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                <title>Sgpgi - Amrit Vichar</title>
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                <description>Sgpgi RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीजीआई के डाक्टरों ने श्वास नली में फंसी मूंगफली को निकाल कर मासूम को दिया नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर-स्पेशियलिटी विभाग के चिकित्सकों ने जौनपुर जिले के 15 माह के एक बच्चे की श्वास नली में फंसी पुरानी फॉरेन बॉडी (मूंगफली) को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। बच्चा करीब 20 दिनों से तेज खांसी, बार-बार बुखार और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित था। </p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान के चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का विभिन्न स्थानों पर सांस संबंधी संक्रमण समझकर दवाइयों से उपचार किया जा रहा था, लेकिन श्वांस नली में फंसी बाहरी वस्तु का समय पर पता नहीं चल पाने से उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582438/doctors-at-pgi-gave-a-new-lease-on-life-to-an-innocent-child-by-removing-a-peanut-lodged-in-the-windpipe"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/pgi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर-स्पेशियलिटी विभाग के चिकित्सकों ने जौनपुर जिले के 15 माह के एक बच्चे की श्वास नली में फंसी पुरानी फॉरेन बॉडी (मूंगफली) को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। बच्चा करीब 20 दिनों से तेज खांसी, बार-बार बुखार और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित था। </p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान के चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का विभिन्न स्थानों पर सांस संबंधी संक्रमण समझकर दवाइयों से उपचार किया जा रहा था, लेकिन श्वांस नली में फंसी बाहरी वस्तु का समय पर पता नहीं चल पाने से उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। बाद में बच्चे को एसजीपीजीआईएमएस रेफर किया गया, जहां विस्तृत जांच और इमेजिंग के बाद बाईं मुख्य ब्रोंकस में फॉरेन बॉडी फंसे होने की पुष्टि हुई। </p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन ब्रोंकोस्कोपी की योजना बनाई। पीडियाट्रिक सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने सामान्य एनेस्थीसिया के तहत ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया कर बच्चे की बाईं मुख्य श्वांस नली से मूंगफली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। प्रक्रिया के बाद बच्चे की हालत में तेजी से सुधार देखा गया। उसकी लगातार बनी खांसी और सांस लेने में कठिनाई में उल्लेखनीय राहत मिली। </p>
<p style="text-align:justify;">यह जटिल प्रक्रिया पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर बसंत कुमार, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर अजमल खान तथा एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर संजय कुमार के मार्गदर्शन में रेजिडेंट चिकित्सकों और ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की संयुक्त टीम द्वारा संपन्न की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्री-स्कूल आयु के बच्चों में श्वांस नली और भोजन नली में बाहरी वस्तुएं फंसने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">खेलते या खाते समय मूंगफली, बीज, सिक्के, बटन और खिलौनों के छोटे हिस्से सांस के साथ अंदर चले जाते हैं, जो समय पर पहचान न होने पर निमोनिया, सांस लेने में गंभीर दिक्कत और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं। चिकित्सकों ने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को बिना निगरानी के छोटे खाद्य पदार्थ या वस्तुएं न दें। यदि किसी बच्चे में अचानक खांसी, दम घुटने जैसा अनुभव, घरघराहट या लगातार सांस लेने में परेशानी दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ :  एसजीपीजीआई में भर्ती मरीज का खून से लथपथ शव बरामद, लीवर कैंसर से पीड़ित था  मुश्‍ताक अली</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती एक मरीज का सोमवार तड़के खून से लथपथ शव बरामद किया गया, जिसका गला कटा हुआ था। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित कुमार आनन्‍द ने पत्रकारों को बताया कि मृतक की पहचान बस्ती जिले के निवासी मुश्‍ताक अली (61) के रूप में हुई जो लीवर कैंसर से पीड़ित था।</p>
<p style="text-align:justify;">डीसीपी ने बताया कि सोमवार को पीजीआई थाना क्षेत्र में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती बस्ती जिले के निवासी एक मरीज मुश्‍ताक अली (61) की गला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582421/lucknow--blood-soaked-body-of-a-patient-admitted-to-sgpgi-recovered--mushtaq-ali-was-suffering-from-liver-cancer"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/crime-news3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती एक मरीज का सोमवार तड़के खून से लथपथ शव बरामद किया गया, जिसका गला कटा हुआ था। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित कुमार आनन्‍द ने पत्रकारों को बताया कि मृतक की पहचान बस्ती जिले के निवासी मुश्‍ताक अली (61) के रूप में हुई जो लीवर कैंसर से पीड़ित था।</p>
<p style="text-align:justify;">डीसीपी ने बताया कि सोमवार को पीजीआई थाना क्षेत्र में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती बस्ती जिले के निवासी एक मरीज मुश्‍ताक अली (61) की गला कटने से मौत की सूचना मिली थी। उन्‍होंने कहा कि सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पुलिस पहुंची। आनन्द ने बताया कि पूछताछ में यह पता चला कि करीब चार-साढ़े चार बजे उसके बगल के बेड पर भर्ती मरीज के तीमारदार ने देखा कि मुश्‍ताक के गले से खून निकल रहा है, तत्काल सूचना स्टाफ एवं पुलिस को दी गई। </p>
