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                <description>ceasefire RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>होर्मुज में अमेरिकी पोतों पर ईरानी हमला नाकाम, ट्रंप बोले -'उन्होंने हमसे खिलवाड़ किया, हमने उन्हें उड़ा दिया' </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दुबई। </strong>अमेरिका की सेना ने कहा है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में उसकी नौसेना के तीन पोतों पर ईरानी हमलों को रोका और ''अमेरिकी सैन्य बलों पर हमले के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।'' इस घटना ने दोनों देशों के बीच एक महीने से जारी युद्धविराम की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">'यूएस सेंट्रल कमांड' ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ''बिना किसी उकसावे के बावजूद किए गए ईरानी हमलों'' को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि किसी भी पोत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581292/iranian-attack-on-us-ships-in-hormuz-foiled--trump-says--%22they-messed-with-us--we-blew-them-up-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(28)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दुबई। </strong>अमेरिका की सेना ने कहा है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में उसकी नौसेना के तीन पोतों पर ईरानी हमलों को रोका और ''अमेरिकी सैन्य बलों पर हमले के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।'' इस घटना ने दोनों देशों के बीच एक महीने से जारी युद्धविराम की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">'यूएस सेंट्रल कमांड' ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ''बिना किसी उकसावे के बावजूद किए गए ईरानी हमलों'' को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि किसी भी पोत को नुकसान नहीं पहुंचा है। उसने कहा कि वह तनाव बढ़ाना नहीं चाहती लेकिन ''अमेरिकी बलों की रक्षा के लिए तैनात और तैयार है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि हिंसा के बावजूद युद्धविराम कायम है। ट्रंप ने कहा, ''उन्होंने आज हमसे खिलवाड़ किया। हमने उन्हें उड़ा दिया।''  इस बीच, ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा कि देश के सशस्त्र बलों और ''दुश्मन'' के बीच जलडमरूमध्य में स्थित केशम द्वीप पर गोलीबारी हुई। यह फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा ईरानी द्वीप है जहां करीब 1,50,000 लोग रहते हैं। यहां एक जल विलवणीकरण संयंत्र भी है। </p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया ने भी पश्चिमी तेहरान में तेज आवाजों और गोलीबारी की खबर दी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों 'फार्स' और 'तस्नीम' ने बताया कि ईरान के दक्षिणी हिस्से में बंदर अब्बास के पास विस्फोटों की आवाज सुनी गई।  खबरों में विस्फोटों के स्रोत के बारे में नहीं बताया गया। जहाजरानी आंकड़ों से जुड़ी एक कंपनी ने इससे पहले दिन में बताया कि ईरान ने अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पोतों की जांच और उनसे कर वसूलने के लिए एक सरकारी एजेंसी बनाई है। इस मार्ग पर नियंत्रण को औपचारिक रूप देने के ईरान के प्रयास से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को लेकर नयी चिंताएं पैदा हो गई हैं। सैकड़ों वाणिज्यिक पोत फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और खुले समुद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, ईरान ने कहा कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा दिए गए नवीनतम प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे एक ईरानी तेल टैंकर पर गोलीबारी की थी। इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वेटिकन में पोप लियो 14वें के साथ पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों पर चर्चा की। </p>
<p style="text-align:justify;">ईरान युद्ध के विरोध के कारण पोप और ट्रंप के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। बुधवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि युद्ध समाप्त करना और संघर्ष के कारण बाधित तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति फिर से शुरू करना ईरान द्वारा समझौते को स्वीकार करने पर निर्भर करता है, हालांकि उन्होंने समझौते का विस्तृत विवरण नहीं दिया। ट्रंप ने लिखा, ''अगर वे सहमत नहीं होते हैं, तो बमबारी शुरू हो जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">यह भी पढ़ें:</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/581259/trump-suffers-a-major-legal-setback--with-the-new-york-international-trade-court-blocking-the-10--global-tariff"><span class="t-red">ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका, </span>न्यूयॉर्क की अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 10% वैश्विक शुल्क पर लगाई रोक</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/581292/iranian-attack-on-us-ships-in-hormuz-foiled--trump-says--%22they-messed-with-us--we-blew-them-up-%22</link>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:40:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय:भ्रामक युद्ध विराम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका द्वारा युद्ध विराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाना पहली नजर में शांति का संकेत लगता है, पर गहराई से देखें तो यह एक जटिल सामरिक चाल अधिक प्रतीत होती है। इतिहास गवाह है कि युद्ध विराम अक्सर संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि रणनीतिक विराम होता है। यह पुनर्संयोजन, दबाव निर्माण और कूटनीतिक संभावनाओं की परख का समय होता है। अमेरिका की मंशा को केवल शांति स्थापना तक सीमित मानना यथार्थवादी नहीं होगा, दरअसल  यह कदम तीन स्तरों पर काम करता दिखता है— पहला, सैन्य थकान और संसाधनों के पुनर्गठन की आवश्यकता; दूसरा, अंतर्राष्ट्रीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579728/editorial--a-deceptive-ceasefire"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/sampadkiy16.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका द्वारा युद्ध विराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाना पहली नजर में शांति का संकेत लगता है, पर गहराई से देखें तो यह एक जटिल सामरिक चाल अधिक प्रतीत होती है। इतिहास गवाह है कि युद्ध विराम अक्सर संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि रणनीतिक विराम होता है। यह पुनर्संयोजन, दबाव निर्माण और कूटनीतिक संभावनाओं की परख का समय होता है। अमेरिका की मंशा को केवल शांति स्थापना तक सीमित मानना यथार्थवादी नहीं होगा, दरअसल  यह कदम तीन स्तरों पर काम करता दिखता है— पहला, सैन्य थकान और संसाधनों के पुनर्गठन की आवश्यकता; दूसरा, अंतर्राष्ट्रीय दबाव को संतुलित करना और तीसरा, ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए समय खरीदना। </p>
<p>ईरान का यह दावा कि डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल युद्ध जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं, इसे पूर्ण सत्य मानना तथ्य उपेक्षा और जल्दबाजी होगी। सवाल अमेरिका की सैन्य क्षमता पर नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक प्राथमिकताओं और घरेलू दबावों पर अधिक हैं। अमेरिका का पाकिस्तान के कहने पर युद्ध विराम बढ़ाने का तर्क भी अधिक विश्वसनीय नहीं लगता है। पाकिस्तान इस क्षेत्र में एक कारक अवश्य है, पर निर्णायक नहीं। अमेरिका के फैसले आमतौर पर उसके व्यापक भू-राजनीतिक हितों—विशेषकर ऊर्जा, इसराइल की सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व से संचालित होते हैं।</p>
