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                <title>US tariffs - Amrit Vichar</title>
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                <description>US tariffs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर फोड़ा टैरिफ का बम,  लगाया 10% का एक्स्ट्रा शुल्क, फोर्स लेबर को बताया बड़ी वजह </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत भारत समेत 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह नया शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार, यह फैसला उन देशों को बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसके सख्त क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले अमेरिका ने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/588744/us-tariff-17-countries-india-10--duty-forced-labor-main-reason"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(51)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत भारत समेत 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह नया शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार, यह फैसला उन देशों को बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसके सख्त क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले अमेरिका ने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा 14 जून को विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को देखते हुए अमेरिका ने भारत के लिए प्रस्तावित शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की। इनमें भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है, जबकि शेष 43 देशों को 12.5 प्रतिशत शुल्क का सामना करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जिन कच्चे माल पर शुल्क लगाने से घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है या जिन वस्तुओं का पर्याप्त उत्पादन अमेरिका में संभव नहीं है, उन्हें इस शुल्क से छूट दी जाएगी। इसके अलावा पूरी अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा करने वाले उत्पाद भी इस दायरे से बाहर रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यूएसटीआर के अनुसार, यह कार्रवाई उन देशों के खिलाफ की गई है जो बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने में विफल रहे हैं। ग्रीर ने कहा कि इस कदम से मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने और वैश्विक श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था।'</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/588651/india-hits-back-at-pakistan-at-the-un--states-that-the-discussion-was-misused-to-propagate-a-false-narrative"><span class="t-red">UN में भारत का पाकिस्तान पर पलटवार,</span> कहा- झूठे विमर्श के लिए चर्चा का किया गया दुरुपयोग</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/588744/us-tariff-17-countries-india-10--duty-forced-labor-main-reason</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 11:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप टैरिफ से पुराने ऑर्डर पर असर,  वैश्विक कारोबार की स्थिति साफ होने पर तक भ्रम की स्थिति में निर्यातक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कानपुर, अमृत विचार। </strong>अमेरिका पर टैरिफ पर वहां के कोर्ट का निर्णय और ट्रंप की नई घोषणा के बीच यह मुद्दा फिर विवाद में है। नए विवाद के पनपने के बाद निर्यातक भ्रम में हैं। ऐसे में रिकवर हो रहे पुराने ऑर्डर पर दोबारा असर पड़ रहा है। विदेशी खरीदार और निर्यातक के बीच पैदा हुए भ्रम से माना जा रहा है कि कुछ दिन ऑर्डर और होल्ड हो सकते हैं। निर्यात विशेषज्ञ इस प्रकरण के बाद सप्ताह भर में स्थिति साफ होने की बात कर रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">शहर से अमेरिका को लगभग 25 सौ करोड़ रुपये का निर्यात होता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572724/trump-s-tariffs-impact-old-orders--leaving-exporters-confused-until-the-global-business-situation-becomes-clearer"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(35)10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कानपुर, अमृत विचार। </strong>अमेरिका पर टैरिफ पर वहां के कोर्ट का निर्णय और ट्रंप की नई घोषणा के बीच यह मुद्दा फिर विवाद में है। नए विवाद के पनपने के बाद निर्यातक भ्रम में हैं। ऐसे में रिकवर हो रहे पुराने ऑर्डर पर दोबारा असर पड़ रहा है। विदेशी खरीदार और निर्यातक के बीच पैदा हुए भ्रम से माना जा रहा है कि कुछ दिन ऑर्डर और होल्ड हो सकते हैं। निर्यात विशेषज्ञ इस प्रकरण के बाद सप्ताह भर में स्थिति साफ होने की बात कर रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">शहर से अमेरिका को लगभग 25 सौ करोड़ रुपये का निर्यात होता है। 50 फीसदी टैरिफ के बाद यह कारोबार घटकर लगभग 30 से 40 फीसदी तक पहुंच गया था। इसके बाद ट्रेड डील होने से पुराने रुके हुए ऑर्डर दोबारा रिकवर हो रहे थे। माना जा रहा है कि 20 फीसदी ऑर्डर पर खरीदार और निर्यातकों के बीच सहमति भी बन गई थी। इस पर नए विवाद के उठने के बाद अब दोबारा पुराने ऑर्डर पर बातचीत मध्यम हो गई है। विदेशी खरीदार और निर्यातक दोनो ही वैश्विक बाजार की स्थिति साफ होने के बाद अब हल निकालने की बात कर रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल कारोबार रुका हुआ है। माना जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह से पुराने ऑर्डर पर दोबारा बातचीत शुरू हो सकेगी। निर्यात कारोबार पर नई स्थिति पनपने पर फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑग्रनाईजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि टैरिफ पर नई वैश्विक स्थिति बनने पर ऐसे निर्यातक सबसे अधिक परेशान है जो आयात और निर्यात दोनो से ही जुड़े हुए हैं। उन्हें वैश्विक टैरिफ के आधार पर अब आगे बात करनी होगी। नए हालातों पर फिलहाल निर्यातकों के सामने स्थिति साफ नहीं हैं। ऐसे में एक या दो सप्ताह उन्हें इंतजार करना होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;">प्रोडक्शन पर असर नहीं</h5>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में टैरिफ पर कोर्ट से आए निर्णय और उस पर ट्रंप के फैसले के बाद उपजी स्थिति में फिलहाल शहर की एक्सपोर्ट युनिट में प्रोडक्शन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। निर्यातकों का कहना है कि फिलहाल मौजूदा स्थिति में ऑर्डर पर कोई सूचना खरीदारों की ओर से नहीं आई है। हालिया स्थिति से अब यदि वैश्विक बाजार में टैरिफ में भविष्य में कोई बड़ा उलट फेर होता है तो प्रोडक्शन पर असर से नकारा नहीं जा सकता।      </p>
