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                <title>प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो - Amrit Vichar</title>
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                <description>प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल पूरे हुए, कीव पहुंचे विदेशी नेता...देखें VIDEO</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कीव।</strong> रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन वर्ष पूरे होने के बीच सोमवार को यूरोप और कनाडा के कई नेता यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। इस दौरे से युद्धरत राष्ट्र के कुछ सबसे महत्वपूर्ण समर्थकों द्वारा कीव के प्रति समर्थन प्रदर्शित किया गया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो उन विदेशी आगंतुकों में शामिल थे जिनका रेलवे स्टेशन पर यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा और राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ आंद्रेई यरमक ने स्वागत किया। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">On the 3rd anniversary of Russia’s brutal invasion, Europe is in Kyiv.<br /><br />We are in Kyiv today, because Ukraine</p></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/524328/russia-ukraines-three-years-of-war-completed-the-foreign-leaders-reached"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-02/कीव-पहुंचे विदेशी-नेता.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कीव।</strong> रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन वर्ष पूरे होने के बीच सोमवार को यूरोप और कनाडा के कई नेता यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। इस दौरे से युद्धरत राष्ट्र के कुछ सबसे महत्वपूर्ण समर्थकों द्वारा कीव के प्रति समर्थन प्रदर्शित किया गया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो उन विदेशी आगंतुकों में शामिल थे जिनका रेलवे स्टेशन पर यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा और राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ आंद्रेई यरमक ने स्वागत किया। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">On the 3rd anniversary of Russia’s brutal invasion, Europe is in Kyiv.<br /><br />We are in Kyiv today, because Ukraine is Europe.<br /><br />In this fight for survival, it is not only the destiny of Ukraine that is at stake.<br /><br />It’s Europe’s destiny. <a href="https://t.co/s0IaC5WYh6">pic.twitter.com/s0IaC5WYh6</a></p>
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) <a href="https://twitter.com/vonderleyen/status/1893892943712301259?ref_src=twsrc%5Etfw">February 24, 2025</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "यूरोप कीव में है क्योंकि यूक्रेन यूरोप में है।" उन्होंने लिखा, ‘‘अस्तित्व की इस लड़ाई में, केवल यूक्रेन का ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप का भविष्य दांव पर लगा है।’’ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, उत्तरी यूरोपीय देशों के प्रधानमंत्रियों सहित कई नेता युद्ध की वर्षगांठ से जुड़ी बैठकों में भाग लेने और अमेरिकी राष्ट्रपति की नई नीतियों के बीच यूक्रेन को समर्थन देने पर चर्चा करने वाले हैं। कोस्टा ने रविवार को घोषणा की कि वह छह मार्च को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के 27 नेताओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाएंगे जिसमें यूक्रेन बातचीत के एजेंडे पर शीर्ष में होगा। </p>
<p>यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के तीन साल पूरे होने पर कीव के लिए यह एक संवेदनशील समय है, क्योंकि राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की युद्ध के प्रति अमेरिकी नजरिये में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किए गए बदलावों के कारण तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल को देख रहे हैं। अमेरिकी नेता ट्रम्प ने युद्ध को जल्दी खत्म करने के अपने चुनावी वादों को पूरा करने की कोशिश की है, हालांकि ऐसा करने के उनके तरीकों ने यूक्रेन और यूरोप में कई लोगों को चिंतित कर दिया है, जो मानते हैं कि उनका दृष्टिकोण रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति बहुत अधिक समझौतावादी है। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">At Maidan, we honor the fallen—and those still fighting on the frontlines.<br /><br />Europe stands with Ukraine, empowering its brave resistance.<br /><br />Through strength, they will secure a just and lasting peace.<br /><br />A peace worthy of their ultimate sacrifice. <a href="https://t.co/cJzYabfUq9">pic.twitter.com/cJzYabfUq9</a></p>
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) <a href="https://twitter.com/vonderleyen/status/1893962035282444641?ref_src=twsrc%5Etfw">February 24, 2025</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि ट्रंप और पुतिन के बीच आमने-सामने की बैठक की तैयारी चल रही है, और अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे मास्को के साथ राजनयिक संबंधों को फिर से स्थापित करने और आर्थिक सहयोग को फिर से शुरू करने के लिए सहमत हो गए हैं। रविवार को, रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने देश की समाचार एजेंसी ‘तास’ को बताया कि मास्को और वाशिंगटन अगले सप्ताह के अंत में द्विपक्षीय वार्ता जारी रखेंगे, उन्होंने कहा कि रूसी और अमेरिकी पक्षों के बीच संपर्क जारी है। </p>
<p>यूरोपीय संघ के नेताओं को डर है कि यूक्रेन के प्रति ट्रंप के रवैये से कीव के लिए प्रतिकूल समझौता हो सकता है और वे शांति वार्ता में दरकिनार कर दिए जाएंगे, इसलिए वे तेजी से बदलते माहौल के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने में जुट गए हैं। यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनयिक काजा कलास ने सोमवार को जोर देकर कहा कि अमेरिका यूक्रेन या यूरोप की भागीदारी के बिना युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई शांति समझौता नहीं कर सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप प्रशासन का रुख रूस के पक्ष में है।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/524288/trump-administration-sent-usad-employees-out-of-job-on-leave">ट्रंप प्रशासन ने यूएसएड कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा, 1600 को नौकरी से निकाला</a></strong></span></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 16:50:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनाडा में तेज हुई सियासी हलचल, 9 मार्च को होगा नए प्रधानमंत्री का चुनाव...इन नेताओं के नाम रेस में शामिल  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ओटावा।</strong> कनाडा में सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के प्रधानमंत्री के रूप में नए नेता का चुनाव 09 मार्च को होगा, जो देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करेंगे। पार्टी ने शुक्रवार को यह घोषणा की। </p>
