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                <title>auspicious time - Amrit Vichar</title>
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                <description>auspicious time RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> Vat Savitri Vrat 2026: 16 मई को वट सावित्री व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>16 मई को ज्येष्ठ की अमावस्या को वट सावित्री व्रत और शनि देव की जयंती मनाई जाएगी। सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मंदिर के ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष का पूजन कर यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा करने वाली माता सावित्री का स्मरण करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। महिलाएं वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधती हैं और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।दुबे ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को ही सूर्य और माता छाया के पुत्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581692/vat-savitri-vrat-2026--vat-savitri-vrat-on-may-16th--learn-the-auspicious-time-and-correct-puja-timings"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(59)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>16 मई को ज्येष्ठ की अमावस्या को वट सावित्री व्रत और शनि देव की जयंती मनाई जाएगी। सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मंदिर के ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष का पूजन कर यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा करने वाली माता सावित्री का स्मरण करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। महिलाएं वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधती हैं और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।दुबे ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को ही सूर्य और माता छाया के पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। </p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है। शनि देव की शांति और प्रसन्नता के लिए इस दिन विधिवत पूजन- अर्चन, मंत्र जप और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन जातकों पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती का प्रभाव है, उनके लिए यह दिन विशेष अनुष्ठान के लिए श्रेष्ठ है। इस शुभ तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान और दान का अक्षय फल प्राप्त होता है। भक्तजन हाथी बाबा मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों और शनि मंदिरों में पूजन कर लाभ उठा सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/581689/yogi-government-s-new-campaign--fighting-drug-addiction-with-the-help-of-women-and-youth"><span class="t-red">यूपी में योगी सरकार ने शुरू किया प्रदेशव्यापी विशेष अभियान, </span>नशे के खिलाफ महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/581692/vat-savitri-vrat-2026--vat-savitri-vrat-on-may-16th--learn-the-auspicious-time-and-correct-puja-timings</link>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 10:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय तृतीया : बिना मुहूर्त के शुभ कार्य करने की तिथि </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य/ </strong>अक्षय तृतीया वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग व मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। यह दिन अपने आप में ही एक शुभ दिन माना गया है। इस दिन कोई भी कार्य करना चाहे जैसे - व्यापार, विवाह, गृह प्रवेश, कोई भी नया वाहन खरीदना व सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदना इस दिन शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं और शुभ परिणाम देते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578652/akshaya-tritiya--the-auspicious-day-for-performing-good-deeds-without-a-specific-muhurat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/067.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य/ </strong>अक्षय तृतीया वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग व मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। यह दिन अपने आप में ही एक शुभ दिन माना गया है। इस दिन कोई भी कार्य करना चाहे जैसे - व्यापार, विवाह, गृह प्रवेश, कोई भी नया वाहन खरीदना व सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदना इस दिन शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं और शुभ परिणाम देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दोनों ग्रहों की सम्मिलित कृपा का फल अक्षय होता है। अक्षय तृतीया पर मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी और दान-पुण्य के कार्य भी शुभ माने गए हैं। पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार के दिन सुबह 10 बजकर 50 मिनट तक व्याप्त रहेगी। इसके उपरांत तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी। 