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                <title>petition dismissed - Amrit Vichar</title>
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                <description>petition dismissed RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश की मांग, अखिल भारतीय शिरोमणि सिंह सभा की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> उच्चतम न्यायालय ने सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश संबंधी याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। यह जयंती प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की एक पीठ ने कहा कि वह अखिल भारतीय शिरोमणि सिंह सभा की याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने देश में ''सार्वजनिक या राजपत्रित अवकाश घोषित करने के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी करने'' की भी मांग की थी। पीठ ने कहा, ''खारिज। विस्तृत आदेश बाद में आएगा।'' याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575468/supreme-court-rejects-all-india-shiromani-singh-sabha-s-plea-for-a-national-holiday-on-guru-gobind-singh-s-birth-anniversary"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(31)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> उच्चतम न्यायालय ने सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश संबंधी याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। यह जयंती प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की एक पीठ ने कहा कि वह अखिल भारतीय शिरोमणि सिंह सभा की याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने देश में ''सार्वजनिक या राजपत्रित अवकाश घोषित करने के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी करने'' की भी मांग की थी। पीठ ने कहा, ''खारिज। विस्तृत आदेश बाद में आएगा।'' याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि वर्तमान में कोई नीति नहीं है और यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सार्वजनिक अवकाश कैसे तय किया जाएगा। याचिका में केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह "दसवें सिख गुरु 'गुरु गोविंद सिंह जी' के प्रकाश पर्व को राजपत्रित/सार्वजनिक अवकाश घोषित करे, जो पूरे भारत में मनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में कहा गया, ''भारत में राजपत्रित अवकाश घोषित करने के संबंध में किसी भी प्राधिकारी के कोई मार्गदर्शन सिद्धांत न होने के कारण, सरकार में बैठे राजनीतिक समूहों के कहने पर अधिकारी अपनी इच्छा और पसंद के अनुसार अवकाश घोषित करते हैं, जो विशेष जनता के एक वर्ग को संतुष्ट करने के राजनीतिक उद्देश्य के लिए होता है।" </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 16:23:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court : मासिक धर्म पर विशेष अवकाश की मांग वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने नीति बनाने का दिया सुझाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सभी संस्थानों में महिलाओं के लिए सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की मांग करने संबंधी रिट याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके मासिक धर्म अवकाश नीति बनाने के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करे। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने चिंता व्यक्त की कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह नियोक्ताओं को महिलाओं को काम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574849/petition-seeking-special-menstrual-leave-dismissed--supreme-court-suggests-framing-a-policy"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-05/सुप्रीम-कोर्ट-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सभी संस्थानों में महिलाओं के लिए सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की मांग करने संबंधी रिट याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके मासिक धर्म अवकाश नीति बनाने के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करे। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने चिंता व्यक्त की कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह नियोक्ताओं को महिलाओं को काम पर रखने से हतोत्साहित कर सकता है, जिससे कार्यबल में उनकी भागीदारी पर बुरा असर पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता चाहता था कि शीर्ष न्यायालय यह सुनिश्चित करे कि महिलाओं को, चाहे वे छात्राएं हों या कामकाजी पेशेवर, मासिक धर्म के दौरान छुट्टी दी जाए। पीठ ने याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की स्थिति पर भी सवाल उठाया और इस बात की ओर इशारा किया कि किसी भी महिला ने खुद अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574849/petition-seeking-special-menstrual-leave-dismissed--supreme-court-suggests-framing-a-policy</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 16:27:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> सपोर्ट में आया पूरा बॉलीवुड ....