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                <title>India-US Trade - Amrit Vichar</title>
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                <description>India-US Trade RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर फोड़ा टैरिफ का बम,  लगाया 10% का एक्स्ट्रा शुल्क, फोर्स लेबर को बताया बड़ी वजह </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत भारत समेत 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह नया शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार, यह फैसला उन देशों को बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसके सख्त क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले अमेरिका ने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/588744/us-tariff-17-countries-india-10--duty-forced-labor-main-reason"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(51)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत भारत समेत 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह नया शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार, यह फैसला उन देशों को बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसके सख्त क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले अमेरिका ने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा 14 जून को विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को देखते हुए अमेरिका ने भारत के लिए प्रस्तावित शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की। इनमें भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है, जबकि शेष 43 देशों को 12.5 प्रतिशत शुल्क का सामना करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जिन कच्चे माल पर शुल्क लगाने से घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है या जिन वस्तुओं का पर्याप्त उत्पादन अमेरिका में संभव नहीं है, उन्हें इस शुल्क से छूट दी जाएगी। इसके अलावा पूरी अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा करने वाले उत्पाद भी इस दायरे से बाहर रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यूएसटीआर के अनुसार, यह कार्रवाई उन देशों के खिलाफ की गई है जो बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने में विफल रहे हैं। ग्रीर ने कहा कि इस कदम से मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने और वैश्विक श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था।'</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/588651/india-hits-back-at-pakistan-at-the-un--states-that-the-discussion-was-misused-to-propagate-a-false-narrative"><span class="t-red">UN में भारत का पाकिस्तान पर पलटवार,</span> कहा- झूठे विमर्श के लिए चर्चा का किया गया दुरुपयोग</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/588744/us-tariff-17-countries-india-10--duty-forced-labor-main-reason</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 11:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय : टैरिफ की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[संपादकीय: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका के 100% टैरिफ बिल का भारत के व्यापार, रक्षा और विदेश नीति पर क्या असर होगा? पढ़ें सटीक विश्लेषण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587762/editorial-tariff-politics"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/sam-011.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अधिकतम 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का संशोधित अमेरिकी विधेयक व्यापार का कम भू-राजनीति का औजार ज्यादा है। यह अभी विचाराधीन है पर इसके पारित होने की अधिक आशंका भारत के लिए चिंतनीय है। कम ही संभावना है कि प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया, राष्ट्रपति के विवेकाधिकार और व्यावहारिक कठिनाइयों के चलते इसको बदला जाए। जहां पूर्व प्रस्तावित 500 फीसद का टैरिफ अव्यावहारिक था, वहीं अधिकतम 100 प्रतिशत का टैरिफ भी कठोर और बस दबाव बाने के काम का है। वास्तव में विधेयक का उद्देश्य राजस्व जुटाना नहीं, भारत, चीन जैसे तेल खरीदारों को रूस से ऊर्जा आयात घटाने पर मजबूर करना है। </p>
<p>100 प्रतिशत टैरिफ लागू हुआ, तो भारत का अमेरिका को निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा। विशेष रूप से फार्मा, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और रसायन जैसे क्षेत्रों की हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर पड़ेगी। भारत पर टैरिफ की धमकी, व्यापार वार्ता में दबाव बनाने और अमेरिकी शर्तों पर समझौता कराने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर अरबों डॉलर की बचत की है, लेकिन भविष्य में अमेरिकी टैरिफ लागू हुए तो निर्यात हानि, ऊंचे व्यापार लागत और आपूर्ति शृंखला व्यवधान के चलते बचत का दस गुना नुकसान संभव है। रक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहेगा, क्योंकि भारत की सैन्य प्रणालियों का महत्वपूर्ण हिस्सा अभी भी रूसी मूल का है। यदि रूस से रक्षा उपकरणों और पुर्जों के लेन-देन पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगते हैं, तो रखरखाव और आधुनिकीकरण की लागत बढ़ सकती है। अमेरिका ने अपने कथित मित्र और घोषित शत्रु, भारत और चीन को एक ही श्रेणी में इसलिए रखा है, क्योंकि दोनों रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों में हैं। वह खरीदार देशों पर द्वितीयक आर्थिक दबाव बनाना चाहता है, लेकिन कुछ यूरोपीय देशों के लिए छूट का प्रावधान इस बहाने से रखा गया है कि वे रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। यह यूरोपीय सहयोगियों के साथ टकराव सीमित रखने के लिए शुद्ध कूटनीतिक उपक्रम है, समान मानदंड नहीं। भारत को यह भी समझना होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही व्यक्तिगत स्तर पर प्रधानमंत्री से दोस्ताना जताएं, पर जब बात व्यापार या विदेश नीति की आती है, तो वे भारत को उस नजरिए से नहीं देखते। ट्रंप कभी भारत को पाकिस्तान के समकक्ष रख देते हैं, तो कभी चीन के खाने में।</p>
