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                <title>mohan bhagwat - Amrit Vichar</title>
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                <description>mohan bhagwat RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत को समझने के लिए संस्कृत का समझना जरूरी... बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत- 'यह राष्ट्र की आत्मा'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने देश में संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार की सोमवार को पुरजोर वकालत की और कहा कि इसके प्रसार में वृद्धि न केवल अन्य सभी भारतीय भाषाओं को समृद्ध करेगी और उनके बीच एक सेतु का काम करेगी, बल्कि लोगों को भारत के प्राचीन विचारों और संस्कृति से भी जोड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने 'संस्कृत भारती' के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'भारत' नाम केवल भौगोलिक नहीं है। उन्होंने कहा, ''भारत एक परंपरा है, एक आधार है जिस पर जीवन का प्रवाह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579389/understanding-sanskrit-is-essential-to-understand-india----says-rss-chief-mohan-bhagwat---it-is-the-soul-of-the-nation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/081.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने देश में संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार की सोमवार को पुरजोर वकालत की और कहा कि इसके प्रसार में वृद्धि न केवल अन्य सभी भारतीय भाषाओं को समृद्ध करेगी और उनके बीच एक सेतु का काम करेगी, बल्कि लोगों को भारत के प्राचीन विचारों और संस्कृति से भी जोड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने 'संस्कृत भारती' के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'भारत' नाम केवल भौगोलिक नहीं है। उन्होंने कहा, ''भारत एक परंपरा है, एक आधार है जिस पर जीवन का प्रवाह निरंतर बना रहता है। यह एक ऐसी परंपरा है जो संपूर्ण ब्रह्मांड में जीवन को बनाए रखती है, जिसमें इसके सभी सजीव और निर्जीव घटक शामिल हैं। विश्व को इस परंपरा की निरंतर आवश्यकता है और इस आवश्यकता को पूरा करना उन लोगों का कर्तव्य है जो स्वयं को भारतीय मानते हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने कहा कि इसके लिए 'भारत को जानना और समझना' आवश्यक है, साथ ही इसके 'ज्ञान की संपूर्ण संपदा' को भी समझना होगा, ताकि इसे जीवंत रखा जा सके और आगे बढ़ाया जा सके।'' उन्होंने कहा, ''यदि ये सब करना है, तो भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना अनिवार्य है। भारत में अनेक भाषाएं हैं। भारत की प्रत्येक भाषा अपने आप में एक राष्ट्र भाषा है। लेकिन इन विविध राष्ट्र भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी क्या है? वह है संस्कृत।'' </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने संस्कृत भारती से देश में संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास करने का आह्वान किया और कहा कि इस दिशा में कार्य इतना आगे बढ़ना चाहिए कि भारत का हर व्यक्ति संस्कृत में बातचीत करने में सक्षम हो सके। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं है। भारत में संस्कृत राष्ट्र के 'प्राण' हैं। विचार, जीवन और संस्कृति की जो सबसे प्राचीन परंपरा आज भी विद्यमान है-वह भारत ही है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रसार से भारत की अन्य सभी भाषाएं समृद्ध होंगी, क्योंकि उनका मूल 'भाव एक ही है'। भागवत ने कहा कि संस्कृत किसी अन्य भाषा को प्रतिस्थापित करके स्वयं को स्थापित नहीं करती। संस्कृत भारती आरएसएस का एक सहयोगी संगठन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:19:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'भारत मौजूदा युद्ध को समाप्त कर सकता है' : मध्य पूर्व अशांति पर बोले संघ प्रमुख- देश की जनता मानवता को मानती है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत ने शुक्रवार को नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के विदर्भ प्रांत कार्यालय के शिलान्यास समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक अस्थिरता को दूर करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत मौजूदा युद्ध को समाप्त कर सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते वैश्विक संघर्षों पर बोलते हुए भगवत ने कहा कि दुनिया धर्म की नींव पर संतुलन बहाल करने के लिए तेजी से भारत की ओर देख रही है। विभिन्न देशों से आ रही आवाजें मौजूदा युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत की ओर मध्यस्थता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575899/-india-can-end-the-current-war---rss-chief-speaks-on-middle-east-unrest%E2%80%94the-people-of-this-country-uphold-humanity"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/23.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत ने शुक्रवार को नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के विदर्भ प्रांत कार्यालय के शिलान्यास समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक अस्थिरता को दूर करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत मौजूदा युद्ध को समाप्त कर सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते वैश्विक संघर्षों पर बोलते हुए भगवत ने कहा कि दुनिया धर्म की नींव पर संतुलन बहाल करने के लिए तेजी से भारत की ओर देख रही है। विभिन्न देशों से आ रही आवाजें मौजूदा युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत की ओर मध्यस्थता की ओर देख रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उल्लेख किया कि अब यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि मध्य पूर्व की अंतर्निहित प्रकृति के कारण केवल भारत ही वहां शांति स्थापित करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि धर्म की नींव प्रदान करके लड़खड़ाती दुनिया में संतुलन बहाल करना भारत का दायित्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य की तीखी आलोचना करते हुए, आरएसएस