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                <title>Researcher - Amrit Vichar</title>
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                <description>Researcher RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बढ़ती उम्र की चुनौतियों पर गहराई से नजर: उत्तर प्रदेश में LASI सर्वे के लिए 53 रिसर्चर्स तैयार, 30 जिलों में होगा घर-घर जाकर सर्वेक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, बख्शी का तालाब, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार। </strong>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से देशभर में संचालित “लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (एलएएसआई)” के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में व्यापक सर्वेक्षण की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में लखनऊ जनपद के बख्शी का तालाब क्षेत्र में विभिन्न जिलों से आए 53 युवक एवं युवतियों को शोधकर्ता के रूप में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फील्ड प्रोजेक्ट अधिकारी अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) की प्रतिनिधि लक्ष्मी पटेल ने बताया कि यह अध्ययन भारत सरकार द्वारा समर्थित है। प्रदेश में सर्वे कार्य का संचालन मार्केट एक्सेल डाटा मैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड के</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573367/an-in-depth-look-at-the-challenges-of-aging--53-researchers-prepare-for-lasi-survey-in-uttar-pradesh--door-to-door-survey-in-30-districts"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(62)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, बख्शी का तालाब, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार। </strong>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से देशभर में संचालित “लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (एलएएसआई)” के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में व्यापक सर्वेक्षण की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में लखनऊ जनपद के बख्शी का तालाब क्षेत्र में विभिन्न जिलों से आए 53 युवक एवं युवतियों को शोधकर्ता के रूप में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फील्ड प्रोजेक्ट अधिकारी अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) की प्रतिनिधि लक्ष्मी पटेल ने बताया कि यह अध्ययन भारत सरकार द्वारा समर्थित है। प्रदेश में सर्वे कार्य का संचालन मार्केट एक्सेल डाटा मैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कराया जा रहा है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ती आयु के साथ होने वाले सामाजिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी परिवर्तनों की सटीक जानकारी एकत्र करना है, ताकि भविष्य की नीतियों एवं योजनाओं को जनआवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।</span></p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 फरवरी से प्रारंभ होकर 2 मार्च तक चलेगा। प्रशिक्षण के दौरान शोधकर्ताओं को सर्वे की प्रक्रिया, प्रश्नावली के उपयोग, डिजिटल माध्यम से आंकड़ा संकलन तथा व्यवहारिक संवाद कौशल का विशेष अभ्यास कराया जा रहा है।अध्ययन के अंतर्गत लखनऊ, हरदोई, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखीमपुर सहित प्रदेश के कुल 30 जनपदों में सर्वेक्षण किया जाएगा। गुरुवार को प्रशिक्षण प्राप्त कर रही टीम फील्ड अभ्यास के लिए बीकेटी क्षेत्र के टिकारी एवं भौली गांवों में घर-घर जाकर सर्वे का अभ्यास करेगी।इस अध्ययन से प्राप्त आंकड़े केंद्र सरकार को वरिष्ठ नागरिकों एवं बढ़ती आयु वर्ग की आवश्यकताओं को समझने में सहायता प्रदान करेंगे। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा आर्थिक सहयोग कार्यक्रमों की प्रभावी रूपरेखा तैयार करने में यह अध्ययन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।रीराइट अट्रैरक्टिव हैडिंग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 09:22:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम में बोले सीएम- किसान और महिलाओं के लिए समर्पित भाव से कार्य करें शोधार्थी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत प्रदेश के आकांक्षात्मक विकासखंडों में कार्य कर रहे शोधार्थी स्वयं को योजक के रूप में मानकर पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें। देखें कि आपके विकासखंडों में शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, महिला और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कैसे बेहतरीन कार्य किया जा सकता है।</p>
<p>जो शोधार्थी अपने तीन साल का टेन्योर मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ पूरा करेगा व बेहतरीन शोध प्रबंधन लिखकर प्रस्तुत करेगा, सरकार की ओर से उसे एज रिलेक्सेशन के साथ सरकारी नौकरी में भी वेटेज प्रदान किया जाएगा। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/392588/cm-said-in-the-chief-minister-s-fellowship-program---researchers-should-work-with-dedication-for-education"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/cats51.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत प्रदेश के आकांक्षात्मक विकासखंडों में कार्य कर रहे शोधार्थी स्वयं को योजक के रूप में मानकर पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें। देखें कि आपके विकासखंडों में शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, महिला और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कैसे बेहतरीन कार्य किया जा सकता है।</p>