<h5 style="text-align:justify;">निर्यातक देख रहे संभावनाएं</h5>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा स्थितियों में शहर के निर्यातक वैश्वक टैरिफ के अंतिम आदेश तक इंतजार की स्थिति में बने हुए हैं। उनका मानना है कि यदि कुछ देशों में नए टैरिफ से बड़ा हेरफेर होता है तो उसका लाभ कम टैरिफ वाले देशों को हो सकता है। इस स्थिति में भारत और शहर के पारंपरिक निर्यातकों को लाभ संभव हो सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;"><br />25    सौ करोड़ रुपये का अमेरिका को निर्यात<br />10 हजार करोड़ रुपये का शहर का कुल निर्यात<br />42 सौ युनिट शहर की निर्यात कारोबार से जुड़ी<br />45 फीसदी एमएसएमई सेक्टर निर्यात से जुड़ा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 18:51:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले राहुल गांधी, प्रधानमंत्री फिर करेंगे समर्पण </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आयात शुल्क संबंधी फैसला पलटे जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए शनिवार को कहा कि वह एक बार फिर अमेरिका के सामने समर्पण करेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में पीएम मोदी की स्थिति कमजोर हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा "प्रधानमंत्री ने देशहित से समझौता किया है। उनका विश्वासघात अब सबके सामने है।" राहुल गांधी ने कहा कि मोदी अब समझौते की शर्तों पर पुनः बातचीत नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572627/after-the-us-supreme-court-s-decision-on-tariffs--rahul-gandhi-said--the-prime-minister-will-surrender-again"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(27)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आयात शुल्क संबंधी फैसला पलटे जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए शनिवार को कहा कि वह एक बार फिर अमेरिका के सामने समर्पण करेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में पीएम मोदी की स्थिति कमजोर हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा "प्रधानमंत्री ने देशहित से समझौता किया है। उनका विश्वासघात अब सबके सामने है।" राहुल गांधी ने कहा कि मोदी अब समझौते की शर्तों पर पुनः बातचीत नहीं कर सकते। वह एक बार फिर समर्पण करेंगे।  उल्लेखनीय है कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न देशों पर भारी आयात शुल्क लागू करने के श्री ट्रंप के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह शक्ति सिर्फ अमेरिकी संसद के पास है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आयी है। कांग्रेस ने बार-बार इस समझौते के समय, पारदर्शिता और शर्तों को लेकर चिंता जताई है। उसकी चिंता खासकर भारतीय किसानों और छोटे व्यवसायियों पर इसके संभावित असर को लेकर है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/572627/after-the-us-supreme-court-s-decision-on-tariffs--rahul-gandhi-said--the-prime-minister-will-surrender-again</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 13:29:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी से यूपी को मिलेगी नई उड़ान, MSME-डिफेंस-फार्मा-टेक को मिलेगी जबरदस्त मजबूती,  जानें सीएम योगी के 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का विजन </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में मजबूत हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई ऐतिहासिक कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू औसत टैरिफ को लगभग 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसे भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती का सबसे सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा। भदोही के हस्तनिर्मित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569979/the-india-us-economic-partnership-will-give-uttar-pradesh-a-new-boost--strengthening-msme--defense--and-pharma-tech-sectors--and-bolstering-cm-yogi-s--1-trillion-economy-vision"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(10)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में मजबूत हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई ऐतिहासिक कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू औसत टैरिफ को लगभग 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसे भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती का सबसे सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले से कम लागत पर पहुंच सकेंगे। इससे ये उत्पाद चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। निर्यात ऑर्डर बढ़ने के साथ कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है, जिससे प्रदेश में रोजगार और आय दोनों में वृद्धि होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत–अमेरिका के बीच बढ़ते भरोसे का असर रणनीतिक क्षेत्रों पर भी दिख सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर—झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा—में अमेरिकी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उपक्रमों के रास्ते खुल सकते हैं। ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार और संचार उपकरणों के निर्माण से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को नई गति</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">टैरिफ कटौती और व्यापारिक स्थिरता का असर आईटी और डिजिटल इकोनॉमी पर भी दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को इससे नया बल मिलेगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा आईटी, एआई और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है। हार्डवेयर और सर्वर से जुड़ी लागत घटने से डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फार्मा और ग्रीन एनर्जी में रणनीतिक बढ़त</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में भी टैरिफ कटौती का सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। ललितपुर में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग के लिए यह अवसर और मजबूत हुए हैं। इसके साथ ही बुंदेलखंड के सोलर पार्क और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में भी विदेशी निवेश और तकनीक हस्तांतरण को गति मिल सकती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि: मुख्यमंत्री</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है और वैश्विक आर्थिक निर्णयों को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी टैरिफ में कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण है।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/50guvEMgHy0" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/569979/the-india-us-economic-partnership-will-give-uttar-pradesh-a-new-boost--strengthening-msme--defense--and-pharma-tech-sectors--and-bolstering-cm-yogi-s--1-trillion-economy-vision</link>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 10:33:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>EU FTA से मिली संजीवनी:  छोटे निर्यातकों के लिए खुले नए अवसर, 27 देश में छोटे निर्यातकों को उत्पादों के ऑर्डर </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के बाद छोटे निर्यातकों को बड़ी सहूलियत मानी जा रही है। निर्यात विशेषज्ञ इस एफटीए को अमेरिका टैरिफ के बाद छोटे निर्यातकों के लिए संजीवनी मान रहे हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं। ऐसे में वहां के खरीदार अध्रिक संख्या में उत्पादों का ऑर्डर देने में सक्षम है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरका की ओर से हाल ही में टैरिफ लागू होने के बाद सबसे अधिक मार छोटे निर्यातकों को पड़ी है। ऐसे में यह निर्यातक अपने कारोबार को बनाए रखने के लिए नए बाजार की ओर रुख कर रहे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569288/eu-fta-provides-a-lifeline--new-opportunities-open-up-for-small-exporters--orders-for-products-from-27-countries-for-small-exporters"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(44)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के बाद छोटे निर्यातकों को बड़ी सहूलियत मानी जा रही है। निर्यात विशेषज्ञ इस एफटीए को अमेरिका टैरिफ के बाद छोटे निर्यातकों के लिए संजीवनी मान रहे हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं। ऐसे में वहां के खरीदार अध्रिक संख्या में उत्पादों का ऑर्डर देने में सक्षम है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरका की ओर से हाल ही में टैरिफ लागू होने के बाद सबसे अधिक मार छोटे निर्यातकों को पड़ी है। ऐसे में यह निर्यातक अपने कारोबार को बनाए रखने के लिए नए बाजार की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नए निर्यातकों को बाजार तलाशना आसान नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी वजह इनकी कम पूंजी और खरीदारों का कम भरोसा सहित अन्य वजह शामिल हैं। उधर हर नए देश के नए नियम और वहां की मांग और पसंद को जानने के लिए भी नए निर्यातकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस तरह से नए निर्यातकों के लिए यह एफटीए काफी मुफीद माना जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसकी वजह इस संघ में 27 देशों का एक साथ होना है। ऐसे में इन देशों में उत्पादों का एक ऑर्डर लंबे समय तक बना रह सकता है। इसक अलावा इन देशों में मांग के सापेक्ष ऑर्डर की प्रति उत्पाद की संख्या भी अधिक मांग की जाती है। पूरे मामले पर फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑग्रनाईजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल एफटीए’ माना जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसकी वजह ही है कि सभी देशों के साथ हुए अब तक के एफटीए से अलग इस एफटीए से सबसे अधिक लाभ निर्यातकों को मिल सकता है। जहां तक नए निर्यातकों की बात है तो इस समझौते के बाद से उनमें काफी उत्साह देखा जा रहा है। इसकी वजह यूरोपीय यूनियन में बेहतर मार्केट, एक जैसे नियम और उत्पादों की अधिक खपत है। जिससे उन्हें बेहतर ऑर्डर भविष्य में मिलने की उम्मींद जग गई है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">नए निर्यातक उभरेंगे</h5>
<p style="text-align:justify;">इस समझौते के होने के बाद अब माना जा रहा है कि शहर के निर्यात कारोबार में नए उद्यमी लंबे समय तक आने में विचार करेंगे। अब स्थिति उलट गई है। नई बेहतर और बड़ी मार्केट मिलने के बाद अमेरिका की ओर अपने उत्पादों को भेजने की योजना बना रहे निर्यातक टैरिफ लगने के बाद रुक गए थे। इस समझौते के बाद वे दोबारा निर्यात बाजार में कदम रखने का मन बना रहे हैं। उम्मींद है कि नए वित्तीय वर्ष में कई नए निर्यातक शहर से उभर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:left;">129 नए निर्यातक शहर में निर्यात कारोबार से जुड़े<br />45 सौ करोड़ का निर्यात कारोबार यूरोप से जुड़ा<br />20 फीसदी नए निर्यातकों को ग्रोथ की उम्मीद <br />22 सौ शहर से कुल निर्यातक कारोबार से जुड़े</p>
