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                <title>IIT Kanpur - Amrit Vichar</title>
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                <description>IIT Kanpur RSS Feed</description>
                
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                <title>नदी के दो किनारे: पुरानी दोस्ती, अधूरी कहानी और जिंदगी की हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>गोंडाः </strong>चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट। लखनऊ से दिल्ली होते हुए बेंगलुरु की उड़ान। चेकिंग से निकलकर लोग अपनी सीट पर बैठने लगे। चेक कराकर जैसे ही इरा आगे बढ़ी, आकाश आगे जाते हुए दिखा। उसने अपना चश्मा साफ किया। फिर देखा- हां, आकाश ही है। वह आगे बढ़ी, तब तक आकाश विमान के अंदर हो चुका था। उसने अपनी सीट का नंबर देखा। उसी के बगल की सीट। आगे बढ़कर कहा- “हेलो आकाश!” आकाश भी इरा को सामने देख चौंककर खड़ा हो गया। अभिवादन किया। दोनों तीन वर्ष बाद मिल रहे थे। साथ-साथ आईआईटी कानपुर से बीटेक किया था। दोनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582997/two-banks-of-the-river--old-friendship--incomplete-story-and-the-reality-of-life"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(38)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोंडाः </strong>चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट। लखनऊ से दिल्ली होते हुए बेंगलुरु की उड़ान। चेकिंग से निकलकर लोग अपनी सीट पर बैठने लगे। चेक कराकर जैसे ही इरा आगे बढ़ी, आकाश आगे जाते हुए दिखा। उसने अपना चश्मा साफ किया। फिर देखा- हां, आकाश ही है। वह आगे बढ़ी, तब तक आकाश विमान के अंदर हो चुका था। उसने अपनी सीट का नंबर देखा। उसी के बगल की सीट। आगे बढ़कर कहा- “हेलो आकाश!” आकाश भी इरा को सामने देख चौंककर खड़ा हो गया। अभिवादन किया। दोनों तीन वर्ष बाद मिल रहे थे। साथ-साथ आईआईटी कानपुर से बीटेक किया था। दोनों के चेहरे पर प्रसन्नता नाच उठी। बैठते ही दोनों ने अपने मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान किया। “अरे यह तो वही पुराना नबंर है।” इरा बोल पड़ी। “हां, मैंने नंबर नहीं बदला है।” आकाश का चेहरा लाल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">“कहो आकाश! इन तीन वर्षों में क्या करते रहे?” “कानपुर छोड़ने के बाद मैं दिल्ली आ गया। यहीं रहकर आईएएस की तैयारी करता रहा।” “अरे! कल ही तो परिणाम आया है।” “हां, निकल गया है।” “तो तुम आईएएस हो गए। तुम्हारी मां का सपना पूरा हुआ। एक ही बार तो मिली थी उनसे। तुम्हें बधाइयां मिल रही होंगी। मेरी ओर से भी बधाई!” कहकर इरा हंस पड़ी। “थोड़ी सफलता मिलने पर लोग बधाई देते ही हैं।” पर इन तीन वर्षों में तुमने क्या किया इरा?” “मैंने अनुसंधान के क्षेत्र में जाने को सोचा। इस समय इसरो, बेंगलुरु में हूं।” “तुमने ठीक किया।”</p>
<p style="text-align:justify;">“और तुमने?” मैंने, घर-परिवार और अपनी इच्छा से इस तरह प्रेरित हुआ कि तीन वर्ष लगातार सबकुछ भूलकर पढ़ाई में लगा रहा। दो बार उत्तीर्ण होते-होते रह गया। कभी-कभी मन भी विचलित हो जाता। मेरे बाबा ने उच्च शिक्षा में एक लंबा समय बिताया है। जब कभी घर जाता, उनसे मिलता। वे खुश होते पर कहते-“ बेटा, तीन-चार वर्ष से अधिक समय इस परीक्षा में मत देना। जीवन में अनेक कार्य हैं, जिन्हें करते हुए आप आगे बढ़ सकते हैं। आईएएस ही कोई अंतिम विकल्प नहीं है। यह संयोग ही कहिए कि तीसरे वर्ष मैं निकाल ले गया।”<br />“इस पर बाबा भी बहुत खुश हुए होंगे?” इरा बोल पड़ी। “उनको खुश होना ही था। पर, वे बहुत संयत रहते हैं। उनकी खुशी भी संयत होती है। हम लोगों की तरह हवा महल नहीं बनाते।” “अनेक वैज्ञानिक तो हवा महल बनाते ही आगे बढ़े।” इरा मुस्करा उठी। चश्मा उतारकर फिर साफ किया। “हवा महल बनाने में जोखिम भी है। यदि सफलता मिल गई तो वैज्ञानिक बन जाओगे। यदि नहीं मिली तो कूड़ा समझकर फेंक दिए जाओगे।” आकाश ने समझाया। “ठीक कहते हो। सामान्य परिवार जोखिम लेने से डरता है। जोखिम से डरने वाले कोई आविष्कारक भी नहीं बन पाते।” इसी बीच काफी आ गई। दोनों काफी की चुस्की लेते हुए बात करते रहे। “हमारी शिक्षा में भी जोखिम उठाने की सीख कहां दी जाती है! सभी को मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी जाती है।” इरा कहती रही। “तुम्हारी यह बात बिल्कुल सच है। हम अधिकतर औसत उत्पन्न करते हैं। कोई बड़ा आविष्कारक क्या कभी स्कूल का टाॅपर रहा?” “यही तो त्रासदी है। तभी तो लोग कहने लगे कि स्कूल मर चुके हैं।” “ईवान ईलिच और उनके सहयोगी तो और भी बहुत कुछ कहते हैं।” “लेकिन स्कूल यदि बंद कर दिए जाएं तो बेसिक कौन सिखाएगा? बिना भाषा-गणित आदि का आधार तैयार किए कोई आगे कैसे बढ़ पाएगा?” “यह तो है ही। स्कूलों को बंद नहीं किया जा सकता, भले ही वे औसत गढ़ रहे हों।” “समाज को औसत की जरूरत भी अधिक होती है।” “यह भी सच है।” “अरे, पन्द्रह मिनट बाद तुम दिल्ली उतर जाओगे। मुझे दक्षिण की राह पकड़नी होगी।” “ओह, मुझे भी समय का ध्यान ही न रहा। एक सेल्फी।” “अवश्य। जरूरी है यह।” दोनों अपनी मोबाइल से सेल्फी लेते हैं। “चलो, बहुत अच्छा हुआ,  नहीं तो हम बातों में भूल ही जाते।” “एक बात बताएं आकाश। आईआईटी में साथ पढ़ते हुए तुमसे एक लगाव हो गया था। मैं उसे कोई नाम नहीं दे सकती।” “मुझे भी तुम बहुत अच्छी लगती थी। तुम्हारी शालीनता मुझे आकर्षित करती थी।” “कानपुर छोड़ने के बाद मैं तुम्हें बहुत मिस करती थी पहले साल। मैंने जब भी फोन मिलाया, तुम्हारा फोन स्विच ऑफ स्विच ऑफ...।” आईएएस की तैयारी के चक्कर में मैं अपना फोन स्विच ऑफ रखता था।” “कॉल बैक तो कर सकते थे?” “हां, कर सकता था। पर, नहीं किया। अपने को घरौंदे में सीमित कर लिया, बिल्कुल पिंजरे का पंछी।” कहते-कहते आकाश की आंखें भर आईं। इरा भी विचलित हो उठी। अपने को संभालने की कोशिश में भी कुछ बूंदे आंखों में उभर ही आईं। “मैं आईएएस जरूर हो गया पर बहुत कुछ छूट भी गया।” “कुछ पाने के लिए कुछ खोना ही पड़ता है। हम चौराहे से चारों ओर नहीं जा सकते। किसी एक रास्ते पर चलेंगे तो अन्य रास्ते छूट ही जाएंगे।”</p>
<p style="text-align:justify;">“यही सच है।” “मैं तुम्हें एक बात बताऊं?”</p>
<p style="text-align:justify;">“बताओ।” “आश्चर्य तो नहीं करोगे?”</p>
