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                            <item>
                <title>Uttrakhand:मनमानी पर 10 निजी स्कूलों को प्रशासन ने फिर भेजे नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक बार फिर से नोटिस भेजे गए हैं। स्कूलों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देश पर सीईओ जीआर जायसवाल ने शहर के 10 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। </p>
<p>नोटिस पाने वाले स्कूलों में वुडलैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल (हिम्मतपुर तल्ला), डी लैंप पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), दर्पण पब्लिक स्कूल (हरिपुरनायक, कुसुमखेड़ा), इम्युनल पब्लिक स्कूल (मुखानी), हाइलेंडर्स पब्लिक स्कूल (कलावती कॉलोनी), ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल (बरेली रोड), टेंडर फीट पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), एल्केमे स्कूल (कुसुमखेड़ा), जय दुर्गे एजुकेशनल पब्लिक स्कूल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581005/administration-sends-notices-again-to-10-private-schools-over-arbitrary-practices"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/sc1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक बार फिर से नोटिस भेजे गए हैं। स्कूलों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देश पर सीईओ जीआर जायसवाल ने शहर के 10 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। </p>
<p>नोटिस पाने वाले स्कूलों में वुडलैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल (हिम्मतपुर तल्ला), डी लैंप पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), दर्पण पब्लिक स्कूल (हरिपुरनायक, कुसुमखेड़ा), इम्युनल पब्लिक स्कूल (मुखानी), हाइलेंडर्स पब्लिक स्कूल (कलावती कॉलोनी), ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल (बरेली रोड), टेंडर फीट पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), एल्केमे स्कूल (कुसुमखेड़ा), जय दुर्गे एजुकेशनल पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा बंदोबस्ती) और न्यू फेगलैंड पब्लिक स्कूल शामिल हैं। जांच के दौरान पाया गया कि कई स्कूल निर्धारित पाठ्यक्रम से हटकर एनसीईआरटी के अलावा महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। </p>
<p>साथ ही कुछ स्कूलों की ओर से विशेष विक्रेताओं से किताबें और शिक्षण सामग्री खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बनाने और वेबसाइट पर जरूरी सूचनाएं सार्वजनिक न करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 28 स्कूलों को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। स्कूलों को 15 दिन के भीतर संशोधित बुक लिस्ट जारी कर एनसीईआरटी की किताबें लागू करनी हैं। साथ ही किसी भी दुकान विशेष की बाध्यता समाप्त करने, वेबसाइट पर बुक लिस्ट और फीस स्ट्रक्चर की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने, अतिरिक्त खरीदी गई पुस्तकों के लिए अभिभावकों को रिफंड और एडजस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>आरटीई, सीपीए का होगा अनुपालन</strong><br />कार्रवाई बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सीपीए) 2019 और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, सुलभ और आर्थिक रूप से न्यायसंगत बनाना है।<br />स्कूलों को दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा।</p>
<p><strong>आदेश न मानने पर होगी मान्यता रद्द</strong><br />हल्द्वानी। डीएम के निर्देश पर ब्लॉक स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित की गई हैं, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। निर्धारित समयसीमा में आदेशों का पालन न करने पर संबंधित स्कूलों की मान्यता निलंबित या निरस्त करने सहित विधिक कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है और किसी भी तरह की अवहेलना पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 10:09:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP: प्रशासन के आदेशों को हवा में उड़ा रहे प्राइवेट स्कूलों के संचालक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रामपुर, अमृत विचार। </strong>प्राइवेट स्कूल संचालक प्रशासन के आदेशों को हवा में उड़ा रहे हैं। संचालकों द्वारा अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को दबाव बनाया जा रहा है। निजी प्रकाशकों की किताबें कई गुना महंगी हैं। प्राइवेट स्कूलों के संचालकों की मनमानी से अभिभावकों की जेब पर डाका पड़ रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने कहा कि अभियान चलाकर ऐसे स्कूल संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>प्रशासन द्वारा संचालकों और प्रधानाचार्यों को कक्षा 8 तक एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराने के आदेश दिए हैं। लेकिन जिले के अधिकांश स्कूलों में प्रशासन के आदेशों का पालन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577304/private-school-operators-are-flouting-the-administration-s-orders"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/books.