<p>इस संदर्भ में खाड़ी की ‘मौजूदा शांति’ वास्तव में भ्रामक है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ता नियंत्रण और जहाजों की जब्ती जैसी घटनाएं संकेत देती हैं कि तनाव सतह के नीचे लगातार उबल रहा है। यदि यह जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ना तय है। 55 करोड़ बैरल तेल का नुकसान और एलएनजी आपूर्ति में दो प्रतिशत की गिरावट केवल आंकड़े नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी हैं। </p>
<p>अमेरिका इस दौरान ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है, जबकि ईरान ‘थोपी गई शर्तों’ को अस्वीकार कर अपनी संप्रभुता का प्रदर्शन कर रहा है। यह गतिरोध तभी टूटेगा, जब दोनों पक्ष कुछ लचीलापन दिखाएं। यदि अमेरिका ईरान के प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करता है, तो समाधान की दिशा खुल सकती है, परंतु अनिश्चित युद्ध विराम का एक बड़ा खतरा यह है कि यह स्थायी अस्थिरता को जन्म देता है। </p>
<p>यह न तो पूर्ण युद्ध है, न ही वास्तविक शांति, बल्कि एक ऐसी स्थिति है, जहां किसी भी क्षण संघर्ष फिर भड़क सकता है। यही कारण है कि वर्तमान ठहराव भविष्य के अधिक बड़े टकराव का संकेत भी हो सकता है। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है। ऊर्जा आयात पर निर्भरता और खाड़ी में बड़ी भारतीय आबादी के कारण भारत को संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनानी होगी। </p>
<p>भारत को एक ओर अपनी ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाशने होंगे, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर दोनों पक्षों से संवाद भी बनाए रखना होगा। ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की मौजूदा नीति यहां सबसे उपयुक्त प्रतीत होती है। कुल मिलकर यह अनिश्चित युद्ध विराम शांति का संकेत कम और रणनीतिक विराम अधिक है। यदि इसे ठोस कूटनीतिक पहल में नहीं बदला गया, तो यह भ्रामक शांति जल्द ही नए संघर्ष का भीषण मोर्चा खोल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 08:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप की रणनीतिक विफलता और भविष्य के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em><strong>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध विराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा से ईरान से आमने-सामने की बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, लेकिन दोनों के बीच हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats180.jpg" alt="cats" width="115" height="134" />
<strong>विवेक सक्सेना, अयोध्या</strong>

<p>  </p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल 2026 के भू-राजनीतिक परिदृश्य में, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ घोषित युद्ध विराम ने अमेरिकी विदेश नीति की एक बड़ी विफलता को उजागर किया है। ‘पूर्ण जीत’ और ईरान की सैन्य शक्ति को ‘पूरी तरह से नष्ट’ करने के शुरुआती बड़बोले दावों के बाद, यह युद्ध विराम ट्रंप प्रशासन के लिए एक शर्मनाक मोड़ के रूप में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579733/trump-s-strategic-failure-and-future-signals"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(66)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><em><strong>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध विराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा से ईरान से आमने-सामने की बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, लेकिन दोनों के बीच हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats180.jpg" alt="cats" width="115" height="134"></img>
<strong>विवेक सक्सेना, अयोध्या</strong>

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल 2026 के भू-राजनीतिक परिदृश्य में, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ घोषित युद्ध विराम ने अमेरिकी विदेश नीति की एक बड़ी विफलता को उजागर किया है। ‘पूर्ण जीत’ और ईरान की सैन्य शक्ति को ‘पूरी तरह से नष्ट’ करने के शुरुआती बड़बोले दावों के बाद, यह युद्ध विराम ट्रंप प्रशासन के लिए एक शर्मनाक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह संघर्ष न केवल मध्य पूर्व में स्थिरता लाने में विफल रहा, बल्कि इसने अमेरिकी कूटनीति की सीमाओं को भी उजागर किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में युद्ध विराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा से मध्यस्थों को अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने की बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को युद्ध शुरू किया, जिसके कारण तेल की कीमतें बढ़ गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ने और अन्य देशों में भी बिजली संयंत्रों पर हमले का खतरा पैदा हो गया। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को नष्ट कर दिया है, लेकिन हकीकत यह रही कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और अमेरिकी धमकियों को नजरअंदाज करते हुए जवाबी हमले जारी रखे। 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद जब युद्ध विराम की घोषणा की गई, तो यह जीत से ज्यादा एक सामरिक वापसी और ईरान के सामने झुकने जैसा प्रतीत हुआ। ईरान ने स्पष्ट किया कि उसने कोई युद्ध विराम नहीं मांगा था, जिससे ट्रंप के दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इस घोषणा से अस्थायी रूप से लड़ाई फिर से शुरू होने से तो बच गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच व्यापक मतभेद बने हुए हैं। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच मौजूदा युद्ध विराम आठ अप्रैल को शुरू हुआ, जो ट्रंप द्वारा कई बार समय सीमा तय किए जाने के बाद हुआ। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता का पिछला दौर पाकिस्तान में आयोजित किया गया था। अमेरिकी वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्चतम स्तरीय वार्ता में भाग लिया, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हुई। </p>
<p style="text-align:justify;">वैंस की पाकिस्तान यात्रा अभी भी स्थगित है और ईरान पर अमेरिका की नाकाबंदी जारी है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मौजूदा युद्ध विराम की समय सीमा समाप्त होने से कुछ ही घंटे पहले पाकिस्तान के अनुरोध पर यह कदम उठाया, क्योंकि वह ईरान से ‘एकीकृत प्रस्ताव’ की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अनिर्णय के लिए ईरान के ‘गंभीर रूप से विभाजित’ नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। इन सब के बीच दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने मंगलवार को एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि अमेरिका और ईरान ने वार्ता के एक नए दौर के आयोजन के संकेत दिए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के नेतृत्व वाले मध्यस्थों को इस बात की पुष्टि मिली है कि शीर्ष वार्ताकार, वैंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़, अपनी-अपनी टीमों का नेतृत्व करेंगे, लेकिन मंगलवार देर रात, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सम्मेलन में भाग लेने के बारे में कोई ‘अंतिम निर्णय’ नहीं लिया गया है। प्रवक्ता, इस्माइल बगाई ने सरकारी टीवी को बताया कि निर्णय न ले पाने का कारण अमेरिकियों की ओर से ‘विरोधाभासी संदेश’ और ‘अस्वीकार्य कार्रवाइयां’, विशेष रूप से ईरान की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी है। </p>
