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                <title>Funeral - Amrit Vichar</title>
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                <description>Funeral RSS Feed</description>
                
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                <title>आशा भोसले पंचतत्व में विलीन : शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से किया गया अंतिम संस्कार... फिजा में गूंजते रहेंगे गीत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>प्रख्यात गायिका आशा भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ''अभी ना जाओ छोड़कर...'' बज रहा था। संगीत की दुनिया पर दशकों तक राज करने वाली महान गायिकाओं की पीढ़ी में शुमार शायद वह आखिरी गायिका थीं। उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उन्हें बंदूकों की सलामी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578662/asha-bhosle-merges-with-the-five-elements--last-rites-performed-according-to-hindu-rituals-at-shivaji-park-crematorium----her-songs-will-continue-to-echo-in-the-air"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/070.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>प्रख्यात गायिका आशा भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ''अभी ना जाओ छोड़कर...'' बज रहा था। संगीत की दुनिया पर दशकों तक राज करने वाली महान गायिकाओं की पीढ़ी में शुमार शायद वह आखिरी गायिका थीं। उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उन्हें बंदूकों की सलामी दी गयी।</p>
<p style="text-align:justify;">'स्वर साम्राज्ञी' लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। पुरोहितों ने पीले और नारंगी रंग के गेंदे के फूलों से सजी चिता के चारों ओर मंत्रोच्चार किया। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। भोसले की पोती जनाई के आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे। बहन उषा मंगेशकर और संगीतकार भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी वहां मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे। यह गम और गीत का क्षण था। चिता को अग्नि दिये जाने से पहले, गायक शान, सुदेश भोसले और अनूप जलोटा ने महान गायिका को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए। सुदेश भोसले ने ''ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना'' गाया, वहीं शान ने ''प्यार के मोड़ पे'' गाया। ...लेकिन ऐसा करने वाले वे अकेले नहीं थे। कई प्रशंसक, प्रार्थना की मुद्रा में हाथ जोड़े हुए गीतों को सुन रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई के लिए यह एक अविस्मरणीय दिन था। लोग सड़कों पर कतारों में खड़े थे, छतों और खिड़कियों पर एकत्र थे और सैकड़ों लोग शवयात्रा के साथ-साथ धीरे-धीरे भोसले के घर लोअर परेल से शिवाजी पार्क की ओर बढ़ रहे थे, ताकि शहर की अपनी 'आशा ताई' को उनकी अंतिम यात्रा में साथ दे सकें। आठ दशकों तक अपने गीतों से लोगों के दिलों पर राज करने वाली गायिका के अंतिम दर्शन करने के लिए उमड़ी भीड़ में ''आशा ताई अमर रहे'' के नारे गूंज रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लाल साड़ी में अपनी खास बिंदी, और नथनी पहनी हुई भोसले की एक विशाल तस्वीर फूलों से सजे वाहन पर रखी गयी थी। इससे पहले दिन में, भोसले के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लिपटे हुए और कांच के ताबूत में उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। उनके दशकों पुराने गीत - ''आओ हुजूर तुमको'', ''आइए मेहरबां'', ''झुमका गिरा रे'', ''दिल चीज़ क्या है'', ''ओ साथी रे'' और ''याई रे याई रे'' - पृष्ठभूमि में धीमी आवाज़ में बज रहे थे। बॉलीवुड सितारे आशा पारेख और हेलेन, रणवीर सिंह, तब्बू, संगीतकार ए आर रहमान, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर तथा नेता उद्धव ठाकरे, प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले उन लोगों में शामिल थे, जो उनके आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats77.jpg" alt="cats" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">गायक शान ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''आशा जी हमेशा हमारे साथ रहेंगी। उनकी आवाज़, उनके शब्द, जीवन के प्रति उनके विचार हमेशा हमें प्रेरित करते रहेंगे। उनके जैसी कोई नहीं थी, न कभी होगी। वह एक अद्वितीय, दृढ़ इच्छाशक्ति वाली शख्सियत थीं, जिन्होंने अपनी शर्तों पर जीवन जिया।'' भोसले के परिवार में उनके बेटे आनंद हैं। भोसले ने अपने दो बच्चों को खो दिया। बेटी वर्षा का निधन 2012 में हुआ और बेटे हेमंत का निधन उसके ठीक तीन साल बाद 2015 में हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">ललित पंडित, जिन्होंने अपने भाई जतिन के साथ मिलकर शाहरुख खान और काजोल अभिनीत 1995 की फिल्म ''दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे'' के लिए संगीत तैयार किया था, ने भोसले को अपनी तरह का आखिरी बताया। फिल्म में भोसले के गाये गीत ''जरा सा झूम लूं मैं'' और ''अजनबी मुझको इतना बता'' शामिल थे। ललित ने कहा, ''उन्होंने गीतों की अपनी इतनी बड़ी विरासत छोड़ी है कि आने वाली पीढ़ियां उससे सीख सकती है। यह सच है कि वह आखिरी दिग्गज गायिका थीं और अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।''</p>