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रामपुर, अमृत विचार। </strong>प्राइवेट स्कूल संचालक प्रशासन के आदेशों को हवा में उड़ा रहे हैं। संचालकों द्वारा अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को दबाव बनाया जा रहा है। निजी प्रकाशकों की किताबें कई गुना महंगी हैं। प्राइवेट स्कूलों के संचालकों की मनमानी से अभिभावकों की जेब पर डाका पड़ रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने कहा कि अभियान चलाकर ऐसे स्कूल संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>प्रशासन द्वारा संचालकों और प्रधानाचार्यों को कक्षा 8 तक एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराने के आदेश दिए हैं। लेकिन जिले के अधिकांश स्कूलों में प्रशासन के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों के प्रवेश के समय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं। कई स्कूल संचालकों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए कहा गया है। जिसके कारण अभिभावकों के जेब पर बेवजह का बोझ बढ़ गया है। पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर अभिभावकों की भीड़ लग रही है और बहुत देर बाद कोर्स खरीदने के लिए नंबर आ रहा है।</p>
<p><br />मोईन ने बताया कि निजी स्कूलों की मनमानी से तंग आ गए हैं समाज के डर से बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है वर्ना उनसे अच्छी पढ़ाई सरकारी स्कूलों में है। वहां प्रशिक्षित टीचर हैं। <br />फैजान के मुताबिक प्राइवेट स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाए जाने पर जोर है। जबकि, एनसीईआरटी की किताबें बहुत कम कीमत में उपलब्ध हैं। स्कूल संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं। हमजा ने बताया कि कोर्स लेने आए थे लेकिन, किताबों की दुकानों पर बहुत भीड़ है। काफी देर से किताबों के खरीदने के इंतजार में खड़े हैं। स्कूल में जिन किताबों की लिस्ट दी गई है वही खरीदेंगे।</p>
<p>दूसरी तरफ  पुस्तक विक्रेता अभिषेक ने बताया कि निजी प्रकाशकों की किताबें 700 रुपये कीमत की हैं। स्कूलों द्वारा जिन किताबों को सजेस्ट किया जाता है वही किताबे बच्चों के अभिभावकों को दी जाती हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक अंजलि अग्रवाल का कहना है कि मनमानी करने वाले निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर चेकिंग कराई जाएगी कि कौन सी किताबों को खरीदने पर जोर दिया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                            <category>रामपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 10:07:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Moradabad:निजी स्कूलों में ‘कमीशन’ का खेल...बिक रहीं महंगी किताबें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की किताबों को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। फीस के साथ-साथ महंगी पुस्तकें भी बजट पर भारी पड़ रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश होने के बावजूद कई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों को हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।</p>
<p>शहर के एक निजी स्कूल की कक्षा पांच की बुक लिस्ट में 16 किताबें शामिल हैं। इनकी कुल कीमत करीब 5938 रुपये है। इसके अलावा नोटबुक और स्टेशनरी जोड़ने पर खर्च 7581</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577026/the-%E2%80%98commission%E2%80%99-racket-in-private-schools----expensive-books-being-sold"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/books.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की किताबों को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। फीस के साथ-साथ महंगी पुस्तकें भी बजट पर भारी पड़ रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश होने के बावजूद कई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों को हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।</p>
<p>शहर के एक निजी स्कूल की कक्षा पांच की बुक लिस्ट में 16 किताबें शामिल हैं। इनकी कुल कीमत करीब 5938 रुपये है। इसके अलावा नोटबुक और स्टेशनरी जोड़ने पर खर्च 7581 रुपये तक पहुंच जाता है। सूची में वर्कबुक, प्रैक्टिस बुक और अलग-अलग विषयों की अतिरिक्त किताबें भी शामिल हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग इस मामले में सख्ती करे और निजी प्रकाशकों के कमीशन पर रोक लगाए।</p>
<p>वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि अभिभावकों की ओर से शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। इसके अलावा स्कूलवार किताबों की लिस्ट मंगाई गई है। स्कूल संचालक नियम विरुद्ध किताबें न लगाएं इसकी निगरानी की जाएगी।</p>
<p><strong>एनसीईआरटी बनाम निजी किताबें</strong><br />कक्षा पांच की सभी एनसीईआरटी किताबें लगभग 800 से 900 रुपये में उपलब्ध हो जाती हैं। इसके मुकाबले निजी प्रकाशकों की किताबों पर सात हजार रुपये से अधिक खर्च कराया जा रहा है। यानी अभिभावकों पर छह-सात हजार रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नियमों की अनदेखी</strong><br />सरकारी निर्देशों के अनुसार स्कूलों को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से पढ़ाई करानी चाहिए और अतिरिक्त किताबें अनिवार्य नहीं की जा सकतीं। इसके बावजूद कई स्कूल 10 में से सिर्फ दो-तीन किताबें एनसीईआरटी की लगाकर बाकी सभी निजी प्रकाशकों की रख रहे हैं।</p>