<p style="text-align:justify;">“कह नहीं सकता।” “आश्चर्य करना तो ठीक है, पर दुःखी मत होना।” “क्या ऐसी कोई बात है?” “हां, ऐसी ही है। तुम बहुत उत्सुक हो उठे न?” “तुम बात ही इस तरह कर रही हो।” “हां, बात ही ऐसी है। जानते हो आकाश, जब तुम्हारा फोन कभी नहीं उठा, कभी तुमने काॅल बैक भी नहीं किया, मैं तुमसे घृणा करने लगी। क्या नेह का विपर्यय घृणा...” कहते-कहते इरा भावुक हो उठी। रूमाल निकाला। आखों में उभरी बूंदों को साफ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">“यदि नेह का विपर्यय घृणा है, तो घृणा का विपर्यय नेह भी तो हो सकता है।” आकाश ने इरा को सामान्य करने की कोशिश की। “हो सकता है पर, तुमसे भेंट न होती तो बिल्कुल नहीं हो सकता था।”<br />“पर अब?” “अब हम दोनों, नदी के दो किनारे हैं। धरती और आकाश के बीच का क्षितिज। लगता है कि धरती और आकाश दोनों क्षितिज पर मिले हुए हैं, निकट ही हैं। पर, ज्यों-ज्यों हम क्षितिज की ओर बढ़ते हैं, वह दूर होता जाता है। हमें कोई भी निर्णय सोच-विचार कर लेना चाहिए, भावुकता में नहीं। आखिर हम लोगों ने पढ़-लिख कर क्या सीखा? पति-पत्नी संबंध ही अंतिम नहीं है। हम लोगों ने पढ़ा है- द्रुपद, द्रौपदी का विवाह कृष्ण जी से करना चाहते थे। सलाहकारों ने बताया था कि वही द्रोणाचार्य का वध कर सकते थे। कृष्ण जी ने द्रौपदी से मिलकर आश्वस्त किया- मैं पति तो नहीं बन सकता पर, भाई बनकर आजीवन तुम्हारे साथ रहूंगा। कौन कह सकता है कि उन्होंने भाई का दायित्व नहीं निभाया?”</p>
<p style="text-align:justify;">“तुम प्रशासकीय कार्यों में जाने कहां-कहां रहोगे!” “और तुम?”<br />“हमारा कार्यक्षेत्र इसरो के परिक्षेत्र में ही रहेगा। तुम्हें एक सुयोग्य साथी मिले, इसकी कामना है। हां, जब कभी बंधन में बंधना, मुझे सूचित अवश्य करना। मैं कहीं भी रहूंगी, पहुंचने की कोशिश करूंगी।”  जैसे ही आवाज गूंजी— देवियो और सज्जनो! इंडिगो की ओर से दिल्ली में आपका स्वागत है, दिल्ली उतरनेवाले यात्री सजग होने लगे। बेंगलुरु जानेवाले यात्री कुछ बैठे रह गए, कुछ उतरकर दिल्ली एयरपोर्ट का आनंद लेने लगे। आकाश सबसे बाद में उठा। इरा ने उसे विदा किया। खिड़की से आकाश को जाते देखती रही। जैसे ही आकाश ओझल हुआ, उसने अपना पैड निकाला और अपने प्रोजेक्ट पर काम करने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सूर्यपाल सिंह, गोण्डा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>गोंडा</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 16:17:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब सिर्फ दादी-नानी के सिक्के ही नहीं, बचपन की यादें भी सहेजेगी गुल्लक... जानिए कैसे </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> कभी दादी-नानी के दिए सिक्कों की रखवाली करने वाली मिट्टी की गुल्लक अब नए रंग और डिजाइन में लौट रही है। फर्क बस इतना है कि इस बार बिठूर के कुम्हारों के साथ आईआईटी कानपुर भी जुड़ गया है। जिला प्रशासन की पहल पर पारंपरिक माटीकला को आधुनिक डिजाइन, रंग तकनीक और बाजार से जोड़ते हुए मिट्टी की गुल्लकों को नए स्वरूप में तैयार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के दिनों में गुल्लक को लेकर कानपुर में हुई चर्चाओं के बाद जिला प्रशासन ने इसे केवल बचत का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और स्थानीय कला से जुड़े सामाजिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582396/now--the-piggy-bank-will-preserve-not-just-grandma-s-coins--but-childhood-memories-as-well----find-out-how"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats294.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> कभी दादी-नानी के दिए सिक्कों की रखवाली करने वाली मिट्टी की गुल्लक अब नए रंग और डिजाइन में लौट रही है। फर्क बस इतना है कि इस बार बिठूर के कुम्हारों के साथ आईआईटी कानपुर भी जुड़ गया है। जिला प्रशासन की पहल पर पारंपरिक माटीकला को आधुनिक डिजाइन, रंग तकनीक और बाजार से जोड़ते हुए मिट्टी की गुल्लकों को नए स्वरूप में तैयार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के दिनों में गुल्लक को लेकर कानपुर में हुई चर्चाओं के बाद जिला प्रशासन ने इसे केवल बचत का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और स्थानीय कला से जुड़े सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की पहल शुरू की है।  जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि गुल्लक केवल मिट्टी का पात्र नहीं होती, बल्कि यह बचपन, परिवार और बचत की संस्कृति से जुड़ा भावनात्मक प्रतीक है। कभी छोटे-छोटे उपहार और रुपये बच्चे बड़ी आत्मीयता से अपनी गुल्लक में सहेजकर रखते थे। वही आदत आगे चलकर आर्थिक अनुशासन और बचत की सीख देती थी। </p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि आज समाज में अनावश्यक खर्च बढ़ रहे हैं और बचत की आदत कमजोर होती जा रही है। ऐसे समय में बच्चों को बचत का संस्कार देने के लिए गुल्लक एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। इसी सोच के साथ प्रशासन इसे जनजागरूकता आधारित अभियान के रूप में विकसित कर रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल पारंपरिक गुल्लकों को पुनर्जीवित करना नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों को आधुनिक बाजार और तकनीक से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि बिठूर की माटीकला को नई पहचान दिलाने के लिए डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष रूप से काम किया जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र प्रोजेक्ट के तहत बिठूर के माटीकला कारीगरों को तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। आईआईटी में परियोजना की कॉर्डिनेटर रीता सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल एक उत्पाद विकसित करना नहीं, बल्कि पारंपरिक कला, स्थानीय कारीगरों और बच्चों के बीच भावनात्मक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव स्थापित करना भी है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक डिजाइन और बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर शिखा तिवारी ने बताया कि कारीगरों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं सिरामिक डिजाइनर शैली संगल बच्चों