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                <title>imports - Amrit Vichar</title>
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                <description>imports RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत के पास पर्याप्त पेट्रोलियम का भंडार:  आम जन को नहीं होगी कोई कमी, अफवाहों के बीच केंद्र ने किया साफ़ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।</strong> पश्चिम एशिया में जारी संकट और उससे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में आयी बाधा के बीच सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार है। पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने बताया कि इस समय देश में कच्चे तेल का 25 दिन का अतिरिक्त भंडार है। इसके अलावा शोधित उत्पादों का भी 25 दिन का अतिरिक्त भंडार है। दोनों मिलाकर कुल भंडार सात सप्ताह से अधिक का है। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि कुल अतिरिक्त भंडार 25 करोड़ बैरल यानी लगभग 4,000 करोड़ लीटर का है। साथ ही रूस, अमेरिका,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574166/india-has-sufficient-petroleum-reserves--the-public-will-not-face-any-shortages--the-central-government-clarified-amid-rumors"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(19)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।</strong> पश्चिम एशिया में जारी संकट और उससे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में आयी बाधा के बीच सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार है। पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने बताया कि इस समय देश में कच्चे तेल का 25 दिन का अतिरिक्त भंडार है। इसके अलावा शोधित उत्पादों का भी 25 दिन का अतिरिक्त भंडार है। दोनों मिलाकर कुल भंडार सात सप्ताह से अधिक का है। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि कुल अतिरिक्त भंडार 25 करोड़ बैरल यानी लगभग 4,000 करोड़ लीटर का है। साथ ही रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और मध्य एशिया से आयात लगातार जारी है। इसलिए मीडिया में आई इस तरह की खबरें कि देश के पास सिर्फ 25 दिन का कच्चा तेल बचा है, गलत है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस समय भारत छह महादेशों के कुल 40 देश से कच्चे तेल और पेट्रोलियम का आयात करता है और इस मामले में होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर पूरी तरह से निर्भरता नहीं है। </p>
<p style="text-align:justify;">घरेलू रिफायनिंग कंपनियों की कुल शोधन क्षमता 25.8 करोड़ टन सालाना की है जो मांग से काफी अधिक है। घरेलू मांग 21-23 करोड़ टन सालाना है। पेट्रोल में एथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण की अनिवार्यता के कारण हर साल 4.4 करोड़ बैरल यानी लगभग 60 लाख टन की आयात निर्भरता अलग से कम होती है। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात पूरी तरह से बंद हो जाता है तब भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं होगी। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण पश्चिमी एशिया में स्थिति काफी गंभीर हो गई है। कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमत करीब 20 प्रतिशत बढ़ गयी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574064/monica--daughter-of-bihar--ranked-16th-in-the-upsc-exam--she-wants-to-work-for-the-vulnerable-and-needy"><span class="t-red">यूपीएससी परीक्षा में 16वां स्थान पाने वाली बिहार की बेटी मोनिका: </span>कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों के लिए काम करना चाहती है </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574166/india-has-sufficient-petroleum-reserves--the-public-will-not-face-any-shortages--the-central-government-clarified-amid-rumors</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/574166/india-has-sufficient-petroleum-reserves--the-public-will-not-face-any-shortages--the-central-government-clarified-amid-rumors</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 14:31:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपये की कमजोरी से आयात, विदेशी शिक्षा और यात्रा प्रभावित, निर्यातकों को लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार को 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक देश का आयात, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा महंगी होने की आशंका है। इस वजह से महंगाई भी बढ़ सकती है, हालांकि इससे निर्यातकों को कुछ राहत मिलने का अनुमान है। </p>