<p>यदि यह टैरिफ वास्तव में लागू होता है, तो उसका अंतिम बोझ केवल निर्यातकों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ेगा— रोजगार, निवेश, विनिर्माण और आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में भारत की प्रतिक्रिया न तो टकरावपूर्ण होनी चाहिए और न ही दबाव के आगे झुकने वाली। भारत को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी ऊर्जा और रक्षा खरीद उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित है, किसी तीसरे देश के विरुद्ध नहीं। साथ ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की वार्ता जारी रखते हुए निर्यात बाजारों का विविधीकरण, ऊर्जा स्रोतों का विस्तार और रक्षा आयात का स्वदेशीकरण तेज करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>Editorials</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587762/editorial-tariff-politics</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:01:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> India US Trade : केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का बड़ा बयान, अगले महीने व्यापार वार्ता के लिए भारत आ सकता है अमेरिकी दल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी दल अगले महीने भारत आ सकता है। अंतरिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय पक्ष ने अप्रैल में वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने बैठक की थी। यह पूछे जाने पर कि क्या बीटीए के लिए अमेरिका के मुख्य वार्ताकार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ आएंगे तो गोयल ने कहा, '' वह उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनके अगले महीने आने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582738/india-us-trade--union-minister-piyush-goyal-s-major-statement%E2%80%94us-delegation-may-visit-india-next-month-for-trade-talks"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(38)12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी दल अगले महीने भारत आ सकता है। अंतरिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय पक्ष ने अप्रैल में वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने बैठक की थी। यह पूछे जाने पर कि क्या बीटीए के लिए अमेरिका के मुख्य वार्ताकार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ आएंगे तो गोयल ने कहा, '' वह उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनके अगले महीने आने की योजना है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">रुबियो 23 मई से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आएंगे जिसका उद्देश्य व्यापार, रक्षा एवं ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है। यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। भारत और अमेरिका ने सात फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले ने सभी जवाबी शुल्कों को निरस्त कर दिया जिसे अमेरिकी प्रशासन साझेदार देशों के साथ व्यापार समझौते करने के लिए एक साधन के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था।  इसके बाद अमेरिका ने इस वर्ष 24 फरवरी से 150 दिन के लिए व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, उसने धारा 301 के तहत प्रमुख निर्यातकों के खिलाफ उनकी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता एवं श्रम मानकों को लेकर दो जांच भी शुरू कीं। धारा 122 के तहत अधिकतम 150 दिन के लिए 15 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं धारा 301 के तहत जांच में यदि यह पाया जाता है कि व्यापारिक साझेदारों के कदम अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शुल्क पर कोई सीमा नहीं होती। भारत ने दोनों जांच पर अपना जवाब दे दिया है और दोनों पक्षों के बीच परामर्श जारी है। </p>
<p style="text-align:justify;">गोयल ने एक कार्यक्रम में कहा कि कई बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने भारत में निवेश की घोषणा की है क्योंकि देश, दुनिया के लिए एक पसंदीदा निवेश गंतव्य बना हुआ है। उन्होंने कहा, '' पिछले छह महीनों में अगर मैं अमेरिकी उद्योग से मिली विभिन्न निवेश प्रतिबद्धताओं को देखूं, तो यह आंकड़ा संभवतः 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होगा। अमेजन के डेटा केंद्र निवेश और गूगल के डेटा केंद्र निवेश को देखें। मेरी समझ यह है कि अमेरिका और भारत स्वाभाविक साझेदार की तरह काम कर रहे हैं। हम एक-दूसरे के पूरक हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी, नवाचार, उच्च-सटीक रक्षा, डिजिटल डेटा केंद्र, क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरण और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, '' हम 1.4 अरब आकांक्षी भारतीयों की आकांक्षाओं, बढ़ते मध्यम वर्ग, बढ़ती आय और बढ़ती अर्थव्यवस्था के माध्यम से अमेरिकी नवाचार को विस्तार दे सकते हैं। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि वैश्विक संकट के बीच जब यूक्रेन युद्ध पहले से चल रहा है और पश्चिम एशिया संकट भी है, दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति भारत और अमेरिका के लिए साथ मिलकर काम करने और अधिक विश्वसनीय तथा मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने का उपयुक्त अवसर है। परीक्षण सुविधाओं पर उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो, निर्यात निरीक्षण एजेंसी और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी उद्योग को आधुनिक एवं श्रेष्ठ उपकरणों से युक्त सुविधाएं स्थापित करने में सहयोग देने को तैयार हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के तरीकों पर उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियां वस्तुओं की स्वीकृति के सात दिन के भीतर इन इकाइयों को भुगतान करने पर विचार करें, जिससे नकदी प्रवाह तेज होगा। उन्होंने कहा कि इससे एमएसएमई अपने व्यवसाय पर ध्यान दे सकेंगे और समय से पहले भुगतान के बदले छूट भी दे सकते हैं जिससे उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  :  </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582688/stop-preaching-on-kashmir----a-history-stained-by-genocide--india-holds-up-a-mirror-to-pakistan-at-the-unsc"><span class="t-red">कश्मीर पर न दें ज्ञान... नरसंहार से कलंकित इतिहास,  </span>UNSC में भारत ने पाकिस्तान को दिखाया आईना </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582738/india-us-trade--union-minister-piyush-goyal-s-major-statement%E2%80%94us-delegation-may-visit-india-next-month-for-trade-talks</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/582738/india-us-trade--union-minister-piyush-goyal-s-major-statement%E2%80%94us-delegation-may-visit-india-next-month-for-trade-talks</guid>
