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                <description>isro RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नैनीताल :  आर्यभट्ट यान की स्वर्ण जयंती पर बोले इसरो के डिप्टी डायरेक्टर - अंतरिक्ष योजनाओं को आगे बढ़ाने का जिम्मा युवाओं पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार, नैनीताल: </strong>देश के पहले अंतरिक्ष यान आर्यभट्ट सैटेलाइट की स्वर्ण जयंती शुक्रवार को डीएसबी परिसर में विविध कार्यक्रमों के साथ मनाई गई। इस अवसर पर इसरो, डीएसबी कैंपस और नगर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।</p>
<p style="text-align:justify;">डीएसबी परिसर सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, इसरो के  डिप्टी डायरेक्टर एन एस मुरली ने कहा कि आर्यभट्ट सैटेलाइट मिशन देश का पहला मिशन था। जिसकी सफलता से देश का अंतरिक्ष मिशन का सफर शुरू हुआ और आज हम विश्व में अलग पहचान बनाने में सफल हो पाए हैं। अंतरिक्ष योजनाओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576691/nainital--on-the-golden-jubilee-of-aryabhatta-spacecraft--isro-s-deputy-director-said-%E2%80%93-the-responsibility-of-taking-forward-the-space-plans-lies-with-the-youth"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-27-at-9.21.27-pm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार, नैनीताल: </strong>देश के पहले अंतरिक्ष यान आर्यभट्ट सैटेलाइट की स्वर्ण जयंती शुक्रवार को डीएसबी परिसर में विविध कार्यक्रमों के साथ मनाई गई। इस अवसर पर इसरो, डीएसबी कैंपस और नगर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।</p>
<p style="text-align:justify;">डीएसबी परिसर सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, इसरो के  डिप्टी डायरेक्टर एन एस मुरली ने कहा कि आर्यभट्ट सैटेलाइट मिशन देश का पहला मिशन था। जिसकी सफलता से देश का अंतरिक्ष मिशन का सफर शुरू हुआ और आज हम विश्व में अलग पहचान बनाने में सफल हो पाए हैं। अंतरिक्ष योजनाओं को आगे ले जाने का जिम्मा युवाओं के कंधों पर रहेगा। इसरो के डा ए राजेंद्र ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान का क्षेत्र न केवल युवाओं के लिए बेहतर भविष्य बनाने का क्षेत्र है बल्कि वैश्विक स्तर पर सेवा देना का क्षेत्र है। युवाओं को आगे आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">भौतिक विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो सूची बिष्ट ने कहा कि नगर के युवाओं को खगोलीय दुनिया के प्रति आकर्षित करने के लिए इस कार्यक्रम में युवाओं को शामिल किया गया है। इसरो से पहुंचे वैज्ञानिकों से मिलकर वह कई जानकारी ले सकते हैं। प्रो रमेश चंद्रा ने आर्यभट्ट अंतरिक्ष यान के बारे में जानकारी दी। इसरो के डॉ संकरासुब्रह्मण्यम ने भारतीय अंतरिक्ष परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। कहा कि इसरो मार्स ऑर्बिट मिशन, चंद्रयान 3 और आदित्य एल 1 जैसे सफल मिशन लॉन्च कर चुका है। इस अवसर पर स्कूली बच्चों की अंतरिक्ष पर क्विज और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमे शेरवुड कालेज, सेंट मैरी कांवेंट कॉलेज, सनवाल स्कूल, मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, जीजीआईसी समेत अन्य विद्यालयों ने भाग लिया। इस अवसर पर डीन प्रो संजय पंत, इसरो के डा गोविंद राव, डा सिद्धार्थ तिवारी, डा भुवन जोशी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 22:04:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण बच्चों को मिलेगी अंतरिक्ष की उड़ानः 40 गांवों में स्थापित होंगी इसरो की स्पेस लैब, महोबा से हुई शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>महोबाः </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, अहमदाबाद द्वारा संचालित 'विलेज वैज्ञानिक कार्यक्रम' के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के 40 गांवों में ग्रामीण स्पेस लैब स्थापित की जाएंगी। इस पहल के साथ महोबा देश का पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण विद्यार्थियों को संगठित रूप से अंतरिक्ष विज्ञान की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस क्रम में लखनऊ की व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से 16 फरवरी को रतौली ग्राम पंचायत स्थित एक राजकीय विद्यालय में "नीलेश एम. देसाई स्पेस लैब" का उद्घाटन किया जाएगा। यह लैब इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, अहमदाबाद की पहल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/571319/rural-children-will-get-space-flight--mahoba-becomes-the-first-district-in-the-country----isro-s-space-labs-will-be-established-in-40-villages"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(26)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>महोबाः </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, अहमदाबाद द्वारा संचालित 'विलेज वैज्ञानिक कार्यक्रम' के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के 40 गांवों में ग्रामीण स्पेस लैब स्थापित की जाएंगी। इस पहल के साथ महोबा देश का पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण विद्यार्थियों को संगठित रूप से अंतरिक्ष विज्ञान की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस क्रम में लखनऊ की व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से 16 फरवरी को रतौली ग्राम पंचायत स्थित एक राजकीय विद्यालय में "नीलेश एम. देसाई स्पेस लैब" का उद्घाटन किया जाएगा। यह लैब इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, अहमदाबाद की पहल का हिस्सा है। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने शनिवार को बताया कि प्रत्येक स्पेस लैब में उन्नत एवं इंटरैक्टिव शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें कार्यशील दूरबीनें, 3डी प्रिंटर, इसरो मिशन मॉडल प्रदर्शनी, रोबोट, ड्रोन तथा स्टेम आधारित प्रयोगात्मक सेट-अप शामिल हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक कक्षा शिक्षण को रोचक एवं अनुभवात्मक मॉडल में परिवर्तित करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि स्पेस लैब्स को प्रारंभिक स्तर से ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी कौशल विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह अनुप्रयोग, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक जैसी उभरती तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एक वर्ष के संरचित पाठ्यक्रम के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा तथा वार्षिक मूल्यांकन के माध्यम से कौशल विकास की निगरानी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि यह पहल शहरी और ग्रामीण शिक्षा के बीच की खाई को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है तथा ग्रामीण विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में करियर विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित करेगी। इस अवसर पर इसरो एसएसी अहमदाबाद के निदेशक नीलेश देसाई 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे मोदी मेला परिसर में आयोजित पुस्तक मेले का अवलोकन कर विद्यार्थियों से संवाद भी करेंगे। महोबा में इन दिनों चल रहे सूर्य महोत्सव के अंतर्गत युवाओं में स्थानीय विरासत, पुस्तक पठन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>चित्रकूट</category>
                                            <category>महोबा</category>
                                            <category>कानपुर देहात </category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 14:54:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO में AKTU के स्नातक छात्र भी कर सकेंगे इंटर्नशिप, अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने का सपना अब बनेगा हकीकत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के स्नातक से लेकर परास्नातक और शोध छात्र तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में इंटर्नशिप करेंगे। इसके साथ ही छात्र स्टूडेंट प्रोजेक्ट ट्रेनी स्कीम के अंतर्गत अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और रिमोट सेंसिंग जैसे विषयों पर प्रोजेक्ट वर्क भी करेंगे। विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों के लिए इसरो ने राष्ट्रीय स्तर की इंटर्नशिप योजना और स्टूडेंट प्रोजेक्ट ट्रेनी स्कीम की घोषणा की है। इन योजनाओं के माध्यम से छात्रों को इसरो के विभिन्न केंद्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों से जुड़ने का अवसर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569435/aktu-graduate-students-can-also-do-internship-at-isro--apply-soon-from-this-website"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(40)13.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के स्नातक से लेकर परास्नातक और शोध छात्र तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में इंटर्नशिप करेंगे। इसके साथ ही छात्र स्टूडेंट प्रोजेक्ट ट्रेनी स्कीम के अंतर्गत अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और रिमोट सेंसिंग जैसे विषयों पर प्रोजेक्ट वर्क भी करेंगे। विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों के लिए इसरो ने राष्ट्रीय स्तर की इंटर्नशिप योजना और स्टूडेंट प्रोजेक्ट ट्रेनी स्कीम की घोषणा की है। इन योजनाओं के माध्यम से छात्रों को इसरो के विभिन्न केंद्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>चयनित छात्रों को इसरो के वैज्ञानिकों और अभियंताओं के मार्गदर्शन में वास्तविक परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनकी अकादमिक समझ के साथ-साथ अनुसंधान क्षमता भी सुदृढ़ होगी। स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी) के अंतर्गत संचालित वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रभाग द्वारा चयनित छात्रों को प्रयोगशाला, पुस्तकालय, इंटरनेट सहित अन्य शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इंटर्नशिप के सफल समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा। एकेटीयू ने सभी संबद्ध संस्थानों के निदेशकों से छात्रों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित कराने के लिए उन्हें प्रेरित करने का अनुरोध किया है।</p>
<h3><strong>आवेदन के लिए यह छात्र होंगे पात्र</strong></h3>
<p>इस योजना के लिए बीई और बीटेक के वे छात्र आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने छठा सेमेस्टर पूर्ण कर लिया हो। एमई, एमटेक और एमएससी के छात्रों के लिए प्रथम सेमेस्टर पूर्ण होना अनिवार्य है, जबकि बीएससी और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के केवल अंतिम वर्ष के छात्र ही पात्र होंगे। पीएचडी शोधार्थियों के लिए कोर्सवर्क पूर्ण किया होना आवश्यक किया गया है। आवेदकों के पास न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक या 10 के पैमाने पर 6.32 सीजीपीए होना चाहिए। इंटर्नशिप की अवधि पाठ्यक्रम के अनुसार 10 सप्ताह से लेकर 52 सप्ताह तक निर्धारित की गई है।</p>
<h3><strong>इसरो की वेबसाइट से करना होगा आवेदन</strong></h3>
