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                <title>Rohilkhand University - Amrit Vichar</title>
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                <description>Rohilkhand University RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Uttrakhand: गैस बुकिंग की शिकायत दर्ज कराने के नाम पर पूर्व कुलपति से साइबर ठगी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> रसोई गैस व पेट्रोल की किल्लत को अब साइबर अपराधी भी ठगी का माध्यम बनाकर अवसर खोजने लगे है।ठगों ने मल्लीताल निवासी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति बीना साह को गैस बुकिंग के नाम पर 1.91 लाख रुपये की चपत लगा दी।</p>
<p>महिला को ठगी का अहसास तब हुआ जब उसके फोन पर खाते से रकम कटने का संदेश प्राप्त हुआ। शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। यह पहला मामला नहीं जब महिला साइबर ठगों का शिकार हुई हो। बीते वर्ष अगस्त में महिला को डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 1.47</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577087/former-vice-chancellor-cyber-cheated-in-the-name-of-filing-a-complaint-regarding-gas-booking"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/thagi4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> रसोई गैस व पेट्रोल की किल्लत को अब साइबर अपराधी भी ठगी का माध्यम बनाकर अवसर खोजने लगे है।ठगों ने मल्लीताल निवासी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति बीना साह को गैस बुकिंग के नाम पर 1.91 लाख रुपये की चपत लगा दी।</p>
<p>महिला को ठगी का अहसास तब हुआ जब उसके फोन पर खाते से रकम कटने का संदेश प्राप्त हुआ। शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। यह पहला मामला नहीं जब महिला साइबर ठगों का शिकार हुई हो। बीते वर्ष अगस्त में महिला को डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 1.47 करोड़ की रकम ठग ली थी।</p>
<p>मल्लीताल गार्डन हाउस निवासी बीना साह ने कोतवाली को दी तहरीर में कहा है कि बीते 20 मार्च को उन्होंने अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से इंडेन गैस की बुकिंग की, लेकिन भुगतान नहीं होने पर उन्होंने पेटीएम के माध्यम से शिकायत कराने की कोशिश की तो एक वाट्सएप नंबर देकर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया। दिये गए नंबर पर संपर्क करने के बाद उन्हें कई फोन आये व बात करने वाले व्यक्ति ने उनके फोन को स्क्रीन शेयर पर लेकर कुछ प्रक्रिया पूरी कर फोन काट दिया। </p>
<p>जिसके कुछ ही देर बाद उसके खाते से 84,539 और 9,999 रुपये मोहम्मद फरहान नाम के व्यक्ति के खाते में ट्रासफर कर लिए गए। 21 मार्च को दोबारा फोन कर उसे झांसे में लेकर दोबारा 96,949 रुपये किसी अंजली के अकाउंट में ट्रासफर कर लिए गए। उन्हें ठगी का अहसास तब हुआ जब उनके फोन पर खाते से रकम कटने के संदेश प्राप्त हुए। महिला का कहना है कि अभी भी उन्हें अज्ञात नंबरों से फोन आ रहे है। कोतवाल हेम चंद्र पंत ने बताया कि शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर कर दिया गया है। मामले की जानकारी साइबर सेल को भी दे दी गई है।</p>
<p><strong>बीते वर्ष अगस्त में डिजिटल अरेस्ट कर ठगे थे 1.47 करोड़</strong><br />पीड़ित महिला पूर्व में रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कुलपति रह चुकी है। जो कि नैनीताल में एकाकी जीवन व्यतीत करतीं हैं।महिला से गैस बुकिंग के नाम पर ठगी का यह पहला मामला नहीं है। बीते वर्ष अगस्त में भी महिला को डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 1.47 करोड़ की रकम ठग ली थी। हालांकि, पुलिस की ओर से पूर्व में ही मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपितों को गिरफ्तार भी किया था। पीड़िता ने बताया कि पुराने मामले को सात माह गुजर चुके है। लेकिन उनके द्वारा गंवाई गई रकम से एक रुपये भी वापस नहीं मिला। मामले में रिकवरी नहीं होने से भी वह आहत नजर आई। अब दोबारा हुई ठगी ने जैसे उन्हें तोड़ कर रख दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 11:14:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एआई पॉलिसी-2026 को मंजूरी, 20 हजार घटाई एमटेक की फीस </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) की सर्वोच्च बॉडी, एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) ने आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस पॉलिसी-2026 को मंजूरी दे दी है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के क्षेत्र में विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर का शानदार केंद्र बनाने के उद्देश्य से इसका मसौदा पेश किया गया। कैंपस में पहले से ही अटल सेंटर फॉर एआई कार्यरत है। </p>
<p>एमजेपीआरयू के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को ईसी की मीटिंग हुई। काउंसिल में कुछ नए सदस्य नियुक्त हुए हैं। घनश्याम खंडेलवाल, प्रोफेसर अजीत सिंह नैन, प्रोफेसर रजनी रंजन सिंह, प्रोफेसर मंजू अग्रवाल, प्रोफेसर हरिकेश सिंह, प्रोफेसर दुष्यंत कुमार, प्रोफेसर अनुपम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576400/ai-policy-2026-approved-in-bareilly-rohilkhand-university-mtech-fees-reduced"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/496.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) की सर्वोच्च बॉडी, एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) ने आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस पॉलिसी-2026 को मंजूरी दे दी है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के क्षेत्र में विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर का शानदार केंद्र बनाने के उद्देश्य से इसका मसौदा पेश किया गया। कैंपस में पहले से ही अटल सेंटर फॉर एआई कार्यरत है। </p>
