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                <title>Bharat Ratna - Amrit Vichar</title>
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                <description>Bharat Ratna RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कानपुर अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को मिले भारत रत्न, भाजपा सांसद ने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रमेश अवस्थी ने महान पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को भारत रत्न से विभूषित करने की मांग की है। सांसद अवस्थी ने शनिवार को गणेश शंकर विद्यार्थी की ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सांसद ने फीलखाना स्थित ऐतिहासिक प्रताप प्रेस तथा नई सड़क चौबेगोला स्थित शहादत स्थल पहुंचकर निरीक्षण किया और विद्यार्थी जी के राष्ट्र निर्माण एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान को याद किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी केवल कानपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582234/kanpur--martyr-ganesh-shankar-vidyarthi-should-be-awarded-bharat-ratna%E2%80%94bjp-mp-demands"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/068.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रमेश अवस्थी ने महान पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को भारत रत्न से विभूषित करने की मांग की है। सांसद अवस्थी ने शनिवार को गणेश शंकर विद्यार्थी की ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सांसद ने फीलखाना स्थित ऐतिहासिक प्रताप प्रेस तथा नई सड़क चौबेगोला स्थित शहादत स्थल पहुंचकर निरीक्षण किया और विद्यार्थी जी के राष्ट्र निर्माण एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान को याद किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी केवल कानपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने अपने निर्भीक लेखन और राष्ट्रवादी विचारों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि "प्रताप" समाचार पत्र केवल एक अखबार नहीं था, बल्कि वह स्वतंत्रता संग्राम की मजबूत आवाज था, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनजागरण का महत्वपूर्ण कार्य किया।</p>
<p style="text-align:justify;">सांसद ने बताया कि उन्होंने संसद में भी गणेश शंकर विद्यार्थी को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना था कि विद्यार्थी जी का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने योग्य है और आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों तथा बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">रमेश अवस्थी ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी प्रताप प्रेस की स्मृतियों को पुनर्जीवित करने के लिए वह संकल्पबद्ध हैं और इस दिशा में सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई सड़क चौबेगोला स्थित शहादत स्थल को भव्य और प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इस दौरान प्रताप प्रेस और गणेश शंकर विद्यार्थी की विरासत से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने सांसद के प्रयासों की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रताप वैश्विक शोध संस्थान की ओर से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रमेश वर्मा, भारतेंदु पुरी, सुधांशु त्रिपाठी, शांतनु त्रिपाठी, उमेश शुक्ला और सुनील साहू ने सांसद रमेश अवस्थी के आवास पहुंचकर उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी को भारत रत्न दिए जाने की मांग सदन में उठाना कानपुर के लिए गर्व का विषय है और किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इस दिशा में किया गया यह पहला महत्वपूर्ण प्रयास है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 21:32:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लगातार हार से जूझ रहे लखनऊ और पहली जीत के जोश में KKR: कल होगा करो या मरो वाला मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ:</strong> लगातार हार झेल रही लखनऊ सुपर जायंट्स का सामना रविवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग के 38वें मैच में, वापसी कर रही कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए 'करो या मरो' जैसा है, क्योंकि दोनों ही टीमें इस सीज़न में संघर्ष कर रही हैं और उनका भविष्य एक अहम मोड़ पर खड़ा है, लेकिन दोनों की मौजूदा स्थिति (मोमेंटम) बिल्कुल अलग है। लखनऊ लगातार चार हार से जूझ रही है और पॉइंट्स टेबल में नीचे खिसकती जा रही है, जबकि कोलकाता इस सीज़न की अपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579917/lucknow--reeling-from-back-to-back-losses--and-kkr--basking-in-the-excitement-of-their-first-win--tomorrow-will-be-a-do-or-die-match"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(15)8.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ:</strong> लगातार हार झेल रही लखनऊ सुपर जायंट्स का सामना रविवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग के 38वें मैच में, वापसी कर रही कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए 'करो या मरो' जैसा है, क्योंकि दोनों ही टीमें इस सीज़न में संघर्ष कर रही हैं और उनका भविष्य एक अहम मोड़ पर खड़ा है, लेकिन दोनों की मौजूदा स्थिति (मोमेंटम) बिल्कुल अलग है। लखनऊ लगातार चार हार से जूझ रही है और पॉइंट्स टेबल में नीचे खिसकती जा रही है, जबकि कोलकाता इस सीज़न की अपनी पहली जीत दर्ज करने के बाद नए आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के लिए, बल्लेबाज़ी में निरंतरता की कमी सबसे बड़ी चिंता का विषय रही है। मिचेल मार्श और आयुष बडोनी की सलामी जोड़ी टीम को ठोस शुरुआत देने में नाकाम रही है, जिससे कप्तान ऋषभ पंत पर शुरुआती दबाव बढ़ गया है। निकोलस पूरन, एडेन मार्करम, मुकुल चौधरी और हिम्मत सिंह से सजी मध्यक्रम की बल्लेबाज़ी ने कुछ मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उनमें सामूहिक निरंतरता की कमी दिखाई देती है। मार्श टीम के सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं और टीम के लिए कुछेक उम्मीद की किरण हैं, जबकि मार्करम के आक्रामक रवैये ने टीम की बल्लेबाज़ी को कुछ गति प्रदान की है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, पूरन और पंत के संघर्ष ने टीम की मैचों को मज़बूती से खत्म करने की क्षमता को काफी नुकसान पहुँचाया है। युवा खिलाड़ी मुकुल चौधरी एक अहम योगदानकर्ता के रूप में उभरे हैं; विशेष रूप से इस सीजन की शुरुआत में कोलकाता के खिलाफ खेली गई उनकी मैच-जिताऊ पारी ने टीम के बुरे दौर में