20 अप्रैल, सोमवार के दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। उदया तिथि की गणना के अनुसार, 20 अप्रैल को तृतीया तिथि मान्य रहेगी लेकिन फिर भी अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाना ही शास्त्र सम्मत रहेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अक्षय तृतीया का महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ऐसी मान्यताएं हैं कि अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदने से जातक का भाग्योदय होता है। इसके अलावा, पवित्र नदियों में स्नान, दान, ब्राह्मण भोज, कर्म, यज्ञ और ईश्वर की उपासना जैसे उत्तम कार्य इस तिथि पर अक्षय फलदायी माने गए हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार, इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य आसानी से संपन्न हो जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्यों खास है अक्षय तृतीया</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अक्षय तृतीया को कई कारणों से साल का सबसे शुभ दिन माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया से ही हुई थी। भगवान विष्णु ने नर नारायण का अवतार भी इसी दिन लिया था। भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया पर हुआ था। इस शुभ तिथि से ही भगवान गणेश जी ने महाभारत का काव्य लिखना शुरू किया था। इतना ही नहीं, अक्षय तृतीया से ही बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं और केवल इसी दिन वृंदावन में भगवान बांके-बिहारी जी के चरणों के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि इसी दिन विष्णु जी के चरणों से मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अखा तीज के रूप में भी मनाया जाता है। कुछ लोग इसे अक्षय तीज भी कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अक्षय तृतीया को वसंत का अंत और ग्रीष्म ऋ तु का आरंभ माना जाता है। इसलिए इस दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड़, सकोरे, पंखे खड़ाऊं, छाता, सत्तू, तरबूज ककड़ी आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान किया जाता है।<br />अक्षय का अर्थ है, जो कभी क्षय न हो यानी जो सर्वदा अक्षुण्ण रहे। इस दिन किए हुए सभी शुभ कार्य हमेशा के लिए अक्षय हो जाते हैं अर्थात् जो कभी नष्ट न हो। एक कहावत भी है कि जो देता है वही पाता है अर्थात् साफ दिल व निःस्वार्थ भाव से जो हम दूसरों को देते हैं, वहीं हमें किसी न किसी रूप में कई गुना होकर पुनः मिलता है, इसलिए शास्त्रों में दान-पुण्य का बड़ा महत्व बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है। दान देने से मन में परोपकार की भावना का उदय होता है तथा आसक्ति और लोभ का दमन होता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पूजन की परंपरा है। नैवेद्य में जौ का सत्तू, ककड़ी, और चने की दाल अर्पित किया जाता है। इस दिन सत्तू आवश्य खाने तथा नई वस्तु और आभूषण पहनने की परंपरा है। अक्षय तृतीया आशा, समृद्धि और सकारात्मकता का त्योहार है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि अच्छे कर्म, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, जीवन भर के लिए आशीर्वाद बन सकते हैं। चाहे आप इसे धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य या साधारण प्रार्थना के साथ मनाएं, इसका सार एक ही है। यह इस बात का स्मरण दिलाता है कि समृद्धि केवल धन-दौलत से ही नहीं, बल्कि दया, आस्था और खुशी से भी जुड़ी होती है। शायद यही ‘अक्षय’ का सच्चा अर्थ है—वह चीज जो कभी समाप्त नहीं होती।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 05:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lucknow News: शुभमुहूर्त देख आए थे रजिस्ट्री कराने,सर्वर ही नहीं चला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">मोहनलालगंज, लखनऊ, </span>अमृत विचार: </strong>आजमगढ के शिवम त्रिवेदी पंडित से शुभ मुहूर्त पूछकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए परिवार के साथ मोहनलालगंज तहसील आए थे। किसान को पैसा दे दिया ,स्टांप भी खरीद लिए और अन्य प्रक्रिया भी पूरी कर ली। तहसील पहुंचे तो बताया गया कि सर्वर डाउन है। इंतजार करते रहे, लेकिन सर्वर नहीं चला। शुभमुहूर्त निकल जाने से मायूस होकर लौट गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">अधिवक्ता रामेंद्र सिंह,अंकित सिंह, सुरेश कुमार, अभिषेक सिंह व उद्भव मिश्रा ने बताया कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वर की समस्या अब आम हो चुकी है। इसके चलते न केवल अधिवक्ता बल्कि संपत्ति खरीदने</span></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578666/lucknow-news--came-to-register-after-seeing-the-auspicious-time--the-server-did-not-work"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(49)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">मोहनलालगंज, लखनऊ, </span>अमृत विचार: </strong>आजमगढ के शिवम त्रिवेदी पंडित से शुभ मुहूर्त पूछकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए परिवार के साथ मोहनलालगंज तहसील आए थे। किसान को पैसा दे दिया ,स्टांप भी खरीद लिए और अन्य प्रक्रिया भी पूरी कर ली। तहसील पहुंचे तो बताया गया कि सर्वर डाउन है। इंतजार करते रहे, लेकिन सर्वर नहीं चला। शुभमुहूर्त निकल जाने से मायूस होकर लौट गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">अधिवक्ता रामेंद्र सिंह,अंकित सिंह, सुरेश कुमार, अभिषेक सिंह व उद्भव मिश्रा ने बताया कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वर की समस्या अब आम हो चुकी है। इसके चलते न केवल अधिवक्ता बल्कि संपत्ति खरीदने व बेचने वाले लोग भी घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। कई बार तो देर रात तक सर्वर चालू होने का इंतजार करना पड़ता है।उन्होंने बताया कि हाल ही में सर्वर की समस्या के चलते रात करीब 12 बजे तक लोग कार्यालय में परेशान बैठे रहे। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">सोमवार को रायबरेली निवासी रामकुमार ने बताया कि वह सुबह ही तहसील पहुंच गए थे, लेकिन सर्वर न आने के कारण दिनभर बैठे रहे। उन्होंने बताया कि संपत्ति खरीदने के लिए विक्रेता के खाते में पैसा भी ट्रांसफर कर दिया, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। ऐसे में यदि आवागमन के दौरान कोई अप्रिय घटना हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। सुल्तानपुर निवासी राजेश्वर ने बताया कि विक्रेता पैसा मिलने के बाद ही हस्ताक्षर करने को तैयार था। पैसा ट्रांसफर करने के बाद जब तहसील पहुंचे तो पता चला कि सर्वर ही नहीं चल रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी।सर्वर ठप रहने के कारण तहसील परिसर के साथ ही बाहर स्थित होटलों व दुकानों पर भी खरीदारों और विक्रेताओं की भीड़ लगी रही। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578666/lucknow-news--came-to-register-after-seeing-the-auspicious-time--the-server-did-not-work</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578666/lucknow-news--came-to-register-after-seeing-the-auspicious-time--the-server-did-not-work</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 10:09:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चैत्र नवरात्रि : इस तरह करें शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना, अमावस्या का रहेगा प्रभाव, ये है शुभ योग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ गुरुवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा 19 मार्च सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होगी, इसी दिन विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्रि का शुभारंभ किया जाएगा। कलश स्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव रहने के साथ ही शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योग बन रहे हैं। यह दुर्लभ संयोग 72 साल बाद बन रहा है जो अत्यंत शुभ माना जा रहा है।</p>
<p>आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार कलश स्थापना के लिए गुरुवार को सुबह 6:52 से 8:23 बजे तक पहला शुभ मुहूर्त रहेगा, जबकि दूसरा मुहूर्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575680/here-is-how-to-perform-kalash-sthapana-during-the-auspicious-time--the-influence-of-amavasya-will-prevail--and-this-constitutes-an-auspicious-planetary-alignment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/kalash.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ गुरुवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा 19 मार्च सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होगी, इसी दिन विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्रि का शुभारंभ किया जाएगा। कलश स्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव रहने के साथ ही शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योग बन रहे हैं। यह दुर्लभ संयोग 72 साल बाद बन रहा है जो अत्यंत शुभ माना जा रहा है।</p>
<p>आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार कलश स्थापना के लिए गुरुवार को सुबह 6:52 से 8:23 बजे तक पहला शुभ मुहूर्त रहेगा, जबकि दूसरा मुहूर्त दोपहर 11:55 से 12:46 बजे तक होगा। इन शुभ समय में विधिपूर्वक कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू करना विशेष फलदायी माना गया है।</p>
<p>आचार्य प्रखर मिश्र ने बताया कि इस बार कलश स्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव रहने के साथ शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योग बन रहे हैं। करीब 72 साल बाद बन रहे इस दुर्लभ संयोग को अत्यंत शुभ माना जा रहा है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की पूजा-अर्चना की जाएगी। 26 और 27 मार्च को अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का समापन होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575680/here-is-how-to-perform-kalash-sthapana-during-the-auspicious-time--the-influence-of-amavasya-will-prevail--and-this-constitutes-an-auspicious-planetary-alignment</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 07:06:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chaitra Navratri : 19 मार्च से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि, जानिए कब करें कलश स्थापना</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण असंमजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रही है...</em></strong></p><p>चैत्र नवरात्रि को हिंदू धर्म के पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। पंचांग के अनुसार साल में कुल 4 नवरात्रि आती है जिसमें से दो चैत्र, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि पड़ती है। हर एक नवरात्रि का अपना-अपना महत्व है। ऐसे ही चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाली चैत्र नवरात्रि काफी खास है। इसके साथ ही इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575445/chaitra-navratri--chaitra-navratri-begins-on-march-19--find-out-when-to-perform-kalash-sthapana"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-04/navratri.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण असंमजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रही है...</em></strong></p><p>चैत्र नवरात्रि को हिंदू धर्म के पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। पंचांग के अनुसार साल में कुल 4 नवरात्रि आती है जिसमें से दो चैत्र, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि पड़ती है। हर एक नवरात्रि का अपना-अपना महत्व है। ऐसे ही चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाली चैत्र नवरात्रि काफी खास है। इसके साथ ही इस दिन से हिंदू कैलेंडर के मुताबिक नया साल भी आरंभ होता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करने का विधान है। </p><p>पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार को सुबह 6:52 बजे से आरंभ हो रही है, जो 20 मार्च को सुबह 4:51 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च 2026, गुरुवार से हो रहा है। पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इन मुहूर्तों में घटस्थापना करना लाभकारी माना जाता है।