<p style="text-align:justify;">सुदेश भोसले ने अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा, ''वह मुझे अपने शो में ले जाती थीं और एक गायिका से कहीं बढ़कर, वह मुझे अपने बच्चे की तरह प्यार करती थीं... और इतने सारे व्यक्तिगत दुखों के बावजूद, वह हमेशा सकारात्मक रहीं और जीवन में कभी हार नहीं मानी। मुझे लगता है कि उनके गीत आने वाले हजारों वर्षों तक उभरते कलाकारों को प्रेरित करते रहेंगे।''</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी आखिरी मुलाकात एक महीने पहले हुई थी। सुदेश ने बताया, ''उन्होंने मुझसे कहा था कि आठ सितंबर को मेरा जन्मदिन है, मैं एक शो करना चाहती हूं, लेकिन अब वो दिन कभी नहीं आएगा। अफसोस की बात यह है कि कई अच्छे गायक आएंगे, लेकिन आशा जी जैसी कोई नहीं होगी।'' भोसले को पद्म विभूषण, दादा साहब फाल्के पुरस्कार और महाराष्ट्र भूषण से नवाजा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 21:46:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Asha Bhosle : महाराष्ट्र के छोटे से गांव में जन्मी आशा ने 8 दशक तक श्रोताओं के दिलों पर किया राज, जानिए कैसे रहा सफर </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> भारतीय सिनेमा जगत में आशा भोसले को ऐसी पार्श्वगायिका के तौर पर याद किया जायेगा, जिन्होंने अपनी आवाज की कशिश से लगभग आठ दशक तक श्रोताओं को अपना दीवाना बनाये रखा। महाराष्ट्र के सांगली गांव में 8 सितम्बर 1933 को जन्मी आशा भोसले के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच से जुडे हुए थे। नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही आशा भोसले के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाते हुए आशा भोसले और उनकी दीदी लता मंगेशकर ने फिल्मों में अभिनय के साथ-साथ गाना भी शुरू कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">आशा भोसले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578442/asha-bhosle--born-in-the-village-of-sangli--maharashtra--asha-has-captivated-audiences-for-nearly-eight-decades--she-lost-her-father%E2%80%94her-guiding-light%E2%80%94at-the-age-of-nine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/0125.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> भारतीय सिनेमा जगत में आशा भोसले को ऐसी पार्श्वगायिका के तौर पर याद किया जायेगा, जिन्होंने अपनी आवाज की कशिश से लगभग आठ दशक तक श्रोताओं को अपना दीवाना बनाये रखा। महाराष्ट्र के सांगली गांव में 8 सितम्बर 1933 को जन्मी आशा भोसले के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच से जुडे हुए थे। नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही आशा भोसले के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाते हुए आशा भोसले और उनकी दीदी लता मंगेशकर ने फिल्मों में अभिनय के साथ-साथ गाना भी शुरू कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">आशा भोसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में ..सावन आया ..फिल्म चुनरिया में गाया । सोलह वर्ष की उम्र में अपने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाते हुये आशा भोसले ने अपनी उम्र से काफी बड़े गणपत राव भोसले से शादी कर ली। उनकी वह शादी ज्यादा सफल नहीं रही और अंततः उन्हें मुंबई से वापस अपने घर पुणे आना पड़ा। उस समय तक गीतादत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेश्कर फिल्मों में बतौर पार्श्वगायिका अपनी धाक जमा चुकी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1957 में संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के संगीत निर्देशन में बनी निर्माता-निर्देशक बी.आर.चोपड़ा की फिल्म ..नया दौर.. आशा भोसले के सिने करियर का अहम पड़ाव लेकर आई। वर्ष 1966 में तीसरी मंजिल में आशा भोसले ने आर. डी. बर्मन के संगीत में ..आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा ..गाना को अपनी आवाज दी, जिससे उन्हें काफी प्रसिद्ध मिली। साठ और सत्तर के दशक में आशा भोसले हिन्दी फिल्मों की प्रख्यात नर्तक अभिनेत्री ..हेलन.. की आवाज समझी जाती थी। </p>
<p style="text-align:justify;">आशा भोसले ने हेलन के लिये तीसरी मंजिल में ..ओ हसीना जुल्फों वाली.. कारवां में .. पिया तू अब तो आजा ..मेरे जीवन साथी में.. आओ ना गले लगा लो ना और डॉन में ..ये मेरा दिल प्यार का दीवाना.. गीत गाया । शास्त्रीय संगीत से लेकर पाश्चात्य धुनों पर गाने में महारत हासिल करने वाली आशा भोसले ने वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म उमराव जान से अपने गाने के अंदाज में परिवर्तन किया । </p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म उमराव जान से आशा भोसले एक कैबरे सिंगर और पॉप सिंगर की छवि से बाहर निकली और लोगों को यह अहसास हुआ कि वह हर तरह के गीत गाने मे सक्षम है। उमराव जान के लिये आशा भोसले ने ..दिल चीज क्या है.. और ..इन आंखों की मस्ती के.. जैसी गजलें गाकर उन्हें खुद भी आश्चर्य हुआ कि वह इस तरह के गीत गा सकती हैं । </p>
<p style="text-align:justify;">इस फिल्म के लिये उन्हें अपने करियर का पहला नेशनल अवार्ड भी मिला । वर्ष 1994 में अपने पति आर डी बर्मन की मौत से आशा भोसले को गहरा सदमा लगा और उन्होंने गायिकी से मुंह मोड़ लिया,लेकिन उनकी जादुई आवाज आखिर दुनिया से कब तक मुंह मोड़े रहती। उनकी आवाज की आवश्यकता हर संगीतकार को थी। कुछ महीनों की खामोशी के बाद इसकी पहल की संगीतकार ए.आर.रहमान ने ।</p>
<p style="text-align:justify;">रहमान को अपनी रंगीला फिल्म के लिये आशा भोसले की आवाज की जरूरत थी। उन्होंने 1995 में ..तन्हा तन्हा .. गीत फिल्म रंगीला के लिये गाया । आशा भोसले के सिने करियर मे यह एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ आया और उसके बाद उन्होंने आजकल की धूम धड़ाके से भरे संगीत की दुनिया में कदम रख दिया । आशा भोसले को बतौर गायिका आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिले और वर्ष 2001 में फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व उन्हें उमराव जान और इजाजत में उनके गाये गीतों के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। आज रिमिक्स गीतों के दौर में बनाये गये गानों पर यदि एक नजर डाले तो पायेंगे कि उनमें से अधिकांश नगमें आशा भोंसले ने ही गाये थे। इन रिमिक्स गानों में पान खाये सइयां हमार, पर्दे में रहने दो,जब चली ठंडी हवा, शहरी बाबू दिल लहरी बाबू, झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में, काली घटा छाये मोरा जिया घबराये, लोगों न मारो इसे, कह दूं तुम्हें या चुप रहूं और मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो जैसे सुपरहिट गीत शामिल है । </p>