<p style="text-align:justify;">यदि पाकिस्तान बैठक आयोजित करने में सफल भी हो जाता है, तो भी होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और नाकाबंदी को लेकर गंभीर चुनौतियां बनी रहेंगी। सप्ताहांत में ईरान ने जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया। अमेरिका ने भी जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहे एक ईरानी जहाज पर हमला किया और उसे अपने कब्जे में ले लिया, जिससे संकेत मिलता है कि स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। ईरान का सारा उच्च संवर्धित यूरेनियम अभी भी देश में ही है, संभवतः उन संवर्धन स्थलों में दबा हुआ है, जिन पर पिछले साल जून में 12 दिनों के युद्ध के दौरान अमेरिका ने बमबारी की थी। </p>
<p style="text-align:justify;">ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऐसा करने का अधिकार है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से इनकार करता है, जबकि ट्रंप ने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करने और अपने भंडार को छोड़ने का आह्वान किया है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के अपने 10 सूत्री प्रस्ताव में इसे खारिज कर दिया। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता होने वाली थी, लेकिन ईरान का प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुंचा। अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पाकिस्तान रवाना होने वाला था, ऐसा नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं युद्ध विराम ख़त्म होने से पहले ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी समय सीमा बढ़ाने की घोषणा की। कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया, ‘हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि एक साझा प्रस्ताव लेकर नहीं आते।’ इसके कुछ घंटे बाद ही, बुधवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने तीन कार्गो जहाज़ों पर हमला कर दो को सीज़ कर लिया। इनमें एक पर ग्रीस का और दूसरे पर पनामा का झंडा लगा था, जबकि तीसरा जहाज़ यूएई की एक कंपनी का है। फारस की खाड़ी का संकरा मुहाना, होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे होकर 20 फीसदी प्राकृतिक गैस और तेल का परिवहन होता है, जलमार्ग में ईरानी हमलों के कारण लगभग बंद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 05:18:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Moradabad: सीज फायर से मिले अवसर से निर्यातक उत्साहित, कालाबाजारी पर लगेगा अंकुश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार।</strong> अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध में तात्कालिक सीज फायर से मिले अवसर से हस्तशिल्पी और हैंडीक्राफ्ट उद्योग से जुड़े निर्यातक उत्साहित हैं। पहले ट्रंप टैरिफ की मार झेलने के बाद अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच युद्ध से परिस्थितियों पर काफी असर पड़ा। युद्ध के चलते ईंधन की किल्लत और उसके चलते उत्पादों की बढ़ी कीमतों से बेजार हो रहे बाजार को अब बूम की उम्मीद जगी है।</p>
<p>ईपीसीएच हाउस में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज विनोद खन्ना ने कहा कि सीज फायर का निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। इस दौरान जो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577979/exporters-buoyed-by-opportunities-arising-from-the-ceasefire--black-marketing-set-to-be-curbed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/niryatak.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार।</strong> अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध में तात्कालिक सीज फायर से मिले अवसर से हस्तशिल्पी और हैंडीक्राफ्ट उद्योग से जुड़े निर्यातक उत्साहित हैं। पहले ट्रंप टैरिफ की मार झेलने के बाद अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच युद्ध से परिस्थितियों पर काफी असर पड़ा। युद्ध के चलते ईंधन की किल्लत और उसके चलते उत्पादों की बढ़ी कीमतों से बेजार हो रहे बाजार को अब बूम की उम्मीद जगी है।</p>
<p>ईपीसीएच हाउस में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज विनोद खन्ना ने कहा कि सीज फायर का निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। इस दौरान जो सामान डंप पड़े थे उसकी बिक्री को गति मिलेगी और कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा। उन्होंने बताया कि टैरिफ वार की चुनौतियों से निपटने के साथ ही नये बाजार आस्ट्रेलिया, यूके, इटली व अन्य देशों से व्यापारिक रिश्तों को बढ़ाकर उसे मजबूती दी गई। उन्होंने बताया कि जयपुर और जोधपुर में टेस्टिंग लैब स्थापित कराई है, इसका जल्द उद्घाटन कराया जाएगा। ईपीसीएच का मुख्य उद्देश्य भारत के हस्तशिल्प सेक्टर को दुनिया का सबसे पसंदीदा सोर्सिंग डेस्टीनेशन बनाना है। बताया कि पिछले साल 2 जून को उन्होंने ईपीसीएच के चेयरमैन पद का चार्ज लिया था। चुनौतियों को स्वीकार कर आगे कदम बढ़ाया। बताया कि फरवरी फेयर में जगह बढ़ाकर निर्यातकों को अवसर दिया गया। इस बार इसमें एजूकेशनल वर्कशॉप शुरू कराया। नयी पीढ़ी को निर्यात इंडस्ट्री में अवसर प्रदान करने का ईपीसीएच मजबूत प्लेटफार्म बनकर उभरा है। इस भवन में कैश एंड कैरी सेंटर खुलना कारोबारियों के लिए बेहतर मौका है। यहां मुरादाबाद के हस्तशिल्पियों के उत्पाद और हस्तशिल्प के बेहतरीन नमूना प्रदर्शित हैं। खरीदारों को अत्याधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। इसमें कैफे भी संचालित किया जा रहा है। बताया कि जल्द ही ऑडिटोरियम बनेगा और निर्यातकों और आर्टीजन के साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रियायत दी जाएगी। कामर्स सेक्टर की प्रदर्शनी लगाई जा सकेगी। इस दौरान नेशनल चेयरमैन यस जेपी सिंह, रोहित ढल, सुशील अग्रवाल पुनीत आर्य, कुलाल दवे, विवेक अग्रवाल, गगन दुग्गल सहित अन्य निर्यातक मौजूद रहे।</p>
<p><strong>आपदा में निर्यातकों का पूरा सहयोग</strong><br />ईपीसीएच के सीओएस सदस्य व मुख्य संयोजक अवधेश अग्रवाल ने आगामी योजनाओं को बेहतर करने की प्रतिबद्धता जताई। कहा ईपीसीएच आपदा में निर्यातकों के साथ पूरा सहयोग करती है। चुनौतियों में सभी निर्यातक एकजुटता के साथ खड़े हैं। आगामी अक्टूबर फेयर में 30 प्रतिशत बायर अधिक आएंगे। नजलूम इस्लाम, नावेद उर रहमान ने कहा कि ईपीसीएच के फेयर में पूरे भारत की सहभागिता होती है। सलमान आजम और रोहित ढल ने ईपीसीएच के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। सीओएस सदस्य रश्मि दुग्गल ने कहा कि महिलाओं को ईपीसीएच के प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए प्रदर्शनी लगाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:04:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'ईरान से तुरंत निकलें भारत...' युद्धविराम के बीच तेहरान में भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली/तेहरान: </strong>अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। दूतावास ने सख्ती से सलाह दी है कि सभी भारतीय जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से ईरान छोड़ दें।</p>
<p>यह दूसरी एडवाइजरी है। मंगलवार को जारी पहली एडवाइजरी के बाद बुधवार (8 अप्रैल 2026) को नई सलाह जारी की गई है।</p>
<h3><strong>दूतावास का सख्त निर्देश</strong></h3>
<p>एडवाइजरी में कहा गया है कि भारतीय नागरिक दूतावास के साथ समन्वय करके और दूतावास द्वारा सुझाए गए तय रास्तों का इस्तेमाल करते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577940/indians-should-leave-iran-immediately----indian-embassy-in-tehran-issues-advisory-amid-ceasefire"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(28)3.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली/तेहरान: </strong>अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। दूतावास ने सख्ती से सलाह दी है कि सभी भारतीय जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से ईरान छोड़ दें।</p>
