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                <title>court - Amrit Vichar</title>
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                <title>Bareilly: रबड़ फैक्ट्री केस में श्रमिकों की एंट्री पर सरकार को ऐतराज, अब 7 मई को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विधि संवाददाता, बरेली।</strong> दशकों से विवादों और कानूनी पेचीदगियों में फंसी कभी एशिया की कभी सबसे बड़ी सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (रबड़ फैक्ट्री) की जमीन का मामला फिर गरमा गया है।</p>
<p>रबड़ फैक्ट्री की 1382.23 एकड़ बेशकीमती जमीन को वापस पाने की कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में पक्षकार बनने के लिए पूर्व श्रमिकों की ओर दी गई अर्जियों पर राज्य सरकार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके निस्तारण के लिए सिविल कोर्ट ने अब 7 मई की तारीख नियत की है। डीजीसी सिविल पुरुषोत्तम पटेल ने बताया कि अदालत में स्पष्ट किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580183/government-objects-to-workers--intervention-in-rubber-factory-case--hearing-now-scheduled-for-may-7"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/factory.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विधि संवाददाता, बरेली।</strong> दशकों से विवादों और कानूनी पेचीदगियों में फंसी कभी एशिया की कभी सबसे बड़ी सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (रबड़ फैक्ट्री) की जमीन का मामला फिर गरमा गया है।</p>
<p>रबड़ फैक्ट्री की 1382.23 एकड़ बेशकीमती जमीन को वापस पाने की कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में पक्षकार बनने के लिए पूर्व श्रमिकों की ओर दी गई अर्जियों पर राज्य सरकार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके निस्तारण के लिए सिविल कोर्ट ने अब 7 मई की तारीख नियत की है। डीजीसी सिविल पुरुषोत्तम पटेल ने बताया कि अदालत में स्पष्ट किया कि श्रमिक अपनी देनदारियों के लिए अलग से केस दायर करने को स्वतंत्र हैं, लेकिन भूमि के मालिकाना हक से जुड़े इस प्रकरण में उन्हें पक्षकार बनाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।</p>
<p>बता दें कि 1960 में प्रदेश सरकार ने रबड फैक्ट्री के लिए इस विशाल भूखंड को लीज पर दिया था, लेकिन 15 जुलाई 1999 को उत्पादन बंद होने के बाद से यह जमीन विवादों में है। लंबे समय से फैक्ट्री के मालिकान कानूनी प्रक्रिया से बच रहे थे। पिछले दिनों जब विपक्षी प्रबंधन ने सम्मन तामील नहीं किया, तो डीजीसी सिविल की अर्जी पर कोर्ट ने मुंबई के समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस जारी करने के आदेश दिए थे। </p>
<p>समाचार पत्रों में प्रकाशन के बाद अदालत ने अब प्रबंधन के खिलाफ सम्मन को तामील मान लिया है, जिससे प्रशासन के पक्ष में कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। फिलहाल, अब निगाहें 7 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट यह तय करेगा कि क्या श्रमिकों की दलीलों को इस मुकदमे का हिस्सा बनाया जाएगा या नहीं। सरकारी खेमे की आपत्ति के बाद अब कानूनी दांव-पेंच और दिलचस्प हो गए हैं। इस मामले में पक्षकार बनाने के लिए मीरगंज के वल्देव प्रसाद, फतेहगंज पश्चिमी के ओमवीर सिंह और एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं को श्रमिक बताते हुए अर्जी दी थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580183/government-objects-to-workers--intervention-in-rubber-factory-case--hearing-now-scheduled-for-may-7</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 13:07:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP: 14 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में भाजपा नेता सहित सभी आठ आरोपी बरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रामपुर, अमृत विचार। </strong>रामपुर शहर के 14 साल पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में भाजपा नेता अवधेश शर्मा सहित सभी आठ आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए हैं। जिला जज भानु देव शर्मा ने ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आठों आरोपियों को बरी कर दिया है।  </p>
<p>सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र के ज्वालानगर शिव विहार कॉलोनी में 17 मार्च 2012 को नाले में दो बाइक सहित दो युवकों के शव बरामद हुए थे। दोनों की पहचान आगापुर निवासी अजय यादव और भोट थाना क्षेत्र के मिलक बिचौला गांव निवासी जुल्फिकार के रूप में हुई थी। मृतकों के परिजनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579671/all-eight-accused--including-a-bjp-leader--acquitted-in-a-14-year-old-double-murder-case"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/adalat4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रामपुर, अमृत विचार। </strong>रामपुर शहर के 14 साल पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में भाजपा नेता अवधेश शर्मा सहित सभी आठ आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए हैं। जिला जज भानु देव शर्मा ने ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आठों आरोपियों को बरी कर दिया है।  </p>