उम्मीद जगाई है। दूसरी ओर, गेंदबाज़ी विभाग काफी हद तक भरोसेमंद रहा है। प्रिंस यादव ने अनुभवी गेंदबाज़ों मोहम्मद शमी और मोहसिन खान के सहयोग से गेंदबाज़ी आक्रमण की कमान शानदार ढंग से संभाली है। दिग्विजय सिंह राठी और तेज़ गेंदबाज़ी के सनसनी मयंक यादव के अतिरिक्त सहयोग के साथ, लखनऊ के पास किसी भी बल्लेबाज़ी क्रम को चुनौती देने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, कोलकाता ने अपनी हार का सिलसिला तोड़ने के बाद उम्मीद की एक किरण देखी है। कप्तान अजिंक्य रहाणे, टिम सीफर्ट के साथ मिलकर टीम को एक मजबूत शुरुआत देने की कोशिश करेंगे; वहीं फिन एलन और सुनील नारायण जैसे विकल्प टीम के शीर्ष क्रम को और अधिक लचीलापन प्रदान करते हैं। बल्लेबाज़ी की मुख्य ज़िम्मेदारी काफी हद तक युवा खिलाड़ी अंगकृष रघुवंशी के कंधों पर होगी, जो इस सीजन में टीम के सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी रहे हैं; उनका साथ देने के लिए शानदार फॉर्म में चल रहे कैमरन ग्रीन भी मौजूद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पावर-हिटर रोवमैन पॉवेल और रिंकू सिंह टीम की बल्लेबाज़ी को और अधिक गहराई प्रदान करते हैं, जबकि रमनदीप सिंह और अनुकूल रॉय टीम में संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। कोलकाता की गेंदबाज़ी, जो पहले चिंता का विषय थी, पिछले मैच में उसमें काफ़ी सुधार देखने को मिला। वरुण चक्रवर्ती और कार्तिक त्यागी ने अहम विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया, जबकि वैभव अरोड़ा और नारायण ने गेंदबाज़ी में नियंत्रण और विविधता प्रदान की। इस सीज़न में एकाना स्टेडियम गेंदबाज़ों के लिए मददगार रहा है; यहाँ रन बनाना थोड़ा मुश्किल रहा है और पिच तेज गेंदबाज़ों के साथ-साथ स्पिनरों को भी मदद देती है। लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों को यहाँ ज़्यादा सफलता मिली है, जिससे टॉस इस मैच का एक निर्णायक पहलू साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ अपनी लगातार हार के सिलसिले को रोकने के लिए बेताब है, वहीं कोलकाता अपनी नई मिली लय को बरकरार रखने के लिए उत्सुक है; ऐसे में यह मैच दबाव और वापसी के बीच एक ज़बरदस्त मुक़ाबले का गवाह बनेगा। एक टीम के लिए यह मैच उनकी किस्मत पलटने की शुरुआत साबित हो सकता है, तो वहीं दूसरी टीम के लिए यह उनकी मौजूदा मुश्किलों को और बढ़ा सकता है-कुल मिलाकर, यह मैच उनके पूरे अभियान का एक बेहद अहम और निर्णायक पल बनने जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 14:16:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फरवरी में भारत का रत्न-आभूषण निर्यात 3.86% उछला, 24,340 करोड़ रुपये पहुंचा! चांदी के आभूषणों में 123% का धमाका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात फरवरी में सालाना आधार पर 3.86 प्रतिशत बढ़कर 268.07 करोड़ डॉलर (24,340.05 करोड़ रुपये) हो गया। उद्योग संगठन रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अनुसार अन्य बाजारों में विस्तार के कारण निर्यात में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">परिषद के आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष पहले इसी महीने में कुल निर्यात 258.10 करोड़ डॉलर (22,460.13 करोड़ रुपये) रहा था। अप्रैल, 2025 से फरवरी, 2026 के दौरान कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात लगभग स्थिर रहा और यह 2,593.37 करोड़ डॉलर (2,28,230.06 करोड़ रुपये) रहा, जबकि इससे एक वर्ष पहले इसी अवधि में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575064/india-s-gems-and-jewellery-exports-jumped-3-86--in-february-to-reach-%E2%82%B924-340-crore--silver-jewellery-surged-123"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(32)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात फरवरी में सालाना आधार पर 3.86 प्रतिशत बढ़कर 268.07 करोड़ डॉलर (24,340.05 करोड़ रुपये) हो गया। उद्योग संगठन रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अनुसार अन्य बाजारों में विस्तार के कारण निर्यात में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">परिषद के आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष पहले इसी महीने में कुल निर्यात 258.10 करोड़ डॉलर (22,460.13 करोड़ रुपये) रहा था। अप्रैल, 2025 से फरवरी, 2026 के दौरान कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात लगभग स्थिर रहा और यह 2,593.37 करोड़ डॉलर (2,28,230.06 करोड़ रुपये) रहा, जबकि इससे एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 2,591.58 करोड़ डॉलर (2,18,737.62 करोड़ रुपये) था। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि बीता वर्ष वैश्विक रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। इस दौरान अमेरिका की शुल्क नीतियों में बदलाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और प्रमुख बाजारों में उपभोक्ताओं की बदलती पसंद जैसे कारकों का प्रभाव रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। भंसाली ने कहा कि निर्यातकों ने सक्रिय रूप से नए बाजारों में विस्तार किया है और संयुक्त अरब अमीरात तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है, जहां मुक्त व्यापार समझौतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं हांगकांग जैसे बाजारों से भी निरंतर मजबूत समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की शुल्क व्यवस्था में हाल के बदलावों से जड़े हुए आभूषण खंड को कुछ सहारा मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, उद्योग प्राकृतिक हीरों और कुछ पत्थरों की श्रेणियों पर अंतिम शुल्क व्यवस्था को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। मौजूदा अमेरिकी आदेश के तहत इन पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया गया है। परिषद के आंकड़ों के अनुसार, तराशे और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात फरवरी में मामूली 0.84 प्रतिशत घटकर 135.12 करोड़ डॉलर (12,268.05 करोड़ रुपये) रह गया, जो एक वर्ष पहले इसी महीने में 136.27 करोड़ डॉलर (11,860.71 करोड़ रुपये) था। प्रयोगशाला में तैयार पॉलिश हीरों का निर्यात पिछले महीने 1.85 प्रतिशत बढ़कर 11.37 करोड़ डॉलर (1,033.03 करोड़ रुपये) हो गया, जो एक वर्ष पहले 11.17 करोड़ डॉलर (972.04 करोड़ रुपये) था।</p>