तिहाड़ में बंद राजपाल यादव की पत्नी का आया बयान, सभी ने दिया साथ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने बुधवार को कहा कि 'चेक बाउंस' मामलों में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद फिल्म उद्योग के कई लोग हास्य कलाकार के समर्थन में आगे आए हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा और समय देने की याचिका खारिज किए जाने के बाद राजपाल यादव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। अभिनेता को करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। यादव को 'मुझसे शादी करोगी', 'वक्त', 'फिर हेरा फेरी', 'पार्टनर', 'भूल भुलैया', 'हंगामा' और 'चुप चुप के' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570859/film-stars-extended-a-helping-hand----rajpal-yadav-s-wife--who-is-in-tihar-jail--issued-a-statement--and-everyone-expressed-support"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(30)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने बुधवार को कहा कि 'चेक बाउंस' मामलों में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद फिल्म उद्योग के कई लोग हास्य कलाकार के समर्थन में आगे आए हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा और समय देने की याचिका खारिज किए जाने के बाद राजपाल यादव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। अभिनेता को करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। यादव को 'मुझसे शादी करोगी', 'वक्त', 'फिर हेरा फेरी', 'पार्टनर', 'भूल भुलैया', 'हंगामा' और 'चुप चुप के' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म उद्योग से अभिनेता सोनू सूद, गुरमीत चौधरी और संगीतकार राव इंदरजीत यादव सहित कई लोगों ने परिवार को आर्थिक सहायता की पेशकश की तथा अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील की। राधा यादव ने कहा, "सब लोग उनके साथ खड़े हैं। फिल्म उद्योग ने बहुत सहयोग किया है। जो भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, हम सबका बहुत धन्यवाद करते हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">राजपाल यादव के 25 वर्षों से मैनेजर रहे गोल्डी जैन ने कहा कि प्रमुख अभिनेताओं से लेकर निर्देशकों और निर्माताओं तक, कई लोगों ने सहायता की पेशकश की है। मीडिया में आई एक खबर में दावा किया गया कि अभिनेता सलमान खान, अजय देवगन, वरुण धवन और फिल्म निर्माता डेविड धवन ने भी आर्थिक मदद की पेशकश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैन ने कहा, "लोगों ने मदद के लिए पहल की है। सभी ने मदद का वादा किया है, इसका मतलब सिर्फ आर्थिक मदद नहीं है। यह सही है कि (सलमान, अजय, वरुण और डेविड धवन) इन लोगों ने फोन किया है। किस रूप में और कैसे मदद करेंगे, यह अभी तय होना बाकी है। वे सभी राजपाल भाई के शुभचिंतक हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "जमानत पर सुनवाई कल है और अगर सब ठीक रहा तो हम संवाददाता सम्मेलन करेंगे।" यादव ने वर्ष 2010 में अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'अता पता लापता' के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्मसमर्पण से पहले यादव ने 'बॉलीवुड हंगामा' से कहा था कि उनके पास बकाया राशि चुकाने के लिए पैसे या कोई अन्य साधन नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने प्रसिद्ध सहकर्मियों से मदद मांगी, तो अभिनेता ने कहा था, "इंडस्ट्री में हर कोई अपने लिए है।" </p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में कहा कि यादव को उनके खिलाफ दर्ज सातों मामलों में प्रत्येक में 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना है और निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले जमा की गई राशि शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी की जाए। अभिनेता सोनू सूद उद्योग जगत से सबसे पहले यादव के समर्थन में आगे आए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वह राजपाल यादव को अपनी एक फिल्म में लेंगे और इसके लिए अग्रिम भुगतान के रूप में 'साइनिंग अमाउंट' दे रहे हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के स्नातक यादव कई लोकप्रिय बॉलीवुड कॉमेडी फिल्मों का अहम हिस्सा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूद ने अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील करते हुए कहा, "भविष्य के काम के बदले समायोजित होने वाला एक छोटा-सा 'साइनिंग अमाउंट' कोई दान नहीं, बल्कि सम्मान है। जब हममें से कोई कठिन दौर से गुजर रहा हो... यही तरीका है दिखाने का कि हम सिर्फ एक इंडस्ट्री नहीं, उससे बढ़कर हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/570392/taskmaster-is-bhansali-----madhuri-dixit-spoke-about-her-work-experience--describing-devdas-as-visually-rich-and-a-classic"><span class="t-red">टास्कमास्टर है भंसाली.... </span>माधुरी दीक्षित ने काम करने के अनुभव पर की बात, देवदास को बताया विजुअली रिच और