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                <title>criminal cases - Amrit Vichar</title>
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                <description>criminal cases RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूपी MLA अब्बास अंसारी को SC से सशर्त जमानत, गैंगस्टर एक्ट में मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के गिरोहबंद अधिनियम के तहत एक मामले में विधायक अब्बास अंसारी को अंतरिम जमानत देने के अपने पूर्व आदेश की पुष्टि की। अंसारी दिवंगत गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत अंसारी और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल सात मार्च को शीर्ष अदालत ने अंसारी को इस मामले में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। प्रधान न्यायाधीश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567573/up-mla-abbas-ansari-gets-conditional-bail-from-sc--relief-in-gangster-act-case"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(55)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के गिरोहबंद अधिनियम के तहत एक मामले में विधायक अब्बास अंसारी को अंतरिम जमानत देने के अपने पूर्व आदेश की पुष्टि की। अंसारी दिवंगत गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत अंसारी और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल सात मार्च को शीर्ष अदालत ने अंसारी को इस मामले में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जे. बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मंगलवार को अंसारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा की दलीलों पर गौर किया तथा मामले में पहले दी गई अंतरिम जमानत को नियमित कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">मार्च 2025 में शीर्ष अदालत से मिली राहत ने अंसारी की कासगंज जेल से रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है। उनके खिलाफ अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। पीठ ने कुछ शर्तें लगाई थीं और बाद में उनमें से कुछ में ढील दी थी, जिनमें यह शर्त भी शामिल थी कि वह जांच अधिकारी की अनुमति के बिना लखनऊ नहीं छोड़ सकते। </p>
<p style="text-align:justify;">अंसारी को चार नवंबर, 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था और छह सितंबर, 2024 को गिरोहबंद अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। पीठ ने पिछले साल मार्च में उन्हें राहत देते हुए कहा कि गिरोहबंद अधिनियम के मामले को छोड़कर अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2024 को इस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान अन्य आरोपी हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/567563/magh-mela-reached-by-bicycle-from-nepal--ram-bahubali-is-spreading-the-message-of-environmental-protection--having-already-traveled-one-lakh-kilometers"><span class="t-red">नेपाल से साइकिल तक पहुंचे माघ मेला: </span>पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे राम बाहुबली, अबतक एक लाख किमी की कर चुके यात्रा </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 14:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : आपराधिक मामलों में अस्थिकरण या अन्य चिकित्सीय परीक्षणों द्वारा आयु निर्धारण उचित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में लाभकारी कानूनी परिणाम प्राप्त करने के उद्देश्य से अभियुक्तों द्वारा जन्म तिथि में हेरा-फेरी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किशोर होने का दावा करने वाले व्यक्ति की आयु का निर्धारण मुख्यतः दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए और अगर ऐसा करना संभव न हो तो अस्थिकरण या अन्य चिकित्सीय आयु निर्धारण परीक्षण किया जाना चाहिए।</p>
<p>कोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 94 के तहत उचित आयु सत्यापन करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ढिलाई की भी आलोचना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534827/age-determination-by-prayagraj-criminal-cases-or-due-to-other"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/कोर्ट10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में लाभकारी कानूनी परिणाम प्राप्त करने के उद्देश्य से अभियुक्तों द्वारा जन्म तिथि में हेरा-फेरी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किशोर होने का दावा करने वाले व्यक्ति की आयु का निर्धारण मुख्यतः दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए और अगर ऐसा करना संभव न हो तो अस्थिकरण या अन्य चिकित्सीय आयु निर्धारण परीक्षण किया जाना चाहिए।</p>
<p>कोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 94 के तहत उचित आयु सत्यापन करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ढिलाई की भी आलोचना की। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में कमी से न केवल न्याय में देरी होती है, बल्कि किशोर न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। कोर्ट ने उपरोक्त संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जैसे-आयु निर्धारण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के कठोर सत्यापन हेतु किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 94 के तहत तंत्र विकसित करने के साथ -साथ अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का भी निर्देश दिया है।</p>
<p>इसके अलावा अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए बलिया जिले में कम से कम एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति या प्रतिनियुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्काल कदम उठाए जाने की भी बात कही। उक्त आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने अमरजीत पांडेय की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया। याची के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और पोक्सो अधिनियम की धारा 3/4(2) के तहत मामला दर्ज कराया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि याची शिकायतकर्ता की 16 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था, जबकि आरोपी का दावा है कि कथित पीड़िता 18 वर्ष की बालिग लड़की है, जो अपने माता-पिता द्वारा डांटे जाने के बाद अपनी मर्जी से उसके साथ घर से चली गई थी।</p>