<p>सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र के ज्वालानगर शिव विहार कॉलोनी में 17 मार्च 2012 को नाले में दो बाइक सहित दो युवकों के शव बरामद हुए थे। दोनों की पहचान आगापुर निवासी अजय यादव और भोट थाना क्षेत्र के मिलक बिचौला गांव निवासी जुल्फिकार के रूप में हुई थी। मृतकों के परिजनों की ओर से आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मुकदमे में ज्वालानगर निवासी शिव सेना जिला प्रमुख अनुराग शर्मा, भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष व सभासद के पति अवधेश शर्मा, आगापुर निवासी प्रदीप पंडित, शहजादनगर थाना क्षेत्र के रायपुर का मझरा निवासी कल्लू, मुरादाबाद जनपद के थाना मूंढापांडे अंतर्गत धतुर्रा मेघानगला गांव निवासी मुकेश, उसका भाई बंटी, जनपद बदायूं के थाना मिठवा निवासी विक्की पंडित और ज्वालानगर निवासी वासी उर्रहमान उर्फ शबलू को नामजद किया गया था। </p>
<p>पुलिस ने विवेचना के बाद सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई जिला सत्र न्यायालय में हुई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अनुराग शर्मा की मृत्यु हो गई थी। उनकी भी हत्या की गई थी, जबकि मुकदमे में बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक छत्रपाल यादव को भी बाद में तलब कर आरोपी बनाया गया था। छत्रपाल यादव ने अपने बचाव में अधिवक्ता के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया। न्यायालय ने उनका प्रार्थना पत्र स्वीकार कर चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल प्रवीण कुमार सिंह को नियुक्त किया। भाजपा नेता की ओर से अधिवक्ता सचिन अग्रवाल व अन्यों की ओर से अधिवक्ता श्याम लाल ने पैरवी की। मामले में साक्ष्यों के अभाव में जिला जज ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                            <category>रामपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कागजी आंकड़ों से नहीं बचेगा जीवन : हाईकोर्ट ने चेताया-वेंटिलेटर नहीं तो रिकॉर्ड किस काम के?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने कहा है कि यदि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं, तो वेंटिलेटरों की संख्या के संबंध में प्रस्तुत आंकड़ों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि चिकित्सा सुविधाओं के लिए कुल बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और अस्पतालों में सुविधाओं की स्थिति क्या है। मामले की अगली सुनवायी 25 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579655/paper-data-will-not-save-lives--high-court-warns-%E2%80%93-what-is-the-use-of-records-if-there-is-no-ventilator"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने कहा है कि यदि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं, तो वेंटिलेटरों की संख्या के संबंध में प्रस्तुत आंकड़ों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि चिकित्सा सुविधाओं के लिए कुल बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और अस्पतालों में सुविधाओं की स्थिति क्या है। मामले की अगली सुनवायी 25 मई को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"> यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने वी द पीपल संस्था की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। न्यायालय ने कहा कि प्रश्न यह है कि क्या कोई भी अस्पताल इस स्थिति में है कि वह शपथपत्र पर यह कह सके कि जब भी किसी मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है, तो अस्पताल उसे उचित समय के भीतर वेंटिलेटर उपलब्ध करा देगा और यदि ऐसा नहीं है, तो शपथपत्र में दिए गए आंकड़ों का कोई अर्थ नहीं रह जाता, प्रयास यह होना चाहिए कि पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वेंटिलेटर की अनुपलब्धता के कारण किसी की मृत्यु न हो। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रस्तुत आंकड़े इस पहलू पर संतोषजनक नहीं हैं, वस्तुतः ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य में यह निर्धारित करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है कि अस्पताल में वेंटिलेटर की मांग क्या है और जीवन बचाने हेतु कितने वेंटिलेटर उपलब्ध होने चाहिए, जब तक यह व्यवस्था विकसित नहीं की जाती, तब तक इस प्रकार के आंकड़े देना निरर्थक होगा। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे विषय पर पुनर्विचार करे और सिर्फ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों जैसे कि अस्पतालों में कुल बेड का 10 से 15 प्रतिशत वेंटिलेटर की उपलब्धता से संतुष्ट न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने निजी अस्पतालों व  क्लिनिकों के नियमन तथा उनकी फीस और सेवाओं की निगरानी व्यवस्था की जानकारी भी मांगी। न्यायालय ने कहा कि सरकार यह भी स्पष्ट करे कि क्या किसी कानून, नियम या अन्य किसी प्रावधान के तहत निजी अस्पतालों और  क्लिनिकों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक व्यवस्था है, विशेषकर मरीजों के उपचार के लिए वसूले जाने वाले शुल्क के संबंध में।