<p>जो शोधार्थी अपने तीन साल का टेन्योर मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ पूरा करेगा व बेहतरीन शोध प्रबंधन लिखकर प्रस्तुत करेगा, सरकार की ओर से उसे एज रिलेक्सेशन के साथ सरकारी नौकरी में भी वेटेज प्रदान किया जाएगा। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना से संबंधित कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कही। </p>
<h5><strong>आत्मनिर्भर होंगे गांव तो देश भी उसी अनुपात में होगा आत्मनिर्भर</strong></h5>
<p>उन्होंने बताया कि 2018 में नीति आयोग ने देश के 112 जनपदों को आकांक्षात्मक जनपद के रूप में चयनित किया था। इनमें उत्तर प्रदेश के आठ जिले, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, चंदौली, सोनभद्र, चित्रकूट और फतेहपुर जनपद शामिल किये गये। ये वो जनपद थे जो विकास की मुख्य धारा से पीछे छूट गये थे। उत्तर प्रदेश के सभी 8 जनपद देश के 112 आकांक्षात्मक जनपदों की लिस्ट में भी सर्वाधिक पिछड़े स्थान पर थे।</p>
<p>शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधन, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, फाइनेंशियल इन्क्लूजन और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ये जिले पिछड़े थे। मगर ये हर्ष का विषय है कि टीम वर्क और नियमित मॉनीटरिंग के कारण आज हमारे 8 में से 4 जिले देश के टॉप 10 आकांक्षात्मक जनपद में जबकि, टॉप 20 में हमारे सभी 8 जनपद शामिल हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के विकास की धुरी गांव हैं। ग्रामीण व्यवस्था जितना आत्मनिर्भर होगी, देश और प्रदेश भी उसी अनुपात में आत्मनिर्भर होगा।</p>
<h5><strong>लक्ष्य निर्धारित कर पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें शोधार्थी </strong></h5>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि ना तो हमारे पास फंड की कमी है और ना ही मैन पॉवर की। हमारे शोधार्थी जोकि तीन साल के लिए फेलोशिप पर अपने अपने विकासखंडों में कार्य कर रहे हैं वे योजक बनकर कार्य करें। ये सुनिश्चित करें कि हम सरकार की योजनाओं को कैसे जनता के साथ जोड़ सकते हैं। सभी शोधार्थी एक लक्ष्य लेकर चलें कि जबतक उनके फेलोशिप का टेन्योर खत्म हो तबतक उनका ब्लॉक सर्व शिक्षा अभियान में शत प्रतिशत हो, उनका ब्लॉक टीबी मुक्त हो चुका हो।</p>
<p>इसके साथ ही किसानों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी और महिला एवं बालिकाओं से जुड़ी सरकारी स्कीम भी जनता के बीच लेकर जाएं और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करें। ये सुनिश्चित करें कि आपके ब्लॉक के हर गांव के शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे हैं। बेटियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिल रहा है। किसानों को किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना का लाभ मिल रहा है।</p>
<p>आपके विकासखंड में पर्यटन की क्या संभावनाएं हो सकती हैं, ये भी देखें। संचारी रोगों से मुक्त रखने के लिए अपने क्षेत्र में स्वच्छता को लेकर लोगों को जागरूक करें। यही भी सुनिश्चित करें कि आपके क्षेत्र में कैसे बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान की जा सकती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी आवश्यकताओं को भी शासन के अधिकारियों को अवगत कराएं। प्रयास करें कि हर महीने आप 30 ग्राम पंचायतों का दौरा करें और अपनी रिपोर्ट तैयार करें। </p>
<h5><strong>सीडीओ और बीडीओ से लगातार संपर्क में रहें </strong></h5>
<p>मुख्यमंत्री ने शोधार्थियों से कहा कि अपने विकास खंडों को प्रदेश के सामान्य ब्लॉकों की श्रेणी में लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ मेहनत करें, ये आपके लिए एक बड़ा अवसर है। इस कार्य में मदद के लिए आप सभी अपने मुख्य विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के साथ मिलकर अपने जमीनी अनुभवों को साझा करें। सीएम ने कहा कि सरकार योजनाएं चलाती है, मगर जनता को उससे जोड़ने का कार्य कठिन होता है, ऐसे में योजक के रूप में आप कार्य करें। ये सुनिश्चित करें कि सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाएं जमीन पर उतरकर लोगों के जीवन को बदल सके। </p>
<h5><strong>सराहनीय कार्य करने वाले इन शोधार्थियों से सीएम ने किया संवाद</strong></h5>
<p>इस दौरान मुख्यमंत्री ने संभल की रुचि राठौर, लखीमपुर खीरी से सुरेन्द्र कुमार दीक्षित, बस्ती के शिवकुमार, बाराबंकी से डॉ रुचि अवस्थी, बिजनौर से मोनिका और नसीबा देवी से संवाद किया और उनके द्वारा अपने अपने आकांक्षात्मक विकास खंडों में किये गये सराहनीय कार्यों के बारे में जाना।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने इस दौरान ओवरऑल डेल्टा रैंकिंग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए कुशीनगर के विशुनपुरा ब्लॉक को दो करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। इसके अलावा बरेली के मझगांवां ब्लॉक, बदायू के वजीरगंज ब्लॉक, अंबेडकरनगर के भीटी ब्लॉक, बरेली के फतेहगंज ब्लॉक और बलिया के सोहांव ब्लॉक को 60-60 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। उन्होंने आकांक्षात्मक विकास खंडों की प्रगति पुस्तिका 'वार्षिक प्रतिवेदन 2022-23' का विमोचन भी किया। इस अवसर पर प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना, मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र, कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार सहित सभी 100 आकांक्षात्मक विकास खंडों के शोधार्थी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/392585/raja-bhaiya-s-wife-bhanvi-filed-reply-in-divorce-case--made-this-demand#gsc.tab=0">तलाक मामले में राजा भैया की पत्नी भानवी ने दाखिल किया जवाब, कर दी यह मांग</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 15:47:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डार्क मैटर का विस्तृत मानचित्रण आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत की पुष्टि करता है: अनुसंधानकर्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>अनुसंधानकर्ताओं ने अदृश्य डार्क मैटर का विस्तृत मानचित्र तैयार किया है जो आसमान के एक चौथाई हिस्से में फैला है और इसका विस्तार पूरे ब्रह्मांड में है। अटाकामा कॉस्मोलॉजी टेलीस्कोप (एसीटी) के साथ अंतरराष्ट्रीय अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने उक्त मानचित्र तैयार किया है और उनका कहना है कि इससे आइंस्टीन के उस सिद्धांत की पुष्टि हुई है कि कैसे ब्रह्मांड के 14 अरब साल के जीवन काल में संरचनाएं विकसित हुईं ।</p>