                <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:32:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदाणी पर अमेरिकी आरोप वापस, USISPF CEO बोले- भारत-अमेरिका साझेदारी को मिला नया बल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटनः</strong> अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मुकेश अघी ने कहा कि अदाणी एंटरप्राइज से जुड़े मामले में अमेरिकी न्याय मंत्रालय के समाधान से कानूनी विवाद समाप्त हो गया है जो अन्यथा मजबूत भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी में एक व्यवधान बना हुआ था। उन्होंने कहा कि अदाणी एंटरप्राइज का 10 अरब डॉलर निवेश करने का संकल्प, राजदूत सर्जियो गोर की हालिया घोषणा पर आधारित है। गोर ने कहा था कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में 20.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की योजना बना रही हैं।</p>
<p>अघी ने कहा, ''यूएसआईएसपीएफ में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582494/us-withdraws-charges-against-adani--usispf-ceo-says-india-us-partnership-gains-new-strength"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(23)5.png" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटनः</strong> अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मुकेश अघी ने कहा कि अदाणी एंटरप्राइज से जुड़े मामले में अमेरिकी न्याय मंत्रालय के समाधान से कानूनी विवाद समाप्त हो गया है जो अन्यथा मजबूत भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी में एक व्यवधान बना हुआ था। उन्होंने कहा कि अदाणी एंटरप्राइज का 10 अरब डॉलर निवेश करने का संकल्प, राजदूत सर्जियो गोर की हालिया घोषणा पर आधारित है। गोर ने कहा था कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में 20.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की योजना बना रही हैं।</p>
<p>अघी ने कहा, ''यूएसआईएसपीएफ में हमारा मानना है कि ये निवेश अमेरिका में मजबूत भागीदार बनने की भारतीय कंपनियों की इच्छा को दर्शाते हैं। इससे मौजूदा सहयोग को बल मिलेगा, रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और दीर्घकालिक द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।'' </p>
<p>अदाणी समूह ने ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोपों के निपटारे के लिए 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने कहा कि जांच में भारतीय समूह ने ''व्यापक सहयोग किया और सक्रिय रूप से जानकारी साझा की।'' </p>
<p>अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप स्थायी रूप से वापस ले लिए हैं। इससे न्यूयॉर्क में चल रहा प्रतिभूति और 'वायर' धोखाधड़ी का चर्चित मामला पूरी तरह समाप्त हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 13:41:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा में भड़के विपक्ष के नेता खरगे,  कहा- भारत-US डील की जानकारी ट्रंप से मिलना संसद का अपमान </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में बुधवार को सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के किसानों के हितों के साथ समझौता किया है। उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से किसान विरोधी है और इससे भारतीय किसान तबाह हो जाएंगे। </p><p style="text-align:justify;">उन्होंने तंज करते हुए कहा कि संसद का सत्र चल रहा है लेकिन सांसदों को इस समझौते की जानकारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570055/opposition-leader-kharge-lashed-out-in-the-rajya-sabha--saying-that-getting-information-about-the-india-us-deal-from-trump-is-an-insult-to-parliament"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(31)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में बुधवार को सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के किसानों के हितों के साथ समझौता किया है। उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से किसान विरोधी है और इससे भारतीय किसान तबाह हो जाएंगे। </p><p style="text-align:justify;">उन्होंने तंज करते हुए कहा कि संसद का सत्र चल रहा है लेकिन सांसदों को इस समझौते की जानकारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिली। खरगे ने इसे संसद का अपमान बताया। खरगे ने कहा कि समझौते के संबंध में अमेरिका के कृषि मंत्री ने कहा है कि इस समझौते से अमेरिकी किसानों को फायदा होगा। </p><p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही थी, लेकिन वह वास्तव में किसानों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने हाल में ट्रंप द्वारा की गयी विभिन्न टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि यह भारत की संप्रभुता पर हमला है। </p><p style="text-align:justify;">कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने मोदी सरकार की विदेश नीति को विफल करार देते हुए कहा कि भारत के पड़ोसी देश नेपाल और चीन आपस में मिल रहे हैं और नेपाल विभिन्न स्थानों को अपना बता रहा है वहीं चीन भी कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा कर रहा है। उन्होंने कहा कि 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान करीब आ रहे हैं तथा बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। </p><p style="text-align:justify;">खरगे ने गुजरात के बंदरगाहों पर भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए जाने का भी मुद्दा उठाया और कहा कि गुजरात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह का गृह प्रदेश है, फिर भी वहां एक उद्योगपति के बंदरगाहों पर इतनी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए जा रहे हैं। खरगे ने सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था समेत कई अन्य मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने महिला सशक्तीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। </p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार ने 6062 शब्दों को अभिभाषण तैयार किया है लेकिन कई अहम सवालों पर अभिभाषण मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में महिला सशक्तीकरण पर बात हुई, लेकिन सच यह है कि महिलाएं भाजपा के लिए केवल वोट बैंक हैं।