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल केवल लखनऊ तक सीमित न रहें, बल्कि अन्य जिलों में भी विकसित किए जाएं। सरकारी डॉक्टरों के कम वेतन के कारण उनके निजी क्षेत्र में जाने की प्रवृत्ति पर भी कोर्ट ने चिंता जताई। कहा कि सरकारी डॉक्टरों को दिए जा रहे वेतन की पर्याप्तता का प्रश्न भी विचारणीय है, विशेषकर निजी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को दिए जा रहे वेतन की तुलना में। यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में कम वेतन के कारण अनेक डॉक्टर निजी अस्पतालों की ओर पलायन कर जाते हैं, जिससे आम नागरिक उनके अनुभव और सेवाओं से वंचित रह जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:24:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानपुर : जनगणना में व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतया  गोपनीय, न आरटीआई से होगी सार्वजनिक, न बनेगी अदालत का साक्ष्य </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कानपुर, अमृत विचार। </strong>जनगणना में नागरिकों द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित व गोपनीय रहती है। कानून के तहत ये जानकारी न तो सार्वजनिक की जाती है और न ही किसी न्यायालय में साक्ष्य के रूप में स्वीकार की जाती है। इसलिए नागरिक बिना किसी आशंका के सही जानकारी उपलब्ध कराएं, क्योंकि जनगणना के विश्वसनीय आंकड़े ही सरकार को वास्तविक स्थिति समझने और भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद करते हैं।</p>
<p>जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत भी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इस अधिनियम की धारा 8(1)(ज) के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578363/kanpur--personal-information-collected-during-the-census-remains-strictly-confidential--it-will-neither-be-made-public-under-the-rti-act-nor-serve-as-evidence-in-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/dm-kanpur.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कानपुर, अमृत विचार। </strong>जनगणना में नागरिकों द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित व गोपनीय रहती है। कानून के तहत ये जानकारी न तो सार्वजनिक की जाती है और न ही किसी न्यायालय में साक्ष्य के रूप में स्वीकार की जाती है। इसलिए नागरिक बिना किसी आशंका के सही जानकारी उपलब्ध कराएं, क्योंकि जनगणना के विश्वसनीय आंकड़े ही सरकार को वास्तविक स्थिति समझने और भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद करते हैं।</p>
<p>जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत भी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इस अधिनियम की धारा 8(1)(ज) के तहत किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को सार्वजनिक किए जाने से संरक्षण प्राप्त है। इस प्रकार जनगणना के दौरान दी गई व्यक्तिगत सूचनाएं न तो सार्वजनिक होती हैं, न  ही किसी व्यक्ति या अन्य विभाग को व्यक्तिगत रूप में उपलब्ध कराई जाती हैं और न ही न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रयोग की जा सकती हैं। </p>
<p>जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुसार जनगणना में एकत्र की गई व्यक्तिगत सूचनाओं को पूर्ण गोपनीयता प्रदान की गई है। अधिनियम की धारा 8 के तहत प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह जनगणना से जुड़े प्रश्नों का अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार उत्तर दे, जबकि धारा 15 के अंतर्गत जनगणना के दौरान एकत्रित अभिलेखों और अनुसूचियों में दर्ज व्यक्तिगत जानकारी का अवलोकन किसी व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता।</p>
<p>इसी धारा के अनुसार जनगणना में दी गई जानकारी को किसी सिविल अथवा आपराधिक न्यायालय में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता, अर्थात नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी किसी न्यायिक कार्यवाही में उनके विरुद्ध प्रयोग नहीं की जा सकती।</p>
<h5><strong>आप खुद अपनी सारी जानकारी दर्ज कर सकेंगे </strong></h5>
<p>जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत जनपद में 7 मई से 21 मई तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसमें नागरिक डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि  जनगणना पोर्टल https://se.census.gov.in⁠ पर नागरिक अपनी स्वगणना कर सकते है।</p>
<p>इसके बाद 22 मई से 20 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और आवश्यक आंकड़ों का संकलन करेंगे। उन्होंने बताया कि जनगणना के समय जो व्यक्ति जहां जिस स्थिति में निवासित होगा उसकी गणना उसी स्थिति में की जाएगी। सभी नागरिक सही जानकारी उपलब्ध कराएं।</p>
<h5><strong>डिजिटल प्रणाली से सुरक्षित रहेगा आंकड़ा</strong></h5>
<p>जिलाधिकारी ने बताया कि इस बार जनगणना में डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और आंकड़ों के संकलन से लेकर उनके सुरक्षित भंडारण तक पूरी प्रक्रिया सुरक्षित डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे नागरिकों की जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि वे जनगणना कार्य में सहयोग करते हुए प्रगणकों को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, क्योंकि विश्वसनीय आंकड़े ही सरकार को वास्तविक स्थिति समझने और जनहित की योजनाएं प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद करते हैं।</p>