क्लासिक्स</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/570859/film-stars-extended-a-helping-hand----rajpal-yadav-s-wife--who-is-in-tihar-jail--issued-a-statement--and-everyone-expressed-support</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:43:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इरफान सोलंकी को हाईकोर्ट से लगा तगड़ा झटका... याचिका खारिज, गैंगस्टर मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही रद्द करने की थी मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराजः </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज मामले की कार्यवाही, चार्जशीट, संज्ञान आदेश, डिस्चार्ज आवेदन खारिज करने के आदेश तथा आरोप तय किए जाने की कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने उक्त आदेश पारित करते हुए कहा कि जब ट्रायल शुरू हो चुका है और गवाहों के बयान दर्ज हो रहे हैं, तब इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता है। कोर्ट के समक्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569532/irfan-solanki-receives-a-major-blow-from-the-high-court----petition-dismissed--seeking-cancellation-of-trial-court-proceedings-in-gangster-case"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(1)15.png" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराजः </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज मामले की कार्यवाही, चार्जशीट, संज्ञान आदेश, डिस्चार्ज आवेदन खारिज करने के आदेश तथा आरोप तय किए जाने की कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने उक्त आदेश पारित करते हुए कहा कि जब ट्रायल शुरू हो चुका है और गवाहों के बयान दर्ज हो रहे हैं, तब इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता है। कोर्ट के समक्ष यह निर्विवाद था कि विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए), कानपुर नगर में चल रहे ट्रायल में अभियोजन के एक गवाह का बयान दर्ज हो चुका है, जबकि दूसरे गवाह का बयान शेष है।</p>
<p>ऐसे में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोप तय होने और ट्रायल आरंभ होने के बाद डिस्चार्ज या समन आदेश को चुनौती देना विलंबित और असंगत है। मामले के अनुसार 26 दिसंबर 2022 को जाजमऊ थाने में दर्ज एफआईआर में इरफान सोलंकी को कथित गैंग लीडर बताते हुए भूमि कब्जा, आगजनी, धमकी और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस द्वारा तैयार गैंग चार्ट को सक्षम अधिकारियों-अपर पुलिस आयुक्त, पुलिस आयुक्त से अनुमोदन प्राप्त हुआ था।</p>
<p>कोर्ट ने माना कि अनुमोदन स्वतंत्र विचार के बाद दिया गया और इसे यांत्रिक या पूर्व-प्रारूपित नहीं कहा जा सकता। इरफान सोलंकी की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाया गया है। गैंग चार्ट में नियमों का उल्लंघन है और संबंधित मूल मामले में उनकी सजा के विरुद्ध अपील लंबित है। इस आधार पर कार्यवाही को ‘प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताया गया। हालांकि राज्य सरकार ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि ट्रायल उन्नत चरण में है। आरोप तय हो चुके हैं और अब हस्तक्षेप न्यायहित में नहीं होगा, साथ ही गैंग चार्ट के अनुमोदन में विधि का पालन किया गया है। मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देकर कहा कि धारा 482 की अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग अत्यंत अपवादस्वरूप मामलों में ही किया जा सकता है।</p>
<p>राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप मात्र इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का आधार नहीं बनता है। आरोप तय होने के बाद डिस्चार्ज का प्रश्न नहीं उठता। ट्रायल के अंत में साक्ष्य के आधार पर ही दोषसिद्धि या बरी होने का निर्णय संभव है। अंत में इन सभी पहलुओं पर विचार करते हुए कोर्ट ने पाया कि याचिका चार-स्तरीय कसौटी पर खरी नहीं उतरती और ट्रायल में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है। परिणामस्वरूप बीएनएसएस की धारा 528 के तहत दाखिल याचिका खारिज कर दी गई और निचली अदालत में मुकदमा जारी रखने का निर्देश दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/569532/irfan-solanki-receives-a-major-blow-from-the-high-court----petition-dismissed--seeking-cancellation-of-trial-court-proceedings-in-gangster-case</link>