<p>सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के नेता एवं अंतरिम प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद इस पद के लिए अभी तक किसी का चयन नहीं हुआ है। अब नए नेता के चुनाव के लिए पार्टी की ओर से बयान सामने आया है। जिसमें कहा गया है कि पार्टी मतदान के बाद 09 मार्च को देश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/515783/canadas-new-prime-minister-will-be-elected-on-march-09%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/canada.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ओटावा।</strong> कनाडा में सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के प्रधानमंत्री के रूप में नए नेता का चुनाव 09 मार्च को होगा, जो देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करेंगे। पार्टी ने शुक्रवार को यह घोषणा की। </p>
<p>सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के नेता एवं अंतरिम प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद इस पद के लिए अभी तक किसी का चयन नहीं हुआ है। अब नए नेता के चुनाव के लिए पार्टी की ओर से बयान सामने आया है। जिसमें कहा गया है कि पार्टी मतदान के बाद 09 मार्च को देश के अगले प्रधानमंत्री की घोषणा करेगी। पार्टी ने एक बयान में कहा, कनाडा की लिबरल पार्टी ने आज घोषणा की कि पार्टी का अगला नेता चुनने की दौड़ 09 मार्च, 2025 को समाप्त होगी। </p>
<p>बयान में कहा गया है कि विजेता की घोषणा उसी दिन की जाएगी। पार्टी ने अपने अध्यक्ष सचित मेहरा के हवाले से कहा, एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया के बाद कनाडा की लिबरल पार्टी 09 मार्च को एक नया नेता चुनेगी और 2025 का चुनाव लड़ने और जीतने के लिए तैयार होगी। यह समय देश भर के उदारवादियों के लिए विचारों का आदान-प्रदान करने और शामिल होने का समय है। हमारी पार्टी और देश के भविष्य को नया स्वरूप देने के लिए विचारशील बहस में - और मैं सभी उदारवादियों को हमारी पार्टी के लिए इस रोमांचक क्षण में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। लिबरल पार्टी की ओर से <em><strong>नए प्रधानमंत्री की दौड़ में पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी और पूर्व वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड का नाम प्रमुख रूप से सबसे आगे चल रहा है।</strong></em> </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/515765/los-angeles-wildfires-houses-of-hollywood-celebrities-burnt-to-ashes">Los Angeles Wildfires : अब तक 10 लोगों की मौत, 10 हजार इमारतें जलक खाक, Moira Shourie ने कहा-'बहुत भयानक तबाही हुई है' </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2025 14:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Canada : जल्द इस्तीफा दे सकते हैं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, पार्टी के भीतर ही बढ़ रहा विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ओटावा। </strong>मीडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी में आंतरिक असंतोष और लोकप्रियता में कमी आने के कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस सप्ताह लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे सकते हैं। ‘ग्लोब एंड मेल’ समाचार पत्र ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रूडो कब पद छोड़ेंगे, लेकिन बुधवार को होने वाली एक अहम बैठक से पहले उनके इस्तीफे की उम्मीद है। ट्रूडो 2015 से कनाडा के प्रधानमंत्री हैं। ट्रूडो पर उनकी लिबरल पार्टी के सांसदों की तरफ से कई महीनों से पद छोड़ने का दबाव बनाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/515051/canadian-prime-minister-trudeau-may-resign-from-the-post-of"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/प्रधानमंत्री-जस्टिन-ट्रूडो.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ओटावा। </strong>मीडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी में आंतरिक असंतोष और लोकप्रियता में कमी आने के कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस सप्ताह लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे सकते हैं। ‘ग्लोब एंड मेल’ समाचार पत्र ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रूडो कब पद छोड़ेंगे, लेकिन बुधवार को होने वाली एक अहम बैठक से पहले उनके इस्तीफे की उम्मीद है। ट्रूडो 2015 से कनाडा के प्रधानमंत्री हैं। ट्रूडो पर उनकी लिबरल पार्टी के सांसदों की तरफ से कई महीनों से पद छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है।</p>
<p>हाल ही में प्रधानमंत्री से बातचीत करने वाले एक सूत्र ने कहा कि 53 वर्षीय ट्रूडो का मानना है कि पार्टी की बैठक (लिबरल कॉकस) से पहले उन्हें एक बयान देने की जरूरत है, ताकि ऐसा नहीं लगे कि उन्हें अपने ही सांसदों द्वारा जबरन हटाया गया है। सूत्रों ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रूडो तुरंत पद छोड़ देंगे या नए नेता के चुने जाने तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि लिबरल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी नेतृत्व के मुद्दों पर निर्णय लेगी और इस सप्ताह उसकी बैठक प्रस्तावित है। </p>
<p>रविवार को एक सूत्र ने कहा कि उनका अनुमान ​​है कि जब तक कोई नया नेता नहीं चुन लिया जाता, ट्रूडो तब तक अपने पद पर बने रहेंगे। लिबरल पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि नेतृत्व का फैसला करने में कम से कम तीन महीने लगेंगे, हालांकि पार्टी संविधान में कम से कम चार महीने का प्रावधान है। ट्रूडो के इस्तीफे की खबर ऐसे समय में आई है जब देश में उनकी लोकप्रियता लगातार घटती जा रही है और अक्टूबर के अंत तक देश में चुनाव होने हैं। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/515011/airstrike-in-sudan-s-capital-khartoum--10-people-killed--30-others-injured">Airstrike: सूडान की राजधानी खार्तूम में हवाई हमला, 10 लोगों की मौत, 30 अन्य घायल</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 12:13:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-कनाडा संबंधों को हुए नुकसान की जिम्मेदारी सिर्फ PM जस्टिन ट्रूडो पर होगी, MEA ने सुनाई की खरी-खरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का अपने देश के जांच आयोग के समक्ष सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भारत के खिलाफ ‘‘ठोस सबूत नहीं होने’’ की बात को स्वीकारना, उसके इस दृढ़ रुख की ‘‘पुष्टि’’ करता है कि कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में ‘‘हमें कोई ठोस सबूत’’ नहीं दिए।</p>