<p>इस अनुसंधान पत्र को अभी प्रकाशित नहीं किया गया है और यह एआरएक्सआईवी डॉट ओआरजी में मुद्रण पूर्व अवस्था में प्रकाशित हुआ है और एस्ट्रोफिजिकल जर्नल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/359887/detailed-mapping-of-dark-matter-confirms-einsteins-theory-of-gravity"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/images-(20).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>अनुसंधानकर्ताओं ने अदृश्य डार्क मैटर का विस्तृत मानचित्र तैयार किया है जो आसमान के एक चौथाई हिस्से में फैला है और इसका विस्तार पूरे ब्रह्मांड में है। अटाकामा कॉस्मोलॉजी टेलीस्कोप (एसीटी) के साथ अंतरराष्ट्रीय अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने उक्त मानचित्र तैयार किया है और उनका कहना है कि इससे आइंस्टीन के उस सिद्धांत की पुष्टि हुई है कि कैसे ब्रह्मांड के 14 अरब साल के जीवन काल में संरचनाएं विकसित हुईं ।</p>
<p>इस अनुसंधान पत्र को अभी प्रकाशित नहीं किया गया है और यह एआरएक्सआईवी डॉट ओआरजी में मुद्रण पूर्व अवस्था में प्रकाशित हुआ है और एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए जमा किया गया है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ब्रह्मांड विज्ञान के प्रोफेसर और एसीटी अनुसंधानकर्ताओं की टीम का नेतृत्व कर रहे ब्लैक शेरविन ने कहा, अबतक सबसे अधिक दूरी तक के डॉर्क मैटर का हमने मानचित्रण किया है और स्पष्ट रूप से इस अदृश्य दुनिया की विशेषता को देख सकते हैं।</p>
<p>जो लाखों-करोड़ों प्रकाश वर्ष के दायरे में फैली हैं। उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड के 85 प्रतिशत हिस्से के निर्माण को प्रभावित करने के बावजूद डार्क मैटर का पता लगाना मुश्किल है क्योंकि ये विद्युत चुंबकीय विकिरण जैसे प्रकाश से प्रभावित नहीं है और केवल गुरुत्वाकर्षण से ही इनका पता लगाया जा सकता है।</p>
<p>अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने पता लगाया कि कैसे डार्क मैटर सहित भारी संरचनाओं के गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (सीबीएम)विकिरणों को एक नए द्रव्यमान मानचित्र का निर्माण करने के लिए झुका देते हैं। सीएमबी विकिरण ब्रह्मांड के निर्माण, बिग बैंग (माना जाता है कि मौजूदा ब्रह्मांड का निर्माण एक विशाल धमाके से हुआ) के बाद से निकलने वाला विसरित प्रकाश है, जिसे ब्रह्मांड विज्ञानी ब्रह्मांड की शिशु तस्वीर के रूप में रेखांकित करते हैं।</p>
<p>उक्त घटना को अनुमानत: 14 अरब साल हो गए हैं जिसमें पृथ्वी का जन्म भी शामिल है। माना जाता है कि उससे पहले ब्रह्मांड केवल 3,80,000 साल पुराना था। पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र और खगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक मैथ्यू माधवचेरिल ने कहा, हमने बिग बैंग के बाद बिखरे प्रकाश का इस्तेमाल कर विस्तृत मानचित्र तैयार किया है। टीम ने इसके लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन द्वारा चीली की एंडीज पर्वत की ऊंचाई पर स्थित अटाकामा कॉस्मोलॉजी टेलीस्कोप से एकत्र आंकड़ों का इस्तेमाल किया है।</p>
<p>माधवचेरिल ने कहा, उल्लेखनीय तरीके से यह ब्रह्मांड की दोनों अवस्थाओं, पहली जब वह पिंड के रूप में था और 14 अरब साल पहले हुए बिगबैंग के बाद विस्तार, की दर की गणना को प्रस्तुत करता है जिसकी उम्मीद आप आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के आधार पर हमारे आदर्श मॉडल से करते हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/359875/central-government-modi-is-making-rajasthan-a-land-of-new">राजस्‍थान को नई संभावनाओं और नए अवसरों की धरती बना रही है केंद्र सरकार: मोदी</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 17:00:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>र्बन न्यूट्रल बनने में भारत की मदद करेगा स्मार्ट कैमरा उपकरण : अनुसंधानकर्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंदौर (मध्यप्रदेश)।</strong> इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने एक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान परियोजना के तहत कम लागत वाला स्मार्ट डीएसएलआर कैमरा उपकरण ईजाद किया है। इसकी मदद से किसी ज्वाला में मौजूद चार रासायनिक तत्वों की तस्वीर बारीकी से एक साथ खींची जा सकती है।</p>
<p>अनुसंधान में शामिल आईआईटी इंदौर के एक प्रोफेसर ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रोफेसर का कहना है कि कैमरा उपकरण का इस्तेमाल वाहनों से लेकर अंतरिक्ष यानों तक के इंजन में सुधार के जरिये वायु प्रदूषण घटाने में किया जा सकता है जिससे भारत को वर्ष 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/359804/smart-camera-device-researcher-to-help-india-go-carbon-neutral"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/carbon-farming.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर (मध्यप्रदेश)।</strong> इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने एक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान परियोजना के तहत कम लागत वाला स्मार्ट डीएसएलआर कैमरा उपकरण ईजाद किया है। इसकी मदद से किसी ज्वाला में मौजूद चार रासायनिक तत्वों की तस्वीर बारीकी से एक साथ खींची जा सकती है।</p>