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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 08:22:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP NEET-PG Exam : यूपी नीट-पीजी परीक्षा से जुड़े NBEMS के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>नीट-पीजी 2025 की परीक्षाओं में 800 अंकों में से माइनस 40 अंक पाने वाले एससी/एसटी/ओबीसी विद्यार्थियों को काउंसलिंग में बैठने की अनुमति देने के राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) के निर्णय को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को खारिज कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत को जब यह बताया गया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर दाखिल एक जनहित याचिका यह कहते हुए पहले ही खारिज कर दी है कि यह एक नीतिगत मामला है और अदालत का इससे कोई लेना देना नहीं है, तो मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569181/up-neet-pg-exam-petition-challenging-the-decision-of-nbems-related"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>नीट-पीजी 2025 की परीक्षाओं में 800 अंकों में से माइनस 40 अंक पाने वाले एससी/एसटी/ओबीसी विद्यार्थियों को काउंसलिंग में बैठने की अनुमति देने के राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) के निर्णय को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को खारिज कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत को जब यह बताया गया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर दाखिल एक जनहित याचिका यह कहते हुए पहले ही खारिज कर दी है कि यह एक नीतिगत मामला है और अदालत का इससे कोई लेना देना नहीं है, तो मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ द्वारा यह याचिका खारिज कर दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत को यह भी बताया गया कि इस मामले में एक दूसरी याचिका उच्चतम न्यायालय में लंबित है जिस पर अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। पेशे से अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता अभिनव गौर ने इस कदम को संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन करने वाला असंवैधानिक कदम बताया है। यह अनुच्छेद सरकारी नौकरियों के मामले में समान अवसर उपलब्ध कराता है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में इस आधार पर एनबीईएमएस के निर्णय को चुनौती दी गई है कि नीट-पीजी 2025 के लिए कट-ऑफ अंकों में उल्लेखनीय कटौती से मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया की शुचिता कमजोर होगी। जनहित याचिका में कहा गया है कि दूसरे दौर की काउंसिलिंग के बाद 18,000 से अधिक सीटें खाली रहने पर बोर्ड ने योग्यता के मानक जबरदस्त ढंग से घटा दिए जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अंक माइनस 40 तय किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने यह भी संकेत दिया कि सामान्य (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) वर्ग में कट ऑफ 276 से घटाकर 103 कर दिया गया, जबकि सामान्य (पीडब्लूबीडी) वर्ग में इसे 255 से घटाकर 90 कर दिया गया है। वहीं, एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग में इसे 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया जिससे जनस्वास्थ्य और मरीज की सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित होगी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 18:33:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह सरासर कोर्ट के समय की बर्बादी है..., क्रिकेट टीम को 'Team India' कहने से रोकने की मांग वाली याचिका पर भड़के CJI</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका को 'बेकार' बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती को बीसीसीआई की क्रिकेट टीम को 'टीम इंडिया' कहने से रोकने का अनुरोध किया गया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 8 अक्टूबर के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें वकील रीपक कंसल की जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, ''आप बस घर बैठकर याचिका का मसौदा बनाना शुरू कर दें। इस सब में क्या दिक्कत है? अदालत पर बोझ न डालें।''</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568498/%22this-is-a-sheer-waste-of-the-court-s-time---%22-cji-fumes-over-petition-demanding-that-the-cricket-team-be-stopped-from-being-called--team-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/sc1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका को 'बेकार' बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती को बीसीसीआई की क्रिकेट टीम को 'टीम इंडिया' कहने से रोकने का अनुरोध किया गया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 8 अक्टूबर के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें वकील रीपक कंसल की जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, ''आप बस घर बैठकर याचिका का मसौदा बनाना शुरू कर दें। इस सब में क्या दिक्कत है? अदालत पर बोझ न डालें।'' याचिका में तर्क दिया गया था कि बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) को 'टीम इंडिया' या 'भारतीय क्रिकेट टीम' कहना जनता को गुमराह करता है और राष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें दावा किया गया कि एक निजी संस्था होने के नाते, बीसीसीआई को 'टीम इंडिया' नहीं कहा जाना चाहिए, ''खासकर तब जब भारत सरकार से कोई मंजूरी नहीं है।'' पीठ ने कहा, ''यह सरासर अदालत और आपके समय की बर्बादी है... यह क्या तर्क है? क्या आप कह रहे हैं कि टीम भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करती? जो टीम हर जगह जाकर खेल रही है, वे उसके बारे में गुमराह कर रहे हैं? बीसीसीआई को भूल जाइए, अगर दूरदर्शन या कोई दूसरा प्राधिकार इसे टीम इंडिया के तौर पर दिखाए, तो क्या यह टीम इंडिया नहीं है?'