<p><strong>आंकड़ों में जनगणना व्यवस्था कानपुर नगर</strong><br />कुल कार्मिक : 10467<br />प्रगणक : 8991<br />सुपरवाइजर : 1476<br /><strong>तहसील क्षेत्र</strong><br /> प्रगणक-सुपरवाइजर<br />सदर — 868  | 140 <br />घाटमपुर — 837 | 140<br />नरवल — 585 | 98<br />बिल्हौर — 1010 | 150<br />नगर निकाय / अन्य क्षेत्र<br />कैंटोनमेंट बोर्ड — 156 | 25<br />घाटमपुर नगर पालिका — 61 | 10<br />बिल्हौर नगर पालिका — 35 | 6<br />शिवराजपुर नगर पंचायत — 20 | 4<br />बिठूर नगर पंचायत — 21 | 4<br /><strong>नगर निगम क्षेत्र</strong><br />जोन-1 — 662 | 110<br />जोन-2 — 1149 | 192<br />जोन-3 — 1006 | 171<br />जोन-4 — 515 | 91<br />जोन-5 — 910 | 142<br />जोन-6 — 1156 | 193</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578363/kanpur--personal-information-collected-during-the-census-remains-strictly-confidential--it-will-neither-be-made-public-under-the-rti-act-nor-serve-as-evidence-in-court</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 18:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: बवाल में अवैध हथियार तस्करी के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विधि संवाददाता, बरेली।</strong> 26 सितंबर 2025 को जुमे के दिन शहर में हुए बवाल में हथियार सप्लाई से जुड़े उत्तराखंड के गैंगस्टर समी की अग्रिम जमानत अर्जी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय प्रथम राघवेन्द्र मणि ने खारिज कर दी।</p>
<p>सरकारी वकील संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि 19 फरवरी को उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने थाना बहेड़ी में रिपोर्ट दर्ज करायी कि मुखबिर से सूचना मिली कि शेरगढ़ बस अड्डे के पास एक कार से दो व्यक्ति मंडनपुर जनूबी की तरफ से आ रहे है उनके पास अवैध पिस्टल व कारतूस है। किसी को बेचने की फिराक में है। गाड़ी चला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577779/bail-plea-of-%E2%80%8B%E2%80%8Baccused-in-illegal-arms-trafficking-case-rejected-in-bawal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/bawal.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विधि संवाददाता, बरेली।</strong> 26 सितंबर 2025 को जुमे के दिन शहर में हुए बवाल में हथियार सप्लाई से जुड़े उत्तराखंड के गैंगस्टर समी की अग्रिम जमानत अर्जी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय प्रथम राघवेन्द्र मणि ने खारिज कर दी।</p>
<p>सरकारी वकील संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि 19 फरवरी को उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने थाना बहेड़ी में रिपोर्ट दर्ज करायी कि मुखबिर से सूचना मिली कि शेरगढ़ बस अड्डे के पास एक कार से दो व्यक्ति मंडनपुर जनूबी की तरफ से आ रहे है उनके पास अवैध पिस्टल व कारतूस है। किसी को बेचने की फिराक में है। गाड़ी चला रहे व्यक्ति ने अपना नाम जोखनपुर बहेड़ी निवासी तसलीम बताया। तलाशी में एक पिस्टल मैगजीन लगी बरामद हुई। </p>
<p>पास में बैठे व्यक्ति ने अपना नाम सोमू खान बताया, उसके पास एक पिस्टल बरामद हुई। आरोपियों ने बताया कि उनके गैंग का मुखिया इशरत अली है । तीन पिस्टल व कारतूस और गाड़ी से बरामद हुए। बताया कि जिस फरहत अली के घर से मौलाना तौकीर रजा खां को पुलिस ने पकड़ा था इशरत उसका सगा भाई है। बरेली में जुमा पर दंगे में भीड़ में घुसकर पुलिस पर फायरिंग करायी थी। ऊधमसिंह नगर के प्रधान गफ्फार व समी को अपने सरगना इशरत अली के कहने पर यह माल सप्लाई करने जा रहे थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 06:08:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय : स्वागत योग्य निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के सामाजिक न्याय ढांचे के केंद्र में धर्म और जाति के अंतर्संबंधों का प्रश्न अत्यंत संवेदनशील है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय दूरगामी प्रभावों वाला साबित हो सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म, जैसे इस्लाम या ईसाई धर्म को अपनाने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति का स्वत: दर्जा समाप्त हो जाता है। यह व्यवस्था मूलतः 1950 के राष्ट्रपति आदेश पर आधारित है, जिसे 1956 में संशोधित कर सिख और 1990 में बौद्ध धर्म को भी शामिल किया गया। </p>
<p>यह फैसला इस मामले में एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576545/editorial--a-welcome-decision"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/sampadkiy20.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत के सामाजिक न्याय ढांचे के केंद्र में धर्म और जाति के अंतर्संबंधों का प्रश्न अत्यंत संवेदनशील है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय दूरगामी प्रभावों वाला साबित हो सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म, जैसे इस्लाम या ईसाई धर्म को अपनाने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति का स्वत: दर्जा समाप्त हो जाता है। यह व्यवस्था मूलतः 1950 के राष्ट्रपति आदेश पर आधारित है, जिसे 1956 में संशोधित कर सिख और 1990 में बौद्ध धर्म को भी शामिल किया गया। </p>