<p>अनुसंधान में शामिल आईआईटी इंदौर के एक प्रोफेसर ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रोफेसर का कहना है कि कैमरा उपकरण का इस्तेमाल वाहनों से लेकर अंतरिक्ष यानों तक के इंजन में सुधार के जरिये वायु प्रदूषण घटाने में किया जा सकता है जिससे भारत को वर्ष 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। कार्बन न्यूट्रल होने का मतलब वातावरण में कार्बन उत्सर्जन और इसके अवशोषित होने के बीच संतुलन स्थापित करना है।</p>
<p>जानकारों के मुताबिक संतुलन का यह उपाय किया जाना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड सरीखी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। आईआईटी इंदौर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र देशमुख ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि उनके संस्थान ने स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय और अमेरिका के नासा-कैल्टेक के सहयोग से करीब तीन साल के अनुसंधान के बाद कम लागत वाला डीएसएलआर कैमरा उपकरण सीएल-फ्लैम विकसित किया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह उपकरण केवल एक डीएसएलआर कैमरे का उपयोग करके किसी ज्वाला में चार रासायनिक तत्वों की कई वर्णक्रम वाली त्रिविमीय तस्वीर एक साथ खींच सकता है, जबकि अभी तक इस वैज्ञानिक छायांकन के लिए चार कैमरों वाले जटिल तंत्र की आवश्यकता होती थी। देशमुख के मुताबिक इस उपकरण की खींची तस्वीरों के विश्लेषण से सामान्य वाहनों से लेकर हवाई जहाजों तथा अंतरिक्ष यानों तक के इंजन और कारखानों के बर्नर में ईंधन के दहन से निकलने वाले तत्वों का अध्ययन किया जा सकता है।</p>
<p>अनुसंधानकर्ता के मुताबिक इस अध्ययन के बूते इंजन और बर्नर में जरूरी सुधार कर दहन के दौरान ईंधनों का अधिकतम और पर्यावरणहितैषी दोहन सुनिश्चित हो सकता है। उन्होंने कहा, इंजन और बर्नर की क्षमता बढ़ने से इनमें पेट्रोलियम ईंधनों की खपत घटेगी जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी।</p>
<p>नतीजतन हमें 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।  देशमुख ने बताया कि अनुसंधानकर्ताओं के पांच सदस्यीय दल के इस कैमरा उपकरण को विकसित करने में करीब 50,000 रुपये की लागत आई है। उन्होंने बताया कि इस उपकरण को एक स्टार्ट-अप की मदद से बाजार में उतारा जा रहा है ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल शुरू हो सके। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/359800/alliance-air-pilots-return-to-work-after-strike-ends">हड़ताल समाप्त, काम पर लौटे अलायंस एयर के पायलट </a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 12:39:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजद्रोहपूर्ण लेख लिखने का मामला : जम्मू की अदालत ने पत्रकार, शोधार्थी पर आरोप तय किए </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जम्मू। </strong>जम्मू की एक विशेष अदालत ने समाचार पोर्टल के लिए राजद्रोहपूर्ण लेख लिखने और प्रकाशित करने के आरोप में एक पत्रकार और विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने पत्रकार पीरजादा फहाद शाह और कश्मीर विश्वविद्यालय के शोधार्थी अब्दुल आला फाजिली के खिलाफ दर्ज मामले की जांच की है, जो इस मामले को आरोप तय करने के चरण तक ले आई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश अश्विनी कुमार ने बृहस्पितवार को शाह और फाजिली के खिलाफ आरोप तय किए। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/352102/jammu-court-frames-charges-against-journalist-researcher-in-case-of"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/18_03_2023-jammu_news_1_23359971.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जम्मू। </strong>जम्मू की एक विशेष अदालत ने समाचार पोर्टल के लिए राजद्रोहपूर्ण लेख लिखने और प्रकाशित करने के आरोप में एक पत्रकार और विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने पत्रकार पीरजादा फहाद शाह और कश्मीर विश्वविद्यालय के शोधार्थी अब्दुल आला फाजिली के खिलाफ दर्ज मामले की जांच की है, जो इस मामले को आरोप तय करने के चरण तक ले आई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश अश्विनी कुमार ने बृहस्पितवार को शाह और फाजिली के खिलाफ आरोप तय किए। यह मामला सीआईजे पुलिस थाने (एसआईए-जम्मू) को पिछले साल चार अप्रैल को प्राप्त जानकारी और फाजिली द्वारा लिखित व डिजिटल पत्रिका (पोर्टल) द कश्मीर वाला में इसके प्रधान संपादक-निदेशक शाह के माध्यम से प्रकाशित द शैकल्स ऑफ़ स्लेवरी विल ब्रेक नामक एक लेख से संबंधित है।</p>
<p>दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने आरोपी के खिलाफ एसआईए द्वारा एकत्रित पर्याप्त सामग्री पर गौर किया तथा फाजिली और शाह के खिलाफ आरोप तय किए। फाजिली पर गैरकानूनी गतिविधियां निवारण (यूएपीए) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/352094/millets-can-help-tackle-the-challenges-of-food-security-pm">मोटा अनाज खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है : प्रधानमंत्री मोदी </a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Mar 2023 13:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या : शोधार्थियों को प्रविधियों का ज्ञान होना जरुरी : प्रो राजेन्द्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार, अयोध्या। </strong>डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ललित कला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय शोध परक विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान के मुख्य अतिथि प्रो. राजेन्द्र पी ममगाई, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग, दून विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों को गुणात्मक शोध के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>कहा कि शोध समस्या के निराकरण के लिए शोध के उद्देश्य, पैरामीटर की उपयोगिता व प्रतिचयन तकनीक के विभिन्न आयामों से परिचित होना होगा। प्रो. ममगाई ने बताया कि आज गुणवत्ता आधारित शोध कार्य की जरूरत है।