</p><ul><li>पहला मुहूर्त: सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक</li><li>दूसरा मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक</li><li>मीन लग्न प्रारंभ – मार्च 19, 2026 को 06:26 एएम बजे से</li><li>मीन लग्न समाप्त – मार्च 19, 2026 को 07:43 एएम बजे तक </li></ul><h5><strong>चैत्र नवरात्रि 2026 चौघड़ियां मुहूर्त </strong></h5><p>शुभ – उत्तम- 06:26 AM से 07:57 AM<br />चर – सामान्य- 10:58 AM से 12:29 PM<br />लाभ – उन्नति- 12:29 PM से 02:00 PM <br />अमृत – सर्वोत्तम- 02:00 PM से 03:30 PM<br />शुभ – उत्तम- 05:01 PM से 06:32 PM</p><h5><strong>किस वाहन में सवार होकर आएंगी मां दुर्गा?</strong></h5><p>देवी भागवत पुराण के एक श्लोक में सप्ताह के वार के हिसाब से वाहन का निर्धारण किया जाता है और हर एक वाहन से आने का संकेत अलग-अलग होता है।</p><ul><li>शशिसूर्ये गजारूढ़ा , शनिभौमे तुरंगमे । गुरुशुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता ।।</li><li>फलम् – गजे च जलदा देवी , छत्रभङ्ग तुरंगमे । नौकायां सर्व सिद्धिस्यात् दोलायां मरणं धुव्रम् ।।</li></ul><p>इस श्लोक का अर्थ है कि अगर नवरात्रि का आरंभ रविवार या सोमवार को हो, तो माता हाथी (गज) पर आती हैं। शनि या मंगलवार को घोड़ा, गुरु या शुक्रवार को डोली और बुधवार को नाव उनका वाहन होती है।</p><p><strong>फल-</strong></p><p>इस श्लोक में मां के वाहन के अनुसार फल के बार में भी बताया गया है। अगर मां हाथी पर सवार हों, तो वर्षा अधिक मात्रा में होती है। अगर घोड़े पर सवार हों, तो राजसत्ता या शासन में अशांति तथा छत्रभंग का संकेत गहोता है। इसके अलावा नाव पर सवार हों, तो सभी कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है। इसके साथ ही अगर मा डोली में सवार हों, तो मृत्यु या गंभीर अनिष्ट की संभावना निश्चित मानी जाती है।</p><p>इस साल चैत्र नवरात्रि गुरुवार से आरंभ हो रही है। इसलिए वह डोली में सवार होकर आएगी। इसे मृत्यु और गंभीर अनिष्ट की संभावना है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के साथ-साथ उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, फिर ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है... <strong>ज्योतिर्विद पं पवन तिवारी... संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान&gt;</strong></p><p><strong><em> (नोट - इस लेख में दी गई तिथियां और मुहूर्त पंचांग की गणनाओं पर आधारित हैं। स्थानीय समय और गणनाओं के अनुसार इनमें आंशिक भिन्नता हो सकती है। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए अपने पुरोहित या विशेषज्ञ, पंडित ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।)</em></strong></p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 14:40:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Holi 2026: होली पर भद्रा और खग्रास चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग, जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>इस वर्ष होली पर्व पर ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ संयोग बन रहा है। 2 मार्च को होलिका दहन के समय भद्रा का प्रभाव रहेगा, जबकि 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इसे लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य पंडित रामजी ने बताया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल रहेगा, जो ग्रहण से नौ घंटे पूर्व शुरू हो जाएगा। सूतक काल में शुभ कार्य, पर्व और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 3 मार्च को होली खेलना उचित नहीं है। ऐसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570243/holi-2026--a-rare-conjunction-of-bhadra-and-total-lunar-eclipse-on-holi--know-the-auspicious-time-for-holika-dahan"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(24)4.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>इस वर्ष होली पर्व पर ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ संयोग बन रहा है। 2 मार्च को होलिका दहन के समय भद्रा का प्रभाव रहेगा, जबकि 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इसे लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य पंडित रामजी ने बताया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल रहेगा, जो ग्रहण से नौ घंटे पूर्व शुरू हो जाएगा। सूतक काल में शुभ कार्य, पर्व और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 3 मार्च को होली खेलना उचित नहीं है। ऐसे में रंगों का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 2 मार्च को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा प्रारंभ होगी, जो 3 मार्च शाम 4:33 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा के साथ भद्रा 2 मार्च शाम 5:18 बजे से 3 मार्च सुबह 4:56 बजे तक रहेगी।</p>
<p>शास्त्रों के अनुसार भद्रा के पुच्छ भाग में होलिका दहन का विधान है। इस वर्ष होलिका दहन के लिए सर्वाधिक शुभ समय रात 12:50 से 2:02 बजे तक रहेगा। जो लोग इस समय दहन न कर सकें, वे भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह या ग्रहण समाप्ति के पश्चात दहन कर सकते हैं। इसे अत्यंत दुर्लभ संयोग माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/570243/holi-2026--a-rare-conjunction-of-bhadra-and-total-lunar-eclipse-on-holi--know-the-auspicious-time-for-holika-dahan</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:39:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसंत पंचमी पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग,  ज्योतिषाचार्य से जानें शुभ मुहूर्त और पूजन का सही समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> बसंत पंचमी का पर्व इस बार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों ने इस बार पर्व पर विशेष