<p style="text-align:justify;">आशा भोसले ने हिन्दी फिल्मी गीतों के अलावा गैर फिल्मी गाने गजल,भजन और कव्वालियों को भी बखूबी गाया है। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती पंजाबी, तमिल, मलयालम अंग्रेजी भाषा में भी अनेक गीत गाये हैं। जहां एक ओर संगीतकार जयदेव के संगीत निर्देशन में जयशंकर प्रसाद और महादेवी वर्मा की कविताओं को आशा भोसले ने अपने स्वर से सजाया है वहीं फिराक गोरखपुरी और जिगर मुरादाबादी के रचित कुछ शेर भी गाये है। जीवन की सच्चाइयों को बयान करती जिगर मुरादाबादी की गजल ..मैं चमन में जहां भी रहूं मेरा हक है फसले बहार पर .. उनके जीवन को भी काफी हद तक बयां करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 14:55:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UP: मुर्दा शरीर की चलने लगीं सांसें, परिवार वाले गड्ढे को मान रहे भगवान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पीलीभीत, अमृत विचार।</strong> सड़क पर चलते वक्त गड्ढे में पैर या गाड़ी का पहिया पड़ जाए तो आह निकल ही जाती है। गड्ढों के चक्कर में हर दिन जान गवाने वालों की फेहरिस्त भी कम नहीं। मगर सड़क का गड्ढा किसी मरीज की सांसे लौटाने की वजह बन जाए ये सुनने में अजीब लगेगा।</p>
<p>लेकिन यकीन जानिए यूपी के पीलीभीत जिले में कुछ यही हुआ। महिला मरीज की सांसे लगभग थम चुकीं थीं, तभी पहिया किसी गड्ढे में पड़ने के बाद एंबुलेस तेजी से उछली। अंदर लेटी महिला मरीज जिसके शरीर को परिवार वाले शव मान चुके थे, झटका लगने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574603/the-dead-body-started-breathing--the-family-considered-the-pit-as-god"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/shav.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पीलीभीत, अमृत विचार।</strong> सड़क पर चलते वक्त गड्ढे में पैर या गाड़ी का पहिया पड़ जाए तो आह निकल ही जाती है। गड्ढों के चक्कर में हर दिन जान गवाने वालों की फेहरिस्त भी कम नहीं। मगर सड़क का गड्ढा किसी मरीज की सांसे लौटाने की वजह बन जाए ये सुनने में अजीब लगेगा।</p>
<p>लेकिन यकीन जानिए यूपी के पीलीभीत जिले में कुछ यही हुआ। महिला मरीज की सांसे लगभग थम चुकीं थीं, तभी पहिया किसी गड्ढे में पड़ने के बाद एंबुलेस तेजी से उछली। अंदर लेटी महिला मरीज जिसके शरीर को परिवार वाले शव मान चुके थे, झटका लगने से छूटती जिंदगी की डोर वापस थाम लेती है।</p>
<p>पीलीभीत की रहने वाली 50 साल की विनीता शुक्ला का इलाज बरेली के एक अस्पताल में चल रहा था। बीती 24 फरवरी को डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। निराश पति कुलदीप कुमार शुक्ला एंबुलेंस के जरिए बरेली से पीलीभीत स्थित आवास लेकर जा रहे थे। पत्नी को मरा समझकर घर पर अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी करने तक को कह दिया। मगर बरेली-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर अचनाक एक गड्ढा आया और एंबुलेंस जोर से उछली। ये झटका विनीता के लिए किसी सीपीआर या चमत्कार जैसा था। उखड़ चुकीं उनकी सांसे वापस चलने लगीं।</p>
<p>परिवार के मुताबिक पहले केवल नव्ज चल रही थी मगर झटका लगने के बाद उनकी सांसें भी चलने लगीं। पत्नी की सांसे वापस लौटने के बाद पति कुलदीप शुक्ला ने भी गहरी सांस भरी। झट से घर पर फोन किया और अंतिम संस्कार की तैयारियां रोकने को कहा। विनीता की ये कहानी अब सामने आई है। इस घटना के कई दिन बीत जाने के बाद वह स्वस्थ हैं। परिवार भी उनकी इस नई जिंदगी पर ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>पीलीभीत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 15:08:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : द्वारे पर आई बिटिया की बरात, विदाई से पहले टूटी मां की सांसे</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बहेड़ी, अमृत विचार।</strong> घर में मां का शव और दरवाजे पर बेटी की बरात। सोमवार को दिल को हिला देने वाली स्थिति खड़ी हो गई। दिल पर पत्थर रखने की कहावत बहुत मशहूर है, लेकिन आज इस हादसे ने दिखाया कि कैसे दिल पर पत्थर रखा जाता है। परिजनों ने शव को घर में ही रखकर लड़की को ब्याहने का काम शुरू किया।</p>
<p>बहेड़ी के मोहल्ला आज़ाद नगर निवासी प्रवीण कुमार सक्सेना की बेटी श्रद्धा का सोमवार को विवाह था। महराजगंज (गोरखपुर) के प्रिकेश सक्सेना से उसकी शादी हो रही थी। दोपहर को बरात पहुंची। बरात का स्वागत धूमधाम से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574441/the-daughter-s-wedding-procession-arrived-at-the-doorstep--the-mother-breathed-her-last-before-the-departure"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/dulhan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बहेड़ी, अमृत विचार।</strong> घर में मां का शव और दरवाजे पर बेटी की बरात। सोमवार को दिल को हिला देने वाली स्थिति खड़ी हो गई। दिल पर पत्थर रखने की कहावत बहुत मशहूर है, लेकिन आज इस हादसे ने दिखाया कि कैसे दिल पर पत्थर रखा जाता है। परिजनों ने शव को घर में ही रखकर लड़की को ब्याहने का काम शुरू किया।</p>
<p>बहेड़ी के मोहल्ला आज़ाद नगर निवासी प्रवीण कुमार सक्सेना की बेटी श्रद्धा का सोमवार को विवाह था। महराजगंज (गोरखपुर) के प्रिकेश सक्सेना से उसकी शादी हो रही थी। दोपहर को बरात पहुंची। बरात का स्वागत धूमधाम से हुआ और उसी वक्त दुल्हन की मां रजनी की मौत हो गई। लोग बरात की आगवानी और उसको ठहराने के इंतजाम में लगे थे। इसी बीच इस खबर से सभी हिल उठे।</p>