<p style="text-align:justify;">सोने के आभूषणों का कुल निर्यात पिछले महीने 3.23 प्रतिशत बढ़कर 92.89 करोड़ डॉलर (8,432.16 करोड़ रुपये) हो गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 89.98 करोड़ डॉलर (7,828.05 करोड़ रुपये) था। चांदी के आभूषणों का निर्यात फरवरी में 123.77 प्रतिशत बढ़कर 11.64 करोड़ डॉलर (1,056.30 करोड़ रुपये) हो गया, जो एक वर्ष पहले इसी महीने में 5.20 करोड़ डॉलर (452.39 करोड़ रुपये) था। पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बारे में भंसाली ने कहा कि वित्त वर्ष के अंतिम चरण में प्रवेश करते समय उद्योग वैश्विक व्यापार परिस्थितियों और बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि निर्यातक स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं और माल की आपूर्ति तथा आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए व्यापारिक भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 16:05:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kanshiram Jayanti : राहुल गांधी ने PM मोदी को लिखा पत्र, कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सामाजिक न्याय आंदोलन के महान नेता कांशीराम को मरणोपरांत 'भारत रत्न' देने की मांग की है। राहुल गांधी ने रविवार को अपने पत्र में कहा कि मान्यवर कांशीराम ने भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बहुजन समाज तथा गरीब वर्गों में राजनीतिक चेतना जगाई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">उनका कहना था कि उनके इन प्रयासों से भारतीय लोकतंत्र की नींव मजबूत हुई और राजनीतिक व्यवस्था अधिक प्रतिनिधिक तथा न्यायपूर्ण बनी। कांग्रेस नेता ने कहा "आज जब हम कांशीराम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575056/kanshi-ram-jayanti--rahul-gandhi-writes-to-pm-modi--demands--bharat-ratna--for-kanshi-ram"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(27)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सामाजिक न्याय आंदोलन के महान नेता कांशीराम को मरणोपरांत 'भारत रत्न' देने की मांग की है। राहुल गांधी ने रविवार को अपने पत्र में कहा कि मान्यवर कांशीराम ने भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बहुजन समाज तथा गरीब वर्गों में राजनीतिक चेतना जगाई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">उनका कहना था कि उनके इन प्रयासों से भारतीय लोकतंत्र की नींव मजबूत हुई और राजनीतिक व्यवस्था अधिक प्रतिनिधिक तथा न्यायपूर्ण बनी। कांग्रेस नेता ने कहा "आज जब हम कांशीराम जी की जयंती मना रहे हैं और उनके जीवन तथा योगदान को याद कर रहे हैं। मैं आपसे अनुरोध करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ कि उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने लोगों को बताया था कि उनका वोट,उनकी आवाज़ और उनका प्रतिनिधित्व है और यह देश सभी का समान रूप से है। उनके प्रयासों के कारण कई ऐसे लोग, जिन्होंने कभी सार्वजनिक जीवन में आने के बारे में नहीं सोचा था, उन्होंने राजनीति को न्याय और समानता प्राप्त करने का माध्यम मानना शुरू किया।" </p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने लिखा कि हमारा संविधान प्रत्येक भारतीय को समानता, गरिमा और भागीदारी का वादा करता है और कांशीराम जी ने अपना जीवन समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए इन वादों को सार्थक बनाने में समर्पित किया। कांग्रेस नेता ने कहा "कई वर्षों से दलित बुद्धिजीवी, नेता और सामाजिक कार्यकर्ता कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करते रहे हैं। उनकी यह मांग लगातार और गहरी भावना के साथ उठती रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में मैं लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल हुआ था, जहाँ नेताओं और प्रतिभागियों ने इस मांग को जोरदार तरीके से दोहराया, जो व्यापक जनभावना को दर्शाता है। उन्हें भारत रत्न प्रदान करना हमारे राष्ट्र के प्रति उनके महान योगदान को मान्यता देगा। यह उन लाखों लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान भी होगा, जो आज भी उन्हें सशक्तीकरण और उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखते हैं।" </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 14:51:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रवि किशन का राहुल गांधी पर पलटवार, कहा- पूरी तरह समाप्त होता जा रहा है कांग्रेस का वजूद</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> भोजपुरी सिने स्टार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रवि किशन ने बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 65 वर्षों तक देश में शासन किया, लेकिन उस समय उसने इस तरह की कोई पहल नहीं की। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद देश को एक नया और विराट स्वरूप मिला है, लेकिन अब राहुल गांधी को ऐसे नाम याद आ रहे हैं जो उनकी सरकार के दौरान उन्हें कभी याद नहीं आए। उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574956/ravi-kishan-hits-back-at-rahul-gandhi--says-congress-s-existence-is-rapidly-fading-away"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-10/रवि-किशन-ने-अयोध्या-के-श्रीराम-गाने-की-शूटिंग-पूरी-की.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> भोजपुरी सिने स्टार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रवि किशन ने बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 65 वर्षों तक देश में शासन किया, लेकिन उस समय उसने इस तरह की कोई पहल नहीं की। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद देश को एक नया और विराट स्वरूप मिला है, लेकिन अब राहुल गांधी को ऐसे नाम याद आ रहे हैं जो उनकी सरकार के दौरान उन्हें कभी याद नहीं आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का वजूद पूरी तरह समाप्त होता जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">एलपीजी संकट को लेकर विपक्ष के आरोपों पर केंद्र सरकार का बचाव करते हुए रवि किशन ने कहा कि गैस की कोई कमी नहीं है और विपक्ष इस मुद्दे पर झूठी अफवाहें फैला रहा है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे गैस बुक करें, उन्हें सिलेंडर अवश्य मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यूजीसी के नए बिल को लेकर विपक्ष के हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण और सवर्ण समाज भारतीय जनता पार्टी के साथ है और लोगों को विश्वास है कि योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के शासन में किसी भी सवर्ण के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">संसद में विपक्ष के हंगामे को लेकर उन्होंने कहा कि संसद चलाने में प्रतिदिन लगभग नौ करोड़ रुपये का खर्च आता है और विपक्ष के कारण संसद न चलने से जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद होती है। इस दौरान रवि किशन ने कहा कि प्रयागराज की जनता ने उन्हें बहुत प्यार दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी आगामी फिल्म "साइको सैयां" आने वाली है और गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित भी शामिल होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल से पहले गोरखपुर में माफिया का राज था, लेकिन अब वहां बड़े-बड़े कलाकार और साहित्यकार आ रहे हैं। रवि किशन ने बताया कि वह यहां होली मिलन कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं, जिसमें उन्हें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आमंत्रित किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 14:27:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मायावती ने कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने के कांग्रेस के प्रस्ताव पर उठाया सवाल, जानें क्या कहा... </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर शनिवार को सवाल उठाया कि यदि वह केंद्र में सत्ता में आती है तो बसपा के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मायावती ने देश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं से अन्य राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा बसपा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि केंद्र में कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने बी आर आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया तो अब पार्टी कांशीराम को सम्मानित करने का प्रस्ताव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574942/mayawati-questions-congress-s-proposal-to-honor-kanshi-ram-with-the-bharat-ratna%E2%80%94find-out-what-she-said-"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(70)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर शनिवार को सवाल उठाया कि यदि वह केंद्र में सत्ता में आती है तो बसपा के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मायावती ने देश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं से अन्य राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा बसपा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि केंद्र में कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने बी आर आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया तो अब पार्टी कांशीराम को सम्मानित करने का प्रस्ताव कैसे रख सकती है। कांशीराम की जयंती रविवार को मनाई जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''कांग्रेस ने दलितों के मसीहा और संविधान के प्रमुख निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया, न ही उन्हें भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया... तो अब वही पार्टी कांशीराम को कैसे सम्मानित कर सकती है?''</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी यह टिप्पणी लखनऊ में कांग्रेस द्वारा आयोजित 'संविधान सम्मेलन' में पारित एक प्रस्ताव के एक दिन बाद आई है, जिसमें कहा गया कि सत्ता में आने पर पार्टी कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करेगी। उन्होंने कहा, ''केंद्र में सत्ता में रहते हुए कांग्रेस पार्टी ने कांशीराम के निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार ने भी राजकीय शोक की घोषणा नहीं की।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई संगठन और राजनीतिक दल, जो अक्सर बड़े राजनीतिक दलों के हाथों की कठपुतली बनकर काम करते हैं, बसपा को कमजोर करने की कोशिश करते हुए राजनीतिक लाभ के लिए कांशीराम के नाम का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मायावती ने कहा, ''अब ये सभी दल कांशीराम द्वारा बनाई गई पार्टी बसपा को आए दिन अलग-अलग हथकंडे इस्तेमाल करके कमजोर करने में लगे हैं इसलिए उनके (कांशीराम के) अनुयायियों और समर्थकों को सतर्क रहना चाहिए, विशेष रूप से कांग्रेस के खिलाफ, जिसकी दलित विरोधी विचारधारा और मानसिकता ने बसपा के गठन को आवश्यक बना दिया।'' बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कांशीराम की जयंती के उपलक्ष्य पर 15 मार्च को देशभर में, विशेषकर उत्तर प्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने की अपील की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 13:21:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>25 जनवरी : मदर टेरेसा को 'भारत-रत्न' प्रदान किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong>  कुष्ठ रोगियों और अनाथों की सेवा में अपनी जिंदगी समर्पित करने वालीं मदर टेरेसा को 25 जनवरी, 1980 को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। मदर टेरेसा ने जरूरतमंदों की मदद के लिए 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' नामक संस्था की स्थापना की थी। इस संस्था की दुनियाभर में शाखाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश-दुनिया के इतिहास में 25 जनवरी की तारीख पर दर्ज प्रमुख घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1971 :</strong> हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1971: </strong>युगांडा की सशस्त्र सेना के प्रमुख इदी अमीन ने सैन्य तख्तापलट के जरिए राष्ट्रपति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568989/january-25--mother-teresa-was-awarded-the-bharat-ratna"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(84)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> कुष्ठ रोगियों और अनाथों की सेवा में अपनी जिंदगी समर्पित करने वालीं मदर टेरेसा को 25 जनवरी, 1980 को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। मदर टेरेसा ने जरूरतमंदों की मदद के लिए 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' नामक संस्था की स्थापना की थी। इस संस्था की दुनियाभर में शाखाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश-दुनिया के इतिहास में 25 जनवरी की तारीख पर दर्ज प्रमुख घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1971 :</strong> हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1971: </strong>युगांडा की सशस्त्र सेना के प्रमुख इदी अमीन ने सैन्य तख्तापलट के जरिए राष्ट्रपति मिल्टन ओबोट से सत्ता छीनी। ओबोट 1962 में आजादी के बाद से देश का नेतृत्व कर रहे थे और तख्तापलट के समय सिंगापुर में राष्ट्रमंडल सम्मेलन में भाग लेने गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1980 : </strong>नागरिक सम्मान भारत रत्न, पद्म विभूषण आदि प्रदान करने का सिलसिला फिर से शुरू किया गया। सम्मान प्रदान करने का चलन आठ अगस्त 1977 को रोक दिया गया था।<strong> </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1980 : </strong>मदर टेरेसा को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1983 : </strong>विनोबा भावे को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया गया।