<h5 style="text-align:left;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/569285/positive-results-of-the-lightning-resilience-model-in-up--reduction-in-lightning-related-deaths-in-mirzapur"><span class="t-red">यूपी में लाइटनिंग रेज़िलिएंसी मॉडल के सकारात्मक परिणाम, </span>आकाशीय बिजली से मीरजापुर में मौतों के आकड़ों में आई कमी  </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/569288/eu-fta-provides-a-lifeline--new-opportunities-open-up-for-small-exporters--orders-for-products-from-27-countries-for-small-exporters</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 18:31:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहले रूस अब ईरान...  ट्रंप की टेरिफ वाली तलवार से बच पायेगा भारत का निर्यात, विस्तार से जानें </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद निर्यातक सतर्क हैं। निर्यातकों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव का आकलन ट्रंप प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। भारतीय निर्यातक पहले से 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क का सामना कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना होगा। यह एक ऐसा कदम जो भारत, चीन और संयुक्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567582/first-russia--now-iran----will-india-s-exports-be-able-to-escape-trump-s-tariff-sword--learn-more-in-detail"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(57)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद निर्यातक सतर्क हैं। निर्यातकों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव का आकलन ट्रंप प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। भारतीय निर्यातक पहले से 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क का सामना कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना होगा। यह एक ऐसा कदम जो भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों को प्रभावित कर सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">निर्यातकों के संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस’ (फियो) ने मंगलवार को कहा कि घरेलू कंपनियां ईरान के साथ व्यापार से संबंधित सभी प्रतिबंधों का अनुपालन कर रही हैं। हालांकि ट्रंप की ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा पर स्पष्ट जानकारी मिलने पर ही इस चेतावनी के प्रभाव का आकलन संभव हो पाएगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;">भारत-ईरान व्यापार संबंधों पर असर </h5>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की घोषणा से भारत-ईरान व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘‘ भारतीय कंपनियां और बैंक, ईरान पर लगाए गए ओएफएसी (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) प्रतिबंधों का पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से पालन कर रहे हैं। हम केवल खाद्य पदार्थों और दवा क्षेत्र में ही काम कर रहे हैं जिनपर रोक नहीं है, इसलिए भारत पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की आशंका का कोई आधार नहीं है।’’ एक निर्यातक ने कहा, ‘‘ हम अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा से चिंतित हैं। हम इस संबंध में अमेरिका से अधिसूचना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’ </p>
<h5 style="text-align:justify;">भारत इनका करता है एक्सपोर्ट </h5>
<p style="text-align:justify;">भारत से ईरान को होने वाले प्रमुख निर्यातों में चावल, चाय, चीनी, दवा, कृत्रिम रेशे, विद्युत मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं। प्रमुख आयातों में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन और कांच के बर्तन शामिल हैं। भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ऊर्जा से भरपूर ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। भारत का ईरान को माल निर्यात 2024-25 में 1.55 प्रतिशत बढ़कर 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि आयात 29.32 प्रतिशत घटकर 44.183 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 15:46:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Stock Market Today: लाल निशान के साथ खुले बाजार, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई ।</strong> घरेलू शेयर बाजारों सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी, भारतीय निर्यात पर अमेरिकी शुल्क में और वृद्धि की आशंकाओं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों के मनोबल में गिरावट आई। </p>
<p style="text-align:justify;">बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 455.35 अंक टूटकर 83,120.89 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 135.35 अंक फिसलकर 25,547.95 अंक पर रहा। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, लार्सन एंड टुब्रो, इटर्नल, पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बजाज फाइनेंस के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। वहीं हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567376/stock-market-today--markets-open-in-the-red--sensex-and-nifty-fall-in-early-trading"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(2)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई ।</strong> घरेलू शेयर बाजारों सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी, भारतीय निर्यात पर अमेरिकी शुल्क में और वृद्धि की आशंकाओं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों के मनोबल में गिरावट आई। </p>