<p>एमजेपीआरयू के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को ईसी की मीटिंग हुई। काउंसिल में कुछ नए सदस्य नियुक्त हुए हैं। घनश्याम खंडेलवाल, प्रोफेसर अजीत सिंह नैन, प्रोफेसर रजनी रंजन सिंह, प्रोफेसर मंजू अग्रवाल, प्रोफेसर हरिकेश सिंह, प्रोफेसर दुष्यंत कुमार, प्रोफेसर अनुपम मेहरोत्रा का काउंसिल में स्वागत किया गया। </p>
<p>एमटेक के छात्रों को ईसी से बड़ी राहत मिली है। काउंसिल ने एमटेक की सालाना फीस एक लाख से घटाकर 80 हजार रुपये कर दी है। </p>
<p>10 गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को प्रमोट किया गया है। दो शिक्षक और एक पुस्तकालय अध्यक्ष को करियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत प्रमोट करने के फैसले को अनुमोदित किया गया। </p>
<p>विश्वविद्यालय द्वारा सेंटर ऑफ डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन प्रारंभ किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों के फीस स्ट्रक्चर से सदस्यों को अवगत कराया गया। </p>
<p>संगठक कॉलेज के शिक्षकों के वेतन में 5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को स्वीकृति मिली है। विश्वविद्यालय द्वारा 13 शोधार्थियों को शोध उपाधि प्रदान करने से परिषद को अवगत कराया गया। यूजीसी के नोटिफिकेशन के आधार पर शोध प्रबंध जमा करने के नए नियमों को अनुमोदित किया है। </p>
<p><strong>प्रोफेसर श्याम बिहार को श्रद्धांजलि </strong><br />कार्यपरिषद ने फरीदपुर के विधायक और एमजेपीआरयू के प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया। </p>
<p><strong>बैठक में उपस्थित रहे ये सदस्य </strong><br />कुलाधिपति के नॉमिनी प्रोफेसर अजीत सिंह नैन, कुलसचिव हरीश चंद, वित्त अधिकारी विनोद कुमार, प्रोफेसर विजय बहादुर सिंह यादव, प्रोफेसर अंजू अग्रवाल, प्रोफेसर उपेंद्र कुमार, प्रोफेसर विनय कुमार, प्रोफेसर विनय ऋषिवाल, प्रोफेसर दुष्यंत कुमार, प्रोफेसर हरिकेश सिंह, प्रोफेसर अनुपमा मेहरोत्रा, डॉ. संजीव कुमार सक्सेना, डॉ. रामकेवल, डॉ. विमल कुमार, डॉ. सौरभ वर्मा एवं डॉ. आशीष जैन सहित विभिन्न सदस्य उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576400/ai-policy-2026-approved-in-bareilly-rohilkhand-university-mtech-fees-reduced</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 19:53:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: रुहेलखंड का इतिहास समेटे है पांचाल संग्रहालय, नवपाषाण काल तक के पुरावशेष संग्रहित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास और संस्कृति विभाग स्थित पांचाल संग्रहालय में नवपाषाण काल से लेकर आधुनिक काल तक के विविध पुरावशेषों का संग्रह और रुहेलखंड क्षेत्र के प्राचीन एवं मध्यकालीन स्मारकों की तस्वीरें प्रदर्शित हैं। संग्रहालय में कई दीर्घाएं हैं, जिनमें अभयपुर उत्खनन गैलरी, टेराकोटा गैलरी, वस्त्र एवं हस्तशिल्प दीर्घा, रामा शंकर राव फोटो गैलरी, अहिच्छत्र डायोरामा और सुरेंद्र मोहन मिश्रा गैलरी प्रमुख हैं।</p>
<p>पांचाल संग्रहालय के विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013-14 में नई प्रदर्शन व्यवस्थाओं, प्रकाशनों और मुद्राशास्त्र प्रयोगशाला की स्थापना के लिए इसे उत्कृष्टता केंद्र पुरस्कार प्रदान किया। यह प्रयोगशाला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574342/panchal-museum-contains-the-history-of-rohilkhand--with-antiquities-dating-back-to-the-neolithic-period"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/pu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास और संस्कृति विभाग स्थित पांचाल संग्रहालय में नवपाषाण काल से लेकर आधुनिक काल तक के विविध पुरावशेषों का संग्रह और रुहेलखंड क्षेत्र के प्राचीन एवं मध्यकालीन स्मारकों की तस्वीरें प्रदर्शित हैं। संग्रहालय में कई दीर्घाएं हैं, जिनमें अभयपुर उत्खनन गैलरी, टेराकोटा गैलरी, वस्त्र एवं हस्तशिल्प दीर्घा, रामा शंकर राव फोटो गैलरी, अहिच्छत्र डायोरामा और सुरेंद्र मोहन मिश्रा गैलरी प्रमुख हैं।</p>
<p>पांचाल संग्रहालय के विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013-14 में नई प्रदर्शन व्यवस्थाओं, प्रकाशनों और मुद्राशास्त्र प्रयोगशाला की स्थापना के लिए इसे उत्कृष्टता केंद्र पुरस्कार प्रदान किया। यह प्रयोगशाला सिक्कों, तांबे, लोहे की वस्तुओं के उपचार और पांडुलिपियों के संरक्षण में उपयोग की जाती है। उत्कृष्टता केंद्र पुरस्कार को 2014-15 में अतिरिक्त अनुदान के साथ दोहराया गया और 2015-17 के लिए आगे बढ़ाया गया। </p>
<p>संग्रहालय उत्खनन, निजी संग्राहकों और दानकर्ताओं की दान की गई कलाकृतियों से समृद्ध हुआ है। संध्या और कर्नल राजीव रावत ने अपना विशाल निजी संग्रह दान किया, वहीं प्रख्यात मुद्राशास्त्री स्व. केडी बाजपेयी ने मुहरों और सिक्कों के चयनित नमूने प्रदान किए गए। संग्रह में मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा, तांबे के भाले और बरछी के सिरे, कुल्हाड़ी, मानव आकृतियां, प्राचीन तांबे के सिक्के, मुहरें, मनके, पक्की मिट्टी के बर्तन और जीवाश्म शामिल हैं।</p>
<p>विशेष रूप से पीलीभीत जिले की बीसलपुर तहसील में स्थित अभयपुर स्थल से 2001-2006 में खुदाई विभाग की ओर से प्राप्त मानव दफन स्थल के भौतिक साक्ष्य, मनके और हड्डियां अभयपुर गैलरी में संरक्षित हैं। संग्रहालय के आधुनिकीकरण और डिजिटली करण का कार्य कुलपति प्रो. केपी सिंह ने संपन्न कराया, जिसमें डिस्प्ले स्क्रीन, टच स्क्रीन कंप्यूटर और हॉलोग्राफिक पंखे जैसी आधुनिक ऑडियो-वीडियो सुविधाएं शामिल हैं, जिससे आगंतुकों के लिए ऐतिहासिक यात्रा और अधिक सजीव अनुभव बन गई है।</p>
