscripts-store-raza-library"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-02/591.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रामपुर, अमृत विचार।</strong> रजा लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य रहे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर बातचीत की। पूर्व मंत्री नवेद मियां से बातचीत के दौरान रजा लाइब्रेरी के डायरेक्टर डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि इस संस्थान को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध रामपुर रजा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय में 18 से अधिक भाषाओं, विशेषकर संस्कृत, अरबी और फारसी  पांडुलिपियों का भंडार है।</p>
<p>लाइब्रेरी में लगभग 17,000 पाण्डुलिपियां और दुर्लभ वस्तुएं हैं, जिनमें 35 एलबमों के 1000 लघुचित्र, 84 कैलीग्राफी एलबमों में 2000 इस्लामिक कैलीग्राफी के नमूने, 300 कला-कृतियां, 1300 ऐतिहासिक सिक्के सम्मिलित हैं तथा विभिन्न भाषाओं में लगभग 65,000 मुद्रित पुस्तकें उपलब्ध हैं।पूर्व मंत्री नवेद मियां ने कहा कि रजा लाइब्रेरी की स्थापना रामपुर के प्रथम शासक नवाब फैजुल्लाह खां ने 1774 में की थी। 1975 में पार्लियामेंट एक्ट के तहत यह भारत सरकार के अधीन तथा संस्कृति मंत्रालय, के अन्तर्गत एक स्वायत्त संस्था के रूप में तथा एक बोर्ड की निगरानी में कार्य कर रहा है। निदेशक ने नवेद मियां को लाइब्रेरी के 250 साल पूरे होने और संग्रहित रागमाला एलबम थीम पर आधारित 2025 का कैलेंडर भेंट किया। इस मौके पर इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां भी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/519777/painter-killed-due-to-current-in-rampur-patwai">रामपुर : पटवाई में पेंटर की करंट लगने से मौत, मचा कोहराम</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>रामपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 19:59:13 +0530</pubDate>
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