<p>ट्रूडो ने बुधवार को जांच आयोग के समक्ष यह स्वीकार किया था कि जब उन्होंने पिछले साल खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/500157/pm-justin-trudeau-will-be-solely-responsible-for-the-damage"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-10/प्रधानमंत्री-जस्टिन-ट्रूडो1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का अपने देश के जांच आयोग के समक्ष सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भारत के खिलाफ ‘‘ठोस सबूत नहीं होने’’ की बात को स्वीकारना, उसके इस दृढ़ रुख की ‘‘पुष्टि’’ करता है कि कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में ‘‘हमें कोई ठोस सबूत’’ नहीं दिए।</p>
<p>ट्रूडो ने बुधवार को जांच आयोग के समक्ष यह स्वीकार किया था कि जब उन्होंने पिछले साल खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों की संलिप्तता का आरोप लगाया था, तब उनके पास केवल खुफिया जानकारी थी और कोई ‘‘ठोस सबूत’’ नहीं था।</p>
<p>विदेश मंत्रालय (एमईए) ने ट्रूडो के बयान से संबंधित मीडियाकर्मियों के प्रश्नों के जवाब में बृहस्पतिवार तड़के एक बयान जारी किया, जिसके कुछ विवरण मीडिया रिपोर्ट में सामने आए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, आज हमने जो सुना है, उससे हमारी उसी बात की पुष्टि होती है जो हम लगातार कहते आ रहे हैं कि कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उनके समर्थन में उसने कोई सबूत पेश नहीं किया है। मंत्रालय ने कहा, इस लापरवाह व्यवहार से भारत-कनाडा संबंधों को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी जिम्मेदारी अकेले प्रधानमंत्री ट्रूडो की होगी।’’ </p>
<p>संघीय चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं में विदेशी हस्तक्षेप के मामले में सार्वजनिक जांच के समक्ष बयान देते हुए ट्रूडो ने दावा किया था कि भारतीय राजनयिक उन कनाडाई लोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे जो नरेन्द्र मोदी सरकार से असहमत हैं और इसे भारत सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह जैसे आपराधिक संगठनों तक पहुंचा रहे थे। भारत ने कनाडा के अधिकारियों द्वारा भारतीय एजेंटों को कनाडा में आपराधिक गिरोहों से जोड़ने के प्रयासों को दृढ़तापूर्वक खारिज कर दिया। नयी दिल्ली स्थित आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि कनाडा का यह दावा कि उसने निज्जर मामले में भारत के साथ साक्ष्य साझा किए हैं, सरासर गलत है।</p>
<p>नई दिल्ली के सूत्रों ने ट्रूडो के उन पूर्व आरोपों को भी खारिज कर दिया कि भारत उनके देश में कनाडाई नागरिकों को निशाना बनाकर गुप्त अभियान चलाने सहित अन्य गतिविधियों में संलिप्त है। इससे पहले भारत ने सोमवार को छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और निज्जर की हत्या की जांच से भारतीय राजदूत को जोड़ने के कनाडा के आरोपों को खारिज करते हुए देश से अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाने की भी घोषणा की थी। भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक विवाद का बढ़ना दोनों देशों के बीच पहले से ही खराब चल रहे संबंधों में और गिरावट का कारण बन सकता है। पिछले साल सितंबर में ट्रूडो द्वारा निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की ‘‘संभावित’’ संलिप्तता के आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच संबंध गंभीर तनाव में आ गए थे। </p>
<p>भारत ने ट्रूडो के आरोपों को ‘‘बेबुनियाद’’ बनाते हुए इसे खारिज कर दिया था। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच मुख्य मुद्दा यह है कि कनाडा अपनी धरती से गतिविधियां चला रहे खालिस्तान समर्थक तत्वों को बिना किसी रोक-टोक के पनाह दे रहा है। भारत द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए निज्जर की पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/500151/india-believes-canada-does-not-take-violence-terrorism-seriously-justin">भारत का मानना ​​है कि कनाडा हिंसा-आतंकवाद को गंभीरता से नहीं लेता : जस्टिन ट्रूडो</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 12:13:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने कहा-भारत निज्जर मामले की जांच में कनाडा के साथ सहयोग नहीं कर रहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारत पिछले साल एक सिख अलगाववादी की हत्या के मामले में कनाडा की जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, कनाडा के मामले की बात करें तो हमने स्पष्ट कर दिया है कि आरोप बेहद गंभीर हैं और उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हम चाहते थे कि भारत सरकार कनाडा के साथ जांच में सहयोग करे। जाहिर है, उन्होंने वह रास्ता नहीं चुना है।’’ </p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक दिन पहले आरोप लगाया था कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/499888/america-said-india-is-not-cooperating-with-canada-in-the"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-10/जस्टिन-ट्रूडो1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारत पिछले साल एक सिख अलगाववादी की हत्या के मामले में कनाडा की जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, कनाडा के मामले की बात करें तो हमने स्पष्ट कर दिया है कि आरोप बेहद गंभीर हैं और उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हम चाहते थे कि भारत सरकार कनाडा के साथ जांच में सहयोग करे। जाहिर है, उन्होंने वह रास्ता नहीं चुना है।’’ </p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक दिन पहले आरोप लगाया था कि पिछले साल जून में सरे में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के अधिकारी शामिल थे। ट्रूडो ने आरोप लगाया, ‘‘देश के राष्ट्रीय पुलिस बल रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के पास स्पष्ट और पुख्ता सबूत हैं कि भारत सरकार के एजेंट ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और अब भी शामिल हैं जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। इसमें गुप्त सूचना एकत्र करने की तकनीकें, दक्षिण एशियाई कनाडाई लोगों को निशाना बनाने वाला बलपूर्वक व्यवहार और हत्या सहित एक दर्जन से अधिक धमकी भरे और हिंसक कृत्यों में शामिल होना शामिल है। यह अस्वीकार्य है।’’ </p>