<strong> </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1990 :</strong> कोलंबिया का बोइंग 707 जेटलाइनर विमान न्यूयार्क में कोव नेक में एक पहाड़ी से टकराया। इस घटना में 88 लोग बच गये। बाद में पता चला कि हादसे के समय विमान के चारों इंजन बंद हो चुके थे और उसमें ईंधन लगभग खत्म था।<strong> </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1999: </strong>कोलंबिया में शक्तिशाली भूकंप में 300 लोगों की मौत और एक हजार घायल।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1999 :</strong> अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के छह अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद निष्कासित कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2002 : </strong>भारत ने मध्यम दूरी तक मार करने वाले परमाणु क्षमता से लैस 'प्रक्षेपास्त्र' का परीक्षण किया।<strong> </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2005 : </strong>महाराष्ट्र के सातारा जिले में एक पहाड़ी पर स्थित देवी के मंदिर में भगदड़ मचने से 300 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2009 :</strong> श्रीलंका की सेना ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से उसका आखिरी गढ़ मल्लाइतिवु छीना।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2010 :</strong> इराक की राजधानी बगदाद में तीन होटलों में बम फटने से 36 लोगों की मौत।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2019 : </strong>दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में कोयला लेकर जा रहे एक ट्रक के पलट जाने से 13 श्रमिकों की मौत।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2020 : </strong>पूर्वी तुर्किये में 6.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से 22 लोगों की मौत और एक हजार से अधिक लोग घायल।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2021 : </strong>चीन में सोने की खदान में हुए विस्फोट में 10 की मौत।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2025: </strong>इजराइल ने 200 फलस्तीनी कैदी छोड़े।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2025: </strong>अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>इतिहास</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568989/january-25--mother-teresa-was-awarded-the-bharat-ratna</link>
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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 08:11:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो जनवरी : देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ की शुरुआत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और खेल जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में असाधारण तथा उल्लेखनीय राष्ट्र सेवा करने वालों को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया जाता है। दो जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस सम्मान को संस्थापित किया था। शुरू में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का चलन नहीं था, लेकिन एक वर्ष बाद इस प्रावधान को जोड़ा गया। इसी तरह खेल के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वालों को भारत रत्न से सम्मानित करने का प्रावधान भी बाद में शामिल किया गया।</p>
<p>दो जनवरी 2021 को संयुक्त अरब अमीरात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/565883/january-2--the-country-s-highest-civilian-award--the-bharat-ratna--was-launched"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(87).png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और खेल जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में असाधारण तथा उल्लेखनीय राष्ट्र सेवा करने वालों को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया जाता है। दो जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस सम्मान को संस्थापित किया था। शुरू में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का चलन नहीं था, लेकिन एक वर्ष बाद इस प्रावधान को जोड़ा गया। इसी तरह खेल के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वालों को भारत रत्न से सम्मानित करने का प्रावधान भी बाद में शामिल किया गया।</p>
<p>दो जनवरी 2021 को संयुक्त अरब अमीरात में एक भारतीय प्रवासी रामकुमार सारंगपाणी ने उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मख्तूम के 15वें ताजपोशी दिवस के मौके पर 8.2 वर्ग मीटर का विशाल शुभकामना पत्र (ग्रीटिंग कार्ड) बनाकर 19वीं बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया। इसी के साथ दुबई निवासी रामकुमार सारंगपाणी सबसे अधिक विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले यूएई और भारत के पहले व्यक्ति बन गए। सारंगपाणी का शुभकामना पत्र आम शुभकामना पत्र से 100 गुणा अधिक बड़ा है। इसके अंदर दुबई स्थित कलाकार अकबर साहेब द्वारा बनाई गईं शेख मोहम्मद की चित्रकारियों का संकलन है। इससे पहले सबसे बड़ा शुभकामना पत्र हांगकांग में बनाया गया था, जिसकी लंबाई 6.729 वर्ग मीटर थी।</p>
<p>देश-दुनिया के इतिहास में दो जनवरी की तारीख में दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-<strong> </strong></p>
<p><strong>1757 :</strong> रॉबर्ट क्लाइव ने कलकत्ता (अब कोलकाता) पर फिर कब्जा कर लिया।<strong> </strong></p>
<p><strong>1954 : </strong>देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्‍न की शुरुआत।</p>
<p><strong>1971 : </strong>स्कॉटलैंड के ग्लासगो में एक फुटबाल मैच के बाद भगदड़ मचने से 66 फुटबाल प्रेमियों की मौत हो गई।<strong> </strong></p>
<p><strong>1973 : </strong>जनरल एस.एच.एफ.जे. मानेकशॉ को फील्ड मार्शल के रूप में पदोन्नत किया गया।</p>
<p><strong>1980 :</strong> ब्रिटेन के सरकारी उपक्रम ‘ब्रिटिश स्टील कॉर्पोरेशन’ में काम करने वाले एक लाख कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर पचास साल में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर हड़ताल की।</p>
<p><strong>1991 :</strong> तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा दिया गया।</p>
<p><strong>1994 : </strong>अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच 36 घंटे तक चले संघर्ष में 600 से ज्यादा लोग हताहत।</p>
<p><strong> 2001 : </strong>कुमोय द्वीप और मात्सु द्वीप से एक-एक पर्यटक नौका पहली बार कानूनी तौर पर ताइवान क्षेत्र से चीन की मुख्य भूमि तक पहुंची।<strong> </strong></p>
