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                <title>Basant Panchami - Amrit Vichar</title>
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                <description>Basant Panchami RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Uttrakhand:  होली के गीतों से गूंज रही पहाड़ों की रातें, छलड़ी तक रंग भरेंगे राग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कमलेश कनवाल, अल्मोड़ा।</strong> सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की राते इन दिनों होली के गीतों से गूंज रही हैं। राग से रंग तक पहुंचने के लिए इस शहर की होली को करीब तीन महीने लगते हैं। यही वक्त कुमाउनी होली को देशभर की होलियों से अलग रंग में पिरोता है। डेढ़ सौ साल पहले बैठकी और खड़ी होली के रूप में शुरू हुए इस राग-फाग ने कई पीढ़िया देखीं लेकिन इसका महत्व बढ़ता ही गया।</p>
<p>दरअसल, कुमाऊं में होली गायन की परंपरा 165 वर्ष पूर्व अल्मोड़ा से शुरू हुई थी। अल्मोड़ा में पौष मास से फागुन तक तीन माह में पांच अलग-अलग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/571722/the-nights-of-the-mountains-are-echoing-with-holi-songs--the-melody-will-fill-the-chhaldi-with-colours"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/almoda.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कमलेश कनवाल, अल्मोड़ा।</strong> सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की राते इन दिनों होली के गीतों से गूंज रही हैं। राग से रंग तक पहुंचने के लिए इस शहर की होली को करीब तीन महीने लगते हैं। यही वक्त कुमाउनी होली को देशभर की होलियों से अलग रंग में पिरोता है। डेढ़ सौ साल पहले बैठकी और खड़ी होली के रूप में शुरू हुए इस राग-फाग ने कई पीढ़िया देखीं लेकिन इसका महत्व बढ़ता ही गया।</p>
<p>दरअसल, कुमाऊं में होली गायन की परंपरा 165 वर्ष पूर्व अल्मोड़ा से शुरू हुई थी। अल्मोड़ा में पौष मास से फागुन तक तीन माह में पांच अलग-अलग चरणों में बैठकी और खड़ी होली का गायन होता है। पहला चरण आध्यात्मिक होली का है, जो पौष मास के प्रथम रविवार से बसंत पंचमी तक चलने वाली इस होली में निर्वाण पद गाए जाते हैं। </p>
<p>दूसरा चरण बसंत पंचमी से महाशिवरात्रि के एक दिन पूर्व तक का है। इसमें प्रकृति आधारित गीत गाए जाते हैं। इसे श्रृंगारिक होली कहते हैं। तीसरा चरण महाशिवरात्रि से होलिका दहन तक चलता है। इसमें रंग भरे राग में हंसी-ठिठोली के गीत गाए जाते हैं। इसके साथ ही खड़ी होली के रंग भी बरसने लगते हैं। </p>
<p>आखिरी राग है विदाई राजग, ये राग छलड़ी में होली का समापन पर गाया जाता है। वहीं, यहां तीन विधाओं में होली गायन होती है। जिसमें पहली बैठकी दूसरी खड़ी और तीसरी महिलाओं की होली है। इनमें सभी रागों की होली शामिल होती है। बैठकी होली में शास्त्रीय संगीत पर आधारित रागों का गायन होता है। तीसरी होली महिलाओं पर आधारित है। इस दौरान महिलाएं हंसी-मजाक के रंगों के साथ नृत्य में सराबोर रहती हैं।</p>
<p>वरिष्ठ रंगकर्मी राजेंद्र प्रसाद तिवारी बताते हैं कि अल्मोड़ा में वर्ष 1860 में बैठकी होली की शुरुआत उस्ताद अमानत हुसैन नामक एक कलाकार ने की थी। सभी समुदाय के लोग बढ़ चढ़कर होली गायन में भागीदारी करते थे। अल्मोड़ा में श्री भंडार हुक्का क्लब, त्रिपुरा सुंदरी और रानीधारा में होली गायन की शुरुआत हुई थी।</p>
<p>तीन महीने चलने वाले होलियों के रंग के अलावा और भी कई राग कुमाउनी होली में हैं। पीलू, भैरवी, श्याम कल्याण, काफी, परज, जंगला काफी, खमाज, जोगिया, देश विहाग व जै-जैवंती आदि शास्त्रीय रागों पर विविध वाद्य यंत्रों के साथ यहां होली गायी जाती है।</p>
<p>वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल सनवाल ने बताया कि अल्मोड़ा की होली पूरे कुमाऊं में अलग स्थान रखती है। हालांकि इस तरह की होली अन्य अंचलों में भी होती है, लेकिन यहां अलग-अलग मास और रागों पर गाई जाने वाली होली का विशेष महत्व है। कहना है कि अल्मोड़ा की होली में बनारस और मथुरा की होली के राग रंग झलकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>अल्मोड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:23:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजीएमयू में बसंत पंचमी की भव्य छटा, मां सरस्वती की आराधना में रंगा परिसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कुलपति कार्यालय के सामने स्थित मां शारदालय मंदिर को सुंदर फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर पीले रंग की छटा में नहाया नजर आया। मंदिर प्रांगण में फूलों की खुशबू से वातावरण भक्तिमय हो गया।</span></p>
<p>एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं ने मां सरस्वती मंदिर के सामने फूलों से आकर्षक रंगोली बनाकर सभी का मन मोह लिया। गुरुवार रात से ही मंदिर और आसपास के क्षेत्रों को सजाने का कार्य शुरू कर दिया गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568885/kgmu-celebrates-basant-panchami-in-grand-style--campus-painted-in-worship-of-goddess-saraswati"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(63)7.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कुलपति कार्यालय के सामने स्थित मां शारदालय मंदिर को सुंदर फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर पीले रंग की छटा में नहाया नजर आया। मंदिर प्रांगण में फूलों की खुशबू से वातावरण भक्तिमय हो गया।</span></p>