अध्यक्षता अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/324668/ayodhya-researchers-must-have-knowledge-of-techniques-prof-rajendra"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-12/शोध.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, अयोध्या। </strong>डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ललित कला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय शोध परक विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान के मुख्य अतिथि प्रो. राजेन्द्र पी ममगाई, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग, दून विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों को गुणात्मक शोध के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>कहा कि शोध समस्या के निराकरण के लिए शोध के उद्देश्य, पैरामीटर की उपयोगिता व प्रतिचयन तकनीक के विभिन्न आयामों से परिचित होना होगा। प्रो. ममगाई ने बताया कि आज गुणवत्ता आधारित शोध कार्य की जरूरत है।अध्यक्षता अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास के प्रो. आशुतोष सिन्हा ने की।</p>
<p>उन्होंने बताया कि आज शोध के मौलिक स्वरूप की नितान्त आवश्यकता है। अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार ने भी उद्बोधन दिया। संचालन संयोजिका डा.सरिता द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन डा. प्रिया कुमारी ने किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>यह भी पढ़ें:-<a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/324661/ayodhya-increased-chill-6800-blankets-will-be-distributed-apart-from#gsc.tab=0">अयोध्या : बढ़ी ठिठुरन, 6800 कंबल बांटेगा प्रशासन, निगम के अलाव ठंडे</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अयोध्या</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Dec 2022 20:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आठ साल तक बिना कुछ खाए-पीए जिंदा रह सकता है ये छोटा सा जीव</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ साल पहले एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि इंसान बिना कुछ खाए-पिए करीब 21 दिन तक जिंदा रह सकता है, जबकि अगर सिर्फ पानी न पिए तो 7 दिन तक जिंदा रहता है, पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक जीव ऐसा भी है, जो बिना …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/301745/this-small-creature-can-live-for-eight-years-without-eating-or-drinking-anything"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/capture-942.jpg" alt=""></a><br /><p>कुछ साल पहले एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि इंसान बिना कुछ खाए-पिए करीब 21 दिन तक जिंदा रह सकता है, जबकि अगर सिर्फ पानी न पिए तो 7 दिन तक जिंदा रहता है, पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक जीव ऐसा भी है, जो बिना कुछ खाए-पिए 8 साल तक जिंदा रह सकता है? आइए जानते हैं इस अजीबोगरीब जीव के बारे में…</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/guidelines-for-pet-dogs-know-the-important-rules-of-keeping-a-dog/">कुत्ता पालें…गलतफहमी नहीं, यहां जानिए डॉग पालने की Guidelines, नहीं तो होगी जेल!</a></strong></p>
<p>आमतौर पर अफ्रीका के पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में पाए जाने वाले अर्गस ब्रम्प्टी प्रजाति के टिक (Tick) नामक जीव सालों तक बिना भोजन-पानी के जीवित रह सकते हैं। कुछ महीने पहले ही एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें इस बात का खुलासा किया गया था।</p>
<p>अमेरिका के शोधकर्ता जूलियन शेफर्ड ने करीब 27 साल तक अपनी प्रयोगशाला में इन जीवों पर अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि बिना कुछ खाए-पिए इतने लंबे समय तक किसी जीव का जिंदा रहना विज्ञान की दुनिया में बड़ा दुर्लभ मामला है।</p>
<p>अमेरिका के शोधकर्ता जूलियन शेफर्ड ने करीब 27 साल तक अपनी प्रयोगशाला में इन जीवों पर अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि बिना कुछ खाए-पिए इतने लंबे समय तक किसी जीव का जिंदा रहना विज्ञान की दुनिया में बड़ा दुर्लभ मामला है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूलियन शेफर्ड को साल 1976 में टिक की इस विशेष प्रजाति को किसी ने उपहारस्वरूप दिया था और यही ‘उपहार’ उनकी सबसे खास रिसर्च बन गई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/the-poisonous-serpent-was-sitting-in-the-meter-of-the-bike-you-will-go-to-funfana-after-watching-the-video/">बाइक के मीटर में बैठी थी जहरीली नागिन, Video देख फनफना जाएंगे आप</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 22:07:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IIT Delhi: शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के खिलाफ वीएलपी आधारित बनाया टीका</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के शोधकर्ताओं ने सार्स-सीओवी-2 वायरस जैसे कण (वीएलपी) विकसित किए हैं, जो कोविड-19 के खिलाफ एक संभावित टीके के दावेदार हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वीएलपी ने चूहों में जवाबी प्रतिक्रिया शुरू करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को धोखा दिया, जैसा कि यह सार्स-सीओवी-2 …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/301477/iit-delhi-researchers-make-vlp-based-vaccine-against-kovid-19"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/capture-935.