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 13:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुद्दा सुनवाई योग्य नहीं...  पीएम मोदी को अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने से रोकने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के दौरान अजमेर शरीफ दरगाह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चादर चढ़ाने से रोकने की मांग को लेकर पेश याचिका सोमवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुनवाई योग्य नहीं है। वैसे भी यह अप्रासंगिक हो गया है, क्योंकि चादर चढ़ाने का कार्यक्रम पहले ही हो चुका है। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसके आदेश का दरगाह से जुड़े अजमेर अदालत में चल रहे दीवानी मुकदमे पर कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566422/the-supreme-court-dismisses-the-petition-seeking-to-prevent-pm-modi-from-offering-a-ceremonial-cloth-at-the-ajmer-sharif-dargah"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/cats46.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के दौरान अजमेर शरीफ दरगाह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चादर चढ़ाने से रोकने की मांग को लेकर पेश याचिका सोमवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुनवाई योग्य नहीं है। वैसे भी यह अप्रासंगिक हो गया है, क्योंकि चादर चढ़ाने का कार्यक्रम पहले ही हो चुका है। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसके आदेश का दरगाह से जुड़े अजमेर अदालत में चल रहे दीवानी मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। न्यायालय ने कहा, "मुकदमा लंबित है, उसे जारी रखें।" पीठ ने यह भी कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाना पुरानी परंपरा है। इसका पालन पिछले प्रधानमंत्रियों ने भी किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका हिंदू सेना के तत्कालीन अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की अजमेर अदालत में पहले से दायर लंबित मुकदमे का हिस्सा है, जिसमें दावा किया गया था कि अजमेर शरीफ दरगाह तोड़े गये शिव मंदिर की जगह पर बनायी गयी थी। गुप्ता ने तर्क दिया था कि केंद्र सरकार ने जहां चादर चढ़ाने के लिए भेजा है, वह 'विवादित ढांचा' है। उनका यह काम न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को कमजोर करता है, जबकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566422/the-supreme-court-dismisses-the-petition-seeking-to-prevent-pm-modi-from-offering-a-ceremonial-cloth-at-the-ajmer-sharif-dargah</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 17:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोडीन कफ सिरप तस्करी केस: हाईकोर्ट ने दो आरोपियों की याचिका ठुकराई, कहा- समाज के खिलाफ गंभीर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोडिन कफ सिरप मामले में दो आरोपियों- सिंटू उर्फ अखिलेश प्रकाश और आकाश मौर्य की रिट याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं। याचिकाकर्ताओं ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए इस मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने के अनुरोध के साथ अदालत का रुख किया था। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने पारित किया। इन आरोपियों के खिलाफ जौनपुर स्थित कोतवाली पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं कि याचिकाकर्ताओं का यह कृत्य समाज के खिलाफ गंभीर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563665/codeine-cough-syrup-smuggling-case--high-court-rejects-plea-of-%E2%80%8B%E2%80%8Btwo-accused--says-it-is-a-serious-crime-against-society"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(18)8.png" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोडिन कफ सिरप मामले में दो आरोपियों- सिंटू उर्फ अखिलेश प्रकाश और आकाश मौर्य की रिट याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं। याचिकाकर्ताओं ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए इस मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने के अनुरोध के साथ अदालत का रुख किया था। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने पारित किया। इन आरोपियों के खिलाफ जौनपुर स्थित कोतवाली पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं कि याचिकाकर्ताओं का यह कृत्य समाज के खिलाफ गंभीर प्रकृति का अपराध है।</p>
<p>अदालत ने कहा कि ये आरोपी एक बड़े सीमापार नारकोटिक्स नेटवर्क के संदिग्ध सरगना हैं और उत्तर प्रदेश में कथित कोडिन आधारित कफ सिरप की तस्करी के रैकेट के सदस्य हैं। इस नारकोटिक्स नेटवर्क का कथित तौर पर निर्माण फर्जी कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों पर किया गया था।</p>