<p>एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं ने मां सरस्वती मंदिर के सामने फूलों से आकर्षक रंगोली बनाकर सभी का मन मोह लिया। गुरुवार रात से ही मंदिर और आसपास के क्षेत्रों को सजाने का कार्य शुरू कर दिया गया था। शुक्रवार सुबह होते ही पीले फूलों से सजा मंदिर प्रांगण केजीएमयू की 114 वर्ष पुरानी परंपरा को जीवंत करता दिखा।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(65)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (65)" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना, यज्ञ और हवन किया तथा सुख-शांति व प्रगति की कामना की। छात्र-छात्राओं ने मां का आशीर्वाद लेकर एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दीं और फूलों की होली खेली।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(64)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (64)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p>उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म में मां सरस्वती को विद्या और संगीत की देवी माना गया है। सफलता के लिए कठिन परिश्रम के साथ मां का आशीर्वाद भी आवश्यक है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भविष्य में और अधिक भव्यता के साथ आयोजित होने चाहिए।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान, कला और नवचेतना का पर्व है, जो सकारात्मक सोच और सृजनशीलता की प्रेरणा देता है। उन्होंने केजीएमयू परिवार से शिक्षा, चिकित्सा और सेवा के क्षेत्र में निष्ठा व समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(66)6.png" alt="MUSKAN DIXIT (66)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p>उधर, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान, कैंसर संस्थान, बलरामपुर अस्पताल और सिविल अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भी भी बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://youtu.be/6KQZ4_AM0P0?si=e5Mly-L62_UiQhy8">https://youtu.be/6KQZ4_AM0P0?si=e5Mly-L62_UiQhy8</a></blockquote>
<p>

</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 09:01:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रज में आज से रंगों का उत्सव शुरू:  बांकेबिहारी संग भक्तों ने खेला गुलाल, अबीर-गुलाल की वर्षा  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मथुरा। </strong>ब्रज की कुंज गलियों में आज से रंगों का ऐसा उत्सव शुरू हुआ है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देगी। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में जैसे ही गुलाल उड़ा, वैसे ही ब्रज के सुप्रसिद्ध 40 दिवसीय रंगोत्सव का औपचारिक शंखनाद हो गया। </p>
<p style="text-align:justify;">वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में सुबह से ही लाखों भक्तों की भीड़ जमा थी। जैसे ही राजभोग आरती का समय हुआ, सेवायत गोस्वामियों ने ठाकुरजी की ओर से भक्तों पर अबीर-गुलाल की वर्षा शुरू कर दी। पूरा मंदिर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568862/a-vibrant-festival-of-colors-begins-in-braj-today--devotees-played-holi-with-banke-bihari--a-shower-of-colored-powder-and-gulal-ensued"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design---2026-01-23t183527.353.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मथुरा। </strong>ब्रज की कुंज गलियों में आज से रंगों का ऐसा उत्सव शुरू हुआ है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देगी। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में जैसे ही गुलाल उड़ा, वैसे ही ब्रज के सुप्रसिद्ध 40 दिवसीय रंगोत्सव का औपचारिक शंखनाद हो गया। </p>
<p style="text-align:justify;">वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में सुबह से ही लाखों भक्तों की भीड़ जमा थी। जैसे ही राजभोग आरती का समय हुआ, सेवायत गोस्वामियों ने ठाकुरजी की ओर से भक्तों पर अबीर-गुलाल की वर्षा शुरू कर दी। पूरा मंदिर परिसर 'बांकेबिहारी लाल की जय' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। सफेद और पीले वस्त्रों में सजे भक्तों पर जब गुलाबी और लाल गुलाल गिरा, तो हर चेहरा भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।</p>
<p style="text-align:justify;">मान्यता है कि ब्रज में होली की शुरुआत बांकेबिहारी के चरणों में गुलाल अर्पित करने के साथ ही होती है। उधर, प्राचीन ठाकुर श्रीराधारमण मंदिर में वसंत उत्सव की अलग ही छटा देखने को मिली। ठाकुरजी ने आज विशेष रूप से पीली पोशाक धारण की। बसंती रंग के फूलों से सजे मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के इस मोहक रूप के दर्शन किए। </p>
<p style="text-align:justify;">राधारमण लाल का पीला श्रृंगार और बसंती भोजन (पीले चावल और केसरिया हलवा) भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा द्वारकाधीश मंदिर और शाहजी मंदिर में भी वसंत के आगमन पर विशेष आयोजन किए गए। ब्रज में वसंत पंचमी से शुरू हुआ यह 'होली उत्सव' अगले 40 दिनों तक यानी रंगभरी एकादशी और मुख्य होली तक जारी रहेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">इन 40 दिनों में ब्रज के अलग-अलग गांवों और मंदिरों में लट्ठमार होली, लड्डू होली और फूलों की होली के आयोजन होंगे। भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मथुरा और वृंदावन को अलग-अलग जोन्स में बांटकर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए। </p>
<p style="text-align:justify;">भारी वाहनों का प्रवेश पहले ही रोक दिया गया था, ताकि पैदल चल रहे भक्तों को असुविधा न हो। ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। वसंत पंचमी से इसकी शुरुआत यह संदेश देती है कि अब प्रकृति और भक्ति, दोनों ही रंगों में सराबोर होने के लिए तैयार हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568859/under-exam-stress--a-10th-grade-student-commits-suicide--police-break-down-the-door-and-investigate-after-being-informed"><span class="t-red">परीक्षा के तनाव में 10वीं की छात्रा ने दी जान, </span>सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तुड़वाकर की जांच-पड़ताल</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मथुरा</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568862/a-vibrant-festival-of-colors-begins-in-braj-today--devotees-played-holi-with-banke-bihari--a-shower-of-colored-powder-and-gulal-ensued</link>