प्रमुख ने भारत के ऐतिहासिक मूल्यों, विशेष रूप से 'मानवता के कानून,' की तुलना उस 'जंगल के कानून' से की जो वर्तमान में वैश्विक मामलों पर हावी है। उन्होंने भेड़िये और मेमने की पारंपरिक कहानी का उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे अक्सर आक्रामकता को जायज ठहराने के लिए शक्ति का दुरुपयोग किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवत ने कहा कि सशक्त नैतिक बल के अभाव में, सत्य और निर्दोषता को अक्सर श्रेष्ठ शारीरिक या सैन्य शक्ति वाले लोग दबा देते हैं। मध्य पूर्व और यूरोप में चल रहे युद्धों का जिक्र करते हुए, आरएसएस प्रमुख ने भारतीय हस्तक्षेप की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अपेक्षा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2,000 वर्षों से विभिन्न विचारधाराएं स्थायी शांति लाने में विफल रही हैं क्योंकि उनमें परस्पर जुड़ाव और एकता की नींव का अभाव रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने स्वार्थ और क्षेत्रीय या वैश्विक प्रभुत्व की लालसा को आधुनिक संघर्षों का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने लड़खड़ाती दुनिया को स्थिर आधार प्रदान करना एक आपस में जुड़ा कर्तव्य बताया। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक सभी शांति में नहीं होंगे, तब तक सच्ची वैश्विक खुशी असंभव है। उन्होंने इस दर्शन को सनातन धर्म और भारतीय संविधान की प्रस्तावना का मूल बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से परे, भागवत ने भारतीय समाज में आंतरिक शक्ति और नैतिक आचरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत में जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म सहित विभिन्न धर्मों के दर्शन भले ही भिन्न हों, लेकिन वे सभी एक ही नैतिक आचार संहिता पर केंद्रित हैं: सत्य, चोरी न करना और दूसरों की सेवा करना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 21:05:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मोहन भागवत Go back .. लखनऊ विश्वविद्यालय में संघ के शताब्दी समारोह में हंगामा, RSS प्रमुख के खिलाफ लगे नारे </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लखनऊ प्रवास पर पहुंचे। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय दौरे के दौरान बुधवार को परिसर में हंगामा हो गया। कार्यक्रम स्थल के बाहर एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस से जुड़े छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और 'गो बैक' के नारे लगाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, मोहन भागवत संघ के शताब्दी समारोह के तहत विश्वविद्यालय पहुंचे थे। उनके आगमन से पहले ही एनएसयूआई और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।  प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572134/mohan-bhagwat--go-back----ruckus-at-rss-centenary-celebrations-at-lucknow-university--slogans-raised-against-rss-chief"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(41)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लखनऊ प्रवास पर पहुंचे। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय दौरे के दौरान बुधवार को परिसर में हंगामा हो गया। कार्यक्रम स्थल के बाहर एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस से जुड़े छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और 'गो बैक' के नारे लगाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, मोहन भागवत संघ के शताब्दी समारोह के तहत विश्वविद्यालय पहुंचे थे। उनके आगमन से पहले ही एनएसयूआई और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।  प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस बल ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया और कार्यक्रम निर्धारित कार्यक्रमानुसार संपन्न हुआ। वहीं प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि वे विश्वविद्यालय परिसर में संघ प्रमुख के आगमन का विरोध कर रहे थे। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में कुछ समय तक तनाव का माहौल रहा, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई।यूजीसी कानून के विरोध में छात्रों ने भागवत के खिलाफ प्रदर्शन किया।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/572113/the-world-s-first-airmail-service-started-from-prayagraj--completing-115-years-on-february-18th">प्रयागराज से शुरू हुई थी दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा, 18 फरवरी को पूरे हुए 115 वर्ष</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/572134/mohan-bhagwat--go-back----ruckus-at-rss-centenary-celebrations-at-lucknow-university--slogans-raised-against-rss-chief</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 17:40:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UGC के नए नियम पर मोहन भागवत का बड़ा बयान : कानून सभी को मानना चाहिए, यदि गलत है तो बदलने का उपाय भी है...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>यूजीसी के समता संवर्धन कानून को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/571991/mohan-bhagwat-s-big-statement-on-the-new-ugc-rule--everyone-should-follow-the-law--if-it-is-wrong-then-there-is-a-way-to-change-it-"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/mohan-bhagawat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>यूजीसी के समता संवर्धन कानून को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित औऱ सशक्त होने की आवश्यकता है। हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है। हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">सर संघचालक ने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं। इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है। उन्होंने कहा कि सद्भाव न रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है। उन्होंने कहा कि जो विरोधी हैं, उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते। एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरसंघचालक ने कहा कि घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह मातायें तय करती थी। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है। पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है, हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. भागवत ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है। उन्होंने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव से जुड़ी बैठकें नियमित होनी चाहिए। हम आपस में मिलेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार की बैठकों में रूढ़ियों से मुक्त होने पर चर्चा होनी चाहिए। जो समस्याएं सामने आएं, उनको दूर करने का प्रयास होना चाहिए। जो दुर्बल है, उनकी सहायता करना चाहिए। सर संघचालक ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा। एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 20:33:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शताब्दी समारोह में बोले संघ प्रमुख : सभी को विश्वास में लेकर हो यूसीसी का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को बनाते समय सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए और इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। हाल में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भागवत ने कहा कि समझौतों में लेन-देन होता है। उन्होंने कहा, ''यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए... हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें नुकसान न हो।'' हिं</p>
<p style="text-align:justify;">दुत्व विचारक वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की मांग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570479/rss-chief-speaks-at-centenary-celebrations--ucc-should-be-drafted-by-taking-everyone-into-confidence"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/mohan-bhagwat2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को बनाते समय सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए और इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। हाल में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भागवत ने कहा कि समझौतों में लेन-देन होता है। उन्होंने कहा, ''यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए... हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें नुकसान न हो।'' हिं</p>
<p style="text-align:justify;">दुत्व विचारक वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की मांग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सावरकर को यह पुरस्कार दिए जाने से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। भागवत ने यह भी कहा कि आरएसएस के लिए 'अच्छे दिन' स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और वैचारिक नीतियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण आये हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 14:29:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विभाजन इसलिए हुआ, क्योंकि 'हिंदू भाव' को भुला दिया गया : RSS के कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि भारत का विभाजन इसलिए हुआ, क्योंकि "हिंदू भाव" को भुला दिया गया था। मुंबई में 'संघ की 100 साल की यात्रा : नये क्षितिज' कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को संवाद के बिना नहीं समझा जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि "स्वदेशी" आवश्यक है, लेकिन वैश्विक निर्भरता भी जरूरी है और ऐसी निर्भरता "टैरिफ (शुल्क)" से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। भागवत ने कहा, "धर्म के कारण विभाजन हुआ। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। कुछ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570440/the-partition-happened-because-the--hindu-sentiment--was-forgotten--mohan-bhagwat-said-at-an-rss-event"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/cats68.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि भारत का विभाजन इसलिए हुआ, क्योंकि "हिंदू भाव" को भुला दिया गया था। मुंबई में 'संघ की 100 साल की यात्रा : नये क्षितिज' कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को संवाद के बिना नहीं समझा जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि "स्वदेशी" आवश्यक है, लेकिन वैश्विक निर्भरता भी जरूरी है और ऐसी निर्भरता "टैरिफ (शुल्क)" से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। भागवत ने कहा, "धर्म के कारण विभाजन हुआ। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। कुछ लोग कहते हैं कि यह गलत था। भारत में इस्लाम और ईसाई धर्म आज भी मौजूद हैं। झड़पें होती हैं, लेकिन देश एकजुट रहा है... 'हिंदू भाव का विस्मरण' भारत के विभाजन का कारण बना।" </p>
<p style="text-align:justify;">संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, "हिंदुत्व को अपनाकर आप कुछ भी नहीं गंवाते, न तो अपनी धार्मिक प्रथा और न ही अपनी भाषा। हिंदुत्व आपकी सुरक्षा की गारंटी है।" </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने कहा कि किसी व्यक्ति का धर्म, खान-पान की आदतें और भाषा अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी समाज, संस्कृति और राष्ट्र के रूप में एक हैं। उन्होंने कहा, "हम इसे 'हिंदुत्व' कहते हैं और आप इसे 'भारतीयता' कह सकते हैं।" संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता एक गलत वाक्यांश है, क्योंकि "आप दो (अलग-अलग) लोगों को एकजुट कर रहे हैं, न कि उन्हें जो पहले से ही एक हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आरएसएस को समझने के लिए संवाद जरूरी है और संगठन की प्रकृति को धारणा एवं दुष्प्रचार के आधार पर नहीं समझा जा सकता। भागवत ने कहा कि अगर तथ्यात्मक आधार पर संघ का कोई विरोध है, तो "हम सुधार करेंगे", लेकिन "तथ्यों को जानने के लिए आपको हमारे पास आना होगा।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की ताकत को सक्रिय करने की आवश्यकता है और हमें एक-दूसरे का पूरक बनने की जरूरत है। भागवत ने कहा कि परिवारों के भीतर संवाद जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युवा पीढ़ी नशे की लत में न पड़े या उसके दिमाग में आत्महत्या जैसा विचार न आए। उन्होंने कहा कि "स्व का गौरव" और "स्व का बोध" आवश्यक है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 21:36:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले- भारत जब तक धर्म के मार्ग पर चलता रहेगा, तब तक 'विश्वगुरु' बना रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, देश 'विश्वगुरु' बना रहेगा। भागवत ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाया जाता। उन्होंने कहा कि धर्म ही पूरे ब्रह्मांड को चलाता है और सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है। </p>