<p>यह दूसरी एडवाइजरी है। मंगलवार को जारी पहली एडवाइजरी के बाद बुधवार (8 अप्रैल 2026) को नई सलाह जारी की गई है।</p>
<h3><strong>दूतावास का सख्त निर्देश</strong></h3>
<p>एडवाइजरी में कहा गया है कि भारतीय नागरिक दूतावास के साथ समन्वय करके और दूतावास द्वारा सुझाए गए तय रास्तों का इस्तेमाल करते हुए जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलें। </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/India_in_Iran/status/2041756690047979944?s=20">https://twitter.com/India_in_Iran/status/2041756690047979944?s=20</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>दूतावास ने साफ चेतावनी दी है कि कोई भी भारतीय नागरिक बिना दूतावास से सलाह और समन्वय किए किसी भी अंतरराष्ट्रीय ज़मीनी सीमा की ओर न जाए। किसी भी हालत में स्वयं लैंड बॉर्डर की ओर बढ़ने की कोशिश न करें।</p>
<h3><strong>मदद के लिए जारी संपर्क नंबर</strong></h3>
<p>दूतावास ने आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:</p>
<p>- +98 912 810 9115  <br />- +98 912 810 9102  <br />- +98 912 810 9109  <br />- +98 993 217 9359  </p>
<p><strong>ईमेल:</strong> cons.tehran@mea.gov.in</p>
<h3><strong>जानें युद्धविराम की पूरी डिटेल</strong></h3>
<p>मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शाम 6:32 बजे (वाशिंगटन समय) ईरान के साथ दो सप्ताह के ceasefire की घोषणा की। ट्रंप ने इसे ‘दो-तरफा युद्धविराम’ बताया और कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोलने पर सहमत हो गया है। </p>
<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है और अब लंबे समय की शांति समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। पाकिस्तान की मध्यस्थता से यह समझौता हुआ है।</p>
<p>हालांकि, युद्धविराम की घोषणा के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह कम नहीं हुआ है। इसी कारण भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह सख्त एडवाइजरी जारी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:43:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेडलाइन से पहले ईरान युद्धविराम का ऐलान :  असीम मुनीर को शुक्रिया कह रहे अराघची, जानिए अमेरिका-इजरायल का क्या है प्लान </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन</strong>। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम के लिए सहमत हो गया है और इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। अराघची ने युद्धविराम समझौता करवाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रति आभार व्यक्त किया। </p>
<p style="text-align:justify;">अराघची ने बुधवार तड़के ईरान की सुरक्षा परिषद की ओर से जारी बयान में कहा, "इस्लामिक गणराज्य ईरान की ओर से मैं क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए अथक प्रयास के लिए अपने भाई पाकिस्तान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577923/iran-announces-ceasefire-ahead-of-deadline--araghchi-thanks-asim-munir%E2%80%94find-out-what-the-us-israel-plan-is"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/वायरल-तस्वीर-(17)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन</strong>। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम के लिए सहमत हो गया है और इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। अराघची ने युद्धविराम समझौता करवाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रति आभार व्यक्त किया। </p>
<p style="text-align:justify;">अराघची ने बुधवार तड़के ईरान की सुरक्षा परिषद की ओर से जारी बयान में कहा, "इस्लामिक गणराज्य ईरान की ओर से मैं क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए अथक प्रयास के लिए अपने भाई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फील्ड मार्शल मुनीर के प्रति आभार और सराहना व्यक्त करता हूं।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शरीफ के 'भाईचारे के अनुरोध' और अमेरिका द्वारा अपने 15-सूत्री प्रस्ताव के आधार पर वार्ता की मांग, तथा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के 10-सूत्री प्रस्ताव को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार करने की घोषणा को ध्यान में रखते हुए, ईरान की सुरक्षा परिषद ने दो फैसले लिए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यालय ने अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम को अमेरिका की बड़ी जीत बताया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने आज एक बयान में कहा, "यह अमेरिका की जीत है, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप और हमारी शानदार सेना ने संभव बनाया है।" उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की शुरुआत से ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे चार से छह सप्ताह का अभियान बताया था लेकिन अमेरिकी सैन्य क्षमताओं के चलते 38 दिनों में ही मुख्य सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">लेविट ने कहा, "हमारे सैनिकों की अद्भुत क्षमताओं की बदौलत, हमने 38 दिनों में अपने प्रमुख सैन्य लक्ष्यों को हासिल किया है और उनसे भी आगे बढ़ गए हैं।" उन्होंने कहा कि सैन्य सफलता के कारण अमेरिका को वार्ता में बढ़त मिली, जिससे कड़े संवाद के जरिए कूटनीतिक समाधान और दीर्घकालिक शांति की संभावना बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सफलता हासिल की। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही उसकी सेनाओं के समन्वय से ही संभव होगी। सुश्री लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की क्षमता को कम नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाते हुए शांति स्थापित करने की दिशा में कदम उठाया है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ईरान युद्धविराम के लिए सहमत, अराघची ने की शरीफ की सराहना</h5>
<p style="text-align:justify;">पहला, यदि ईरान के खिलाफ हमले रोक दिए जाते हैं, तो ईरान की सशस्त्र सेनाएं भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई बंद कर देंगी। इसके साथ ही दो सप्ताह की अवधि के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी, जो ईरान की सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में राजधानी तेहरान सहित कई शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित सैकड़ों लोगों की जान गयी थी। ईरान ने इसके जवाब में इजरायल और पश्चिम एशिया में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने अपनी राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता की पहल की थी। ईरान ने शुरुआत में इस वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया था, हालांकि बुधवार तड़के दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति बन गयी। अमेरिका और ईरान 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में युद्धविराम पर आगे की बातचीत करेंगे। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ट्रंप ने बताया पश्चिम एशिया के लिए नए 'स्वर्ण युग' की शुरुआत का संकेत  </h5>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में युद्धविराम समझौते को ''विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन'' घोषित किया और कहा कि अमेरिका ''होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के यातायात की भीड़ को कम करने में मदद करेगा।''</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''बहुत सारे सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे!'' उन्होंने कहा, ''इससे खूब आय होगी। ईरान पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू कर सकता है। हम हर तरह की आपूर्ति लेकर जाएंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए वहीं मौजूद रहेंगे कि सब कुछ ठीक से चले। मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा ही होगा।''</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की 'ट्रुथ सोशल' वेबसाइट पर दिए गए संदेश से वाशिंगटन की इस चिंता का संकेत मिलता है कि ईरान फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जिससे शांति काल में कुल तेल और प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">इजरायल ने ईरान पर हमलों को रोकने के लिए के निर्णय का समर्थन किया </h5>