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के शोधकर्ताओं ने सार्स-सीओवी-2 वायरस जैसे कण (वीएलपी) विकसित किए हैं, जो कोविड-19 के खिलाफ एक संभावित टीके के दावेदार हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वीएलपी ने चूहों में जवाबी प्रतिक्रिया शुरू करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को धोखा दिया, जैसा कि यह सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ करता है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें – </strong><a href="https://amritvichar.com/iit-madras-receives-national-intellectual-property-award-will-be-presented-with-cash-trophy-citation/">IIT मद्रास को मिला राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा पुरस्कार, नकद, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र किया जाएगा प्रदान</a></p>
<p>आईआईटी दिल्ली के कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज की मुख्य शोधकर्ता और प्रोफेसर मणिदीपा बनर्जी ने कहा,“दुनिया भर में विकसित अधिकांश वीएलपी ने प्राथमिक प्रतिजन के रूप में केवल सार्स-सीओवी-2 के स्पाइक प्रोटीन का उपयोग किया है। हालांकि, हमारे वीएलपी यथासंभव देशी वायरस की तरह हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें सार्स-सीओवी-2 (एस-स्पाइक, एन-न्यूक्लियोकैप्सिड, एम-मेम्ब्रेन, ई-एनवेलप) के सभी चार संरचनात्मक प्रोटीन होते हैं।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “निष्क्रिय वायरस पर आधारित टीकों का स्वाभाविक रूप से यह लाभ होता है। हालांकि, वीएलपी सुरक्षित हैं क्योंकि वे जीनोम के अभाव के कारण गैर-संक्रामक हैं। टीएचएसटीआई में किए गए पशु प्रयोगों से संकेत मिलता है कि हमारे वीएलपी कई एंटीजन (प्रतिजन) के खिलाफ एक मजबूत अनुकूली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को शुरू करते हैं।”</p>
<p>हरियाणा के फरीदाबाद स्थित ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) के एक दल के साथ मिलकर शोधकर्ताओं ने इस पर काम किया। “वायरस-लाइक पार्टिकल्स ऑफ सार्स-सीओवी-2 एज वायरस सरोगेट्स: मॉर्फोलॉजी, इम्यूनोजेनेसिटी एंड इंटर्नलाइजेशन इन न्यूरोनल सेल्स” शीर्षक वाला अध्ययन हाल ही में “एसीएस इंफेक्शस डिजीजेज” पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, कोविड महामारी फैलने के बाद से शोधकर्ता सार्स-सीओवी-2 वायरस की बेहतर समझ हासिल करने और इसके खिलाफ टीके विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। बनर्जी ने कहा, “टीके वायरस से काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन कुछ लोग जिन्हें टीके लग चुके हैं, वे अब भी कोविड-19 की चपेट में आ जाते हैं।</p>
<p>ऐसे में और बेहतर टीके तथा उपचार विकसित करने के लिए, आदर्श रूप से असल वायरस के साथ प्रयोग किए जाने की आवश्यकता है, जिसे केवल बहुत विशिष्ट प्रयोगशालाओं में ही नियंत्रित तरीके से किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि ऐसे में सुरक्षित और आसान रणनीति वीएलपी का उपयोग करना है जो आणविक नकल हैं जो संक्रामक न होने के साथ ही एक निश्चित वायरस की तरह दिखते और कार्य करते हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें – </strong><a href="https://amritvichar.com/goa-bjp-gets-success-in-by-elections-on-three-zilla-parishad-seats/">Goa: तीन जिला परिषद सीट पर उपचुनाव में भाजपा को मिली सफलता</a></p>
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                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/301477/iit-delhi-researchers-make-vlp-based-vaccine-against-kovid-19</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 17:20:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>करते हैं नाईट शिफ्ट&amp;#8230;आती है नींद तो बदलें खाने का तरीका, एक रिसर्च में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने पहली बार ऐसा शोध किया है, जिसमें यह विश्लेषण किया गया है कि खाने का तरीका काम के दौरान प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करता है। उन्होंने पाया कि सैंडविच या करी जैसे भारी भोजन की बजाय रात की शिफ्ट में काम करने वालों के लिए हल्का-फुल्का नाश्ता करना …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने पहली बार ऐसा शोध किया है, जिसमें यह विश्लेषण किया गया है कि खाने का तरीका काम के दौरान प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करता है। उन्होंने पाया कि सैंडविच या करी जैसे भारी भोजन की बजाय रात की शिफ्ट में काम करने वालों के लिए हल्का-फुल्का नाश्ता करना ज्यादा बेहतर होता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि रात की शिफ्ट में हल्का नाश्ता खाने वाले लोग किसी भी परिस्थिति में जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं और इसके  विपरीत भारी खाना खाने वाले लोगों को नींद आने लगती है।</p>
<p>इस शोध के दौरान प्रतिभागियों को चीज क्रैकर्स और नमकीन दी गई। शिफ्ट में काम करने वाले लाखों लोग शिकायत करते हैं कि रात में खाने की वजह से उनकी डाइट खराब हो गई है। शोध में देखा गया कि नर्सें, जो ज्यादातर लेट शिफ्ट में काम करती हैं, उनमें मोटे होने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसा शरीर की जैविक घड़ी के बिगड़ने के कारण और खाने के खराब विकल्पों के कारण होता है।</p>