<p>यह फैसला इस मामले में एक ओर संवैधानिक स्पष्टता लाता है, तो दूसरी ओर सामाजिक यथार्थ के कई जटिल प्रश्नों को भी उजागर करता है। स्वागत योग्य पहलू यह है कि न्यायालय ने “धर्म-आधारित आरक्षण” की अवधारणा को सीमित करते हुए यह स्पष्ट करती है कि अनुसूचित जाति की पहचान ऐतिहासिक रूप से हिंदू सामाजिक संरचना में निहित अस्पृश्यता से जुड़ी है। इस दृष्टि से यह फैसला उन वर्गों के लिए लाभकारी है, जो मानते हैं कि आरक्षण का आधार सामाजिक-ऐतिहासिक उत्पीड़न होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक या सामान्य पिछड़ापन। किंतु इसके सामाजिक और राजनीतिक फलितार्थ किंचित अधिक जटिल हैं।</p>
<p>भारत में धर्म परिवर्तन के बावजूद जातिगत पहचान का पूर्ण लोप कभी नहीं होता, यह एक स्थापित सामाजिक सत्य है। इस्लाम में पसमांदा, अशरफ, अंसारी जैसे वर्ग और ईसाई समाज में भी दलित ईसाइयों की अलग पहचान, यह दर्शाती है कि सामाजिक भेदभाव धर्म बदलने से स्वतः समाप्त नहीं होती। ऐसे में, अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होने से इन समुदायों के कमजोर वर्गों को कानूनी सुरक्षा, विशेषकर अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 और आरक्षण लाभ से वंचित होना पड़ेगा। यह उनके लिए एक वास्तविक नुकसान है, जहां तक अनुसूचित जनजाति का प्रश्न है, वे इस संदर्भ में अलग स्थिति में हैं। इनकी पहचान धर्म से नहीं, बल्कि जनजातीय-भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ी है। </p>
<p>इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद भी उनका दर्जा सामान्यतः बना रहता है। यही कारण है कि यह निर्णय अनुसूचित जाति पर तो लागू होता है, पर अनुसूचित जनजाति पर नहीं। यह एक विवेक सम्मत निर्णय है। इस फैसले से अत्याचार संबंधी मामलों में कमी नहीं आएगी, बल्कि यह संभव है कि पीड़ित वर्गों के पास कानूनी संरक्षण के सीमित विकल्प रह जाएं, जिससे न्याय तक पहुंच और कठिन हो। “घर वापसी” या पुनर्परिवर्तन के मामलों में न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि व्यक्ति को यह प्रमाणित करना होगा कि उसका पुनः धर्मांतरण वास्तविक और स्वैच्छिक है, न कि केवल आरक्षण लाभ पाने के उद्देश्य से।</p>
<p>इसके लिए सामाजिक स्वीकृति, समुदाय में पुनः समावेश और व्यावहारिक परिवर्तन जैसे मानदंड देखे जाएंगे, जो सर्वथा उचित है। यह निर्णय भारत के सामाजिक न्याय विमर्श को एक नए मोड़ पर ले जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और समाज मिलकर उन कमजोर वर्गों के लिए वैकल्पिक सुरक्षा तंत्र विकसित करें, जो धर्म परिवर्तन के बाद भी भेदभाव का सामना करते हैं। न्याय केवल विधिक परिभाषाओं से नहीं, बल्कि सामाजिक वास्तविकताओं के संतुलन से सुनिश्चित होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576545/editorial--a-welcome-decision</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 08:10:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंदू, सिख या बौद्ध छोड़कर दूसरे धर्म अपनाने पर SC दर्जा तुरंत खत्म: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से संबंधित व्यक्ति, किसी अन्य धर्म को अपनाकर एससी का दर्जा तुरंत और पूरी तरह खो देता है। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, "ऐसे किसी भी व्यक्ति को धारा तीन के अनुसार अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता। उसे संविधान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576310/%22sc-status-immediately-revoked-if-one-converts-from-hinduism--sikhism-or-buddhism-to-another-religion--supreme-court%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से संबंधित व्यक्ति, किसी अन्य धर्म को अपनाकर एससी का दर्जा तुरंत और पूरी तरह खो देता है। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, "ऐसे किसी भी व्यक्ति को धारा तीन के अनुसार अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता। उसे संविधान या संसद या राज्य विधानमंडल के किसी कानून के तहत कोई भी वैधानिक लाभ, संरक्षण या आरक्षण नहीं दिया जा सकता। यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसमें कोई अपवाद नहीं है। कोई व्यक्ति धारा तीन में उल्लेखित धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करते हुए अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता।" </p>
<p style="text-align:justify;">आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2025 को कहा था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और उसे सक्रिय रूप से मानता व पालन करता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। </p>