<p style="text-align:justify;">इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार कहा कि वह ईरान के खिलाफ हमलों को दो सप्ताह के लिए रोकने के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले का समर्थन करते हैं लेकिन इस सीजफायर में लेबनान की लड़ाई शामिल नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक बयान में कहा, "इजरायल अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के विरुद्ध हमलों को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने के निर्णय का समर्थन करता है, बशर्ते ईरान तुरंत जलडमरूमध्य खोल दे और अमेरिका, इजरायल तथा क्षेत्र के अन्य देशों पर सभी हमले बंद कर दे।" </p>
<p style="text-align:justify;">बयान के अनुसार, इजरायल अमेरिका के उन निर्णयों का भी समर्थन करता है जिनका उद्देश्य इजरायल, अमेरिका और अरब देशों के लिए "परमाणु, मिसाइल और आतंकी खतरे" को समाप्त करना है। कार्यालय ने उल्लेख किया, "अमेरिका ने इजरायल को बताया है कि वह आगामी वार्ताओं में अमेरिका, इजरायल और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साझा किए इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।"</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में हालांकि यह भी कहा गया कि दो सप्ताह के युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं है। इससे पहले, श्री ट्रंप ने घोषणा की थी कि वह ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम के लिए सहमत हो गये हैं। अमेरिकी नेता ने कहा कि ईरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमत हो गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">बाद में, संघर्षविराम में मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने पहले कहा था कि संघर्षविराम में लेबनान भी शामिल है। ईरान ने भी दावा किया है कि उसने संघर्षविराम समझौता इसलिए किया है क्योंकि अमेरिका ने उनकी आठ शर्तें मान ली हैं. इसमें एक शर्त यह भी था कि लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को रोका जाएगा लेकिन अब इजरायल ने साफ-साफ कह दिया है कि यह संघर्षविराम लेबनान के लिए नहीं है। वहीं दूसरी ओर, ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि तेहरान शुक्रवार को इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करेगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"> ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/577811/foreign-secretary-vikram-misri-to-visit-the-us--will-hold-discussions-on-various-issues--including-defense--science--and-technology"><span class="t-red">US के दौरे पर जाएंगें विदेश सचिव विक्रम मिसरी, </span>रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित कई मुद्दों पर करेंगे चर्चा </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577923/iran-announces-ceasefire-ahead-of-deadline--araghchi-thanks-asim-munir%E2%80%94find-out-what-the-us-israel-plan-is</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> ट्रंप ने वापस लिया कनाडा को दिया निमंत्रण,  'शांति बोर्ड' में शामिल होने का था प्रस्ताव </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के ''आक्रामक'' रुख से नाराज होकर उन्हें अपने शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया। इस बीच, ट्रंप की अगुवाई वाले इस संगठन को उनके कई पश्चिमी सहयोगी देश संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड का शुरुआत में गठन हमास में इजराइल के युद्ध पर विराम लगाने पर केंद्रित था लेकिन आलोचकों को संदेह है कि यह संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं के विकल्प के तौर पर उभर सकता है। कार्नी उन देशों के नेता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568928/trump-withdraws-invitation-to-canada--the-offer-was-to-join-a--peace-board"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(18)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के ''आक्रामक'' रुख से नाराज होकर उन्हें अपने शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया। इस बीच, ट्रंप की अगुवाई वाले इस संगठन को उनके कई पश्चिमी सहयोगी देश संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड का शुरुआत में गठन हमास में इजराइल के युद्ध पर विराम लगाने पर केंद्रित था लेकिन आलोचकों को संदेह है कि यह संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं के विकल्प के तौर पर उभर सकता है। कार्नी उन देशों के नेता के रूप में तेजी से उभर रहे हैं जो अमेरिका का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने के तरीके खोज रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्नी ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान कहा, ''मध्यम शक्ति वाले देशों को मिलकर कदम उठाना होगा, क्योंकि अगर आप बातचीत की मेज पर नहीं हैं, तो आप दांव पर हैं।'' उन्होंने कहा, ''महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के दौर से गुजर रही दुनिया में, मध्यम शक्ति वाले देशों के पास एक विकल्प है- या तो वे कृपा पाने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें या फिर एक प्रभावशाली तीसरा मार्ग बनाने के लिए एकजुट हों।'' </p>
<p style="text-align:justify;">कार्नी ने कहा, ''हमें कठोर शक्तियों के उदय को इस तथ्य से नजरअंदाज नहीं होने देना चाहिए कि वैधता, ईमानदारी और नियमों की शक्ति मजबूत बनी रहेगी, यदि हम इसे मिलकर इस्तेमाल करने का फैसला करें।'' ट्रंप ने इन टिप्पणियों को लेकर दावोस में धमकी भरे लहजे में प्रतिक्रिया दी और कनाडा को दिया 'शांति बोर्ड' का निमंत्रण वापस ले लिया। ट्रंप ने कहा, ''कनाडा का अस्तित्व अमेरिका की वजह से है। </p>
<p style="text-align:justify;">मार्क, अगली बार जब आप बयान दें तो यह बात याद रखना।'' कार्नी हालांकि इसके बावजूद झुके नहीं और उन्होंने कनाडा को ''उथल-पुथल और अनिश्चितता से घिरी दुनिया के लिए एक मिसाल'' बताते हुए कहा कि बदलते दौर में रास्ता तलाश रहे विश्व के अन्य नेताओं के लिए कनाडा एक संभावित खाका पेश कर सकता है। उन्होंने क्यूबेक सिटी में कैबिनेट की बैठक से पहले दिए भाषण में कहा, ''हम यह दिखा सकते हैं कि एक दूसरा रास्ता भी संभव है और इतिहास की धारा का अधिनायकवाद तथा बहिष्कार की ओर मुड़ना कोई नियति नहीं है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, ट्रंप के इस बयान को लेकर शुक्रवार को ब्रिटेन में कई लोगों में आक्रोश देखा गया कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो देशों के सैनिक अग्रिम मोर्चे से दूर रहे थे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने ट्रंप से उनके इस बयान के लिए माफी मांगने को कहा। स्टार्मर ने कहा, ''मैं राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों को अपमानजनक और वास्तव में भयावह मानता हूं और मुझे आश्चर्य नहीं है कि इससे मारे गए या घायल हुए लोगों के परिजनों और वास्तव में पूरे देश को बहुत दुख पहुंचा है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच में स्विट्जरलैंड पर शुल्क लगाने की बात कही। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि फोन कॉल के दौरान उस देश के नेता का रवैया उन्हें ठीक नहीं लगा। हालांकि बाद में उन्होंने शुल्क कम कर दिया। इसके अलावा ट्रंप का ग्रीनलैंड पर रुख लगभग हर दिन बदलता रहता है, वह कभी बलपूर्वक कब्जा करने की धमकी देते हैं तो कभी ऐसा न करने का आश्वासन। </p>