की पसंद और आधुनिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए गुल्लकों के नए डिजाइन तैयार कर रही हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">उनके मार्गदर्शन में रंग संयोजन, फिनिशिंग तकनीक और आकर्षक प्रस्तुतीकरण पर भी काम किया जा रहा है। बिठूर के कुम्हार राम रतन ने बताया कि पहले मिट्टी की गुल्लकों की मांग लगातार कम होती जा रही थी, लेकिन अब नए डिजाइन आने के बाद लोगों की रुचि फिर बढ़ने लगी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए कार्टून, पशु-पक्षी और पारंपरिक आकृतियों वाली गुल्लकें तैयार की जा रही हैं। इससे कारीगरों को भी नई उम्मीद मिली है। </p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने बताया कि इन गुल्लकों को सरकारी कार्यक्रमों में स्मृति-चिह्न और उपहार के रूप में भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे एक ओर स्थानीय कारीगरों को रोजगार और नई पहचान मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बिठूर की पारंपरिक माटीकला को भी नया बाजार प्राप्त होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:57:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गोमाता से ‘जीन क्रांति’ की तैयारी: गोबर-गोमूत्र से बनेगी सुपर खाद, IIT कानपुर की तकनीक से 15 गुना असरदार ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में गो संरक्षण को वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। दावा है कि यह खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी और इसे तैयार करने में समय भी 10 गुना कम लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के शोधार्थियों ने विकसित किया है। सरकार इसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582261/preparing-for-a--gene-revolution--using-cow-dung-and-urine--super-fertilizer--15-times-more-effective-organic-fertilizer-using-iit-kanpur-technology"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(26)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में गो संरक्षण को वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। दावा है कि यह खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी और इसे तैयार करने में समय भी 10 गुना कम लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के शोधार्थियों ने विकसित किया है। सरकार इसे प्राकृतिक खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के एकीकृत मॉडल के रूप में लागू करने की तैयारी में है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आईआईटी कानपुर की खोज से तैयार होगी ‘सुपर खाद’</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन और माइक्रोबियल आइसोलेशन तकनीक का उपयोग करते हुए गोबर और गोमूत्र आधारित उर्वरक विकसित किया है। इस तकनीक से तैयार खाद में पोषक तत्वों की क्षमता लगभग पांच गुना अधिक बताई जा रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल एक किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक तैयार किया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कम मात्रा, ज्यादा असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नई तकनीक से तैयार खाद की 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा ही पर्याप्त होगी। यह पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में काफी कम है, जिससे किसानों की परिवहन और श्रम लागत घटेगी। इस उत्पाद को इंडियान काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के 40 से अधिक गुणवत्ता मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित किए जाने का दावा किया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गोशालाएं बनेंगी ‘वेस्ट टू वेल्थ’ केंद्र, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार इस तकनीक के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम कर रही है। गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद और बायोगैस का उत्पादन होगा। इससे गोशालाएं केवल संरक्षण केंद्र न रहकर आय सृजन का माध्यम बनेंगी। सरकार का मानना है कि यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएगी और कृषि अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित होगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महिला समूहों को मिलेगा रोजगार</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस परियोजना में स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय किसानों को जोड़ा जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़कर नए रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर सफल रहा, तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तकनीक का अग्रणी केंद्र बन सकता है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।<br /><strong>श्याम बिहारी गुप्त, अध्यक्ष गो सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:38:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी कानपुर ने की चार नये ऑनलाइन एमटेक कोर्स शुरू करने की घोषणा, जानिए प्रवेश प्रकिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने उभरती औद्योगिक जरूरतों और तकनीकी विशेषज्ञता की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चार नए ऑनलाइन एम.टेक. कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। संस्थान द्वारा शुरू किए गए नए कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, स्मार्ट ग्रिड तथा सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज में ऑनलाइन एम.टेक. शामिल हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इन कार्यक्रमों को इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा, इंटेलिजेंट सिस्टम और अगली पीढ़ी के पावर नेटवर्क जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ये कार्यक्रम संस्थान के आउटरीच गतिविधि कार्यालय के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581955/iit-kanpur-announces-launch-of-four-new-online-m-tech-courses--know-the-admission-process"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/कानपुर-आईआईटी.