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                <title>CJI - Amrit Vichar</title>
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                <description>CJI RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Jantar Mantar Protest: छात्रों पर पुलिस कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार, CJI बोले- 'अदालत का समय बर्बाद न करें'</title>
                                    <description><![CDATA[जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग की गई, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि NEET सुधार से जुड़ा मामला पहले से विचाराधीन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/588492/supreme-court-jantar-mantar-protest-neet-police-action-cji-response"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(19)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली: </strong>दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। बुधवार को प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया, लेकिन अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी पीठ में शामिल थे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनके पास पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो भी हैं और मामले को जल्द सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध किया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो देखने से किया इनकार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान वकील ने दावा किया कि संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरता की और याचिका में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि अदालत इस स्तर पर वीडियो देखने की इच्छुक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, "हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है। हम वीडियो नहीं देखना चाहते।" जब वकील ने दोबारा छात्रों की पिटाई और वीडियो का उल्लेख किया, तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "हमारा समय बर्बाद मत कीजिए।"</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>संसद मार्च के बाद दाखिल हुई याचिका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी है। उस दिन कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मध्य दिल्ली में एकत्र हुए थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रदर्शन के दौरान हुई थी झड़प</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प की स्थिति बन गई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/588453/dharmendra-pradhan-neet-controversy-rahul-gandhi-students-protest-parliament-discussion"><span class="t-red">NEET विवाद पर गरमाई सियासत: </span>धर्मेंद्र प्रधान बोले- राहुल गांधी छात्रों का फायदा उठा रहे, सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
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                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 12:11:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'परजीवी' टिप्पणी पर CJI सूर्यकांत ने दी सफाई: बोले- बयान को गलत मरोड़ा, देश के युवाओं पर मुझे गर्व है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को अपने 'परजीवी' संबंधी बयान पर कड़े शब्दों में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मीडिया में आई खबरों से उन्हें 'दुख' हुआ है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की है। </p><p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश ने एक बयान में कहा, ''मुझे यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक हल्के मामले की सुनवाई के दौरान मेरे द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से उद्धृत किया है।'' </p><p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति सूयकांत ने रेखांकित किया कि उनकी टिप्पणियां विशेष रूप से उन व्यक्तियों को लक्षित थीं जो ''नकली और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582194/cji-surya-kant-clarified-his--parasite--remark--%22the-media-has-misconstrued-the-statement--i-am-proud-of-the-youth-of-the-country-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(4)11.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को अपने 'परजीवी' संबंधी बयान पर कड़े शब्दों में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मीडिया में आई खबरों से उन्हें 'दुख' हुआ है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की है। </p><p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश ने एक बयान में कहा, ''मुझे यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक हल्के मामले की सुनवाई के दौरान मेरे द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से उद्धृत किया है।'' </p><p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति सूयकांत ने रेखांकित किया कि उनकी टिप्पणियां विशेष रूप से उन व्यक्तियों को लक्षित थीं जो ''नकली और फर्जी डिग्रियों'' के माध्यम से कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे थे और ''मीडिया के एक वर्ग द्वारा उन्हें गलत तरीके से उद्धृत किया गया।'' यह स्पष्टीकरण शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई को लेकर हुए विवाद के बाद आया है। </p><p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठ पद की मांग करने वाली याचिका पर एक वकील को फटकार लगाते हुए ''परजीवी'' और 'कॉकरोच' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणी को लेकर उत्पन्न विवाद पर सफाई देते हुए कहा, ''मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी जिन्होंने फर्जी और जाली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशा) जैसे व्यवसायों में प्रवेश किया है। ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित व्यवसायों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, और इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं।'' </p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''यह कहना बिल्कुल निराधार है कि मैंने अपने देश के युवाओं की आलोचना की। मुझे न केवल हमारे वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधन पर गर्व है, बल्कि भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारतीय युवा मेरे प्रति बहुत आदर और सम्मान रखते हैं, और मैं भी उन्हें एक विकसित भारत के स्तंभ के रूप में देखता हूं।''