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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:38:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाराबंकी में धूमधाम से मनाई गई बसंत पंचमी,  श्रद्धा और उत्साह के साथ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बाराबंकी, अमृत विचार।</strong> जनपद में बसंत पंचमी का पर्व विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं अधिवक्ता संगठनों द्वारा मनाया गया। इस अवसर पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं वैचारिक संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। बहराइच रोड स्थित बाबा गुरुकुल एकेडमी परिसर में आयोजित बसंत उत्सव का शुभारंभ विद्यालय के प्रशासक मनदीप सिंह एवं प्रबंधक हरपाल सिंह ने अपनी पत्नी चरनजीत कौर के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं विधिवत पूजन-अर्चन कर किया। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नवप्रवेशी नन्हे विद्यार्थियों का विद्यारंभ संस्कार संपन्न कराया गया। छात्र-छात्राओं ने संगीत शिक्षक उत्कर्ष के निर्देशन में मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568860/basant-panchami-celebrated-with-great-fervor-in-barabanki--goddess-saraswati-worshipped-with-devotion-and-enthusiasm"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design---2026-01-23t182726.878.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बाराबंकी, अमृत विचार।</strong> जनपद में बसंत पंचमी का पर्व विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं अधिवक्ता संगठनों द्वारा मनाया गया। इस अवसर पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं वैचारिक संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। बहराइच रोड स्थित बाबा गुरुकुल एकेडमी परिसर में आयोजित बसंत उत्सव का शुभारंभ विद्यालय के प्रशासक मनदीप सिंह एवं प्रबंधक हरपाल सिंह ने अपनी पत्नी चरनजीत कौर के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं विधिवत पूजन-अर्चन कर किया। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नवप्रवेशी नन्हे विद्यार्थियों का विद्यारंभ संस्कार संपन्न कराया गया। छात्र-छात्राओं ने संगीत शिक्षक उत्कर्ष के निर्देशन में मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर प्रधानाचार्य आर. पी. सिंह सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। विद्यालय प्रबंधन ने शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर बल दिया। वहीं बसंत पंचमी के अवसर पर श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) में देवी सरस्वती की भव्य पूजा-अर्चना एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">कुलपति कर्नल (डॉ.) विजय तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। कार्यक्रम में रजिस्ट्रार डॉ. हेमेन्द्र शर्मा, छात्र कल्याण प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. डॉ. बी.एम. दीक्षित, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. आर.डी. यादव तथा मीडिया प्रभारी प्रो. (डॉ.) रज़ाउर रहमान उपस्थित रहे। सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बना दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त जिला बार एसोसिएशन सभागार में लोक भारती के तत्वावधान में अधिवक्ताओं द्वारा बसंत पंचमी समारोह हर्षोल्लास से मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्गेश प्रताप मिहिर ने की तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह सुधीर जी मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए संघ द्वारा निर्धारित पांच परिवर्तनों की जानकारी दी। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता एवं संघ पदाधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में भी बसंत पंचमी पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रामसनेहीघाट स्थित जेबीएस संस्थान मालिनपुर में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं हवन-यज्ञ का आयोजन हुआ। इस अवसर पर गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्मदिवस भी श्रद्धापूर्वक मनाया गया। वहीं गायत्री शक्तिपीठ रामसनेहीघाट पर 24 घंटे का अखंड गायत्री महामंत्र जप एवं पंचकुंडीय महायज्ञ संपन्न हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;">सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में भी बसंत पंचमी पर विद्यालयों एवं घरों में मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर मिष्ठान वितरण किया गया। चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय, सीतादेवी महाविद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज सिरौलीगौसपुर एवं जनता इंटर कॉलेज बदोसरांय में शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने विद्या की देवी से ज्ञान का आशीर्वाद मांगा। </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं रामनगर क्षेत्र के गणेशपुर में बसंत पंचमी के अवसर पर भव्य कलश शोभायात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। पीले वस्त्रों में सजी महिलाओं द्वारा निकाली गई कलश यात्रा आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने सरयू नदी से पवित्र जल भरकर आयोजन स्थल पर कलश स्थापित किए। कथा व्यास पंडित अश्वनी त्रिपाठी महाराज के सान्निध्य में प्रतिदिन कथा श्रवण का क्रम जारी रहेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568859/under-exam-stress--a-10th-grade-student-commits-suicide--police-break-down-the-door-and-investigate-after-being-informed"><span class="t-red">परीक्षा के तनाव में 10वीं की छात्रा ने दी जान, </span>सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तुड़वाकर की जांच-पड़ताल</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बाराबंकी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:27:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसंत पंचमी के अवसर पर खुला 'बसंती कमरा',  'शाहजी मंदिर' के पट भव्यता देख भावविभोर हुए भक्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मथुरा। </strong>बसंत पंचमी के अवसर पर वृंदावन में स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने 'शाहजी मंदिर' के पट विशेष रूप से खोले गए। मंदिर का विश्व प्रसिद्ध 'बसंती कमरा' साल में सिर्फ दो बार खुलता है, और आज उसी दुर्लभ नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से आए हजारों भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। शाहजी मंदिर का 'बसंती कमरा' अपनी विलासिता और सुंदरता के लिए मशहूर है। </p>