<p style="text-align:justify;">बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 455.35 अंक टूटकर 83,120.89 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 135.35 अंक फिसलकर 25,547.95 अंक पर रहा। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, लार्सन एंड टुब्रो, इटर्नल, पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बजाज फाइनेंस के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। वहीं हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर में तेजी रही। </p>
<p style="text-align:justify;">सेंसेक्स पिछले पांच कारोबारी सत्र में 2,185.77 अंक जबकि निफ्टी 645.25 अंक लुढ़का है। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त में रहे। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63.49 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 3,769.31 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,595.84 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/566885/stock-market-today--after-opening-lower--the-market-fluctuated--with-the-sensex-recovering-from-red-to-green"><span class="t-red">Stock Market Today: </span>गिरावट में खुलने के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव, लाल से हरे निशान में लौटा सेंसेक्स </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567376/stock-market-today--markets-open-in-the-red--sensex-and-nifty-fall-in-early-trading</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/567376/stock-market-today--markets-open-in-the-red--sensex-and-nifty-fall-in-early-trading</guid>
                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Stock market closed: लगातार चौथे दिन टूटा शेयर बाजार, अमेरिकी शुल्क की चिंता से 780 अंक लुढ़का सेंसेक्स </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> वैश्विक बाजारों में व्यापक बिकवाली और अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका के बीच बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 780 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी को 264 अंकों का बड़ा नुकसान हुआ। विश्लेषकों के मुताबिक, धातु, तेल एवं गैस और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। </p>
<p style="text-align:justify;">बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 प्रतिशत लुढ़ककर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 851.04 अंक तक गिरकर 84,110.10</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566832/stock-market-closed--stock-market-falls-for-the-fourth-consecutive-day--sensex-plunges-780-points-amid-concerns-over-us-tariffs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design---2026-01-08t170822.543.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> वैश्विक बाजारों में व्यापक बिकवाली और अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका के बीच बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 780 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी को 264 अंकों का बड़ा नुकसान हुआ। विश्लेषकों के मुताबिक, धातु, तेल एवं गैस और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। </p>
<p style="text-align:justify;">बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 प्रतिशत लुढ़ककर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 851.04 अंक तक गिरकर 84,110.10 के स्तर तक आ गया था। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 263.90 अंक यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 25,876.85 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और ट्रेंट सबसे ज्यादा नुकसान में रहीं। </p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ, इटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऐसे प्रतिबंधात्मक विधेयक का समर्थन किए जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। इस विधेयक को पेश करने की तैयारी में जुटे सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि इससे अमेरिका को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करने का दबाव बनाने के लिए 'जबर्दस्त ताकत' मिलेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी प्रशासन पिछले साल अगस्त में ही भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को बड़ाकर 50 प्रतिशत कर चुका है। इसमें से 25 प्रतिशत शुल्क रूसी तेल खरीद जारी रखने के जुर्माने के तौर पर लगाया गया था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "अमेरिकी शुल्क को लेकर नई चिंताओं और एफआईआई की लगातार बिकवाली के चलते घरेलू बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा, जिससे मुनाफे की उम्मीदें फीकी पड़ गईं।" </p>