</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री वाकई महिलाओं का नेतृत्व आगे लाना चाहते हैं, तो महिला आरक्षण विधेयक पारित करते समय जनगणना के नाम पर शर्तें नहीं रखते। उन्होंने यह विधेयक लागू करने की मांग की। खरगे ने कहा कि सौ साल पहले जब महिलाओं को वोट का अधिकार भी नहीं था, तब कांग्रेस ने अपनी पार्टी की नेता सरोजनी नायडू को अध्यक्ष चुना। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के भी साठ साल पूरे हो गए। </p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसी महिला को अब तक अध्यक्ष नहीं बनाया है, आरएसएस ने भी सौ साल में किसी महिला को अपना नेतृत्व नहीं सौंपा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर तबकों, खासकर आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। खरगे ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) समुदाय के आर्थिक विकास के लिए कई कदम उठाए गए। </p><p style="text-align:justify;">खरगे ने सांप्रदायिक सौहार्द और सहिष्णुता के मुद्दे पर भी सरकार को घेरने का प्रयास किया। उन्होंने 'मोहम्मद दीपक' नाम रखने वाले एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सामाजिक सद्भावना के लिए खड़ा हुआ, उसके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अब झगड़ा सुलझाने वालों को ही धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने मनरेगा कानून के स्थान पर लाए गए नए कानून का भी विरोध किया और उसे मूल स्वरूप में फिर से लागू करने की मांग की।  </p><p style="text-align:justify;">राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में बुधवार को सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के किसानों के हितों के साथ समझौता किया है। उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से किसान विरोधी है और इससे भारतीय किसान तबाह हो जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/570055/opposition-leader-kharge-lashed-out-in-the-rajya-sabha--saying-that-getting-information-about-the-india-us-deal-from-trump-is-an-insult-to-parliament</link>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 17:22:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी-ट्रंप की एक कॉल ने बदल दी भारत-अमेरिका की व्यापार तस्वीर: टैरिफ 25% से घटकर 18%, रूस से तेल खरीद पर ब्रेक!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> एक फोन कॉल और रातों-रात भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय से अटका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले लिया। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के तुरंत बाद ट्रुथ सोशल पर इस ऐतिहासिक डील की घोषणा की। ट्रंप ने इसे अपनी और मोदी की दोस्ती का नतीजा बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>टैरिफ में बड़ी राहत: 25% से सीधे 18% पर </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब भारतीय सामानों पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर देगा, जो तत्काल प्रभाव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569849/a-single-call-between-modi-and-trump-changed-the-india-us-trade-picture--tariff-reduced-from-25--to-18---break-on-oil-purchase-from-russia"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(29)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> एक फोन कॉल और रातों-रात भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय से अटका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले लिया। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के तुरंत बाद ट्रुथ सोशल पर इस ऐतिहासिक डील की घोषणा की। ट्रंप ने इसे अपनी और मोदी की दोस्ती का नतीजा बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>टैरिफ में बड़ी राहत: 25% से सीधे 18% पर </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब भारतीय सामानों पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर देगा, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इससे पहले अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50% तक बढ़ा दिया था (जिसमें 25% रेसिप्रोकल + 25% अतिरिक्त पेनल्टी शामिल थी), जिससे इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, केमिकल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर्स पर भारी असर पड़ने का खतरा मंडरा रहा था। अब यह राहत भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी सौगात साबित होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>रूस से तेल आयात पर लगाम: अमेरिका की बड़ी शर्त पूरी</strong>  </h3>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद करने पर सहमति जताई है। बदले में अमेरिका ने रूस से तेल खरीद के कारण लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिया। अब भारत अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा और संभावित रूप से वेनेजुएला से भी। ट्रंप का कहना है कि इससे यूक्रेन युद्ध में रूस की कमाई पर अंकुश लगेगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत अमेरिका से खरीदेगा भारी-भरकम सामान</strong>  </h3>