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने उभरती औद्योगिक जरूरतों और तकनीकी विशेषज्ञता की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चार नए ऑनलाइन एम.टेक. कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। संस्थान द्वारा शुरू किए गए नए कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, स्मार्ट ग्रिड तथा सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज में ऑनलाइन एम.टेक. शामिल हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इन कार्यक्रमों को इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा, इंटेलिजेंट सिस्टम और अगली पीढ़ी के पावर नेटवर्क जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ये कार्यक्रम संस्थान के आउटरीच गतिविधि कार्यालय के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। आईआईटी कानपुर ने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान उच्च गुणवत्ता वाली शोध-आधारित स्नातकोत्तर शिक्षा को कामकाजी पेशेवरों और नए स्नातकों तक पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रहा है। चारों कार्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन होंगे और इन्हें आईआईटी कानपुर की सीनेट से स्वीकृति प्राप्त है। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रमों को दो से चार वर्षों की अवधि में पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे कामकाजी पेशेवर अपनी नौकरी के साथ उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर सकें। आईआईटी कानपुर के आउटरीच गतिविधि कार्यालय के प्रभारी प्रोफेसर विमल कुमार ने कहा कि नए ऑनलाइन एम.टेक. कार्यक्रम विद्यार्थियों और पेशेवरों को उद्योग-उन्मुख उन्नत शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम राष्ट्रीय और वैश्विक जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के अनुसार अपनी विशेषज्ञता विकसित कर सकें। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों के पास क्वालिफाइंग डिग्री में न्यूनतम 5.5 सीपीआई अथवा 55 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। प्रवेश प्रक्रिया दो चरणों में होगी, जिसमें आईआईटी कानपुर द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा तथा विभागीय स्तर पर ऑनलाइन परीक्षा अथवा साक्षात्कार शामिल होगा। संस्थान ने बताया कि विभागीय कट-ऑफ के अनुरूप वैध गेट स्कोर रखने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट दी जा सकती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा पांच वर्ष या उससे अधिक का संबंधित कार्य अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों तथा सरकारी विभागों, रक्षा संगठनों एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा नामांकित अभ्यर्थियों को भी विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार छूट प्रदान की जा सकती है। दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया वर्तमान में जारी है तथा कक्षाएं सितंबर 2026 से प्रारंभ होंगी। कार्यक्रमों, पात्रता मानदंड और प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी आईआईटी कानपुर ऑनलाइन प्रोग्राम पोर्टल पर उपलब्ध है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:29:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं को बड़ी सफलता, विकसित की बूंदो की नियंत्रित करने की तकनीक </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु तथा जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ ल्यूबेक के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर लेज़र पल्स की सहायता से तरल बूंदों की दिशा, गति और विखंडन को सटीक रूप से नियंत्रित करने की नई तकनीक विकसित की है। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल "प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस)" में प्रकाशित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी की ओर से जारी बयान में बताया गया कि यह अध्ययन लेज़र और पदार्थ के बीच होने वाली जटिल अंतःक्रियाओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। शोध के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581614/major-breakthrough-for-iit-kanpur-researchers--developed-a-technique-to-control-droplets"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/कानपुर-आईआईटी-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु तथा जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ ल्यूबेक के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर लेज़र पल्स की सहायता से तरल बूंदों की दिशा, गति और विखंडन को सटीक रूप से नियंत्रित करने की नई तकनीक विकसित की है। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल "प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस)" में प्रकाशित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी की ओर से जारी बयान में बताया गया कि यह अध्ययन लेज़र और पदार्थ के बीच होने वाली जटिल अंतःक्रियाओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। शोध के परिणाम लक्षित दवा वितरण, इंकजेट प्रिंटिंग, लेज़र आधारित निर्माण तकनीक तथा बायोमेडिकल अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोल सकते हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में प्रदर्शित किया कि सूक्ष्म तरल बूंदों को लेज़र की सहायता से आगे, पीछे अथवा विभिन्न दिशाओं में नियंत्रित रूप से संचालित किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए बूंद की स्थिति को लेज़र फोकस के अनुरूप समायोजित किया गया तथा लेज़र पल्स की ऊर्जा को नियंत्रित किया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लेज़र से उत्पन्न प्रारंभिक प्लाज़्मा की स्थिति बूंद के आकार, उसके विखंडन और गति को प्रभावित करती है। शोध टीम ने हाई-स्पीड इमेजिंग, ऑप्टिकल मॉडलिंग और मल्टीफेज न्यूमेरिकल सिमुलेशन का उपयोग करते हुए "प्लेसमेंट-एनर्जी मैप्स" विकसित किए हैं। ये मैप्स विभिन्न लेज़र परिस्थितियों में बूंदों के व्यवहार का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रणाली उन जटिल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में सहायक होगी, जिन्हें अब तक सटीक और लगातार दोहराना कठिन माना जाता था। आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. डी. चैतन्य कुमार राव ने कहा कि उनकी टीम लंबे समय से उच्च-शक्ति वाले लेज़र और तरल पदार्थों के बीच होने वाली जटिल भौतिक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इससे पूर्व लेज़र-प्रेरित एटोमाइजेशन, बबल डायनेमिक्स और इंटरफेस से जुड़ी प्रक्रियाओं पर शोध किया गया था तथा यह नया अध्ययन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक बायोमेडिकल उपकरणों, सूक्ष्म स्तर पर पदार्थों के परिवहन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तथा ऊर्जा प्रणालियों में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं के अनुसार अध्ययन की एक प्रमुख उपलब्धि बूंदों के विखंडन को नियंत्रित करने वाले स्थिर और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान है। यह पूरी प्रक्रिया लेज़र की फोकसिंग स्थिति, बूंद के भीतर बनने वाली ऑप्टिकल संरचनाओं तथा आसपास के माध्यम में होने वाले ब्रेकडाउन की विशेषताओं पर निर्भर करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">"लेज़र-प्रेरित तरल बूंदों के विखंडन और बहुदिशात्मक गति का पूर्वानुमान एवं नियंत्रण" शीर्षक वाले इस शोध पत्र के लेखक अवनीश प्रताप सिंह, डॉ. डी. चैतन्य कुमार राव, माइक राहल्वेस, अल्फ्रेड वोगेल तथा सप्तर्षि बसु हैं। आईआईटी कानपुर ने कहा कि यह शोध द्रव यांत्रिकी, लेज़र-द्रव अंतःक्रिया तथा उन्नत प्रणोदन तकनीकों के क्षेत्र में संस्थान के निरंतर योगदान को रेखांकित करता है, जो भविष्य की इंजीनियरिंग और बायोमेडिकल तकनीकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:53:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी कानपुर फाउंडेशन ने दीपक राज को बनाया निदेशक मंडल का नया बोर्ड अध्यक्ष </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर/पैलो आल्टो।</strong> आईआईटी कानपुर फाउंडेशन ने वॉल स्ट्रीट के अनुभवी वित्त विशेषज्ञ एवं परमार्थी दीपक राज को अपने निदेशक मंडल का नया अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की घोषणा की है। फाउंडेशन की ओर से सोमवार को यहां जारी बयान के अनुसार संस्थान के विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान से सम्मानित दीपक राज ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब फाउंडेशन ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और वह अपनी वैश्विक रणनीतिक पहलों का विस्तार कर रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">दीपक राज वैश्विक वित्त और परमार्थ के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वह राज एसोसिएट्स के संस्थापक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579381/iit-kanpur-foundation-appoints-deepak-raj-as-new-chairman-of-the-board-of-directors"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/आईआईटी-कानपुर-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर/पैलो आल्टो।</strong> आईआईटी कानपुर फाउंडेशन ने वॉल स्ट्रीट के अनुभवी वित्त विशेषज्ञ एवं परमार्थी दीपक राज को अपने निदेशक मंडल का नया अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की घोषणा की है। फाउंडेशन की ओर से सोमवार को यहां जारी बयान के अनुसार संस्थान के विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान से सम्मानित दीपक राज ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब फाउंडेशन ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और वह अपनी वैश्विक रणनीतिक पहलों का विस्तार कर रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">दीपक राज वैश्विक वित्त और परमार्थ के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वह राज एसोसिएट्स के संस्थापक हैं तथा मेरिल लिंच में ग्लोबल इक्विटी रिसर्च के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। फाउंडेशन को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में एंडोमेंट और अनुसंधान सहयोग कार्यक्रमों को नई गति मिलेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी कानपुर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार रंजन ने कहा कि वैश्विक वित्त क्षेत्र में दीपक राज का अनुभव और समाजसेवा के क्षेत्र में उनका नेतृत्व फाउंडेशन को मजबूत दिशा देगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं के साथ उनके कार्य ने लोगों को साझा उद्देश्य के लिए साथ लाने की उनकी क्षमता सिद्ध की है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि दीपक राज कई वर्षों से संस्थान के मजबूत सहयोगी रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका पेशेवर सफर छात्रों के लिए प्रेरणादायक है और उनके नेतृत्व में फाउंडेशन संस्थान की प्रगति को नई दिशा देगा। नवनियुक्त अध्यक्ष दीपक राज ने कहा कि आईआईटी कानपुर ने उनके पेशेवर जीवन की मजबूत नींव रखी है और इस भूमिका में संस्थान से पुनः जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य वैश्विक पूर्व छात्र समुदाय को संस्थान की भविष्य दृष्टि से जोड़ना तथा अनुसंधान, नवाचार और अगली पीढ़ी के इंजीनियरों के लिए संसाधन जुटाना है। दीपक राज वर्तमान में न्यू जर्सी स्थित निजी निवेश फर्म राज एसोसिएट्स के प्रबंध निदेशक हैं। मेरिल लिंच में 24 वर्षों के करियर के दौरान उन्होंने कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। वह न्यू जर्सी स्टेट इन्वेस्टमेंट काउंसिल के निर्वाचित अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जो 80 अरब डॉलर के पेंशन फंड की देखरेख करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">परमार्थ के क्षेत्र में भी वह सक्रिय रहे हैं। वह इंडिया फिलान्थ्रॉपी एलायंस और प्रथम् यूएसए के चेयरमैन रह चुके हैं तथा द/नज फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने अपनी पत्नी नीरा राज के साथ कोलंबिया विश्वविद्यालय में "दीपक और नीरा राज सेंटर ऑन इंडियन इकोनॉमिक पॉलिसीज़" की स्थापना की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि आईआईटी कानपुर फाउंडेशन अमेरिका स्थित एक लाभ-निरपेक्ष संगठन है, जो आईआईटी कानपुर के समर्थन, पूर्व छात्र सहभागिता, एंडोमेंट प्रबंधन, अनुसंधान, अवसंरचना विकास और छात्रवृत्तियों के लिए कार्य