<p style="text-align:justify;">एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक बढ़त में रहा, जबकि जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में बंद हुए। यूरोपीय बाजार हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को ज्यादातर कमजोर रहे। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.75 प्रतिशत बढ़कर 60.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बुधवार को सेंसेक्स 102.20 अंक गिरकर 84,961.14 और निफ्टी 37.95 अंक फिसलकर 26,140.75 पर बंद हुआ था।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/566710/stock-market-closed--stock-markets-closed-in-the-red-for-the-third-consecutive-day--major-indices-fell-due-to-selling-pressure-in-leading-companies"><span class="t-red">Stock market closed: </span>तीसरे दिन लाल निशान में बंद हुए शेयर बाजार, दिग्गज कंपनियों में बिकवाली से लुढ़के प्रमुख सूचकांक </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 17:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Stock Market Today:  अमेरिकी शुल्क बढ़ने को लेकर शेयर बाजार में गिरावट दर्ज, सेंसेक्स-निफ्टी को हुआ नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और अमेरिकी शुल्क बढ़ने को लेकर चिंताओं के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 255.86 अंक टूटकर 84,705.28 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 65.9 अंक फिसलकर 26,074.85 अंक पर पहुंच गया। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एशियन पेंट्स, मारुति, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। </p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आईसीआईसीआई बैंक, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर में तेजी रही। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566762/stock-market-today--stock-market-declines-amid-rising-us-tariffs--sensex-and-nifty-suffer-losses"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(57).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और अमेरिकी शुल्क बढ़ने को लेकर चिंताओं के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 255.86 अंक टूटकर 84,705.28 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 65.9 अंक फिसलकर 26,074.85 अंक पर पहुंच गया। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एशियन पेंट्स, मारुति, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। </p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आईसीआईसीआई बैंक, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर में तेजी रही। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का एसएसई कम्पोजिट फायदे में रहे जबकि जापान का निक्की 225 तथा हांगकांग का हैंग सेंग नुकसान में रहे। अमेरिकी बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60.20 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,889.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/566638/stock-market-closed--share-markets-opened-with-a-decline--sensex-at-443-points--pressure-on-the-banking-sector"><span class="t-red">Stock Market Today:</span> गिरावट के साथ खुले शेयर बाजार, 443 अंक पर सेंसेक्स, बैंकिंग सेक्टर पर दबाव </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566762/stock-market-today--stock-market-declines-amid-rising-us-tariffs--sensex-and-nifty-suffer-losses</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/566762/stock-market-today--stock-market-declines-amid-rising-us-tariffs--sensex-and-nifty-suffer-losses</guid>
                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 10:14:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'अमेरिकी टैरिफ से भदोही का कार्पेट व्यापार तबाह', बोले राहुल गांधी- प्रधानमंत्री ने बुनकरों की समस्याओं को लेकर मूंद रखी हैं आंखें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में भदोही के कालीन उद्योग से जुड़े लोगों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुनकरों की समस्याओं को लेकर आंखें मूंद ली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने अपने ‘जनसंसद’ कार्यक्रम में भदोही के बुनकरों के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात का एक वीडियो फेसबुक पर जारी किया और यह भी कहा कि अमेरिका की ‘‘भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति’’ का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/564049/-american-tariffs-have-devastated-bhadohi-s-carpet-trade---says-rahul-gandhi-%E2%80%93--the-prime-minister-has-turned-a-blind-eye-to-the-problems-of-the-weavers"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/061.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में भदोही के कालीन उद्योग से जुड़े लोगों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुनकरों की समस्याओं को लेकर आंखें मूंद ली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने अपने ‘जनसंसद’ कार्यक्रम में भदोही के बुनकरों के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात का एक वीडियो फेसबुक पर जारी किया और यह भी कहा कि अमेरिका की ‘‘भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति’’ का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से इन दिनों मुलाकात कर रहे हैं और इसे उन्होंने ‘जनसंसद’ नाम दिया है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा, मगर नरेन्द्र मोदी छुप कर बैठे हैं। आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।’’ </p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा, ‘‘जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाया हुआ एक सुंदर कालीन भेंट किया, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।’’ </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए- न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम उठाया है।’’ </p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी का कहना है कि नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। उन्होंने दावा किया, ‘‘यह सब प्रधानमंत्री के ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहां बुनकर आज कह रहे हैं ‘चिराग़ तले अंधेरा’, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आंखें मूंद ली हैं।’’ <br />कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।’’ नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूं, जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।’’</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/564049/-american-tariffs-have-devastated-bhadohi-s-carpet-trade---says-rahul-gandhi-%E2%80%93--the-prime-minister-has-turned-a-blind-eye-to-the-problems-of-the-weavers</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/564049/-american-tariffs-have-devastated-bhadohi-s-carpet-trade---says-rahul-gandhi-%E2%80%93--the-prime-minister-has-turned-a-blind-eye-to-the-problems-of-the-weavers</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 19:40:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> राष्ट्रपति पुतिन का दौरा यूपी के लिए वरदान:   लेदर इंडस्ट्री को बूस्टर डोज की उम्मीद.. खुलेगें रूस के बाजार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से जहां रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है वहीं उत्तरप्रदेश की लेदर इंडस्ट्री की भी निगाहें टिकी हुई है। लेदर इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अमेरिकी टैरिफ के चलते प्रभावित हो रहे व्यापार के लिए रूस के बाजार उनके लिए खुल सकते हैं। जो एमएसएमई सेक्टर के लिए बूस्टर डोज का काम करेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रूस को लेकर भारत के इस समय अमेरिका समेत उसके पश्चिमी सहयोगियों के साथ जो कूटनीतिक रिश्ते हैं, उसको देखते हुए पुतिन की इस यात्रा पर दुनिया भर की नजरें लगी हुई हैं लेकिन, भारत और रूसअपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561357/president-putins-visit-will-be-a-boon-for-up-leather"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/untitled-design-(79)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से जहां रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है वहीं उत्तरप्रदेश की लेदर इंडस्ट्री की भी निगाहें टिकी हुई है। लेदर इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अमेरिकी टैरिफ के चलते प्रभावित हो रहे व्यापार के लिए रूस के बाजार उनके लिए खुल सकते हैं। जो एमएसएमई सेक्टर के लिए बूस्टर डोज का काम करेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रूस को लेकर भारत के इस समय अमेरिका समेत उसके पश्चिमी सहयोगियों के साथ जो कूटनीतिक रिश्ते हैं, उसको देखते हुए पुतिन की इस यात्रा पर दुनिया भर की नजरें लगी हुई हैं लेकिन, भारत और रूसअपने सामरिक, रक्षा और आर्थिक संबंधों में इनकी वजह से किसी भी तरह से दबाव में आने वाले नहीं हैं। ऐसे में पांच दिसम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 5 दिसंबर बेहद अहम द्विपक्षीय सम्मेलन होने वाला है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसमें भारत अपनी रक्षा क्षमताओं के विस्तार और आत्मनिर्भरता की दिशा में रूस के साथ बड़ी डील को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। रूसी राष्ट्रपति के साथ भारत दौरे पर आने वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने और व्यापार के लिए नए रास्ते खोलने पर सहमति बनने के पूरे आसार है। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में भारत और रूस के बीच आर्थिक व व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से आगामी 5 दिसंबर 2025 को दिल्ली में एक बड़े स्तर का इंडिया-रूस बिजनेस फोरम 2025 आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन रूसी महासंघ के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">उनके साथ वरिष्ठ मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों की 200 से अधिक प्रमुख रूसी कंपनियाँ भारत पहुंचेंगी, जिनसे व्यापक व्यावसायिक संवाद और निवेश अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। फोरम का आयोजन फिक्की द्वारा वाणिज्य विभाग, भारत सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस फोरम में शामिल होने के लिए फिक्की की तरफ से यूपी की लेदर इंडस्ट्री को भी निमन्त्रण भेजा गया है। इस महत्त्वपूर्ण बैठक के दौरान कई स्तरों पर व्यावसायिक चर्चाएँ, रोडशो और बी2बी संवाद आयोजित होंगे, जिनसे दोनों देशों के उद्योग जगत को परस्पर व्यापार बढ़ाने के लिए नए अवसर मिलेंगे। जिससे भारतीय उद्योगपतियों को रूसी कंपनियों से सीधे बातचीत कर संभावित साझेदारियों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">फोरम का सबसे प्रमुख आकर्षण पूर्ण-बैठक (प्लेनेरी सेशन) होगा, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की भी संभावना है। इस सत्र से द्विपक्षीय व्यापार को उच्च स्तर पर प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। फोरम के मुख्य कार्यक्रमों में 'रूस रोडशो: उभरती आवश्यकताएँ एवं अवसर' विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा, जिसमें वरिष्ठ रूसी मंत्री फार्मा एवं हेल्थकेयर, आईटी एवं डिजिटल सेवाएँ, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, मानव संसाधन, कौशल विकास और सेवाक्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी आवश्यकताओं और कारोबारी अवसरों को प्रस्तुत करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को रीजनल काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन असद के इराकी ने बताया कि इस बैठक से लेदर इंडस्ट्री के लिए नए रास्ते खुलने के अनुमान है। उन्होंने बताया कि भारत से यूएस को 10000 करोड़ रुपये का लेदर एक्सपोर्ट होता था। जिसमे कानपुर और उन्नाव से 2000 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी है। </p>