<p>प्रमुख शोधकर्ता शार्लोट गुप्ता ने कहा कि कई कंपनियां और उद्योग चौबीसों घंटे काम करने के लिए कर्मचारियों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोग शिफ्ट में खाना खाते हैं ताकि वे जागते रहें। लेकिन,  अब तक किसी भी शोध ने यह नहीं दिखाया है कि यह उनके स्वास्थ्य और प्रदर्शन के लिए अच्छा है या बुरा।  यह पहला अध्ययन है जिसमें दिखाया गया है कि विभिन्न प्रकार के भोजन खाने के बाद कर्मचारी कैसा महसूस करते हैं और उनका प्रदर्शन कैसा रहता है।</p>
<p>पत्रिका न्यूट्रिएंट्स में प्रकाशित शोध में 44 स्वस्थ प्रतिभागियों पर अध्ययन किया गया। ये प्रतिभागी नाइट शिफ्ट में काम नहीं करते थे। इन्हें तीन तरह की टीम में बांटा गया। उन्हें लैब में रात भर जगाकर रखा गया और दिन में सोने के लिए कहा गया। सभी ग्रुप ने 24 घंटे के अंदर 1900 से 2600 कैलोरी का सेवन किया, लेकिन सभी के खाने का समय अलग-अलग था। एक समूह को आधी रात को भारी भोजन दिया गया था और एक समूह को आधी रात को नाश्ता दिया गया था, जैसे  नमकीन, क्रैकर्स,  मूसली बार के साथ एक सेब।</p>
<p>शोधकर्ता ने कहा, हमने प्रतिभागियों से कई सारे परफॉर्मेंस टेस्ट कराए। प्रतिभागियों ने अपने भूख के स्तर, पेट की प्रतिक्रिया और नींद आने की रेटिंग की। आधी रात को नाश्ता करने वाले प्रतिभागियों को अन्य दो समूहों की तुलना में अधिक सक्रियता महसूस हुई।</p>
<p><strong>कार्यों में बेहतर प्रदर्शन किया</strong><br />
शोधकर्ता गुप्ता ने कहा, आधी रात को नाश्ता करने वाले तेजी से प्रतिक्रिया कर रहे थे। हमने उन्हें एक ड्राइविंग टेस्ट दिया और वे सुरक्षित ड्राइविंग कर रहे थे इसलिए कम दुर्घटनाएं हुईं। जिस ग्रुप ने रात में कुछ भी नहीं खाया था वे भारी भोजन करने वालों से ज्यादा सक्रिय थे। लेकिन, जिस ग्रुप ने नाश्ता किया था उन्होंने दोनों ग्रुपों की तुलना में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया।</p>
<p><strong>दिन में खाना न छोड़ें</strong><br />
दिन में भी भारी भोजन करने से नींद आती है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है दिन में खाना न छोड़ें और उसकी जगह नाश्ता न करें। शोधकर्ता ने कहा कि दिन में भारी भोजन आसानी से पच जाता है और इससे नींद आने की समस्या जल्द ही खत्म हो जाती है। यह सिर्फ हमारी जैविक घड़ी के कारण होता है। वहीं, रात में हमारा शरीर भारी भोजन नहीं पचा पाता, इसलिए नाश्ता बेहतर विकल्प होता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/now-there-is-no-tension-of-obesity-allurean-has-launched-capsules-10-15-will-be-able-to-reduce-weight-easily/">मोटापे की अब No टेंशन, एल्यूरियन ने लॉन्च किया कैप्सूल, 10-15% आसानी से घट सकेगा वजन!</a></p>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/277947/lets-do-night-shift-if-sleep-comes-then-change-the-way-of-eating-a-research-revealed</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Sep 2022 14:21:57 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आईआईटी शोधकर्ताओं का दावा- भारत में तीन माह बाद आ सकती है कोरोना की चौथी लहर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की चौथी लहर 22 जून के आसपास आ सकती है और अगस्त के मध्य से अंत तक, यह चरम पर पहुंच सकती है। यह अध्ययन मेडरिव पत्रिका में हाल में प्रकाशित हुआ है और …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/179687/iit-researchers-claim-fourth-wave-of-corona-may-come-in-india-after-three-months"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/corona-93.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की चौथी लहर 22 जून के आसपास आ सकती है और अगस्त के मध्य से अंत तक, यह चरम पर पहुंच सकती है। यह अध्ययन मेडरिव पत्रिका में हाल में प्रकाशित हुआ है और इस पर अभी निष्कर्ष आना बाकी है।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने सांख्किीय मॉडल के आधार पर यह अनुमान जताया है और इसके अनुसार संभावित चौथी लहर करीब चार माह चलेगी। आईआईटी कानपुर के गणित और सांख्यिकी विभाग के साबरा प्रसाद राजेशभाई, सुभ्र शंकर धर और शलभ के नेतृत्व में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि चौथी लहर की गंभीरता कोरोना वायरस के नए संभावित स्वरूप और देश भर में टीकाकरण की स्थिति पर निर्भर करेगी।</p>
<p>अध्ययन के लेखकों के अनुसार कि आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में संक्रमण की चौथी लहर प्रारंभिक आंकड़े उपलब्धता तिथि के 936 दिन बाद आएगी,जो कि 30 जनवरी 2020 है। उन्होंने लिखा,” इसलिए चौथी लहर 22 जून 2022 से शुरू होगी और 23 अगस्त 2022 तक चरम पर पहुंचेगी और फिर 24 अक्टूबर 2022 तक समाप्त हो जाएगी। शोधकर्ताओं ने हालांकि कहा कि इस बात की संभावना हमेशा होती है कि संभावित नए स्वरूप का गहरा असर पूरे आंकलन पर हो।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ये असर रूवरूप की संक्रामकता तथा अन्य विभिन्न कारकों पर निर्भर करेंगे। लेखकों के अनुसार , ” इन तथ्य के अलावा संक्रमण, संक्रमण का स्तर और चौथी लहर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर टीकाकरण -पहली, दूसरी अथवा बूस्टर खुराक का प्रभाव अहम भूमिका निभा सकता है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल में आगाह किया था कि कोरोना वायरस का ओमीक्रोन स्वरूप अंतिम स्वरूप नहीं होगा और अगला स्वरूप अधिक संक्रामक हो सकता है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े-</strong></p>
<p><a href="https://amritvichar.com/russia-ukraine-war-talks-between-ukraine-and-russia-will-take-place-in-belarus-at-3-30-pm/">Russia Ukraine War: दोपहर 3.30 बजे बेलारूस में यूक्रेन और रूस के बीच होगी बातचीत</a></p>