<p style="text-align:justify;">रुपये में इस महीने अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 202 पैसे या दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। वर्ष 2025 में विदेशी कोषों की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण इसमें पांच प्रतिशत की गिरावट आई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/569035/the-weakening-rupee-affects-imports--foreign-education--and-travel--while-benefiting-exporters"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/एक-लाख-40-हजार-रुपये.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार को 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक देश का आयात, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा महंगी होने की आशंका है। इस वजह से महंगाई भी बढ़ सकती है, हालांकि इससे निर्यातकों को कुछ राहत मिलने का अनुमान है। </p>
<p style="text-align:justify;">रुपये में इस महीने अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 202 पैसे या दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। वर्ष 2025 में विदेशी कोषों की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण इसमें पांच प्रतिशत की गिरावट आई थी। गिरते रुपये का तात्कालिक प्रभाव आयातकों पर पड़ता है, जिन्हें समान मात्रा के लिए अधिक भुगतान करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लगातार कमजोर होते रुपये का खर्च पर इस तरह असर पड़ने का अनुमान है:-</strong><br /><strong>आयात:</strong><br />भारतीय आयात में कच्चा तेल, कोयला, प्लास्टिक सामग्री, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वनस्पति तेल, उर्वरक, मशीनरी, सोना, मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर तथा लोहा और इस्पात शामिल हैं। आयातित वस्तुओं के भुगतान के लिए आयातकों को अमेरिकी डॉलर खरीदने पड़ते हैं। रुपये में गिरावट के साथ, वस्तुओं का आयात महंगा हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>विदेशी शिक्षा:</strong><br />अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये का मतलब है कि विदेशी शिक्षा अधिक महंगी हो जाएगी, क्योंकि छात्रों को विदेशी संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले प्रत्येक डॉलर के लिए अधिक रुपये देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>विदेशी यात्रा:</strong><br />कमजोर स्थानीय मुद्रा का मतलब है कि यात्रा खर्च के लिए एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए अधिक रुपये देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>धन प्रेषण:</strong><br />अनिवासी भारतीय (एनआरआई) जो पैसा घर भेजते हैं, वे रुपये के मूल्य में अधिक पैसा भेज सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निर्यात:</strong><br />निर्यातकों को रुपये के अवमूल्यन से लाभ होने की संभावना है क्योंकि उन्हें एक डॉलर से अधिक रुपये मिलेंगे। हालांकि, आयात पर निर्भर निर्यातकों को भारतीय मुद्रा के कमजोर होने से लाभ नहीं होगा। इस तरह देखा जाए तो कपड़ा जैसे कम आयात निर्भरता वाले क्षेत्रों को कमजोर रुपये से सबसे अधिक लाभ होना चाहिए, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-आयात वाले क्षेत्रों को सबसे कम लाभ होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 14:02:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के साथ व्यापार घाटा तुरंत करो कम... मोदी सरकार के दबाव के आगे झुके रूसी राष्‍ट्रपति, जानें जरूरी बातें?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत द्वारा भारी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात किए जाने के कारण पैदा हुए व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए नयी दिल्ली से अधिक कृषि उत्पाद और दवाइयां खरीदने सहित अन्य उपाय करने के आदेश दिए हैं। </p>
<p>पुतिन ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दिसंबर की शुरुआत में भारत की यात्रा करेंगे। पुतिन ने दक्षिण रूस के सोची स्थित काला सागर रिसॉर्ट में भारत सहित 140 देशों के सुरक्षा एवं भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अंतरराष्ट्रीय वल्दाई चर्चा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/555051/immediately-reduce-the-trade-deficit-with-india----russian-president-bowed-to-the-pressure-of-modi-government--know-the-important-things"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/muskan-dixit-(20)2.png" alt=""></a><br /><p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत द्वारा भारी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात किए जाने के कारण पैदा हुए व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए नयी दिल्ली से अधिक कृषि उत्पाद और दवाइयां खरीदने सहित अन्य उपाय करने के आदेश दिए हैं। </p>