<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ED को नोटिस जारी नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- अधिकारी खुद को 'सुपर सीजेआई' समझते हैं </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही रजिस्ट्री कार्यालय पर निशाना साधते हुए उसके रवैये को ''अनुचित'' करार दिया और कहा कि उसके अधिकारी खुद को ''सुपर सीजेआई'' (प्रधान न्यायाधीश) समझते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में आरोपी आयुषी मित्तल उर्फ ​​आयुषी अग्रवाल द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश ने याचिका पर 23 मार्च को पारित एक आदेश का हवाला दिया और आश्चर्य जताया कि रजिस्ट्री अधिकारियों ने यह कैसे समझा कि पीठ ने याचिका पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580861/supreme-court-angry-over-not-issuing-notice-to-ed-says"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही रजिस्ट्री कार्यालय पर निशाना साधते हुए उसके रवैये को ''अनुचित'' करार दिया और कहा कि उसके अधिकारी खुद को ''सुपर सीजेआई'' (प्रधान न्यायाधीश) समझते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में आरोपी आयुषी मित्तल उर्फ ​​आयुषी अग्रवाल द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश ने याचिका पर 23 मार्च को पारित एक आदेश का हवाला दिया और आश्चर्य जताया कि रजिस्ट्री अधिकारियों ने यह कैसे समझा कि पीठ ने याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी नहीं किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''रजिस्ट्री ने बिल्कुल अनुचित व्यवहार किया है। रजिस्ट्री का यह रवैया बेहद बिल्कुल ठीक नहीं है... यहां बैठा हर व्यक्ति खुद को 'सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया' समझता है।''</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने अपने नए आदेश में कहा, ''ईडी निदेशक को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है और कहा गया कि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया था। (शीर्ष अदालत के) न्यायिक रजिस्ट्रार इस बात का तथ्यान्वेषण करें कि 23 मार्च के हमारे आदेश का अर्थ ईडी को नोटिस जारी न करना कैसे है। प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस भेजा जाए।''</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता आयुषी मित्तल, उनके पति और उनकी कंपनी पर बड़े पैमाने पर निवेश संबंधी धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि निवेशकों को धनराशि का एक बड़ा हिस्सा लौटा दिया गया है, लेकिन फिलहाल ईडी द्वारा 'फ्रीज' किए गए बैंक खातों में कई सौ करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। पीठ ने 23 मार्च के अपने आदेश में मामले में पक्षकार राजस्थान सरकार के वकील द्वारा ईडी को कार्यवाही में पक्षकार बनाने के मौखिक अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना था कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार से संबंधित सभी चल और अचल संपत्ति को विधिवत कुर्क किया गया है या नहीं। पीठ ने दोहराया कि संपत्ति का ''विस्तृत विवरण'' प्रदान किए जाने तक वह जमानत याचिका के गुण-दोष पर विचार नहीं करेगी। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए कानूनी प्रतिनिधि को याचिकाकर्ता, उसके पति, उनके बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और सास-ससुर की अचल संपत्ति का विस्तृत ब्योरा देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अदालत ने कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और प्रमुख कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण भी मांगा था।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा था, ''जब तक ये संपूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, हम जमानत याचिका पर विचार नहीं करेंगे।'' न्यायिक रजिस्ट्रार को रजिस्ट्री के भीतर प्रशासनिक चूक की जांच करने का कार्य सौंपा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अदालत के पिछले निर्देशों की अनदेखी क्यों की गई। पीठ ने कहा कि वह याचिका को मई में किसी दिन सूचीबद्ध करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 13:49:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंदौली : चंदौली सहित 6 जिलों को इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स की सौगात, CJI और CM योगी ने किया शिलान्यास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>चंदौली, अमृत विचार : </strong>सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली समेत प्रदेश के छह जिलों शामली, औरैया, महोबा, अमेठी और हाथरस में निर्माणाधीन 1500 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड न्यायालय परिसर का शिलान्यास किया। इसके साथ ही सीजेआइ और सीएम योगी ने वकीलों को संबोधित भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शिलान्यास करने से पहले अपने संबोधन में कहा, ''एक बार जब ये (एकीकृत न्यायालय परिसर) बन जाएंगे, तो मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश पूरे भारत के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा। ये परिसर पूरे देश के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568056/span-classt-redchandauli-span-cji-and-cm-yogi-laid-the-foundation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/फोटो-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंदौली, अमृत विचार : </strong>सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली समेत प्रदेश के छह जिलों शामली, औरैया, महोबा, अमेठी और हाथरस में निर्माणाधीन 1500 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड न्यायालय परिसर का शिलान्यास किया। इसके साथ ही सीजेआइ और सीएम योगी ने वकीलों को संबोधित भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शिलान्यास करने से पहले अपने संबोधन में कहा, ''एक बार जब ये (एकीकृत न्यायालय परिसर) बन जाएंगे, तो मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश पूरे भारत के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा। ये