<p>कोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बलिया द्वारा कोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन न किए जाने पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अनुपालन हलफनामे में दिए गए कथन दर्शाते हैं कि अधिकारीगण हाईकोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इससे अधिकारियों का लालफीताशाही रवैया स्पष्ट झलकता है। हालांकि चिकित्सा अधिकारी द्वारा कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने संबंधित थाना प्रभारी को कई पत्र लिखे, लेकिन पीड़िता को परीक्षण हेतु प्रस्तुत नहीं किया गया। अंततः 5 मार्च 2025 को उसकी एक्स-रे रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेजी गई, लेकिन पीड़िता के हिमाचल प्रदेश चले जाने के कारण सीएमओ ने हड्डी परीक्षण रिपोर्ट देने से मना कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने पीड़िता को एक और तारीख पर सीएमओ के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा, लेकिन पीड़िता का हड्डी परीक्षण नहीं हो सका। कोर्ट ने इस लापरवाही पूर्ण रवैये को निंदनीय माना और पीड़िता की उम्र दर्शाने वाले किसी भी दस्तावेजी साक्ष्य की अनुपलब्धता में जमानत याचिका स्वीकार कर ली।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:- <a href="https://www.amritvichar.com/article/534825/bank-of-baroda-reprimanded-for-illegal-and-arbitrary-action-in#gsc.tab=0">प्रयागराज : नीलामी से जुड़े एक मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा की "अवैध और मनमाना कार्यवाही के लिए लगाई फटकार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Apr 2025 21:25:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ: 14 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा लुटेरा, दर्ज है दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ। 14 सालों से लूट की वारदात देकर फरार बदमाश को मानकनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाई है। 14 सालों से लुटेरा पुलिस की आंख में धूल झोंक कर फरारी काट रहा था। पुलिस ने लुटेरो को पकड़ने के लिए ढ़ाई हजार रूपये का इनाम रखा था। इंस्पेक्टर गंगाधर चौहान ने बताया कि …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/216197/lucknow-robber-caught-by-police-after-14-years-more-than-two-dozen-criminal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-05/arest.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ।</strong> 14 सालों से लूट की वारदात देकर फरार बदमाश को मानकनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाई है। 14 सालों से लुटेरा पुलिस की आंख में धूल झोंक कर फरारी काट रहा था। पुलिस ने लुटेरो को पकड़ने के लिए ढ़ाई हजार रूपये का इनाम रखा था। इंस्पेक्टर गंगाधर चौहान ने बताया कि पुलिस ने लखीमपुर जनपद के मितौली गांव निवासी हासिम अली उर्फ समीर उर्फ राजू को आरडीएसओ पुल से दबोचा है।</p>
<p>एक लम्बे समय से पुलिस को उसकी तलाश थी। जब भी पुलिस लुटेरे की ठिकाने पर दबिश देती। मुखबिरी के कारण लुटेरा वहां से फरार हो जाता। उस पर करीब 22 अपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होने बताया कि साल 2008 में समीर ने मानकनगर में एक परिवार को नशा देकर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इस वारदात में उसके साथी अनुज गुप्ता, मोनू पण्डित और शैलेंद्र मिश्रा शामिल थे।</p>
<p>पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। जबकि समीर फरार हो गया था। लुटेरे को गिरफ्तार करने के लिए तत्कालीन डीआईजी ने ढाई हजार रुपये इनाम रख दिया था। समीर ने लखनऊ के अलावा बहराइच, लखीमपुर और सीतापुर में भी चोरी, लूट, डकैती को अंजाम दिया है। वह झोपड़ी में पहचान बदलकर रह रहा था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://amritvichar.com/moradabad-after-the-altercation-the-scuffle-increased-then-the-police-took-over-the-front-force-deployed/">मुरादाबाद: कहासुनी के बाद हाथापाई, बढ़ा तनाव तो पुलिस ने संभाला मोर्चा…फोर्स तैनात</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/216197/lucknow-robber-caught-by-police-after-14-years-more-than-two-dozen-criminal</link>
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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 21:31:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>1,439 केंद्रीय पुलिसकर्मी आपराधिक मामलों का सामना कर रहे, 181 के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सात केंद्रीय पुलिस संगठनों के 1,439 कर्मियों पर आपराधिक आरोप हैं वहीं 181 कर्मी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/171303/1439-central-policemen-facing-criminal-cases-corruption-charges-against-181"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/पुलिस-00001.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सात केंद्रीय पुलिस संगठनों के 1,439 कर्मियों पर आपराधिक आरोप हैं वहीं 181 कर्मी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गारद के 181 कर्मी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं जबकि 1,439 कर्मी आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। राय ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल के 481 कर्मी विभिन्न आरोपों का सामना कर रहे हैं जबकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 401, सशस्त्र सीमा बल के 325 और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के 273 कर्मियों के खिलाफ आरोप हैं। उन्होंने बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के 73, असम राइफल्स के 60 तथा राष्ट्रीय सुरक्षा गारद के सात कर्मियों के खिलाफ आरोप हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/someone-told-the-finance-minister-in-the-rajya-sabha-the-daughter-in-law-of-his-state-someone-said-our-daughter/">राज्यसभा में वित्त मंत्री को किसी ने बताया अपने राज्य की पुत्रवधू, किसी ने कहा..