<p><strong>2004 :</strong> पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन के सात देश मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के प्रस्ताव पर सहमत।</p>
<p><strong>2016 : </strong>सऊदी अरब के जाने-माने शिया मौलवी निम्र अल निम्र और उनके 46 साथियों को सरकार ने फांसी की सजा दी। मौलवी ने 2011 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों का खुलेआम समर्थन किया था।</p>
<p><strong>2020:</strong> रेलवे ने सभी हेल्पलाइन को एकल नंबर 139 में समाहित किया।</p>
<p><strong>2021:</strong> ब्रिटेन में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 57,725 मामले सामने आए।</p>
<p><strong>2023 : </strong>फिलीपीन में बाढ़ से 51 लोगों की मौत।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>इतिहास</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/565883/january-2--the-country-s-highest-civilian-award--the-bharat-ratna--was-launched</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 08:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bharat Ratna: असम गण परिषद ने जुबिन गर्ग को 'भारत रत्न’ दिये जाने की राज्यसभा में उठाई मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा में मंगलवार को असम गण परिषद (अगप) के एक सदस्य ने दिवंगत लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये जाने की मांग की। अगप के वीरेन्द्र प्रसाद वैश्य ने शून्यकाल में यह मांग करते हुए कहा कि जुबिन एक फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, गायक होने के साथ-साथ समाज सुधारक एवं पर्यावरण प्रेमी भी थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी एवं पार्टी अध्यक्ष अतुल वोरा की ओर से जुबिन को ‘भारत रत्न’ सम्मान देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर 2025 को राष्ट्र ने इस होनहार प्रतिभा को खो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563731/bharat-ratna--the-asom-gana-parishad-raised-the-demand-in-the-rajya-sabha-for-jubin-garg-to-be-awarded-the--bharat-ratna"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/jubin-garg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा में मंगलवार को असम गण परिषद (अगप) के एक सदस्य ने दिवंगत लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये जाने की मांग की। अगप के वीरेन्द्र प्रसाद वैश्य ने शून्यकाल में यह मांग करते हुए कहा कि जुबिन एक फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, गायक होने के साथ-साथ समाज सुधारक एवं पर्यावरण प्रेमी भी थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी एवं पार्टी अध्यक्ष अतुल वोरा की ओर से जुबिन को ‘भारत रत्न’ सम्मान देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर 2025 को राष्ट्र ने इस होनहार प्रतिभा को खो दिया था। उन्होंने कहा कि जुबिन केवल गायक नहीं, बल्कि प्रत्येक असमिया व्यक्ति के लिए आशा की किरण थे।</p>
<p>वैश्य ने कहा कि भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी रचनाएं एवं गीत सदा हमारे साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि जुबिन ने हमेशा बाढ़ पीड़ितों, गरीब छात्रों एवं मजदूरों की मदद की थी। उन्होंने कहा कि इन सभी विशेषताओं के कारण जुबिन ने पूरे देश के लोगों का दिल जीत लिया था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 13:49:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>National Sports Day: मेजर ध्यानचंद को कब मिलेगा भारत रत्न, इंतजार बरसों से जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>उनके नाम पर राष्ट्रीय खेल सम्मान, उनका जन्मदिन 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस और देश भर में अनेक स्टेडियमों पर उनका नाम लेकिन हॉकीप्रेमियों को यह कचोटता है कि तमाम आंदोलनों ,आरटीआई और अपीलों के बावजूद मेजर ध्यानचंद को आज तक भारत रत्न क्यो नहीं मिल सका? </p>
<p>केंद्र सरकार ने 2021 में देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि जनभावना को देखते हुए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिये उनके नाम पर विचार क्यो नहीं किया जा रहा। हॉकी इंडिया के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/551576/national-sports-day--when-will-major-dhyanchand-get-bharat-ratna--the-wait-has-been-going-on-for-years"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/cats458.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>उनके नाम पर राष्ट्रीय खेल सम्मान, उनका जन्मदिन 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस और देश भर में अनेक स्टेडियमों पर उनका नाम लेकिन हॉकीप्रेमियों को यह कचोटता है कि तमाम आंदोलनों ,आरटीआई और अपीलों के बावजूद मेजर ध्यानचंद को आज तक भारत रत्न क्यो नहीं मिल सका? </p>
<p>केंद्र सरकार ने 2021 में देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि जनभावना को देखते हुए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिये उनके नाम पर विचार क्यो नहीं किया जा रहा। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और तीन बार के ओलंपियन दिलीप टिर्की ने 2016 में इस मांग को लेकर जंतर मंतर पर आंदोलन की अगुवाई की और संसद में भी मसला उठाया लेकिन हर कोशिश नाकाम रही । </p>
<p>टिर्की ने कहा ,‘‘ध्यानचंद अपने दौर में दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी थे । मैं हमेशा कहता हूं कि भारत को सबसे पहले ओलंपिक के स्वर्ण पदक हॉकी ने दिखाये हैं और उनका योगदान अतुलनीय है । देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार उनके नाम से , नेशनल स्टेडियम उनके नाम से तो भारत रत्न क्यो नहीं।’’ </p>
<p>लगातार तीन ओलंपिक (1928 एम्सटर्डम, 1932 लॉस एंजिलिस और 1936 बर्लिन) में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में सूत्रधार रहे ध्यानचंद ने पहली बार विश्व खेलों के मानचित्र पर भारत की जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई थी । हॉकी के इतिहास में 185 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक 570 गोल का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। ध्यानचंद के बेटे और 1975 में एकमात्र विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के अहम सदस्य रहे अशोक ध्यानचंद ने कहा कि उनके पिता ने कभी अपना प्रचार नहीं किया और उन्हें इस पर गर्व है । <br />उन्होंने भाषा से कहा ,‘‘ दुनिया में खेलों के नक्शे पर भारत को सबसे पहले लाने वाले वही थे । उनके निधन के 46 साल बाद भी उनका नाम आज गूंज रहा है और इसे ही महान खिलाड़ी की विरासत कहते हैं । मुझे उन पर गर्व है कि वे प्रचार से हमेशा दूर रहे ।’’ </p>