<p style="text-align:justify;">डीसीपी ने बताया कि उसके बगल में एक ब्‍लेड पड़ा था और वह पिछले एक माह से पीजीआई में भर्ती था। उन्‍होंने कहा कि वह लीवर कैंसर से ग्रसित था और लगभग आठ-नौ माह से उपचाराधीन था। उन्‍होंने यह भी बताया कि यह आर्थिक तंगी में भी था। डीसीपी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं की छानबीन कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> बाद में एक बयान में एसजीपीजीआई ने कहा कि बस्ती के रहने वाले मरीज़ मुश्ताक अली (61) को 21 अप्रैल, 2026 को गैस्ट्रो सर्जरी वार्ड में डॉ. आशीष सिंह की देखरेख में गॉल ब्लैडर के एडवांस्ड एडेनो कार्सिनोमा के फॉलो-अप केस के तौर पर भर्ती किया गया था। 17 मई की रात को उनकी हालत स्थिर थी, वे आराम से थे और सभी स्टाफ से अच्छे से बात कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">बयान के अनुसार "18 मई की सुबह, पास के बेड पर मौजूद एक मरीज के रिश्तेदार ने जानकारी दी कि मरीज़ मुश्ताक अली की तबीयत खराब है, जिसके बाद वार्ड के नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत मरीज़ को देखा। जांच करने पर, मरीज़ की नब्ज और बीपी नहीं मिल रहा था, वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे और उनकी गर्दन के दाईं ओर एक गहरा कटे का निशान था, जिससे उनके सिर, बेड और जमीन पर काफी खून फैला हुआ था। </p>
<p style="text-align:justify;">बयान के अनुसार वार्ड के नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और वार्ड के रेजिडेंट डॉक्टर को सूचना दी गई। वार्ड के रेजिडेंट डॉक्टर भी मरीज़ को होश में लाने की कोशिश में शामिल हो गए। 15 मिनट तक सीपीआर (प्रोटोकॉल के अनुसार) देने के बाद भी मरीज़ को बचाया नहीं जा सका।आगे की जांच के लिए तुरंत पुलिस को सूचित कर दिया गया था।'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:53:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Kidney patients पर SGPGI ने किया अध्ययन, हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों पर बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के नेफ्रोलॉजी विभाग में किए गए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि गुर्दे की बीमारी से पीड़ित करीब 80 प्रतिशत मरीज हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) से ग्रस्त हैं। कई मरीज ऐसे भी पाए गए जो लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के उच्च रक्तचाप से अनजान रहे, और गुर्दा रोग की जांच के दौरान इसका पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन के अनुसार, डेढ़ माह की अवधि में ओपीडी में देखे गए लगभग 6000 रोगियों में से करीब 4800 मरीजों में हाइपरटेंशन पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582248/sgpgi-conducted-a-study-on-kidney-patients--a-major-revelation-on-patients-suffering-from-hypertension"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(19)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के नेफ्रोलॉजी विभाग में किए गए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि गुर्दे की बीमारी से पीड़ित करीब 80 प्रतिशत मरीज हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) से ग्रस्त हैं। कई मरीज ऐसे भी पाए गए जो लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के उच्च रक्तचाप से अनजान रहे, और गुर्दा रोग की जांच के दौरान इसका पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन के अनुसार, डेढ़ माह की अवधि में ओपीडी में देखे गए लगभग 6000 रोगियों में से करीब 4800 मरीजों में हाइपरटेंशन पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप हृदय की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे किडनी रोग, हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसजीपीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद ने कहा कि हाइपरटेंशन को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती अवस्था में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लंबे समय तक रक्तचाप अनियंत्रित रहने पर यह हृदय की धमनियों पर गंभीर असर डालता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582248/sgpgi-conducted-a-study-on-kidney-patients--a-major-revelation-on-patients-suffering-from-hypertension</link>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 11:16:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसपीजीआई में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर विवाद, परिणाम पहले जारी होने पर उठे सवाल, आंदोलन की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नियमित फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया और उसके परिणाम में हो रही देरी पर फैकल्टी फोरम ने संस्थान प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फोरम ने चेतावनी दी है कि यदि 15 जून 2026 तक नियमित भर्ती का परिणाम घोषित नहीं किया गया तो फैकल्टी सदस्य आंदोलन करने को मजबूर होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डॉ. मोहन गुर्जर और सचिव डॉ. विवेक सिंह ने निदेशक डॉ. राधा कृष्ण धीमन को पत्र भेजकर वरिष्ठता (सीनियरिटी) विवाद की आशंका जताई है।पत्र में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582125/controversy-over-the-teacher-recruitment-process-at-spgi--questions-raised-over-the-early-release-of-results--and-a-threat-of-agitation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(5)13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नियमित फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया और उसके परिणाम में हो रही देरी पर फैकल्टी फोरम ने संस्थान प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फोरम ने चेतावनी दी है कि यदि 15 जून 2026 तक नियमित भर्ती का परिणाम घोषित नहीं किया गया तो फैकल्टी सदस्य आंदोलन करने को मजबूर होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डॉ. मोहन गुर्जर और सचिव डॉ. विवेक सिंह ने निदेशक डॉ. राधा कृष्ण धीमन को पत्र भेजकर वरिष्ठता (सीनियरिटी) विवाद की आशंका जताई है।