संयोग होना बताया है। कहा कि चतुर्ग्रही योग के संयोग में इस बार बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस साल मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र ग्रह विराजमान होने से यह संयोग बना है। </p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि बसंत पंचमी 23 जनवरी को रात 2:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी को रात 1:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568596/a-rare-auspicious-conjunction-is-forming-on-basant-panchami--learn-the-auspicious-time-and-correct-time-for-worship-from-an-astrologer"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(47)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> बसंत पंचमी का पर्व इस बार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों ने इस बार पर्व पर विशेष संयोग होना बताया है। कहा कि चतुर्ग्रही योग के संयोग में इस बार बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस साल मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र ग्रह विराजमान होने से यह संयोग बना है। </p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि बसंत पंचमी 23 जनवरी को रात 2:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी को रात 1:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी पर पूजन का शुभ मुहूर्त इस बार सुबह 6 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। पर्व पर इस साल मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र ग्रह विराजमान रहेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐेसे में 23 जनवरी को पंचमी तिथि और चतुर्ग्रही योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। जो बेहद शुभदायक माना जाता है। उन्होंने बताया कि माता शारदा के पूजन के लिये भी बसंत पंचमी का दिन विशेष शुभ रहता है। इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को पीले-मीठे चावलों का भोजन कराए जाने की मान्यता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मां शारदा और कन्याओं का पूजन करने के बाद पीले रंग के वस्त्र और आभूषण कन्याओ, निर्धनों व विप्रों को देने से परिवार में ज्ञान, कला व सुख -शान्ति की वृ्द्धि होती है। इसके अलावा इस दिन पीले फूलों से शिवलिंग की पूजा करना भी विशेष शुभ माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">वास्तुदोष का उपाय</h5>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, कई बार घर में वास्तु-दोष होने के कारण विद्यार्थी को शिक्षा में उचित परिणाम नहीं मिलते हैं। ऐसे में उन्हें बसंत पंचमी के दिन से ही पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर के दिशा में पढ़ाई करना चाहिए। इस दिशा को ध्यान एवं शांति का केंद्र भी माना जाता है। इस दिशा में पढ़ाई करने से विद्यार्थी का मन एवं मस्तिष्क एकाग्रचित रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">केसर व चंदन का टीका</h5>
<p style="text-align:justify;">इस दिन विद्यार्थी माता सरस्वती को केसर या पीले चंदन का टीका लगाएं और पीले रंग के वस्त्र जरूर अर्पित करें। साथ ही पूजा स्थल पर किताब और कलम अवश्य रखें। ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहती है और विद्यार्थी को ज्ञान, बुद्धि एवं विवेक का आशीर्वाद मिलता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568593/congress-protest-in-sultanpur-over-shankaracharya-controversy--demonstration-at-the-collectorate-premises--demanding-the-suspension-of-the-guilty-officers"><span class="t-red">शंकराचार्य विवाद को लेकर सुलतानपुर में कांग्रेस का धरना : </span>कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन, दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568596/a-rare-auspicious-conjunction-is-forming-on-basant-panchami--learn-the-auspicious-time-and-correct-time-for-worship-from-an-astrologer</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/568596/a-rare-auspicious-conjunction-is-forming-on-basant-panchami--learn-the-auspicious-time-and-correct-time-for-worship-from-an-astrologer</guid>
                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 18:09:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lohri 2026: अग्नि जलाने का शुभ समय और पूजा विधि, जानें पूरी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>लोहड़ी उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मनाया जाने वाला प्रमुख उत्सव है। यह पंजाबी और सिख समुदाय का प्रमुख त्योहार है, जो 13 जनवरी को हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग शाम को घर के बाहर पवित्र आग जलाते हैं, जिसमें मूंगफली, मक्का, रेवड़ी, गजक, तिल-गुड़ जैसी चीजें अर्पित करते हैं। इसके चारों ओर परिक्रमा कर अग्नि देवता से अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। यह त्योहार सर्दी के अंत और वसंत की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है, साथ ही नई रबी फसल की कटाई का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567480/lohri-2026--auspicious-time-to-light-the-fire-and-the-method-of-worship--know-the-complete-details"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(2)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>लोहड़ी उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मनाया जाने वाला प्रमुख उत्सव है। यह पंजाबी और सिख समुदाय का प्रमुख त्योहार है, जो 13 जनवरी को हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग शाम को घर के बाहर पवित्र आग जलाते हैं, जिसमें मूंगफली, मक्का, रेवड़ी, गजक, तिल-गुड़ जैसी चीजें अर्पित करते हैं। इसके चारों ओर परिक्रमा कर अग्नि देवता से अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। यह त्योहार सर्दी के अंत और वसंत की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है, साथ ही नई रबी फसल की कटाई का जश्न है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लोहड़ी 2026 में आग जलाने का शुभ मुहूर्त</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस साल लोहड़ी मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। शुभ मुहूर्त शाम 5:43 बजे से शुरू होकर 7:15 बजे तक रहेगा (दिल्ली/एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के अनुसार)।  <br />कई स्रोतों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल और गोधूलि मुहूर्त (लगभग 5:41 से 6:08 बजे तक) में आग जलाना सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान 7 या 11 बार परिक्रमा अवश्य करें।  <br />(नोट: स्थानीय सूर्यास्त समय के आधार पर थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से पुष्टि करें।)</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लोहड़ी की पूजा और रस्में कैसे करें</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">- शाम को घर के बाहर सूखी लकड़ियों का ढेर तैयार करें।<br />- शुभ मुहूर्त में आग प्रज्वलित करें और दुल्ला भट्टी की लोकप्रिय कथा सुनाएं (जो गरीबों की मदद करने वाले बहादुर किसान योद्धा की कहानी है)।<br />- आग में तिल, गुड़, मूंगफली, मक्का, रेवड़ी, गजक आदि अर्पित करें।<br />- आग के चारों ओर घूमते हुए लोकगीत गाएं, भांगड़ा और गिद्दा करें।<br />- परिवार और पड़ोसी मिलकर प्रसाद बांटें और आनंद मनाएं।<br />- घर में पारंपरिक व्यंजन जैसे मक्की की रोटी और सरसों का साग बनाकर खाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पर्व सामूहिक खुशी, एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।  </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>(Disclaimer: ये जानकारियां धार्मिक परंपराओं, लोक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अमृत विचार एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567480/lohri-2026--auspicious-time-to-light-the-fire-and-the-method-of-worship--know-the-complete-details</link>
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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 08:46:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Moradabad : आज से थम जाएगी शहनाई की गूंज...नए साल में फरवरी से शुरू होंगे मांगलिक कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>देवउठनी एकादशी से शुरू हुई शहनाइयों की गूंज शनिवार से थम जाएगी। शुभ मुहूर्त न होने और 11 दिसंबर को शुक्र के अस्त होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है। अब एक फरवरी को शुक्र ग्रह के उदय होने के बाद ही शहनाई बजेगी। हालांकि, कुछ लोग बिना मुहूर्त के भी वैवाहिक आयोजन कर रहे हैं।</p>
<p>विवाह कई तरह से किए जाते हैं। प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और मान्यताएं होती हैं। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार 16 संस्कारों में से एक होता है। विवाह मुहूर्त की गणना करते समय शुक्र और गुरु तारा पर विचार किया जाता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/562536/the-sound-of-the-shehnai--wedding-music--will-cease-from-today---auspicious-ceremonies-will-resume-in-february-in-the-new-year"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/shadi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>देवउठनी एकादशी से शुरू हुई शहनाइयों की गूंज शनिवार से थम जाएगी। शुभ मुहूर्त न होने और 11 दिसंबर को शुक्र के अस्त होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है। अब एक फरवरी को शुक्र ग्रह के उदय होने के बाद ही शहनाई बजेगी। हालांकि, कुछ लोग बिना मुहूर्त के भी वैवाहिक आयोजन कर रहे हैं।</p>
<p>विवाह कई तरह से किए जाते हैं। प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और मान्यताएं होती हैं। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार 16 संस्कारों में से एक होता है। विवाह मुहूर्त की गणना करते समय शुक्र और गुरु तारा पर विचार किया जाता है। बृहस्पति और शुक्र के अस्त होने पर विवाह और मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं। एक फरवरी को पुनः शुक्र का उदय होगा। चार फरवरी से 11 मार्च तक शहनाइयों की धूम रहेगी। ज्योतिषाचार्य और कथाव्यास दीपक कृष्ण उपाध्याय ने बताया कि शुभ मुहूर्त वाली शादियां शुक्रवार को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद जो वैवाहिक आयोजन होंगे, वह बिना मुहूर्त वाले हैं।</p>
<p><strong>14 मार्च से एक माह तक रहेगा खरमास</strong><br />2026 में 14 मार्च से एक माह के लिए खरमास रहेगा। इस अवधि में मांगलिक एवं शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसके बाद 15 अप्रैल से 16 मई तक शहनाई की गूंज सुनाई देगी। फिर 17 मई से अधिक मास लग जाएगा। इसमें में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।</p>