<p>विभाग में पुरातत्व की एक छोटी इकाई है, जो समय-समय पर छोटे पैमाने पर खुदाई का कार्य करती है। अब तक, इस क्षेत्र के तीन प्राचीन स्थलों पर पुरातात्विक खुदाई की जा चुकी है। इसमें पीलीभीत जिले की बीसलपुर तहसील में अभयपुर (2001-2006), बरेली जिले में गोकुलपुर (2007-11) और गजनेरा (2019-20) शामिल हैं।<br />डॉ. प्रिया सक्सेना, विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास और संस्कृति विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574342/panchal-museum-contains-the-history-of-rohilkhand--with-antiquities-dating-back-to-the-neolithic-period</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:21:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: विषैले पारे को कम विषैले रूप में बदल देगा बैक्टीरिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रतन सिंह, बरेली।</strong> पर्यावरण प्रदूषण कम करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज अरोरा और उनके शोध छात्र ने एक ऐसे विशेष बैक्टीरिया की पहचान की है जो अत्यंत विषैले भारी धातु मरकरी (पारा) को कम विषैले रूप में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। इसमें बैक्टीरिया स्यूडोमोनास एरुजिनोसा की विशेष गतिविधि का पता चला है। इसकी मदद से औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन और पानी में होने वाले पारे के प्रदूषण को दूर करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>प्रो. डॉ. पंकज अरोरा ने बताया कि यह बैक्टीरिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574174/bacteria-convert-toxic-mercury-into-a-less-toxic-form"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/mjp.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रतन सिंह, बरेली।</strong> पर्यावरण प्रदूषण कम करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज अरोरा और उनके शोध छात्र ने एक ऐसे विशेष बैक्टीरिया की पहचान की है जो अत्यंत विषैले भारी धातु मरकरी (पारा) को कम विषैले रूप में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। इसमें बैक्टीरिया स्यूडोमोनास एरुजिनोसा की विशेष गतिविधि का पता चला है। इसकी मदद से औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन और पानी में होने वाले पारे के प्रदूषण को दूर करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>प्रो. डॉ. पंकज अरोरा ने बताया कि यह बैक्टीरिया मरकरी आयन की दिशा में सक्रिय रूप से गति करता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कीमोटॉक्सिस कहा जाता है। बैक्टीरिया अपनी विशेष जैव-रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मरकरी को कम विषैले एलिमेंटल मरकरी में बदल देता है। यह परिवर्तित मरकरी गैसीय रूप में वाष्पीकृत होकर वातावरण में फैल जाती है, जिससे मिट्टी और जल में मौजूद पारे की विषाक्तता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया की मेर ऑपेरॉन प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी प्रणाली के जरिये एन्जाइमेटिक प्रतिक्रिया होती है, जो मरकरी आयन को एलिमेंटल मरकरी में परिवर्तित करती है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में बैक्टीरिया की यह क्षमता सफलतापूर्वक प्रमाणित की गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तकनीक के आधार पर ऐसे जैविक समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर मरकरी के दुष्प्रभाव को भी कम कर सकें। वैज्ञानिक समुदाय इस उपलब्धि को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहा है। बता दें कि डॉ. पंकज अरोरा लगातार 2020 से दुनिया-भर के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं, जो इस शोध की विश्वसनीयता को और भी मजबूत आधार प्रदान करता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह खोज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मरकरी एक अत्यंत खतरनाक भारी धातु है, जो औद्योगिक अपशिष्ट, खनन गतिविधियों और रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण जल और मिट्टी में जमा हो जाती है। इसके कारण यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाती है।<br />तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है मरकरी प्रदूषण</p>
<p>मरकरी या पारा एक अत्यंत विषैला भारी धातु तत्व है। यह औद्योगिक अपशिष्ट, कोयला आधारित उद्योग, खनन और रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण जल और मिट्टी में पहुंचता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से तंत्रिका तंत्र, किडनी और मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।</p>
<p>पर्यावरण के अनुकूल है बायोरिमेडिएशन तकनीक<br />बायोरिमेडिएशन ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें सूक्ष्मजीवों, बैक्टीरिया या फफूंद की मदद से प्रदूषित मिट्टी, पानी और पर्यावरण को साफ किया जाता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है तथा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण में तेजी से उपयोग में लाई जा रही है।</p>
<p>रुविवि पादप विज्ञान विभाग डॉ. पंकज अरोड़ा ने बताया कि मरकरी से प्रभावित क्षेत्रों में जैव-उपचार (बायोरिमेडिएशन) तकनीक के विकास में यह शोध सहायक हो सकता है। यदि इस बैक्टीरिया का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाए तो औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण सुधार संभव है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:05:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Bareilly: रुहेलखंड की जलवायु और मिट्टी में उगेगा एवोकाडो, किसाानों को मिलेगा मार्गदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> रुहेलखंड क्षेत्र में पहली बार हाई-टेक एवोकाडो उद्यान की स्थापना कर एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बागवानी अनुसंधान और वैकल्पिक फसल प्रणाली के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से विश्वविद्यालय परिसर के गेट नंबर 2 के समीप एवोकाडो उद्यान विकसित कर क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह परियोजना को वीसी प्रो. केपी सिंह के मार्गदर्शन में विकसित किया जा रहा।</p>