<p style="text-align:justify;">उच्च न्यायालय ने कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है और इसलिए ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति पर अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होते। इसने ईसाई धर्म अपनाने वाले शिकायतकर्ता के आरोपों को खारिज कर दिया, जिसने एक आपराधिक मामले में अधिनियम का हवाला दिया था। आदेश से नाखुश शिकायतकर्ता ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। </p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में स्पष्ट किया गया है कि 1950 के आदेश के खंड 3 में निर्दिष्ट किसी भी धर्म को छोड़कर दूसरा धर्म अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। अदालत ने कहा, "वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता का दावा है कि उसने ईसाई धर्म छोड़कर अपना मूल धर्म अपना लिया है या उसे मदिगा समुदाय में फिर से स्वीकार कर लिया गया है।" </p>
<p style="text-align:justify;">इसने कहा, "इसके विपरीत, सबूत यह साबित करते हैं कि याचिकाकर्ता ईसाई धर्म का पालन करता रहा और वह एक पादरी के रूप में एक दशक से अधिक समय से कार्य कर रहा है, नियमित रूप से गांव के घरों में रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित कर रहा है।" </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने उल्लेख किया कि कथित घटना के समय, वह घर पर प्रार्थना सभा आयोजित कर रहा था। पादरी सी. आनंद ने 2021 में एक आपराधिक मामला दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने ए आर रेड्डी नामक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और एससी/एसटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला दिया था। आनंद ने आरोप लगाया कि पादरी के तौर पर कर्तव्यों का पालन करते समय आंध्र प्रदेश के एक गांव में रविवार की प्रार्थना के दौरान उन पर हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि आर रेड्डी ने उन पर कई बार हमला किया और जातिसूचक अपशब्द कहकर अपमानित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576310/%22sc-status-immediately-revoked-if-one-converts-from-hinduism--sikhism-or-buddhism-to-another-religion--supreme-court%22</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 16:52:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश, 3 महीने की सीमा असंवैधानिक घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> उच्चतम न्यायालय ने कहा कि बच्चे को गोद लेना प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार का हिस्सा है और इसी के साथ उसने मंगलवार को उस कानून को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि किसी महिला को मातृत्व अवकाश तभी मिलेगा जब वह तीन महीने से कम आयु के बच्चे को कानूनी रूप से गोद ले। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, "2020 संहिता की धारा 60(4), जो दत्तक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575475/landmark-supreme-court-decision--adoptive-mothers-are-entitled-to-12-weeks-of-maternity-leave-regardless-of-the-child-s-age--the-3-month-limit-is-declared-unconstitutional"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> उच्चतम न्यायालय ने कहा कि बच्चे को गोद लेना प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार का हिस्सा है और इसी के साथ उसने मंगलवार को उस कानून को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि किसी महिला को मातृत्व अवकाश तभी मिलेगा जब वह तीन महीने से कम आयु के बच्चे को कानूनी रूप से गोद ले। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, "2020 संहिता की धारा 60(4), जो दत्तक माता को मातृत्व लाभ प्राप्त करने के लिए गोद लिए गए बच्चे की आयु तीन महीने तक सीमित करती है, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।'' शीर्ष न्यायालय ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए प्रावधान लाए। यह फैसला अधिवक्ता हम्सानंदिनी नंदूरी द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 60(4) को चुनौती दी गई थी। इस धारा के तहत दत्तक मां को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश तभी मिलता था, जब वह तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 16:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>48 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में आखिर हुआ इंसाफ... जीवित बचे एकमात्र अभियुक्त को जाना होगा जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>लखनऊ। </strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लगभग 48 साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में एकमात्र बचे जीवित अभियुक्त की अपील को खारिज कर दिया है। उक्त अभियुक्त जमानत पर है जिसे न्यायालय ने दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।</span></p>
<p>यह निर्णय न्यायमूर्ति रजनीश कुमारऔर न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने अवध नारायण व अन्य की ओर से दाखिल अपील पर पारित किया है। मामले के तीन अभियुक्तों अवध नारायण, बलवंत सिंह व जंगी उर्फ बलराम सिंह की अपील के विचाराधीन रहने के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। वर्तमान निर्णय सिर्फ एकमात्र जीवित बचे अपीलार्थी मुकुंडी सिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575404/justice-finally-served-in-a-48-year-old-double-murder-case----the-sole-surviving-accused-will-have-to-go-to-jail"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/उम्रकैद3.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>लखनऊ। </strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लगभग 48 साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में एकमात्र बचे जीवित अभियुक्त की अपील को खारिज कर दिया है। उक्त अभियुक्त जमानत पर है जिसे न्यायालय ने दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।</span></p>