पत्र में कहा गया है कि संस्थान ने 8 अगस्त 2025 को विभिन्न विभागों में करीब 200 नियमित फैकल्टी पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था, लेकिन अब तक इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। दूसरी ओर 29 जनवरी 2026 को जारी बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया का परिणाम 14 मई 2026 को घोषित कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फोरम का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के सामान्य सिद्धांतों के तहत पहले जारी विज्ञापन का परिणाम पहले घोषित होना चाहिए था, लेकिन संस्थान प्रशासन ने बाद में निकली भर्ती प्रक्रिया पहले पूरी कर दी। इससे भविष्य में प्रशासनिक और कानूनी विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">फोरम ने आशंका जताई है कि यदि बैकलॉग भर्ती से चयनित अभ्यर्थी पहले ज्वाइन कर लेते हैं तो वे ज्वाइनिंग तिथि के आधार पर वरिष्ठता का दावा कर सकते हैं। इससे नियमित भर्ती से चयनित शिक्षकों की सीनियरिटी प्रभावित हो सकती है। इसका असर भविष्य में पदोन्नति, विभागीय जिम्मेदारियों, प्रशासनिक पदों और वेतन निर्धारण तक पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फैकल्टी फोरम ने संस्थान प्रशासन से मांग की है कि वरिष्ठता निर्धारण को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया जाए। फोरम का कहना है कि सीनियरिटी का आधार भर्ती विज्ञापन की तिथि और रिक्ति वर्ष होना चाहिए, न कि ज्वाइनिंग की तारीख।</p>
<p style="text-align:justify;">फोरम अध्यक्ष डॉ. मोहन गुर्जर ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है। लंबे समय तक परिणाम लंबित रहने से चयनित अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और संस्थान की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><br />यह भी पढ़ें: </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582121/7-companies-received-uidai-s-ovse-certificate-for-aadhaar-verification--making-the-process-easier-and-safer">आधार वेरिफिकेशन में 7 कंपनियों को मिला UIDAI का OVSE प्रमाणपत्र, अब आसान और सुरक्षित होगी प्रक्रिया</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582125/controversy-over-the-teacher-recruitment-process-at-spgi--questions-raised-over-the-early-release-of-results--and-a-threat-of-agitation</link>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:13:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> SGPGI के डॉक्टरों का कमाल : 'हाफ-मैच' से बच्चे को मिली पूरी जिंदगी, जेनेटिक बीमारी को दी मात!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों ने कमाल कर दिया। यूपी में पहली बार हुआ हैप्लोआइडेंटिकल हेमेटोपोएटिक सेल प्रत्यारोपण सफल रहा है, जिसके चलते 8 साल के बच्चे को नया जीवन मिला है। यह प्रत्यारोपण बेहद ही जटिल था, लेकिन एसजीपीजीआई के दिग्गज डॉक्टरों की टीम ने रिस्क लिया और बच्चे ने जेनेटिक बीमारी को मात दे दी।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%86%E0%A4%88-%E0%A4%A1%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0.jpeg" alt="पीजीआई डॉक्टर" />
डॉ. कौशिक मंडल और डॉ. सायन सिन्हा

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, महज चार वर्ष की उम्र में एक बच्चे को बार-बार मुंह में छाले और गंभीर खुजलीदार घाव होने लगे। बीमारी कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580328/-amazing-feat-of-sgpgi-doctors---half-match--gives-child-a-full-life--defeats-genetic-disease"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/पीजीआई-डॉक्टर.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों ने कमाल कर दिया। यूपी में पहली बार हुआ हैप्लोआइडेंटिकल हेमेटोपोएटिक सेल प्रत्यारोपण सफल रहा है, जिसके चलते 8 साल के बच्चे को नया जीवन मिला है। यह प्रत्यारोपण बेहद ही जटिल था, लेकिन एसजीपीजीआई के दिग्गज डॉक्टरों की टीम ने रिस्क लिया और बच्चे ने जेनेटिक बीमारी को मात दे दी।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%86%E0%A4%88-%E0%A4%A1%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0.jpeg" alt="पीजीआई डॉक्टर"></img>
डॉ. कौशिक मंडल और डॉ. सायन सिन्हा

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, महज चार वर्ष की उम्र में एक बच्चे को बार-बार मुंह में छाले और गंभीर खुजलीदार घाव होने लगे। बीमारी कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही थी, धीरे-धीरे बच्चे के लिवर व तिल्ली का आकार भी बढ़ गया। इतना ही नहीं उसके पूरे शरीर में लिम्फनोड्स हो गए। साथ ही बच्चा खून की कमी से भी जूझ रहा था। बार-बार बीमार होने पर बच्चे को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता था, इसी बीच चार साल बीत गये, आठ साल की उम्र में लंबे इलाज के बाद बच्चा एसजीपीजीआई पहुंचा। जहां पर जांच के दौरान बच्चे को "ऑटोइम्यून लिम्फोप्रोलिफेरेटिव सिंड्रोम" (एएलपीएस) नामक एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी होने का पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जोखिम भरा था प्रत्यारोपण</strong><br />मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के एचओडी डॉ. कौशिक मंडल के मुताबिक बच्चा एएलपीएस (ALPS) नामक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से ग्रसित था। जिससे बच्चे के जीवन पर खतरा बढ़ता ही जा रहा था। ऐसे में बच्चे की जांच कर हैप्लोआइडेंटिकल हेमेटोपोएटिक सेल ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि यह भी एक प्रकार का स्टेम सेल प्रत्यारोपण ही है, जिसमें मरीज के शरीर में ऐसे डोनर (दाता) से स्टेम सेल लेकर प्रत्यारोपित की किया जाता हैं, जो आनुवंशिक रूप से केवल 50% ही मेल खाती हैं। यही वजह है कि इसे इसे हाफ-मैच प्रत्यारोपण भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रत्यारोपण में बच्चे पिता ही डोनर रहे। उन्होंने बताया इस प्रत्यारोपण में बच्चे का शरीर यदि पिता के स्टेम सेल को स्वीकार नहीं करता तो हल्के संक्रमण से भी उसकी जान को खतरा हो सकता था। उन्होंने बताया कि बच्चे के इलाज में 10 से 15 लाख का खर्च आया है। यह खर्च स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से उठाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>खतरनाक होती है यह बीमारी</strong><br />डॉ.