<p>उन्हें 1956 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा गया लेकिन भारत रत्न के लिये बारंबार उनकी अनदेखी हुई और अब तो मामला ठंडे बस्ते में ही चला गया है । नवंबर 2013 में मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने का ऐलान किया और वह इसे पाने वाले पहले और एकमात्र खिलाड़ी हैं । <br />उन्होंने कहा ,‘‘ इतने महान खिलाड़ी होने के बावजूद मेरे पिताजी ने बहुत खराब दिन भी देखे लेकिन खुद्दारी नहीं छोड़ी । अपने लिये पुरस्कार मांगना तो वह कभी सोच भी नहीं सकते थे । घर के हालात देखकर हमने 1977 . 78 में एक गैस एजेंसी के लिये आवेदन करना चाहता लेकिन उन्होंने उस पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया ।’’ </p>
<p>अशोक कुमार ने कहा ,‘‘वह हमेशा यही कहते थे कि मैने क्या किया, यह देखना सरकार का काम है । हम किसी से भीख थोड़े ही मांगेंगे ।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ यह सरकार को दिखाना है कि वह ऐसे लोगों को भूली नहीं है जिन्होंने देश की निस्वार्थ सेवा की है। खेलों के लिये इतना काम हो रहा है और ऐसे में अतीत के महानायकों को भी भुलाना नहीं है ।’’ <br />टिर्की ने कहा,‘‘ 2016 में जंतर मंतर पर आंदोलन में बहुत सारे ओलंपियन अशोक कुमार, अजित पाल सिंह, जफर इकबाल, अजय बंसल, एबी सुब्बैया ने भाग लिया था। विश्व विख्यात सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग पर सैंड आर्ट भी बनाया था लेकिन हमारे प्रयास नाकाम रहे ।’’ <br />बीजू जनता दल के सांसद रहे टिर्की ने राज्यसभा में पांच मई 2016 को भी यह मसला उठाया था । इसके साथ ही सौ से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर सहित ज्ञापन भी सौंपा था लेकिन कोई नतीजा नहीं । उन्होंने कहा ,‘‘ पूरे हॉकी समुदाय की तरफ से मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि भारतीय खेलों में उनके योगदान को देखते हुए मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाये ।’’ </p>
<p>1954 के नियमों के अनुसार भारत रत्न मूल रूप से कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवाओं तक ही सीमित था लेकिन दिसंबर 2011 में नियमों को "मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र" में संशोधित किया गया । इसके बाद से खेल भी इसमें शामिल हुआ और 22 दिसंबर 2011 को तत्कालीन भारतीय हॉकी महासंघ ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिये जाने की सिफारिश केंद्र सरकार से की । </p>
<p>क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल 2013 में तत्कालीन खेलमंत्री जितेंद्र सिंह से मिला और यह अनुरोध दोहराया । फिर अगस्त 2014 में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा को बताया था कि उनके मंत्रालय ने भारत रत्न के लिये ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की है लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात । </p>
<p>पिछले दस साल में अटल बिहारी वाजपेयी , पंडित मदन मोहन मालवीय (2015), प्रणब मुखर्जी , भूपेन हजारिका, नानाजी देशमुख (2019), कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी, पी वी नरसिंहराव, चौधरी चरण सिंह और एम एस स्वामीनाथन (2024) को भारत रत्न से नवाजा गया है । इतने साल और इतने प्रयासों के बाद भी हॉकी के जादूगर के लिये भारत रत्न का इंतजार है कि खत्म ही नहीं हो रहा और उम्मीद का दामन अब छूटता दिख रहा है । </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Aug 2025 14:18:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया दलाई लामा को भारत रत्न देने का समर्थन, केंद्र से करेंगे सिफारिश </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: </strong>अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर औपचारिक सिफारिश करेंगे। मंगलवार को सीएम खांडू ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले दलाई लामा के चयन में चीन का कोई हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि तिब्बती बौद्ध धर्म का पालन मुख्य रूप से तिब्बत और भारत के हिमालयी क्षेत्रों में होता है, न कि mainland China में।</p>
<p>दलाई लामा को भारत रत्न देने के लिए सांसदों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/545480/arunachal-pradesh-chief-minister-supports-giving-bharat-ratna-to-dalai-lama--will-recommend-to-the-center"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/muskan-dixit-(27).png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर औपचारिक सिफारिश करेंगे। मंगलवार को सीएम खांडू ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले दलाई लामा के चयन में चीन का कोई हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि तिब्बती बौद्ध धर्म का पालन मुख्य रूप से तिब्बत और भारत के हिमालयी क्षेत्रों में होता है, न कि mainland China में।</p>
<p>दलाई लामा को भारत रत्न देने के लिए सांसदों के एक समूह के अभियान पर बोलते हुए खांडू ने कहा कि दलाई लामा ने ‘नालंदा बौद्ध परंपरा’ के प्रचार और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया, “आठवीं सदी में नालंदा विश्वविद्यालय से कई विद्वान तिब्बत गए थे। उस समय तिब्बत में ‘बोन’ धर्म प्रचलित था। बोन और बौद्ध धर्म के मिश्रण से तिब्बती बौद्ध धर्म की अवधारणा विकसित हुई, जो बाद में पूरे तिब्बत में फैली।” उन्होंने आगे कहा कि यह परंपरा हिमालयी क्षेत्रों में लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक विस्तारित हुई।</p>
<p>1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद 14वें दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी थी। तब से वह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अन्य निर्वासित तिब्बतियों के साथ रह रहे हैं। खांडू ने बताया कि दलाई लामा तिब्बत की प्रमुख मठ परंपराओं, जैसे शाक्य और अन्य प्राचीन बौद्ध परंपराओं को भारत लाए। उन्होंने दक्षिण भारत सहित विभिन्न स्थानों पर मठों और संस्थानों की स्थापना की, जिससे भारतीय हिमालयी क्षेत्र के बौद्ध समुदाय को बहुत लाभ हुआ। खांडू ने कहा, “हमारे भिक्षु इन मठों में अध्ययन के लिए जाते हैं और वहां की प्रथाओं को अपने क्षेत्रों में लाते हैं। इस तरह, दलाई लामा ने भारत की प्राचीन नालंदा परंपरा के संरक्षण और प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि इस योगदान को देखते हुए दलाई लामा को भारत रत्न देना एक उचित और सराहनीय कदम होगा। खांडू ने कहा कि वह जल्द ही केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस पुरस्कार के लिए दलाई लामा के नाम की सिफारिश करेंगे। उल्लेखनीय है कि अतीत में मदर टेरेसा (1980), अब्दुल गफ्फार खान (1987) और नेल्सन मंडेला (1990) जैसे विदेशी मूल के व्यक्तियों को भी भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p>धर्मशाला में 6 जुलाई को दलाई लामा के 90वें जन्मदिन समारोह के बारे में पूछे जाने पर खांडू ने कहा कि वह कई बार दलाई लामा से मिल चुके हैं, लेकिन यह जन्मदिन उत्सव विशेष रूप से यादगार रहा। उन्होंने बताया कि इस समारोह में देश-विदेश से कई लोग शामिल हुए। खांडू ने कहा, “90 वर्ष की आयु में भी दलाई लामा मानसिक रूप से बहुत सक्रिय हैं। हाल ही में हुए उनके घुटने के ऑपरेशन को छोड़कर उनका स्वास्थ्य ठीक है।”</p>