परिसर पूरे देश के लिए एक मानक बनेंगे।'' प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''मैं जिस भी राज्य में जाऊंगा, गर्व और खुशी के साथ उत्तर प्रदेश का उदाहरण दूंगा। मैं संबंधित राज्य सरकार और उच्च न्यायालय से आह्वान एवं अपील करूंगा कि उस राज्य में भी यही सुविधा प्रदान की जाए।'' इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि भारत का संविधान जिला न्यायपालिका को महत्वपूर्ण स्थान देता है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त जिला न्यायपालिका की स्थापना से न्याय तक पहुंच के राष्ट्र के सपने की पूर्ति होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने घरों के पास ही अदालती सुविधाएं मिलेंगी और यदि उन्हें उनके किसी कानूनी अधिकार से वंचित किया जाता है, तो वे अपने स्थानीय न्यायालयों में उन अधिकारों के लिए लड़ सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा, ''प्रत्येक जिला न्यायालय में जहां हमारी बेटियां और बहनें वकालत करती हैं, वहां महिलाओं के लिए एक अलग बार रूम बनाया जाना चाहिए। दूसरा, मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करूंगा कि इस विशाल और सुंदर परिसर में जहां भी संभव हो, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाए। कई बार मुवक्किल और अन्य लोग अदालत आते हैं, और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, आपने जो व्यवस्थाएं की हैं, जैसे योग केंद्र और पार्क, वे उत्कृष्ट हैं।'' उन्होंने कहा, "यदि यह छोटी सी सुविधा भी जोड़ दी जाए, तो मुझे लगता है कि यह उन लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक होगा, जिन्हें अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यह विशेष रूप से हमारे बुजुर्ग मुवक्किलों के लिए लाभकारी होगा।'' उन्होंने आगे कहा कि यह एकीकृत न्यायिक न्यायालय परिसर कम से कम अगले 50 वर्षों तक न्यायिक परिसर की आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''सभी प्रकार की सुविधाओं से सुसज्जित यह न्यायिक न्यायालय परिसर वकीलों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वादकारियों- आम जनता, जो न्याय के अपने अधिकार की मांग करते हुए अदालत में आते हैं, को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रशंसनीय है।'' अपने भाषण का समापन करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ''मैं प्रार्थना करता हूं कि यह एकीकृत न्यायालय परिसर वास्तव में न्याय का मंदिर सिद्ध हो। यहां हमारे न्यायिक अधिकारी करुणा के साथ न्याय करेंगे और मानवीय मूल्यों को बनाए रखेंगे, और बार के सदस्य महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे और मुझे विश्वास है कि आप उस भूमिका को बखूबी निभाएंगे।'' </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है कि हमारी न्यायपालिका उतनी ही सशक्त हो। आम आदमी को सरलता और सहजता के साथ न्याय प्राप्त हो, इसके लिए उतना ही उत्तम इंफ्रास्ट्रक्चर भी आवश्यक है। सरकार के पास न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कोई भी कार्य आते हैं तो व्यवस्था में कोई देर नहीं लगती। उन्होंने कहा, "मुझे प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले चरण में छह जनपदों के लिए धनराशि भेज दी है। डिजाइन स्वीकृत हो चुका है तथा सभी औपचारिकताएँ पूरी हो चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज मुख्य न्यायाधीश द्वारा जैसे ही भूमि-पूजन हो जाएगा, वैसे ही एलएंडटी जैसी विश्व-विख्यात संस्थाओं द्वारा निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।" मुख्यमंत्री ने कहा, " एक छत के नीचे कोर्ट कॉम्प्लेक्स तो होगा ही, साथ ही अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधा, स्पोर्ट्स सुविधा, पार्किंग और कैंटीन की व्यवस्था भी होगी। अब ऐसा नहीं होगा कि न्याय के लिए संघर्ष करने वाले हमारे अधिवक्ता दिन की रोशनी में भी चैंबर में सूरज के दर्शन करते रहें। टूटे-फूटे चैंबर नहीं, बल्कि बेहतरीन सुविधाओं वाला एकीकृत कॉम्प्लेक्स होगा।" उन्होंने कहा कि चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस एवं औरैया-इन छह जनपदों के एकीकृत न्यायालय परिसर का शुभारंभ आज होगा। शेष चार अन्य जनपदों की सभी औपचारिकताएँ कुछ ही महीनों में पूरी कर ली जाएँगी। भारत के न्यायिक इतिहास में यह कार्य स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा। इसकी शुरुआत मुख्य न्यायाधीश के कर-कमलों से आज होने जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुख्य न्यायाधीश के चंदौली पहुंचने से पहले अधिवक्ताओं ने बैठने को लेकर किया हंगामा </strong></p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शनिवार को प्रदेश के छह जिलों चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस एवं औरैया के एकीकृत न्यायालय परिसर के शुभारंभ के पहले अधिवक्ताओं ने बैठने की व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा किया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि 28 वर्षों की जद्दोजहद के बाद ऐसा मौका आया है, लेकिन कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को आगे बिठा दिया गया है, जबकि अधिवक्ताओं को पीछे बैठाया जा रहा है। शोर-गुल सुनकर मौके पर कई अधिकारी अधिवक्ताओं से संवाद करने पहुंच गए। चंदौली सिविल बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम मूल रूप से अधिवक्ताओं का है। चंदौली जिले के पदाधिकारियों को पीछे बैठा दिया गया है, जबकि अन्य जनपदों के लोगों को आगे की सीटें दी जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>वाराणसी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 13:10:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रिटायरमेंट से पहले CJI गवई का बड़ा बयान : कहा- मैं बौद्ध धर्म का पालन करता हूं, लेकिन मैं सभी धर्मों में...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, लेकिन वह वास्तव में एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं जो सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं। ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (एससीएओआरए) द्वारा आयोजित एक विदाई समारोह में बोलते हुए, गवई ने अपना आभार व्यक्त किया और कहा कि देश की न्यायपालिका ने उन्हें बहुत कुछ दिया है।</p>
