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                <title>petitioner - Amrit Vichar</title>
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                <description>petitioner RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार, कहा- जनहित याचिका अब निजी हित याचिका बन गई है..</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर टिप्पणी करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि जनहित याचिका (पीआईएल) अब 'निजी (प्राइवेट) हित याचिका', 'प्रचार (पब्लिसिटी) हित याचिका', 'पैसा हित याचिका' और 'राजनीतिक (पॉलिटिकल) हित याचिका' बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उस वक्त की जब वे केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580971/in-the-sabarimala-case--the-supreme-court-rebuked-the-petitioner--stating--%22public-interest-litigation-has-now-become-private-interest-litigation-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/सुप्रीम-कोर्ट-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर टिप्पणी करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि जनहित याचिका (पीआईएल) अब 'निजी (प्राइवेट) हित याचिका', 'प्रचार (पब्लिसिटी) हित याचिका', 'पैसा हित याचिका' और 'राजनीतिक (पॉलिटिकल) हित याचिका' बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उस वक्त की जब वे केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली 'इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन' की 2006 की जनहित याचिका के उद्देश्य पर सवाल उठाया। 'इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन' का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता रवि प्रकाश गुप्ता ने दलील दी कि जनहित याचिका जून 2006 में प्रकाशित चार समाचार पत्रों के लेखों पर आधारित थी।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस पर प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जनहित याचिका को सीधे खारिज कर देना चाहिए था। पीठ ने कहा, ''यह लेख जनहित याचिका दायर करने का आधार कैसे देता है? जनहित याचिकाएं दायर करवाने के लिए लेख लिखवाना आसान है।'' न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ''हम उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में आम जनता के लिए जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते रहे हैं, न कि अखबारों में छपे लेखों के लिए।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''जनहित याचिका अब निजी हित याचिका, प्रचार हित याचिका, पैसा हित याचिका और राजनीतिक हित याचिका बन गई है। इन सभी को जनहित याचिका कहा जाता है, लेकिन हम केवल वास्तविक और प्रामाणिक जनहित याचिकाओं पर ही सुनवाई करते हैं।'' उन्होंने यह भी बताया कि प्रधान न्यायाधीश को हर दिन सैकड़ों पत्र प्राप्त होते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सवाल किया कि तो क्या इन सभी पत्रों को जनहित याचिकाओं में बदला जा सकता है। मामले में सुनवाई जारी है। सितंबर 2018 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने चार अनुपात एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए शबरिमला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। पीठ ने फैसला सुनाया था कि सदियों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा अवैध और असंवैधानिक है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:29:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 'बाबरी' नाम से निर्माण या नामकरण पर रोक से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने मुगल शासक बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने का निर्देश देने के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ द्वारा याचिका पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त करने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने इसे वापस ले लिया। पीठ ने कहा, ''याचिका वापस लिए जाने के कारण इसे खारिज किया जाता है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572487/major-supreme-court-decision--refuses-to-ban-construction-or-naming-of-the-site-with-the-name--babri"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(23)13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने मुगल शासक बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने का निर्देश देने के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ द्वारा याचिका पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त करने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने इसे वापस ले लिया। पीठ ने कहा, ''याचिका वापस लिए जाने के कारण इसे खारिज किया जाता है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने की घोषणा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता देश में ''आक्रांताओं'' के नाम पर मस्जिदों के निर्माण के खिलाफ है। </p>