<p>प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि इन आरोपियों ने गाजियाबाद और वाराणसी में स्टॉक प्वाइंट से भारी मात्रा में कोडिन मिले कफ सिरप को झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, नेपाल और बांग्लादेश पहुंचाने के लिए एक श्रृंखला बनाई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि अवैध खेप को वैध फार्मा खेप के रूप में पहुंचाने के लिए कई फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं। इस मामले में गाजियाबाद, वाराणसी, जौनपुर और अन्य जिलों में कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक दूसरी पीठ ने इसी तरह के मामले में दो आरोपियों को अंतरिम संरक्षण देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 17 दिसंबर निर्धारित की थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/563665/codeine-cough-syrup-smuggling-case--high-court-rejects-plea-of-%E2%80%8B%E2%80%8Btwo-accused--says-it-is-a-serious-crime-against-society</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 09:41:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूषित भावना से बने संबंध में महिला की सहमति अनुमन्य नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी की याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाह के झूठे आश्वासन पर यौन संबंध बनाने वाले आरोपी की याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिस वादे का जन्म ही छल से हुआ हो, ऐसी परिस्थितियों में महिला की ‘सहमति’ वैधानिक सहमति नहीं मानी जा सकती। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने दुष्कर्म के आरोपी को निरस्त करने की मांग वाली रवि पाल की याचिका खारिज करते हुए पारित किया। </p>
<p>कोर्ट ने माना कि आरोपी द्वारा शुरुआत से ही भ्रामक वादों का सहारा लेकर शारीरिक संबंध स्थापित करना भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दंडनीय है। मामले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/558848/consent-of-a-woman-in-a-relationship-formed-with-tainted-intentions-is-not-permissible--high-court-dismissed-the-petition-of-the-accused"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/इलाहाबाद-हाईकोर्ट-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाह के झूठे आश्वासन पर यौन संबंध बनाने वाले आरोपी की याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिस वादे का जन्म ही छल से हुआ हो, ऐसी परिस्थितियों में महिला की ‘सहमति’ वैधानिक सहमति नहीं मानी जा सकती। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने दुष्कर्म के आरोपी को निरस्त करने की मांग वाली रवि पाल की याचिका खारिज करते हुए पारित किया। </p>
<p>कोर्ट ने माना कि आरोपी द्वारा शुरुआत से ही भ्रामक वादों का सहारा लेकर शारीरिक संबंध स्थापित करना भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दंडनीय है। मामले के अनुसार गोरखपुर की एक युवती ने आरोपी के विरुद्ध जनवरी 2024 में साहजनवां थाने में आईपीसी की धारा 376 व 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था कि आरोपी ने विवाह के आश्वासन पर उसे अपने घर व होटल में बुलाकर कई बार दुष्कर्म किया।</p>
<p>बाद में दिल्ली ले जाकर भी शादी से मुकर गया और उसे छोड़कर फरार हो गया। कोर्ट ने पीड़िता द्वारा सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के तहत दर्ज बयानों को विश्वसनीय पाया और रिकॉर्ड पर आए तथ्यों को आरोपी के ‘दूषित आशय’ का संकेत तथा पीड़िता की सहमति का दुरुपयोग माना। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब झूठा वादा करके महिला से संबंध बनाए जाते हैं, तो यह आईपीसी की धारा 375 के तहत 'यौन शोषण' की श्रेणी में आता है।</p>
<p>आरोपी ने अपने बचाव में यह तर्क दिया था कि संबंध ‘सहमति से’ बने थे और विवाह का कोई ठोस वादा नहीं किया गया था। कोर्ट ने इस तर्क को अनुपयुक्त ठहराते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तथ्यों की गहन जांच ट्रायल के दौरान ही संभव है। अंत में कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के समक्ष मौजूद प्रथमदृष्टया सामग्री अभियोजन के मामले को पुष्ट करती है। ऐसे में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही निरस्त करने का प्रश्न नहीं उठता।इसी के साथ कोर्ट ने अंतरिम स्थगन आदेश भी निरस्त कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 21:21:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनिया गांधी को कोर्ट से बड़ी राहत, वोटर आईडी मामले में दाखिल याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली उस याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनका नाम भारतीय नागरिक बनने से तीन साल पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका खारिज कर दी। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।</p>