<p>इन आरोपों को खारिज करते हुए भारत ने न केवल कनाडा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया, बल्कि नयी दिल्ली से उसके छह राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, ‘‘सितंबर 2023 में प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा कुछ आरोप लगाए जाने के बाद से कनाडा सरकार ने हमारी ओर से कई अनुरोधों के बावजूद भारत सरकार के साथ एक भी सबूत साझा नहीं किया है। यह हालिया कदम उन बातचीत के बाद उठाया गया है जिसमें फिर से बिना किसी तथ्य के दावे किए गए हैं। इससे इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि यह जांच के बहाने राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर भारत को बदनाम करने की एक रणनीति है।’’ </p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ट्रूडो का भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख लंबे समय से देखने को मिल रहा है। ट्रूडो ने 2018 में भारत की यात्रा की थी जिसका मकसद वोट बैंक को साधना था, लेकिन यह यात्रा उन्हें असहज करने वाली साबित हुई। उनके मंत्रिमंडल में ऐसे व्यक्ति शामिल हैं, जो भारत को लेकर चरमपंथी और अलगाववादी एजेंडे से खुले तौर पर जुड़े हुए हैं। दिसंबर 2020 में भारत की आंतरिक राजनीति में उनका स्पष्ट हस्तक्षेप दिखाता है कि वह इस संबंध में कहां तक जाना चाहते थे।’’ </p>
<p>मंत्रालय ने कहा, ‘‘उनकी सरकार एक राजनीतिक दल पर निर्भर थी, जिसके नेता भारत के खिलाफ खुलेआम अलगाववादी विचारधारा का समर्थन करते हैं जिससे मामला और बिगड़ गया। कनाडा की राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप को नजरअंदाज करने के लिए आलोचना झेल रही उनकी सरकार ने नुकसान को कम करने के प्रयास में जानबूझकर भारत को शामिल किया है। भारतीय राजनयिकों को निशाना बनाने वाला यह ताजा घटनाक्रम अब उसी दिशा में अगला कदम है। यह कोई संयोग नहीं है कि यह उस समय हुआ है जब प्रधानमंत्री ट्रूडो को विदेशी हस्तक्षेप पर एक आयोग के समक्ष गवाही देनी है। यह भारत विरोधी अलगाववादी एजेंडे को भी बढ़ावा देता है जिसे ट्रूडो सरकार ने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए लगातार बढ़ावा दिया है।’’ </p>
<p>भारत ने कहा कि ट्रूडो सरकार ने कनाडा में भारतीय राजनयिकों और समुदाय के नेताओं को परेशान करने, धमकाने और भयभीत करने के इरादे से जानबूझकर हिंसक चरमपंथियों और आतंकवादियों को अपने यहां आश्रय दिया है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसमें राजनयिकों और भारतीय नेताओं को जान से मारने की धमकियां देना भी शामिल है। इन सभी गतिविधियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उचित ठहराया गया है। कनाडा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले कुछ व्यक्तियों को नागरिकता देने के लिए तेजी से काम किया गया। कनाडा में रहने वाले आतंकवादियों और संगठित अपराध के नेताओं के संबंध में भारत सरकार की ओर से कई प्रत्यर्पण अनुरोधों की अनदेखी की गई है।’’ </p>
<p>हालांकि, अमेरिका ने भारत-कनाडा कूटनीतिक विवाद पर टिप्पणी करने से परहेज किया। मिलर ने कहा, ‘‘मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन जैसा कि हमने पहले कहा है, ये गंभीर आरोप हैं। और हम चाहते हैं कि भारत इन्हें गंभीरता से ले तथा कनाडा की जांच में सहयोग करे। लेकिन उन्होंने दूसरा रास्ता चुना है।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/499878/sco-summit-2024-pm-shahbaz-sharif-welcomed-jaishankar-posed-for">SCO summit 2024 : PM शहबाज शरीफ ने जयशंकर का किया स्वागत, खिंचवाई फोटो...देखें VIDEO</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 13:04:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कनाडा की व्यापार मंत्री ने भारत के साथ वाणिज्यिक संबंधों को समर्थन देने का दिया आश्वासन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>भारत और कनाडा के बीच अभूतपूर्व कूटनीतिक विवाद के बीच कनाडा की व्यापार मंत्री मैरी एनजी ने मंगलवार को देश के व्यापारिक समुदाय को आश्वस्त किया कि वह दोनों देशों के बीच सुस्थापित वाणिज्यिक संबंधों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। निर्यात संवर्धन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थिक विकास मंत्री एनजी ने बयान में कहा,  मैं अपने व्यापारिक समुदाय को आश्वस्त करना चाहती हूं कि हमारी सरकार कनाडा तथा भारत के बीच सुस्थापित वाणिज्यिक संबंधों को समर्थन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी व्यापार आयुक्त सेवा भारत में कार्यरत कनाडा की कंपनियों को सहायता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/499804/canada-s-trade-minister-assures-support-for-commercial-ties-with-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-10/प्रधानमंत्री-जस्टिन-ट्रूडो.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>भारत और कनाडा के बीच अभूतपूर्व कूटनीतिक विवाद के बीच कनाडा की व्यापार मंत्री मैरी एनजी ने मंगलवार को देश के व्यापारिक समुदाय को आश्वस्त किया कि वह दोनों देशों के बीच सुस्थापित वाणिज्यिक संबंधों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। निर्यात संवर्धन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थिक विकास मंत्री एनजी ने बयान में कहा,  मैं अपने व्यापारिक समुदाय को आश्वस्त करना चाहती हूं कि हमारी सरकार कनाडा तथा भारत के बीच सुस्थापित वाणिज्यिक संबंधों को समर्थन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी व्यापार आयुक्त सेवा भारत में कार्यरत कनाडा की कंपनियों को सहायता तथा संसाधन उपलब्ध कराना जारी रखेगी।’’ एनजी ने यह बात ऐसे समय में कही जब भारत ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए न केवल ओटावा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया, बल्कि भारत से छह कनाडाई राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया है। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ मैं स्पष्ट कर दूं, कनाडा अपने व्यवसायों के साथ मजबूती से खड़ा है। हम भारत के साथ जुड़े कनाडा के सभी उद्यमों के साथ मिलकर काम जारी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये महत्वपूर्ण आर्थिक संबंध मजबूत बने रहें।’’ एनजी ने कहा, ‘‘ हालांकि, हमें कनाडा के नागरिकों की सुरक्षा तथा कानून के शासन को बनाए रखने की आवश्यकता के साथ अपने आर्थिक हितों पर विचार करना चाहिए। हम किसी भी विदेशी सरकार द्वारा हमारी धरती पर कनाडा के नागरिकों को धमकाने, जबरन वसूली करने या नुकसान पहुंचाने के कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम भारत सरकार से कानून तथा न्याय के उन्हीं सिद्धांतों का सम्मान करने का आग्रह करते हैं जो हमारे कार्यों का मार्गदर्शन करते हैं।’’ </p>