करता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:00:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IIT Kanpur : आयुर्वेद चिकित्सा को दुनिया की मान्यता दिलाएगा आईआईटी कानपुर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> आयुर्वेद की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता सिद्ध करके वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए आईआईटी कानपुर ने राज्य सरकार के सहयोग से विश्वस्तरीय आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। प्रदेश शासन ने इस संबंध में आईआईटी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए विस्तृत कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र में आयुर्वेदिक दवाओं का सत्यापन-परीक्षण करके वैधता जांचने के बाद वैज्ञानिक प्रमाणीकरण करके उपचार की सही पुष्टि की जाएगी। आईआईटी में खुलने वाले आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र में आयुर्वेद दवाओं को अंतराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त क्लीनिकल प्रमाणीकरण प्रदान किया जाएगा। इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578658/iit-kanpur--iit-kanpur-to-secure-global-recognition-for-ayurvedic-medicine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/iit-kanpur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> आयुर्वेद की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता सिद्ध करके वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए आईआईटी कानपुर ने राज्य सरकार के सहयोग से विश्वस्तरीय आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। प्रदेश शासन ने इस संबंध में आईआईटी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए विस्तृत कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र में आयुर्वेदिक दवाओं का सत्यापन-परीक्षण करके वैधता जांचने के बाद वैज्ञानिक प्रमाणीकरण करके उपचार की सही पुष्टि की जाएगी। आईआईटी में खुलने वाले आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र में आयुर्वेद दवाओं को अंतराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त क्लीनिकल प्रमाणीकरण प्रदान किया जाएगा। इस तरह का यह देश का पहला केंद्र होगा, जो पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मान्यता और तकनीक के साथ जोड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक आईआईटी के प्रस्ताव में इस केंद्र की स्थापना पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाते हुए, इसे राज्य सरकार द्वारा वहन करना प्रस्तावित किया गया है। प्रस्ताव को राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद संस्थान ने केंद्र के लिए परिसर में स्थान चयनित करने की कार्यवाही आरंभ कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान निदेशक का कहना है कि केंद्र की स्थापना के लिए परिसर में पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। अभी आयुर्वेद दवाओं के संबंध में वैज्ञानिक अनुसंधान संबंधी प्रमाणिकता की समस्या सामने आती है, संस्थान की लैब में इस संबंध में प्रयोग करके दवा की वैधता, उपचार, प्रभाव का अध्ययन करके साइंटिफिक वैलिडेशन किया जाएगा। संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का काम पहले ही तेजी से चल रहा है, यह केंद्र उसके बेहतर संचालन में भी मददगार बनेगा।  </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हर्बल गार्डेन में उगाई जाएंगी विभिन्न दुर्लभ जड़ी-बूटियां </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">केंद्र की स्थापना के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के लिए हर्बल गार्डेन भी बनाया जाना है, जिसमें विभिन्न प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियां उगाई जाएंगी। आइआइटी में लघु वन उपज का उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने पर भी काम चल रहा है। इसमें छात्र-छात्राएं तो लघु वन उपज से संबंधित शोध व प्रयोग करने के साथ अपना  स्टार्टअप भी शुरू कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान में आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र की स्थापना पर राज्य सरकार ने सहमति जताई है, अब इस संबंध में वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। केंद्र में आयुर्वेदिक दवाओं का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण किया जाएगा, इससे देश की प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को उपचार की दृष्टि से वैश्विक मान्यता मिलेगी<strong>... प्रो. मणिन्द्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी, कानपुर।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:49:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी बनेगा देश का ‘डीप टेक कैपिटल’, सीएम योगी ने तय किया रोडमैप</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को ‘डीप टेक कैपिटल’ बनाने के लिए स्पष्ट रोडमैप तय करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। ‘इनोवेट इन यूपी, स्केल फॉर द वर्ल्ड’ के विजन के तहत प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन, साइबर सिक्योरिटी और मेड-टेक जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम किया जाएगा।</p>
<p>शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने विभिन्न परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के जरिए मेड-टेक क्षेत्र में नवाचार को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578243/up-to-become-the-country-s--deep-tech-capital---cm-yogi-sets-out-the-roadmap"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(22)4.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को ‘डीप टेक कैपिटल’ बनाने के लिए स्पष्ट रोडमैप तय करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। ‘इनोवेट इन यूपी, स्केल फॉर द वर्ल्ड’ के विजन के तहत प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन, साइबर सिक्योरिटी और मेड-टेक जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम किया जाएगा।</p>