कौशिक ने बताया कि यह बीमारी "FAS" नाम के जीन में म्यूटेशन के कारण होती है। इस विकार में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं से ही लड़ने लगती है, जिसे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है। जिसके कारण विभिन्न प्रकार के रक्त कोशिकाओं में कमी आ जाती है, यही वजह है कि इससे मरीज को एनीमिया होता है और न्यूट्रोफिल में कमी आती है, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। संक्रमण बढ़ने पर प्लेटलेट्स की कमी होती है, जो रक्तस्राव का कारण बनता है। इस बीमारी में मरीजों को त्वचा पर गंभीर चकत्ते, मुंह में छाले और विभिन्न अंगों में सूजन हो जाती है। समय के साथ, उनमें से अधिकांश को लिम्फोमा जैसे कैंसर हो जाते हैं और गंभीर मामलों में उनकी मृत्यु भी हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. धीमन ने टीम को दी बधाई</strong><br />डॉ. राजेश कश्यप के नेतृत्व में ऊर्जावान व अथक परिश्रम करने वाली टीम में डॉ. सायन सिन्हा रॉय, डॉ. चंद्रचूड़ पोटदार, डॉ. मनोज कुमार सिंह और डॉ. खलीकुर रहमान शामिल थे। संस्थान के निदेशक डॉ. आर. के. धीमन ने पूरी टीम को बधाई दी है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और संभवतः पूरे देश में इस प्रकार के आनुवंशिक विकार के लिए यह पहला हैप्लोआइडेंटिकल, कम लागत वाला प्रत्यारोपण था। ‘यूरोपियन सोसाइटी फॉर ब्लड एंड मैरो ट्रांसप्लांटेशन’ ने आगामी सम्मेलन में इस शोध को सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति के रूप में चुना है और इसे डॉ. सायन सिन्हा रॉय द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:18:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Liver Day: जंक फूड और बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों को बना रहा फैटी लिवर का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार :</strong> बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों का असर अब बच्चों की सेहत पर गंभीर रूप से देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जंक फूड का अधिक सेवन और बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों में फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन रहा है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ओपीडी में आने वाले हर 10 में से तीन बच्चे फैटी लिवर के शिकार है। यह जानकारी विश्व लिवर दिवस के मौके पर केजीएमयू में गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने शनिवार</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579251/world-liver-day--junk-food-and-increasing-screen-time-are-making-children-victims-of-fatty-liver"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(29)8.png" alt=""></a><br /><p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार :</strong> बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों का असर अब बच्चों की सेहत पर गंभीर रूप से देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जंक फूड का अधिक सेवन और बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों में फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन रहा है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ओपीडी में आने वाले हर 10 में से तीन बच्चे फैटी लिवर के शिकार है। यह जानकारी विश्व लिवर दिवस के मौके पर केजीएमयू में गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने शनिवार को साझा की।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">डॉ. सुमित का कहना कि पहले यह बीमारी मुख्य रूप से वयस्कों में पाई जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अत्यधिक तली-भुनी चीजें, पैकेज्ड फूड, मीठे पेय पदार्थ और फास्ट फूड का लगातार सेवन बच्चों के शरीर में अतिरिक्त वसा जमा कर रहा है, जिससे लिवर पर असर पड़ता है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">इसके साथ ही मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर लंबे समय तक बिताया जाने वाला समय बच्चों की शारीरिक गतिविधियों को कम कर रहा है। खेलकूद और व्यायाम की कमी के कारण शरीर में फैट बढ़ता है, जो आगे चलकर फैटी लिवर की समस्या को जन्म देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खान-पान और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर बच्चों को इस बढ़ती समस्या से काफी हद तक बचाया जा सकता है।</span></p>
<h3><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">फैटी लिवर के प्रमुख लक्षण</span></strong></h3>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-थकान और कमजोरी</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-भूख में कमी</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-तेजी से वजन बढ़ना</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-कभी-कभी उल्टी या मतली</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(29)8.png" alt="MUSKAN DIXIT (29)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h3><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">बचाव के उपाय</span></strong></h3>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-रोजाना कम से कम एक घंटा खेलकूद जरूरी</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-जंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-आहार में फल, सब्जियां और प्रोटीन शामिल करें</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं</span></p>