<p><strong>नए साल में विवाह के कुल 59 शुभ मुहूर्त</strong><br />पंचांग के अनुसार 2026 में पूरे साल कुल 59 विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। बीच-बीच में कई अवधि ऐसी भी होंगी, जब खरमास, अधिक माम, होलाष्टक और चातुर्मास के कारण विवाह पूरी तरह वर्जित रहेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/562536/the-sound-of-the-shehnai--wedding-music--will-cease-from-today---auspicious-ceremonies-will-resume-in-february-in-the-new-year</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/562536/the-sound-of-the-shehnai--wedding-music--will-cease-from-today---auspicious-ceremonies-will-resume-in-february-in-the-new-year</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 10:17:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Devuthani Ekadashi 2025 Vivah Muhurat:  एक को जागेंगे देव, 21 से बजेगी शहनाई...2 नवंबर को होगा तुलसी-शालिग्राम का विवाह</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी एक नवम्बर को मनाई जाएगी। इसे देवोत्थानी और प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि एकादशी 1 नवंबर को सुबह 9 : 11 बजे से 2 नवंबर को सुबह 7: 31 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजन 1 नवंबर को किया जाएगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देवोत्थानी एकादशी काे चतुर्मास का समापन हो जाएगा। क्षीर सागर में सोए भवान भगवान विष्णु के जागते हैं। भगवान विष्णु और तुलसी पूजा की जाती है। 2 नवंबर को तुलसी-शालिग्राम विवाह होगा। देवोत्थानी व्रत रखने वाली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/557924/devuthani-ekadashi-2025-marriage-muhurat--gods-will-awaken-on-the-1st--the-shehnai-will-play-from-the-21st---tulsi-and-shaligram-s-marriage-will-take-place-on-november-2nd"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/untitled-design-(45)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी एक नवम्बर को मनाई जाएगी। इसे देवोत्थानी और प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि एकादशी 1 नवंबर को सुबह 9 : 11 बजे से 2 नवंबर को सुबह 7: 31 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजन 1 नवंबर को किया जाएगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देवोत्थानी एकादशी काे चतुर्मास का समापन हो जाएगा। क्षीर सागर में सोए भवान भगवान विष्णु के जागते हैं। भगवान विष्णु और तुलसी पूजा की जाती है। 2 नवंबर को तुलसी-शालिग्राम विवाह होगा। देवोत्थानी व्रत रखने वाली महिलाएं प्रात स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन में भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करती हैं। तुलसी विवाह उत्सव भी शुरु होता हैं। अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी के दिन दान-पुण्य करने से व्यक्ति के घर में शुभता का आगमन होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देवोत्थानी एकादशी 1 नवंबर को है, लेकिन 16 नवंबर तक तुला संक्रांति दोष रहेगा। विवाह के शुभ लग्न मुहूर्त 21 नवंबर से 6 दिसंबर तक हैं। विवाह मुहूर्त में गुरु, शुक्र अस्त का भी विचार किया जाता है। 12 दिसंबर 2025 को शुक्र 52 दिन के लिए अस्त हो जाएंगे, फिर 1 फरवरी 2026 को उदय होगा। 16 दिसंबर से एक माह सूर्य की धनु संक्रान्ति के कारण खरमास शुरू हो जाएगा उसमें भी विवाह आदि कार्य नहीं होते हैं। उसके बाद के 5 फरवरी 2026 के बाद विवाह आदि कार्य होंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इस वर्ष 11 अगले वर्ष 54 विवाह मुहूर्त</h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2025 में विवाह के लिए 11 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। नवंबर महीने में 21, 22, 23, 24 ,25, 26, 30 और दिसंबर में 1, 4, 5 व 6 को विवाह का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद वर्ष 2026 में 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21फरवरी, 7, 8, 9 ,11, 12 मार्च, 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 27, 28, 29 अप्रैल, 1,3 , 5 ,6, 7, 8 , 13, 14 मई, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून और 1, 6, 7, 11, 12 जुलाई को विवाह के लिए मुहूर्त हैं। अगले वर्ष चतुर्मास के बाद 21, 24, 25, 26 नवंबर और 2, 3 , 4, 5,6 दिसंबर को विवाह मुहूर्त रहेंगे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/557877/magh-mela-2026--a-new-city-will-be-built-using-3d-mapping-technology--a-drone-survey-will-create-the-outline--and-preparations-for-the-magh-mela-will-begin-after-the-maha-kumbh"><span class="t-red">Magh Mela 2026:</span> थ्रीडी मैपिंग तकनीक से बसेगा नया शहर, ड्रोन सर्वे से बनेगी रूपरेखा, महाकुंभ के बाद माघ मेले की तैयारियां शुरु  </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/557924/devuthani-ekadashi-2025-marriage-muhurat--gods-will-awaken-on-the-1st--the-shehnai-will-play-from-the-21st---tulsi-and-shaligram-s-marriage-will-take-place-on-november-2nd</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/557924/devuthani-ekadashi-2025-marriage-muhurat--gods-will-awaken-on-the-1st--the-shehnai-will-play-from-the-21st---tulsi-and-shaligram-s-marriage-will-take-place-on-november-2nd</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 09:38:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bhai Dooj Muhurat 2025:  भइया दूज आज, 4 घंटे रहेगा पूजन का मुहूर्त, विधि विधान से करें बहने पूजा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या, अमृत विचार: </strong>हिंदू धर्म में भाई और बहन को लेकर भइया दूज का पर्व मनाया जाता है। इसमें बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए सुबह से निराजल व्रत रखती हैं जो कि पूजा मुहूर्त के समय विधिविधान पूजा करने साथ व्रत पूर्ण करती हैं। भाई बहन के इस अटूट प्रेम का त्यौहार भइया दूज आज पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस याम द्वितीया भी कहा जाता है क्योकि यह पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है, जहा बहने अपने भाइयों को सुरक्षा का धागा बांधती हैं।  </p>