<p>छात्रों को आवेदन इसरो की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से करना होगा, जहां पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त एकेटीयू के इनोवेशन हब द्वारा विश्वविद्यालय स्तर पर समन्वय और रिकॉर्ड संधारण के लिए एक गूगल फॉर्म भी अनिवार्य रूप से भरना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:54:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो में इंटर्नशिप का सुनहरा मौका... AKTU के छात्रों के लिए बड़ा अवसर, अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने का सपना अब बनेगा हकीकत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर प्रदान किया गया है। इसरो की इंटर्नशिप योजना एवं स्टूडेंट प्रोजेक्ट ट्रेनी योजना के अंतर्गत स्नातक, परास्नातक एवं शोधार्थी विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को इसरो के विभिन्न केंद्रों में चल रही वास्तविक शोध एवं विकास गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना है। चयनित विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग एवं अन्य बहुविषयक क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568896/a-golden-opportunity-for-internships-at-isro----a-great-opportunity-for-aktu-students--the-dream-of-building-a-career-in-space-science-can-now-become-a-reality"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(76)5.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर प्रदान किया गया है। इसरो की इंटर्नशिप योजना एवं स्टूडेंट प्रोजेक्ट ट्रेनी योजना के अंतर्गत स्नातक, परास्नातक एवं शोधार्थी विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को इसरो के विभिन्न केंद्रों में चल रही वास्तविक शोध एवं विकास गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना है। चयनित विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग एवं अन्य बहुविषयक क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को अनुभवी इसरो वैज्ञानिकों एवं अभियंताओं के साथ कार्य कर व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने, सैद्धांतिक अध्ययन को वास्तविक समस्याओं से जोड़ने तथा अपने शैक्षणिक एवं करियर अवसरों को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।</p>
<h3><strong>इच्छुक विद्यार्थी इसरो की आधिकारिक वेबसाइट</strong></h3>
<p>https://www.isro.gov.in/InternshipAndProjects.html पर जाकर पात्रता एवं दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ते हुए आवेदन कर सकते हैं। साथ ही, एकेटीयू के इनोवेशन हब के द्वारा यह अनिवार्य किया गया है कि इसरो पोर्टल पर आवेदन करने के बाद विद्यार्थी संबंधित गूगल फॉर्म https://forms.gle/Hduv2jyc5xx9wTEd8 भी अवश्य भरें, ताकि विश्वविद्यालय स्तर पर समन्वय एवं अभिलेखीकरण सुनिश्चित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 10:34:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO का PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन थर्ड स्टेज में फेल, तीसरे चरण के अंत में आई तकनीकी खामी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>श्रीहरिकोटा:</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2026 का अपना पहला लॉन्च आज सुबह PSLV-C62 रॉकेट के साथ किया, लेकिन यह मिशन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से असफल रहा। रॉकेट ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से सुबह 10:17 बजे उड़ान भरी, लेकिन थर्ड स्टेज (PS3) के अंतिम हिस्से में आई तकनीकी अनियमितता के कारण उड़ान पथ में विचलन आ गया। ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने पुष्टि की कि थर्ड स्टेज के अंत में "disturbance" देखी गई, और अब डेटा का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया गया है।</p>
<p>यह PSLV का 64वां उड़ान मिशन था, जो 2025 की असफलता के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567361/isro-s-new-leap-into-space--the--eos-n1-anvesha-satellite--has-been-launched-and-will-enhance-india-s-security-from-space"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(78)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>श्रीहरिकोटा:</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2026 का अपना पहला लॉन्च आज सुबह PSLV-C62 रॉकेट के साथ किया, लेकिन यह मिशन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से असफल रहा। रॉकेट ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से सुबह 10:17 बजे उड़ान भरी, लेकिन थर्ड स्टेज (PS3) के अंतिम हिस्से में आई तकनीकी अनियमितता के कारण उड़ान पथ में विचलन आ गया। ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने पुष्टि की कि थर्ड स्टेज के अंत में "disturbance" देखी गई, और अब डेटा का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया गया है।</p>
<p>यह PSLV का 64वां उड़ान मिशन था, जो 2025 की असफलता के बाद एक महत्वपूर्ण कमबैक के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन अब यह PSLV के लिए लगातार दूसरी बड़ी चुनौती बन गई है, जहां थर्ड स्टेज में समस्या सामने आई।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/isro/status/2010582403732132185?s=20">https://twitter.com/isro/status/2010582403732132185?s=20</a></blockquote>
<p>

</p>
<h3><strong>मिशन का उद्देश्य और पेलोड्स</strong></h3>
<p><strong>- मुख्य पेलोड: </strong>DRDO द्वारा विकसित EOS-N1 (अन्वेषा)— एक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, जो सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान, सामरिक निगरानी और पर्यावरण मॉनिटरिंग में क्रांतिकारी साबित होने वाला था।</p>