<h3><strong>संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली ही लिवर को रखेगी स्वस्थ</strong></h3>
<p>संजय गांधी स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान (एसजीपीजीआई) के हेपेटोलॉजी विभाग की ओर से विश्व लिवर दिवस के अवसर पर शनिवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में फैटी लिवर और मोटापे से बचाव के उपायों पर जानकारी दी गई।</p>
<p>हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अमित गोयल ने कहा कि बिगड़ती जीवनशैली के कारण बच्चों और बड़ों दोनों में फैटी लिवर और मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते सावधानी न बरती गई तो यह समस्या गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।</p>
<p>कार्यक्रम में आहार विशेषज्ञों ने फैटी लिवर के मरीजों के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर, हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन युक्त भोजन को दैनिक आहार में शामिल करना बेहद जरूरी है।</p>
<p><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">विशेषज्ञों ने कहा कि नियमित व्यायाम, सीमित स्क्रीन टाइम और संतुलित खानपान अपनाकर फैटी लिवर और मोटापे जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।</span></span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img width="227" height="129" alt="9k="></img></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 10:32:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ : SGPGI फैकल्टी फोरम के चुनाव परिणाम घोषित, अध्यक्ष बने डॉ. मोहन गुर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>एसजीपीजीआई में 10 और 11 अप्रैल को आयोजित फैकल्टी फोरम  चुनावों के परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिए गए हैं। जिसमें क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहन गुर्जर अध्यक्ष चुने गये हैं। वहीं रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रो. विवेक सिंह को सचिव निर्वाचित किया गया है। जबकि बाल शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ.विजय दत्त उपाध्याय को कोषाध्यक्ष चुना गया है। खास बात यह रही कि डॉ. विवेक सिंह और डॉ. विजय निर्विरोध चुने गये हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इन चुनावों में संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही, कुल 141 वोट डाले गए, जिनमें से एक वोट अमान्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578309/dr-mohan-gurjar-became-the-president-of-lucknow-sgpgi-faculty"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/sgpgi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>एसजीपीजीआई में 10 और 11 अप्रैल को आयोजित फैकल्टी फोरम  चुनावों के परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिए गए हैं। जिसमें क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहन गुर्जर अध्यक्ष चुने गये हैं। वहीं रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रो. विवेक सिंह को सचिव निर्वाचित किया गया है। जबकि बाल शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ.विजय दत्त उपाध्याय को कोषाध्यक्ष चुना गया है। खास बात यह रही कि डॉ. विवेक सिंह और डॉ. विजय निर्विरोध चुने गये हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इन चुनावों में संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही, कुल 141 वोट डाले गए, जिनमें से एक वोट अमान्य घोषित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस चुनाव में सदस्य के तौर पर डॉ. प्रभाकर मिश्रा, प्रोफेसर, बायोस्टैटिस्टिक्स और हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स विभाग, डॉ. रुद्राशीष हलदर, प्रोफेसर, एनेस्थेसियोलॉजी विभाग,डॉ. पुनीता लाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, रेडियोथेरेपी विभाग, डॉ. नवीन गर्ग, प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी विभाग, डॉ. रचना अग्रवाल, अतिरिक्त प्रोफेसर, नेत्र विज्ञान विभाग और डॉ. अनंत मेहरोत्रा, प्रोफेसर, न्यूरोसर्जरी विभाग को चुना गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव अधिकारी, प्रोफेसर उत्तम सिंह ने औपचारिक रूप से परिणाम की घोषणा की। निदेशक प्रोफेसर आर के धीमन ने नव निर्वाचित टीम को बधाई दी और आशा व्यक्त की कि टीम संस्थान के बहुमुखी विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578309/dr-mohan-gurjar-became-the-president-of-lucknow-sgpgi-faculty</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 18:32:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पार्किंसंस के खिलाफ अनोखा वॉकथॉन ! बांसुरी की मधुर धुन से बीमारी को चैलेंज, डॉक्टर बोले- समय पर पहचान जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>पार्किंसंस बीमारी को चुनौती देने कई दिग्गज डॉक्टर रविवार को लोहिया पार्क पहुंचे और समाज को इस जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थित के प्रति वॉकथॉन कर जागरूक किया। इस दौरान एक भावनात्मक और प्रेरक क्षण भी आया, जब इस बीमारी को चैलेंज करते हुये मरीज कन्हैया लाल ने बांसुरी बजा कर सुरीली धुन छेड़ी। उनकी इस मनमोहक प्रस्तुति ने जनसमूह को यह संदेश दिया कि यदि उपचार सही है तो सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ पार्किंसंस से लड़ा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, विश्व पार्किंसंस दिवस हर साल 11 अप्रैल को को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577623/unique-walkathon-against-parkinsons-challenge-the-disease-with-the-melodious"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/लोहिया-पार्क.