हमारी बेटी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/171303/1439-central-policemen-facing-criminal-cases-corruption-charges-against-181</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Feb 2022 19:15:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SC का फैसला, सांसद-विधायकों पर दर्ज मामले HC की अनुमति के बिना नहीं होंगे वापस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आदेश दिया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत आरोपी कानून निर्माताओं के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को लोक अभियोजक, उच्च न्यायालयों की अनुमति के बिना वापस नहीं ले सकते। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने यह भी कहा कि …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/102381/scs-decision-cases-registered-against-mp-mlas-will-not-be-returned-without-hcs-permission"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-08/supreme_court_13.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आदेश दिया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत आरोपी कानून निर्माताओं के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को लोक अभियोजक, उच्च न्यायालयों की अनुमति के बिना वापस नहीं ले सकते।</p>
<p>प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने यह भी कहा कि वह नेताओं के विरुद्ध दर्ज मामलों की निगरानी करने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक विशेष पीठ की स्थापना पर भी विचार कर रही है।</p>
<p>पीठ ने आदेश दिया कि सांसदों और विधायकों के विरुद्ध मामले की सुनवाई कर रहे विशेष अदालतों के न्यायाधीशों का अगले आदेश तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को निर्देश दिया कि वे कानून निर्माताओं के विरुद्ध उन मामलों की जानकारी, एक तय प्रारूप में सौंपें, जिनका निपटारा हो चुका है।</p>
<p>पीठ ने उन मामलों का भी विवरण मांगा है जो निचली अदालतों में लंबित हैं। न्यायालय की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और वकील स्नेहा कालिता की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पीठ ने आदेश दिया।</p>
<p>पीठ, भारतीय जनता पार्टी के नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा 2016 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें सांसदों और विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई तथा दोषी ठहराए गए नेताओं को आजीवन चुनाव लड़ने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Aug 2021 15:52:21 +0530</pubDate>
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                <title>असम विस चुनाव: प्रथम चरण के 16 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में किस्मत आजमां रहे उम्मीदवारों में से 16 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। असम चुनाव निगरानी समूह और एडीआर ने प्रथम चरण में चुनावी मैदान में उतरे 264 में से 259 उम्मीदवारों …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> असम विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में किस्मत आजमां रहे उम्मीदवारों में से 16 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। असम चुनाव निगरानी समूह और एडीआर ने प्रथम चरण में चुनावी मैदान में उतरे 264 में से 259 उम्मीदवारों के हलफनामों का आकलन किया।</p>
<p>एडीआर ने बताया कि 259 में से 41 यानी 16 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है और 34 यानी 13 प्रतिशत ने उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 259 उम्मीदवारों में से 101 करोड़पति हैं। शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि 97 यानी 37 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पांचवीं से 12वीं कक्षा के बीच बतायी है।</p>
<p>जबकि 157 यानी 61 प्रतिशत उम्मीदवारों ने शैक्षणिक योग्यता स्नातक या उससे अधिक बतायी है। वहीं चार उम्मीदवारों के पास डिप्लोमा और एक केवल साक्षर है। रिपोर्ट के अनुसार, 67 यानी 26 प्रतिशत उम्मीदवारों की उम्र 25 से 40 वर्ष और 153 यानी 59 प्रतिशत उम्मीदवार 41 से 60 वर्ष की आयु के हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ”38 यानी 15 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी उम्र 61 से 70 वर्ष बतायी है। वहीं एक उम्मीदवार 85 वर्ष के हैं।” रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम चरण में 25 यानी 10 प्रतिशत महिला उम्मीदवार हैं। इस रिपोर्ट के लिए प्रथम चरण के कांग्रेस के 43 में से 10 उम्मीदवारों, असम जातीय परिषद के 41 में से आठ उम्मीदवार, भाजपा के 39 में से तीन, राकांपा, एजीपी और एसयूसीआई (सी) के एक-एक उम्मीदवारों के हलफनामों का आकलन किया गया, जिन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की घोषणा की है।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस के नौ, असम जातीय परिषद के छह, भाजपा के तीन, राकांपा, एजीपी और एसयूसीआई (सी) के एक-एक उम्मीदवार ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले होने की घोषणा की है। गंभीर आपराधिक मामले गैर-जमानती अपराध हैं, जिसमें पांच साल तक की कैद हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, पांच उम्मीदवारों ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मामले उनके खिलाफ दर्ज होने का खुलासा किया है। एक उम्मीदवार ने अपने खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज होने की जानकारी दी है।” असम में 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीन चरणों में 27 मार्च, एक अप्रैल और छह अप्रैल को चुनाव होगा।</p>
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                <link>https://www.amritvichar.com/article/73197/assam-election-criminal-cases-filed-against-16-percent-of-first-phase-candidates</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Mar 2021 17:21:19 +0530</pubDate>
                
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