<p style="text-align:justify;">वकील ने कहा कि कबीर ने ''इस तथ्य के बावजूद मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की थी कि बाबर एक आक्रमणकारी था।'' उन्होंने कहा कि उनके (कबीर के) खिलाफ कुछ कार्रवाई की जानी चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">जब पीठ ने याचिका खारिज करने की घोषणा की तो वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। याचिका में केंद्र, राज्यों और अन्य सरकारों को याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने और समूचे भारत में बाबर या बाबरी मस्जिद या उनसे मिलते-जुलते/व्युत्पन्न नामों पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण, स्थापना या नामकरण पर रोक लगाने या प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे बाबरी मस्जिद, बाबर या भारत पर आक्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के लिए उचित दिशा-निर्देश तैयार करने या परिपत्र और प्रशासनिक आदेश जारी करने पर विचार करें। </p>
<p style="text-align:justify;">नवंबर 2019 में शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने अयोध्या स्थित विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था और केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित करने का निर्देश दिया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/572482/ai-impact-summit--youth-congress-creates-ruckus--removes-t-shirts-and-raises-slogans-at-bharat-mandapam">AI Impact Summit: यूथ कांग्रेस का हंगामा, भारत मंडपम में टी-शर्ट उतारकर की नारेबाजी </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/572487/major-supreme-court-decision--refuses-to-ban-construction-or-naming-of-the-site-with-the-name--babri</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:27:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Stray Dogs Case : प्रशांत भूषण के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, हम कुत्तों से सर्टिफिकेट लेकर चलने को क्यों नहीं कह सकते...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लावारिस कुत्तों के मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके इलाके में बहुत सारे लावारिस कुत्ते हैं, जो पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं, भौंकते हैं, जिससे उन्हें नींद नहीं आती और उनके बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। याचिकाकर्ता ने इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनका कहना कि वे केवल वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन कर सकते हैं। एनएचआरसी को भी भी पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। </p>
<p>याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स (एबीसी नियम) केवल एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568454/stray-dogs-case--supreme-court-makes-strong-remarks-on-prashant-bhushan-s-suggestion--%22why-can-t-we-ask-dogs-to-carry-certificates-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लावारिस कुत्तों के मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके इलाके में बहुत सारे लावारिस कुत्ते हैं, जो पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं, भौंकते हैं, जिससे उन्हें नींद नहीं आती और उनके बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। याचिकाकर्ता ने इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनका कहना कि वे केवल वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन कर सकते हैं। एनएचआरसी को भी भी पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। </p>
<p>याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स (एबीसी नियम) केवल एक खास दायरे में काम करते हैं। कुत्तों को स्टरलाइजेशन या वैक्सीनेशन के बाद फिर से छोड़ दिया जाता है। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि दुनियाभर में यह स्वीकार किया जाता है कि लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी नसबंदी व्यवस्था जरूरी है। जयपुर और गोवा जैसी जगहों में यह सिस्टम सफल रहा है, लेकिन ज्यादातर शहरों में स्टरलाइजेशन प्रभावी नहीं हो पा रहा। </p>
<p>स्टरलाइजेशन से कुत्तों की आक्रामकता कम होती है, लेकिन समस्या यह है कि कई शहरों में सही ढंग से यह नहीं हो रहा। इसे बेहतर बनाने के लिए पारदर्शिता लानी होगी और लोगों को जवाबदेह बनाना होगा।एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन लावारिस कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जिनका स्टरलाइजेशन नहीं हुआ है। इसे किसी वेबसाइट पर दर्ज किया जाए और कोई विशेष अथॉरिटी हो जो ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करे। </p>
<p>प्रशांत भूषण के इस सुझाव पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने को क्यों नहीं कह सकते। प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत संदेश दे सकती हैं। उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाए, जो शायद व्यंग्य था। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि यह व्यंग्य में नहीं कहा गया था, बल्कि बहुत गंभीरता से कहा गया था।</p>