<p>कृषि एवं प्रोद्यौगिक संकाय के डीन डॉ. उपेंद्र वालियान के नेतृत्व में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा एवोकाडो का मॉडल उद्यान स्थापित की जा रहा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573436/avocado-will-grow-in-the-climate-and-soil-of-rohilkhand--farmers-will-get-guidance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/ava.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> रुहेलखंड क्षेत्र में पहली बार हाई-टेक एवोकाडो उद्यान की स्थापना कर एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बागवानी अनुसंधान और वैकल्पिक फसल प्रणाली के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से विश्वविद्यालय परिसर के गेट नंबर 2 के समीप एवोकाडो उद्यान विकसित कर क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह परियोजना को वीसी प्रो. केपी सिंह के मार्गदर्शन में विकसित किया जा रहा।</p>
<p>कृषि एवं प्रोद्यौगिक संकाय के डीन डॉ. उपेंद्र वालियान के नेतृत्व में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा एवोकाडो का मॉडल उद्यान स्थापित की जा रहा। उद्यान में विश्व प्रसिद्ध पिंकर्टन, हैस, लैम्ब हैस और रीड की उन्नत किस्में रोपित की जा रही हैं। ये किस्में उच्च उत्पादन क्षमता, बेहतर गुणवत्ता, क्रीमी गूदे और लंबी शेल्फ लाइफ के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि अब तक एवोकाडो को केवल पहाड़ी या दक्षिणी राज्यों की फसल माना जाता रहा है, लेकिन इस पहल के माध्यम से रुहेलखंड की जलवायु और मिट्टी में इसकी अनुकूलता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। </p>
<p>विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ इन किस्मों की वृद्धि दर, फलन, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर नियमित अनुसंधान करेंगे, जिससे स्थानीय किसानों को प्रामाणिक आंकड़ों के आधार पर एवोकाडो की खेती करने का मार्गदर्शन मिल सकेंगा। इसके लिए उद्यान में आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली लागू की गई है। जिससे पौधों को नियंत्रित मात्रा में पानी और पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकें। इससे 40-60 प्रतिशत तक जल की बचत के साथ पौधों की संतुलित वृद्धि सुनिश्चित होती है।</p>
<p> रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि एवोकाडो एक उच्च मूल्य वाली फल फसल है, जिसकी मांग महानगरों और निर्यात बाजार में लगातार बढ़ रही है। यदि क्षेत्रीय स्तर पर इसकी सफल खेती सिद्ध होती है, तो यह पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक हो सकती है।</p>
<p>डीन कृषि एवं प्रोद्यौगिक संकाय डॉ. उपेंद्र वालियान के मुताबिक उद्यान भविष्य में शोध, प्रायोगिक अध्ययन और किसान प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां किसानों को पौध चयन, रोपण तकनीक, पोषण प्रबंधन और विपणन रणनीति का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 15:57:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर देश के नामचीन वक्ताओं ने रखे अपने विचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का 51वां स्थापना दिवस समारोह रविवार को विश्वविद्यालय परिसर के अटल सभागार आयोजित किया गया। जिसमें विज्ञान एवं चिकित्सा जगत की देश की नामचीन हस्तियां शामिल हुईं।</p>
<p>भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। मुख्य वक्ता के रूप में आर्मी हॉस्पिटल आर एंड आर, नई दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रो. शेखर कश्यप उपस्थित रहे। कीनोट स्पीकर के तौर पर आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च, नोएडा की निदेशक डॉ. प्रो.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/571490/renowned-speakers-of-the-country-expressed-their-views-on-the-foundation-day-of-rohilkhand-university"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/university.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का 51वां स्थापना दिवस समारोह रविवार को विश्वविद्यालय परिसर के अटल सभागार आयोजित किया गया। जिसमें विज्ञान एवं चिकित्सा जगत की देश की नामचीन हस्तियां शामिल हुईं।</p>
<p>भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। मुख्य वक्ता के रूप में आर्मी हॉस्पिटल आर एंड आर, नई दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रो. शेखर कश्यप उपस्थित रहे। कीनोट स्पीकर के तौर पर आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च, नोएडा की निदेशक डॉ. प्रो. शालिनी सिंह ने अपने विचार रखें।</p>
<p>विशिष्ट आमंत्रित अतिथि के रूप में आईसीएमआर - नेशनल जालमा इंस्टीट्यूट फॉर लेप्रोसी एंड ओएमडी, आगरा के निदेशक-ग्रेड वैज्ञानिक डॉ. प्रो. डी.एस. चौहान ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने की। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया तथा शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। स्थापना दिवस समारोह को लेकर परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:55:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>51वां स्थापना दिवस : रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री नहीं, जॉब-क्रिएटर तैयार करना है</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में 51वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ''''प्री इंडस्ट्री–अकादमिक समिट: थिंक टैंक डायलॉग-2026'''' का आयोजन हुआ। कार्यक्रम पीएम-उषा योजना के तहत हुआ, जिसका उद्देश्य उद्यमिता एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना और उद्योग व अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करना था। समिट में उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने उद्यमिता, नवाचार, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और स्टार्टअप सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।</p>