<p><strong>- अन्य पेलोड्स: </strong>कुल 15 सह-यात्री सैटेलाइट्स (कुल 16 पेलोड्स), जिनमें भारतीय स्टार्टअप्स, छात्रों के प्रयोग, विदेशी ग्राहकों (जैसे स्पेन का KID री-एंट्री डेमोंस्ट्रेटर) के सैटेलाइट्स शामिल थे। ये सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (लगभग 505 किमी) में स्थापित होने थे, जबकि एक कैप्सूल री-एंट्री ट्रैजेक्टरी पर था।<br /><br />- यह NSIL (NewSpace India Limited) का 9वां समर्पित कमर्शियल मिशन था, जिसमें PSLV-DL वेरिएंट (दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स) का इस्तेमाल किया गया।</p>
<h3><strong>क्या हुआ गड़बड़?</strong></h3>
<p>- लॉन्च से पहले सभी पैरामीटर्स सामान्य थे, ऑटोमेटिक सीक्वेंस शुरू हुआ और अंतिम चेक पूरा होने के बाद लिफ्टऑफ सफल रहा।</p>
<p>- पहले तीन स्टेज (सॉलिड और लिक्विड) सामान्य रूप से काम किए, लेकिन PS3 के अंत में वाहन में "disturbance" या "deviation" देखी गई, जिससे उड़ान पथ से भटकाव हुआ।</p>
<p>- इस कारण सैटेलाइट्स को इच्छित ऑर्बिट में इंजेक्ट नहीं किया जा सका — सभी 16 पेलोड्स स्पेस में खो गए माने जा रहे हैं।</p>
<p>- ISRO ने तुरंत Failure Analysis Committee गठित करने की बात कही है, और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट साझा करने का वादा किया है।</p>
<p>यह सेटबैक भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए निराशाजनक है, खासकर जब PSLV को "वर्कहॉर्स" कहा जाता है। लेकिन ISRO की टीम पहले भी ऐसी चुनौतियों से उबर चुकी है। अब सभी की नजरें विश्लेषण रिपोर्ट और अगले मिशनों पर टिकी हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 10:46:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO का नया मिशन... इस दिन लॉन्च होगा PSLV-C62 मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नईः </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने 2026 के प्रक्षेपण कैलेंडर की शुरुआत 12 जनवरी को ‘पीएसएलवी-सी62’ मिशन के साथ करेगा। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘ईओएस-एन1’ और 14 अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इसरो की वाणिज्यिक शाखा ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) के इस मिशन में शामिल 14 अन्य सह-यात्री उपग्रह देशी और विदेशी ग्राहकों के हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को कहा, ‘‘प्रक्षेपण यान और उपग्रहों का एकीकरण पूरा हो चुका है तथा प्रक्षेपण-पूर्व जांच जारी है। पीएसएलवी-सी62 मिशन का प्रक्षेपण 12 जनवरी को सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567090/isro-s-new-mission----pslv-c62-mission-will-be-launched-on-this-day"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(43)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नईः </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने 2026 के प्रक्षेपण कैलेंडर की शुरुआत 12 जनवरी को ‘पीएसएलवी-सी62’ मिशन के साथ करेगा। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘ईओएस-एन1’ और 14 अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इसरो की वाणिज्यिक शाखा ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) के इस मिशन में शामिल 14 अन्य सह-यात्री उपग्रह देशी और विदेशी ग्राहकों के हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को कहा, ‘‘प्रक्षेपण यान और उपग्रहों का एकीकरण पूरा हो चुका है तथा प्रक्षेपण-पूर्व जांच जारी है। पीएसएलवी-सी62 मिशन का प्रक्षेपण 12 जनवरी को सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम प्रक्षेपण स्थल से प्रस्तावित है।’’ इस मिशन के लिए 25 घंटे की उलटी गिनती 11 जनवरी को शुरू होगी। यह पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने बताया कि पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण थाईलैंड और ब्रिटेन ने संयुक्त रूप से किया है। पूरा मिशन प्रक्षेपण के बाद दो घंटे से अधिक समय तक चलेगा। मुख्य पेलोड ‘पृथ्वी अवलोकन उपग्रह’ 13 अन्य सह-यात्री उपग्रहों के साथ ‘पिगीबैक मोड’ में उड़ान भरेगा। इन उपग्रहों को प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट बाद निर्धारित सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसरो ने बताया कि पीएसएलवी अब तक 63 उड़ानें पूरी कर चुका है, जिनमें महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-1’, ‘मंगल ऑर्बिटर मिशन’ (मॉम) और ‘आदित्य-एल1’ मिशन शामिल हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 15:07:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anvesha Satellite Launch Date: PSLV-C62 से उड़ेगा DRDO का हाइपर स्पेक्ट्रल सैटेलाइट 'अन्वेषा', अंतरिक्ष में होगा भारत का सबसे ताकतवर जासूसी कैमरा! </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नईः</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 12 जनवरी को पूर्वाह्न 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के शार रेंज से पीएसएलवी-सी62 मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा। इसरो ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में घोषणा की, " पीएसएलवी-सी62 मिशन का प्रक्षेपण 12 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 10:17 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के शार रेंज से निर्धारित है।"</p>