<h4 style="text-align:justify;">पूजन का शुभ मुहूर्त</h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/556955/bhai-dooj-muhurat-2025--today-is-bhaiya-dooj--the-auspicious-time-for-worship-will-last-for-4-hours--sisters-should-perform-the-puja-as-per-the-rituals"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/untitled-design-(46)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या, अमृत विचार: </strong>हिंदू धर्म में भाई और बहन को लेकर भइया दूज का पर्व मनाया जाता है। इसमें बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए सुबह से निराजल व्रत रखती हैं जो कि पूजा मुहूर्त के समय विधिविधान पूजा करने साथ व्रत पूर्ण करती हैं। भाई बहन के इस अटूट प्रेम का त्यौहार भइया दूज आज पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस याम द्वितीया भी कहा जाता है क्योकि यह पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है, जहा बहने अपने भाइयों को सुरक्षा का धागा बांधती हैं।  </p>
<h4 style="text-align:justify;">पूजन का शुभ मुहूर्त</h4>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिष आचार्य करुणा निधान के मुताबिक दूज 22 अक्टूबर को रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर को रात 10:46 बजे रहेगा। 23 अक्टूबर को सुबह 5:05 से 8:55 भाई दूज पूजन का शुभ मुहूर्त है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इस तरह करें भाई दूज कर पूजा</h4>
<p style="text-align:justify;">इस दिन सबसे पहले सुबह स्नान कर बहने गोबर या मिटटी से बने दूज का पूजन करें जिसमे गणेश और याम देवता का पूजन भी शामिल हैं पूजा के बाद आप भाई को लकड़ी के पाटे पर बैठाकर हल्दी, चावल और रोली से तिलक करें इसके अलावा हाथ में कलावा बांधे और मिठाई खिलाये और भाई बहनों का आशीर्वाद प्राप्त करें। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/556800/cm-yogi-said---help-those-who-cannot-afford-diyas-and-sweets-this-diwali">सीएम योगी बोले - दिवाली पर उनकी मदद कीजिये, जो नहीं खरीद सकते दीये और मिठाई </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/556955/bhai-dooj-muhurat-2025--today-is-bhaiya-dooj--the-auspicious-time-for-worship-will-last-for-4-hours--sisters-should-perform-the-puja-as-per-the-rituals</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/556955/bhai-dooj-muhurat-2025--today-is-bhaiya-dooj--the-auspicious-time-for-worship-will-last-for-4-hours--sisters-should-perform-the-puja-as-per-the-rituals</guid>
                <pubDate>Thu, 23 Oct 2025 08:18:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : स्थिर वस्तुएं आज खरीदें, अस्थिर के लिए कल का दिन रहेगा शुभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> धनतेरस इस बार शनिवार और रविवार दो दिन मनाई जाएगी। त्रयोदशी तिथि शनिवार से शुरू होकर रविवार दोपहर 1.50 बजे तक रहेगी। आचार्य घनश्याम जोशी ने बताया कि शनिवार को अस्थिर वस्तुएं जैसे लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति, झाड़ू आदि सामान खरीदना शुभ माना जाएगा। वहीं रविवार को कार, बाइक आदि को खरीदना शुभ रहेगा। उन्होंने बताया कि दिवाली 20 को ही मनाई ही जाएगी। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त रात 7 से 9 बजे तक रहेगा।</p>
<p><strong>गणेश और लक्ष्मी का किया पूजन</strong><br />दीपावली के पावन अवसर पर शुक्रवार को श्री अग्रवाल सभा कल्याण सोसाइटी (रजि.) द्वारा प्रतिवर्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/556588/buy-stable-things-today--tomorrow-will-be-an-auspicious-day-for-unstable-things"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/dhan4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> धनतेरस इस बार शनिवार और रविवार दो दिन मनाई जाएगी। त्रयोदशी तिथि शनिवार से शुरू होकर रविवार दोपहर 1.50 बजे तक रहेगी। आचार्य घनश्याम जोशी ने बताया कि शनिवार को अस्थिर वस्तुएं जैसे लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति, झाड़ू आदि सामान खरीदना शुभ माना जाएगा। वहीं रविवार को कार, बाइक आदि को खरीदना शुभ रहेगा। उन्होंने बताया कि दिवाली 20 को ही मनाई ही जाएगी। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त रात 7 से 9 बजे तक रहेगा।</p>
<p><strong>गणेश और लक्ष्मी का किया पूजन</strong><br />दीपावली के पावन अवसर पर शुक्रवार को श्री अग्रवाल सभा कल्याण सोसाइटी (रजि.) द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री गणेश एवं मां लक्ष्मी का पूजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। पूजन कार्यक्रम सुबह शांति कुटीर धर्मशाला, पुरानी घी की मंडी, आलमगिरीगंज में संपन्न हुआ।</p>
<p>सभा के अध्यक्ष उमानाथ अग्रवाल ने बताया कि भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आराधना कर देश, समाज और अग्र बंधुओं के सुख, शांति व समृद्धि की कामना की गई। इस अवसर पर सभा के संरक्षक एडवोकेट अजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि पूजन के साथ अग्रकुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन का भी पूजन कर उनके आदर्शों का स्मरण किया गया। मीडिया प्रभारी एडवोकेट हर्ष कुमार अग्रवाल ने कहा कि अग्र समाज सदैव उत्सवधर्मी रहा है और दीपावली का पर्व समाज को एकता व सहयोग का संदेश देता है।</p>
<p> उन्होंने बताया कि अग्र समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर परंपरा को जीवंत बनाए रखा। कार्यक्रम में महामंत्री एडवोकेट दिनेश कुमार अग्रवाल, कोषाध्यक्ष दिनेश अग्रवाल (जल निगम, अनिल अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, आलोक अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, कमल गोयल सहित अनेक अग्रबंधु मौजूद रहे। अंत में सामूहिक आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और सभी ने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 07:08:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
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