<p>मुख्य अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक थे। उन्होंने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सेतु बनाने और युवाओं को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/571455/the-aim-of-rohilkhand-university-is-not-just-to-provide-degrees-but-to-create-job-creators"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/uni1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में 51वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ''''प्री इंडस्ट्री–अकादमिक समिट: थिंक टैंक डायलॉग-2026'''' का आयोजन हुआ। कार्यक्रम पीएम-उषा योजना के तहत हुआ, जिसका उद्देश्य उद्यमिता एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना और उद्योग व अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करना था। समिट में उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने उद्यमिता, नवाचार, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और स्टार्टअप सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।</p>
<p>मुख्य अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक थे। उन्होंने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सेतु बनाने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को जॉब-क्रिएटर बनाना है।</p>
<p>समिट का निर्देशन विभागाध्यक्ष प्रो. तुलिका सक्सेना ने किया, जबकि आयोजन का सफल नेतृत्व प्रो. यतेन्द्र कुमार और डॉ. विकास लांबा ने किया। कार्यक्रम में उद्यमी डॉ. घनश्याम खंडेलवाल, दिनेश गोयल, अनुराग माथुर, डॉ. आकाश तनेजा आदि ने भाग लिया। पैनल चर्चा और संवाद सत्र में विशेषज्ञों ने स्टार्टअप और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत हुए। समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और हितधारकों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को जारी रखने का संकल्प दोहराया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 07:07:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: रुहेलखंड विश्वविद्यालय में खेला गया गिल्ली-डंडा...कंचे खेलते नजर आए कुलपति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय क्रीड़ा मैदान में 51वें स्थापना दिवस का शुभारंभ मंगलवार कुलपति प्रो. केपी सिंह ने गुब्बारे उड़ाकर और पारंपरिक खेल सपोलिया, गुल्ली डंडा तथा कंचे खेल कर किया। विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर आयोजित खेलों में विश्वविद्यालय के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने पारंपरिक खेलों में उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।</p>
<p>प्रतियोगिता के सपोलिया, गिल्ली डंडा और कंचे में शिक्षक विजेता रहे। गिल्ली डंडा में डॉ. विजय कुमार सिंहाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षकों को विजय दिलाई। कंचे में डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. विजय सिंहाल, डॉ. अतुल कटियार, डॉ. अजीत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570744/gilli-danda-was-played-at-rohilkhand-university---vice-chancellor-was-seen-playing-marbles"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/po3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय क्रीड़ा मैदान में 51वें स्थापना दिवस का शुभारंभ मंगलवार कुलपति प्रो. केपी सिंह ने गुब्बारे उड़ाकर और पारंपरिक खेल सपोलिया, गुल्ली डंडा तथा कंचे खेल कर किया। विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर आयोजित खेलों में विश्वविद्यालय के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने पारंपरिक खेलों में उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।</p>
<p>प्रतियोगिता के सपोलिया, गिल्ली डंडा और कंचे में शिक्षक विजेता रहे। गिल्ली डंडा में डॉ. विजय कुमार सिंहाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षकों को विजय दिलाई। कंचे में डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. विजय सिंहाल, डॉ. अतुल कटियार, डॉ. अजीत सिंह और डॉ. ललित पांडे का प्रदर्शन शानदार रहा। सपोलिया में डॉ. पवन कुमार, डॉ. अजीत सिंह का प्रदर्शन शानदार रहा। इसके बाद शिक्षक बनाम शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के मध्य क्रिकेट मैच खेला गया। मैच का शुभारंभ कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बैटिंग कर किया। क्रिकेट मैच में शिक्षणेत्तर कर्मचारी शिक्षक टीम को हराकर विजयी रहे। </p>
<p>इसमें कर्मचारियों की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में चार विकेट पर 156 रन का स्कोर बनाया। कमल सिंह ने 23 रन, नवीन संतुले ने 20 रन, अरविंद ने 27 रन, विक्रम ने 28 रन और निखिल ने 25 रन बनाए। शिक्षक टीम में डॉ. विजय कुमार सिंहाल ने बढ़िया गेंदबाजी करते हुए 2 गेंदों में लगातार दो विकेट लिए। शिक्षक टीम 19 ओवर में 81 रन पर ऑल आउट हो गई। इस अवसर पर कुलसचिव हरीश चंद, परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह, क्रीड़ा परिषद सचिव डॉ. एसएस बेदी, सह-क्रीड़ा सचिव डॉ. विजय कुमार सिंहाल, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. इरम नईम, डॉ. इंद्रप्रीत कौर, धर्मेंद्र शर्मा, सुहेल हुसैन मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 06:03:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: डिजिटल शिक्षा और नवाचार का दौर शुरू, 100 करोड़ से संवर रहा विवि परिसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत मिले 100 करोड़ रुपये के अनुदान से विश्वविद्यालय के विकास को नई गति दी जा रही है। मौजूदा वर्ष संस्थान के लिए परिवर्तनकारी माना जा रहा है। इसमें आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था और वैश्विक स्तर की सुविधाओं के निर्माण पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इससे विश्वविद्यालय न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होगा, बल्कि छात्रों, शोधार्थियों और नौकरीपेशा युवाओं के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा के नए रास्ते खुलेंगे।</p>