<p><strong>अभिभावकों की मजबूरी</strong><br />अभिभावकों का कहना है कि स्कूल द्वारा दी गई सूची के अनुसार ही किताबें खरीदनी पड़ती हैं। खास बात यह है कि अधिकांश निजी स्कूलों की किताबें चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। ऐसे उन्हें महंगे दामों पर ही किताब खरीदनी पड़ रही हैं। बाजार में एनसीईआरटी किताबों की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:01:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Moradabad: निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं, महंगी किताबों से अभिभावक परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>शहर में निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही स्कूलों ने अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों की सूची थमा दी है। जिससे अभिभावक परेशान हैं।</p>
<p>दूसरी ओर शहर की स्टेशनरी दुकानों पर एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों की भारी कमी बनी हुई है। अभिभावक सस्ती और निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें तलाश रहे हैं, लेकिन उपलब्धता न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के निर्देशों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576876/no-check-on-the-arbitrary-practices-of-private-schools--parents-troubled-by-expensive-textbooks"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/opt2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>शहर में निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही स्कूलों ने अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों की सूची थमा दी है। जिससे अभिभावक परेशान हैं।</p>
<p>दूसरी ओर शहर की स्टेशनरी दुकानों पर एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों की भारी कमी बनी हुई है। अभिभावक सस्ती और निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें तलाश रहे हैं, लेकिन उपलब्धता न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के निर्देशों के बावजूद निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। </p>
<p>इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि एनसीईआरटी आधारित किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए पहले ही संबंधित संस्थानों को पत्र भेजा जा चुका है। साथ ही, शहर के निजी स्कूलों से नए सत्र में लागू की जाने वाली पुस्तकों की सूची भी मांगी गई है। </p>
<p>उन्होंने बताया कि कि सूची में यह उल्लेख होना जरूरी है कि कौन-कौन सी पुस्तकें एनसीईआरटी की होंगी और कौन सी निजी प्रकाशकों की। यदि किसी विद्यालय द्वारा सूची में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या नियमों का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576876/no-check-on-the-arbitrary-practices-of-private-schools--parents-troubled-by-expensive-textbooks</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेरठ में NCERT की नकली पुस्तकों की बड़ी खेप बरामद, तीन लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मेरठ।</strong> उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नकली पुस्तकों की आपूर्ति करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से करीब 13,000 नकली पुस्तकें और दो वाहन बरामद किए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को कुड़ी कमालपुर नहर पुल पर वाहनों की जांच के दौरान दो वाहनों को रोका गया और उनकी तलाशी लेने पर एनसीईआरटी की लगभग 2,000 नकली पुस्तकें बरामद हुईं। पुलिस क्षेत्राधिकारी पंकज लवानिया ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575969/large-consignment-of-fake-ncert-books-seized-in-meerut--three-arrested"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/arest2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मेरठ।</strong> उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नकली पुस्तकों की आपूर्ति करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से करीब 13,000 नकली पुस्तकें और दो वाहन बरामद किए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को कुड़ी कमालपुर नहर पुल पर वाहनों की जांच के दौरान दो वाहनों को रोका गया और उनकी तलाशी लेने पर एनसीईआरटी की लगभग 2,000 नकली पुस्तकें बरामद हुईं। पुलिस क्षेत्राधिकारी पंकज लवानिया ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर मटौरा ग्राम स्थित एक गोदाम से करीब 11,000 अतिरिक्त नकली पुस्तकें भी बरामद की गईं। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि बरामद पुस्तकों की कुल कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई है। अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राहुल यादव, राहुल राणा और बाबर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये पुस्तकें अवैध रूप से छापकर बाजार में उपलब्ध कराई जा रही थीं। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मवाना थाने में मामला दर्ज कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मेरठ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 17:31:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी बोर्ड का बड़ा फैसला: कक्षा 9 से 12 तक NCERT किताबें सिर्फ 393-458 रुपये में, महंगी निजी किताबों पर लगेगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>उप्र. माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी की 70 पाठ्यपुस्तकों और हिंदी, संस्कृत व उर्दू की 12 पुस्तकों को सस्ते दरों पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। ये पुस्तकें प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में लागू होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीईआरटी की किताबें विशेषज्ञ शिक्षाविदों द्वारा तैयार की जाती हैं और अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न भी इन्हीं पर आधारित होते हैं। इससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वयं सीखने की क्षमता विकसित होती है। इन पुस्तकों के मुद्रण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575375/up-board-s-big-decision--ncert-books-for-classes-9-to-12-will-be-available-for-just-rs-393-458--expensive-private-books-will-be-banned"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(8)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>उप्र. माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी की 70 पाठ्यपुस्तकों और हिंदी, संस्कृत व उर्दू की 12 पुस्तकों को सस्ते दरों पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। ये पुस्तकें प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में लागू होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीईआरटी की किताबें विशेषज्ञ शिक्षाविदों द्वारा तैयार की जाती हैं और अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न भी इन्हीं पर आधारित होते हैं। इससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वयं सीखने की क्षमता विकसित होती है। इन पुस्तकों के मुद्रण व वितरण के लिए प्रदेश में केवल तीन एजेंसियों को मुद्रक व प्रकाशक अधिकृत किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेस क्लब में सोमवार को अधिकृत मुद्रक सिंघल एजेंसीज,लखनऊ के अभिनव अग्रवाल बताया कि परिषद के निर्देशानुसार अधिकृत पुस्तकों के अलावा किसी अन्य किताब से पढ़ाई नहीं कराई जाएगी, ताकि छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। इसके लिए प्रदेश में शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्र में ब्लाक स्तर तक पुस्तकें उपलब्ध करायी जाएंगी। पीतांबरा बुक्स प्रा.लि. झांसी के सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि कक्षा 9 से 12 तक के पुस्तक सेट की कीमत 393 रुपये से 458 रुपये के बीच रखी गई है, जो निजी प्रकाशकों की किताबों से लगभग एक-तिहाई है। इतना ही नहीं, पुस्तकों के कम मूल्य होने के बावजूद अधिकृत मुद्रकों द्वारा खुले बाजार में थोक विक्रेताओं का एमआरपी पर 20 प्रतिशत की छूट जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पायनियर प्रिंटर्स, आगरा के रुचिर बंसल ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद की कक्षा 11 एवं 12 के लिए 36 विषयों की 70 पुस्तकों की और कक्षा 9 से 12 तक परिषद द्वारा हिन्दी, संस्कृत एवं उर्दू विषयों की 12 पाठ्यपुस्तकों की सूची मूल्य समेत उपलब्ध करा दी गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 09:56:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा में हंगामा: फसल बीमा से लेकर LPG संकट तक... सरकार को विपक्ष ने घेरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की बर्बाद फसलों की भरपाई के लिए दी जाने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि के समय पर भुगतान का मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने शून्य काल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को फसल बीमा के नाम पर 10 रुपए से भी कम भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में तो यह राशि केवल तीन रुपए तीन तक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को भुगतान पाने के लिए जटिल प्रक्रिया को पूरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574805/ruckus-in-rajya-sabha--mps-bombarded-questions-on-issues-ranging-from-farmers--crop-insurance-to-gas-cylinders"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(69)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की बर्बाद फसलों की भरपाई के लिए दी जाने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि के समय पर भुगतान का मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने शून्य काल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को फसल बीमा के नाम पर 10 रुपए से भी कम भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में तो यह राशि केवल तीन रुपए तीन तक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को भुगतान पाने के लिए जटिल प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है और कई मामलों में उन्हें कोई ना कोई कारण बता कर भुगतान से मना कर दिया जाता है। शुक्ला ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मामूली राशि भी किसान को समय पर नहीं मिल पाती इसलिए उनकी मांग है कि फसल बीमा राशि के भुगतान के लिए एक समय सीमा निश्चित की जानी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के बृजलाल ने अर्धसैनिक बलों के जवानों और अधिकारियों को वीरता पदक के लिए दिए जाने वाले पदक भत्ते को बढ़ाए जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वीरता के लिये दिये जाने वाले राष्ट्रपति पदक की पुरस्कार राशि को 3000 से बढ़कर 6000 किया गया था लेकिन वीरता के लिए पुलिस पदक की पुरस्कार राशि लंबे समय से 2000 रुपए से बढ़ाई नहीं गई है उन्होंने कहा कि इस राशि को बढ़ाकर 4000 किया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल और राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने निजी अस्पतालों तथा बीमा स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मिली भगत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे हैं और उनके दावों की राशि का पूरा भुगतान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कानून बनाए जाने की मांग की। बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और फलों पर रसायन के छिड़काव तथा उन्हें पकाने के लिए हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इन रसायनों का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसके कारण लोग बीमार हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के संजय सेठ ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पर्यटन स्थलों को यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए नामांकन किए जाने की मांग की। उन्हीं की पार्टी के बाबूभाई देसाई ने देश में बढ़ते त्वचा कैंसर के मामलों से निपटने के लिए एक व्यापक और दीर्घ कार्यक्रम नीति बनाने की जरूरत बताई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिला स्तर पर इसके लिए निदान केंद्र भी बनाए जाने चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के सुरेंद्रनगर ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो परियोजना का काम जल्द शुरू किए जाने की मांग की। शिवसेना उद्धव ठाकरे की प्रियंका चतुर्वेदी ने एनसीईआरटी की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय को लेकर न्यायपालिका की टिप्पणियों और पाठ्यक्रम टीम के संबंध में दिए गए आदेशों पर सवाल खड़ा किया। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2014 में जो सिलेंडर 420 रुपए का था वह अब 914 रुपए का हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार केवल अच्छे-अच्छे स्लोगन बनाने में माहिर है लेकिन वास्तव में स्थिति कुछ और होती है। <span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:11:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय: पाठ्यपुस्तक और प्रतिष्ठा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यदि किसी संवैधानिक संस्था- विशेषकर न्यायपालिका को त्रुटिपूर्ण या भ्रामक तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया जाए, तो उसका प्रभाव केवल अकादमिक नहीं, संस्थागत विश्वसनीयता पर भी पड़ता है। कैशोर्य में स्थापित धारणा दीर्घकालिक होती है। अतः कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ संबंधी संदर्भों पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और असाधारण कड़ा रुख पूरी तरह सही है, हालांकि इस कठोर प्रतिक्रिया को देख कर यह प्रश्न स्वाभाविक है कि एनसीईआरटी द्वारा अतीत में इतिहास, राजनीति, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में हुए विवादित बदलावों पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान ले कर ऐसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573627/editorial--textbooks-and-reputation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/sampadkiy22.jpg" alt=""></a><br /><p>यदि किसी संवैधानिक संस्था- विशेषकर न्यायपालिका को त्रुटिपूर्ण या भ्रामक तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया जाए, तो उसका प्रभाव केवल अकादमिक नहीं, संस्थागत विश्वसनीयता पर भी पड़ता है। कैशोर्य में स्थापित धारणा दीर्घकालिक होती है। अतः कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ संबंधी संदर्भों पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और असाधारण कड़ा रुख पूरी तरह सही है, हालांकि इस कठोर प्रतिक्रिया को देख कर यह प्रश्न स्वाभाविक है कि एनसीईआरटी द्वारा अतीत में इतिहास, राजनीति, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में हुए विवादित बदलावों पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान ले कर ऐसी त्वरित कारगुजारी क्यों नहीं की? संभवतः न्यायालय सामान्यतः नीतिगत-शैक्षिक सामग्री में हस्तक्षेप से बचता है पर संविधान-विरोध या गंभीर विधिक उल्लंघन के मामले में अधिक सक्रिय रहता है। </p>
<p>न्यायालय द्वारा आपत्तिजनक सामग्री पर रोक, पुनर्मुद्रण रोकना और डिजिटल प्रसार पर प्रतिबंध तकनीकी युग में पूर्णतः लागू करना कठिन अवश्य है, पर यह स्पष्ट संदेश देता है कि संस्थागत प्रतिष्ठा से समझौता नहीं होगा, हालांकि दीर्घकालिक समाधान सेंसरशिप नहीं, बल्कि गुणवत्ता-नियंत्रण और संतुलित अकादमिक विमर्श है। जाहिर है पुस्तक के उक्त अध्याय में न्यायपालिका के मात्र दोषों का उल्लेख हो और राजनीति व व्यवस्थापिका की समांतर चर्चा न हो, तो यह संतुलनहीनता है। यदि देश में भष्टाचार चहुंओर है, तो लोकतंत्र की तीनों शाखाओं में उसकी व्याप्ति को समग्रता में पढ़ाया जाना चाहिए।</p>
