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                <title>Historical Facts - Amrit Vichar</title>
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                <description>Historical Facts RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वंदे मातरम् पर राज्य सभा में बहस : विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा में विपक्ष ने बुधवार को राष्ट्र गीत वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित चर्चा के दूसरे दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर इस बहस के जरिए इतिहास को तोड़ मरोड़ कर राजनीति करने का आरोप लगाया जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा के इस गीत को राष्ट्र गीत के रूप में अपनाते समय कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के चलते इसके कई अंतरों को छोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे दिन चर्चा शुरू करते हुए भाजपा के नरहरि अमीन ने कहा कि स्वदेशी और वंदे मातरम् हमारे स्वाधीनता सेनानियों की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563079/rajya-sabha-debate-on-vande-mataram--opposition-accuses-ruling-party-of-distorting-historical-facts"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/cats31.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा में विपक्ष ने बुधवार को राष्ट्र गीत वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित चर्चा के दूसरे दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर इस बहस के जरिए इतिहास को तोड़ मरोड़ कर राजनीति करने का आरोप लगाया जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा के इस गीत को राष्ट्र गीत के रूप में अपनाते समय कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के चलते इसके कई अंतरों को छोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे दिन चर्चा शुरू करते हुए भाजपा के नरहरि अमीन ने कहा कि स्वदेशी और वंदे मातरम् हमारे स्वाधीनता सेनानियों की रणनीति और प्रेरणा के स्रोत थे। कांग्रेस के जयराम रमेश ने वंदे मातरम को छोटा करने में पं. जवाहरलाल नेहरू की भूमिका को लेकर लगाये जाने वाले आक्षेपों को खरिज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने 1937 से 1940 के बीच डॉ. राजेंद्र प्रसाद, गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर, आचार्य जे बी कृपलानी और सी राजगोपाला चारी और सुभाषचंद्र बोष जैसे कांग्रेस के तत्कालीन नेताओं के बीच ऋषि बंकिंमचंद्र चटोपाध्याय द्वारा लिखे गये इस गीत पर पत्रों के आदान प्रदान कर जिक्र करते हुए कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में कांग्रेस की कार्य समिति ने सर्वसम्मति से इस गीत के दो पदों को अपनाये और गाये जाने के प्रस्ताव को सर्व सम्मति से स्वीकार किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">रमेश ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की उस बैठक में महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोष, सरदार बल्लभ भाई पटेल, पं. नेहरू, गोविंदबल्लभ पंत, मौलाना आजाद और आचार्य कृपलानी जैसे नेताओं की उपस्थिति में वंदेमातरम का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। उन्होंने सत्ता पक्ष पर इस बहस के माध्यम से राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग " नेहरू का ही नहीं गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का भी अपमान कर रहे हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस सदस्य ने कहा कि जब आप बंकिमचंद्र चटर्जी की बात करते हैं तो उस बंकिमचंद्र को