<p style="text-align:justify;">आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से एक समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर विरासत में मिली है और साधु-संतों से मार्गदर्शन मिलता रहा है। भागवत ने कहा कि धर्म केवल धार्मिकता तक सीमित नहीं है और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568209/rss-chief-mohan-bhagwat-said-that-as-long-as-india-follows-the-path-of-righteousness--it-will-remain-a--world-leader"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/मोहन-भागवत.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, देश 'विश्वगुरु' बना रहेगा। भागवत ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाया जाता। उन्होंने कहा कि धर्म ही पूरे ब्रह्मांड को चलाता है और सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है। </p>
<p style="text-align:justify;">आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से एक समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर विरासत में मिली है और साधु-संतों से मार्गदर्शन मिलता रहा है। भागवत ने कहा कि धर्म केवल धार्मिकता तक सीमित नहीं है और प्रकृति में हर किसी का अपना नैतिक कर्तव्य व अनुशासन होता है। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक भारत 'विश्वगुरु' बना रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया के पास इस तरह का ज्ञान नहीं है, क्योंकि उसमें आध्यात्मिकता की कमी है। उन्होंने कहा, ''यह हमारे पूर्वजों की विरासत है, जो हमें मिली है।'' भागवत ने कहा, ''चाहे वह नरेन्द्र भाई हों, मैं हूं, आप हों या कोई और, हम सभी को एक ही शक्ति चला रही है। यदि वाहन उस शक्ति से चले, तो कभी कोई दुर्घटना नहीं होगी। वह चालक धर्म है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ, तो इसके क्रियाकलापों को संचालित करने वाले नियम ही धर्म बन गए। भागवत ने कहा कि धर्म केवल धार्मिकता तक सीमित नहीं है और प्रकृति में हर किसी का अपना नैतिक कर्तव्य व अनुशासन होता है। भागवत ने कहा, "पानी का धर्म है बहना, आग का धर्म है जलाना। पुत्र का कर्तव्य है, शासक का कर्तव्य है और आचार-व्यवहार के नियम होते हैं। हमारे पूर्वजों ने इन नियमों को आध्यात्मिक शोध और महान प्रयासों के माध्यम से समझा।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उस अहंकार से बचने का आग्रह किया, जो किए जा रहे पवित्र कार्य को बिगाड़ सकता है। भागवत ने कहा, ''हमें अहंकार से मुक्त होने की आवश्यकता है।'' भागवत ने एक कुम्हार के गधे की एक कहानी भी साझा की, जो एक मूर्ति ढोते समय यह गलती से मान बैठा कि गांववाले उसे नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि गधा सम्मान की उम्मीद करने लगा और जब उसने सम्मान मांगा, तो उसे पीटा गया। भागवत ने कहा कि भारत ने समय-समय पर दुनिया को धर्म दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, '' हमारे पास किताबें और वक्ता हैं, लेकिन धर्म असल में जीवन में अमल में लाया जाता है और इसका अनुसरण किया जाता है।'' उन्होंने कहा, "धर्म सत्य पर आधारित है, और जो लोग लगातार उस सत्य के साथ जीते हैं, वे ऋषि होते हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम ऋषियों को सुरक्षा प्रदान करें और उनकी गरिमा बनाए रखें। यहां तक कि हमारे देश के प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि ऋषि को न कहना उनके लिए एक अजीब पल होता है।" </p>
<p style="text-align:justify;">आध्यात्मिक और भौतिक भूमिकाओं के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए, भागवत ने कहा कि यह एक बहुत पवित्र कार्य है, और ''हम केवल उन आध्यात्मिक व्यक्तियों की रक्षा करते हैं, जो सच्चे नेता होते हैं''। उन्होंने कहा, "हम भी रक्षक हैं; हम नेतृत्व नहीं करते। आध्यात्मिक लोग ही सच्चे नेता होते हैं। उन्हें ऐसा करने में सक्षम होना चाहिए, और हम केवल उनकी रक्षा करते हैं। हम ही दरवाजे की रक्षा करने वाले हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि राज्य धर्मनिरपेक्ष हो सकता है, लेकिन कोई भी मानव या कोई भी सृष्टि धर्म रहित नहीं हो सकती। भागवत ने सेवा में लगे लोगों से अहंकार त्यागने और सामूहिक भावना को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, "यहां इतने सारे लोग हैं, और हम सभी अच्छा काम कर रहे हैं। 'मैं' की मानसिकता में फंसने के बजाय, हमें 'हम' की मानसिकता अपनानी चाहिए।" भागवत ने चेतावनी दी कि कुछ लोग ऐसे कार्यों को खराब करने की कोशिश करेंगे, लेकिन यदि आप अच्छा काम कर रहे हैं, तो परिणाम की अपेक्षा न करें, बल्कि अच्छे की नीयत से काम करते रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 19:50:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आरएसएस समय के साथ विकसित हो रहा है, नए रूप धारण कर रहा है : मोहन भागवत </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ “धीरे-धीरे विकसित हो रहा है” और “बस सामने आ रहा है”। आरएसएस प्रमुख यहां संगठन के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जो आगामी फिल्म ‘शतक’ के गीत संग्रह के विमोचन के लिए आयोजित किया गया था। यह फिल्म आरएसएस के 100 साल के सफर का वर्णन करती है। इस अवसर पर गायक सुखविंदर सिंह, निर्देशक आशीष मॉल, सह-निर्माता आशीष तिवारी और आरएसएस के पदाधिकारी भैयाजी जोशी उपस्थित थे। </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567205/the-rss-is-evolving-with-time--taking-on-new-forms--mohan-bhagwat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/मोहन-भागवत.