<p>शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने विभिन्न परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के जरिए मेड-टेक क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई, जिसे नवंबर से शुरू करने की तैयारी है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने नोएडा में प्रस्तावित ‘यूपी डीप-टेक हब’ को नवाचार और उद्योग का केंद्र बताते हुए यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही ड्रोन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए प्रदेश को स्वदेशी ड्रोन निर्माण और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने की बात कही।</p>
<p>ग्रीन हाइड्रोजन को ऊर्जा का भविष्य बताते हुए इसके उत्पादन, भंडारण और औद्योगिक उपयोग पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए। वहीं आयुर्वेद के क्षेत्र में क्लिनिकल वैलिडेशन के लिए देश का पहला संस्थागत केंद्र स्थापित करने पर भी विचार किया गया।</p>
<p>सीएम योगी ने कहा कि शोध और उद्योग के बेहतर समन्वय से न केवल नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 10:14:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रिसिल और आईआईटी कानपुर ने एआई अनुसंधान व इंटेलिजेंट सिस्टम्स के लिए मिलाया हाथ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> क्रिसिल लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स (डब्ल्यूएसएआईएस) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटेलिजेंट सिस्टम्स के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साझेदारी के तहत आईआईटी कानपुर में उद्योग एवं शैक्षणिक विशेषज्ञों को आमंत्रित कर एआई, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, इंटेलिजेंट सिस्टम्स और अन्य उभरती तकनीकों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए "क्रिसिल लेक्चर सीरीज" शुरू की जाएगी, जो छात्रों को उद्योग से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा "क्रिसिल स्टूडेंट अवॉर्ड" की भी स्थापना की जाएगी, जिसे हर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576342/crisil-and-iit-kanpur-join-hands-for-ai-research-and-intelligent-systems"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/कानपुर-आईआईटी-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> क्रिसिल लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स (डब्ल्यूएसएआईएस) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटेलिजेंट सिस्टम्स के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साझेदारी के तहत आईआईटी कानपुर में उद्योग एवं शैक्षणिक विशेषज्ञों को आमंत्रित कर एआई, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, इंटेलिजेंट सिस्टम्स और अन्य उभरती तकनीकों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए "क्रिसिल लेक्चर सीरीज" शुरू की जाएगी, जो छात्रों को उद्योग से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा "क्रिसिल स्टूडेंट अवॉर्ड" की भी स्थापना की जाएगी, जिसे हर वर्ष आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में डिपार्टमेंट ऑफ इंटेलिजेंट सिस्टम्स के उत्कृष्ट छात्रों को दिया जाएगा। क्रिसिल की प्रेसिडेंट एवं सीएचआरओ पूजा मिर्चंदानी ने कहा कि यह साझेदारी उद्योग और शिक्षा के बीच सेतु का काम करेगी और छात्रों को उभरती तकनीकों की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स के अधिष्ठाता नितिन सक्सेना ने इस सहयोग को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि इससे छात्रों को वास्तविक दुनिया की एआई समस्याओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। इस समझौते के तहत इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विजिट्स, और छात्रों को उद्योग-आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम करने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 19:36:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IIT Kanpur : आईआईटी कानपुर में 'अभिव्यक्ति 2026' का समापन, डीप-टेक नवाचार को मिला बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय डीप-टेक सम्मेलन 'अभिव्यक्ति 2026' का सफल समापन हुआ। "उन्नत शोध को वैश्विक समाधानों में बदलना" विषय पर आधारित इस आयोजन में देशभर के स्टार्टअप्स, नीति-निर्माता, निवेशक और वैज्ञानिक शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन में 150 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जो एआई/एमएल, मेडटेक, क्लीनटेक, रक्षा एवं एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा, फिनटेक, आईओटी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों से जुड़े थे।आयोजन ने आईआईटी कानपुर को नवाचार, सहयोग और निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन तथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576190/iit-kanpur---abhivyakti-2026--concludes-at-iit-kanpur--deep-tech-innovation-boosted"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/iit-kanpur4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय डीप-टेक सम्मेलन 'अभिव्यक्ति 2026' का सफल समापन हुआ। "उन्नत शोध को वैश्विक समाधानों में बदलना" विषय पर आधारित इस आयोजन में देशभर के स्टार्टअप्स, नीति-निर्माता, निवेशक और वैज्ञानिक शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन में 150 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जो एआई/एमएल, मेडटेक, क्लीनटेक, रक्षा एवं एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा, फिनटेक, आईओटी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों से जुड़े थे।आयोजन ने आईआईटी कानपुर को नवाचार, सहयोग और निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन तथा कुलपति विनय कुमार पाठक ने किया।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन में शोध और बाजार के बीच की दूरी कम करने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने शुरुआती तकनीकों के जोखिम को कम करने, फंडिंग बढ़ाने और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। मेडटेक क्षेत्र में नियामकीय चुनौतियों, शोध को उत्पाद में बदलने और सीएसआर के माध्यम से वित्त पोषण जैसे विषय भी प्रमुख रहे। दूसरे दिन नए बैच लॉन्च, एमओयू हस्ताक्षर और कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर विशेष बल दिया गया, जबकि महिलाओं की भागीदारी पर केंद्रित विशेष पैनल भी आयोजित हुआ।  