<p style="text-align:justify;">विश्व आर्थिक मंच के केंद्र दावोस से अमेरिका लौटते हुए अलास्का की रिपब्लिकन सांसद लीसा मुर्कोव्स्की ने कहा कि उन्होंने बार-बार यह वाक्यांश सुना कि ''हम इस नयी वैश्विक व्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं।'' उन्होंने सहयोगी देशों के बीच भ्रम की स्थिति का जिक्र करते हुए संवाददाताओं से कहा, ''हो सकता है कि राष्ट्रपति के साथ टेलीफोन पर आपकी बातचीत अच्छी नहीं रही हो और अब आप पर शुल्क लगाए जाने वाले हों।'' उन्होंने कहा कि जो देश परंपरागत रूप से अमेरिका के भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार रहे हैं, वे भी अमेरिका के रुख को लेकर भ्रम की स्थिति में हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568922/shooting-in-georgia-due-to-family-dispute--4-people--including-1-indian--killed--indian-embassy-calls-the-incident-unfortunate-and-assures-assistance"><span class="t-red">जॉर्जिया में पारिवारिक विवाद में चली गोली:</span> 1 भारतीय समेत 4 लोगों की मौत, भारतीय दूतावास ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण; दिया मदद का भरोसा </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 13:19:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PAK और अफगानिस्तान के बीच अब 48 घंटे का सीजफायर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद ।</strong> पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान के साथ 48 घंटे के संघर्ष विराम पर सहमति बन गई है। यह घोषणा ऐसे समय की गई है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर संघर्ष में दोनों ओर से कई लोग मारे गए हैं। पाकिस्तानी अखबार ने विदेश कार्यालय के हवाले से कहा है, तालिबान के अनुरोध पर दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आज शाम छह बजे से अगले 48 घंटों के लिए पाकिस्तान सरकार और अफगान तालिबान शासन के बीच एक अस्थायी संघर्ष विराम का फैसला किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश कार्यालय ने कहा, "इस अवधि के दौरान,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/556337/now-48-hours-ceasefire-between-pakistan-and-afghanistan"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/सीजफायर.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद ।</strong> पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान के साथ 48 घंटे के संघर्ष विराम पर सहमति बन गई है। यह घोषणा ऐसे समय की गई है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर संघर्ष में दोनों ओर से कई लोग मारे गए हैं। पाकिस्तानी अखबार ने विदेश कार्यालय के हवाले से कहा है, तालिबान के अनुरोध पर दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आज शाम छह बजे से अगले 48 घंटों के लिए पाकिस्तान सरकार और अफगान तालिबान शासन के बीच एक अस्थायी संघर्ष विराम का फैसला किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश कार्यालय ने कहा, "इस अवधि के दौरान, दोनों पक्ष रचनात्मक बातचीत के माध्यम से इस जटिल लेकिन सुलझने योग्य मुद्दे का सकारात्मक समाधान खोजने के लिए गंभीर प्रयास करेंगे।" अफगानिस्तान सरकार की ओर से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं आई है। पाकिस्तानी की सरकारी न्यूज एजेंसी ने पूर्व में बताया था कि पाकिस्तानी सैन्य बलों ने अफ़ग़ानिस्तान के कंधार प्रांत और राजधानी काबुल में "सटीक हमले" किए। </p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया कि इन सटीक हमलों में कई विदेशी और अफगान आतंकवादी मारे गए। इससे पहले, पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि उसने अफगान तालिबान के कई हमलों को नाकाम कर दिया और दोनों देशों के बीच सीमा पर हुई झड़पों की अलग-अलग घटनाओं में 40 से अधिक हमलावरों को मार गिराया। सेना ने कहा, "हमले को विफल करते समय 15-20 अफगान तालिबान मारे गए और कई घायल हो गए।" </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/556305/jdu-releases-first-list-of-57-candidates-for-bihar-elections----no-muslim-candidate--3-strongmen-and-5-ministers-included">JDU ने बिहार चुनाव के लिए 57 उम्मीदवारों की पहली सूची की जारी... कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं, 3 दबंग और 5 मंत्री शामिल, देखें पूरी लिस्ट</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/556337/now-48-hours-ceasefire-between-pakistan-and-afghanistan</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 19:59:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजराइल के मंत्रिमंडल ने बंधकों की रिहाई के लिए समझौते की 'रूपरेखा' को  दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>काहिरा। </strong>इजराइल के मंत्रिमंडल ने गाजा पट्टी में युद्ध विराम और हमास द्वारा सभी शेष बंधकों की रिहाई की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। यह पश्चिम एशिया को अस्थिर करने वाले दो साल के विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। </p>
<p>इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में बताया गया कि मंत्रिमंडल ने बंधकों की रिहाई के लिए समझौते की ‘‘रूपरेखा’’ को मंजूरी दे दी है, हालांकि इसमें योजना के उन अन्य पहलुओं का उल्लेख नहीं किया गया है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/555665/israel-s-cabinet-approves--framework--of-deal-for-hostage-release"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/muskan-dixit-(10)6.png" alt=""></a><br /><p><strong>काहिरा। </strong>इजराइल के मंत्रिमंडल ने गाजा पट्टी में युद्ध विराम और हमास द्वारा सभी शेष बंधकों की रिहाई की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। यह पश्चिम एशिया को अस्थिर करने वाले दो साल के विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। </p>
<p>इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में बताया गया कि मंत्रिमंडल ने बंधकों की रिहाई के लिए समझौते की ‘‘रूपरेखा’’ को मंजूरी दे दी है, हालांकि इसमें योजना के उन अन्य पहलुओं का उल्लेख नहीं किया गया है जो अधिक विवादास्पद हैं। व्यापक युद्धविराम योजना में कई ऐसे प्रश्न शामिल हैं जिनके उत्तर नहीं मिले हैं जैसे कि हमास निरस्त्रीकरण करेगा या नहीं और यदि करेगा तो कैसे करेगा तथा गाजा पर शासन कौन करेगा। </p>
<p>बहरहाल, दोनों पक्ष पिछले कुछ महीनों की तुलना में उस युद्ध को समाप्त करने के करीब दिखाई दिए जिसमें हजारों फलस्तीनी मारे गए, गाजा का अधिकतर हिस्सा मलबे में बदल गया और क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अकाल की स्थिति पैदा हो गई। इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने घोषणा की कि वे एक व्यापक एवं अंतरराष्ट्रीय टीम के हिस्से के रूप में युद्धविराम समझौते का समर्थन और निगरानी करने के लिए इजराइल में लगभग 200 सैनिक भेजेंगे। </p>
<p>अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ इजराइल में एक ‘‘असैन्य-सैन्य समन्वय केंद्र’’ स्थापित करेगा जो दो साल से युद्ध से त्रस्त क्षेत्र में मानवीय सहायता के साथ-साथ रसद और सुरक्षा सहायता के प्रवाह को सुगम बनाने में मदद करेगा। युद्ध की शुरुआत सात अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए हमले से हुई जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इजराइल के जवाबी सैन्य हमले में हजारों फलस्तीनी मारे गए, गाजा तबाह हो गया और वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मच गई। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा में 67,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं और लगभग 170,000 घायल हुए हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से यह तीसरा युद्धविराम होगा। </p>