<p>शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नारंग ने 10 सितंबर को कहा कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में जोड़ा गया था,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/552952/sonia-gandhi-gets-big-relief-from-court--petition-filed-in-voter-id-case-dismissed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-12/सोनिया-गांधी-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली उस याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनका नाम भारतीय नागरिक बनने से तीन साल पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका खारिज कर दी। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।</p>
<p>शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नारंग ने 10 सितंबर को कहा कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में जोड़ा गया था, जबकि वह भारतीय नागरिक नहीं थीं। उन्होंने कहा, ‘‘पहले आपको नागरिकता की प्रक्रिया पूरी करनी होती है, तभी आप किसी क्षेत्र के निवासी बनते हैं।’’ नारंग ने कहा कि 1980 में निवास का प्रमाण संभवतः राशन कार्ड और पासपोर्ट था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह नागरिक थीं, तो 1982 में उनका नाम क्यों हटाया गया? उस समय निर्वाचन आयोग ने दो नाम हटाए थे, एक संजय गांधी का, जिनकी विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, और दूसरा सोनिया गांधी का।’’ नारंग ने कहा कि आयोग को जरूर कुछ गड़बड़ लगी होगी जिसके कारण उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया।</p>
<p>नारंग ने चार सितंबर को कहा कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल था, जिसे 1982 में हटा दिया गया था और 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद फिर से दर्ज किया गया।</p>
<p>यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175 (4) (मजिस्ट्रेट को जांच का आदेश देने की शक्ति) के तहत दायर की गई थी, जिसमें पुलिस को इस आरोप की जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई थी कि सोनिया 1983 में भारतीय नागरिक बनीं, लेकिन उनका नाम 1980 की मतदाता सूची में था। उन्होंने कुछ जालसाजी’ होने और सार्वजनिक प्राधिकरण के साथ ‘धोखाधड़ी’ होने का दावा किया। नारंग ने कहा, ‘‘मेरा इतना सा अनुरोध है कि पुलिस को उचित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/552952/sonia-gandhi-gets-big-relief-from-court--petition-filed-in-voter-id-case-dismissed</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 16:42:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नकदी बरामदगी मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा को लगा बड़ा झटका, SC ने याचिका की खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने आंतरिक जांच समिति की एक रिपोर्ट को अमान्य करार देने का अनुरोध करने वाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। रिपोर्ट में उन्हें नकदी बरामदगी मामले में कदाचार का दोषी ठहराया गया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा का आचरण विश्वास से परे है और उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने कहा कि आंतरिक जांच प्रक्रिया और तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों की समिति ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया था और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/549127/justice-yashwant-verma-gets-a-big-setback-in-the-cash-recovery-case--sc-dismisses-the-petition-calling-the-report-of-the-internal-investigation-committee-invalid"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/untitled-design-(11)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने आंतरिक जांच समिति की एक रिपोर्ट को अमान्य करार देने का अनुरोध करने वाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। रिपोर्ट में उन्हें नकदी बरामदगी मामले में कदाचार का दोषी ठहराया गया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा का आचरण विश्वास से परे है और उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने कहा कि आंतरिक जांच प्रक्रिया और तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों की समिति ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया था और रिपोर्ट को प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को न्यायाधीश वर्मा को हटाने की सिफारिश के साथ भेजना असंवैधानिक नहीं था। साथ ही न्यायालय ने किसी भी न्यायिक कदाचार पर कार्रवाई करने के प्रधान न्यायाधीश के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा था कि वह महज एक ‘‘डाकघर’’ नहीं हो सकते, बल्कि राष्ट्र के प्रति उनके कुछ कर्तव्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/549119/india-will-not-compromise---pm-modi-made-it-clear-on-us-tariff---interest-of-our-farmers-is-our-top-priority">झुकेगा नहीं करेगा भारत.. अमेरिकी शुल्क पर PM मोदी ने किया साफ, 'अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता'</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/549127/justice-yashwant-verma-gets-a-big-setback-in-the-cash-recovery-case--sc-dismisses-the-petition-calling-the-report-of-the-internal-investigation-committee-invalid</link>