पिच बैटल में एथ्रोन एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि गोफ्लोट टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड और सिमैक्ट्रिकल्स प्राइवेट लिमिटेड क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनी और नेटवर्किंग सत्रों के माध्यम से स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच संवाद स्थापित हुआ, जिससे फंडिंग और साझेदारी के नए अवसर सृजित हुए। वर्ष 2000 में स्थापित एसआईआईसी, आईआईटी कानपुर का प्रमुख इनक्यूबेशन केंद्र है, जो 500 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन प्रदान करता है। संस्थान देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576190/iit-kanpur---abhivyakti-2026--concludes-at-iit-kanpur--deep-tech-innovation-boosted</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 18:15:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानपुर मेट्रो की रफ्तार धमाकेदार: जल्द खुलेगा कॉरिडोर-1 का बाकी हिस्सा, ट्रायल रन जारी, जानें कॉरिडोर-2 का अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>कानपुर मेट्रो परियोजना तेजी से अपने विस्तार की ओर बढ़ रही है। कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द यात्री सेवाएं शुरू होने की तैयारी है, जबकि कॉरिडोर-2 का निर्माण कार्य भी तेज गति से जारी है, जिसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो सेवा पहले से संचालित है। कॉरिडोर-1 के बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों पर ट्रायल रन जारी है और जल्द ही यहां यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। कुल 23 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 15.4 किमी सेक्शन चालू है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575926/kanpur-metro-s-speed-is-explosive--the-rest-of-corridor-1-will-open-soon--trial-runs-are-underway--and-updates-on-corridor-2-are-available"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(32)8.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>कानपुर मेट्रो परियोजना तेजी से अपने विस्तार की ओर बढ़ रही है। कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द यात्री सेवाएं शुरू होने की तैयारी है, जबकि कॉरिडोर-2 का निर्माण कार्य भी तेज गति से जारी है, जिसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो सेवा पहले से संचालित है। कॉरिडोर-1 के बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों पर ट्रायल रन जारी है और जल्द ही यहां यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। कुल 23 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 15.4 किमी सेक्शन चालू है, जबकि शेष हिस्से में अंडरग्राउंड व एलिवेटेड निर्माण अंतिम चरण में है। कॉरिडोर-2 के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक 8.6 किमी लंबे रूट पर निर्माण तेजी से चल रहा है। रावतपुर से डबल पुलिया तक भूमिगत स्टेशन और टीबीएम सुरंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि एलिवेटेड सेक्शन पर भी तेजी से काम जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>कानपुर देहात </category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:02:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी कानपुर व मध्य कमान के बीच एमओयू, निर्माण प्रबंधन में क्षमता निर्माण को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने निर्माण प्रबंधन में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्य अभियंता, सेंट्रल कमांड मुख्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस समझौते का उद्देश्य सेंट्रल कमांड के अधिकारियों की तकनीकी एवं प्रबंधकीय क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। यह पहल भारतीय सेना की संस्थागत विकास में शैक्षणिक विशेषज्ञता के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमओयू के तहत "निर्माण प्रबंधन: गुणवत्ता, अनुबंध और मध्यस्थता" शीर्षक से एक विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम इस माह के अंत में प्रारंभ किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575784/mou-between-iit-kanpur-and-central-command-to-boost-capacity-building-in-construction-management"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/कानपुर-आईआईटी-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने निर्माण प्रबंधन में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्य अभियंता, सेंट्रल कमांड मुख्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस समझौते का उद्देश्य सेंट्रल कमांड के अधिकारियों की तकनीकी एवं प्रबंधकीय क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। यह पहल भारतीय सेना की संस्थागत विकास में शैक्षणिक विशेषज्ञता के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमओयू के तहत "निर्माण प्रबंधन: गुणवत्ता, अनुबंध और मध्यस्थता" शीर्षक से एक विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम इस माह के अंत में प्रारंभ किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में गुणवत्ता, आश्वासन, आधुनिक अनुबंध प्रबंधन और प्रभावी विवाद समाधान तंत्र पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थान के अनुसार यह सहयोग अधिकारियों को समकालीन कार्यप्रणालियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और शैक्षणिक अनुभव से जोड़ते हुए परिचालन अवसंरचना परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती परियोजना जटिलताओं और पारदर्शिता व जवाबदेही की आवश्यकता को देखते हुए यह कार्यक्रम विशेष रूप से उपयोगी रहेगा। इस पहल से निर्माण प्रबंधन में तकनीकी दक्षता बढ़ने, अनुबंध प्रशासन एवं मध्यस्थता क्षमताओं के सुदृढ़ होने तथा परियोजनाओं के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार की अपेक्षा जताई गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 21:26:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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