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ “धीरे-धीरे विकसित हो रहा है” और “बस सामने आ रहा है”। आरएसएस प्रमुख यहां संगठन के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जो आगामी फिल्म ‘शतक’ के गीत संग्रह के विमोचन के लिए आयोजित किया गया था। यह फिल्म आरएसएस के 100 साल के सफर का वर्णन करती है। इस अवसर पर गायक सुखविंदर सिंह, निर्देशक आशीष मॉल, सह-निर्माता आशीष तिवारी और आरएसएस के पदाधिकारी भैयाजी जोशी उपस्थित थे। </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने अपने संबोधन में कहा, “संगठन (आरएसएस) अपनी शताब्दी मना रहा है। लेकिन जैसे-जैसे संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है, लोग इसे बदलते हुए देखते हैं। हालांकि, वास्तव में यह बदल नहीं रहा है; यह बस धीरे-धीरे विकसित हो रहा है।” उन्होंने कहा, “जिस प्रकार बीज से अंकुर निकलता है और फल-फूलों से लदा परिपक्व वृक्ष एक अलग रूप धारण कर लेता है, उसी प्रकार ये दोनों रूप भिन्न हैं। फिर भी, वृक्ष मूलतः उसी बीज के समान है जिससे वह उगा है।” </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे और उन्होंने अपना जीवन बचपन से ही राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया था। उन्होंने कहा, “संघ और डॉक्टर साहब (हेडगेवार) पर्यायवाची शब्द हैं।” संघ प्रमुख ने कहा कि हेडगेवार महज 11 साल के थे जब उनके माता-पिता की प्लेग से मृत्यु हो गई, लेकिन “उन्हें उस उम्र में या बाद में भी संवाद करने या अपने मन की बात कहने के लिए कोई नहीं मिला।” </p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने कहा कि जब इतनी कम उम्र में ऐसा बड़ा सदमा लगता है, तो व्यक्ति अकेला हो जाता है और उसके स्वभाव और व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन हेडगेवार के साथ ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “उनके व्यक्तित्व में एक ऐसी क्षमता थी कि वे अपने विश्वास या स्वभाव को जरा भी विचलित किए बिना बड़े से बड़े झटकों को भी सह सकते थे – यह उत्कृष्ट मानसिक स्वास्थ्य, एक मजबूत और स्वस्थ मन का संकेत था, जो उनमें शुरू से ही मौजूद था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि डॉक्टर साहब का मनोविज्ञान भी अध्ययन और शोध का विषय हो सकता है।”  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 16:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मथुरा : 7 दिवसीय प्रवास पर कान्हा की नगरी पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत, आगामी एजेंडों पर होगा महामंथन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मथुरा। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार को धर्मनगरी मथुरा पहुंचे। उनके आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मथुरा रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद संघ प्रमुख सीधे वृंदावन स्थित केशव धाम के लिए रवाना हुए। वे यहां चार जनवरी से 10 जनवरी तक सात दिवसीय प्रवास पर रहेंगे।</p>
<p>मोहन भागवत का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे वृंदावन के केशव धाम में आयोजित होने वाली संघ की 7 दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में संघ के सह-सरकार्यवाह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566248/mathura--rss-chief-mohan-bhagwat-arrives-in-the-city-of-lord-krishna-for-a-7-day-visit--major-discussions-will-be-held-on-upcoming-agendas"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/मोहन-भागवत.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मथुरा। </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार को धर्मनगरी मथुरा पहुंचे। उनके आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मथुरा रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद संघ प्रमुख सीधे वृंदावन स्थित केशव धाम के लिए रवाना हुए। वे यहां चार जनवरी से 10 जनवरी तक सात दिवसीय प्रवास पर रहेंगे।</p>
<p>मोहन भागवत का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे वृंदावन के केशव धाम में आयोजित होने वाली संघ की 7 दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में संघ के सह-सरकार्यवाह सहित देश भर के लगभग 50 वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में संघ के विभिन्न प्रकल्पों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी। </p>
<p>साथ ही, आगामी वर्ष के लिए संगठन के विस्तार और सामाजिक समरसता जैसे महत्वपूर्ण एजेंडों पर गहन मंथन होगा। बैठक में संगठन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की जाएगी। सात दिनों के प्रवास के दौरान मोहन भागवत केवल संगठनात्मक बैठकों तक ही सीमित नहीं रहेंगे। वे वृंदावन में अक्षयपात्र संस्था द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। </p>
<p>इसके अतिरिक्त, वे वृंदावन स्थित सुदामा कुटी के शताब्दी समारोह में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, जिसे लेकर संत समाज में भारी उत्साह है। संघ प्रमुख के इस प्रवास के दौरान मथुरा में बड़े राजनीतिक जमावड़े की भी संभावना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि देश के गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वृंदावन पहुंचकर मोहन भागवत से मुलाकात कर सकते हैं। </p>