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                <pubDate>Thu, 07 Aug 2025 11:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : टूंडला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद जिले की टूंडला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रेमपाल सिंह धनगर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 83 की उपधारा (1) (बी) के अनुसार चुनाव याचिका में कथित भ्रष्ट आचरण के पूर्ण विवरण को प्रस्तुत करना चाहिए, जिसमें भ्रष्ट आचरण करने वाले पक्षकारों के नामों का पूर्ण विवरण शामिल हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 83(1)(ए) के अनुसार चुनाव याचिका दाखिल करते समय महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया जाना चाहिए और उसके बाद कोई संशोधन स्वीकृत नहीं होता है। कोर्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/542418/petition-challenging-bjp-mla-from-prayagraj-tundla-assembly-seat-rejected"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/इलाहाबाद-हाईकोर्ट-(1)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद जिले की टूंडला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रेमपाल सिंह धनगर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 83 की उपधारा (1) (बी) के अनुसार चुनाव याचिका में कथित भ्रष्ट आचरण के पूर्ण विवरण को प्रस्तुत करना चाहिए, जिसमें भ्रष्ट आचरण करने वाले पक्षकारों के नामों का पूर्ण विवरण शामिल हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 83(1)(ए) के अनुसार चुनाव याचिका दाखिल करते समय महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया जाना चाहिए और उसके बाद कोई संशोधन स्वीकृत नहीं होता है। कोर्ट ने आगे बताया कि आदेश VII नियम 11(ए) स्पष्ट रूप से कार्रवाई के कारण का खुलासा न करने की स्थिति में शिकायत को खारिज करने का प्रावधान करता है। इसी प्रकार एक चुनाव याचिका में अगर याची भौतिक तथ्यों का खुलासा नहीं करता है तो यह निष्कर्ष निकलता है कि कार्यवाही का एक अधूरा कारण स्थापित किया गया है और याचिका खारिज किए जाने योग्य हो जाती है। कोर्ट ने वर्तमान मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए पाया कि याची द्वारा प्रस्तुत संशोधन आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह एक नया मामला प्रस्तुत करता है और भौतिक तत्वों का खुलासा न करने से याचिका में महत्वपूर्ण दोष उत्पन्न होता है, जिससे चुनाव याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं रह जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने प्रेमपाल सिंह की याचिका को खारिज करते हुए पारित किया। मामले के अनुसार टूंडला निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और विपक्षी गड़ेरिया/पाल/बघेल जाति से संबंधित है, इसलिए निर्वाचन क्षेत्र के लिए उसकी उम्मीदवारी शुरू से ही अमान्य थी। बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य में उपरोक्त जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी में श्रेणीबद्ध किया जाता है। चुनाव याचिका लंबित रहने के दौरान याची ने एक संशोधन आवेदन दाखिल किया और महत्वपूर्ण तथ्य जोड़ने की प्रार्थना की। हालांकि उक्त आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि आवेदन में मांगे गए संशोधन के बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया। इसके बाद याची ने चुनाव याचिका में महत्वपूर्ण तथ्य जोड़ने के लिए संशोधन हेतु दूसरा संशोधन आवेदन दाखिल किया।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी की ओर से दूसरे आवेदन का इस आधार पर विरोध किया गया कि इससे चुनाव याचिका की प्रकृति ही बदल जाएगी, साथ ही विपक्षी द्वारा भी एक आवेदन दाखिल किया गया, जिसमें तर्क दिया गया कि विपक्षी के खिलाफ कार्यवाही का कोई कारण नहीं बताया गया है और संशोधन आवेदन में अधूरे तथ्य बताए गए हैं। हालांकि याची के अधिवक्ता ने विपक्षी के स्तर का खंडन करते हुए कोर्ट को बताया कि प्रस्तावित संशोधन के तहत कोई नया तथ्य नहीं जोड़ा जा रहा है, लेकिन कोर्ट ने निष्कर्ष दिया कि आदेश VI के नियम 2 के अनुसार भौतिक तथ्यों का खुलासा करना आवश्यक होता है। ऐसा न करने की स्थिति में चुनाव याचिका स्वीकार्य नहीं होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:<span style="color:rgb(186,55,42);">-<a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/542417/gonda-spread-panic-in-the-factorys-attack-in-the-factory#gsc.tab=0">गोंडा : दूध चोरी पकड़ने पर फैक्ट्री में हमला, सेंटर इंचार्ज व कुक की पिटाई के बाद हवाई फायरिंग कर फैलाई दहशत</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/542418/petition-challenging-bjp-mla-from-prayagraj-tundla-assembly-seat-rejected</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 20:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vinay Shukla]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
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