<p style="text-align:justify;">पीएसएलवी सी-62 भारत के भरोसेमंद 'पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल' की 64वीं उड़ान होगी। यह मिशन प्राथमिक पेलोड के रूप में ईओएस-एन1 को ले जाएगा, जो रणनीतिक उद्देश्यों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक 'अर्थ ऑब्जर्वेशन इमेजिंग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566685/anvesha-satellite-launch-date--drdo-s-hyperspectral-satellite--anvesha--eos-n1-will-fly-from-pslv-c62--will-be-india-s-most-powerful-spy-camera-in-space"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(94).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नईः</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 12 जनवरी को पूर्वाह्न 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के शार रेंज से पीएसएलवी-सी62 मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा। इसरो ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में घोषणा की, " पीएसएलवी-सी62 मिशन का प्रक्षेपण 12 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 10:17 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के शार रेंज से निर्धारित है।"</p>
<p style="text-align:justify;">पीएसएलवी सी-62 भारत के भरोसेमंद 'पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल' की 64वीं उड़ान होगी। यह मिशन प्राथमिक पेलोड के रूप में ईओएस-एन1 को ले जाएगा, जो रणनीतिक उद्देश्यों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक 'अर्थ ऑब्जर्वेशन इमेजिंग सेटेलाइट' है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/isro/status/2008568229703413925?s=20">https://twitter.com/isro/status/2008568229703413925?s=20</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">ईओएस-एन1 के अलावा, यह अभियान 25 किलोग्राम के फुटबॉल के आकार के एक केस्ट्रेल इनिशियल डिमॉन्स्ट्रेटर (केआईडी) को भी ले जाएग, जिसे स्पेन स्थित स्टार्टअप ऑर्बिटल डिमॉन्स्ट्रेटर द्वारा विकसित किया गया है। यह मिशन साथ ही लगभग 18 उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित करेगा, जिनका कुल वजन 200 किलोग्राम है। ये पेलोड भारत, मॉरीशस, लक्जमबर्ग, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने कहा कि पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के समर्थन से भेजे जाने वाला यह अभियान मुख्यत: अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन है, साथ ही इसमें भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों उपयोगकर्ताओं के कई पेलोड भी शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566685/anvesha-satellite-launch-date--drdo-s-hyperspectral-satellite--anvesha--eos-n1-will-fly-from-pslv-c62--will-be-india-s-most-powerful-spy-camera-in-space</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 13:36:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो की बड़ी सफलता: SSLV के तीसरे चरण का उन्नत स्थैतिक परीक्षण सफल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) की ‘सॉलिड मोटर स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी’ में लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के तीसरे चरण के उन्नत संस्करण का सफल स्थैतिक परीक्षण किया है। इसरो ने बताया कि यह परीक्षण मंगलवार को किया गया। इसरो ने एक बयान में कहा कि एसएसएलवी इसरो द्वारा विकसित तीन-चरणीय, पूर्णत: ठोस-ईंधन प्रक्षेपण यान है जिसे औद्योगिक उत्पादन के अनुकूल बनाया गया है और यह दो प्रक्षेपणों के बीच कम समय में तैयारी पूरी कर मांग के अनुसार प्रक्षेपण की जरूरतें पूरी कर सकता है। </p>
<p>इसमें कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/565662/major-success-for-isro--advanced-static-test-of-sslv-third-stage-successful"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(47)13.png" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) की ‘सॉलिड मोटर स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी’ में लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के तीसरे चरण के उन्नत संस्करण का सफल स्थैतिक परीक्षण किया है। इसरो ने बताया कि यह परीक्षण मंगलवार को किया गया। इसरो ने एक बयान में कहा कि एसएसएलवी इसरो द्वारा विकसित तीन-चरणीय, पूर्णत: ठोस-ईंधन प्रक्षेपण यान है जिसे औद्योगिक उत्पादन के अनुकूल बनाया गया है और यह दो प्रक्षेपणों के बीच कम समय में तैयारी पूरी कर मांग के अनुसार प्रक्षेपण की जरूरतें पूरी कर सकता है। </p>
<p>इसमें कहा गया, ‘‘ऊपरी चरण या तीसरे चरण की ठोस मोटर, प्रक्षेपण यान को चार किलोमीटर प्रति सेकंड तक का वेग प्रदान करती है और चरण के निष्क्रिय द्रव्यमान को सीमित करने के लिए इसमें ‘मोनोलिथिक कंपोजिट मोटर केस’ तथा ‘फ्री-स्टैंडिंग नोजल डाइवर्जेंट’ का उपयोग किया गया है।’’ </p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि स्थैतिक परीक्षण ने लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान के चरण-तीन (एसएस3) के उस उन्नत संस्करण को मान्य किया जिसमें कार्बन-एपॉक्सी मोटर केस लगाया गया है। इससे चरण का द्रव्यमान उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है और इसके परिणामस्वरूप एसएसएलवी की पेलोड क्षमता 90 किलोग्राम बढ़ी है। <br />इसरो ने स्पष्ट किया, ‘‘इस चरण में ‘इग्नाइटर’ और ‘नोजल’ प्रणाली के लिए भी उन्नत डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है जिससे प्रणाली अधिक दक्ष और मजबूत बनती है।’’ इसमें कहा गया कि उच्च-शक्ति कार्बन फिलामेंट लपेटकर तैयार किए गए मोटर केस को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की कंपोजिट्स इकाई में तैयार किया गया और सॉलिड मोटर को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में सॉलिड मोटर उत्पादन सुविधाओं में ढाला गया था। </p>