<p>कुछ देर तो किसी को कुछ सूझा ही नहीं। बारात 600 किलोमीटर दूर से आई थी, इसलिए स्थिति और मुश्किल वाली थी। खैर लोगों ने रास्ता निकाला। तय किया कि दुल्हन की मां का शव लाश को घर में रखा जाए। बरात को विदा करने के बाद मृतका का अंतिम संस्कार किया जाए। इसके बाद दिल पर पत्थर रखकर सभी ने अपने -अपने हिस्से के काम निपटाना शुरू कर दिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574441/the-daughter-s-wedding-procession-arrived-at-the-doorstep--the-mother-breathed-her-last-before-the-departure</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 11:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुलतानपुर : सड़क हादसे में गई 2 दोस्तों की  जान, होली में एक साथ उठी अर्थी, परिजनों में कोहराम </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सुलतानपुर।</strong> उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में होली के दिन बुधवार को एक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार बुधवार की दोपहर थाना क्षेत्र के फतेहपुर संगत गांव निवासी पूर्व प्रधान ओम प्रकाश सिंह के बेटे सनी सिंह अपने साथियों के साथ कार से गोसाईगंज बाजार से मुख्यालय की ओर जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इटकौली गांव के गेट के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। टक्कर तेज होने के कारण कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कार सवार सभी लोग गंभीर रूप से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573975/sultanpur--two-friends-die-in-a-road-accident--funeral-processions-taken-out-together-on-holi--family-members-in-turmoil"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/accident.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सुलतानपुर।</strong> उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में होली के दिन बुधवार को एक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार बुधवार की दोपहर थाना क्षेत्र के फतेहपुर संगत गांव निवासी पूर्व प्रधान ओम प्रकाश सिंह के बेटे सनी सिंह अपने साथियों के साथ कार से गोसाईगंज बाजार से मुख्यालय की ओर जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इटकौली गांव के गेट के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। टक्कर तेज होने के कारण कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कार सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। </p>
<p style="text-align:justify;">घायलों में अभिमन्यु उर्फ सनी सिंह (38), शिवम यादव (23), आदर्श सिंह उर्फ अमन और राजकुमार सिंह शामिल थे। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने सनी सिंह और शिवम यादव को मृत घोषित कर दिया। अन्य घायलों का गंभीर हालत में इलाज जारी है। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। </p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में गोसाईगंज थाना प्रभारी रामआशीष उपाध्याय ने बताया कि तेज रफ्तार कार हादसे में पूर्व प्रधान के बेटे समेत दो युवकों की मौत हुई है। पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। रात को शव घर पहुंचने पर गांव में भारी भीड़ जमा हो गई। गोमती नदी के तट पर दोनों युवकों का अंतिम संस्कार किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">मृतक अभिमन्यु उर्फ सनी सिंह झांसी में इंजीनियर थे। उनके परिवार में पत्नी मानसी सिंह, छह वर्षीय बेटा अनय सिंह, छोटे भाई हिमांशु और भाभी रेणुका सिंह हैं। उनकी सास साधना सिंह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। मृतक शिवम यादव के पिता का नाम गया प्रसाद और माता का नाम यशोदा देवी है। उनका बड़ा भाई शुभम अविवाहित है और परदेश में नौकरी करता है, जबकि शिवम घर पर रहता था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>सुल्तानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 17:40:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुलतानपुर : शहीद सूबेदार भूपेंद्र सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सुलतानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के बरुई गांव निवासी भारतीय सेना के सूबेदार भूपेंद्र कुमार सिंह जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर सोमवार को जम्मू से लखनऊ एयरपोर्ट लाया गया, जहां से देर रात पैतृक गांव पहुंचाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शहादत की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को बरुई घाट पर सूबेदार भूपेंद्र कुमार सिंह का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी। बड़ी संख्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569950/sultanpur--martyr-subedar-bhupendra-singh-cremated-with-full-military-honors"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/37.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सुलतानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के बरुई गांव निवासी भारतीय सेना के सूबेदार भूपेंद्र कुमार सिंह जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर सोमवार को जम्मू से लखनऊ एयरपोर्ट लाया गया, जहां से देर रात पैतृक गांव पहुंचाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शहादत की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को बरुई घाट पर सूबेदार भूपेंद्र कुमार सिंह का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी। बड़ी संख्या में ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। </p>