<p style="text-align:justify;">समझौते के तहत भारत अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब डॉलर से ज्यादा का आयात करेगा। साथ ही भारत अमेरिकी सामानों पर अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर्स को धीरे-धीरे कम करके शून्य स्तर तक लाने की दिशा में काम करेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पीएम मोदी का गर्मजोशी भरा स्वागत </strong> </h3>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने इस डील का तुरंत स्वागत करते हुए ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने कहा, “मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके खुशी हुई। Made in India उत्पादों पर अब सिर्फ 18% टैरिफ लगेगा – यह 1.4 अरब भारतीयों के लिए शानदार खबर है।” मोदी ने इसे दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों का द्वार बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समझौता महीनों की कूटनीतिक खींचतान, टैरिफ युद्ध और रूस-यूक्रेन संकट के बीच आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्ते नई ऊंचाई छू सकते हैं, लेकिन ऊर्जा नीति में बदलाव और वैश्विक बाजार पर इसका असर आने वाले दिनों में साफ दिखेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 09:33:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: 2026 में 7% से अधिक ग्रोथ, जर्मनी को पछाड़ने की राह पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्लीः </strong>विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत 2026 में मजबूत स्थिति बनाए रखने की राह पर है जहां मजबूत वृद्धि, कम मुद्रास्फीति एवं सुदृढ़ बैंकिंग प्रदर्शन जैसे अनुकूल कारक मौजूद हैं। साथ ही, 2025 के दौरान देखी गई आर्थिक रफ्तार को कायम रखने के लिए सुधार पहलें भी तैयार हैं।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार से जीवन सुगमता एवं कारोबार सुगमता के विषयों को आगे बढ़ाते हुए आगामी बजट में पूंजीगत व्यय तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नए उपायों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है जिससे शुल्क एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/565669/india-to-become-world-s-fourth-largest-economy--growth-over-7--in-2026--on-track-to-overtake-germany"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(52)12.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्लीः </strong>विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत 2026 में मजबूत स्थिति बनाए रखने की राह पर है जहां मजबूत वृद्धि, कम मुद्रास्फीति एवं सुदृढ़ बैंकिंग प्रदर्शन जैसे अनुकूल कारक मौजूद हैं। साथ ही, 2025 के दौरान देखी गई आर्थिक रफ्तार को कायम रखने के लिए सुधार पहलें भी तैयार हैं।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार से जीवन सुगमता एवं कारोबार सुगमता के विषयों को आगे बढ़ाते हुए आगामी बजट में पूंजीगत व्यय तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नए उपायों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है जिससे शुल्क एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत एक अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बन सके। आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातार तिमाहियों में बढ़ी है। 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि खुदरा मुद्रास्फीति वर्ष के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक की निचली सीमा दो प्रतिशत से नीचे आ गई।</p>
<p>सरकार के एक बयान में कहा गया कि भारत ने 4180 अरब अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल कर लिया है। 2030 तक अनुमानित 7300 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ अगले ढाई से तीन वर्ष में जर्मनी को पछाड़कर तीसरे स्थान पर पहुंचने की राह पर है।</p>
<p>इसमें में कहा गया, ‘‘ वर्तमान व्यापक आर्थिक स्थिति उच्च वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के दुर्लभ मजबूत दौर को दर्शाती है।’’ सरकार राष्ट्रीय खातों के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने पर भी काम कर रही है, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना पद्धति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा उठाई गई चिंताओं का प्रभावी समाधान किया जा सके।</p>
<p>घरेलू मुद्रा के मोर्चे पर, शेयर बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बहिर्वाह से रुपये पर दबाव बना, हालांकि नवंबर में रुपये की अस्थिरता एक महीने पहले की तुलना में कम हुई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अर्थव्यवस्था आकलन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण एवं अनिश्चित माहौल के बावजूद 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत जुझारूपन दिखाया और पूरे वर्ष वृद्धि में तेजी बनी रही।</p>
<p>यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग खासकर ग्रामीण उपभोग, मुद्रास्फीति में नरमी एवं स्थिर निवेश में बढ़ोतरी से संचालित रही, जिसने इस गति को बनाए रखा। आपूर्ति पक्ष पर, सेवा क्षेत्र में स्थिर विस्तार जारी रहा जबकि पहले पिछड़े रहने के बाद विनिर्माण क्षेत्र ने वापसी की।</p>
<p>हालांकि वर्ष के अंत में कुछ नरमी के संकेत भी उभरे। कृषि परिदृश्य सहायक बना है। बेहतर खरीफ उत्पादन और पर्याप्त खाद्यान्न भंडार से कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिली। प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक गति को दर्शाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। विश्व बैंक, आईएमएफ, मूडीज, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी), फिच और एसएंडपी जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी इस आशावादी रुख की पुष्टि की।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है लेकिन मजबूत घरेलू बुनियाद, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियों और जारी सुधारों से अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से उत्पन्न बाहरी दबाव एवं उनका निर्यात पर असर चुनौती बन सकता है।</p>