<p>मंत्री ने कहा, ‘‘ कनाडा सरकार भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है और हम अपने मूल्यवान संबंधों को जारी रखने के लिए तत्पर हैं।’’ ‘इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन’ के अनुसार, भारत 2022 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कनाडा का नौवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, वैश्विक स्तर पर 13वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा व्यापारिक निर्यात के लिए 14वां सबसे बड़ा गंतव्य था। गौरतलब है कि सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मुद्दे को लेकर भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक विवाद और गहरा गया है। कनाडा ने मामले में कुछ निष्कर्षों के मद्देनजर भारत के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों का संकेत दिया। </p>
<p>प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी चरमपंथी निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की ‘संभावित’ संलिप्तता के पिछले साल सितंबर में आरोप लगाए थे। भारत ने ट्रूडो के आरोपों को ‘बेतुका’ बताते हुए खारिज किया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया। निज्जर की पिछले साल जून में ब्रिटिश कोलंबिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने आरोप लगाया है कि बिश्नोई गिरोह के तार भारत सरकार के उन ‘एजेंटों’ से जुड़े हैं, जो देश में दक्षिण एशियाई समुदाय, विशेष रूप से ‘‘खालिस्तान समर्थक तत्वों’’ को निशाना बना रहे हैं।</p>
<p>कनाडा की सार्वजनिक प्रसारणकर्ता कनाडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी) की रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश के राष्ट्रीय पुलिस बल रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के प्रमुख ने भारत के संदर्भ में चौंकाने वाले आरोप लगाए। इन आरोपों के अनुसार, भारत सरकार के एजेंट कनाडा में हत्याओं सहित ‘‘व्यापक हिंसा’’ में भूमिका निभा रहे हैं। आरसीएमपी के प्रमुख ने चेतावनी दी थी कि इससे ‘‘देश की सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा’’ है। भारत ने छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है और कनाडा से अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को वापस बुलाने की घोषणा की है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें: <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/499632/china-will-build-lunar-space-station-and-explore-habitable-planets">चीन चंद्र अंतरिक्ष स्टेशन का करेगा निर्माण, नई योजना के तहत रहने योग्य ग्रहों का लगाएगा पता</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/499804/canada-s-trade-minister-assures-support-for-commercial-ties-with-india</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 10:54:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाटो सदस्यों में सबसे कम योगदान देने वाला देश बना कनाडा, सामने आई रिपोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की मेजबानी में आयोजित हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर सोमवार को एक प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठन ने कहा कि कनाडा 32 सदस्यीय इस सैन्य गठबंधन में सबसे कम योगदान देने वाले देशों में से एक बन गया है। प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठन 'पॉलिटिको' ने कहा, पिछले कई वर्षों में ओटावा 32 सदस्यीय गठबंधन में सबसे कम योगदान देने वाले देशों में से एक बन गया है। वह घरेलू सैन्य खर्च के लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाम रहा है, नए उपकरण खरीदने के लिए वित्त पोषण देने में नाकाम रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/479182/canada-becomes-the-least-contributing-country-among-nato-members-report"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/प्रधानमंत्री-जस्टिन-ट्रूडो.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की मेजबानी में आयोजित हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर सोमवार को एक प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठन ने कहा कि कनाडा 32 सदस्यीय इस सैन्य गठबंधन में सबसे कम योगदान देने वाले देशों में से एक बन गया है। प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठन 'पॉलिटिको' ने कहा, पिछले कई वर्षों में ओटावा 32 सदस्यीय गठबंधन में सबसे कम योगदान देने वाले देशों में से एक बन गया है। वह घरेलू सैन्य खर्च के लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाम रहा है, नए उपकरण खरीदने के लिए वित्त पोषण देने में नाकाम रहा है और उसके पास इस संबंध में कोई योजना भी नहीं है। </p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस साल के उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए वाशिंगटन पहुंच गए हैं जिसकी औपचारिक शुरुआत मंगलवार को होगी। ट्रूडो के कार्यालय ने बताया कि यहां बैठकों के दौरान वह पूरे यूरोप में नाटो के सामूहिक रक्षा प्रयासों में कनाडा के योगदानों पर प्रकाश डालेंगे। ‘पॉलिटिको’ ने कहा कि नाटो के 12 संस्थापक सदस्यों में से एक कनाडा ने रक्षा पर दो प्रतिशत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) खर्च करने के संकल्प पर 2014 में हस्ताक्षर किए थे। </p>
<p>नाटो सदस्यों की इस लक्ष्य को हासिल करने में धीमी प्रगति रही है लेकिन इस साल 32 में से 23 नाटो सदस्य रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की योजनाओं को लेकर गठबंधन की पूर्वी सीमा पर बढ़ते खतरे के मद्देनजर इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। ‘पॉलिटिको’ के अनुसार, नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान उसके सदस्य कनाडा पर और अधिक नकदी जुटाने पर जोर दे सकते हैं। मीडिया संगठन ने विदेश विभाग के एक पूर्व अधिकारी मैक्स बर्गमैन के हवाले से कहा, ‘‘अब क्या हो रहा है कि हर कोई अधिक खर्च कर रहा है जबकि कनाडा कोशिश भी नहीं कर रहा है।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/479072/avinash-sable-broke-the-national-steeplechase-record-and-finished-sixth">Paris Diamond League 2024 : अविनाश साबले ने राष्ट्रीय स्टीपलचेज में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा, पेरिस डायमंड लीग में रहे छठे स्थान पर </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jul 2024 11:59:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉ. भरत बराई ने कहा- पश्चिम देशों में भारत के बारे में भ्रामक सूचनाएं, झूठी धारणाएं गढ़ी जा रही </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>एक प्रमुख भारतीय अमेरिकी ऑन्कोलॉजिस्ट का कहना है कि भारत में आम चुनावों के बीच पश्चिमी देशों में भारतीय लोकतंत्र के बारे में भ्रामक सूचनाएं और झूठी धारणाएं गढ़ी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम में कुछ लोग अभी भी औपनिवेशिक मानसिकता बरकरार रखे हुए हैं।</p>