<p>पहला युद्धविराम नवंबर 2023 में हुआ था जिसमें 100 से अधिक बंधकों को फलस्तीनी कैदियों के बदले रिहा किया गया था लेकिन युद्धविराम समझौता टिक नहीं पाया। दूसरी बार युद्धविराम उसी साल जनवरी और फरवरी में हुआ था। उस समय हमास ने लगभग 2,000 फलस्तीनी कैदियों के बदले 25 इजराइली बंधकों को रिहा किया गया था और आठ अन्य के शव सौंपे थे। इजराइल की मार्च में एक अचानक बमबारी के साथ यह समझौता भी समाप्त हो गया था। इजराइली मंत्रिमंडल के शुक्रवार को मतदान करने से कुछ घंटे पहले तक इजराइली हमले जारी रहे। </p>
<p>फलस्तीनी नागरिक सुरक्षा के अनुसार, बृहस्पतिवार को उत्तरी गाजा में विस्फोट हुए तथा गाजा सिटी में एक इमारत पर हुए हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग मलबे में दब गए। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कम से कम 11 फलस्तीनियों के शवों को और 49 घायलों को अस्पताल लाया गया। </p>
<p>एक इजराइली सैन्य अधिकारी ने सैन्य दिशानिर्देशों के अनुसार नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इजराइल उन ठिकानों पर हमला कर रहा है जो उसके सैनिकों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। हमास ने इस हमले को लेकर इजराइल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि नेतन्याहू गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए मध्यस्थों के प्रयासों को ‘‘उलझाने और भ्रमित करने’’ की कोशिश कर रहे हैं। </p>
<p>हमास के प्रमुख वार्ताकार खलील अल-हय्या ने बृहस्पतिवार को एक भाषण में युद्धविराम समझौते के मुख्य तत्वों को रेखांकित किया कि इजराइल लगभग 2,000 फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा, मिस्र के साथ सीमा को खोलेगा, सहायता सामग्री के प्रवाह की अनुमति देगा और गाजा से पीछे हटेगा। खलील अल-हय्या ने बताया कि इजराइली जेलों में बंद सभी महिलाओं और बच्चों को भी रिहा किया जाएगा। हय्या ने गाजा से इजराइली सेना की वापसी की सीमा के बारे में कोई विवरण नहीं दिया। </p>
<p>अल-हय्या ने कहा कि ट्रंप प्रशासन और मध्यस्थों ने आश्वासन दिया है कि युद्ध समाप्त हो गया है और हमास एवं अन्य फलस्तीनी गुट अब आत्मनिर्णय एवं एक फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हमास के प्रमुख वार्ताकार ने कहा, ‘‘हम आज घोषणा करते हैं कि हम युद्ध और अपने लोगों के विरुद्ध आक्रमण को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंच गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/555665/israel-s-cabinet-approves--framework--of-deal-for-hostage-release</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 10:07:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>23 सितंबर : भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग में युद्धविराम की घोषणा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के बाद से चली आ रही रंजिश कई बार जंग में बदल गई। वर्ष 1965 में भी ऐसा ही हुआ, दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध हुआ और संयुक्त राष्ट्र की पहल पर 23 सितंबर के दिन युद्ध विराम हुआ। देश-दुनिया के इतिहास में 23 सितंबर की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:-</p>
<p><strong>1739 : </strong>रूस और तुर्की ने बेलग्राद शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p><strong>1857 :</strong> रूस का जंगी जहाज लेफोर्ट फिनलैंड की खाड़ी में तूफान के कारण लापता, 826 लोगों की मौत।</p>
<p><strong>1863 :</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/554106/september-23--ceasefire-declared-in-the-1965-war-between-india-and-pakistan"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/muskan-dixit22.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के बाद से चली आ रही रंजिश कई बार जंग में बदल गई। वर्ष 1965 में भी ऐसा ही हुआ, दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध हुआ और संयुक्त राष्ट्र की पहल पर 23 सितंबर के दिन युद्ध विराम हुआ। देश-दुनिया के इतिहास में 23 सितंबर की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:-</p>
<p><strong>1739 : </strong>रूस और तुर्की ने बेलग्राद शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p><strong>1857 :</strong> रूस का जंगी जहाज लेफोर्ट फिनलैंड की खाड़ी में तूफान के कारण लापता, 826 लोगों की मौत।</p>
<p><strong>1863 :</strong> राव तुला राम का निधन।</p>
<p><strong>1879 :</strong> रिचर्ड रोड्स ने सुनने में मदद करने वाली शुरूआती मशीन बनाई, इसे ऑडियोफोन नाम दिया गया।</p>
<p><strong>1929 :</strong> बाल विवाह निषेध विधेयक को मंजूरी दी गई। यह शारदा कानून के नाम से जाना गया।</p>
<p><strong>1955 : </strong>पाकिस्तान ने बगदाद की संधि पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p><strong>1965 : </strong>भारत और पाकिस्तान के बीच जंग में युद्धिवराम की घोषणा।</p>
<p><strong>1976</strong> : सोयूज-22 पृथ्वी पर वापस लौटा।</p>
<p><strong>2009: </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारतीय उपग्रह ओशन सैट-2 समेत सात उपग्रह कक्षा में स्थापित किए।<strong> </strong></p>
<p><strong>2020:</strong> भारतीय संसद ने जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान की, जिसमें पांच भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी और डोगरी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का प्रावधान था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 08:00:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानसून सत्र: लोकसभा में बिफरे अखिलेश यादव, कहा- सरकार को बताना चाहिए किसके दबाव में हुआ सीजफायर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> समाजवादी पार्टी (सपा) ने ऑपरेशन सिंदूर का राजनीति लाभ लेने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार को अवश्य बताना चाहिए कि किससे दबाव में युद्धविराम किया गया जबकि देश की सेना को बढ़त हासिल थी। </p>
<p>सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में सेना की बहादुरी और वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा, “सरकार को अवश्य बाताना चाहिए किसके दबाव में युद्धविराम हुआ। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि किस प्रकार खुफिया की विफलता रही और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। हमें उम्मीद थी कि सरकार युद्धविराम की घोषणा करेगी लेकिन अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/548042/monsoon-session--akhilesh-yadav-got-angry-in-lok-sabha--said--government-should-tell-under-whose-pressure-ceasefire-happened"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/अखिलेश-यादव-प्रेस-वार्ता.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> समाजवादी पार्टी (सपा) ने ऑपरेशन सिंदूर का राजनीति लाभ लेने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार को अवश्य बताना चाहिए कि किससे दबाव में युद्धविराम किया गया जबकि देश की सेना को बढ़त हासिल थी। </p>