<p style="text-align:justify;">बसंत पंचमी पर इस कक्ष को पीले रंग के बेशकीमती बेल्जियम कांच के झाड़-फानूसों और दुर्लभ पेंटिंग्स से सजाया गया। जब सुनहरी रोशनी इन कांच के टुकड़ों से छनकर ठाकुरजी के विग्रह पर पड़ी,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568853/on-the-occasion-of-basant-panchami--the--basanti-room--was-opened-at--shahji-temple---devotees-were-overwhelmed-by-the-grandeur"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design---2026-01-23t174242.965.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मथुरा। </strong>बसंत पंचमी के अवसर पर वृंदावन में स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने 'शाहजी मंदिर' के पट विशेष रूप से खोले गए। मंदिर का विश्व प्रसिद्ध 'बसंती कमरा' साल में सिर्फ दो बार खुलता है, और आज उसी दुर्लभ नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से आए हजारों भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। शाहजी मंदिर का 'बसंती कमरा' अपनी विलासिता और सुंदरता के लिए मशहूर है। </p>
<p style="text-align:justify;">बसंत पंचमी पर इस कक्ष को पीले रंग के बेशकीमती बेल्जियम कांच के झाड़-फानूसों और दुर्लभ पेंटिंग्स से सजाया गया। जब सुनहरी रोशनी इन कांच के टुकड़ों से छनकर ठाकुरजी के विग्रह पर पड़ी, तो पूरा मंदिर परिसर किसी दिव्य लोक जैसा नजर आने लगा। भक्तों के लिए यह केवल दर्शन नहीं, बल्कि कला और भक्ति के संगम का एक जादुई अनुभव था। </p>
<p style="text-align:justify;">19वीं सदी में लखनऊ के धनी जौहरी भाइयों, शाह कुंदन लाल और शाह फुंदन लाल द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे 'टेढ़े खंभों वाला मंदिर' भी कहा जाता है। बसंत पंचमी पर इन नक्काशीदार टेढ़े खंभों के बीच जब ठाकुरजी का दरबार सजा, तो वहां मौजूद हर भक्त इस वास्तुकला के रहस्य को निहारता रह गया। शाहजी मंदिर की यह परंपरा दशकों पुरानी है। </p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन ने बताया कि 'बसंती कमरे' की झलक अब साल भर नहीं मिलेगी। वसंत पंचमी के विशेष दर्शनों के बाद अब इस कक्ष के पट सीधे श्रावण मास (सावन) में होने वाले झूला उत्सव के दौरान ही खुलेंगे। दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं का कहना था कि इस दिव्य नजारे के लिए साल भर का इंतजार भी कम है। मंदिर की खासियत इसकी स्थापना है जो 1876 में लखनऊ के नवाबों के जौहरियों द्वारा निर्माण कराया गया। बसंती कमरा: साल में केवल दो बार (वसंत पंचमी और सावन) खुलता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568813/tilak-ceremony-of-shri-vishweshwar-on-basant-panchami--elaborate-worship-of-goddess-saraswati-concluded-at-kashi-vishwanath-temple"><span class="t-red">बसंत पंचमी पर श्री विश्वेश्वर का तिलक उत्सव, </span>काशी विश्वनाथ मंदिर में माँ सरस्वती की विधि-विधान से आराधना संपन्न </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मथुरा</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568853/on-the-occasion-of-basant-panchami--the--basanti-room--was-opened-at--shahji-temple---devotees-were-overwhelmed-by-the-grandeur</link>
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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 17:43:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरिद्वार :  बसंत पंचमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों भक्तों ने गंगा में लगाई डुबकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>हरिद्वार।</strong> उत्तराखंड के हरिद्वार में ऋतुराज बसंत के आगमन और विद्या की देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य उत्सव बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के तीन बजे से ही हर की पैड़ी, मालवीय द्वीप और सुभाष घाट पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। 'हर-हर गंगे' और 'जय माँ सरस्वती' के उद्घोषों के बीच लाखों भक्तों ने गंगा की शीतल धारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">आज के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होने के कारण घाटों का नजारा बेहद मनमोहक रहा। अधिकांश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568829/haridwar--a-surge-of-devotees-on-basant-panchami--despite-the-biting-cold--millions-of-devotees-took-a-dip-in-the-ganges"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design---2026-01-23t152422.807.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हरिद्वार।</strong> उत्तराखंड के हरिद्वार में ऋतुराज बसंत के आगमन और विद्या की देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य उत्सव बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के तीन बजे से ही हर की पैड़ी, मालवीय द्वीप और सुभाष घाट पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। 'हर-हर गंगे' और 'जय माँ सरस्वती' के उद्घोषों के बीच लाखों भक्तों ने गंगा की शीतल धारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">आज के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होने के कारण घाटों का नजारा बेहद मनमोहक रहा। अधिकांश श्रद्धालु पीले वस्त्रों में नजर आए और गंगा पूजन के बाद मां सरस्वती की वंदना की गई। विद्वानों के अनुसार गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है, इसी मान्यता के चलते बड़ी संख्या में छात्र और युवा भी घाटों पर पहुंचे। भीड़ के दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न जोन और सेक्टरों में विभाजित किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">हर की पैड़ी जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने। वहीं, यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस ने रूट डायवर्जन प्लान लागू किया है, जिससे दिल्ली और देहरादून से आने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही रोका जा रहा है। वंही जल पुलिस के जवान नावों के जरिए गहरे पानी में जाने वाले श्रद्धालुओं पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्नान के साथ-साथ आज हरिद्वार के विभिन्न मठ-मंदिरों और आश्रमों में विशेष हवन-पूजन किए जा रहे हैं। शांतिकुंज और गायत्री तीर्थ में भी बसंत पर्व को लेकर विशेष आध्यात्मिक उत्सव मनाया जा रहा है, जहाँ हजारों की संख्या में परिजन जुटे हैं। विद्वानों के अनुसार पूरा दिन स्नान के लिए शुभ है, जिसके चलते शाम की गंगा आरती तक भारी भीड़ रहने की संभावना है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568823/rain-followed-by-snowfall-in-uttarakhand--mountains-covered-in-a-white-blanket--mata-vaishno-devi-pilgrimage-halted-due-to-snowfall"><span class="t-red">उत्तराखंड में बारिश के बाद बर्फबारी, </span>सफ़ेद चादर से ढकें पहाड़, स्नोफॉल के चलते रुकी माता वैष्णो देवी यात्रा</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हरिद्वार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568829/haridwar--a-surge-of-devotees-on-basant-panchami--despite-the-biting-cold--millions-of-devotees-took-a-dip-in-the-ganges</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/568829/haridwar--a-surge-of-devotees-on-basant-panchami--despite-the-biting-cold--millions-of-devotees-took-a-dip-in-the-ganges</guid>