<p>इसके अलावा, एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा इस मामले पर किए गए पॉडकास्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूर्व मंत्री की तरफ से पेश हुए वकील राजू रामचंद्रन से कहा कि थोड़ी देर पहले आप कोर्ट से टिप्पणियों को लेकर सावधान रहने की बात कर रहे थे। क्या आपको पता है कि आपके क्लाइंट किस तरह की बातें कर रही हैं? आपके क्लाइंट ने कोर्ट की अवमानना की है। हम उस पर ध्यान नहीं दे रहे, यह हमारी दरियादिली है। क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? </p>
<p>उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है? वह क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं। आपने टिप्पणी की कि कोर्ट को सावधान रहना चाहिए, लेकिन दूसरी ओर आपकी क्लाइंट जिसे चाहे और जिसके बारे में चाहे, हर तरह की टिप्पणियां कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मानव सुरक्षा, एबीसी नियमों के क्रियान्वयन और जानवरों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने पर विचार कर रहा है। सुनवाई आगे जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 16:48:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सावरकर की तस्वीर हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से SC का इनकार, याचिकाकर्ता से कहा- आप खुद को क्या समझते हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से पहले भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता (सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी बी बालमुरुगन) को इस तरह की तुच्छ याचिका दायर करने के प्रति चेतावनी दी और संकेत दिया कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567595/the-supreme-court-refused-to-hear-a-petition-demanding-the-removal-of-savarkar-s-picture--asking-the-petitioner--%22who-do-you-think-you-are-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से पहले भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता (सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी बी बालमुरुगन) को इस तरह की तुच्छ याचिका दायर करने के प्रति चेतावनी दी और संकेत दिया कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस तरह की तुच्छ याचिका... मानसिकता दर्शाती है।’’ </p>
<p>पीठ याचिकाकर्ता के इस निवेदन से नाराज थी कि वह वित्तीय बाधाओं के कारण व्यक्तिगत रूप से मामले की बहस करने नहीं आ सकता। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप आईआरएस (अधिकारी) थे। आप दिल्ली आकर खुद पेश हो सकते हैं और बहस कर सकते हैं। हम आप पर भारी जुर्माना लगाना चाहेंगे। आप खुद को क्या समझते हैं?’’ </p>
<p>बालमुरुगन ने अपनी जनहित याचिका में संसद के केंद्रीय कक्ष और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर के चित्रों को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। इसके अतिरिक्त, याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि सरकार हत्या या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे जघन्य अपराधों के लिए आरोपित व्यक्तियों को तब तक सम्मानित न करे जब तक कि वे बरी न हो जाएं।</p>
<p>सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि और सेवा रिकॉर्ड, जिसमें सेवानिवृत्ति से पहले उनकी अंतिम तैनाती और उन्हें पदोन्नति से वंचित किये जाने की परिस्थितियां शामिल हैं, के बारे में पूछताछ की। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो बालमुरुगन ने नहीं में जवाब दिया और कहा कि 2009 में ‘श्रीलंका में शांति’ के लिए भूख हड़ताल करने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी।</p>
<p> याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह मामला आगे बढ़ाना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘‘कृपया इन सब झंझटों में न पड़ें। अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लें। समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं।’’ परिणाम को भांपते हुए बालमुरुगन ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 16:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संसद सत्र : रविशंकर प्रसाद ने वेणुगोपाल के याचिकाकर्ता होने के बावजूद सदन में बोलने पर जताई आपत्ति, आसन से किया यह अपील </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के एसआईआर मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिकाकर्ता होने के बावजूद लोकसभा में इस मुद्दे पर टिप्पणी करने पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को आपत्ति जताई और आसन से विपक्षी सांसद के भाषण को रिकॉर्ड से हटाने का अनुरोध किया। लोकसभा में चुनाव सुधारों पर मंगलवार को शुरू हुई चर्चा आज भी जारी रही और सबसे पहले वेणुगोपाल ने अपने विचार रखे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रसाद ने भाषण दिया और इस बात पर आपत्ति जताई कि जब वेणुगोपाल ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह मतदाता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563067/parliament-session-ravi-shankar-prasad-expressed-objection-to-venugopal-speaking"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/045.