<p>हालांकि, इन मुलाकातों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां मुस्तैद हैं। मोहन भागवत की सुरक्षा को देखते हुए मथुरा-वृंदावन मार्ग और केशव धाम के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। एलआईयू और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं। केशव धाम परिसर को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि सात दिवसीय बैठक शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>मथुरा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:01:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीराम मंदिर के लिए प्राण न्योछावर करने वालों की आत्मा तृप्त हुई होगी-मोहन भागवत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार : </strong>रामनगरी अयोध्या में भगवान श्रीराम के राम मंदिर का भव्य और दिव्य ध्वजारोहण हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि, इसके लिए जितने लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में विधि-विधान करके, मंदिर के शिखर पर केसरिया लहराने लहराया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में करोड़ों देशवासी इन ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी के बने। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(74)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (74)" width="1200" height="720" /></p>
<p>आरएसएस के एक्स हैंडल पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की प्रतिक्रिया से जुड़ा एक पोस्ट शेयर किया गया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561121/the-souls-of-those-who-sacrificed-their-lives-for-the-shri-ram-temple-must-have-been-satisfied--mohan-bhagwat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/muskan-dixit-(74)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार : </strong>रामनगरी अयोध्या में भगवान श्रीराम के राम मंदिर का भव्य और दिव्य ध्वजारोहण हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि, इसके लिए जितने लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में विधि-विधान करके, मंदिर के शिखर पर केसरिया लहराने लहराया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में करोड़ों देशवासी इन ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी के बने। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(74)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (74)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आरएसएस के एक्स हैंडल पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की प्रतिक्रिया से जुड़ा एक पोस्ट शेयर किया गया। इसमें कहा गया कि, "आज हम सबके लिए सार्थकता का दिन है। इसके लिए जितने लोगों ने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। आज मंदिर का ध्वजारोहण हो गया। मंदिर की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। राम राज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था, जो पूरी दुनिया में अपने आलोक से समृद्धि प्रदान करता था, वह आज धीरे-धीरे ऊपर उठते हुए अपनी आंखों से देखा है। इस भगवा ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है।”</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(76)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (76)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ये पल कंधे से कंधा मिलाने का है, ये पल गति बढ़ाने का है. हमें वो भारत बनाना है जो रामराज्य से प्रेरित हो और ये तभी संभव है, जब स्वयंहित से पहले देशहित होगा, जब राष्ट्रहित सर्वोपरि रहेगा"</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(77)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (77)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>पीएम ने कहा कि, "अयोध्या के पावन धाम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे.....भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।"</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(78).png" alt="MUSKAN DIXIT (78)" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>फोटो गैलरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 15:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'जैसा सपना देखा था, उससे भी भव्य और दिव्य राम मंदिर बना है': मोहन भागवत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या। </strong>उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ श्रीराम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण के लिए पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 500 सालों का सपना साकार हुआ है। हमने जैसा सपना देखा था बिल्कुल वैसा ही या उससे भव्य मंदिर बन गया है इसके लिए सबको शुभकामनाए देता हूं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(26)7.jpg" alt="Untitled design (26)" width="1200" height="720" /></p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया अदा किया और कहा, "आज हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। इतने लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए उनको शांति मिली होगी। अशोक सिंघल जी को शांति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561097/-the-ram-temple-has-been-built-even-more-grand-and-divine-than-we-had-dreamt-of---mohan-bhagwat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/muskan-dixit-(63)2.png" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या। </strong>उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ श्रीराम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण के लिए पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 500 सालों का सपना साकार हुआ है। हमने जैसा सपना देखा था बिल्कुल वैसा ही या उससे भव्य मंदिर बन गया है इसके लिए सबको शुभकामनाए देता हूं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(26)7.jpg" alt="Untitled design (26)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया अदा किया और कहा, "आज हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। इतने लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए उनको शांति मिली होगी। अशोक सिंघल जी को शांति मिली होगी। आज करोड़ों लोगों की आस्था साकार हुई।" </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(34)18.png" alt="MUSKAN DIXIT (34)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>भागवत ने कहा कि लोगों को लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा थी। आज धर्मध्वज को नीचे से ऊपर शिखर पर विराजमान होते