<p>पुतिन ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दिसंबर की शुरुआत में भारत की यात्रा करेंगे। पुतिन ने दक्षिण रूस के सोची स्थित काला सागर रिसॉर्ट में भारत सहित 140 देशों के सुरक्षा एवं भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अंतरराष्ट्रीय वल्दाई चर्चा मंच को बृहस्पतिवार शाम संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका के दंडात्मक शुल्कों के कारण भारत को होने वाले नुकसान की भरपाई रूस से कच्चे तेल के आयात से हो जाएगी, साथ ही उसे एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठा भी मिलेगी।’’ </p>
<p>उन्होंने रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क का उल्लेख करते हुए यह बात की। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए रूस भारत से अधिक कृषि उत्पाद और दवाइयां खरीद सकता है। </p>
<p>पुतिन ने कहा, ‘‘भारत से अधिक कृषि उत्पाद खरीदे जा सकते हैं। औषधीय उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए हमारी ओर से कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।’’ सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ के अनुसार, राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने रूस सरकार को निर्देश दिया है कि वह ‘‘भारतीय मित्रों और समकक्षों को’’ इस संबंध में प्रस्ताव देने पर विचार करे कि ‘‘सहयोग के सबसे आशाजनक क्षेत्र कौन से हैं तथा रूस किस प्रकार व्यापार और अन्य क्षेत्रों में असंतुलन को दूर कर सकता है।’’ </p>
<p>उन्होंने रूस और भारत के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया लेकिन इन अवसरों को पूरी तरह से भुनाने के लिए कुछ विशिष्ट मुद्दों को हल करने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि रूस और भारत के बीच व्यापार लगभग 63 अरब अमेरिकी डॉलर का है और बेलारूस के साथ यह 50 अरब अमेरिकी डॉलर है। </p>
<p>पुतिन ने जोर देकर कहा, ‘‘भारत की जनसंख्या 1.5 अरब और बेलारूस की आबादी एक करोड़ है। यह स्पष्ट रूप से हमारे संभावित अवसरों के अनुरूप नहीं है।’’ पुतिन ने कहा, ‘‘हमें अपने अवसरों और संभावित लाभों को प्राप्त करने के लिए सभी प्रकार के मुद्दों को हल करने की आवश्यकता है।’’ </p>
<p>उन्होंने वित्तपोषण, साजो-सामान और भुगतान संबंधी बाधाओं को प्रमुख चिंताएं बताया। पुतिन ने इस बात को भी रेखांकित किया कि रूस की भारत के साथ कभी कोई समस्या या आपसी तनाव नहीं रहा। ‘‘कभी भी नहीं।’’ पुतिन ने रूस-भारत संबंधों की सोवियत संघ के दिनों से ‘‘विशेष’’ प्रकृति पर प्रकाश डाला जब भारत अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा था। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘भारत में वे इसे याद रखते हैं, वे इसे जानते हैं और वे इसे महत्व देते हैं। हम इस बात की सराहना करते हैं कि भारत इसे नहीं भूला है।’’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना ’‘‘मित्र बताते हुए कहा कि वह उनके साथ भरोसेमंद संबंधों को लेकर सहज महसूस करते हैं। पुतिन ने मोदी के नेतृत्व वाली भारत की राष्ट्रवादी सरकार की सराहना की और उन्हें एक ‘‘संतुलित, बुद्धिमान और राष्ट्र हितैषी’’ नेता बताया। <br />उन्होंने कहा, ‘‘भारत में हर कोई इसे अच्छी तरह जानता है’’, खासकर रूस से तेल आयात रोकने के अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करने के भारत के फैसले का कारण लोग समझते हैं। पुतिन ने इस बात का भी जिक्र किया कि रूस और भारत के बीच विशेष रणनीतिक विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी की घोषणा को जल्द ही 15 साल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक संबंधों को लेकर रूस और भारत लगभग हमेशा अपने कार्यों के बीच समन्वय करते हैं। </p>
<p>पुतिन ने कहा, ‘‘हम अन्य प्रमुख मुद्दों पर हमारे देशों की स्थिति को हमेशा सुनते एवं ध्यान में रखते हैं। हमारे विदेश मंत्रालय मिलकर बहुत निकटता से काम करते हैं।’’ इसके अलावा उन्होंने एआई (कृत्रिम मेधा) और अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए एक संयुक्त कोष के विचार का स्वागत किया। यह प्रस्ताव सोची मंच में भाग ले रहे नयी दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) के महानिदेशक डॉ. अरविंद गुप्ता ने पेश किया। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः  <a href="https://www.amritvichar.com/article/555046/randeep-hooda--randeep-hooda-co-owns-delhi-based-team--prithviraj-yoddhas--and-will-enter-the-archery-premier-league"><span class="t-red">Randeep Hooda: </span>रणदीप हुड्डा बने दिल्ली की टीम 'पृथ्वीराज योद्धास' के को-ओनर्स, करेंगे आर्चरी प्रीमियर लीग में एंट्री </a></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/555051/immediately-reduce-the-trade-deficit-with-india----russian-president-bowed-to-the-pressure-of-modi-government--know-the-important-things</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 14:00:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी शुल्क में बढ़ोतरी के बाद चीन का निर्यात बढ़ा, आयात में गिरावट </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बैंकॉक। </strong>चीन के निर्यात में मार्च में सालाना आधार पर 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं इसी अवधि में आयात में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। अमेरिका के चीन से आयातित वस्तुओं पर शुल्क में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी। </p>
<p>विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से निर्यात 2025 के पहले तीन (जनवरी-मार्च) महीनों में सालाना आधार पर में 5.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आयात में सात प्रतिशत की गिरावट आई। चीन का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष मार्च में 27.6 अरब डॉलर रहा, जबकि इसके निर्यात में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533268/china-s-exports-rise-after-us-tariff-hike--imports-fall"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/cats238.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बैंकॉक। </strong>चीन के निर्यात में मार्च में सालाना आधार पर 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं इसी अवधि में आयात में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। अमेरिका के चीन से आयातित वस्तुओं पर शुल्क में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी। </p>
<p>विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से निर्यात 2025 के पहले तीन (जनवरी-मार्च) महीनों में सालाना आधार पर में 5.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आयात में सात प्रतिशत की गिरावट आई। चीन का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष मार्च में 27.6 अरब डॉलर रहा, जबकि इसके निर्यात में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। </p>
<p>वर्ष की पहली (जनवरी-मार्च) तिमाही में अमेरिका के साथ चीन का व्यापार अधिशेष 76.6 अरब डॉलर रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों में हाल ही में किए गए संशोधनों के अनुसार चीन को अमेरिका को किए जाने वाले अधिकतर निर्यातों पर 145 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>सीमा शुल्क प्रशासन के प्रवक्ता ने कहा कि चीन ‘‘ जटिल व गंभीर स्थिति’’ का सामना कर रहा है, लेकिन वह घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने चीन के विविध निर्यात विकल्पों और विशाल घरेलू बाजार की ओर इशारा करते हुए यह बात कही।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 10:26:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>बढ़ता व्यापार घाटा</title>
                                    <description><![CDATA[देश का बढ़ता व्यापार घाटा अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इन दिनों अर्थव्यवस्था को लेकर लगातार मिली-जुली खबरें आ रही हैं। कभी विकास दर में वृद्धि को लेकर खुशी, तो रुपए का और गिर जाना निराशा पैदा करता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में देश का निर्यात 20 महीनों के …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>देश का बढ़ता व्यापार घाटा अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इन दिनों अर्थव्यवस्था को लेकर लगातार मिली-जुली खबरें आ रही हैं। कभी विकास दर में वृद्धि को लेकर खुशी, तो रुपए का और गिर जाना निराशा पैदा करता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में देश का निर्यात 20 महीनों के बाद पहली बार 1.15 फीसदी घटकर 33 अरब डॉलर हो गया जबकि देश का आयात एक साल पहले की तुलना में 37 प्रतिशत बढ़कर 61.68 अरब डॉलर हो गया है। इससे व्यापार घाटा दोगुने से भी अधिक बढ़कर 28.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। देश के निर्यात में गिरावट ऐसे समय हुई है जब तेल आयात का बिल बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत कच्चे तेल की कुल जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं और सोने का आयात एक-तिहाई तक बढ़ा और इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटे में इजाफा हुआ है। इस कैलेंडर वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पहले ही सात फीसदी तक गिर चुका है और आगे भी इसके दबाव में रहने के आसार हैं। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा चलन जारी रहने की स्थिति में चालू वित्त वर्ष में आगे भी भारत का व्यापार घाटा मार्च 2023 तक 250 अरब डॉलर के स्तर तक जा सकता है।</p>