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के एसआईआर मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिकाकर्ता होने के बावजूद लोकसभा में इस मुद्दे पर टिप्पणी करने पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को आपत्ति जताई और आसन से विपक्षी सांसद के भाषण को रिकॉर्ड से हटाने का अनुरोध किया। लोकसभा में चुनाव सुधारों पर मंगलवार को शुरू हुई चर्चा आज भी जारी रही और सबसे पहले वेणुगोपाल ने अपने विचार रखे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रसाद ने भाषण दिया और इस बात पर आपत्ति जताई कि जब वेणुगोपाल ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामले में उच्चतम न्यायालय में एक याचिकाकर्ता हैं तो वह सदन में इस प्रक्रिया के खिलाफ टिप्पणी कैसे कर सकते हैं। उन्होंने आसन से अनुरोध किया कि वेणुगोपाल के सदन में दिए गए भाषण को रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसाद ने कहा, ‘‘वेणुगोपाल उच्चतम न्यायालय में याचिकाकर्ता हैं, उन्होंने खुद यह बात स्वीकार की है। तो क्या उन्हें यह विषय यहां उठाने का अधिकार है? मेरे विचार से नहीं है। आसन को इस बारे में पड़ताल करनी चाहिए और यदि मेरी राय ठीक है तो उनका पूरा भाषण रिकार्ड से हटाया जाना चाहिए।’’</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसाद के भाषण के बाद पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा वह रिकॉर्ड देखेंगे और तदनुसार कार्रवई करेंगे। भाजपा सदस्य ने एसआईआर समेत विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस और विपक्षी दलों के न्यायालय में याचिका दायर करने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ये लोग हर चीज में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में जाते रहते हैं। हर चीज में न्यायपालिका को शामिल करना ठीक है क्या? यह अधिकारों के विभाजन के मद्देनजर ठीक नहीं है। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसाद ने यह भी कहा कि संसद में कानून बनते हैं और यहां कानून पर अदालत की तरह बहस नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे ‘‘संसद की शुचिता की अवमानना’’ करार देते हुए कहा कि संसद की गरिमा, मर्यादा और अधिकारों की अवहेलना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने एसआईआर पर कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों के शुद्धीकरण का अधिकार है और यदि ‘‘27 लाख लोगों की मौत हो जाए और डुप्लीकेट वोटर हों तो क्या उन्हें सूची में रखा जाना चाहिए। जो घुसपैठिये हैं और देश के नागरिक नहीं हैं, क्या उनके नाम रखे जाने चाहिए।’’ </p>
<p style="text-align:justify;">प्रसाद ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान कई बीएलओ की कथित मौत और उनकी आत्महत्या के दावों का परोक्ष जिक्र करते हुए कहा, ‘‘बिहार में एक भी बीएलओ (बूथ स्तर अधिकारी) की मौत नहीं हुई। एक भी बीएलओ की आत्महत्या का मामला नहीं आया। तो हो क्या रहा है। इस कहानी में कुछ ट्विस्ट लगता है। मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता।’’ भाजपा सांसद ने कहा कि जनता कांग्रेस को वोट देती है तो उन्हें निर्वाचन आयोग ठीक लगता है और यदि नहीं देती तो गड़बड़ी नजर आती है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बिहार चुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जनता आपको इसलिए वोट नहीं देती क्योंकि जनता ने नरेन्द्र मोदी सरकार और नीतीश सरकार का काम देखा है। जब तक इसे स्वीकार नहीं करेंगे, काम कैसे चलेगा।’’ प्रसाद ने आरोप लगाया कि ईवीएम के मुकाबले मतपत्रों से मतदान कराने की विपक्ष के सांसदों की दलील फिर से मतदान केंद्रों पर ‘बूथ कैप्चरिंग (बूथ लूटने)’ की ओर लौटने की कोशिश का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने दावा किया कि बिहार में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में एक भी मतदान केद्र पर पुन: मतदान नहीं हुआ और एक भी ‘बूथ कैप्चरिंग’ की शिकायत नहीं आई। भाजपा सांसद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के दो दर्जन से अधिक फैसले हैं जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को जायज ठहराते हैं और बिहार चुनाव में ईवीएम को लेकर एक भी शिकायत नहीं हुई। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण के आरोप लगाए, लेकिन उन्हें अपना इतिहास देखना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ‘‘क्या राष्ट्रपति, क्या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, क्या संपादक और क्या मुख्य निर्वाचन आयुक्त..... सारी संस्थाओं को कमजोर किया गया और आज भाजपा को समझाया जा रहा है।’’ </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘आज कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण की बहुत जरूरत है। जनता कांग्रेस पर विश्वास नहीं करती। उसने पचास साल राज किया और जनता ने विश्वास किया। तब जनता ने बर्दाश्त कर लिया और अब जनता उसे नहीं चाह रही तो सोचना होगा कि क्या कारण है।’’ प्रसाद ने यह भी कहा कि आज जनता ने नरेन्द्र मोदी और भाजपा के नेतृत्व में विकल्प खोजा है और उनके काम को पसंद किया है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 14:42:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रीनपोलिस आवास परियोजना विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं दी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के गुरुग्राम की 'ग्रीनपोलिस आवास परियोजना' विवाद में याचिकाकर्ताओं (फ्लैट खरीदने वाले) को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अनुमति देने के साथ ही मंगलवार को मामले का निपटारा कर दिया।</p>