हुए देखा है। मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को ऊपर पहुंचाया है। इससे सबका जीवन अच्छा चलेगा। यह धर्म ध्वज है। इसपर रघुकुल का प्रतीक चिह्न भी है। यह रघुकुल की छाया का प्रतीक है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(48)11.png" alt="MUSKAN DIXIT (48)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां हों धर्म ध्वजा को हमेशा ऊपर रखना है। बिना थके सूर्य भगवान प्रतिदिन दर्शन करते हैं। कार्य की सिद्धि के लिए गतिमान होना ज़रूरी है। हमको सामर्थ्यवान भारत खड़ा करना है। यह धर्म और ज्ञान पूरी दुनिया में बाटने का काम शुरू हो गया है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(24)8.jpg" alt="Untitled design (24)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इस देश में जन्म लेने वाले लोगों ने धर्म के रास्ते पर चलने की सीख दी है। सबके लिए समान सुख देने वाला भारत खड़ा करना है। जैसा सपना देखा था बिल्कुल वैसा ही या उससे भव्य मंदिर बन गया है इसके लिए सबको शुभकामनाए देता हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/561097/-the-ram-temple-has-been-built-even-more-grand-and-divine-than-we-had-dreamt-of---mohan-bhagwat</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 13:51:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> धर्म ध्वजा लहराई...  त्रेतायुग का अहसास करा रही अयोध्या, तस्वीरों में देखिये क्या है खासियत </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार। </strong>विवाह पंचमी के अवसर पर आज प्रभु श्री राम जन्मभूमि चमक दमक रही है। आपको बता दें कि मार्गशीर्ष के महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। इस बार विवाह पंचमी आज के दिन यानि 25 नवम्बर मंगलवार को है। मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(7)10.jpg" alt="Untitled design (7)" width="1200" height="720" /></p>
<p style="text-align:justify;">इस उत्सव को खासतौर से नेपाल और मिथिलांचल में भी मनाया जाता है। विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी माता सीता की उपासना करनी चाहिए। बालकाण्ड में राम-सीता के विवाह प्रसंग का पाठ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561084/the-religious-flag-was-hoisted----ayodhya-is-giving-the-feeling-of-treta-yuga--see-what-is-special-in-the-pictures"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/untitled-design-(21)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार। </strong>विवाह पंचमी के अवसर पर आज प्रभु श्री राम जन्मभूमि चमक दमक रही है। आपको बता दें कि मार्गशीर्ष के महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। इस बार विवाह पंचमी आज के दिन यानि 25 नवम्बर मंगलवार को है। मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(7)10.jpg" alt="Untitled design (7)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस उत्सव को खासतौर से नेपाल और मिथिलांचल में भी मनाया जाता है। विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी माता सीता की उपासना करनी चाहिए। बालकाण्ड में राम-सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करने से पारिवारिक जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आती है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(8)10.jpg" alt="Untitled design (8)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">विवाह पंचमी के अवसर पर अयोध्या में इस बार बेहद खास और आध्यात्मिक क्षण है</h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(9)10.jpg" alt="Untitled design (9)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस बार विवाह पंचम पर अयोध्या जी में रामलला मंदिर के शिखर पर अभिजीत मुहूर्त में धर्म ध्वजारोहण का विशाल कार्यक्रम किया गया है, जो मंदिर की भव्यता और दिव्यता दर्शा रहा है ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है राम जन्मभूमि के खास आकर्षण, देखें  </h4>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से तैयार किया गया यह ध्वज 22 फुट लंबा और 11 फुट चौड़ा है, जिसे इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करने के लिए मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा। ध्वज का निर्माण अहमदाबाद के एक पैराशूट विशेषज्ञ ने किया है। दो से तीन किलोग्राम वजनी यह ध्वज 161 फुट ऊँचे मंदिर शिखर और 42 फुट ऊँचे ध्वजदंड पर लगने वाली हवाओं और मौसमीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">श्रीराम मंदिर पर ध्वजारोहण से पहले धर्म ध्वजा की पहली तस्वीर </h4>
<p style="text-align:justify;">ध्वज पर अंकित तेजस्वी सूर्य भगवान राम के तेज, पराक्रम और दिव्य प्रभाव का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त 'ॐ' चिन्ह और वृक्ष की आकृति भी इस ध्वज पर उकेरी गई है, जो आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देती है। </p>
<p style="text-align:justify;">धर्म ध्वजा शुद्ध केसरिया रंग की है जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात सामान्यतः 3:2 या 2:1 आयताकार है। ऊपरी हिस्से में दो भागों में कटा हुआ (द्वि-शिखर या त्रिकोणीय कटाव) होता है, जिसे "केंशुआ" या "दो पूँछ" कहते हैं। इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति है जो कि ॐ के साथ या बिना ॐ के रूप में अंकित है। इसमें  रेशम, सूती या सिंथेटिक का इस्तेमाल किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(6)10.jpg" alt="Untitled design (6)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">जिसे पूजा अर्चना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यह सनातन धर्म की विजय-पताका मानी जाती है, जिसे "जय पताका" भी कहते हैं। ॐ/स्वास्तिक चिह्न ही धर्म ध्वजा की पहचान हैं। यही वह पताका है जिसे ऋग्वेद में "जय पताका", रामायण-महाभारत में विजय-ध्वज और इतिहास में हजारों वर्षों तक भारतीय सनातन शक्ति का प्रतीक माना गया है।</p>