<p>हालांकि, प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जल्द पूरा होने से निर्यात और अर्थव्यवस्था को और बल मिल सकता है। फरवरी में पेश होने वाले केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सुधारों को और गहरा करने तथा अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की व्यापक उम्मीदें हैं। उन्होंने पिछली बार करदाताओं को उल्लेखनीय राहत देने के साथ-साथ घरेलू एवं विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के उपायों की घोषणा की थी। माइक्रोसॉफ्ट (2030 तक 17.5 अरब डॉलर), अमेजन (अगले पांच वर्ष में 35 अरब डॉलर) और गूगल (अगले पांच वर्ष में 15 अरब डॉलर) जैसी कई वैश्विक कंपनियों ने बड़े निवेश की घोषणाएं की हैं।</p>
<p>इसके अलावा, आईफोन विनिर्माता एप्पल, दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग और आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने भी बड़ी विस्तार योजनाओं की घोषणा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों से भी अर्थव्यवस्था के विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (जिसके जल्द साकार होने की संभावना है) निर्यात एवं उद्योग विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) के लिए उत्प्रेरक साबित होगा। सरकार के 2025 के अंत में जीएसटी दरों में कटौती की और नए श्रम संहिताओं को लागू किया। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि वर्ष के अधिकतर समय शुल्क का साया रहने के बावजूद 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ यह बेहद मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था के कारण संभव हुआ। दिलचस्प बात यह है कि निर्यात भी टिके रहे जो दर्शाता है कि निर्यातकों ने अमेरिकी ग्राहकों के साथ कुछ हद तक बातचीत की है और बाजारों में विविधता लाई है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार अपने पूंजीगत व्यय लक्ष्यों को बनाए रखेगी जिससे कुल निवेश को और समर्थन मिलेगा। वर्ष में अनिश्चितता का अनुमान कम है क्योंकि शुल्क से जुड़ा मुद्दा किसी समझौते के जरिये सुलझ जाएगा और रुपये में भी अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने आगामी परिदृश्य पर कहा कि अगले कुछ तिमाहियों में वृद्धि दर के करीब 6.5 से सात प्रतिशत पर बने रहने की उम्मीद है, जिसे आयकर एवं जीएसटी कटौती तथा नीतिगत दरों में 125 आधार अंकों की कटौती के रूप में नीतिगत समर्थन मिलेगा।</p>
<p>क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने भी कहा कि 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया जहां वृद्धि अनुमान से अधिक रही और मुद्रास्फीति अपेक्षा से कम बनी रही। उन्होंने कहा कि हालांकि अमेरिका के भारी शुल्क के कारण विदेशी निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा। इसके परिणामस्वरूप पूंजी प्रवाह को लेकर चुनौतियां सामने आईं और मुद्रा कमजोर हुई। जोशी ने कहा, ‘‘ हम वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत और मुद्रास्फीति (मुख्य रूप से आधार प्रभावों से प्रेरित) पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाते हैं। हमारा मानना है कि कमजोर पूंजी प्रवाह और मुद्रा में गिरावट अस्थायी घटनाएं हैं।’’ </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:53:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से की बातचीत, जानें डोनाल्ड ट्रंप से किस मुद्दे पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयासों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि नेताओं ने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का समाधान करने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मोदी और ट्रंप ने भारत-अमेरिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563227/prime-minister-modi-held-talks-with-the-us-president--find-out-what-issues-were-discussed-with-donald-trump"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/cats48.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयासों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि नेताओं ने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का समाधान करने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मोदी और ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की भी समीक्षा की। दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के लगातार मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। अधिकारियों ने बताया कि मोदी और ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के साझा प्रयासों में गति बनाये रखने के महत्व पर जोर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि नेताओं ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जो 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका ‘कॉम्पैक्ट’ (सैन्य साझेदारी, त्वरित वाणिज्य और प्रौद्योगिकी के लिए अवसरों को उत्प्रेरित करना) के कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अधिकारियों ने बताया कि नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की और साझा चुनौतियों का समाधान करने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 21:25:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Stock Market Today: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर शेयर बाजार में छायी हरियाली, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स, निफ्टी उछले </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेजी दर्ज की गई। इसके अलाव भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आशावाद से भी निवेशकों की धारणा को बल मिला। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 464.66 अंक की बढ़त के साथ 84,335.98 अंक पर और एनएसई निफ्टी 134.70 अंक चढ़कर 25,829.65 अंक पर पहुंच गया। </p>