<p>आयात-निर्यात संतुलन बिगड़ने के पीछे रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध से तेल और जिसोंं के दाम वैश्विक स्तर पर बढ़ना जैसे प्रमुख कारण हैं। इसकी एक अन्य वजह डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर 1 जुलाई से लगाया गया अप्रत्याशित लाभ कर भी है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि इससे मुद्रास्फीति और व्यापक आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी। निःसंदेह इस समय जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में वैश्विक मंदी का परिदृश्य उभर रहा है, तब भारत के विदेश व्यापार घाटे में कमी लाना कोई सरल काम नहीं है। फिर भी भारत को अपना व्यापार घाटा कम करना है। इसके लिए उसे अपने स्तर पर कुछ कदम उठाने होंगे।</p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता आयात विशेषकर पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की जरूरत है। हमें ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। इस दिशा में प्रगति बेशक हो रही है, पर उस गति से नहीं जो कि होनी चाहिए। इसके अलावा निर्यात बढ़ाने के लिए नए बाजार तलाशने होंगे। अगर हम व्यापार घाटे को काबू कर लेते हैं तो अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी, हम अपने सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि कर सकेंगे और रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी पैदा कर पाएंगे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/pm-modi-on-friday-launched-the-country-first-indigenously-built-aircraft-carrier-ins-vikrant/">बढ़ती ताकत</a></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/276605/rising-trade-deficit</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Sep 2022 01:50:17 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>श्रीलंका ने विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए उठाया सख्त कदम, परफ्यूम और शैंपू समेत 300 उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए चॉकलेट, परफ्यूम और शैंपू जैसी 300 उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी है। श्रीलंका वर्ष 1948 में अपनी आजादी के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश में विदेशी मुद्रा संकट के कारण आवश्यक …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/269977/sri-lanka-bans-import-of-300-consumer-goods-including-perfumes-and-shampoos"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/श्रीलंका1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए चॉकलेट, परफ्यूम और शैंपू जैसी 300 उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी है। श्रीलंका वर्ष 1948 में अपनी आजादी के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश में विदेशी मुद्रा संकट के कारण आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है।</p>
<p>श्रीलंका के वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक विशेष अधिसूचना में चॉकलेट, परफ्यूम, मेकअप और शैंपू समेत कुल 300 उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि आयात और निर्यात नियंत्रण नियमों के तहत खाद्य से लेकर मशीनरी उपभोक्ता वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला के आयात पर प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/floods-in-pakistan-pakistan-seeks-global-aid-to-deal-with-undeclared-emergency/">floods in pakistan: पाकिस्तान ने अघोषित आपातकाल से निपटने के लिए मांगी वैश्विक सहायता</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Aug 2022 13:52:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टेस्ला के भारत में ईवी विनिर्माण से कोई समस्या नहीं, पर चीन से आयात न करें- नितिन गडकरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिकी कंपनी टेस्ला अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का भारत में विनिर्माण करना चाहती है, इसमें कोई समस्या नहीं है लेकिन उसे चीन से कार आयात नहीं करना चाहिए। ‘रायसीना डायलॉग’ कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि भारत बड़ा बाजार है और सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/207833/no-problem-with-tesla-manufacturing-evs-in-india-but-dont-import-from-china-nitin-gadkari"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/capture-747.