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>पार्किंसंस बीमारी को चुनौती देने कई दिग्गज डॉक्टर रविवार को लोहिया पार्क पहुंचे और समाज को इस जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थित के प्रति वॉकथॉन कर जागरूक किया। इस दौरान एक भावनात्मक और प्रेरक क्षण भी आया, जब इस बीमारी को चैलेंज करते हुये मरीज कन्हैया लाल ने बांसुरी बजा कर सुरीली धुन छेड़ी। उनकी इस मनमोहक प्रस्तुति ने जनसमूह को यह संदेश दिया कि यदि उपचार सही है तो सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ पार्किंसंस से लड़ा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, विश्व पार्किंसंस दिवस हर साल 11 अप्रैल को को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन न्यूरोलॉजिकल बीमारी  पार्किंसंस के बारे में आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। यही वजह है कि रविवार को 'पार्किंसंस डिजीज एंड मूवमेंट डिसऑर्डर सोसाइटी' (PDMDS) ने जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया था। जिसमें कई दिग्गज डॉक्टर शामिल हुये। लोहिया पार्क में आयोजित इस वॉकथॉन के बाद डॉक्टरों ने इस बीमारी को लेकर  जानकारी भी साझा की।</p>
<p style="text-align:justify;">SGPGI की प्रो. रुचिका टंडन ने बताया कि मौजूदा समय में दवाओं के अलावा 'न्यूरोमॉड्यूलेशन' और 'डीप ब्रेन स्टिमुलेशन'  जैसी तकनीकें मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। उन्होंने दैनिक जीवन में विशेष व्यायामों की अनिवार्य बताया है। वहीं डॉ. अमृता मोर ने बीमारी की जानकारी देते हुये लक्षणों के बारे में बताया जिससे बीमारी की सटीक पहचान समय रहते हो सके। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में अलग-अलग मरीजों को अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने मोटर लक्षणों जैसे कंपन, अकड़न और गैर-मोटर लक्षणों नींद और याददाश्त संबंधी समस्याएं के बीच अंतर स्पष्ट किया। इस अवसर पर कानपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप गुप्ता और लखनऊ के डॉ. ए. के. ठक्कर उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या होती है पार्किंसंस बीमारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकतर यह बीमारी 60 वर्ष से ऊपर उम्र के लोगों को होती है, लेकिन ऐसा नहीं कि इस बीमारी की चपेट कम उम्र के लोग नहीं आ सकते है, कई मामले कम उम्र के लोगों में भी देखे गये हैं। पार्किंसंस तंत्रिका तंत्र की बीमारी है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। इस बीमारी में उंगलियों या हाथों में थरथराहट, कुर्सी से उठने और चलने की प्रक्रिया का धीमा हो जाना,मांसपेशियों में अकड़न जैसी दिक्कते पीड़ित मरीज में दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/577610/a-daughter-is-not-a-burden----a-retired-judge-in-meerut-welcomed-her-daughter-with-drums-and-trumpets-after-her-divorce-from-her-husband#gsc.tab=0">बेटी है बोझ नहीं... मेरठ में पति से तलाक के बाद रिटायर्ड जज ने बेटी का ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:58:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SGPGI में होने जा रहा भारत का पहला कॉन्क्लेव :  टेली-रोबोटिक सर्जरी के लिए नई उम्मीद बना रोबोकॉप्स 2026</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>उत्तर प्रदेश के टॉप चिकित्सा संस्थान एसजीपीजीआई में एक खास कॉन्क्लेव होने जा रहा है। जिसका आगाज कल यानी 3 अप्रैल से होगा। इस कॉन्क्लेव का नाम रोबोकॉप्स 2026 रखा गया है। जिसकी मेजबानी का जिम्मा संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जरी सुपर स्पेशलिटी विभाग के ऊपर है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा कॉन्क्लेव पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के भविष्य की एक झलक दिखायेगा। इतना ही नहीं आने वाले समय में टेली सर्जरी की नई उम्मीद भी पैदा करेगा।  रोबोकॉप्स 2026 में देश दुनिया के कई दिग्गज पीडियाट्रिक सर्जन शामिल होंगे। जो 200 से अधिक डॉक्टर्स को पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के गुर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577315/india-s-first-conclave-to-be-held-at-sgpgi--robocops-2026-opens-new-hope-for-tele-robotic-surgery"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-02-at-9.16.52-pm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>उत्तर प्रदेश के टॉप चिकित्सा संस्थान एसजीपीजीआई में एक खास कॉन्क्लेव होने जा रहा है। जिसका आगाज कल यानी 3 अप्रैल से होगा। इस कॉन्क्लेव का नाम रोबोकॉप्स 2026 रखा गया है। जिसकी मेजबानी का जिम्मा संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जरी सुपर स्पेशलिटी विभाग के ऊपर है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा कॉन्क्लेव पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के भविष्य की एक झलक दिखायेगा। इतना ही नहीं आने वाले समय में टेली सर्जरी की नई उम्मीद भी पैदा करेगा।  रोबोकॉप्स 2026 में देश दुनिया के कई दिग्गज पीडियाट्रिक सर्जन शामिल होंगे। जो 200 से अधिक डॉक्टर्स को पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के गुर सिखायेंगे। यह जानकारी संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जरी सुपर स्पेशलिटी विभाग के एचओडी प्रो.बसंत कुमार ने गुरुवार को दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि एसजीपीजीआईएमएस रोबोकॉप्स 2026 का आयोजन कर रहा है।  