<p> न्यायपालिका की ऐतिहासिक उपलब्धियों मौलिक अधिकारों की रक्षा, जनहित याचिकाएं, आपातकालीन दुरुपयोग पर अंकुश का उल्लेख न होना, अधूरा चित्र प्रस्तुत करता है। एनसीईआरटी का यह कहना कि त्रुटि ‘अनजाने’ में हुई, सहज स्वीकार्य नहीं। पाठ्यपुस्तक निर्माण बहु-स्तरीय प्रक्रिया है। लेखन, समीक्षा, संपादन, विशेषज्ञ समिति और उच्चस्तरीय स्वीकृति। यदि इन सबके बाद भी तथ्यात्मक या संदर्भगत भूल रह गई, तो जानबूझकर की गई क्यों न मानी जाए। सार्वजनिक खेद स्वागतयोग्य है पर इसकी आड़ ले, दायित्व से बचने की बजाए पारदर्शी जांच, जिम्मेदारी तय करने और सुधारात्मक उपाय लागू होने चाहिए। दोष केवल एनसीईआरटी तक सीमित नहीं हो सकता। </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय और व्यापक नीतिगत ढांचा भी इसके लिए समान रूप से उत्तरदायी हैं। पाठ्यक्रम परिवर्तन अक्सर राजनीतिक-सामाजिक विमर्श से प्रभावित होते हैं, ऐसे में पारदर्शिता और बहु-विचारधारात्मक समीक्षा अत्यंत अनिवार्य है। यदि यह सिद्ध हो कि प्रकाशन न्यायपालिका को कलंकित करने के उद्देश्य से जानबूझकर किया गया, तो यह गंभीर कदाचार है। तथ्यों का विकृतिकरण, शिकायतों की संख्या को संदर्भ-विहीन प्रस्तुत करना या पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की टिप्पणियों को गलत अर्थ में उद्धृत करना, ये सब संस्थागत अवमानना की सीमा तक जा सकते हैं और भारी सज़ा की वजह बन सकते हैं, पर आपराधिक अवमानना तब बनती है जब न्याय के प्रशासन में बाधा उत्पन्न हो या न्यायालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य स्पष्ट हो, किंतु इसके लिए दुर्भावना और आशय का प्रमाण आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/573627/editorial--textbooks-and-reputation</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 08:07:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की 8वीं क्लास की ''सामाजिक विज्ञान'' किताब पर लगाया प्रतिबंध, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong> उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की उन किताबों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक अध्याय शामिल है। न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने के इरादे से की गई ''सुनियोजित साजिश'' है, साथ ही अदालत ने भ्रष्टाचार पर अध्याय से संबंधित कक्षा आठ की सभी किताबों, उनकी प्रतियों और डिजिटल स्वरूपों को जब्त करने का आदेश दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ''उन्होंने ऐसा आघात किया है, जिससे न्यायपालिका आहत हुई है।''</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573397/supreme-court-imposes-complete-ban-on-ncert-class-8-book"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong> उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की उन किताबों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक अध्याय शामिल है। न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने के इरादे से की गई ''सुनियोजित साजिश'' है, साथ ही अदालत ने भ्रष्टाचार पर अध्याय से संबंधित कक्षा आठ की सभी किताबों, उनकी प्रतियों और डिजिटल स्वरूपों को जब्त करने का आदेश दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ''उन्होंने ऐसा आघात किया है, जिससे न्यायपालिका आहत हुई है।''</p>
<p>एक दिन पहले प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीईआरटी को सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में ''अनुचित सामग्री'' के लिए माफी मांगने और उचित अधिकारियों से परामर्श करके इसे फिर से लिखने की बात कही थी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। पीठ ने एनसीईआरटी के निदेशक और विद्यालय शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे पूछा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अवमानना ​​​​की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। एनसीईआरटी के बुधवार के पत्र का जिक्र करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''यह (पत्र) अपने आप में गहरी साजिश को दर्शाता है... एक सुनियोजित साजिश।''</p>
<p>पीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसा लगता है कि न्यायपालिका को कमजोर करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की ''सोची-समझी साजिश'' रची जा रही है। पीठ ने चेतावनी दी कि अगर उसके निर्देशों का किसी भी तरह से उल्लंघन किया गया तो गंभीर कार्रवाई की जाएगी। पुस्तक की सामग्री का हवाला देते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि इस प्रकार के व्यवहार का न्यायपालिका पर गहरा असर पड़ेगा। इस तरह का आचरण आपराधिक अवमानना ​​की परिभाषा के अंतर्गत आएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर इसे रोका नहीं गया तो इससे न्यायपालिका में लोगों का विश्वास कम होगा। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि मैं इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाऊं।''</p>
<p>उन्होंने कहा, ''हम गहन जांच करना चाहेंगे।'' पीठ ने इसके बाद निर्देश दिया कि केंद्र और राज्यों के शिक्षा विभागों के समन्वय से एनसीईआरटी यह सुनिश्चित करे कि पुस्तक की सभी प्रतियां, चाहे वह 'हार्ड कॉपी' हो या 'सॉफ्ट कॉपी', उन्हें सार्वजनिक पहुंच से हटा दिया जाए। पीठ ने कहा, ''अत्यधिक सावधानी बरतते हुए आगे पुस्तक के किसी भी तरह से प्रकाशन, पुनर्मुद्रण या डिजिटल प्रसार पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाता है।'' न्यायालय ने कहा कि पुस्तक को भौतिक या डिजिटल रूप से वितरित करने का कोई भी प्रयास अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना माना जाएगा। </p>
<p>नयी पाठ्यपुस्तक में ''न्यायपालिका में भ्रष्टाचार'' शीर्षक वाले खंड में कहा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों में से हैं। पाठ्यपुस्तक की सामग्री में यह भी कहा गया है कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है, बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था। </p>