<p style="text-align:justify;">सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इटर्नल, बजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर फायदे में रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर भारत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/559538/stock-market-today-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%9D%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80--%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%9B%E0%A4%B2%E0%A5%87%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/untitled-design-(68)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेजी दर्ज की गई। इसके अलाव भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आशावाद से भी निवेशकों की धारणा को बल मिला। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 464.66 अंक की बढ़त के साथ 84,335.98 अंक पर और एनएसई निफ्टी 134.70 अंक चढ़कर 25,829.65 अंक पर पहुंच गया। </p>
<p style="text-align:justify;">सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इटर्नल, बजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर फायदे में रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी इंडिया, एशियन पेंट्स, आईटीसी, सन फार्मास्युटिकल्स और ट्रेंट लिमिटेड के शेयर नुकसान में रहे। एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त में रहे जबकि जापान का निक्की 225 तथा चीन का एसएसई कम्पोजिट नकारात्मक दायरे में रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी बाजार रात भर के सौदों में मंगलवार को काफी हद तक बढ़त के साथ बंद हुए। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 65.01 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 803.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,188.47 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़े : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/559400/stock-market-today--markets-open-in-the-red----sensex-and-nifty-fall-in-early-trade--shares-of-these-companies-decline"><span class="t-red">Stock Market Today: </span>लाल निशान पर खुले बाजार... शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स, निफ्टी लुढ़के, इन कंपनियों के शेयर  में आई गिरावट  </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 10:29:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>India-US trade से जुड़ी अनिश्चितता के बीच शेयर बाजार पर बना दबाव, एशियाई बाजारों में कमजोर रुख से सेंसेक्स-निफ्टी फिसला  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी अनिश्चितता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 369.58 अंक की गिरावट के साथ 81,093.51 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 104.3 अंक फिसलकर 24,732.70 अंक पर रहा। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में करीब सात प्रतिशत की गिरावट आई। </p>
<p style="text-align:justify;">टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, भारती एयरटेल, इन्फोसिस और इटर्नल (पूर्व में जोमैटो) के शेयर नुकसान में रहे।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547830/the-stock-market-remained-under-pressure-amid-uncertainty-related-to-india-us-trade--sensex-nifty-slipped-due-to-weak-trend-in-asian-markets"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/bbuisness-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी अनिश्चितता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 369.58 अंक की गिरावट के साथ 81,093.51 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 104.3 अंक फिसलकर 24,732.70 अंक पर रहा। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में करीब सात प्रतिशत की गिरावट आई। </p>
<p style="text-align:justify;">टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, भारती एयरटेल, इन्फोसिस और इटर्नल (पूर्व में जोमैटो) के शेयर नुकसान में रहे। वहीं टाटा मोटर्स, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट और पावर ग्रिड के शेयर लाभ में रहे। एशियाई बाजारों में जापान का निक्की 225, चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी नुकसान में रहे जबकि हांगकांग का हैंगसेंग फायदे में रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी बाजार शुक्रवार को सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 68.64 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,979.96 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/547738/share-reviews--investors-will-keep-an-eye-on-fed-meeting-and-domestic-data">Share Reviews: फेड की बैठक और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/547830/the-stock-market-remained-under-pressure-amid-uncertainty-related-to-india-us-trade--sensex-nifty-slipped-due-to-weak-trend-in-asian-markets</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/547830/the-stock-market-remained-under-pressure-amid-uncertainty-related-to-india-us-trade--sensex-nifty-slipped-due-to-weak-trend-in-asian-markets</guid>
                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 10:58:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rupee vs Dollar: रुपया शुरुआती कारोबार में 12 पैसे की बढ़त के साथ 85.80 प्रति डॉलर पर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई।</strong> वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सफलता की उम्मीद के बीच रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में 12 पैसे की बढ़त के साथ 85.80 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में मजबूती एवं विदेशी पूंजी की निकासी ने हालांकि स्थानीय मुद्रा में तेज बढ़त को रोक दिया। </p>
<p>अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.93 पर कमजोर रुख के साथ खुला। हालांकि जल्द की सकारात्मक दायरे में आते हुए 85.80 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/546384/rupee-vs-dollar--rupee-gains-12-paise-to-85-80-per-dollar-in-early-trade"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/rupee-vs-dollar2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई।</strong> वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सफलता की उम्मीद के बीच रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में 12 पैसे की बढ़त के साथ 85.80 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में मजबूती एवं विदेशी पूंजी की निकासी ने हालांकि स्थानीय मुद्रा में तेज बढ़त को रोक दिया। </p>