<p>दलाई लामा के उत्तराधिकारी के सवाल पर खांडू, जो स्वयं बौद्ध हैं, ने कहा कि यह विषय हमेशा चर्चा में रहता है। उन्होंने बताया, “पहले दलाई लामा से लेकर 14वें दलाई लामा तक यह परंपरा 600 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है। ‘गादेन फोडरंग ट्रस्ट’ अगले दलाई लामा के चयन की प्रक्रिया को संभालता है, जो वर्तमान दलाई लामा के निधन के बाद शुरू होगी। इस प्रक्रिया में कोई जल्दबाजी नहीं है और इसे कठोर नियमों के अनुसार पूरा किया जाता है।” </p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि कुछ अटकलें थीं कि क्या दलाई लामा परंपरा जारी रहेगी या अगला दलाई लामा कोई महिला हो सकता है। खांडू ने कहा, “90वें जन्मदिन से पहले बौद्ध परंपराओं के सभी प्रमुखों ने बैठक की और इस बात पर सहमति जताई कि यह परंपरा जारी रहेगी। चीन ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है, लेकिन उनकी आपत्तियां उनकी अपनी नीतियों से प्रेरित हैं। दलाई लामा परंपरा मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्र और तिब्बती बौद्ध समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त है, इसमें चीन की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।”</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेः <a class="post-title-lg" href="https://www.amritvichar.com/article/545478/bharat-bandh-2025-in-the-bharat-bandh-strike-rahul-gandhi">Bharat Bandh 2025: भारत बंद हड़ताल में भाजपा पर जमकर बरसे राहुल गांधी, कहा- महाराष्ट्र चुनाव जैसी धांधली बिहार में नहीं होने देंगे </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 15:52:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>31 मार्च का इतिहास: आज ही के डॉ. आंबेडकर को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से किया गया था सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर को 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करके देश और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को नमन किया गया। 'बाबासाहब' भीमराव आंबेडकर ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और जीवनभर सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ते रहे। आजादी के बाद उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई, जब उन्हें राष्ट्र के संविधान निर्माण का दायित्व सौंपा गया।</p>
<p><strong>देश-दुनिया के इतिहास में 31 मार्च की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-</strong></p>
<p>1504 :</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/530761/history-of-march-31--today-dr--ambedkar-was-posthumously-awarded-the--bharat-ratna"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/इतिहा1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर को 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करके देश और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को नमन किया गया। 'बाबासाहब' भीमराव आंबेडकर ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और जीवनभर सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ते रहे। आजादी के बाद उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई, जब उन्हें राष्ट्र के संविधान निर्माण का दायित्व सौंपा गया।</p>
<p><strong>देश-दुनिया के इतिहास में 31 मार्च की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-</strong></p>
<p>1504 : सिखों के गुरु अंगद देव जी का जन्म। वह गुरु नानक देव जी के बाद सिखों के दूसरे गुरु थे।<br />1727 : दुनिया के महान भौतिकशास्त्रियों में शुमार आइजैक न्यूटन का 84 वर्ष की आयु में लंदन में निधन। <br />1870 : अमेरिका में पहली बार किसी अश्वेत नागरिक ने वोट दिया। अश्वेतों को समान अधिकार दिलाने की दिशा में यह एक बड़ी कामयाबी थी। <br />1921 : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को अंगीकार किया गया। <br />1959: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा अपने 20 शिष्यों के साथ भारत की सीमा में पहुंचे। वह 17 मार्च को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से पैदल रवाना हुए थे और खेनज़ीमन दर्रे से होते हुए सकुशल भारत पहुंच गए।<br />1964 : बम्बई (अब मुंबई) में बिजली से चलने वाली ट्राम को बंद किया गया। <br />1980 : अमेरिका के महान फर्राटा धावक जेसी ओवंस का निधन। ओवंस ने 1936 के बर्लिन ओलंपिक खेलों में अपने देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीते थे। <br />1981: एक घरेलू विमान का अपहरण करने वाले इंडोनेशिया के पांच आतंकवादियों में से चार थाइलैंड के बैंकाक में मारे गये। विमान में सवार सभी 55 लोग सुरक्षित। आतंकवादियों ने इंडोनेशिया की जेलों में बंद 80 लोगों को रिहा कराने के लिए 28 मार्च को विमान का अपहरण किया था और उसे बैंकाक ले गए थे। <br />1983 : कोलम्बिया में भूकंप से लगभग 5,000 लोगों की मौत। <br />1990 : संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। <br />2004 : अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में एक नाइट क्लब में आग लगने से 175 लोगों की मौत। <br />2007 : माइकल फ़ेल्प्स ने विश्व तैराकी चैम्पियनशिप में छह स्वर्ण पदक हासिल किये। <br />2008 : कृष्णा सोबती को के.के. बिड़ला फाउण्डेशन का वर्ष 2007 का 'व्यास सम्मान' देने की ऐलान। रेवती मेनन को 'दयावती मोदी स्त्री शक्ति सम्मान, 2007' प्रदान किया गया। <br />2008 : पाक वायुसेना की बस के नजदीक एक बम विस्फोट में 12 लोग मारे गए। <br />2011 : जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की आबादी पिछले दस साल में 17.64 प्रतिशत बढ़ कर 121 करोड़ पर पहुंच गई।<br />2024 : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न प्रदान किया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>इतिहास</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Mar 2025 08:12:56 +0530</pubDate>
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