<p>न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मुकेश कंवल (फ्लैट खरीदारों में शामिल) और अन्य की रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च न्यायालय में रिट याचिका या सिविल मुकदमा दायर करके कानून के तहत उचित उपाय का लाभ उठाने की स्वतंत्रता देने के साथ मामले का निपटारा किया।</p>
<p>'मुकेश कंवल बनाम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/525839/greenpolis-housing-project-dispute-supreme-court-gave-permission-to-knock"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-09/demo-image-v---2024-09-06t114640.480.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के गुरुग्राम की 'ग्रीनपोलिस आवास परियोजना' विवाद में याचिकाकर्ताओं (फ्लैट खरीदने वाले) को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अनुमति देने के साथ ही मंगलवार को मामले का निपटारा कर दिया।</p>
<p>न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मुकेश कंवल (फ्लैट खरीदारों में शामिल) और अन्य की रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च न्यायालय में रिट याचिका या सिविल मुकदमा दायर करके कानून के तहत उचित उपाय का लाभ उठाने की स्वतंत्रता देने के साथ मामले का निपटारा किया।</p>
<p>'मुकेश कंवल बनाम हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण, गुरुग्राम' का यह मामला शीर्ष अदालत के समक्ष 15 जनवरी 2024 को दाखिल किया गया।</p>
<p>मुकेश के साथ 13 याचिकाकर्ताओं में शामिल विजय जैन ने शीर्ष अदालत के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस आदेश से बेहद निराशा हुई है। हमे समझ में नहीं आ रहा कि एक साल से अधिक समय बीतने के बाद अब फिर से शून्य से शुरू करना है। जो भी हो, हम उच्चतम न्यायालय का सम्मान करते हुए तमाम कानूनी विकल्पों का सहारे लड़ाई जारी रखेंगे।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड ने हमें (सैंकड़ों खरीदारों) को 2012 में 2016 तक फ्लैट देने का वादा किया था। हम अपने-अपने फ्लैट का 90 फ़ीसदी रकम (90 लाख से एक करोड़ रूपए) का भुगतान कर चुके है, लेकिन विभिन्न अदालतों और संबंधित प्राधिकरणों का दरवाजा खटखटाकर अंत में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब हम करीब एक साल समय बीतने के बाद वहीं के वहीं खड़े हैं।”</p>
<p>जैन ने कहा कि कई जगहों पर निराशा हाथ लगने के बाद हमने हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण, गुरुग्राम दरवाजा खटखटाया था, जिसने वर्ष 2018 और 19 में आदेश पारित कर कहा था कि 2020 तक फ्लैट मिल जाएंगे, लेकिन उसे पर अमल नहीं किया गया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि फ्लैट खरीदने वाले करीब 1600 लोगों में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बहुत सारे लोग मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि लोगों ने सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जिंदगी की तलाश में 12 साल पहले फ्लैट बुक करवाया था और वादे के मुताबिक भुगतान किया, लेकिन अब दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (गुरुग्राम) के अलावा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (हरियाणा) हरियाणा सरकार, ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (फ्लैट बनाने वाली कंपनी) और ग्रीनपोलिस वेलफेयर एसोसिएशन को प्रतिवादी बनाया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने वालों में कंवल और जैन के अलावा प्रशांत कुन्दनानी, सुभाशीष नाथ, जुनैद अहमद सिद्दीकी, अंकुश जैन, शैलेश कुमार खुराना, मनीषा बैद, रवि बाला ढुंडिया, मोहुआ दास, मनोज बहल, नीतिका बहल और सैयदा मासूम शबनम शामिल हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.amritvichar.com/article/525831/government-appoints-eight-judges-in-madras-and-bombay-high-court%C2%A0">सरकार ने की मद्रास और बॉम्बे हाईकोर्ट में आठ न्यायाधीशों की नियुक्ति </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/525839/greenpolis-housing-project-dispute-supreme-court-gave-permission-to-knock</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 15:28:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संभल में बुलडोजर एक्शन को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, जानिए याचिकाकर्ता से क्या कहा...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने संभल में संरचनाओं की तोड़फोड़ पर उसके फैसले का कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ता से संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा। </p>
<p>न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद गयूर की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘इसे उच्च न्यायालय में दाखिल करें।’’ पीठ ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने की छूट देते हुए कहा, ‘‘हमें लगता है कि इस मुद्दे से संबंधित उच्च न्यायालय सबसे बेहतर तरीके से निपट सकता है।’’ </p>