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                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/179687/iit-researchers-claim-fourth-wave-of-corona-may-come-in-india-after-three-months</link>
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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 09:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आईआईटी खड़गपुर में 60 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित</title>
                                    <description><![CDATA[खड़गपुर, पश्चिम बंगाल। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के परिसर में रहने वाले 40 छात्रों और शोधकर्ताओं सहित 60 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। आईआईटी खड़गपुर के रजिस्टार तामल नाथ ने मंगलवार को बताया कि अधिकतर संक्रमितों में मामूली लक्षण हैं और वे घर पर पृथक-वास में रह रहे हैं या प्रतिष्ठित …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>खड़गपुर, पश्चिम बंगाल।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के परिसर में रहने वाले 40 छात्रों और शोधकर्ताओं सहित 60 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। आईआईटी खड़गपुर के रजिस्टार तामल नाथ ने मंगलवार को बताया कि अधिकतर संक्रमितों में मामूली लक्षण हैं और वे घर पर पृथक-वास में रह रहे हैं या प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान के छात्रावासों में बनाए गए पृथक-वास केन्द्र में हैं। छात्र-शोधकर्ताओं के अलावा गैर-शिक्षण कर्मचारी तथा संकाय के 20 सदस्य संक्रमित पाए गए हैं।</p>
<p>नाथ ने बताया कि परिसर में स्थिति नियंत्रण में है और परिसर में बने अस्पताल के कर्मचारी ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम आईआईटी खड़गपुर परिवार से अनुरोध करते हैं कि संक्रमण का कोई लक्षण महसूस होने पर जांच कराएं। वे हमारे सुझाव का पालन कर रहे हैं।</p>
<p>इसी तरह ही 60 लोगों के संक्रमित होने की जानकारी मिली। हम दुनिया से बाहर नहीं हैं। हर जगह कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं, हमें भी इस स्थिति का सामना करना होगा। संस्थान के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 27 दिसंबर के बाद से लगभग 2000 छात्र परिसर में आए हैं, लेकिन संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद फिलहाल और छात्र यहां नहीं आ रहे हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title"><a href="https://amritvichar.com/andhra-pradesh-cm-meets-gadkari-other-union-ministers-in-delhi/">आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गडकरी, अन्य केंद्रीय मंत्रियों से दिल्ली में की मुलाकात</a></p>
<p class="post-excerpt">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/155755/60-people-infected-with-corona-virus-in-iit-kharagpur</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Jan 2022 16:51:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओमीक्रोन स्वरूप का पता लगाने वाले रिसर्चर्स को मिली धमकी, जांच में लगी पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[जोहानिसबर्ग। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस एजेंसियां कोविड-19 के अग्रणी अनुसंधानकर्ताओं को मिली धमकियों की जांच कर रही हैं। इनमें वह दल भी शामिल है जिसने सबसे पहले महामारी के ओमीक्रोन स्वरूप की पहचान की थी। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस सेवा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विष्णु नायडू ने ‘संडे टाइम्स’ को बताया कि राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के कार्यालय को …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/145119/police-is-investigating-the-threat-received-by-the-researcher-who-traced-the-omicron-form"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-12/untitled-2-12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जोहानिसबर्ग।</strong> दक्षिण अफ्रीकी पुलिस एजेंसियां कोविड-19 के अग्रणी अनुसंधानकर्ताओं को मिली धमकियों की जांच कर रही हैं। इनमें वह दल भी शामिल है जिसने सबसे पहले महामारी के ओमीक्रोन स्वरूप की पहचान की थी। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस सेवा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विष्णु नायडू ने ‘संडे टाइम्स’ को बताया कि राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के कार्यालय को धमकी भरा पत्र मिला जिसमें प्रोफेसर तुलियो डी ओलिविएरा समेत कई अग्रणी कोविड-19 अनुसंधानकर्ताओं का जिक्र था। इस मामले की जांच की जा रही है।</p>
<p>प्रोफेसर ओलिविएरा ने उस दल की अगुवाई की थी जिसने ओमीक्रोन स्वरूप का पता लगाने की घोषणा की थी। नायडू ने साप्ताहिक पत्रिका से कहा, ”यह मामला एक हफ्ते पहले हमारे संज्ञान में आया। शिकायकर्ताओं के राष्ट्रीय कोरोना कमांड परिषद के सलाहकार होने के कारण इस मामले को प्राथमिकता दी गयी है।”</p>
<p>राष्ट्रपति के प्रवक्ता टायरोने सिएले ने पत्र के बारे में जानकारियां नहीं दी हैं लेकिन कहा कि इसमें ऊपर ‘चेतावनी’ लिखा था। स्टेलेनबोश विश्वविद्यालय ने बताया कि उसने सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रोफेसर ओलिविएरा इसी विश्वविद्यालय में काम करते हैं। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मार्टिन विल्जोन ने कहा, “यह निंदनीय है कि वैज्ञानिकों को निशाना बनाया जा रहा है।”</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Dec 2021 13:13:37 +0530</pubDate>
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