<p>गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, और शुक्रवार उच्चतम न्यायालय में उनका आखिरी कार्य दिवस होगा। गवई ने कहा, "मैं बौद्ध धर्म का पालन करता हूं, लेकिन मुझे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/560595/cji-br-gavai-s-big-statement--said--i-follow-buddhism--but-i-believe-in-all-religions"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/21.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, लेकिन वह वास्तव में एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं जो सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं। ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (एससीएओआरए) द्वारा आयोजित एक विदाई समारोह में बोलते हुए, गवई ने अपना आभार व्यक्त किया और कहा कि देश की न्यायपालिका ने उन्हें बहुत कुछ दिया है।</p>
<p>गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, और शुक्रवार उच्चतम न्यायालय में उनका आखिरी कार्य दिवस होगा। गवई ने कहा, "मैं बौद्ध धर्म का पालन करता हूं, लेकिन मुझे धार्मिक पढ़ाई या धर्म से जुड़ी गहरी जानकारी ज़्यादा नहीं है। मैं वास्तव में धर्मनिरपेक्ष हूं और मैं हिंदू धर्म, सिख धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म, सबमें विश्वास रखता हूं।" </p>
<p>सीजेआई ने याद करते हुए कहा, "मैंने यह अपने पिता से सीखा है। वह धर्मनिरपेक्ष और डॉ. आम्बेडकर के ज्ञानयुक्त अनुयायी थे। बड़े होते हुए, जब हम उनके साथ राजनीतिक समारोहों में जाते थे और उनके दोस्त कहते थे, 'यहां आओ, यहां की दरगाह प्रसिद्ध है, या यहां का गुरुद्वारा प्रसिद्ध है', तो हम जाते थे।" गवई ने कहा कि वह केवल डॉ. आम्बेडकर और संविधान की वजह से ही इस वर्तमान पद तक पहुंच पाए। </p>
<p>उन्होंने कहा, "अन्यथा, मुझे नहीं लगता कि किसी नगरपालिका के स्कूल में ज़मीन पर बैठकर पढ़ने वाला कोई भी लड़का कभी इसका सपना देख सकता था। मैंने भारतीय संविधान के चार आधारभूत सिद्धांतों - न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के अनुसार जीने की कोशिश की है।" गवई ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को केवल सीजेआई-केंद्रित अदालत नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी न्यायाधीशों का न्यायालय होना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने कहा, "उच्चतम न्यायालय एक बहुत बेहतरीन संस्था है। जब तक न्यायाधीशों, बार, रजिस्ट्री और कर्मचारियों सहित सभी हितधारक मिलकर काम नहीं करते, अदालत कार्य नहीं कर सकती। जहां बार की समस्याओं की बात है, उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन और एससीएओआरए को हमेशा साथ लिया जाना चाहिए।" वहां मौजूद सीजेआई-नामित न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि वह गवई को दो दशकों से जानते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए न्याय के प्रति निवर्तमान सीजेआई का समर्पण वास्तव में सराहनीय है। </p>
<p>न्यायमूर्ति कांत ने कहा, "मैंने न्यायमूर्ति गवई के मानवीय पक्ष को देखा है। वह विनम्र, मिलनसार और एक महान मेज़बान हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी, वह संस्था का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनका अनुभव संस्था के लिए एक संपत्ति बना रहेगा।" एससीएओआरए के अध्यक्ष विपिन नायर ने जांच के हिस्से के रूप में जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब करने के मुद्दे का संज्ञान लेने के लिए सीजेआई गवई को धन्यवाद दिया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 21:28:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> CJI पर हुए हमले से हर भारतीय क्षुब्ध ... पीएम मोदी ने गवई से की बात, कहा- इस तरह के कृत्य की समाज में कोई जगह नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर हमले को निंदनीय करार देते हुए कहा है कि इस तरह के कृत्यों की भारतीय समाज में कोई जगह नहीं है। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी आर गवई जी से बात की। आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुए हमले से हर भारतीय क्षुब्ध है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है। यह अत्यंत निंदनीय है।"</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने न्यायमूर्ति गवई के धैर्य की सराहना करते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/555362/every-indian-is-outraged-by-the-attack-on-the-cji----pm-modi-spoke-to-gawai--saying-such-acts-have-no-place-in-society"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/cats86.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर हमले को निंदनीय करार देते हुए कहा है कि इस तरह के कृत्यों की भारतीय समाज में कोई जगह नहीं है। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी आर गवई जी से बात की। आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुए हमले से हर भारतीय क्षुब्ध है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है। यह अत्यंत निंदनीय है।"</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने न्यायमूर्ति गवई के धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि इससे न्याय के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का पता चलता है। मोदी ने कहा , " ऐसी स्थिति में न्यायमूर्ति गवई द्वारा प्रदर्शित धैर्य की मैं सराहना करता हूँ। यह न्याय के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और हमारे संविधान की भावना को मज़बूत करने को दर्शाता है।"</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राहुल ने भी जताई नाराजगी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने भी घटना की निंदा करते हुए 'एक्स' पर पोस्ट किया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश पर हमला हमारी न्यायपालिका की गरिमा और हमारे संविधान की भावना पर हमला है। इस तरह की नफरत का हमारे देश में कोई स्थान नहीं है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>विपक्षी दलों ने बताया संविधान पर हमला</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बयान जारी कर कहा, “यह हमला सिर्फ मुख्य न्यायाधीश पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान की मूल भावना पर हमला है। इसकी निंदा के लिए शब्द भी कम पड़ जाते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश को एकजुट होकर न्यायमूर्ति गवई के साथ खड़ा होना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ‘एक्स’ पर लिखा, “यह हमला न केवल न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार है, बल्कि कानून के शासन को चुनौती देने की कोशिश है। यह घटना बेहद शर्मनाक और घृणित है।”