<h5>‘एक नए युग की शुरुआत’ CM योगी आदित्यनाथ</h5>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण को “एक नए युग की शुरुआत” बताया।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(25)6.jpg" alt="Untitled design (25)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>उन्होंने इस कार्यक्रम में मौजूद रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत तथा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का धन्यवाद किया।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(22)9.jpg" alt="Untitled design (22)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आगंतुकों को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान राम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की “आस्था, सम्मान और आत्म-गौरव” का प्रतीक है। उन्होंने इसके निर्माण में योगदान देने वाले सभी “कर्मयोगियों” का दिल से आभार व्यक्त किया।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(24)8.jpg" alt="Untitled design (24)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>उन्होंने कहा कि यह दिन ‘‘उन संतों, योद्धाओं और राम भक्तों की “अटूट भक्ति” को समर्पित है जिन्होंने इस आंदोलन और लंबे संघर्ष के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिसका नतीजा मंदिर के निर्माण के रूप में सामने आया।’’ </p>
<h5 style="text-align:justify;">ध्वजारोहण पर मोहन भागवत </h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(23)9.jpg" alt="Untitled design (23)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी के लिए एक अच्छा दिन है, बहुत से लोगों ने इसका सपना देखा। इसके लिए अपनी जान दी, आज उनकी आत्मा को शांति मिली। </p>
<h4 style="text-align:justify;">विवाह पंचमी का शुभ मुहूर्त </h4>
<h5 style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य एसएस. नागपाल बताते हैं कि इस तिथि में घरों और मंदिरों में उत्सव होते हैं। राम व सीता का पारंपरिक रूप से गठबंधन किया जाता है।</h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(11)10.jpg" alt="Untitled design (11)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">अगर विवाह में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न हो रही है, तो इस दिन व्रत रखें। मनचाहे विवाह का वरदान प्राप्त होता है।  </h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(20)10.jpg" alt="Untitled design (20)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);">पंचमी तिथि आरंभ: 25 नवंबर</span></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>सर्वार्थ सिद्धि योग:</strong> शिववास योग: शुभ योग रहेगा</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूजा शुभ मुहूर्त </strong>: प्रात:काल से दोपहर तक पंचमी का शुभ समय श्रेष्ठ है</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अभिजित मुहूर्त </strong>11 बजकर 52 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक सर्वश्रेठ समय है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पांचवीं बार अयोध्या आने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री</h4>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या विवाद शुरू होने के बाद अब तक अयोध्या ने कई इतिहास रचे है। कभी आंदोलन को लेकर तो कभी सृजन को लेकर। एक बार फिर अयोध्या इतिहास रचने के मुहाने पर है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(12)10.jpg" alt="Untitled design (12)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस बार अयोध्या से नए युग की शुरूआत होने वाली है। इस बार अयोध्या के साथ प्रधानमंत्री मोदी भी नया इतिहास बनाने वाले हैं। वह देश के पहले प्रघधानमंत्री हैं तो सवा पांच साल में पांच बार अयोध्या पहुंचे। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(13)10.jpg" alt="Untitled design (13)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">पहले बार वह 20 अगस्त 2020 को श्री राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करने पहुंचे थे।</h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(14)9.jpg" alt="Untitled design (14)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">दूसरी बार 30 दिंसंबर 2023 को अयोध्या एयरपोर्ट सहित अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण करने पहुंचे थे। </h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(15)10.jpg" alt="Untitled design (15)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">तीसरी बार वह 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने पहुंचे </h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(16)10.jpg" alt="Untitled design (16)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">फिर लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को रोड करने के साथ राम लला का दर्शन करने पहुंचे थे।</h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(17)10.jpg" alt="Untitled design (17)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;">10 हजार झंडों से भगवामय हुई रामनगरी </h4>
<h5 style="text-align:justify;">राममंदिर पर ध्वजारोहण के अवसर पर पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने भी 10 हजार भगवा झंडे तैयार करवाये हैं।</h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(18)11.jpg" alt="Untitled design (18)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">यह भगवा ध्वज अयोध्या/फैजाबाद के सभी वार्डों सहित रामपथ, धर्मपथ आदि पर सजाए-फहराए जा रहे हैं।</h5>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/untitled-design-(19)10.jpg" alt="Untitled design (19)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;">पूर्व सांसद की योजना सोमवार रात में ही रामनगरी को भगवामय कर देने के लिए बड़ी संख्या में लोग लगा दिए गए थे।</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>राम मंदिर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 13:02:18 +0530</pubDate>
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