                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 15:24:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Basant Panchami 2026: देश में दिखी बसंत पंचमी की धूम, 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में लगाई डुबकी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराजः </strong>प्रयागराज में जारी माघ मेले में शुक्रवार को बसंत पंचमी स्नान पर्व पर दोपहर 12 बजे तक 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि कल रात 12 बजे से ही लोगों का संगम क्षेत्र में आगमन और स्नान जारी है और आज बसंत पंचमी पर दोपहर 12 बजे तक 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(42)12.png" alt="MUSKAN DIXIT (42)" width="1200" height="720" /></p>
<p style="text-align:justify;">मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि मेला क्षेत्र के सभी घाटों पर श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब मौजूद है। कंट्रोल रूम के माध्यम से श्रद्धालुओं के आवागमन पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568821/basant-panchami-was-celebrated-in-the-country-210-crore-devotees"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(41)12.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराजः </strong>प्रयागराज में जारी माघ मेले में शुक्रवार को बसंत पंचमी स्नान पर्व पर दोपहर 12 बजे तक 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि कल रात 12 बजे से ही लोगों का संगम क्षेत्र में आगमन और स्नान जारी है और आज बसंत पंचमी पर दोपहर 12 बजे तक 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(42)12.png" alt="MUSKAN DIXIT (42)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि मेला क्षेत्र के सभी घाटों पर श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब मौजूद है। कंट्रोल रूम के माध्यम से श्रद्धालुओं के आवागमन पर नजर रखी जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक कैमरे क्रियाशील हैं। उन्होंने कहा कि साथ ही रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों की भी निगरानी की जा रही है। सभी जगहों पर पुलिस प्रशासन के कर्मचारी अधिकारी तैनात हैं। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र मिश्रा ने कहा कि चूंकि प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का वास है, इसलिए यहां बसंत पंचमी स्नान का विशेष महत्व है। बसंत पंचमी पर पीला वस्त्र धारण करने, पीली वस्तुओं का दान करने का विधान है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी के दिन से ही ऋतु परिवर्तन का एहसास जनमानस को होने लगता है और लोग गुलाल आदि लगाकर इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टरों में लगाया गया है। मेला क्षेत्र में 25,000 से अधिक शौचालय बनाए गए हैं और 3500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। उन्होंने बताया कि छोटी अवधि का कल्पवास करने के इच्छुक लोगों के लिए माघ मेला में टेंट सिटी बनाई गई है जहां ध्यान और योग आदि की सुविधाएं मौजूद हैं। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(43)12.png" alt="MUSKAN DIXIT (43)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन एवं सुगम यातायात को ध्यान में रखते हुए इस बार 42 अस्थायी पार्किंग तैयार की गई हैं जिनमें लगभग एक लाख से अधिक वाहन खड़े हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि माघ मेला 2025-26 में कुल 12,100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है जिनमें सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सेमराधनाथ घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भदोही जिले के सेमराधनाथ गंगा घाट पर शुक्रवार को हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त की। काशी-प्रयाग व विंध्य पर्वत मालाओं के बीच पतित पावनी मां गंगा के तट स्थित सेमराधनाथ घाट पर शुक्रवार को हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त की। गुरुवार की अर्धरात्रि की बाद से गंगा घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का शुरू हुआ सिलसिला बसंत पंचमी के दिन शुक्रवार की दोपहर तक जारी रहा। जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान ध्यान कर इच्छित कामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/muskan-dixit-(44)12.png" alt="MUSKAN DIXIT (44)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">प्रमुख ज्योतिषाचार्य पंडित मिथिलेश उपाध्याय ने बताया कि माघ मास में बसंत पंचमी पर स्नान का विशेष महत्व है। पंचमी पर 'अमृत स्नान' करने से सभी पाप धुल जाते हैं व आध्यात्मिक शुद्धि के साथ ज्ञान, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। मां सरस्वती की कृपा बरसती है व बुद्धि और विवेक की वृद्धि होती है। यह स्नान मोक्ष प्राप्ति और पितरों की शांति का भी मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पाप कर्मों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह दिन ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है, इसलिए स्नान के साथ उनकी पूजा करने से विद्या, बुद्धि और कला के क्षेत्र में सफलता मिलती है तथा सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) के दिन संगम तट (प्रयागराज) पर किया जाने वाला स्नान 'अमृत स्नान' कहलाता है, क्योंकि इसे अदृश्य सरस्वती नदी का संगम भी माना जाता है। बसंत पंचमी का स्नान न केवल शारीरिक बल्कि आत्मिक शुद्धि का माध्यम है और ज्ञान व सौभाग्य की प्राप्ति का एक पवित्र अनुष्ठान भी है। बताया कि वसंत पंचमी के दिन स्नान-दान और पूजन करने से पापों का क्षय और अविद्या का नाश होता है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>भदोही</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568821/basant-panchami-was-celebrated-in-the-country-210-crore-devotees</link>