याद करे जो अध्यात्म और विज्ञान में समनवय करता था जिसने 1876 में महेंद्र लाल सरकार के साथ मिल कर कलकत्त में इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस नाम की संस्था बनायी भी और इसमें अध्ययन करने वाले सीवी रमण को भौतिक विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''यह बहस नेहरू को बदनाम करने के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके लिए जो कुछ भी बोला जाता है उसका इतिहास में कोई आधार नहीं है।" भाकपा के संदोष कुमार पी ने भी कहा कि भाजपा पर गांधी और नेहरू का खौफ छाया रहता है और वह वंदे मातरम् के नाम पर लोगों को बांटना चाहती है। बीजू जनता दल के देवाशीष सामंतराय ने आजादी के आंदोलन में इस गीत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों ही हमारे राष्ट्र गीत और राष्ट्रगान है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास को कोई बदल नहीं सकता। भाजपा की रमिलाबेन विचारभाई बारा ने गुजराती में अपने संभाषण में स्वाधीनता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा और उनकी पत्नी भानुमती की अस्थियों को आधी शताब्दी के बाद 2003 में जिनेवा से गुजरात में लाग कर उनकी इच्छा पूरी किये जाने का उल्लेख किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बीजू जनता दल के मानस रंजन मंगराज ने वंदे मातरम् को एकता का गीत बताया। जेएमएम की महुआ माजी ने सत्ता पक्ष पर 1937 में कांग्रेस कार्य समिति के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष उस समय के महान नेताओं पर आज दोषारोपण कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस रीताब्रत बनर्जी ने अपना वक्तव्य बांग्ला में दिया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 17:16:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बरेली जंक्शन 30 साल पहले कैसा दिखता था...ये तस्वीरें ताजा कर देंगी पुरानी यादें</title>
                                    <description><![CDATA[समर सीजन में अपने बच्चों के साथ उनकी नानी-दादी के घर जाने के लिए ट्रेन के सफर का प्लान कर रहे हैं क्या ? बिल्कुल उसी तरह जब आपके मम्मी डैडी बचपन में आपको ट्रेन के रोमांचकारी सफर पर लेकर जाते थे। वो भी क्या दिन थे, स्टीम इंजन की छुक-छुक वाली आवाज और बरेली जंक्शन पर पेड़ की छांव में ट्रेन का इंतजार। क्या आपके जेहन में बरेली जंक्शन की वो पुरानी तस्वीरें थोड़ी धुंधली पड़ चुकी हैं? या फिर आप जानना चाहते हैं बरेली जंक्शन से जुड़े कुछ ऐतिहासिक तथ्य? अगर हां...तो ये आर्टिकल आपके लिए होने वाला है बेहद खास।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533631/bareilly-junction-will-make-the-old-memories-fresh-looks-like"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/बरेली-जंक्शन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>समर सीजन में अपने बच्चों के साथ उनकी नानी-दादी के घर जाने के लिए ट्रेन के सफर का प्लान कर रहे हैं क्या ? बिल्कुल उसी तरह जब आपके मम्मी डैडी बचपन में आपको ट्रेन के रोमांचकारी सफर पर लेकर जाते थे। वो भी क्या दिन थे, स्टीम इंजन की छुक-छुक वाली आवाज और बरेली जंक्शन पर पेड़ की छांव में ट्रेन का इंतजार। क्या आपके जेहन में बरेली जंक्शन की वो पुरानी तस्वीरें थोड़ी धुंधली पड़ चुकी हैं? या फिर आप जानना चाहते हैं बरेली जंक्शन से जुड़े कुछ ऐतिहासिक तथ्य? अगर हां...तो ये आर्टिकल आपके लिए होने वाला है बेहद खास।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-04/%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8.jpg" alt="बरेली जंक्शन"></img>
2010 से पहले कुछ ऐसी दिखती थी बरेली जंक्शन की बाहरी इमारत