<p>सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में सेना की बहादुरी और वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा, “सरकार को अवश्य बाताना चाहिए किसके दबाव में युद्धविराम हुआ। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि किस प्रकार खुफिया की विफलता रही और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। हमें उम्मीद थी कि सरकार युद्धविराम की घोषणा करेगी लेकिन अपने मित्र से इसकी घोषणा कराई। आखिर सरकार किस दबाव में काम कर रही है।” </p>
<p>अखिलेश यादव कहा कि सदन में सत्ता पक्ष के लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे जनता सम्मोहित हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं है। जनता सब समझ रही है। यह सरकार जनता की भावनाओं का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि 370 के खात्मे के बाद सरकार ने दावा किया था कि आतंकवाद खत्म हो गया लेकिन पहलगाम घटना में सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा। यह घटना खुफिया विफलता की देन है इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हो उसके सरकार क्या कदम उठा रही है,यह अवश्य बताना चाहिए। पहलगाम के बाद लाभ लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आधिकारिक हैंडल से जिस प्रकार कार्टून बनाया वह शर्मनाक है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि उनके द्वारा आपत्ति जताने के बाद उस कार्टून को सोशल मीडिया से हटाया गया। सपा नेता ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से पहलगाम पीड़त महिलाओं के साथ जिस प्रकार व्यवहार किया गया वह निंदनीय है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विदेशी लोगों ने दावा किया कि उसने इस ऑपरेशन को रुकवाया। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति पूरी तरह विफल रही है। इस ऑपरेशन के दौरान किसी भी देश ने भारत का साथ नहीं दिया। </p>
<p>उन्होंने कहा, “सरकार को अपनी सीमाओं के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि पाकिस्तान के पीछे कौन खड़ा है। सरकार की जो नीतियां और फैसले हैं वह हमारी सीमाओं के अतिक्रमण करने वाले को व्यापार के माध्यम से मदद मिली है। पाकिस्तान के अलावा दूसरे देश से लगने वाली सीमाओं से भी हमारे देश को खतरा है इसलिए इस पर विचार करना चाहिए। सरकार को अग्निवीर योजना को वापस लेने पर विचार करना चाहिए।” </p>
<p>अखिलेश यादव ने कहा, “जहां हम आत्मनिर्भर की बात कर रहे हैं वहीं हम किस पर निर्भर होते जा रहे हैं इस पर भी विचार करना चाहिए। पाकिस्तान के साथ-साथ हमें चीन से भी सावधान रहने की जरुरत है। चीन हमारी जमीन छीनने के साथ साथ बाजार भी छीन रहा है। सरकार को ऐसे फैसलै लेने चाहिए ताकि हमारा चीन के साथ कारोबर कम हो सके। अगर हमें पाकिस्तान से खतरा है तो चीन राक्षस है। हमारी लड़ाई पाकिस्तान से नहीं हुई ,यह लड़ाई चीन से लड़नी पड़ी थी। सरकार छुप नहीं सकती है।” सरकार को यह बताना चाहिए कि जिस समय भाजपा सरकार में सत्ता में आई उस देश का क्षेत्रफल क्या था और वर्तमान में क्षेत्रफल क्या है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 16:38:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> क्या ट्रंप के कहने पर  भारत ने ‘युद्ध विराम’ स्वीकार किया... सपा सांसद रमाशंकर ने सीजफायर पर सरकार को घेरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, लखनऊ।</strong> समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा यदि सही है तो इसका मतलब है कि ‘‘हमने सैन्य और कूटनीतिक फैसला लेने की स्वतंत्रता’’ खो दी। </p>
<p>सपा के सांसद रमाशंकर राजभर ने संसद के निचले सदन में ‘‘पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा’’ में भाग लेते हुए कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला हुआ और इसके 17 दिन बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547913/did-india-accept-the--ceasefire--on-trump-s-request----sp-mp-ramashankar-rajbhar-cornered-the-government-on-the-ceasefire"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/cats550.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, लखनऊ।</strong> समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा यदि सही है तो इसका मतलब है कि ‘‘हमने सैन्य और कूटनीतिक फैसला लेने की स्वतंत्रता’’ खो दी। </p>
<p>सपा के सांसद रमाशंकर राजभर ने संसद के निचले सदन में ‘‘पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा’’ में भाग लेते हुए कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला हुआ और इसके 17 दिन बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया, जबकि देश हमले के तीसरे दिन ही कार्रवाई चाहता था। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने इसी सदन में बताया कि ‘‘हमने 100 आतंकियों को मार गिराया, लेकिन इनमें (पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले) वे चार आतंकी मारे गए या नहीं, यह बात सामने नहीं आई। देश जानना चाहता है।’’ उन्होंने कहा कि आतंकवादियों की मंशा थी कि वे धर्म पूछकर लोगों को मारेंगे और पूरे देश में दंगा भड़क जाएगा, लेकिन देशभर के हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर इस नापाक मंसूबे को नाकाम कर दिया। </p>
<p>सपा सांसद ने संघर्ष विराम से संबंधित अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ट्रंप ने 26 बार कहा कि उन्होंने ‘युद्ध विराम’ कराया है। उन्होंने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा कि दोनों देशों (भारत और पाकिस्तान) को व्यापार समझौतों का हवाला देकर परमाणु युद्ध टलवाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संघर्ष विराम कराने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा यदि सही है तो इसका मतलब है कि हमने सैन्य और कूटनीतिक फैसला लेने की स्वतंत्रता खो दी।’’</p>
<p>राजभर ने सवाल किया, ‘‘क्या भारत ने अमेरिका के कहने पर ‘युद्ध विराम’ स्वीकार किया? क्या इसमें अमेरिका की कोई भूमिका थी? क्या वास्तव में (भारतीय वायुसेना के) लड़ाकू विमान गिराये गए थे। भारतीयों को यह बात अपने प्रधानमंत्री से सुनने को क्यों नहीं मिली? ट्रंप से सुनने को क्यों क्यों मिली?’’ </p>
<p>सपा सांसद ने कहा कि संघर्ष विराम कराने संबंधी ट्रंप की टिप्पणियां ‘‘हमारी सेना के पेशेवर तौर-तरीकों को कम करके आंकती हैं, ऑपरेशन सिंदूर को गलत रूप में पेश करती हैं।’’ उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में (भारत का) कोई लड़ाकू विमान गिराया गया था, तो जनता को बताया जाना चाहिए और अगर ऐसा नहीं हुआ था तो सरकार रिकॉर्ड ठीक क्यों नहीं कर रही है। </p>
<p>उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर भारत की सैन्य कार्रवाई सही थी तो दुनिया के 32 देशों में 59 सदस्यीय (सर्वदलीय) प्रतिनिधिमंडल क्यों भेजे गए और उसका क्या लाभ हासिल हुआ? उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के कुछ ही हफ्ते बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा वाशिंगटन आमंत्रित करना एक आतंक समर्थक संस्था को वैश्विक वैधता देने जैसा था और भारत सरकार राष्ट्रीय शोक के समय भी पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही। </p>
<p>सपा सांसद ने कहा कि पहलगाम में धर्म के आधार पर हत्याएं होने के बावजूद भारत न तो इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी (इस्लामिक सहयेाग संगठन) में इस झूठे विमर्श को चुनौती दे सका और न ही मुस्लिम जगत से एकजुटता हासिल कर सका, जबकि ये देश भारत के करीबी सहयोगी थे।</p>
<p>उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘पूरे विश्व की सुर्खियां ट्रंप के दावे और समर्थन से भरी रहीं, जबकि भारत एक सुंसगत, मुखर और आधिकारिक पक्ष अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पेश करने में विफल रहा।’’ </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 17:54:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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