<p>अधिवक्ता चांद कुरैशी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/520976/supreme-court-refuses-to-hear-the-petition-filed-regarding-bulldozer-action-in-sambhal--know-what-it-said-to-the-petitioner"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने संभल में संरचनाओं की तोड़फोड़ पर उसके फैसले का कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ता से संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा। </p>
<p>न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद गयूर की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘इसे उच्च न्यायालय में दाखिल करें।’’ पीठ ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने की छूट देते हुए कहा, ‘‘हमें लगता है कि इस मुद्दे से संबंधित उच्च न्यायालय सबसे बेहतर तरीके से निपट सकता है।’’ </p>
<p>अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शीर्ष अदालत के 13 नवंबर 2024 के उस फैसले का उल्लंघन किया है जिसमें अखिल भारतीय दिशा-निर्देश तय किए गए थे और बिना पूर्व कारण बताओ नोटिस के संपत्ति को ध्वस्त करने पर रोक लगाई गई थी तथा पीड़ित पक्ष को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। </p>
<p>याचिका में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश के संभल में अधिकारियों ने 10-11 जनवरी को याचिकाकर्ता या उसके परिवार के सदस्यों को बिना किसी पूर्व सूचना या अवसर दिए उसकी संपत्ति का एक हिस्सा गिरा दिया था।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>संभल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/520976/supreme-court-refuses-to-hear-the-petition-filed-regarding-bulldozer-action-in-sambhal--know-what-it-said-to-the-petitioner</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 13:37:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनीताल: रुद्रपुर के कंटोपा में सरकारी नाले पर अवैध निर्माण के लिए निचली अदालत में जाए याची</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने रुद्रपुर के ग्राम कंटोपा में सरकारी नाले को तोड़कर व्यक्ति विशेष द्वारा कब्जा कर अवैध निर्माण किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।</p>
<p>मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता से कहा है कि वे इस मामले में निचली अदालत के समक्ष सिविल वाद दायर करें। शुक्रवार को मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ में हुई। </p>
<p>मामले के अनुसार रुद्रपुर के ग्राम कंटोपा के निवासियों ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि किसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/502253/petitioner-to-go-to-lower-court-for-illegal-construction-on"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-05/नैनीताल-हाईकोर्ट2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने रुद्रपुर के ग्राम कंटोपा में सरकारी नाले को तोड़कर व्यक्ति विशेष द्वारा कब्जा कर अवैध निर्माण किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।</p>
<p>मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता से कहा है कि वे इस मामले में निचली अदालत के समक्ष सिविल वाद दायर करें। शुक्रवार को मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ में हुई। </p>
<p>मामले के अनुसार रुद्रपुर के ग्राम कंटोपा के निवासियों ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि किसी व्यक्ति ने सरकारी नाला तोड़कर अवैध कब्जा कर लिया और अब निर्माण कर रहा है। जब इसका विरोध ग्रामीणों ने किया तो उन्हें धमकाने लगा।</p>
<p>जब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई तो मामले की जांच हुई लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। उच्च न्यायलय ने जितेंद्र यादव की जनहित याचिका में स्पष्ट आदेश जारी कर कहा था कि राज्य सरकार सरकारी भूमि, नगर पालिका की भूमि, वन विभाग की भूमि ,राज्य व नेशनल हाइवे की भूमि से शीघ्र अतिक्रमण हटाएं लेकिन यह अतिक्रमण नहीं हटाया गया।</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://www.amritvichar.com/article/502251/haldwani-lisa-was-being-smuggled-by-cutting-the-cabin-of#gsc.tab=0">हल्द्वानी: ट्रक का केबिन काटकर की जा रही थी लीसा तस्करी, पकड़ा</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 12:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नैनीताल: दैवीय आपदा प्रकरण : हाईकोर्ट ने नैनीताल व हरिद्वार के जिलाधिकारियों के शपथ पत्र पर याची से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने दैवीय आपदा में पूर्व में दिए आदेश का अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने जिलाधिकारी नैनीताल व जिलाधिकारी हरिद्वार के पेश शपथपत्रों पर याचिकाकर्ता से प्रति उत्तर देने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।