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिकी कंपनी टेस्ला अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का भारत में विनिर्माण करना चाहती है, इसमें कोई समस्या नहीं है लेकिन उसे चीन से कार आयात नहीं करना चाहिए। ‘रायसीना डायलॉग’ कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि भारत बड़ा बाजार है और सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये काफी संभावनाएं हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अगर एलन मस्क (टेस्ला के सीईओ) भारत में विनिर्माण को तैयार हैं, कोई समस्या नहीं है…भारत आइये और विनिर्माण शुरू कीजिए। भारत बड़ा बाजार है, वे भारत से निर्यात कर सकते हैं।’’ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि उनका मस्क से भारत आने और विनिर्माण करने का आग्रह है।</p>
<p>गडकरी ने कहा, ‘‘लेकिन अगर वह विनिर्माण चीन में करना चाहते हैं और वाहन भारत में बेचना चाहते हैं, यह भारत के लिये अच्छा प्रस्ताव नहीं हो सकता है।’’ भारी उद्योग मंत्रालय ने भी पिछले साल कहा था कि टेस्ला पहले भारत में अपने प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण शुरू करे, उसके बाद ही कर रियायतों पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p><strong>येभी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/power-failure-in-many-areas-of-mumbai-and-adjoining-suburbs-efforts-are-on-to-restore-services/">मुंबई और आसपास के उपनगरों के कई इलाकों में बिजली गुल, सेवाएं बहाल करने की कोशिश जारी</a></p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 16:07:08 +0530</pubDate>
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                <title>ऑक्सीजन को लेकर मचा कोहराम, बोली सरकार- संबंधित उपकरणों के आयात पर नहीं लगेगा मूल सीमा शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। देश में कोविड-19 के लगातार बढ़ते संक्रमण के मामलों के साथ तेज होती ऑक्सीजन की मांग के मद्देनजर केंद्र सरकार ने शनिवार को इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन और ऑक्सीजन संबंधी उपकरणों के आयात से मूल सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर हटाने का निर्णय किया। इसके साथ ही कोविड-19 टीकों के आयात …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/79405/there-was-an-outcry-over-oxygen-the-government-bid-basic-customs-duty-will-not-be-levied-on-the-import-of-related-equipment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-04/oxygen-5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> देश में कोविड-19 के लगातार बढ़ते संक्रमण के मामलों के साथ तेज होती ऑक्सीजन की मांग के मद्देनजर केंद्र सरकार ने शनिवार को इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन और ऑक्सीजन संबंधी उपकरणों के आयात से मूल सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर हटाने का निर्णय किया। इसके साथ ही कोविड-19 टीकों के आयात पर लगने वाले मूल सीमा शुल्क को भी तत्काल प्रभाव से अगले तीन महीनों तक हटाने का निर्णय किया गया।</p>
<p>वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय किए गए। प्रधानमंत्री ने ऑक्सीजन और ऑक्सीजन संबंधी उपकरणों की आपूर्ति बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बयान में कहा गया कि इससे ऑक्सीजन और ऑक्सीजन संबंधी उपकरणों की उपलब्धता बढ़ेगी और इसके मूल्य किफायती होंगे।</p>
<p>मोदी ने इस दौरान राजस्व विभाग को इन उपकरणों के सीमा निकासी की प्रक्रिया को निर्बाध सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। मोदी ने जोर दिया कि घर या अस्पतालों में मरीजों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चिकित्सीय ऑक्सीजन और संबंधित उपकरणों को जुटाने का तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने इस संदर्भ में सभी मंत्रालयों और विभागों को मिलकर करने को कहा।</p>
<p>बैठक के दौरान प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया कि हाल ही में रेमडेसिवीर पर सीमा शुल्क हटा दिया गया है। साथ ही उन्हें बताया गया कि मरीजों की आवश्यकता को देखते हुए ऑक्सीजन और ऑक्सीजन संबंधी उपकरणों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लानी होगी।</p>
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                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Apr 2021 17:40:09 +0530</pubDate>
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