<p>शिकागो में रहने वाले डॉ. भरत बराई ने रविवार को दिये एक साक्षात्कार में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर उन सिख अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए निशाना साधा, जो भारत के भीतर और भारतीय नेताओं के खिलाफ हिंसा की खुलकर योजना बनाते हैं और हिंसा का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/465817/misinformation-and-false-notions-are-being-created-about-india-in"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-05/डॉ.-भरत-बराई.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>एक प्रमुख भारतीय अमेरिकी ऑन्कोलॉजिस्ट का कहना है कि भारत में आम चुनावों के बीच पश्चिमी देशों में भारतीय लोकतंत्र के बारे में भ्रामक सूचनाएं और झूठी धारणाएं गढ़ी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम में कुछ लोग अभी भी औपनिवेशिक मानसिकता बरकरार रखे हुए हैं।</p>
<p>शिकागो में रहने वाले डॉ. भरत बराई ने रविवार को दिये एक साक्षात्कार में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर उन सिख अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए निशाना साधा, जो भारत के भीतर और भारतीय नेताओं के खिलाफ हिंसा की खुलकर योजना बनाते हैं और हिंसा का समर्थन करते हैं।</p>
<p>डॉ. बराई ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ''खालिस्तान की समस्या सिर्फ और सिर्फ कनाडा में और थोड़ी बहुत अमेरिका में है। अगर अमेरिकी सरकार उन्हें जमीन का एक टुकड़ा देना चाहती है तो उन्हें खुश रहने दीजिये। आखिरकार वे (खालिस्तानी समर्थक) विदेशी नागरिक हैं। वे या तो अमेरिकी नागरिक हैं या फिर कनाडाई हैं। भारत में क्या हो रहा है उसमें हस्तक्षेप करने का उनके पास क्या अधिकार है?''</p>
<p>उन्होंने कहा, '' अगर वे अपने लिए अलग जमीन चाहते हैं तो ट्रूडो को उन्हें दे देनी चाहिए। अगर अमेरिका सोचता है कि यह एक अच्छा विचार है (तो उन्हें ऐसा करने दीजिए)... हम अब्राहम लिंकन के सामने खड़े हैं। जब दक्षिण (अमेरिका) अलग होना चाहता था तो उन्होंने क्या किया? हमने गृह युद्ध देखा है। वाशिंगटन में उन्हें (लिंकन को) राष्ट्रपिता के रूप में देखा जाता है।'' डॉ. बराई ने कहा, ''यह (खालिस्तान) भारत की समस्या नहीं है। भारतीय सिखों का इसे कोई लेना-देना नहीं है। यह विदेशों में जन्में या विदेशों में रह रहे सिखों और उनमें से भी कुछ चुनिंदा लोगों की धारणा है।''</p>
<p>अमेरिका सहित पश्चिमी देशों में कई समाचार लेखों और टिप्पणियों में भारत के लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकारों को लेकर उठ रहे सवालों के बारे में बराई ने कहा कि लोगों का एक वर्ग भारत के बारे में भ्रामक सूचनाएं और झूठी धारणाएं गढ़ रहा है। डॉ. बराई ने कहा, ''मुझे लगता है कि पश्चिम में कुछ लोग ऐसे हैं, जिनकी अभी भी औपनिवेशिक मानसिकता है। उन्हें अभी भी लगता है कि वह दुनिया के बेताज बादशाह हैं। वे उन लोगों में से एक हैं, जो दुनिया के दूसरे देशों में क्या चल रहा है उसपर अपनी राय रखते हैं और वे अपने आप को अयातुल्ला समझते हैं, जिनकी राय अंतिम होगी।''</p>
<p>उन्होंने कहा, ''लेकिन यह बदला हुआ भारत है। भारत ने पिछले 10 वर्षों में बहुत प्रगति की है। यह दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। सेना की ताकत भी बढ़ी है। भारत अभी वास्तव में गुटनिरपेक्ष बना हुआ है। भारत की अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के साथ दोस्ती है, रूस भी उसका दोस्त है। इसलिए इस तरह की आलोचना से भारत को रोका नहीं जा सकता।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/465635/how-the-cannabis-plant-and-psilocybin-can-help-people-with">भांग का पौधा और साइलोसाइबिन पुराने दर्द से पीड़ित लोगों की कैसे मदद कर सकते हैं?</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 12:08:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>India-Canada Row : 'इंडिया उभरती हुई ताकत, हम अच्छे रिश्ते के लिए प्रतिबद्ध', भारत की सख्ती देख PM जस्टिन ट्रूडो के बदले सुर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>टोरंटो।</strong> कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ करीबी संबंध स्थापित करने को लेकर ‘‘बहुत गंभीर’’ है, क्योंकि उसकी आर्थिक ताकत बढ़ रही है और वह एक अहम भूराजनीतिक भागीदार है, लेकिन वह चाहते हैं कि भारत खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के संबंध में पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए कनाडा के साथ मिलकर काम करे।</p>
<p>ट्रूडो ने ब्रिटिश कोलंबिया में 18 जून को हुई निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की ‘‘संभावित’’ संलिप्तता के आरोप लगाए हैं, जिसके कारण भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/406883/canada-trudeau-is-committed-to-close-relations-with-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-09/justin-trudeau1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोरंटो।</strong> कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ करीबी संबंध स्थापित करने को लेकर ‘‘बहुत गंभीर’’ है, क्योंकि उसकी आर्थिक ताकत बढ़ रही है और वह एक अहम भूराजनीतिक भागीदार है, लेकिन वह चाहते हैं कि भारत खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के संबंध में पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए कनाडा के साथ मिलकर काम करे।</p>
<p>ट्रूडो ने ब्रिटिश कोलंबिया में 18 जून को हुई निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की ‘‘संभावित’’ संलिप्तता के आरोप लगाए हैं, जिसके कारण भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने 2020 में निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था। भारत ने ट्रूडो के आरोपों को ‘‘बेतुका’’ और ‘‘निहित स्वार्थों से प्रेरित’’ बताकर खारिज कर दिया है। उसने इस मामले में एक भारतीय अधिकारी को कनाडा से निष्कासित किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को भारत से निष्कासित कर दिया।</p>
<p>‘द नेशनल पोस्ट’ समाचार पत्र के अनुसार, ट्रूडो ने कहा कि भारत के खिलाफ ‘‘विश्वसनीय आरोपों’’ के बावजूद, कनाडा उसके साथ निकट संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रूडो ने मॉन्ट्रियाल में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनका मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते महत्व को देखते हुए कनाडा और उसके सहयोगियों का उसके साथ ‘‘रचनात्मक और गंभीर तरीके से’’ जुड़े रहना ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण’’ है।</p>