<br /></p><p>मामले के अनुसार चोरगलिया निवासी भुवन चन्द्र पोखरिया ने अवमानना  याचिका दायर कर कहा कि हाईकोर्ट ने 14 फरवरी 2023 को राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि बाढ़ से बचाव के लिए सिंचाई, वन,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/487469/nainital-divine-disaster-case-high-court-sought-reply-from-the"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/नैनीताल-हाईकोर्ट2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने दैवीय आपदा में पूर्व में दिए आदेश का अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने जिलाधिकारी नैनीताल व जिलाधिकारी हरिद्वार के पेश शपथपत्रों पर याचिकाकर्ता से प्रति उत्तर देने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।<br /></p><p>मामले के अनुसार चोरगलिया निवासी भुवन चन्द्र पोखरिया ने अवमानना  याचिका दायर कर कहा कि हाईकोर्ट ने 14 फरवरी 2023 को राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि बाढ़ से बचाव के लिए सिंचाई, वन, भूमि संरक्षण व अन्य विभागों को साथ लेकर संसाधनों से आरक्षित क्षेत्रों की नदियों से मलबा, बोल्डर्स व शिल्ट को हटाएं और नदियों का चैनलाइजेशन करें। </p><p>डीएम नैनीताल व हरिद्वार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। इसकी वजह से वर्ष 2023 के मानसून सत्र में नंधौर, गौला, रकसिया नाला और हरिद्वार में गंगा नदी ने हरिद्वार के भोगपुर, रायवाला, लक्सर व अन्य जगहों पर तबाही की थी। अवमानना याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि पूर्व के आदेश का शीघ्र अनुपालन करवाया जाए। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि जो शपथपत्र दोनों जिलाधिकारियों ने कोर्ट में पेश किए हैं उसका जवाब पेश करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Aug 2024 13:18:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाथरस भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई करने से किया इनकार, याचिकाकर्ता को दी यह सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस भगदड़ मामले की जांच कराने संबंधी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करने के लिए कहा। दो जुलाई को हुई इस भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं परेशान कर देने वाली हैं लेकिन उच्च न्यायालय ऐसे मामलों का निपटारा करने में समर्थ है। </p>
<p>पीठ ने कहा, ''बेशक, ये परेशान करने वाली घटनाएं हैं। आमतौर पर ऐसी घटनाओं को बड़ा मुद्दा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/479683/hathras-stampede--supreme-court-refuses-to-hear-petition-seeking-investigation--gives-this-advice-to-petitioner"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-01/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस भगदड़ मामले की जांच कराने संबंधी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करने के लिए कहा। दो जुलाई को हुई इस भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं परेशान कर देने वाली हैं लेकिन उच्च न्यायालय ऐसे मामलों का निपटारा करने में समर्थ है। </p>
<p>पीठ ने कहा, ''बेशक, ये परेशान करने वाली घटनाएं हैं। आमतौर पर ऐसी घटनाओं को बड़ा मुद्दा बनाने के लिए याचिकाएं दायर की जाती हैं। उच्च न्यायालय ऐसे मामलों का निपटारा कर सकता है। याचिका खारिज की जाती है।'' न्यायालय ने वकील एवं याचिकाकर्ता विशाल तिवारी को हाथरस भगदड़ की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा।</p>
<p>तिवारी ने कहा कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए उचित चिकित्सा सुविधाओं की अनुपलब्धता का मुद्दा पूरे भारत में चिंता का विषय है। ऐसे में उच्चतम न्यायालय भी इस मामले की सुनवाई कर सकता है। प्रधान न्यायाधाीश ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने हाथरस जिले के फुलरई गांव में दो जुलाई को आयोजित सत्संग में हुई भगदड़ की घटना की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति नियुक्त किए जाने की अपील की थी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में दो जुलाई को हुए एक धार्मिक समागम में भगदड़ मच गई थी, जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए थे। हाथरस जिले के फुलरई गांव में बाबा नारायण हरि, जिन्हें साकार विश्वहरि और भोले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा आयोजित ‘सत्संग’ के लिए 2.5 लाख से अधिक भक्त एकत्र हुए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें उन पर सबूत छिपाने और शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। इस कार्यक्रम में 2.5 लाख लोग इकट्ठा हुए थे, जबकि केवल 80,000 लोगों के लिए ही अनुमति दी गई थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/479640/arvind-kejriwal-got-interim-bail-from-supreme-court--but-he-will-not-be-released-due-to-this-reason#gsc.tab=0">अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत, लेकिन इस वजह नहीं हो सकेंगे रिहा</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/479683/hathras-stampede--supreme-court-refuses-to-hear-petition-seeking-investigation--gives-this-advice-to-petitioner</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 13:05:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनीताल: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्लान पर याचिकाकर्ता से दो सप्ताह में मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल,अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने नैनीताल के एकमात्र जिला अस्पताल पुरुष बीडी पांडे अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि राज्य सरकार ने जिला अस्पताल में सुविद्याओ को लेकर जो प्लान भेजा है, उस पर दो सप्ताह में अपना जवाब दें।</p>