<p>बयान में कहा गया, ‘‘108 सेकंड की परीक्षण अवधि के दौरान सभी मापदंडों को अनुमान के करीब पाया गया। इस सफल स्थैतिक परीक्षण के साथ एसएस3 मोटर का उन्नत संस्करण प्रक्षेपण में शामिल किए जाने के लिए योग्य ठहराया गया है।’’ इसरो के अनुसार, इस वर्ष देश में अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए ठोस मोटर की निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कई सुविधाएं शुरू की गई हैं। बयान के अनुसार, क्षमता बढ़ाने के लिए जुलाई 2025 में श्रीहरिकोटा में सॉलिड मोटर उत्पादन सुविधाएं शुरू की गईं। </p>
<p>इसमें कहा गया कि ठोस मोटर के लिए आवश्यक प्रमुख घटक के उत्पादन को दोगुना करने के लिए सितंबर 2025 में अलुवा स्थित अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र में अमोनियम परक्लोरेट का उत्पादन शुरू किया गया है। इस वर्ष एसडीएससी में सॉलिड मोटर उत्पादन के लिए 10 टन का स्वदेशी ‘वर्टिकल मिक्सर’ भी शुरू किया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा ठोस प्रणोदक मिश्रण उपकरण है। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की ठोस मोटर उत्पादन एवं स्थैतिक परीक्षण (एसएमपीएसटी) सुविधाओं ने एक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप द्वारा विकसित प्रक्षेपण यान की पहली कक्षीय उड़ान के लिए ठोस मोटर का निर्माण भी किया है और उसका स्थैतिक परीक्षण भी किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:21:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO की बड़ी सफलता: ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च, दुनिया के सबसे बड़े कमर्शियल कम्युनिकेशन उपग्रह ने रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M6 रॉकेट ने अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। यह कमर्शियल मिशन आज सुबह करीब 8:55 बजे संपन्न हुआ, जिसकी उल्टी गिनती मंगलवार से ही चल रही थी।</p>
<h3><strong>ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 की अनोखी विशेषताएं </strong></h3>
<p>यह 6,100 किलोग्राम भारी उपग्रह LVM3 रॉकेट द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में भेजा गया अब तक का सबसे वजनी पेलोड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड CMS-03 सैटेलाइट (लगभग 4,400 किग्रा) का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/564764/isro-s-big-success--bluebird-block-2-satellite-successfully-launched--world-s-largest-commercial-communication-satellite-creates-history"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(61)5.png" alt=""></a><br /><p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M6 रॉकेट ने अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। यह कमर्शियल मिशन आज सुबह करीब 8:55 बजे संपन्न हुआ, जिसकी उल्टी गिनती मंगलवार से ही चल रही थी।</p>
<h3><strong>ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 की अनोखी विशेषताएं </strong></h3>
<p>यह 6,100 किलोग्राम भारी उपग्रह LVM3 रॉकेट द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में भेजा गया अब तक का सबसे वजनी पेलोड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड CMS-03 सैटेलाइट (लगभग 4,400 किग्रा) का था, जिसे 2 नवंबर 2025 को लॉन्च किया गया था। </p>
<p>यह उपग्रह सामान्य स्मार्टफोन्स को बिना किसी अतिरिक्त हार्डवेयर के सीधे हाई-स्पीड सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें 223 वर्ग मीटर का विशाल फेज्ड-एरे एंटीना लगा है, जो इसे LEO में तैनात सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट बनाता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/isro/status/2003630674050449707?s=20">https://twitter.com/isro/status/2003630674050449707?s=20</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>इस तकनीक से दुनिया के किसी भी कोने में 4G/5G वॉयस और वीडियो कॉल, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और हाई-स्पीड डेटा सेवाएं उपलब्ध होंगी – चाहे जंगल हो, समुद्र हो या दूरदराज के इलाके। यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और AST स्पेसमोबाइल के बीच हुए समझौते का हिस्सा है।</p>
<h3><em><strong>LVM3 रॉकेट की ताकत</strong></em></h3>
<p>43.5 मीटर ऊंचा यह तीन-स्टेज रॉकेट क्रायोजेनिक इंजन से लैस है, जिसे ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर ने विकसित किया। लिफ्टऑफ के लिए दो S200 सॉलिड बूस्टर लगाए गए हैं, जो विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर की देन हैं।</p>
<p>AST स्पेसमोबाइल ने सितंबर 2024 में अपने पहले पांच ब्लूबर्ड सैटेलाइट लॉन्च किए थे, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में निरंतर कवरेज दे रहे हैं। कंपनी ने वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 50 से ज्यादा मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ पार्टनरशिप की है।</p>
<p>इस सफल लॉन्च से ISRO की कमर्शियल लॉन्च क्षमता को नई ऊंचाई मिली है और वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी में भारत की भूमिका मजबूत हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 09:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'लगन हो तो मंगल भी दूर नहीं...,'  मन की बात में PM का युवाओं को सलाम, कहा- GEN-Z हैं विकसित भारत का इंजन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को युवाओं की लगन को विकसित भारत की बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि मन में लगन हो, सामूहिक शक्ति पर टीम की तरह काम करने पर विश्वास हो, गिरकर फिर से उठ खड़े होने का साहस हो, तो कठिन-से-कठिन काम में भी सफलता जरूर मिलती है। </p>