<p>उन्होंने संवाददाताओं से कहा, <em><strong>‘‘भारत एक बढ़ती आर्थिक शक्ति और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक भागीदार है। और जैसा कि हमने पिछले साल अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति में कहा था, हम भारत के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने को लेकर बहुत गंभीर हैं।’</strong></em>’ समाचार पत्र ने ट्रूडो के हवाले से कहा ‘‘साथ ही, कानून के शासन का पालन करने वाले देश के रूप में, हमें इस बात पर जोर देना चाहिए कि भारत को यह सुनिश्चित करने के लिए कनाडा के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है कि इस मामले (निज्जर की हत्या) के पूरे तथ्य सामने आएं।</p>
<p>ट्रूडो ने कहा कि उन्हें अमेरिका से आश्वासन मिला है कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन बृहस्पतिवार को वाशिंगटन में अपने भारतीय समकक्ष के साथ बैठक के दौरान निज्जर की हत्या में भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से भारत पर लगाए गए आरोपों का मामला उठाएंगे। बहरहाल, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ब्लिंकन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच बैठक को लेकर मुहैया कराई गई जानकारी में यह नहीं बताया कि कि दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा राजनयिक गतिरोध पर चर्चा की या नहीं।</p>
<p>ट्रूडो ने कहा, ‘‘अमेरिकी, भारत सरकार से इस बारे में बात करने में हमारे साथ रहे हैं कि भारतीय एजेंटों द्वारा कनाडाई धरती पर एक कनाडाई नागरिक की हत्या करने संबंधी इन विश्वसनीय आरोपों को लेकर कार्रवाई में भारत का शामिल होना कितना आवश्यक है।’’ उन्होंने कहा कि इस बात को सभी लोकतांत्रिक देशों, कानून के शासन का सम्मान करने वाले सभी देशों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कनाडा भारत सरकार के प्रति अपने दृष्टिकोण सहित इस मामले में कानून के शासन में रहते हुए ‘‘एक विचारशील, जिम्मेदार तरीके से’’ आगे बढ़ रहा है। ट्रूडो ने निज्जर की हत्या को लेकर सबसे पहले 18 सितंबर को कनाडाई संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/406864/biden-calls-trump-a-threat-to-democracy">Joe Biden ने Donald Trump को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा, 'अमेरिका को फिर से महान बनाओ' पर दिया जोर</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Sep 2023 12:15:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G-7 नेताओं ने उड़ाया पुतिन का मजाक, रूसी राष्ट्रपति की शर्टलेस तस्वीर देखकर जॉनसन बोले- क्या हम भी अपने कपड़े उतार दें?</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन। G-7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने रविवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मजाक उड़ाया। जर्मनी में इन नेताओं ने लंच के दौरान पुतिन का उस तस्वीर को लेकर मजाक बनाया, जिसमें वह बिना किसी शर्ट के एक घोड़े की सवारी कर रहे हैं। G-7 नेताओं का मजाक उड़ाने का वीडियो वायरल हो रहा है। …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/239217/g7-leaders-mock-putin-over-shirtless-bare-chested-horse-riding-picture"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-06/g-7-leaders-made-fun-of-putin.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बर्लिन।</strong> G-7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने रविवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मजाक उड़ाया। जर्मनी में इन नेताओं ने लंच के दौरान पुतिन का उस तस्वीर को लेकर मजाक बनाया, जिसमें वह बिना किसी शर्ट के एक घोड़े की सवारी कर रहे हैं। G-7 नेताओं का मजाक उड़ाने का वीडियो वायरल हो रहा है। उनके मजाक का वीडियो ऐसे समय में आया है जब रूस और यूक्रेन का युद्ध पांचवे महीने में पहुंच गया है और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पश्चिमी गठबंधन को एकजुट बनाए रखने की कोशिश में हैं।</p> <img class="wp-image-479577 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-06/putin.jpg" alt="रूसी राष्ट्रपति की शर्टलेस तस्वीर" width="1333" height="1000"></img>रूसी राष्ट्रपति की शर्टलेस तस्वीर <p> </p> <p><strong>‘हमें ये दिखाना होगा कि हम पुतिन से ज्यादा मजबूत हैं’</strong><br /> G-7 नेताओं के संग टेबल पर बैठते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मजाक की शुरुआत की। उन्होंने कहा, ‘जैकेट पहने? जैकेट उतारें? क्या हम अपने कपड़े उतार दें?’ इस पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा, ‘फोटो खिचाने का इंतजार कीजिए।’ इस पर बोरिस जॉनसन ने एक बार फिर कहा कि, ‘हमें ये दिखाना होगा कि हम पुतिन से ज्यादा मजबूत हैं’। बाद में इन नेताओं की तस्वीरें भी सामने आईं, जिसमें उन्होंने अपनी जैकेट उतार रखी थी। G-7 के नेता 2009 में खींची गई पुतिन की उस तस्वीर का जिक्र कर रहे थे जिसमें वह साइबेरियन टावा क्षेत्र के पहाड़ों में बिना शर्ट के घोड़े की सवारी कर रहे थे। फोटो में पुतिन एक चेन और चश्मा पहने हुए भी नजर आ रहे हैं।</p> <blockquote class="twitter-tweet"> <p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">G7 leaders laughed at Putin</p> <p>During <a href="https://twitter.com/hashtag/G7?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#G7</a> meeting, leaders joked whether it would be advisable to take off their jackets or even be more naked in order to oppose "formidable" and "tough" image of Putin.</p> <p>Justin Trudeau added:"We will arrange a ride on horseback with bare-chested." <a href="https://t.co/Imq9caA3Oh">pic.twitter.com/Imq9caA3Oh</a></p> <p>— NEXTA (@nexta_tv) <a href="https://twitter.com/nexta_tv/status/1541137929564835844?ref_src=twsrc%5Etfw">June 26, 2022</a></p></blockquote> <p></p> <p><strong>बाइडेन ने नहीं उड़ाया मजाक</strong><br /> जस्टिन ट्रूडो ने पुतिन पर तंज कसते हुए कहा- हम भी बिना शर्ट के घुड़सवारी करते हुए फोटो खिंचाएंगे। मजाक यहीं नहीं रुका। यूरोपीय यूनियन (EU) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा- घोड़े की सवारी बेस्ट है। इस पर बोरिस जॉनसन ने कहा- हमें भी उन्हें अपने पैक्स दिखाने होंगे। हालांकि इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने मजाक उड़ाने में हिस्सा नहीं लिया।</p> <p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/ban-on-sale-of-panipuri-in-kathmandu-valley-of-nepal-know-the-whole-matter/">नेपाल के काठमांडू घाटी में पानीपुरी की बिक्री पर लगा प्रतिबंध, जानें पूरा मामला</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 14:19:02 +0530</pubDate>