<p style="text-align:justify;">अंतिम दर्शन के दौरान गांव में "भारत माता की जय" और "जब तक सूरज-चांद रहेगा, भूपेंद्र तेरा नाम रहेगा" के नारे गूंजते रहे। शहीद का परिवार लंबे समय से देशसेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता स्वर्गीय प्रसिद्ध नारायण सिंह सेना से सेवानिवृत्त थे, जबकि बड़े भाई सूबेदार रविंद्र प्रताप सिंह और छोटे भाई सत्येंद्र प्रताप सिंह भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि देने पहुंचे जयसिंहपुर विधायक राज बाबू उपाध्याय ने शहीद के घर तक पक्की सड़क बनवाने और उनकी पत्नी को सवा लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। क्षेत्रवासियों ने कहा कि सूबेदार भूपेंद्र कुमार सिंह का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>सुल्तानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/569950/sultanpur--martyr-subedar-bhupendra-singh-cremated-with-full-military-honors</link>
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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 19:53:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Baramati plane crash:  अजित पवार के PSO  जाधव का अंतिम संस्कार, मुंबई पुलिस ने खोया एक समर्पित और कर्तव्यनिष्ठ सिपाही ; मुंबई पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>महाराष्ट्र के बारामती में हुई विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निजी सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव का अंतिम संस्कार बुधवार देर रात सतारा जिले में उनके पैतृक स्थान पर किया गया। पुणे जिले के बारामती में बुधवार सुबह 'लियरजेट 45' विमान हवाई पट्टी पर उतरने के दूसरे प्रयास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी एवं मुंबई पुलिस के 2009 बैच के कांस्टेबल जाधव समेत पांच लोगों की मृत्यु हो गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">जाधव के पार्थिव शरीर को रात करीब साढ़े आठ बजे सतारा के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569344/baramati-plane-crash-funeral-of-ajit-pawars-pso-jadhav-mumbai"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(28)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>महाराष्ट्र के बारामती में हुई विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निजी सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव का अंतिम संस्कार बुधवार देर रात सतारा जिले में उनके पैतृक स्थान पर किया गया। पुणे जिले के बारामती में बुधवार सुबह 'लियरजेट 45' विमान हवाई पट्टी पर उतरने के दूसरे प्रयास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी एवं मुंबई पुलिस के 2009 बैच के कांस्टेबल जाधव समेत पांच लोगों की मृत्यु हो गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">जाधव के पार्थिव शरीर को रात करीब साढ़े आठ बजे सतारा के फलटण स्थित उनके पैतृक गांव तारादगांव ले जाया गया। वहां आधी रात के बाद उनके परिजन, स्थानीय लोगों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। यहां एक अधिकारी ने बताया कि लोणंद थाने के कर्मियों ने दिवंगत कांस्टेबल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मुंबई पुलिस के कांस्टेबल विदिप जाधव के असामयिक निधन से मैं बहुत दुखी हूं। ड्यूटी के दौरान विमान दुर्घटना में उनकी जान चली गई। उनकी मृत्यु से मुंबई पुलिस बल ने एक समर्पित और कर्तव्यनिष्ठ सिपाही को खो दिया है। मैं उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">ठाणे शहर के वितावा निवासी जाधव मुंबई पुलिस की विशेष सुरक्षा इकाई में तैनात थे। वह बुधवार सुबह अजित पवार के साथ मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे। विमान दुर्घटना के बाद उनकी पत्नी और दो बच्चों समेत उनका परिवार बारामती पहुंचा। परिजन ने उनके शव की पहचान की और पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/569343/economic-survey-2026--finance-minister-nirmala-sitharaman-presented-the-economic-survey-in-the-lok-sabha--the-budget-will-be-presented-on-february-1st"><span class="t-red">Economic Survey 2026:</span> लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया इकोनॉमिक सर्वे, 1 फरवरी को आएगा बजट</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/569344/baramati-plane-crash-funeral-of-ajit-pawars-pso-jadhav-mumbai</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/569344/baramati-plane-crash-funeral-of-ajit-pawars-pso-jadhav-mumbai</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 13:08:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देवरिया : पूर्व विधायक कमलेश शुक्ला का निधन, रविवार को हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>देवरिया। </strong>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कमलेश शुक्ला का शनिवार को 75 वर्ष की आयु में उत्तराखंड के रूद्रपुर में निधन हो गया। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी प्रभाकर तिवारी ने बताया कि उनका निधन उत्तराखंड के रूद्रपुर में एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 2017 में देवरिया जिले के रामपुर कारखाना विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे। उनका अंतिम संस्कार रविवार को हरिद्वार में किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वे मूल रूप से देवरिया जिले के एकौना क्षेत्र के ग्राम के भेड़ी शुक्ल के निवासी थे और उन्होंने उत्तराखंड को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567135/deoria--former-mla-kamlesh-shukla-passes-away--his-last-rites-will-be-performed-in-haridwar-on-sunday"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देवरिया। </strong>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कमलेश शुक्ला का शनिवार को 75 वर्ष की आयु में उत्तराखंड के रूद्रपुर में निधन हो गया। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी प्रभाकर तिवारी ने बताया कि उनका निधन उत्तराखंड के रूद्रपुर में एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 2017 में देवरिया जिले के रामपुर कारखाना विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे। उनका अंतिम संस्कार रविवार को हरिद्वार में किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वे मूल रूप से देवरिया जिले के एकौना क्षेत्र के ग्राम के भेड़ी शुक्ल के निवासी थे और उन्होंने उत्तराखंड को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं से सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। श्री शुक्ला ने उत्तर प्रदेश राइस मिलर संगठन के कई बार अध्यक्ष रहे तथा अखिल भारतीय राइस मिलर संगठन के उपाध्यक्ष पद का दायित्व भी संभाला था। वे उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के संयोजक भी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल्स द्वारा समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें "यूपी रत्न" सम्मान से सम्मानित किया गया था। उनके परिवार में तीन पुत्र और एक पुत्री हैं। राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>देवरिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 19:19:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कपसाड़ गांव छावनी में तब्दील... बढ़ा सियासी तनाव, हत्या के बाद अपहृत बेटी का अब तक नहीं मिला सुराग, परिवार को मिला लिखित वादा!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मेरठः </strong>मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की क्रूर हत्या और उनकी 18 वर्षीय बेटी रूबी के अपहरण ने पूरे प्रदेश की सियासत को हिला दिया है। गुरुवार सुबह हुई इस वारदात के बाद शुक्रवार को भी पुलिस को अपहृत युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका। नामजद आरोपियों पारस सोम, सुनील और उनके साथियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी।</p><p>इस पूरे घटनाक्रम ने गांव को एक छावनी में बदल दिया। गांव की सीमा से ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। एसएसपी, एसपी देहात,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567058/kapsad-village-transformed-into-a-cantonment----political-tension-increased--no-clue-found-yet-about-the-daughter-kidnapped-after-the-murder--family-gets-a-written-promise"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(27)6.png" alt=""></a><br /><p><strong>मेरठः </strong>मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की क्रूर हत्या और उनकी 18 वर्षीय बेटी रूबी के अपहरण ने पूरे प्रदेश की सियासत को हिला दिया है। गुरुवार सुबह हुई इस वारदात के बाद शुक्रवार को भी पुलिस को अपहृत युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका। नामजद आरोपियों पारस सोम, सुनील और उनके साथियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी।</p><p>इस पूरे घटनाक्रम ने गांव को एक छावनी में बदल दिया। गांव की सीमा से ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा और कुल 500 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ आरआरएफ की टीम भी तैनात रही।</p><p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(28)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (28)" width="1280" height="720"></img></p><h3><strong>सत्ता और विपक्ष आमने-सामने  </strong></h3><p>शुक्रवार सुबह से ही सपा, बसपा, भीम आर्मी और असपा के नेता-कार्यकर्ता गांव पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव की सीमा पर रोक दिया, जिसके बाद वे सड़क पर धरने पर बैठ गए। विधायक ने कहा,  “अगर यह मामला किसी अन्य समुदाय का होता, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता। सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। हम पीड़ित परिवार के साथ न्याय की लड़ाई अंत तक लड़ेंगे।”</p><p>करीब डेढ़ घंटे की नारेबाजी और तनाव के बाद मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और बेटे नरसी भी धरने पर पहुंचे। सबसे दिल दहला देने वाला पल तब आया जब नरसी रोते हुए विधायक अतुल प्रधान से लिपटकर बोला, “विधायक जी, बस इतना बता दो… मेरी बहन वापस आएगी या नहीं?” इस सवाल ने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।</p><p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(31)4.png" alt="MUSKAN DIXIT (31)" width="1280" height="720"></img></p><h3><strong>परिवार का अडिग रुख और अंतिम संस्कार में देरी  </strong></h3><p>परिजनों ने साफ कहा था कि जब तक बेटी रूबी नहीं मिल जाती, सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं होगा। बृहस्पतिवार रात 12 बजे शव गांव पहुंचने के बाद भी परिवार अड़ा रहा।</p><h3><strong>प्रशासन का लिखित वादा और अंतिम संस्कार  </strong></h3><p>करीब 19 घंटे की गहन वार्ता के बाद पूर्व विधायक संगीत सोम, एसपी देहात अभिजीत कुमार और एडीएम सिटी की मौजूदगी में पुलिस ने परिवार को लिखित आश्वासन दिया:  </p><p>- 48 घंटे के भीतर रूबी को तलाश कर लिया जाएगा  <br />- परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में स्थायी नौकरी  <br />- 10 लाख रुपये का चेक तत्काल दिया गया  <br />- परिवार के एक सदस्य को शस्त्र लाइसेंस दिलाया जाएगा  <br />- गांव में स्थायी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था  </p><p>इस वादे के बाद रात करीब 7:45 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार हो सका। बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी।</p><p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(29)6.png" alt="MUSKAN DIXIT (29)" width="1280" height="720"></img></p><h3><strong>क्या हुआ था वारदात?  </strong></h3><p>गुरुवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत जा रही थीं। इसी दौरान गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने फरसे से हमला कर सुनीता की हत्या कर दी और रूबी का अपहरण कर फरार हो गए। उपचार के दौरान मोदीपुरम अस्पताल में सुनीता ने दम तोड़ दिया।