<p>यह निर्णय न्यायमूर्ति रजनीश कुमारऔर न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने अवध नारायण व अन्य की ओर से दाखिल अपील पर पारित किया है। मामले के तीन अभियुक्तों अवध नारायण, बलवंत सिंह व जंगी उर्फ बलराम सिंह की अपील के विचाराधीन रहने के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। वर्तमान निर्णय सिर्फ एकमात्र जीवित बचे अपीलार्थी मुकुंडी सिंह के संबंध में पारित किया गया है। मामला अयोध्या जनपद का है। कोतवाली नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत 13 मई 1978 को तरंग टॉकीज के पास साइकिलस्टैंड के ठेके पर विवाद हुआ जिसके चलते अभियुक्तों ने प्रभाकर दुबे और राम अंजोर पांडेय की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। सत्र अदालत 8 दिसंबर 1982 को उपरोक्त चारों अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 302 व 149 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने पाया कि गवाहों केबयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अभियोजन पक्ष के केस को सही साबित करनेके लिए पर्याप्त है। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून के अनुरूप है और उसमें कोई त्रुटि नहीं है। न्यायालय ने मुकुंदी सिंह की अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:28:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोक अदालत में 4.81 लाख से अधिक वादों का निस्तारण, 65.97 करोड़ की वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>जन सामान्य को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लखनऊ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। प्रशासनिक न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान के नेतृत्व में संपन्न अदालत में कुल 4,81,112 वादों का निस्तारण करते हुए 65,97,32,278 रुपये की वसूली की गई।</p>
<p>पुराने उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। न्यायाधीश लखनऊ मलखान सिंह ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति का स्वागत किया। इस मौके पर हेल्थ कैंप और रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। इसी अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, पारिवारिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575035/over-4-81-lakh-cases-settled-in-lok-adalat--rs-65-97-crore-recovered"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(14)6.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>जन सामान्य को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लखनऊ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। प्रशासनिक न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान के नेतृत्व में संपन्न अदालत में कुल 4,81,112 वादों का निस्तारण करते हुए 65,97,32,278 रुपये की वसूली की गई।</p>
<p>पुराने उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। न्यायाधीश लखनऊ मलखान सिंह ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति का स्वागत किया। इस मौके पर हेल्थ कैंप और रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। इसी अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, पारिवारिक न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय और उपभोक्ता फोरम में लंबित 19,546 वादों का निस्तारण कर 52 करोड़ 33 लाख 11,412 रुपये वसूल किए गए।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">प्री-लिटिगेशन स्तर पर राजस्व, बैंक रिकवरी और वैवाहिक विवाद सहित 4,61,566 मामलों का निस्तारण कर 13 करोड़ 64 लाख 20,866 रुपये की वसूली की गई। इससे लखनऊ में बड़ी संख्या में वादकारियों को त्वरित न्याय और राहत मिली।</span></p>
<h3><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">108 वादों में 7.56 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित</span></strong></h3>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">उच्च न्यायालय लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 108 वादों का निस्तारण किया गया और सात करोड़ 56 लाख 17 हजार 451 रुपये का मुआवजा वादकारियों को वितरित किया गया।</span></p>
<h3><strong>1.21 करोड़ से अधिक वादों का निस्तारण</strong></h3>
<p>राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निस्तारण अभियान आयोजित हुआ। उप्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव मनु कालिया ने बताया कि प्री-लिटिगेशन श्रेणी के 1,12,94,748 वाद और न्यायालयों में लंबित 8,16,093 वादों का निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर 1,21,10,841 वादों का समाधान किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वादों के निस्तारण की अंतिम संख्या अभी प्राप्त होना शेष है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 10:51:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand: बुजुर्ग मौत प्रकरण में चालक को एक वर्ष का कारावास, पोते ने की थी न्यायालय में याचिका दायर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रुद्रपुर, अमृत विचार। </strong>बुजुर्ग महिला को रौंदने के दोषी को एक वर्ष का कठोर कारावास होने का मामला सामने आया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना निर्णय दिया। मामला वर्ष 2016 का है। पोते ने न्यायालय में याचिका दायर की थी।</p>