<p>पीएम मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें विभिन्न टीमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित ड्रोन प्रतियोगिता में मंगल जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ानें का प्रयास कर रही थीं। उन्होंने कहा कि एक समय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561716/%22if-you-are-dedicated--even-mars-is-not-far-away----%22-pm-salutes-youth-in-mann-ki-baat--says-gen-z-are-the-engine-of-a-developed-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-05/पीएम-मोदी1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को युवाओं की लगन को विकसित भारत की बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि मन में लगन हो, सामूहिक शक्ति पर टीम की तरह काम करने पर विश्वास हो, गिरकर फिर से उठ खड़े होने का साहस हो, तो कठिन-से-कठिन काम में भी सफलता जरूर मिलती है। </p>
<p>पीएम मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें विभिन्न टीमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित ड्रोन प्रतियोगिता में मंगल जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ानें का प्रयास कर रही थीं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिना सैटेलाइट और जीपीएस सिस्टम के नाविक समंदर की लहरों का सामना करते हुए तय स्थान पर पहुंच जाते थे। अब समंदर से आगे बढ़कर दुनिया के देश अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाई को नाप रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में जब नयी पीढ़ी के युवाओं की टीमें ड्रोन उड़ा रही थीं तो ड्रोन उड़ते थे, कुछ पल संतुलन में रहते थे, फिर अचानक जमीन पर गिर पड़ते थे। ड्रोन को अपने कैमरे और अपने ही अंदर के सॉफ्टवेयर के सहारे उड़ना था। उसे जमीन के पैटर्न पहचानने थे, ऊंचाई मापनी थी, बाधाएं समझनी थी, और खुद ही सुरक्षित उतरने का रास्ता ढूंढ़ना था। इस प्रतियोगिता में पुणे के युवाओं की एक टीम ने कुछ हद तक सफलता पायी। उनका ड्रोन भी कई बार गिरा, क्रैश हुआ, पर उन्होंने हार नहीं मानी। कई बार के प्रयास के बाद इस टीम का ड्रोन मंगल ग्रह की परिस्थिति में कुछ देर उड़ने में कामयाब रहा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान-2 के संपर्क से बाहर होने के बाद की क्षणिक निराशा से जिस प्रकार बाहर आकर देश के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखी, कुछ वैसी ही चमक इस वीडियो में उन्हें युवाओं की आंखों में दिखायी दी। श्री मोदी ने कहा, "हर बार जब मैं हमारे युवाओं की लगन और वैज्ञानिकों के समर्पण को देखता हूं, तो मन उत्साह से भर जाता है। युवाओं की यही लगन, विकसित भारत की बहुत बड़ी शक्ति है।" </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/561716/%22if-you-are-dedicated--even-mars-is-not-far-away----%22-pm-salutes-youth-in-mann-ki-baat--says-gen-z-are-the-engine-of-a-developed-india</link>
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                <pubDate>Sun, 30 Nov 2025 12:44:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका से बारह गुना सस्ता सेटेलाइट हमने बनाया... आपरेशन सिंदूर में भी इसरो का रहा बड़ा योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> भूगर्भ की जानकारी देने वाला जो सेटेलाईट अमेरिका के नासा ने 12 हजार करोड़ में बनाया, उसे हमने बारह गुना कम लागत में तैयार किया। हमारी तकनीक सस्ती और भरोसेमंद है इसलिए दुनिया हमारे पर भरोसा करती है। यह कहना है इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार का जो कि इसरो के टेलिमेट्री, ट्रैकिंग एवं कमांड नेटवर्क के निदेशक है।</p>
<p>डॉ. अनिल कुमार लखनऊ में महर्षि इंफार्मेशन टैक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के 6 वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यअतिथि छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अमृत विचार से बातचीत में बताया कि आपरेशन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561526/we-built-a-satellite-twelve-times-cheaper-than-america----isro-also-played-a-major-role-in-operation-sindoor"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/muskan-dixit-(99)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> भूगर्भ की जानकारी देने वाला जो सेटेलाईट अमेरिका के नासा ने 12 हजार करोड़ में बनाया, उसे हमने बारह गुना कम लागत में तैयार किया। हमारी तकनीक सस्ती और भरोसेमंद है इसलिए दुनिया हमारे पर भरोसा करती है। यह कहना है इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार का जो कि इसरो के टेलिमेट्री, ट्रैकिंग एवं कमांड नेटवर्क के निदेशक है।</p>
<p>डॉ. अनिल कुमार लखनऊ में महर्षि इंफार्मेशन टैक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के 6 वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यअतिथि छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अमृत विचार से बातचीत में बताया कि आपरेशन सिंदूर में इसरो का बड़ा योगदान रहा है। उनसे जब इस बारे में विस्तार से सवाल किया गया तो राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से जबाव देने से इंकार कर दिया। डॉ. अनिल कुमार ने छात्रों युवाओं से आह्वान किया कि वह खूब पढे़ और इसरो के माध्यम से राष्ट्र की सेवा में आना चाहे तो आपका स्वागत है।</p>