<p><br /><strong>2010 में बना था मौजूदा इमारत का बाहरी हिस्सा</strong><br />बरेली जंक्शन आज कैसा दिखता है ये तो ज्यादातर युवाओं को पता ही होगा। मगर ये तस्वीर आज की टीन एज पीढ़ी को शायद ही याद हो। क्योंकि साल 2009 और 2010 के बीच जंक्शन के फसाड ( इमारत का बाहरी हिस्सा)  में बदलाव कर दिया गया था। लिहाजा बीते करीब 15 साल से पीले टाइल्स लगी फसाड ही बरेली जंक्शन की पहचान है। जल्द ही बरेली जंक्शन के फसाड में एक बार फिर बदलाव की तैयारी है। लिहाजा ये इमारत भी आने वाले वक्त में इतिहास के पन्नों पर ही दर्ज हो जाएगी।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-04/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8.jpg" alt="स्टीम इंजन"></img>
1993 में बरेली जंक्शन से गुजरता स्टीम इंजन (सौजन्य nigel tout)

<p><br /><strong>1994 मार्च में आखिरी बार चला था स्टीम इंजन</strong><br />एक जमाना था जब बरेली जंक्शन पर स्टीम इंजन की छुक-छुक गूंजती थी। उत्तर रेलवे की ब्रॉड गेज लाइन और पूर्वोत्तर रेलवे की मीटर गेज लाइन पर स्टीम इंजन से ट्रेनें फर्राटा भरती थीं। जिनमें रेलवे के अष्टभुजी, अर्जुन जैसे लोकोमोटिव यानी स्टीम इंजन शामिल थे। बरेली जंक्शन के रिकॉर्ड्स के मुताबिक 1994 मार्च में ब्रॉडगेज लाइन पर आखिरी बार स्टीम इंजन ने रफ्तार भरी। WP-9999 स्टीम लोको मोटिव को आखिरी बार सरताज हुसैन नाम के लोको पायलट दिल्ली तक लेकर गए। </p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-04/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%9C.jpg" alt="जंक्शन मीटर गेज"></img>
1993 में बरेली जंक्शन पर मीटरगेज लाइन का प्लेटफार्म और प्लेटफार्म पर यात्री (सौजन्य nigel tout)

<p><br /><strong>1873 में रखी गई थी बरेली जंक्शन की नीव</strong><br />ब्रिटिश सरकार के लिए सैन्य गतविधियों के लिहाज से बरेली जंक्शन एक प्रमुख केंद्र था। लिहाजा 1953 में भारत की पहली ट्रेन चलने के महज 20 साल बाद और 1857 की क्रांति के 16 साल बाद 1873 में बरेली जंक्शन की नींव रखी गई। ब्रिटिश काल में ये स्टेशन ओध रेलवे और बाद में ओध एवं रूहेलखंड रेलवे के अधीन था। तब स्टेशन को अवध (लखनऊ) और रूहेलखंड (बरेली-रुहेलखंड) क्षेत्र को जोड़ने के लिए बनाया गया था। बाद में ईस्ट इंडियन रेलवे से जुड़ा और आजादी के बाद से इसका संचालन उत्तर रेलवे का मुरादाबाद मंडल करता है।</p>
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1993 में बरेली जंक्शन से गुजरता अष्टभुजी लोकोमोटिव (सौजन्य-nigeltout)

<p><strong>मुरादाबाद तक हुआ करती थी सिंगल लाइन</strong></p>
<p>ब्रिटिश शासन काल के दौरान में ही बरेली जंक्शन व्यापारिक केंद्र बन गया। खासकर अनाज, लकड़ी, कपास और शक्कर के परिवहन ट्रेनों के जरिए किया जाने लगा। माल ढुलाई के अलावा कई प्रमुख पैसेंजर और मेल ट्रेनें बरेली जंक्शन से चलती थीं। जिसमें  बरेली-अलीगढ़-बरेली पैसेंजर, बरेली सहारनपुर पैसेंजर, बरेली दिल्ली पैसेंजर और लखनऊ व दिल्ली के लिए मेल ट्रेनें चला करती थीं। 1994 में बरेली से मुरादाबाद तक सिंगल लाइन को डबल लाइन में तब्दील कर दिया गया।  </p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-04/%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%A1.jpg" alt="लोको शेड"></img>
1993 में बरेली जंक्शन का लोको शेड दिखता था ऐसा ( सौजन्य -nigel tout)

<p> </p>
<p><strong>इसलिए कहा जाता है स्टेशन को जंक्शन</strong></p>
<p>बरेली स्टेशन को जंक्शन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां एक से ज्यादा रेलवे लाइनें आपस में मिलती हैं। जैसे बरेली-अलीगढ़ और लखनऊ-बरेली-दिल्ली। आज 200 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन बरेली जंक्शन से होता है। जिसमें भारत के महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, असम जैसे राज्यों के अलावा दक्षिण भारत तक ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Apr 2025 09:00:54 +0530</pubDate>
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