<p>अधिवक्ता बसंती गिरी ने बताया कि 2 अक्टूबर 2016 को फाजलपुर महरौला निवासी आनंद यादव ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी दादी लक्ष्मी वी गुरुनानक डिग्री कॉलेज प्रीत बिहार सड़क किनारे घास काट रही थी। सुबह साढ़े 10 बजे तेज रफ्तार कार ने सड़क पार करते हुए टक्कर मार दी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574723/driver-sentenced-to-one-year-in-jail-for-elderly-man-s-death--grandson-files-petition-in-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/adalat5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रुद्रपुर, अमृत विचार। </strong>बुजुर्ग महिला को रौंदने के दोषी को एक वर्ष का कठोर कारावास होने का मामला सामने आया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना निर्णय दिया। मामला वर्ष 2016 का है। पोते ने न्यायालय में याचिका दायर की थी।</p>
<p>अधिवक्ता बसंती गिरी ने बताया कि 2 अक्टूबर 2016 को फाजलपुर महरौला निवासी आनंद यादव ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी दादी लक्ष्मी वी गुरुनानक डिग्री कॉलेज प्रीत बिहार सड़क किनारे घास काट रही थी। सुबह साढ़े 10 बजे तेज रफ्तार कार ने सड़क पार करते हुए टक्कर मार दी। लापरवाही का आलम यह था कि बुजुर्ग दादी को कार चालक काफी दूर तक घसीटता हुआ ले गया और डॉक्टरों ने दादी को मृत घोषित कर दिया।</p>
<p>पड़ताल में पता चला कि उस वक्त कार का संचालन आजाद खान तराई विहार कॉलोनी फाजलपुर महरौला कर रहा था। प्रकरण की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हेमंत सिंह की अदालत में हुई। जहां वादी अधिवक्ता द्वारा अदालत के साथ कई गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद अदालत ने कार चालक आजाद खान को गैर इरादतन हत्या सहित 279 की धारा का दोषी करार देते हुए एक वर्ष का कारावास और अर्थदंड देने की सजा सुनाई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>रुद्रपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 11:01:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : पुष्पेंद्र हत्याकांड के गवाहों को मिल रही धमकी, मुकदमा किया गया दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली/भुता, अमृत विचार।</strong> थाना क्षेत्र के गांव खरदा इलाका गजनेरा में पिछले वर्ष हुए पुष्पेंद्र मर्डर कांड में हाल ही में जेल से छूटा आरोपी न्यायालय में चल रहे केस में गवाहों को गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है। पीड़ित ने आरोपीयों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।</p>
<p>पीड़ित गेंदनलाल ने बताया होली वाले दिन वह अपने पूरे परिवार के साथ घर में होली का त्योहार मना रहा था। इतने में गांव के दबंग अवधेश, नीरज और पवन घर में घुस आए और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574230/witnesses-in-the-pushpendra-murder-case-are-receiving-threats--a-case-has-been-filed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/op3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली/भुता, अमृत विचार।</strong> थाना क्षेत्र के गांव खरदा इलाका गजनेरा में पिछले वर्ष हुए पुष्पेंद्र मर्डर कांड में हाल ही में जेल से छूटा आरोपी न्यायालय में चल रहे केस में गवाहों को गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है। पीड़ित ने आरोपीयों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।</p>
<p>पीड़ित गेंदनलाल ने बताया होली वाले दिन वह अपने पूरे परिवार के साथ घर में होली का त्योहार मना रहा था। इतने में गांव के दबंग अवधेश, नीरज और पवन घर में घुस आए और उससे और बेटे गिरीश के साथ गाली गलौज व मारपीट करने लगे। घर में मौजूद परिवार की महिलाओं के साथ भी गाली गलौज करने लगे। कहने लगे न्यायालय में चल रहे पुष्पेंद्र हत्याकांड में गवाही दी तो तुम सबको भी जान से मार देंगे। पीड़ित ने इसकी शिकायत 112 डायल कर पुलिस को दी। </p>
<p>पीड़ित के भाई पुष्पेंद्र की पिछले वर्ष कस्बे में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अवधेश आरोपी है। वह इस समय जमानत पर जेल से बाहर आया हुआ है। थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार का कहना है पीड़ित के तहरीर के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है। एक आरोपी को पकड़कर शांति भंग की कार्रवाई की गई है। पुलिस अन्य आरोपी की तलाश व मामले की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574230/witnesses-in-the-pushpendra-murder-case-are-receiving-threats--a-case-has-been-filed</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 08:06:44 +0530</pubDate>
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