<p>पूर्व में कोर्ट ने माना था कि अब भी नैनीताल शहर में चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव है। इसको सुधारने के लिए हाई कोर्ट ने नगर के जागरूक  नागरिकों , एनजीओ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/476212/nainital-high-court-seeks-reply-from-petitioner-on-state-governments"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/नैनीताल-हाईकोर्ट2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल,अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने नैनीताल के एकमात्र जिला अस्पताल पुरुष बीडी पांडे अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि राज्य सरकार ने जिला अस्पताल में सुविद्याओ को लेकर जो प्लान भेजा है, उस पर दो सप्ताह में अपना जवाब दें।</p>
<p>पूर्व में कोर्ट ने माना था कि अब भी नैनीताल शहर में चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव है। इसको सुधारने के लिए हाई कोर्ट ने नगर के जागरूक  नागरिकों , एनजीओ व अधिवक्ताओं से अपनी राय जुलाई माह तक पेश करने को कहा था, ताकि यहां पर एम्स जैसी  बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके लेकिन अभी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सुझाव नहीं आया है।</p>
<p>मामले के अनुसार अशोक शाह ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि उन्हें छोटी- छोटी शिकायतों के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी रही है। जिले का मुख्य अस्पताल होने के कारण अभी भी छोटी सी जांच के लिए हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है।</p>
<p>इस अस्पताल में जिले से इलाज कराने के लिए दूरदराज से  मरीज आते हैं परंतु उनकी जांच करके हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायलय की खंडपीठ से प्रार्थना करते हुए कहा कि इस अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि नगर के दूरदराज से आने वाले लोगों को सही समय पर इलाज मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 17:38:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनीताल: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्लान पर याचिकाकर्ता से दो सप्ताह में मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने नैनीताल के एकमात्र जिला अस्पताल पुरुष बीडी पांडे अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि राज्य सरकार ने जिला अस्पताल में सुविद्याओ को लेकर जो प्लान भेजा है, उस पर दो सप्ताह में अपना जवाब दें।</p>
<p>पूर्व में कोर्ट ने माना था कि अब भी नैनीताल शहर में चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव है। इसको सुधारने के लिए हाई कोर्ट ने नगर के जागरूक  नागरिकों ,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/476172/nainital-high-court-seeks-reply-from-petitioner-on-state-governments"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/नैनीताल-हाईकोर्ट2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने नैनीताल के एकमात्र जिला अस्पताल पुरुष बीडी पांडे अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि राज्य सरकार ने जिला अस्पताल में सुविद्याओ को लेकर जो प्लान भेजा है, उस पर दो सप्ताह में अपना जवाब दें।</p>
<p>पूर्व में कोर्ट ने माना था कि अब भी नैनीताल शहर में चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव है। इसको सुधारने के लिए हाई कोर्ट ने नगर के जागरूक  नागरिकों , एनजीओ व अधिवक्ताओं से अपनी राय जुलाई माह तक पेश करने को कहा था, ताकि यहां पर एम्स जैसी  बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके लेकिन अभी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सुझाव नहीं आया है।</p>
<p>मामले के अनुसार अशोक शाह ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि उन्हें छोटी- छोटी शिकायतों के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी रही है। जिले का मुख्य अस्पताल होने के कारण अभी भी छोटी सी जांच के लिए हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है।</p>
<p>इस अस्पताल में जिले से इलाज कराने के लिए दूरदराज से  मरीज आते हैं परंतु उनकी जांच करके हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायलय की खंडपीठ से प्रार्थना करते हुए कहा कि इस अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि नगर के दूरदराज से आने वाले लोगों को सही समय पर इलाज मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 16:10:20 +0530</pubDate>
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