<p>विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुदान में मिली धनराशि से तीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570657/the-era-of-digital-education-and-innovation-has-begun--with-100-crore-rupees-being-spent-on-improving-the-university-campus"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/uni.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत मिले 100 करोड़ रुपये के अनुदान से विश्वविद्यालय के विकास को नई गति दी जा रही है। मौजूदा वर्ष संस्थान के लिए परिवर्तनकारी माना जा रहा है। इसमें आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था और वैश्विक स्तर की सुविधाओं के निर्माण पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इससे विश्वविद्यालय न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होगा, बल्कि छात्रों, शोधार्थियों और नौकरीपेशा युवाओं के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा के नए रास्ते खुलेंगे।</p>
<p>विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुदान में मिली धनराशि से तीन बड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इन्हें इस वर्ष धरातल पर उतारने की योजना है। इनमें डिजिटल लर्निंग हब, इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी और अंतर्राष्ट्रीय ट्रांजिट छात्रावास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिये शिक्षा के साथ-साथ शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग को भी मजबूती मिलेगी। सबसे प्रमुख परियोजना डिजिटल लर्निंग हब होगी, जो ई-कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन कोर्सेज और हाइब्रिड लर्निंग के लिए वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यूजीसी से 11 नए पाठ्यक्रमों को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। इससे छात्रों को आधुनिक विषयों पर पढ़ाई का अवसर मिलेगा। शिक्षक भी ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को पढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और इंटरएक्टिव बनेगी।</p>
<p><strong>विश्वविद्यालय में ये सुविधाएं मिलेंगी</strong><br />इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी विश्वविद्यालय में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देगी। यहां विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को अपने नवाचार और व्यावसायिक विचारों को वास्तविक रूप देने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण और बुनियादी सहायता प्रदान की जाएगी। विद्यार्थी छोटे स्तर पर उत्पादन से लेकर मार्केटिंग और ब्रांडिंग तक की व्यावहारिक जानकारी हासिल कर सकेंगे, जिससे आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन के नए अवसर खुलेंगे। विदेशी छात्रों और शोधार्थियों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला ट्रांजिट छात्रावास भी बनाया जाएगा। यह छात्रावास विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगा और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा। इससे विश्वविद्यालय की ग्लोबल रैंकिंग और शैक्षणिक प्रतिष्ठा में भी सुधार होने की उम्मीद है। विकास कार्यों की इसी कड़ी में विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार स्वर्ण जयंती द्वार भी बनकर लगभग तैयार हो चुका है और अपने अंतिम चरण में है। यह द्वार परिसर की सुरक्षा, सौंदर्य और आधुनिक पहचान को मजबूत करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि पीएम-उषा के तहत मिला अनुदान संस्थान को डिजिटल और वैश्विक शिक्षा के नए युग में प्रवेश दिलाने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।</p>
<p><br />मीडिया प्रभारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय डॉ. विनय वर्मा ने बताया कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर निरंतर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2026 में इंटरनेशनल ट्रांजिट छात्रावास, डिजिटल लर्निंग हब और इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी का निर्माण किया जा रहा। इसकी नई सुविधाओं में आधुनिक तकनीक, लर्निंग आदि के माध्यम विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:05:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : विश्वविद्यालय ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मांगे फर्जी दस्तावेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाण-पत्र व अंकपत्र बनाकर युवती की अल-फलाह यूनिर्सिटी में नौकरी लगवाने की शिकायत को विश्वविद्यालय ने गंभीरता से लिया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार की ओर से अल-फलाह यूनिवर्सिटी को पत्राचार करके फर्जी प्रमाण-पत्र सहित सभी दस्तावेज मांगे गए हैं।</p>