3 अप्रैल से शुरू होने वाले पीडियाट्रिक सर्जन का तीन दिवसीय प्रमुख रोबोटिक सर्जरी सम्मेलन 5 अप्रैल तक चलेगा। " रोबोटिक नवाचार के माध्यम से पीडियाट्रिक सर्जरी के भविष्य को आगे बढ़ाना" विषय पर केंद्रित इस वैज्ञानिक सम्मेलन का उद्देश्य सबसे कम उम्र के और सबसे संवेदनशील मरीजों यानी की बच्चों के उपचार में रोबोटिक प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का पता लगाना है। इस कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन पहले दिन एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर आर के धीमन द्वारा किया जाएगा, जो समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सम्मेलन शुक्रवार को एसजीपीजीआई स्थित लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स के डीके छाबड़ा सभागार में एक व्यापक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम के साथ शुरू होगा। पहला दिन रोबोटिक्स के तकनीकी और आर्थिक मूलभूत सिद्धांतों को समर्पित है, जिसमें रोबोटिक प्लेटफॉर्म, हार्डवेयर और डॉकिंग रणनीतियों पर विशेषज्ञ सत्र शामिल हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या है टेली रोबोटिक सर्जरी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बसंत कुमार के मुताबिक टेली-रोबोटिक सर्जरी एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके जरिये एक सर्जन मरीज से सैकड़ों या हज़ारों किलोमीटर दूर बैठकर रोबोटिक सिस्टम के जरिए सफल ऑपरेशन कर सकता है। यह तकनीक ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी को दूर कर सकती है, जिससे दूरदराज के मरीजों को भी बेहतरीन इलाज मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 21:20:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SGPGI में केवल आपात कार्यों के लिए ही दिए जाएंगे वाहन, ईंधन संकट से जूझ रहे वाहन प्रकोष्ठ ने जारी की सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span>अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में ईंधन आपूर्ति बाधित होने के कारण वाहन प्रकोष्ठ के अधीन वाहनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए संस्थान प्रशासन ने वाहनों के उपयोग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब वाहन केवल अत्यंत आवश्यक और आपातकालीन कार्यों के लिए ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इस संबंध में वाहन प्रकोष्ठ प्रभारी योगेंद्र कुमार की ओर से पत्र जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">जारी निर्देशों में सभी विभागाध्यक्षों, फैकल्टी और अधिकारियों से अपील की गई है कि वे वाहन की मांग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576700/vehicles-will-be-provided-at-sgpgi-only-for-emergency-purposes--the-vehicle-cell--which-is-grappling-with-the-fuel-crisis--has-issued-a-notice"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(6)11.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span>अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में ईंधन आपूर्ति बाधित होने के कारण वाहन प्रकोष्ठ के अधीन वाहनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए संस्थान प्रशासन ने वाहनों के उपयोग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब वाहन केवल अत्यंत आवश्यक और आपातकालीन कार्यों के लिए ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इस संबंध में वाहन प्रकोष्ठ प्रभारी योगेंद्र कुमार की ओर से पत्र जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">जारी निर्देशों में सभी विभागाध्यक्षों, फैकल्टी और अधिकारियों से अपील की गई है कि वे वाहन की मांग सोच-समझकर और केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही करें। प्रत्येक वाहन मांग के साथ कार्य का स्पष्ट औचित्य, उसकी तात्कालिकता और अन्य आवश्यक विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, मांग को विभागाध्यक्ष या नामित नोडल अधिकारी के माध्यम से ही अग्रसारित करना होगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;">निर्देशों में यह भी कहा गया है कि नियमित, सामान्य या गैर-आपातकालीन कार्यों के लिए वाहन मांगने से यथासंभव बचा जाए। मौजूदा हालात में सीमित ईंधन उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वाहनों का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर केवल संस्थान के अति आवश्यक कार्यों के लिए ही किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ईंधन संकट के चलते किसी कार्य में देरी होती है या ड्यूटी पूरी नहीं हो पाती है, तो इसके लिए वाहन प्रकोष्ठ जिम्मेदार नहीं होगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576700/vehicles-will-be-provided-at-sgpgi-only-for-emergency-purposes--the-vehicle-cell--which-is-grappling-with-the-fuel-crisis--has-issued-a-notice</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 09:37:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SGPGI :  पीडियाट्रिक सेंटर के लिए 2300 से अधिक पदों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में बन रहे एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के संचालन के लिए शासन ने बड़े पैमाने पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के पदों को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को आयोजित संस्थान की 104वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एसपी गोयल ने की। इस दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. आरके धीमान, डीन डॉ. शालीन कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेई के अनुसार, सेंटर के संचालन के लिए 131 डॉक्टर, 483 रेजिडेंट, 1540 नर्स, टेक्नीशियन समेत अन्य स्टाफ के पदों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576678/span-classt-redsgpgi-span-more-than-2300-posts-approved-for-pediatric"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/एसजीपीजीआई-(4).