</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में सोमवार सुबह एक असामान्य घटनाक्रम में वकील की पोशाक पहने एक व्यक्ति ने अदालती कार्यवाही के दौरान न्यायमूर्ति गवई पर कथित रूप से कोई वस्तु फेंकने की कोशिश की।  </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/555306/uproar-erupts-in-the-supreme-court-as-a-man-dressed-as-a-lawyer-throws-a-shoe-at-the-cji">सनातन का अपमान नहीं सहेंगे : SC में कार्यवाही के दौरान CJI पर वकील ने की जूता फेंकने की कोशिश</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 21:13:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत, CJI गवई ने कहा- छात्रवृत्ति पर विदेश जाकर करें पढ़ाई, परिवार पर न डालें बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हैदराबाद।</strong> प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था अनोखी चुनौतियों का सामना कर रही है और इसमें सुधार की सख्त जरूरत है। न्यायमूर्ति गवई ने यहां ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को सलाह दी कि वे छात्रवृत्ति पर विदेश जाकर पढ़ाई करें, न कि परिवार पर इसका बोझ डालें। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्याय व्यवस्था में सुधार की सख़्त जरूरत है। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश और न्याय व्यवस्था अनोखी चुनौतियों का सामना कर रही है। मुकदमों में कभी-कभी दशकों तक देरी होती है। हमने ऐसे कई मामले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/545819/indian-judicial-system-needs-urgent-reform--cji-gavai-told-students--go-abroad-on-scholarship-and-study--don-t-let-your-family-put-the-burden-on-you"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/cats226.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हैदराबाद।</strong> प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था अनोखी चुनौतियों का सामना कर रही है और इसमें सुधार की सख्त जरूरत है। न्यायमूर्ति गवई ने यहां ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को सलाह दी कि वे छात्रवृत्ति पर विदेश जाकर पढ़ाई करें, न कि परिवार पर इसका बोझ डालें। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्याय व्यवस्था में सुधार की सख़्त जरूरत है। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश और न्याय व्यवस्था अनोखी चुनौतियों का सामना कर रही है। मुकदमों में कभी-कभी दशकों तक देरी होती है। हमने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां किसी व्यक्ति को विचाराधीन कैदी के रूप में वर्षों जेल में बिताने के बाद निर्दोष पाया गया है। हम जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं उनके समाधान में हमारी सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं मदद कर सकती हैं।’’ </p>
<p>मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पी.एस. नरसिम्हा भी दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। तेलंगाना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Jul 2025 14:35:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यायमूर्ति BR गवई बने देश के 52वें प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ, पीएम मोदी भी रहे मौजूद</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> न्यायमूर्ति बी आर गवई ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें एक समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, निवर्तमान न्यायाधीश संजीव खन्ना, अनेक केंद्रीय मंत्री, शीर्ष अदालत के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के कई पूर्व न्यायाधीश समेत अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पद की</strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/538028/justice-br-gavai-became-the-52nd-chief-justice-of-the-country--president-murmu-administered-the-oath--pm-modi-was-also-present"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/14051-0.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> न्यायमूर्ति बी आर गवई ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें एक समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, निवर्तमान न्यायाधीश संजीव खन्ना, अनेक केंद्रीय मंत्री, शीर्ष अदालत के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के कई पूर्व न्यायाधीश समेत अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पद की शपथ लेने के बाद न्यायमूर्ति गवई ने छुए मां के पैर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर न्यायमूर्ति गवई की पत्नी और मां सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने अपनी मां के पैर छुए। न्यायमूर्ति खन्ना मंगलवार यानी 13 मई को 51वें मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हो गए।  उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति गवई को मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति गवई को 24 मई, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। वह 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल है। न्यायमूर्ति गवई का मुख्य न्यायाधीश बनना शीर्ष अदालत के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि वह पूर्व मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन के बाद अनुसूचित जाति समुदाय से न्यायपालिका में शीर्ष पद पर पहुँचने वाले दूसरे शख्स हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति गवाई एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, प्रमुख अंबेडकरवादी, पूर्व सांसद और कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके आर एस गवई के पुत्र हैं। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से बी.ए., एलएलबी की डिग्री पूरी करने के बाद 16 मार्च, 1985 को वकालत शुरू किया था। उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्वतंत्र रूप से वकालत की। वर्ष 1990 के बाद मुख्य रूप से संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष वकालत की किया। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति गवई को 14 नवंबर, 2003 को उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। वह 12 नवंबर, 2005 को बॉम्बे उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश बने। न्यायमूर्ति गवई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुंबई में मुख्य पीठ के साथ-साथ नागपुर, औरंगाबाद और पणजी में सभी प्रकार के कार्यभार वाली पीठों की अध्यक्षता की। </p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता और बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश स्वर्गीय बैरिस्टर राजा एस भोंसले के साथ 1987 तक (संक्षिप्त कार्यकाल) कानूनी करियर की नींव रखी। न्यायमूर्ति गवई शीर्ष अदालत में कई संवैधानिक पीठ के निर्णयों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें विमुद्रीकरण, अनुच्छेद 370, चुनावी बॉन्ड योजना और एससी/एसटी श्रेणियों के भीतर उप वर्गीकरण शामिल हैं। उन्होंने एससी/एसटी के बीच क्रीमी लेयर शुरू करने की पुरजोर वकालत की थी। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ेः <a class="post-title-lg" href="https://www.amritvichar.com/article/538002/tiranga-shaurya-yatra--the-journey-to-honor-the-army-started-under-the-leadership-of-cm-yogi--cm-yogi-said--the-world-has-acknowledged-the-strength-of-our-army">Tiranga Shaurya Yatra: सीएम योगी की अगुवाई में शुरू हुई सेना के सम्मान की यात्रा, बोले सीएम योगी- दुनिया ने हमारी सेना का लोहा माना</a></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/538028/justice-br-gavai-became-the-52nd-chief-justice-of-the-country--president-murmu-administered-the-oath--pm-modi-was-also-present</link>
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                <pubDate>Wed, 14 May 2025 10:57:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट के 21 न्यायाधीशों ने सार्वजनिक की अपनी संपत्ति, जानिए किसके पास क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना समेत अधिकतर न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। शीर्ष अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर 33 न्यायाधीशों में से 21 ने सोमवार को अपनी संपत्ति घोषित की। न्यायाधीशों अपने खुद के अलावा जीवनसाथी की संपत्ति भी सार्वजनिक कर दी।</p>
<p>न्यायाधीशों ने एक अप्रैल को पूर्ण न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए सोमवार रात शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपनी-अपनी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा घोषित किया। उपलब्ध जानकारी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536903/21-out-of-33-supreme-court-judges-have-made-their-assets-public--know-who-owns-what"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना समेत अधिकतर न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। शीर्ष अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर 33 न्यायाधीशों में से 21 ने सोमवार को अपनी संपत्ति घोषित की। न्यायाधीशों अपने खुद के अलावा जीवनसाथी की संपत्ति भी सार्वजनिक कर दी।</p>
<p>न्यायाधीशों ने एक अप्रैल को पूर्ण न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए सोमवार रात शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपनी-अपनी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा घोषित किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य न्यायाधीश खन्ना के पास दक्षिण दिल्ली में तीन बेडरूम का डीडीए फ्लैट, दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में दो पार्किंग स्पेस के साथ चार बेडरूम का फ्लैट/अपार्टमेंट है, जिसका क्षेत्रफल 2446 वर्ग फीट है। इसी प्रकार गुरुग्राम के सेक्टर 49 के सिसपाल विहार में 2016 वर्ग फीट के क्षेत्रफल वाले चार बेडरूम के फ्लैट/अपार्टमेंट में उनकी 56 फीसदी हिस्सेदारी है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश के पास हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में अविभाजित भूमि के साथ घर के आंशिक मालिक देव राज खन्ना (एचयूएफ) में भी उनका हिस्सा है। न्यायमूर्ति खन्ना द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार, उनके पास सावधि जमा और बैंक खातों में 55.75 लाख रुपये और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ- खाता वर्ष 1989 में खोला गया) में 1.06 करोड़ रुपये हैं। उनके पास 1,77,89,000 रुपये का जीपीएफ है। उन्होंने 29,625 रुपये के वार्षिक प्रीमियम और 14,000 रुपये के शेयरों के साथ भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मनी बैक पॉलिसी ली है। उनके ऊपर कोई देनदारी और ऋण नहीं है।</p>
<p>नामित मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई के बैंक खातों में 19.63 लाख रुपये और पीपीएफ खाते में 6.59 लाख रुपये हैं। उनके पास अमरावती, महाराष्ट्र में एक आवासीय घर (मृत पिता से विरासत में मिला), बांद्रा, मुंबई, महाराष्ट्र में एक आवासीय अपार्टमेंट (स्वयं) और डिफेंस कॉलोनी, नयी दिल्ली में एक आवासीय अपार्टमेंट (स्वयं) है। न्यायमूर्ति गवई के पास महाराष्ट्र के अमरावती और नागपुर के केदापुर और कटोल में कृषि भूमि भी है (जो उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली है)।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश के तौर पर न्यायमूर्ति गवई का उत्तराधिकारी बनने जा रहे न्यायमूर्ति सूर्य कांत के पास चंडीगढ़ के सेक्टर 10 में एक कनाल का मकान है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है), पंचकूला जिले के गोलपुरा गांव में साढ़े 13 एकड़ (लगभग) कृषि भूमि है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है), गुरुग्राम के सुशांत लोक-1 में 300 वर्ग गज का प्लॉट है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है), जीके-1, नई दिल्ली में 285 वर्ग गज के मकान में भूतल और बेसमेंट है (जिसका स्वामित्व स्वयं/पति/एचयूएफ के पास संयुक्त रूप से है)।</p>
<p>उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर 18-सी में 192 वर्ग गज का मकान (स्वयं/पति/पत्नी के संयुक्त स्वामित्व में), गुरुग्राम के डीएलएफ-II में 250 वर्ग गज का मकान (स्वयं) घोषित किया है। उनके पास 12 एकड़ की कृषि भूमि में 1/3 हिस्सा और हिसार जिले के पेटवार गांव में एक मकान है, इसके अलावा हिसार के अर्बन एस्टेट-II में 250 वर्ग गज के मकान (पिता से विरासत में मिला) में भी 1/3 हिस्सा है।</p>