<p>भोजीपुरा के कुआटांडा निवासी व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि धौराटांडा के कुछ लोग फर्जी मोहरों से एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की मार्कशीट और अनुभव प्रमाण पत्र तैयार रहे हैं। शिकायत के मुताबिक प्रार्थनापत्र के मुताबिक आरोपियों के तैयार फर्जी दस्तावेज से एक युवती ने अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस रिसर्च सेंटर,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568396/the-university-requested-fake-documents-from-al-falah-university"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/uni2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाण-पत्र व अंकपत्र बनाकर युवती की अल-फलाह यूनिर्सिटी में नौकरी लगवाने की शिकायत को विश्वविद्यालय ने गंभीरता से लिया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार की ओर से अल-फलाह यूनिवर्सिटी को पत्राचार करके फर्जी प्रमाण-पत्र सहित सभी दस्तावेज मांगे गए हैं।</p>
<p>भोजीपुरा के कुआटांडा निवासी व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि धौराटांडा के कुछ लोग फर्जी मोहरों से एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की मार्कशीट और अनुभव प्रमाण पत्र तैयार रहे हैं। शिकायत के मुताबिक प्रार्थनापत्र के मुताबिक आरोपियों के तैयार फर्जी दस्तावेज से एक युवती ने अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस रिसर्च सेंटर, मौज फरीदाबाद हरियाणा में नौकरी हासिल कर ली। </p>
<p>विश्वविद्यालय स्तर पर दिया गया एनरोलमेंट नंबर व रोल नंबर किसी अन्य विद्यार्थी के नाम जारी था। मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा नियंत्रक ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को पत्राचार करते हुए दस्तावेज मांगे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/568396/the-university-requested-fake-documents-from-al-falah-university</link>
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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 08:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली:  कृषि विज्ञान में 'वैभव फेलोशिप' पाने वाला देश का इकलौता राज्य विश्वविद्यालय बना MJPRU</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार :</strong> महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) ने शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एग्रीकल्चरल साइंसेसज (कृषि विज्ञान) के क्षेत्र में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग (डीएसटी) से 'वैभव फेलोशिप' पाने वाला पहला देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बना है। डीएसटी की फेलोशिप सूची में देश के शीर्ष 21 शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं-जिनमें अधिकांश आईआईटी और एनआईटी हैं। राज्य विश्वविद्यालय के रूप में एकमात्र एमजेपीआरयू है। इसके अंतर्गत अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर ओपी धनखड़ बरेली आकर शोध और अध्यापन में सहयोग करेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">वैभव फेलोशिप भारत सरकार की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567594/bareilly--mjpru-becomes-the-only-state-university-in-the-country-to-receive--vaibhav-fellowship--in-agricultural-science"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/mjp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार :</strong> महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) ने शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एग्रीकल्चरल साइंसेसज (कृषि विज्ञान) के क्षेत्र में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग (डीएसटी) से 'वैभव फेलोशिप' पाने वाला पहला देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बना है। डीएसटी की फेलोशिप सूची में देश के शीर्ष 21 शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं-जिनमें अधिकांश आईआईटी और एनआईटी हैं। राज्य विश्वविद्यालय के रूप में एकमात्र एमजेपीआरयू है। इसके अंतर्गत अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर ओपी धनखड़ बरेली आकर शोध और अध्यापन में सहयोग करेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">वैभव फेलोशिप भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका मकसद, प्रवासी भारतीय वैज्ञानिकों को अपनी मिट्टी से जोड़कर, उसके लिए कुछ गुजरने का मौका देना है। इस फेलोशिप के लिए देशभर से 227 शैक्षिक संस्थानों ने आवेदन किया था। विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस विभाग के प्रोफेसर उपेंद्र कुमार और प्रख्यात प्रवासी वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश धनखड़ के संयुक्त मार्गदर्शन में शोध कार्य चलेगा। कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने विश्वविद्यालय की टीम को बधाई देते हुए कहा कि निश्चित रूप से ये बड़ी उपलब्धि है। इससे यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध मानचित्र पर मजबूत पहचान मिलेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कम आर्सेनिक वाले चावल पर रिसर्च </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उपेंद्र कुमार बताते हैं कि चावल की कुछ किस्मों में आर्सेनिक और हैवी मैटल की अत्याधिक मात्रा होती है। इस प्रोजेक्ट के जरिए कम आर्सेनिक और कम हैवी मैटल वाला चावल उत्पादन करना है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की मदद से इस पर शोध कार्य आगे बढ़ेगा। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>खाड़ी देशों से रिजेक्ट हो जाता चावल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रोफेसर उपेंद्र कुमार के मुताबिक, अभी देखा जाता है कि भारत का बासमती चावल खाड़ी देशों से रिजेक्ट हो जाता है। वजह, वही आर्सेनिक और हैवी मैटल की निर्धारित मानकों से अधिकता...। हमारी रिसर्च इस पहलू पर आगे बढ़ेगी कि कैसे कम लो-आर्सेनिक वाला चावल उत्पादित किया जाए। प्रोजेक्ट के अंतर्गत 60 लाख रुपये की ग्रांट मिली है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषि छात्रों को शानदार मौका </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर ओम प्रकाश धनखड़ तीन साल तक, प्रति वर्ष-दो महीने रुहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में रहकर अध्यापन और शोध कार्य में सहयोग करेंगे। बीएससी और एमएससी के छात्रों के लिए ये शानदार अवसर होगा। वे, विश्व विख्यात प्रोफेसर के अधीन शोध कार्य और आधुनिक तकनीक सीखकर क्षेत्र के विकास में योगदान दे पाएंगे। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>यूनिवर्सिटी में संचालित कोर्स </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एग्रीकल्चर कोर्स संचालित हैं। कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह के नेतृत्व में कैंपस में ये कोर्स प्रारंभ किए गए हैं। रुहेलखंड परिक्षेत्र जहां कृषि का कोई महाविद्यालय नहीं था, वहां इतनी बड़ी उपलब्धि निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र के विकास के लिए काफी अहम मानी जा रही है। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आईआईटी कानपुर के बाद एमजेपी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वैभव फेलोशिप आवेदन के लिए पहली शर्त ये है कि संस्थान के पास नैक में A++ ग्रेड होनी चाहिए। यूपी से इस फेलोशिप के लिए दो संस्थान चयनित हुए। पहला-आईआईटी कानपुर है और दूसरा रुहेलखंड विश्वविद्यालय।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567594/bareilly--mjpru-becomes-the-only-state-university-in-the-country-to-receive--vaibhav-fellowship--in-agricultural-science</link>
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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 16:45:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ateeq Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : प्रो. श्याम बिहारी का जाना विश्वविद्यालय के लिए भारी क्षति, यहां बीते थे विधायक के 25 साल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>फरीदपुर के भाजपा विधायक एवं रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल का जाना विश्वविद्यालय के भारी क्षति है। वह विश्वविद्यालय में 25 साल से कार्यरत थे। उनके निधन से विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई है। मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि शोक सभा का आयोजन शनिवार को प्रशासनिक भवन में किया जाएगा।</p>
<p>प्रो. श्याम बिहारी ने इतिहास विभाग में सन 2000 में ज्वाइन किया था और जून 2028 तक उनका कार्यकाल रहना था। विश्वविद्यालय में पदभार ग्रहण करने से पहले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566083/the-passing-of-professor-shyam-bihari-is-a-great-loss-for-the-university--he-spent-25-years-here-as-a-legislator"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/mjpru.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>फरीदपुर के भाजपा विधायक एवं रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल का जाना विश्वविद्यालय के भारी क्षति है। वह विश्वविद्यालय में 25 साल से कार्यरत थे। उनके निधन से विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई है। मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि शोक सभा का आयोजन शनिवार को प्रशासनिक भवन में किया जाएगा।</p>
<p>प्रो. श्याम बिहारी ने इतिहास विभाग में सन 2000 में ज्वाइन किया था और जून 2028 तक उनका कार्यकाल रहना था। विश्वविद्यालय में पदभार ग्रहण करने से पहले वह पलिया, सोनभद्र और बीसलपुर में राजकीय डिग्री कॉलेज में शिक्षक रहे। विश्वविद्यालय में कार्यकाल के दौरान कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान में प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग में विभागाध्यक्ष बनने से पहले दो बार संकायाध्यक्ष भी रह चुके थे।</p>
<p> विश्वविद्यालय की कार्य परिषद और विद्या परिषद के भी सदस्य की जिम्मेदारी निभाने वाले श्याम बिहारी लाल पांचाल संग्रहालय के संयोजक भी रहे। पूर्व में बीडीए छात्रावास के वार्डन भी रहे। वह अवैतनिक पुस्तकालय अध्यक्ष भी थे। इसके अलावा कई समितियों में भी शामिल थे। वह पहले विश्वविद्यालय परिसर में ही कुलसचिव के सामने बनी प्रोफेसर कॉलोनी में रहते थे। करीब डेढ़ साल पहले सुरेश शर्मा नगर के पास निजी आवास में रहने लगे थे।</p>
<p>मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि प्रो. श्याम बिहारी का जाना व्यक्तिगत और विश्वविद्यालय के बड़ी क्षति है। वह अपने विभाग, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। उनके आकस्मिक निधन पर वह और विश्वविद्यालय परिवार अपनी शोक संवेदना व्यक्त करता हैं। दुख की इस घड़ी में ईश्वर परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति दे ऐसी प्रार्थना करते हैं।</p>
<p>प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि प्रो. श्याम बिहारी से मेरा शिक्षा के समय से जुड़ाव रहा है। वह उनके साथ पढ़े हैं, हालांकि विभाग अलग-अलग था। वह बहुत ही हंसमुख मिजाज थे। उन्हें कभी घमंड नहीं रहा, जबकि वह एक क्षेत्र के विधायक थे। उनका जाना व्यक्तिगत और विश्वविद्यालय के लिए बड़ी क्षति है।</p>
<p> संकायाध्यक्ष प्रो. विजय बहादुर ने बताया कि विभाग में साथ होने की वजह से प्रो. श्याम बिहारी से मेरा 25 साल से रिश्ता रहा है। वह पूर्व संकायाध्यक्ष भी रह चुके थे। वह काफी मिलनसार थे। उनके साथ कई यादें जुड़ी हुई हैं। उनका स्वभाव काफी अच्छा था। उनका जाना काफी दुखदायी है। विभाग के साथ विश्वविद्यालय परिवार के लिए बड़ी क्षति है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566083/the-passing-of-professor-shyam-bihari-is-a-great-loss-for-the-university--he-spent-25-years-here-as-a-legislator</link>
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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 13:05:54 +0530</pubDate>
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