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                <title>कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने अमेरिका के गर्भपात फैसले का किया विरोध, अन्य अधिकारों के हनन की जताई आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[टोरंटो। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शनिवार को चेतावनी दी कि गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले से अन्य अधिकारों का भी हनन हो सकता है। ट्रूडो ने संकेत दिए कि उनका देश कनाडा में अमेरिकियों को गर्भपात कराने की अनुमति देना जारी रखेगा। ट्रूडो ने अमेरिकी …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/238557/canadian-pm-justin-trudeau-opposes-americas-abortion-decision-fears-violation-of-other-rights"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-06/justin-trudeau.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोरंटो।</strong> कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शनिवार को चेतावनी दी कि गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले से अन्य अधिकारों का भी हनन हो सकता है। ट्रूडो ने संकेत दिए कि उनका देश कनाडा में अमेरिकियों को गर्भपात कराने की अनुमति देना जारी रखेगा।</p>
<p>ट्रूडो ने अमेरिकी अदालत के फैसले को ”डरावना” करार दिया और चिंता जताई की कि यह निर्णय किसी दिन समलैंगिक संबंधों को दी गई कानूनी मान्यता को वापस लेने का कारण बन सकता है, जिसमें समलैंगिक जोड़ों को मिला शादी का अधिकार भी शामिल है। ट्रूडो ने राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक के बाद रवांडा के किगाली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”हम जानते हैं कि यह न केवल बहुत डरावना है, बल्कि कई महिलाओं के लिए दिल तोड़ देने वाला समय है।”  उन्होंने कहा, ”अमेरिका में पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है, क्या केवल इस दिन को देखने के लिए, क्या केवल इस चिंता में जीने के लिए कि आगे उनके कौन से अधिकार वापस लिए जा सकते हैं।”</p>
<p>ट्रूडो ने कहा, ”यह इस बात की याद दिलाता है कि हमें लोगों के अधिकारों की रक्षा के मामले में किसी भी चीज को हल्के में नहीं लेने, सतर्क रहने और हमेशा महिलाओं के अधिकारों के लिए, समलैंगिक लोगों के अधिकारों के लिए, वंचित और हाशिए पर पड़े लोगों के अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़े होने की आवश्यकता है।” यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी सरकार कनाडा में गर्भपात की अनुमति मांगने वाली अमेरिकी महिलाओं की मदद करेगी, ट्रूडो ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, ”हर रोज कई अमेरिकी कनाडा आते हैं। वे कनाडा में हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। यह निश्चित रूप से कुछ ऐसा है, जो जारी रहेगा।”</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/tech-firm-will-support-workers-on-us-decision-on-abortion/">टेक कंपनियां अमेरिका में गर्भपात को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कर्मियों का करेगी समर्थन</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 12:27:39 +0530</pubDate>
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                <title>Russia-Ukraine War : रूस के खिलाफ कनाडा ने उठाया बड़ा कदम, 40 लोगों पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[ओटावा। कनाडा ने यूक्रेन को सैन्य और मानवीय सहायता देने के साथ रूसी रक्षा क्षेत्र के 19 लोगों सहित 40 रूसी व्यक्तियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के रविवार को कीव में राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह घोषणा की …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/214037/russia-ukraine-war-canada-imposes-sanctions-on-40-russians"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-05/justin-trudeau.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ओटावा।</strong> कनाडा ने यूक्रेन को सैन्य और मानवीय सहायता देने के साथ रूसी रक्षा क्षेत्र के 19 लोगों सहित 40 रूसी व्यक्तियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के रविवार को कीव में राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह घोषणा की हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार को यूक्रेन को और अधिक सैन्य तथा मानवीय सहायता देने की घोषणा करते हुए कहा कि “कनाडा विशेष आर्थिक उपाय विनियमों के तहत रूस पर नए प्रतिबंध लगाएगा।” उन्होंने कहाकि नए प्रतिबंध 27 अप्रैल को लगाए गए उपायों पर आधारित होंगे। उन्होंने कहा कि कनाडा 21 अतिरिक्त रूसी व्यक्तियों सहित व्यापारिक कुलीन वर्ग, रूसी शासन के करीबी सहयोगी तथा रूसी रक्षा क्षेत्र के 19 व्यक्तियों और रूसी सेना को अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष समर्थन देने वाली पांच संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाएगा है।</p>
<p><strong>जापान रूस से आयातित ऊर्जा पर लगाएगा प्रतिबंध </strong><br />
टोक्यो। जापान ने कहा है कि वह रूस से कच्चे तेल के आयात पर ‘सैद्धांतिक रूप से’ प्रतिबंध लगाएगा। अल जजीरा ने सोमवार को यह रिपोर्ट दी हैं। जी 7 के नेताओं के साथ ऑनलाइन बैठक के बाद प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने यह घोषणा करते हुए कहा कि जापान का यह कदम सात देशों के समूह के अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जी 7 के सभी देश यूक्रेन पर हो रहे हमलों को रोकने को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव डालने के लिए अपने नये प्रयास के तहत रूस से तेल आयात पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने पर सहमत है। उन्होंने कहा, “इस समय में जी 7 देशों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।” उल्लेखनीय है कि जापान की रूस से आयातित तेल पर अधिक निर्भरता है इसके बाद वह यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस की आलोचना कर रहा हैं। रूस कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का जापान का पांचवां सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। जापानी सरकार और उसकी कंपनियां रूस में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) परियोजनाओं में हिस्सेदारी हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/missile-attack-on-ukrainian-school-60-feared-dead/">Russia-Ukraine War : यूक्रेन के स्कूल पर मिसाइल हमला, 60 लोगों के मरने की आशंका</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 11:42:21 +0530</pubDate>
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