</p><p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(30)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (30)" width="1280" height="720"></img></p><h3><strong>डिजिटल इंडिया में भी पुलिस छावनी</strong></h3><p>गांव की गलियों में डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने खुद फ्लैग मार्च निकाला। प्रशासन ने परिवार से पांच दौर की बंद कमरे में बातचीत की।</p><p>यह मामला अब केवल एक हत्या-अपहरण की घटना नहीं रहा—यह दलित परिवार के न्याय, सुरक्षा और सियासी समीकरणों की जंग बन चुका है। अगले 48 घंटे तय करेंगे कि प्रशासन का वादा कितना मजबूत साबित होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>मेरठ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 11:29:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: हजारों नम आंखों ने दी फरीदपुर के ''लाल'' को अंतिम विदाई, शोक में बंद रहा बाजार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>फरीदपुर, अमृत विचार।</strong> गमगीन माहौल में विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का स्टेशन रोड स्थित श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया गया। बेटे ईशान ग्वाल ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।</p>
<p>डॉ. श्याम बिहारी लाल का पार्थिव शरीर उनके फरीदपुर कार्यालय पर दोपहर करीब 1:30 बजे स्वर्गधाम वाहन से पहुंचा। यहां हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने नम आंखों से पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़ को देखकर लग रहा था कि उनकी लोकप्रियता लोगों के दिलों में कूट-कूट कर भरी थी। करीब 42</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566215/thousands-of-teary-eyed-people-bid-a-final-farewell-to-the-%22son%22-of-faridpur--the-market-remained-closed-in-mourning"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/atim.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>फरीदपुर, अमृत विचार।</strong> गमगीन माहौल में विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का स्टेशन रोड स्थित श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया गया। बेटे ईशान ग्वाल ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।</p>
<p>डॉ. श्याम बिहारी लाल का पार्थिव शरीर उनके फरीदपुर कार्यालय पर दोपहर करीब 1:30 बजे स्वर्गधाम वाहन से पहुंचा। यहां हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने नम आंखों से पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़ को देखकर लग रहा था कि उनकी लोकप्रियता लोगों के दिलों में कूट-कूट कर भरी थी। करीब 42 मिनट तक कार्यालय पर अंतिम दर्शन का सिलसिला चला।</p>
<p>इसके बाद स्वर्गधाम वाहन से श्मशान भूमि के लिए अंतिम यात्रा शुरू हुई। स्टेशन रोड पर अस्पताल वाली गली से पार्थिव देह स्वर्गधाम वाहन से उतारकर पार्टी के विधायकों, सांसद समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपना कंधा दिया, इसी तरह श्मशान भूमि तक पहुंचाया। श्मशान भूमि पर बेटियां शिल्पी ग्वाल और शिवानी ग्वाल भी पिता को अंतिम विदाई देने पहुंचीं।</p>
<p><strong>वाहनों को रोककर बाईपास से गुजारा</strong><br />कस्बे में ट्रैफिक पुलिस ने रूट डायवर्ट कर वाहनों को रोककर बाईपास से निकाला। पूरे दिन ट्रैफिक पुलिस और बरेली के तमाम अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>मुख्य बाजार के साथ गलियां भी रहीं बंद</strong><br />विधायक के निधन पर शनिवार को फरीदपुर में सभी व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखे। गलियों में भी दुकानें बंद रहीं। नगर में सबसे व्यस्त रहने वाले स्टेशन रोड तिराहे पर पर भी सन्नाटा रहा।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों, भाजपा, कांग्रेस और सपा नेताओं ने दी अंतिम विदाई</strong><br />डॉ. श्याम बिहारी को अंतिम विदाई देने के लिए भाजपा के अलावा सपा, बसपा और कांग्रेस के भी नेता बड़ी संख्या में पहुंचे। श्मशान भूमि में अंतिम विदाई देने के लिए कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार, गन्ना मंत्री संजय गंगवार, सांसद छत्रपाल गंगवार, शाहजहांपुर सांसद अरुण कुमार सागर, पूर्व परिवहन मंत्री अशोक कटारिया, सिंधौली, सीतापुर विधायक मनीष रावत, एमएलसी हरि सिंह ढिल्लो, एमएलसी कुंवर महाराज सिंह, एमएलसी बहोरन लाल मौर्य, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, विधायक संजीव अग्रवाल, डॉ. डीसी वर्मा, डॉ. राघवेंद्र शर्मा व डॉ. एमपी आर्य, भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, ब्रज क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, मेयर डॉ. उमेश गौतम, आंवला जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह, बरेली जिलाध्यक्ष सोमपाल शर्मा, महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेंद्र देव, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप, पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार, फरीदपुर पालिका अध्यक्ष शराफत जरी बाला व हरिओम गुप्ता, पूनम गुप्ता, डॉ. विनोद पागरानी, मुकेश कुमार गुप्ता, संतोष शर्मा, प्रवीण सिंह ऐरन, अजय शुक्ला, गुलशन आनंद, हरेंद्र पटेल, भूपेंद्र कुर्मी, प्रशांत पटेल, योगेश पटेल, पवन शर्मा, शालिनी सिंह, अनिल कुमार, राजकुमार शर्मा, पूरनलाल लोधी, अरुण कश्यप, उमेश कठेरिया, डॉ. विमल भारद्वाज, संजीव शर्मा के अलावा अन्य पहुंचे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566215/thousands-of-teary-eyed-people-bid-a-final-farewell-to-the-%22son%22-of-faridpur--the-market-remained-closed-in-mourning</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 06:06:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: दिवंगत विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल पंचतत्व में विलीन, समर्थकों और चाहने वालों ने नम आंखों से किया विदा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> फरीदपुर की श्मशान भूमि पर दिवंगत विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। नम आंखों के बीच उनके बेटे ने चिता को मुखाग्नि दी, इसके साथ ही वह पंचतत्व में विलीन हो गए। हर किसी की आंखों में उनके इस तरह अचानक चले जाने का गम साफ झलक रहा था। अंतिम यात्रा में भी तमाम मंत्री और भाजपा के नेता शामिल हुए।