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में बन रहे एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के संचालन के लिए शासन ने बड़े पैमाने पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के पदों को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को आयोजित संस्थान की 104वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एसपी गोयल ने की। इस दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. आरके धीमान, डीन डॉ. शालीन कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेई के अनुसार, सेंटर के संचालन के लिए 131 डॉक्टर, 483 रेजिडेंट, 1540 नर्स, टेक्नीशियन समेत अन्य स्टाफ के पदों को स्वीकृति दी गई है, जबकि 160 पद आउटसोर्सिंग के तहत भरे जाएंगे। इन पदों पर भर्ती के लिए जल्द ही विज्ञापन जारी कर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">573 बेड की क्षमता वाले इस अत्याधुनिक पीडियाट्रिक सेंटर का पहला चरण अक्टूबर 2026 में शुरू होगा। पहले चरण में करीब 15 विभागों के 293 बेड पर बच्चों को भर्ती कर इलाज शुरू किया जाएगा। इनमें जनरल पीडियाट्रिक्स, पल्मोनरी, न्यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, मेडिकल जेनेटिक्स, डेवलपमेंटल पीडियाट्रिक्स, सोशल पीडियाट्रिक्स यूनिट, डे-केयर, इमरजेंसी, नियोनेटोलॉजी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, सर्जरी, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और रेडियोलॉजी जैसी प्रमुख इकाइयां शामिल होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सेंटर पूरी तरह विकसित होने पर 24 विभागों के साथ एक ही छत के नीचे बच्चों के इलाज की समग्र सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसे उत्तर भारत का सबसे बड़ा पीडियाट्रिक केंद्र बताया जा रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश समेत आसपास के राज्यों के 10 करोड़ से अधिक बच्चों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/576627/40-percent-of-lung-cancer-patients-have-never-smoked--the-government-should-establish-a-national-screening-program#gsc.tab=0">फेफड़ों के कैंसर के 40 फीसदी मरीजों ने नहीं किया धूम्रपान, राष्ट्रीय जांच कार्यक्रम बनाए सरकार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576678/span-classt-redsgpgi-span-more-than-2300-posts-approved-for-pediatric</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 21:03:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>UP : केजीएमयू और पीजीआई में आज बंद रहेगी ओपीडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार </strong>: रामनवमी पर दो दिन सार्वजनिक अवकाश होने के कारण लखनऊ के चिकित्सा संस्थान और सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाओं में बदलाव किया गया है। इमरजेंसी और जरूरी सेवाएं संचालित रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में 26 मार्च गुरुवार को केवल इमरजेंसी सेवाएं ही संचालित होंगी। प्रवक्ता कुसुम यादव ने बताया कि 27 मार्च को नए मरीजों का पंजीकरण नहीं होगा। जिन मरीजों का ओपीडी में पहले से अपॉइंटमेंट है उन्हें देखा जाएगा। पहले से निर्धारित जांच और ऑपरेशन भी होंगे। 24 घंटे लैब और आकस्मिक सेवाएं जारी रहेंगी, किंतु ओपीडी सैंपल कलेक्शन, प्रशासनिक भवन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576488/span-classt-redup-span-opd-will-remain-closed-in-kgmu-and"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/केजीएमयू,-एसजीपीजीआई,-लोहिया-संस्थान.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार </strong>: रामनवमी पर दो दिन सार्वजनिक अवकाश होने के कारण लखनऊ के चिकित्सा संस्थान और सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाओं में बदलाव किया गया है। इमरजेंसी और जरूरी सेवाएं संचालित रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में 26 मार्च गुरुवार को केवल इमरजेंसी सेवाएं ही संचालित होंगी। प्रवक्ता कुसुम यादव ने बताया कि 27 मार्च को नए मरीजों का पंजीकरण नहीं होगा। जिन मरीजों का ओपीडी में पहले से अपॉइंटमेंट है उन्हें देखा जाएगा। पहले से निर्धारित जांच और ऑपरेशन भी होंगे। 24 घंटे लैब और आकस्मिक सेवाएं जारी रहेंगी, किंतु ओपीडी सैंपल कलेक्शन, प्रशासनिक भवन और शैक्षणिक ब्लॉक बंद रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि गुरुवार को ओपीडी बंद रहेगी और इमरजेंसी सेवाएं चलती रहेंगी। शुक्रवार से ओपीडी सामान्य रूप से संचालित होगी। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि गुरुवार और शुक्रवार अवकाश रहेगा। दोनों दिन ओपीडी में केवल पुराने मरीज ही देखते जाएंगे, नए पर्चे नहीं बनेंगे। पहले से तय ऑपरेशन और जांचें होंगी। गंभीर मरीजों का इलाज इमरजेंसी में किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरकारी अस्पतालों में दोपहर 12 बजे तक देखे जाएंगे मरीज</strong></p>
<p style="text-align:justify;">राजधानी के सिविल, बलरामपुर और लोकबंधु अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सीमित समय के लिए संचालित होगी और दोपहर 12 बजे तक ही मरीजों को देखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : </strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/576482/strict-action-awaits-if-negligence-is-shown-in-cow-protection-efforts--find-out-why-minister-dharampal-issued-this-warning-to-officials#gsc.tab=0"><strong>गौ-संरक्षण कार्यों में बरती लापरवाही, तो होगी सख्त कार्रवाई, जानें अफसरों से ऐसा क्यों बोले मंत्री धर्मपा</strong>ल</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 21:58:21 +0530</pubDate>
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