<h3><em><strong>हमें 40 प्रतिशत अधिक वेतन मिलता है</strong></em></h3>
<p>युवाओं का आह़वान करते हुए इसरो वैज्ञानिक ने कहा कि केंद्र सरकार अन्य इंजीनियरों की तुलना में हमे 40 प्रतिशत अधिक वेतन देती है। उन्होंने बार-बार युवाओं को विज्ञान और गणित पढ़ने को प्रेरित किया और कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में अनंत संभावनाएं हैं। आज दुनिया इंटरनेट पर आधारित हो चुकी है, थोड़ी देर के लिए इंटरनेट बंद कर दिया जाए तो सारा कामकाज ठप्प पड़ जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 10:27:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>संपादकीय : इसरो की छलांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इसरो की अगले तीन वर्षों में अंतरिक्ष यान निर्माण क्षमता को तीन गुना करने की तैयारी मात्र तकनीकी विस्तार नहीं, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत भी है। साफ है कि इसरो मात्र प्रक्षेपण सेवा प्रदाता या वैज्ञानिक मिशनों तक सीमित नहीं रहना चाहता, वह वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक खिलाड़ी बनना चाहता है। वर्तमान में इसरो की क्षमता अवसंरचना और अल्प प्रक्षेपण अवसरों के चलते सीमित है।</p>
<p>एक साथ कई वैज्ञानिक और वाणिज्यिक मिशनों को संभालने में इससे दिक्कत होती है। क्षमता को तीन गुना करना वैज्ञानिक अभियानों की गति बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/560204/editorial--isro-s-leap"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/sampadkiy11.jpg" alt=""></a><br /><p>इसरो की अगले तीन वर्षों में अंतरिक्ष यान निर्माण क्षमता को तीन गुना करने की तैयारी मात्र तकनीकी विस्तार नहीं, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत भी है। साफ है कि इसरो मात्र प्रक्षेपण सेवा प्रदाता या वैज्ञानिक मिशनों तक सीमित नहीं रहना चाहता, वह वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक खिलाड़ी बनना चाहता है। वर्तमान में इसरो की क्षमता अवसंरचना और अल्प प्रक्षेपण अवसरों के चलते सीमित है।</p>
<p>एक साथ कई वैज्ञानिक और वाणिज्यिक मिशनों को संभालने में इससे दिक्कत होती है। क्षमता को तीन गुना करना वैज्ञानिक अभियानों की गति बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार के वाणिज्यिक अवसरों को भी भुनाने में मददगार होगा। यह भविष्य में इसरो को मिशनों के ओवरलैप के दबाव से मुक्त करेगा और निजी उद्योगों तथा नई अंतरिक्ष कंपनियों को भी बड़े पैमाने पर जोड़ेगा। वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी अभी लगभग दो प्रतिशत है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर आठ प्रतिशत करने का लक्ष्य है। </p>
<p>क्षमता विस्तार, उद्योग साझेदारी, तेज प्रक्षेपण चक्र और सस्ते, लेकिन भरोसेमंद मिशनों से इसरो इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंच सकता है। भारत की कम लागत वाली तकनीक और बढ़ती विश्वसनीयता विदेशी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रही है। इसरो जिन कार्यक्रमों पर काम कर रहा है, वे अभूतपूर्व हैं-चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ का अध्ययन करने वाला जापान-भारत संयुक्त मिशन ‘लूपेक्स’, 2028 के लिए निर्धारित चंद्रयान-4, भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित पहला पूरी तरह स्वदेशी पीएसएलवी और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल की तैयारी। इनमें से हर एक परियोजना न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ाने के साथ इसरो की वैश्विक विश्वसनीयता को नई ऊंचाई देगी।</p>
<p>भारतीय निजी उद्योग निर्मित पीएसएलवी अंतरिक्ष क्षेत्र में ठीक उसी तरह भागीदार बनेगा-जैसे अमेरिका में स्पेसएक्स और अन्य निजी कंपनियां नासा के लिए सहायक हैं। इससे न केवल प्रक्षेपण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि एक विशाल घरेलू अंतरिक्ष पारिस्थितिकी भी बनेगी। चूंकि इसरो अब अधिकांश, परियोजनाओं को अलग-अलग समर्पित केंद्रों और उद्योग भागीदारी के साथ आगे बढ़ा रहा है इसलिए उसके चलते दूसरे अभियानों में विलंब की आशंका कम है। हालांकि मानवीय उड़ान मिशन बेहद जटिल होते हैं और सुरक्षा के मानक सर्वोपरि रहते हैं, इसलिए समय में नैसर्गिक बदलाव असामान्य नहीं होगा। </p>
<p>भारत का प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन, जिसके पांच मॉड्यूल 2035 तक कक्षा में स्थापित होने की योजना है, राष्ट्रीय अंतरिक्ष शक्ति के विकास का निर्णायक कदम होगा। पहला मॉड्यूल 2028 तक बन पाने की संभावना मजबूत है और यह भारत को “लो अर्थ ऑर्बिट रिसर्च पॉवर” के रूप में वैश्विक क्लब में शामिल करेगा। इन सभी उपलब्धियों और लक्ष्यों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इसरो का भविष्य उज्ज्वल है। यह केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का विस्तार नहीं, यह भारत की आत्मनिर्भरता, प्रौद्योगिकीय नेतृत्व और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़ाने की लंबी छलांग है। इससे देश को वैज्ञानिक प्रतिष्ठा, आर्थिक अवसर, वैश्विक साझेदारियां और युवाओं के लिए नई शोध-संभावनाएं प्राप्त होंगी। इसरो की नई छलांग उसे वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में बहुत आगे ले जाएगा। भारत अब अंतरिक्ष में पहुंचने की ही नहीं, बल्कि वहां अपनी ऊंची जगह बनाने की तैयारी कर चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Nov 2025 09:06:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
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