<p>चौबीस मई को सेवानिवृत्त होने वाले न्यायमूर्ति ए एस ओका की संपत्तियों में पीपीएफ में 92.35 लाख रुपये, एफडी में 21.76 लाख रुपये, 2022 मॉडल की मारुति बलेनो कार और 5.1 लाख रुपये का कार लोन शामिल है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने नोएडा में 2-बीएचके अपार्टमेंट, इलाहाबाद में एक बंगला और उत्तर प्रदेश में विरासत में मिली कृषि भूमि घोषित की है। उनके पास 1.5 करोड़ रुपये का निवेश भी है।</p>
<p>न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन ने 120 करोड़ रुपये का निवेश किया है और पिछले 10 वर्षों में 91 करोड़ रुपये का कर चुकाया है। शीर्ष न्यायालय में सीधे पदोन्नति (उच्च न्यायालय से नहीं) पाने वाले न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने 2010 में सफदरजंग विकास क्षेत्र, नयी दिल्ली में एक बिल्डर फ्लोर हाउस खरीदा था। उनके पास 2014 में खरीदा गया (सफदरजंग विकास क्षेत्र, नयी दिल्ली) में एक बिल्डर फ्लोर हाउस भी है। वर्ष 2016 में गुलमोहर पार्क, नयी दिल्ली में खरीदे गए एक बिल्डर फ्लोर हाउस में उनके पास संयुक्त स्वामित्व (पति/पत्नी के साथ 50 फीसदी हिस्सा) है।</p>
<p>जिन 12 न्यायाधीशों ने अभी तक अपनी संपत्ति घोषित नहीं की है, वे हैं- न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले, न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 May 2025 15:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली नई याचिका पर विचार करने से किया इनकार, जानें क्या कहा...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नयी याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर पांच मई को सुनवाई करेगी।</p>
<p>पीठ ने पहले कहा था कि वह 70 से अधिक याचिकाओं में से केवल पांच पर सुनवाई करेगी। पीठ ने आज फिर कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई नयी याचिका पर विचार नहीं करेगी। प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता मोहम्मद सुल्तान के वकील से कहा,‘‘ यदि आपके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536205/supreme-court-refuses-to-consider-new-petition-challenging-wakf-amendment-act--know-what-it-said"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नयी याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर पांच मई को सुनवाई करेगी।</p>
<p>पीठ ने पहले कहा था कि वह 70 से अधिक याचिकाओं में से केवल पांच पर सुनवाई करेगी। पीठ ने आज फिर कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई नयी याचिका पर विचार नहीं करेगी। प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता मोहम्मद सुल्तान के वकील से कहा,‘‘ यदि आपके पास कुछ अतिरिक्त आधार हैं तो आप हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर सकते हैं।’’ </p>
<p>पीठ ने 29 अप्रैल को अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 13 याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था, ‘‘हम अब याचिकाओं की संख्या नहीं बढ़ाऐंगे... ये बढ़ती जाएंगी और इन्हें संभालना मुश्किल हो जाएगा।’’ </p>
<p>केन्द्र सरकार ने 17 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय को आश्वस्त किया था कि वह पांच मई तक ‘वक्फ बाय यूजर’ समेत वक्फ की संपत्तियों को न तो गैर-अधिसूचित करेगी और न ही केंद्रीय वक्फ परिषद व बोर्ड में कोई नियुक्ति करेगी। इस कानून के खिलाफ करीब 72 याचिकाएं दायर की गई थीं। </p>
<p>इनमें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता असदुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी), जमीयत उलमा-ए-हिंद, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और मोहम्मद जावेद की याचिकाएं शामिल थीं। </p>
<p>न्यायालय ने तीन वकीलों को नोडल वकील नियुक्त करते हुए उनसे कहा कि वे आपस में तय करें कि कौन दलीलें पेश करेगा। पीठ ने कहा, ‘‘हम स्पष्ट करते हैं कि अगली सुनवाई (पांच मई) प्रारंभिक आपत्तियों और अंतरिम आदेश के लिए होगी।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 13:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यायमूर्ति बागची 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में लेंगे शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची सोमवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना उच्चतम न्यायालय परिसर में एक समारोह में शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में न्यायमूर्ति बागची को पद की शपथ दिलाएंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति बागची के शपथ लेने के बाद, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 के मुकाबले 33 हो जाएंगी। न्यायमूर्ति बागची का शीर्ष अदालत में कार्यकाल छह वर्ष से अधिक का होगा। इस दौरान वह भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में भी काम करेंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति के.वी विश्वनाथन के 25 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/527651/justice-bagchi-will-take-oath-as-judge-of-supreme-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/demo-image-v---2025-03-15t215834.183.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची सोमवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना उच्चतम न्यायालय परिसर में एक समारोह में शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में न्यायमूर्ति बागची को पद की शपथ दिलाएंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति बागची के शपथ लेने के बाद, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 के मुकाबले 33 हो जाएंगी। न्यायमूर्ति बागची का शीर्ष अदालत में कार्यकाल छह वर्ष से अधिक का होगा। इस दौरान वह भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में भी काम करेंगे।</p>
<p>न्यायमूर्ति के.वी विश्वनाथन के 25 मई 2031 को सेवानिवृत्त होने पर, न्यायमूर्ति बागची दो अक्टूबर 2031 को अपनी सेवानिवृत्ति तक भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद संभालेंगे। उनका जन्म तीन अक्टूबर, 1966 को हुआ था। केंद्र सरकार ने 10 मार्च को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए न्यायमूर्ति बागची के नाम को मंजूरी दी थी।</p>