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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 15:02:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बसंत पंचमी पर श्री विश्वेश्वर का तिलक उत्सव, काशी विश्वनाथ मंदिर में माँ सरस्वती की विधि-विधान से आराधना संपन्न </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी। </strong>बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान श्री विश्वेश्वर का तिलक उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर मंदिर के शास्त्रियों ने बाबा विश्वेश्वर की पंचबदन प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजन के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से परिपूर्ण रहा। पूजन के पश्चात मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">तिलक उत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित विद्या एवं संगीत की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568813/tilak-ceremony-of-shri-vishweshwar-on-basant-panchami--elaborate-worship-of-goddess-saraswati-concluded-at-kashi-vishwanath-temple"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design---2026-01-23t141841.568.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी। </strong>बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान श्री विश्वेश्वर का तिलक उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर मंदिर के शास्त्रियों ने बाबा विश्वेश्वर की पंचबदन प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजन के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से परिपूर्ण रहा। पूजन के पश्चात मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">तिलक उत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित विद्या एवं संगीत की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की भी विधि-विधान से आराधना संपन्न हुई। इस शुभ अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर न्यास की ओर से एसडीएम शंभू शरण जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन किया। माँ सरस्वती से विद्या, विवेक, वाणी और कला की समृद्धि की कामना की गई। </p>
<p style="text-align:justify;">बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। सभी ने माँ सरस्वती के चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सरस्वती पूजन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश भी दिया गया। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568793/uttarayani-kauthig--the-consecration-ceremony-of-maryada-purushottam-was-witnessed-on-the-ninth-day"><span class="t-red">उत्तरायणी कौथिग : </span>नवें दिन दिखी मर्यादा पुरुषोत्तम की प्राण प्रतिष्ठा, तस्वीरें देखें</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>वाराणसी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568813/tilak-ceremony-of-shri-vishweshwar-on-basant-panchami--elaborate-worship-of-goddess-saraswati-concluded-at-kashi-vishwanath-temple</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/568813/tilak-ceremony-of-shri-vishweshwar-on-basant-panchami--elaborate-worship-of-goddess-saraswati-concluded-at-kashi-vishwanath-temple</guid>
                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 14:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसंत पंचमी पर आज अबीर गुलाल खेलेंगे सिया संग राजाराम,  राम मंदिर मे अबीर-गुलाल लगाए जाने के परंपरा की शुरुआत </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सत्य प्रकाश/अयोध्या, अमृत विचार। </strong>राम मंदिर में पहली बार सिया संग प्रभु राजाराम बसंत पंचमी पर आज अबीर गुलाल खेलेंगे। जिसके साथ ही मठ मंदिर में रंगोंत्सव की छटा बिखेरने लगेगी। रंगों की तो कहीं फूलों की होली के साथ मंदिर में भगवान के समक्ष गीत-संगीत का आयोजन होगा है। जिसे मंदिरों में अपने अलग-अलग परंपरागत रूप से 40 दिनों तक यह उत्सव मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">23 जनवरी की सुबह बसंत लगने के बाद से ही मंदिरों में भगवान का अभिषेक श्रृंगार के साथ अबीर-गुलाल लगाए जाने के परंपरा की शुरुआत होगी। राम मंदिर, हनुमानगढ़ी सहित लगभग 5000 मंदिरों में इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568756/for-the-first-time--rajaram-will-play-holi-with-sita--the-tradition-of-applying-abir-and-gulal--colored-powders--begins-after-the-arrival-of-spring-at-the-ram-temple"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(16)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सत्य प्रकाश/अयोध्या, अमृत विचार। </strong>राम मंदिर में पहली बार सिया संग प्रभु राजाराम बसंत पंचमी पर आज अबीर गुलाल खेलेंगे। जिसके साथ ही मठ मंदिर में रंगोंत्सव की छटा बिखेरने लगेगी। रंगों की तो कहीं फूलों की होली के साथ मंदिर में भगवान के समक्ष गीत-संगीत का आयोजन होगा है। जिसे मंदिरों में अपने अलग-अलग परंपरागत रूप से 40 दिनों तक यह उत्सव मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">23 जनवरी की सुबह बसंत लगने के बाद से ही मंदिरों में भगवान का अभिषेक श्रृंगार के साथ अबीर-गुलाल लगाए जाने के परंपरा की शुरुआत होगी। राम मंदिर, हनुमानगढ़ी सहित लगभग 5000 मंदिरों में इस उत्सव को भव्यता के साथ बनाए जाने की तैयारी है। मंदिर के गर्भ ग्रह में प्रतिदिन दोपहर में भगवान को तरह-तरह के पकवान से भोग लगाए जाएंगे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पूरा मंदिर परिसर आनंद विभोर होकर उत्सव मनाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">इस उत्सव को और भी भव्यता देते हुए साधु संत विभिन्न प्रकार की आयोजन को भी संपन्न करेंगे। रंगों की होली, फूलों की होली, संतों की होली, भक्तों की होली के दृश्य भी दिखाई