<p>अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.93 पर कमजोर रुख के साथ खुला। हालांकि जल्द की सकारात्मक दायरे में आते हुए 85.80 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 12 पैसे की बढ़त दर्शाता है। रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.92 पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.55 पर आ गया। </p>
<p>घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 119.05 अंक की बढ़त के साथ 82,753.53 अंक पर जबकि निफ्टी 18.7 अंक चढ़कर 25,230.75 अंक पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 68.46 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,858.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/546384/rupee-vs-dollar--rupee-gains-12-paise-to-85-80-per-dollar-in-early-trade</link>
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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 10:03:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर एस. जयशंकर ने कहा-  अगले कुछ दिन इस पर नजर रखनी होगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क। </strong>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के सफल निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद जाहिर की है। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि हमें अगले कुछ दिन तक इस पर नजर रखनी होगी।’’ जयशंकर ने सोमवार को कहा, ‘‘आपने व्यापार के बारे में बात की, हां, हम एक बहुत ही जटिल व्यापार वार्ता के मध्य में हैं.. या शायद उससे भी थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं।’’ </p>
<p>मैनहट्टन में 9/11 स्मारक के पास वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित न्यूजवीक के मुख्यालय में उसके मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) देव प्रगाद के साथ बातचीत के दौरान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/544278/on-india-us-trade-agreement--s--jaishankar-said--we-will-have-to-keep-an-eye-on-this-for-the-next-few-days"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/विदेश-मंत्री-एस.-जयशंकर.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>न्यूयॉर्क। </strong>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के सफल निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद जाहिर की है। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि हमें अगले कुछ दिन तक इस पर नजर रखनी होगी।’’ जयशंकर ने सोमवार को कहा, ‘‘आपने व्यापार के बारे में बात की, हां, हम एक बहुत ही जटिल व्यापार वार्ता के मध्य में हैं.. या शायद उससे भी थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं।’’ </p>
<p>मैनहट्टन में 9/11 स्मारक के पास वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित न्यूजवीक के मुख्यालय में उसके मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) देव प्रगाद के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘ स्पष्ट रूप से मुझे उम्मीद है कि हम इसे सफल निष्कर्ष तक ले जाएंगे। मैं इसकी गारंटी नहीं दे सकता, क्योंकि चर्चा में एक अन्य पक्ष भी शामिल है।’’ </p>
<p>जयशंकर भारत-अमेरिका संबंधों और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ जिस तरह अमेरिका या अमेरिका में रहने वाले लोगों के भारत के बारे में विचार हो सकते हैं, उसी तरह भारत में रहने वाले लोगों के भी अमेरिका के बारे में विचार हैं। हमें एक तरह का मिलन बिंदु खोजना होगा। मेरा मानना ​​है कि यह संभव है।’’ </p>
<p>भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर एक अन्य प्रश्न पर जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई गहन चर्चाएं हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं यह नहीं बता सकता कि किस देश ने कितने दौर की वार्ताएं की हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हम उन देशों में से होंगे जिन्होंने सबसे अधिक वार्ताएं की हैं।’’ </p>
<p>वहीं बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति काल से लेकर वर्तमान में ट्रंप प्रशासन तक भारत-अमेरिका संबंधों पर जयशंकर ने कहा कि द्विपक्षीय संबंध मुख्य तौर पर सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्ष में संबंध मजबूत रहे हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे संरचनात्मक कारक इस संबंध के लिए काम करते हैं। जयशंकर ने कहा कि रिश्तों में मतभेद होते ही हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसा होता ही है। वास्तव में, हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में... मैं कुछ ऐसा सोच सकता हूं जो उस समय टकराव का कारण रहा हो...।’’ विदेश मंत्री ने मिसाल के तौर पर कहा कि पाकिस्तान को एफ16 विमान बेचने की अमेरिका की योजना भी एक विवाद का मुद्दा रही थी। उन्होंने कहा, ‘‘ रिश्ते में कोई न कोई समस्या होती ही है... मेरा मानना है कि मतभेद भी हो सकते हैं। मुझे लगता है कि इससे निपटने की क्षमता और उस प्रवृत्ति को सकारात्मक दिशा में जारी रखने की क्षमता ही मायने रखती है।’’ </p>
<p>इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत के साथ व्यापार समझौता जल्द होने की बात से सहमति जताते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोमवार को प्रेस वार्ता में कहा कि वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ओवल कार्यालय में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ थे और ‘‘वे इन समझौतों को अंतिम रूप दे रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ भारत के संदर्भ में आप राष्ट्रपति और उनके दल, व्यापार से जुड़े उनके दल से इस संबंध में जल्द ही कुछ सुनेंगे।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 10:52:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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