<p>शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि कार्यवाही का उद्देश्य किसी भी वैध आलोचना को दबाना या न्यायपालिका की समीक्षा के अधिकार के प्रयोग को रोकना नहीं है। सुनवाई शुरू होने पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से बिना शर्त माफी मांगी। प्रधान न्यायाधीश हालांकि इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी के पत्र में माफी का एक भी शब्द नहीं है, बल्कि इसमें अध्याय को सही ठहराने की कोशिश की गई है। </p>
<p>पीठ ने कहा कि पुस्तक में शब्दों और अभिव्यक्तियों का चयन असावधानी के कारण या अनजाने में हुई गलती नहीं कहा जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस उम्र में छात्रों को ''पक्षपातपूर्ण विमर्श'' से अवगत कराना सरासर अनुचित है, क्योंकि इससे मूलभूत गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की। </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश ने बुधवार को कहा कि दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने और उसकी ईमानदारी को धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिबल और अभिषेक सिंघवी द्वारा इस मामले का जिक्र किए जाने के बाद प्रधान न्यायाधीश स्पष्ट रूप से नाराज दिखे। </p>
<p>उन्होंने कहा, ''किसी भी कीमत पर मैं इसकी अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा। मुझे इससे निपटना आता है।'' स्कूल शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार एनसीईआरटी ने बुधवार को अपनी वेबसाइट से पुस्तक हटाने के कुछ घंटों बाद ही पाठ्यपुस्तक का वितरण रोक दिया। परिषद ने कहा कि वह ''न्यायपालिका का अत्यंत सम्मान करती है और उसे भारतीय संविधान का रक्षक एवं मौलिक अधिकारों का संरक्षक मानती है''। एनसीईआरटी ने इस त्रुटि को पूरी तरह से अनजाने में हुई घटना बताया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:59:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Moradabad: गाइडबुक या महंगी किताबें थोपी तो होगी मान्यता रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>यूपी प्रयागराज माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक एनसीईआरटी आधारित 70 पाठ्य पुस्तकों को फरवरी 2026 से सस्ते दाम पर उपलब्ध करा दिया है।केवल तीन अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य होंगी। बाकी पर पांच लाख तक जुर्माना लगेगा।</p>
<p>मंगलवार को जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि अधिकृत प्रकाशक कक्षा 9 एवं 12 मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स, आगरा। कक्षा 10 मेसर्स पीताम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड, बिजौली, झांसी।कक्षा 11: मेसर्स सिंघल एजेंसी, लखनऊ।परिषद के इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के प्रावधानों के तहत केवल ये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573322/imposing-guidebooks-or-expensive-books-will-result-in-cancellation-of-recognition"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/books.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुरादाबाद, अमृत विचार। </strong>यूपी प्रयागराज माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक एनसीईआरटी आधारित 70 पाठ्य पुस्तकों को फरवरी 2026 से सस्ते दाम पर उपलब्ध करा दिया है।केवल तीन अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य होंगी। बाकी पर पांच लाख तक जुर्माना लगेगा।</p>
<p>मंगलवार को जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि अधिकृत प्रकाशक कक्षा 9 एवं 12 मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स, आगरा। कक्षा 10 मेसर्स पीताम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड, बिजौली, झांसी।कक्षा 11: मेसर्स सिंघल एजेंसी, लखनऊ।परिषद के इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के प्रावधानों के तहत केवल ये पुस्तकें स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी। </p>
<p>अनधिकृत प्रकाशन एपसीआरटी नाम से नकली किताबें बेचकर छात्रों को भ्रमित कर रहे हैं। हाईकोर्ट का फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को राजकीय प्रकाशन की याचिका खारिज कर परिषद के अधिकारों की पुष्टि की। कोर्ट ने अनधिकृत मुद्रण, पाइरेसी पर पुलिस और अन्य विभागों से कार्रवाई के आदेश दिए। स्कूलों को निर्देश है कि छात्रों पर गाइडबुक या महंगी किताबें न थोपें, वरना मान्यता रद्द हो सकती</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 14:28:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Good News: छात्रों को सस्ते दरों पर मिलेंगी यूपी बोर्ड की पुस्तकें, बुकस्टॉल जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span>अमृत विचार: </strong>उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अपने छात्र-छात्राओं के लिए किफायती दरों पर पुस्तकें उपलब्ध कराने की अनूठी पहल की है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिलों के निर्धारित पुस्तक बिक्री केंद्रों की सूची जारी की है, जहां से कक्षा 9 से 12 तक के छात्र सभी विषयों की पुस्तकें अत्यंत कम दाम में खरीद सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">कक्षा 9 से 12 तक की सभी प्रमुख पुस्तकें सस्ती दरों पर</span></strong></h3>