<br />  <br />फरीदपुर के विधायक कार्यलय पर उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। शनिवार दोपहर करीब 2 बजकर 13 मिनट पर यहां से अंतिम यात्रा शुरू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566137/the-late-mla-dr--shyam-bihari-was-cremated--and-his-supporters-and-well-wishers-bid-him-farewell-with-tearful-eyes"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/antim.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> फरीदपुर की श्मशान भूमि पर दिवंगत विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। नम आंखों के बीच उनके बेटे ने चिता को मुखाग्नि दी, इसके साथ ही वह पंचतत्व में विलीन हो गए। हर किसी की आंखों में उनके इस तरह अचानक चले जाने का गम साफ झलक रहा था। अंतिम यात्रा में भी तमाम मंत्री और भाजपा के नेता शामिल हुए।<br /> <br />फरीदपुर के विधायक कार्यलय पर उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। शनिवार दोपहर करीब 2 बजकर 13 मिनट पर यहां से अंतिम यात्रा शुरू हुई, जिसमें हजारों की तादाद में विधायक के समर्थक, मंत्री, नेता और आम लोग शामिल हुए। दिवंगत आत्मा को राजकीय सम्मानत देते हुए 3 बजकर 20 मिनट पर श्मशान भूमि पर सलामी दी गई।</p>
<p> 3 बजकर 40 मिनट पर उनके बेटे ने मुखाग्नि दी। इस दौरान सीतापुर के सिधौली से विधायक मनीष राव, शाहजहांपुर सांसद अरुण सागर, जिला पंचायत अध्यक्ष रशमी पटेल, एमलएसी हरी सिंह ढिल्लो, अशोक कटारिया, दिगविजय सिंह शाक्य, विधायक डीसी वर्मा, मेयर उमेश गौतम, मंत्री धर्मपाल सिंह आदि मौजूद रहे।</p>
<p>इससे पहले शक्तिनगर स्थित आवास पर उनका पार्थिव शरीर रखा गया था। जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 10:45 बजे शक्तिनगर आवास पर उनके अंतिम दर्शन को पहुंचे थे। यहां उन्होंने परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत विधायक के लिए एक्स पर भी श्रद्धांजलि संदेश लिखा। आखिरी दर्शन के बाद मुख्यमंत्री रवाना हो गए। इसके बाद तमाम लोग शक्तिनगर स्थित आवास पर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना को आते रहे।</p>
<p>दोपहर को फूलों से सजे वाहन में उनका पार्थिव शरीर रखा गया। शक्तिनगर कॉलोनी से फरीदपुर स्थित विधायक कार्यालय के लिए रवाना किया। उनके पार्थिव शरीर को भाजपा के झंडे में लपेटा गया था। हर कोई विधायक के आकस्मिक निधन से स्तब्ध है। भाजपा कार्यकर्ता और नेता जगह-जगह नम आंखों के साथ उनको अंतिम विदाई देने के लिए खड़े रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566137/the-late-mla-dr--shyam-bihari-was-cremated--and-his-supporters-and-well-wishers-bid-him-farewell-with-tearful-eyes</link>
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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 16:03:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
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                <title>एटा में खुशी का माहौल मातम में बदला, हर्ष फायरिंग ने छीन ली दो जिंदगियां </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>एटा। </strong>उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक शादी समारोह के दौरान गोली लगने से दो नाबालिग लड़कों की मौत हो गयी। पुलिस ने बताया कि नया गांव थानाक्षेत्र के उमई असदनगर गांव में शनिवार रात को एक विवाह समारोह के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में गोलियां चलने से सोहेल (12) और शाहखद (17) गंभीर रूप से घायल हो गये। पुलिस के मुताबिक, दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि शादी के दौरान डीजे बज रहा था और लोग नाच-गाने में व्यस्त थे लेकिन इस दौरान अचानक गोली चली।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/562643/the-atmosphere-of-joy-in-etah-turned-into-mourning--celebratory-firing-took-away-two-lives"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(41)4.png" alt=""></a><br /><p><strong>एटा। </strong>उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक शादी समारोह के दौरान गोली लगने से दो नाबालिग लड़कों की मौत हो गयी। पुलिस ने बताया कि नया गांव थानाक्षेत्र के उमई असदनगर गांव में शनिवार रात को एक विवाह समारोह के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में गोलियां चलने से सोहेल (12) और शाहखद (17) गंभीर रूप से घायल हो गये। पुलिस के मुताबिक, दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि शादी के दौरान डीजे बज रहा था और लोग नाच-गाने में व्यस्त थे लेकिन इस दौरान अचानक गोली चली। पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह मामला हर्ष फायरिंग से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है हालांकि गोली चलने के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच और कार्यक्रम में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, जल्द ही गोली चलाने वाले व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अलीगढ़</category>
                                            <category>एटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 12:20:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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