<p>प्रधान न्यायाधीश खन्ना की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने छह मार्च को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनके नाम की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति बागची को 27 जून 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्हें चार जनवरी 2021 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था।</p>
<p>न्यायमूर्ति बागची को आठ नवंबर 2021 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में वापस भेज दिया गया और तब से वह वहीं कार्यरत हैं। उन्होंने 13 वर्षों से अधिक समय तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, न्यायमूर्ति बागची ने कानून के विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.amritvichar.com/article/527649/the-death-of-husband-and-wife-in-the-family-shouts">गीजर से निकली गैस के संपर्क में आने से पति-पत्नी की मौत, परिवार में मची चीख-पुकार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 22:00:49 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: साथ रहने के आदेश का पालन न करने पर भी पति से गुजारा भत्ता पा सकती है पत्नी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक महिला को अपने पति के साथ रहने के आदेश का पालन नहीं करने के बाद भी उस स्थिति में पति से भरण-पोषण का अधिकार दिया जा सकता है जब उसके पास साथ रहने से इनकार करने का वैध और पर्याप्त कारण हो। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने इस सवाल पर कानूनी विवाद का निपटारा कर दिया कि क्या वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश रखने वाला पति महिला द्वारा साथ रहने के आदेश का पालन न किए जाने की स्थिति में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/516063/important-decision-of-supreme-court--wife-can-get-alimony-from-husband-even-if-he-does-not-follow-the-order-of-living-together"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक महिला को अपने पति के साथ रहने के आदेश का पालन नहीं करने के बाद भी उस स्थिति में पति से भरण-पोषण का अधिकार दिया जा सकता है जब उसके पास साथ रहने से इनकार करने का वैध और पर्याप्त कारण हो। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने इस सवाल पर कानूनी विवाद का निपटारा कर दिया कि क्या वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश रखने वाला पति महिला द्वारा साथ रहने के आदेश का पालन न किए जाने की स्थिति में कानून के आधार पर अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से मुक्त है। </p>
<p>पीठ ने कहा कि इस संबंध में कोई सख्त नियम नहीं हो सकता और यह हमेशा मामले की परिस्थितियों पर निर्भर होना चाहिए। इसने कहा कि यह व्यक्तिगत मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा और उपलब्ध सामग्री तथा सबूतों के आधार पर यह तय करना होगा कि क्या साथ रहने के आदेश के बावजूद पत्नी के पास पति के साथ रहने से इनकार करने का वैध और पर्याप्त कारण है। </p>
<p>न्यायालय ने कहा, ‘‘इस संबंध में कोई सख्त नियम नहीं हो सकता और यह निश्चित रूप से प्रत्येक विशेष मामले में प्राप्त होने वाले विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर होना चाहिए।’’ पीठ ने यह आधिकारिक फैसला झारखंड के एक अलग रह रहे दंपति के मामले में दिया जिनका विवाह एक मई 2014 को हुआ था, लेकिन अगस्त 2015 में अलग हो गए। </p>
<p>पति ने दाम्पत्य अधिकारों की बहाली के लिए रांची में पारिवारिक अदालत का रुख किया और दावा किया कि पत्नी ने 21 अगस्त 2015 को ससुराल छोड़ दिया और उसे वापस लाने के बार-बार प्रयासों के बावजूद वह वापस नहीं लौटी। उसकी पत्नी ने पारिवारिक अदालत के समक्ष अपने लिखित आवेदन में आरोप लगाया कि उसके पति ने उसे प्रताड़ित किया और मानसिक पीड़ा दी तथा चार पहिया वाहन खरीदने के लिए पांच लाख रुपये के दहेज की मांग की। </p>
<p>पारिवारिक अदालत ने 23 मार्च, 2022 को यह कहते हुए वैवाहिक अधिकारों की बहाली का फैसला सुनाया कि पति उसके साथ रहना चाहता है। हालांकि, पत्नी ने आदेश का पालन नहीं किया और इसके बजाय परिवार अदालत में भरण-पोषण के लिए याचिका दायर की। पारिवारिक अदालत ने पति को आदेश दिया कि वह अलग रह रही पत्नी को प्रति माह 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता प्रदान करे। </p>
<p>बाद में, पति ने इस आदेश को झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जिसमें कहा गया कि उसकी पत्नी वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश के बावजूद ससुराल नहीं लौटी और उसने अपील के माध्यम से चुनौती देने का विकल्प नहीं चुना। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं है। </p>
<p>आदेश से व्यथित होकर पत्नी ने शीर्ष अदालत के समक्ष आदेश को चुनौती दी, जिसने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय को उक्त फैसले और उसके निष्कर्षों को इतना अनुचित महत्व नहीं देना चाहिए था। इसने कहा कि इस तथ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि संबंधित महिला को घर में शौचालय का उपयोग करने या ससुराल में खाना पकाने के लिए उचित सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति नहीं थी जो उससे दुर्व्यवहार का संकेत है।</p>
<p> पीठ ने कहा, ‘‘तदनुसार, रांची में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा पारित 4 अगस्त, 2023 के फैसले को रद्द करते हुए अपील स्वीकार की जाती है।’’ इसने कहा कि पारिवारिक अदालत के 15 फरवरी, 2022 के आदेश को बरकरार रखा जाता है और पति को अपनी अलग रह रही पत्नी को 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता प्रदान करने का निर्देश दिया जाता है। न्यायालय ने कहा, ‘‘यह आवेदन दाखिल करने की तारीख,तीन अगस्त, 2019 से देय होगा। भरण-पोषण का बकाया तीन समान किस्तों में भुगतान किया जाएगा।’’ </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/515994/priyanka-gandhi-said-on-the-falling-value-of-rupee-against-dollar--prime-minister-should-answer-the-people-of-the-country">डालर के मुकाबले रुपए की गिरती कीमत पर बोलीं प्रियंका गांधी- देश की जनता को जवाब दें प्रधानमंत्री</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2025 21:36:49 +0530</pubDate>
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