<p style="text-align:justify;">माध्यमिक शिक्षा परिषद शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9 व 10) की अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और इंटरमीडिएट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567050/good-news--students-will-get-up-board-books-at-cheap-rates--bookstall-launched"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(24)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span>अमृत विचार: </strong>उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अपने छात्र-छात्राओं के लिए किफायती दरों पर पुस्तकें उपलब्ध कराने की अनूठी पहल की है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिलों के निर्धारित पुस्तक बिक्री केंद्रों की सूची जारी की है, जहां से कक्षा 9 से 12 तक के छात्र सभी विषयों की पुस्तकें अत्यंत कम दाम में खरीद सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">कक्षा 9 से 12 तक की सभी प्रमुख पुस्तकें सस्ती दरों पर</span></strong></h3>
<p style="text-align:justify;">माध्यमिक शिक्षा परिषद शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9 व 10) की अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 11 व 12) की अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान सहित कुल 36 विषयों की 70 एनसीईआरटी पुस्तकें सस्ते दर पर उपलब्ध कराई गई हैं। इसी प्रकार कक्षा 9 से 12 तक परिषद द्वारा विकसित हिन्दी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्यपुस्तकें भी छात्रों के अध्ययनार्थ सस्ते दर पर मिलेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">अन्य पुस्तकें नहीं पढ़ा सकते विद्यालय</span></strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश के समस्त राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित हाईस्कूल व इंटरमीडिएट विद्यालयों में केवल माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों की मुद्रित पाठ्यपुस्तकें ही प्रचलित होंगी। अन्य किसी भी पुस्तक का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">अधिक मूल्य मांगने पर होगा जुर्माना</span></strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि अधिक मूल्य लेने या अनधिकृत पुस्तकें, गाइड बुक आदि प्रचलित कराने पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना या विद्यालय की मान्यता निलंबित की जा सकती है। किसी भी दुकानदार द्वारा नकली या अधिक मूल्य पर पाठ्य पुस्तकें बेचने पर पुलिस, प्रशासन, वाणिज्य कर और आयकर विभाग की संयुक्त जांच होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ में पुस्तकें कहां से खरीदें</span></strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मेसर्स सिंघल एजेन्सीज, शीतल बुक एजेंसी, मेहरा सिनेमा, सैनिक पब्लिक स्कूल, पुस्तक वाटिका, ज्ञानी रोड, नवोदय बुक एजेंसी अमीनाबाद, रमा बुक डिपॉट, अमीनाबाद, स्टैंडर्ड बुक डिपॉट, ज्ञानी मार्केट आदि।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567050/good-news--students-will-get-up-board-books-at-cheap-rates--bookstall-launched</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 10:53:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कक्षा चार से एनसीईआरटी पुस्तकें पढ़ेंगे प्राथमिक के बच्चे, पुस्तकें उपलब्ध कराने को लेकर विभाग ने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2026-27 से कक्षा चार के बच्चों को भी एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी। समय से पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने पहले से तैयारी कर ली है और पुस्तकें छापने का आर्डर दे दिया गया है।</p>
<p>सत्र 2026-27 के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग ने अभी से रणनीति बनाकर काम शुरू कर दिया है ताकि छपाई के बाद आपूर्ति के साथ ही वितरण भी तुरंत शुरू किया जा सके।</p>
<p>इस साल से कक्षा 4 में भी एनसीईआरटी की किताबें लागू की जा रही हैं। पिछले सत्र में कक्षा 1 से 3 की किताबें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566477/primary-school-children-will-now-read-ncert-books-from-class-4-onwards--the-department-has-made-preparations-to-provide-the-books"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(16)4.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2026-27 से कक्षा चार के बच्चों को भी एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी। समय से पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने पहले से तैयारी कर ली है और पुस्तकें छापने का आर्डर दे दिया गया है।</p>
<p>सत्र 2026-27 के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग ने अभी से रणनीति बनाकर काम शुरू कर दिया है ताकि छपाई के बाद आपूर्ति के साथ ही वितरण भी तुरंत शुरू किया जा सके।</p>
<p>इस साल से कक्षा 4 में भी एनसीईआरटी की किताबें लागू की जा रही हैं। पिछले सत्र में कक्षा 1 से 3 की किताबें विद्यालयों में देरी से पहुंची थीं। इसे ध्यान में रखते हुए नए सत्र के आरंभ होने से पहले ही तैयारी शुरू कर दी गई है ताकि बच्चों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जा सकें।</p>
<p>इसके अलावा संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया जाएगा कि वे विद्यालयों तक समय से पुस्तके पहुंचाएं। पुस्तकों के वितरण में किसी भी प्रकार के घालमेल को रोकने के लिए निगरानी तंत्र भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 10:23:49 +0530</pubDate>
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