<p style="text-align:justify;">टैरिफ के चलते बाजार गड़बड़ हो चुका है। ऐसे में पुतिन के दौरे से लेदर इंडस्ट्री को काफी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि फिक्की की तरफ से सभी को प्रतिनिधिमंडल के साथ होने वाली वार्ता में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है और वह स्वयं बैठक में शामिल होंगे।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़े : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/561350/skyroot-campus--pm-modi-inaugurated-skyroot-s-infinity-campus-and-vikram-i-rocket--discussed-space-reforms"><span class="t-red">Skyroot Campus : </span>पीएम मोदी ने स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस और रॉकेट विक्रम-I का किया उद्घाटन, अंतरिक्ष सुधारों पर बात की</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/561357/president-putins-visit-will-be-a-boon-for-up-leather</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 16:37:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Share Market Crash: आज ढह गया शेयर बाजार, दवाओं पर अमेरिकी टेरिफ के चलते 733 अंक फिसला सेंसेक्स, निचले स्तर पर बंद हुआ निफ्टी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>अगले महीने से दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद शुक्रवार को फार्मा एवं आईटी शेयरों में भारी बिकवाली होने से स्थानीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स में 733 अंक और निफ्टी में 236 अंक का नुकसान रहा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 733.22 अंक यानी 0.90 प्रतिशत टूटकर तीन सप्ताह के निचले स्तर 80,426.46 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 827.27 अंक गिरकर 80,332.41 पर आ गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/554462/share-market-crash--the-stock-market-collapsed-today--with-the-sensex-plunging-733-points-due-to-us-tariffs-on-pharmaceuticals--and-the-nifty-closing-lower"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(28)14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>अगले महीने से दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद शुक्रवार को फार्मा एवं आईटी शेयरों में भारी बिकवाली होने से स्थानीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स में 733 अंक और निफ्टी में 236 अंक का नुकसान रहा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 733.22 अंक यानी 0.90 प्रतिशत टूटकर तीन सप्ताह के निचले स्तर 80,426.46 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 827.27 अंक गिरकर 80,332.41 पर आ गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी भी 236.15 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ तीन सप्ताह के निचले स्तर 24,654.70 अंक पर आ गया। घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट का यह लगातार छठा कारोबारी सत्र रहा। इस दौरान सेंसेक्स में कुल 2,587.50 अंक यानी 3.16 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। </p>
<p style="text-align:justify;">एक अक्टूबर से दवाओं पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के ट्रंप के फैसले के बाद अधिकांश दवा कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई और बीएसई हेल्थकेयर सूचकांक 2.14 प्रतिशत नीचे आ गया। वॉकहार्ट के शेयरों में 9.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी एक पोस्ट में लिखा, "एक अक्टूबर, 2025 से हम किसी भी ब्रांडेड या पेटेंट-युक्त दवा उत्पाद पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाएंगे, जब तक कि कोई कंपनी अमेरिका में अपना दवा विनिर्माण संयंत्र स्थापित न कर रही हो।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दवा विनिर्माण का मतलब 'विनिर्माण कार्य शुरू होने या/और निर्माणाधीन' होने से होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह अगर अमेरिका में दवा विनिर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो उसके दवा उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटर्नल, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचसीएल टेक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा मोटर्स, आईटीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी का रुझान देखा गया। </p>
<p style="text-align:justify;">ऑनलाइन कारोबार एवं संपत्ति प्रौद्योगिकी फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर. ने कहा, "ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की अमेरिकी घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजारों में व्यापक बिकवाली के कारण भारी गिरावट रही। इस अप्रत्याशित कदम ने पहले से ही कमजोर निवेशकों की धारणा को और खराब करने का काम किया। </p>
<p style="text-align:justify;">एच-1बी वीजा शुल्क में वृद्धि के हाल के फैसले के बाद आईटी शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई थी।" एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग काफी गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोप के शेयर बाजार सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे। बृहस्पतिवार को अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 4,995.42 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.27 प्रतिशत गिरकर 69.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बृहस्पतिवार को सेंसेक्स 555.95 अंक गिरकर 81,159.68 अंक और निफ्टी 166.05 अंक गिरकर 24,890.85 अंक पर बंद हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/554395/stock-market-today--due-to-weak-trend-in-global-markets--the-stock-market-declined--sensex-nifty-fell">Stock Market Today: ट्रंप के ब्रांडेड दवाओं पर 100% टेरिफ से शेयर बाजार में भूचाल..सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 17:25:38 +0530</pubDate>
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