देंगे। मुख्य रूप से कनक भवन, लाल साहब दरबार, बड़ा भक्माल, राम बल्लभ कुंज, चौभुजी मंदिर, मंगल भवन, दशरथ महल, राम हर्षद कुंज, जानकी महल, तपस्वी छावनी, चारु शिला मंदिर, बधाई भवन मंदिर, वैदेही मंदिर, बावन मंदिर में उत्सव को भव्य रूप मनाया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ा भक्तमाल के माल अवधेश दास ने कहा कि बसंत पंचमी के बाद से ही रंग, अबीर, गुलाल के साथ होली उत्सव प्रारंभ हो जाता है। जो दिन पर्यंत चलता है। उसी के उपलक्ष्य में भगवान श्री सीताराम जी की दिव्य होली महोत्सव का कार्यक्रम किया जाता है। जिसमें अयोध्या के सभी संत महंत शामिल होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण ने बताया कि अयोध्या का भव्य सुंदरीकरण हो रहा है। सभी संत हर्ष उत्साहित है। होली महोत्सव को अलग-अलग मंदिरों में मनाया जायेगा और पूरी अयोध्या में श्री सीताराम जी के फूलों की होली खेलेगी। यह भगवान से जुड़ने और जोड़ने की होली होती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568754/a-286-kg-kodanda--bow--made-of-five-metals-was-dedicated-to-ram-lalla--it-was-crafted-by-48-female-artisans-from-five-metals-over-a-period-of-8-months"><span class="t-red">रामलला को समर्पित हुआ पंचधातु से बने 286 किलो का कोदंड, </span>48 महिला कारीगरों ने 8 माह में किया तैयार</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568756/for-the-first-time--rajaram-will-play-holi-with-sita--the-tradition-of-applying-abir-and-gulal--colored-powders--begins-after-the-arrival-of-spring-at-the-ram-temple</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/568756/for-the-first-time--rajaram-will-play-holi-with-sita--the-tradition-of-applying-abir-and-gulal--colored-powders--begins-after-the-arrival-of-spring-at-the-ram-temple</guid>
                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 11:04:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Magh Mela 2026 : प्रयागराज में बसंत पंचमी का महास्नान, 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का अनुमान, प्रशासन ने कसी कमर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज: </strong>माघ मेले का चौथा प्रमुख स्नान पर्व आज 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी पर मनाया जा रहा है। त्रिवेणी संगम के पावन तट पर लाखों-करोड़ों श्रद्धालु ठंड और कोहरे की परवाह किए बिना आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पंचमी तिथि गुरुवार रात 2:28 बजे से शुरू होकर शुक्रवार रात 1:56 बजे तक रहेगी। इस पुण्य मुहूर्त में श्रद्धालु पीले वस्त्र, पीले अन्न और दान-पुण्य कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेला प्रशासन के अनुसार, बसंत पंचमी, आगामी 25 जनवरी को अचला सप्तमी (पुत्र सप्तमी या भानु सप्तमी) और वीकेंड के चलते अगले तीन दिनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568746/magh-mela-2026--basant-panchami-s-grand-bath-in-prayagraj--35-million-people-expected-to-take-a-dip-in-the-confluence--administration-gears-up-for-crowd-management"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(12)13.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज: </strong>माघ मेले का चौथा प्रमुख स्नान पर्व आज 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी पर मनाया जा रहा है। त्रिवेणी संगम के पावन तट पर लाखों-करोड़ों श्रद्धालु ठंड और कोहरे की परवाह किए बिना आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पंचमी तिथि गुरुवार रात 2:28 बजे से शुरू होकर शुक्रवार रात 1:56 बजे तक रहेगी। इस पुण्य मुहूर्त में श्रद्धालु पीले वस्त्र, पीले अन्न और दान-पुण्य कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेला प्रशासन के अनुसार, बसंत पंचमी, आगामी 25 जनवरी को अचला सप्तमी (पुत्र सप्तमी या भानु सप्तमी) और वीकेंड के चलते अगले तीन दिनों में कुल 3.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम स्नान कर सकते हैं। मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जाता है, जहां भीड़ का दबाव चरम पर रहता है। मेला क्षेत्र में 3.5 किमी लंबाई वाले 24 घाट पूरी तरह तैयार हैं, जहां सफाई, निर्मल जल और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भीड़ प्रबंधन और पांटून पुलों की खास व्यवस्था</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से घुमाने के लिए पांटून पुलों पर विशेष योजना बनाई है:  <br />- परेड से झूसी जाने के लिए पांटून पुल नंबर 3, 5 और 7।  <br />- झूसी से परेड आने के लिए पांटून पुल नंबर 4 और 6।  <br />- आपातकाल के लिए पुल नंबर 1 और 2 पर भारी पुलिस बल तैनात।  </p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय ने बताया कि भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, घाट सुरक्षा और निकासी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। माघ मेले से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य भारी और हल्के वाहनों को प्रयागराज जिले की सीमा पर ही वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ा जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण: बसंत पंचमी पर नया यमुना पुल पूरी तरह बंद रहेगा, आवागमन केवल पुराने पुल से संभव होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा और वसंत ऋतु की शुरुआत का भी उत्सव है। प्रशासन की कड़ी मेहनत से यह महास्नान सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हो रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568746/magh-mela-2026--basant-panchami-s-grand-bath-in-prayagraj--35-million-people-expected-to-take-a-dip-in-the-confluence--administration-gears-up-for-crowd-management</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/568746/magh-mela-2026--basant-panchami-s-grand-bath-in-prayagraj--35-million-people-expected-to-take-a-dip-in-the-confluence--administration-gears-up-for-crowd-management</guid>
                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 10:07:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : बसंत पंचमी पर बनेगी 196 वर्ष बाद सप्त महायोगों की स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>इस बार बसंत पंचमी पर कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। 196 वर्ष बाद सप्त महायोगों की स्थिति बन रही है।</p>
<p>आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि यानी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। साथ ही एक अबूझ मुहूर्त भी है।</p>
<p>इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, संपत्ति संबंधी लेन-देन और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस तिथि के शुरू होने से लेकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568662/on-basant-panchami--a-rare-combination-of-seven-auspicious-planetary-alignments-will-occur-after-196-years"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/basant-panchmi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>इस बार बसंत पंचमी पर कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। 196 वर्ष बाद सप्त महायोगों की स्थिति बन रही है।</p>
<p>आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि यानी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। साथ ही एक अबूझ मुहूर्त भी है।</p>
<p>इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, संपत्ति संबंधी लेन-देन और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस तिथि के शुरू होने से लेकर समाप्ति तक हर एक मिनट शुभ होता है। इस बार बसंत पंचमी की शुरुआत 22 जनवरी को रात्रि 2:30 से होगी, वहीं इसकी समाप्ति 23 जनवरी को रात्रि 1:48 पर होगी। ऐसे में यह पूरे दिन का समय शुभ होगा, जिसमें व्यक्ति भी शुभ कार्य कर सकता है।</p>
<p><strong>रवि योग दूर करता है नकारात्मक प्रभावों को</strong><br />बसंत पंचमी पर परिधि और शिव योग भी बन रहा है। जिससे आध्यात्मिक और भौतिक सफलता में वृद्धि होगी। रवि योग भी बन रहा है, यह बहुत ही शक्तिशाली माना जाने वाला योग है, यह नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568662/on-basant-panchami--a-rare-combination-of-seven-auspicious-planetary-alignments-will-occur-after-196-years</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 16:02:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसंत पंचमी कल...  शुक्र अस्त के चलते नहीं होंगे मांगलिक कार्य, जानें सबसे सरल विधि और प्रार्थना मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार</strong>: बसंत पंचमी शुक्रवार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। सरस्वती पूजा मुहूर्त प्रात: 6:18 से दिन 12:18 तक श्रेष्ठ है। माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि का प्रारम्भ गुरुवार 22 जनवरी की देर रात्रि 02:28 से होगी और शुक्रवार 23 जनवरी देर रात्रि 01: 46 को पंचमी तिथि समाप्त होगी यानी पंचमी तिथि 23 जनवरी को पूरे दिन रहेगी। बसंत पंचमी पर शुभ योग, चन्द्रमा कुम्भ राशि में प्रात: 08:33 के उपरांत मीन राशि में रहेगा व पूर्वाभाद्रप्रद नक्षत्र दिन में 02 :33</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568622/basant-panchami-tomorrow----auspicious-ceremonies-will-not-be-held-due-to-venus-being-in-conjunction-with-the-sun--know-the-simplest-method-and-prayer-mantra"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(56)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार</strong>: बसंत पंचमी शुक्रवार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। सरस्वती पूजा मुहूर्त प्रात: 6:18 से दिन 12:18 तक श्रेष्ठ है। माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि का प्रारम्भ गुरुवार 22 जनवरी की देर रात्रि 02:28 से होगी और शुक्रवार 23 जनवरी देर रात्रि 01: 46 को पंचमी तिथि समाप्त होगी यानी पंचमी तिथि 23 जनवरी को पूरे दिन रहेगी। बसंत पंचमी पर शुभ योग, चन्द्रमा कुम्भ राशि में प्रात: 08:33 के उपरांत मीन राशि में रहेगा व पूर्वाभाद्रप्रद नक्षत्र दिन में 02 :33 उपरांत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">मकर राशि में 4 ग्रह-सूर्य, शुक्र, मंगल तथा बुध एक साथ होंगे तथा मंगल अपनी उच्च राशि में विराजमान रहेंगे। रवियोग एवं चन्द्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल बताते हैं कि बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त है परन्तु इस वर्ष शुक्र के अस्त के चलते इस दिन विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ये पर्व ऋतुराज बसंत के आने की सूचना देता है। बसंत ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य मन को मोहित करता है। मां सरस्वती को शारदा, वीणावादनी, वाग्देवी, भगवती, वागीश्वरी आदि नामों से जाना जाता है। इनका वाहन हंस है। बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। मां सरस्वती विद्या, गीत-संगीत, ज्ञान एवं कला की अधिष्ठात्री देवी है। इनको प्रसन्न करके इनके आर्शीवाद से विद्या, ज्ञान, कला प्राप्त किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बसंत पंचमी पर श्वेत वस्त्रावृत्ता मां सरस्वती की प्रातः स्नान कर इनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इनके पूजन में दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, गेहूं की बाली, पीले सफेद रंग की मिठाई और पीले सफेद पुष्पों को अर्पण कर सरस्वती के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए और पीले रंग की खाद्य सामग्री के अधिकाधिक सेवन की भी परंपरा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/568619/on-up-day---education-forums--will-be-organized-in-every-gram-panchayat--school-children-will-read-newspapers--write-articles--and-give-speeches"><span class="t-red">यूपी दिवस खास:</span>सजेगी हर न्याय पंचायत में ‘शिक्षा चौपाल’, स्कूली बच्चे पढ़ेगें अख़बार...लिखेंगे लेख और देंगे भाषण</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568622/basant-panchami-tomorrow----auspicious-ceremonies-will-not-be-held-due-to-venus-being-in-conjunction-with-the-sun--know-the-simplest-method-and-prayer-mantra</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 08:59:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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