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                <title>Parliament session - Amrit Vichar</title>
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                <description>Parliament session RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>50% आबादी की उम्मीद पर फिरा पानी : महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में नहीं हो पाया पारित, पक्ष में पड़े 298 वोट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।</p>
<p>लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579077/hopes-of-50--of-the-population-dashed--women-s-reservation-and-delimitation-bill-fails-to-pass-in-lok-sabha--298-votes-cast-in-favor"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/cats126.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।</p>
<p>लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।</p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।</p>
<h5><strong>संविधान पर आक्रमण था विधेयक, हमने इसे रोका: राहुल गांधी </strong></h5>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा से महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के बाद शुक्रवार को कहा कि यह संविधान पर आक्रमण था, जिसे विपक्ष ने नाकाम कर दिया। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला आरक्षण लागू करना चाहते हैं तो 2023 में पारित कानून को लागू करें जिसमें विपक्ष पूरा सहयोग देगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा, ''यह महिला (आरक्षण) विधेयक नहीं था, ये हिंदुस्तान के राजनीतिक और चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी, संविधान पर आक्रमण था। हमने इसे रोक दिया।'' राहुल गांधी ने यह भी कहा, ''मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं, अगर आप महिला आरक्षण विधेयक लाना चाहते हैं, तो 2023 का महिला आरक्षण विधेयक आज से लागू कर दीजिए, पूरा विपक्ष आपको 100 प्रतिशत समर्थन देगा। अगर ऐसा किया गया, तो हम महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू करवा देंगे।''</p>
<p>लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 19:54:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण बिल : विपक्ष के आरोपों पर बोले अमित शाह- परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की बढ़ेगी ताकत, भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के आरोपों का विस्तृत जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत घटेगी नहीं, बल्कि और मजबूत होगी। साथ ही, विपक्ष को यह नसीहत दी कि भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संसद में सदस्यों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आंध्र प्रदेश की वर्तमान 25 सीटें, जो अभी 4.60 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देती हैं, बढ़कर 38 सीटें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578948/women-s-reservation-bill--responding-to-opposition-allegations--amit-shah-says%E2%80%94delimitation-will-boost-the-strength-of-southern-states--misinformation-should-not-be-spread"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/077.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के आरोपों का विस्तृत जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत घटेगी नहीं, बल्कि और मजबूत होगी। साथ ही, विपक्ष को यह नसीहत दी कि भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संसद में सदस्यों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आंध्र प्रदेश की वर्तमान 25 सीटें, जो अभी 4.60 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देती हैं, बढ़कर 38 सीटें हो जाएंगी और उनकी हिस्सेदारी 4.65 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। इसी तरह तेलंगाना की 17 सीटें, जिनकी मौजूदा क्षमता 3.13 प्रतिशत है, बढ़कर 26 हो जाएंगी और 3.18 प्रतिशत हो जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">केरल की 20 सीटें, जो अभी 3.68 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देती हैं, बढ़कर 30 हो जाएंगी और लगभग 3.67 प्रतिशत बनी रहेंगी, जबकि कर्नाटक की 28 सीटें 5.15 प्रतिशत से बढ़कर 42 सीटें हो जाएंगी और 5.14 प्रतिशत के आसपास रहेंगी। तमिलनाडु को लेकर अमित शाह ने कहा कि वहां की 39 सीटें, जिनकी वर्तमान क्षमता 7.18 प्रतिशत है, बढ़कर 59 हो जाएंगी और उनकी हिस्सेदारी 7.23 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जिससे राज्य को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत को लेकर जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि वर्तमान में 543 सदस्यीय लोकसभा में दक्षिण के 129 सांसद हैं, जो 23.76 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी और हिस्सेदारी 23.87 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, यानी स्पष्ट रूप से दक्षिण की शक्ति में वृद्धि होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि मोदी कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का निर्णय ले लिया है और वर्तमान में जो जनगणना प्रक्रिया चल रही है, वह इसी आधार पर हो रही है, इसलिए इस मुद्दे पर किसी तरह का भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग से संबंधित कानून पहले की तरह ही है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया का मौजूदा चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 20:24:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Parliament Special Session : महिला आरक्षण संशोधन से जुड़े तीन बिल लोकसभा में पेश, विपक्ष ने उठाए सवाल, तो अमित शाह ने सपा पर कसा तीखा तंज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026,केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026,डिलिमिटेशन बिल, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा। भाजपा की तरफ से बहस में सांसद बांसुरी स्वराज, रक्षा खडसे, अपराजिता सारंगी, कंगना रनोट और धर्मशीला गुप्ता शामिल होंगी। पीएम मोदी आज दोपहर 3 बजे लोकसभा में बोल सकते हैं। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578869/parliament-special-session--three-bills-related-to-women-s-reservation-amendment-introduced-in-lok-sabha--opposition-raises-questions--prompting-amit-shah-to-launch-a-sharp-jibe-at-the-sp"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/0128.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026,केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026,डिलिमिटेशन बिल, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा। भाजपा की तरफ से बहस में सांसद बांसुरी स्वराज, रक्षा खडसे, अपराजिता सारंगी, कंगना रनोट और धर्मशीला गुप्ता शामिल होंगी। पीएम मोदी आज दोपहर 3 बजे लोकसभा में बोल सकते हैं। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>परिसीमन बिल पर विपक्ष ने उठाए सवाल, जानिए क्या बोले अमित शाह </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन बिल, 2026 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य लोकसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण करना, विधानसभा सीटों की संख्या तय करना और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को चुनावी क्षेत्रों में बांटना है। जैसे ही बिल सदन में पेश हुआ, विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सबसे पहले विरोध जताया, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सत्र की शुरुआत में सदन ने प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया। परिसीमन बिल को लेकर समाजवादी पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि संसद को संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन यह बिल संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन को जनगणना से अलग करना गलत है और इससे संवैधानिक ढांचा प्रभावित होगा। धर्मेंद्र यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं के हित में हमेशा आगे रही है और सरकार से मांग की कि इस संविधान संशोधन और परिसीमन बिल को वापस लिया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए सरकार से सवाल किया कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने पूछा कि सरकार जनगणना क्यों नहीं करा रही है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि जनगणना का काम शुरू हो चुका है। अमित शाह ने धर्मेंद्र यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे यह कह रहे हैं कि इसमें कॉलम नहीं है, जबकि उन्हें समझना चाहिए कि फिलहाल घरों की गिनती हो रही है, न कि उनकी जाति की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को मौका मिले, तो वह घरों की भी जाति तय कर दे।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की बात करना असंवैधानिक है, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है। इस पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपनी सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578869/parliament-special-session--three-bills-related-to-women-s-reservation-amendment-introduced-in-lok-sabha--opposition-raises-questions--prompting-amit-shah-to-launch-a-sharp-jibe-at-the-sp</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 13:07:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा संसदीय दल ने जारी किया व्हिप, तीन दिनों तक सदन में सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। पार्टी के कार्यालय सचिव शिव शक्ति नाथ बख्शी द्वारा जारी इस निर्देश में लोकसभा और राज्यसभा के सभी भाजपा सांसदों को तीन दिनों तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है। इस व्हिप के अनुसार, गुरुवार से शनिवार (16 से 18 अप्रैल 2026) तक सभी सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसमें विशेष रूप से केंद्रीय मंत्रियों और सभी सदस्यों को निर्देशित किया गया है कि वे इन तीनों दिनों के दौरान सदन में मौजूद रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">  भाजपा की ओर</p>
<p style="text-align:justify;">बता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578432/bjp-parliamentary-party-issues-whip--members--presence-in-the-house-mandatory-for-three-days"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(83)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। पार्टी के कार्यालय सचिव शिव शक्ति नाथ बख्शी द्वारा जारी इस निर्देश में लोकसभा और राज्यसभा के सभी भाजपा सांसदों को तीन दिनों तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है। इस व्हिप के अनुसार, गुरुवार से शनिवार (16 से 18 अप्रैल 2026) तक सभी सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसमें विशेष रूप से केंद्रीय मंत्रियों और सभी सदस्यों को निर्देशित किया गया है कि वे इन तीनों दिनों के दौरान सदन में मौजूद रहें।</p>
<p style="text-align:justify;"> भाजपा की ओर से व्हिप में कहा गया है, "लोकसभा और राज्यसभा के सभी भाजपा सदस्यों के लिए गुरुवार से शनिवार (16 से 18 अप्रैल 2026) तक तीन-पंक्ति व्हिप जारी किया जा रहा है। सभी केंद्रीय मंत्रियों और सदस्यों से अनुरोध है कि वे उपरोक्त तीनों तिथियों पर सदन में उपस्थित रहें। सदन में उपस्थिति अनिवार्य है। कोई अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। सदस्यों से अनुरोध है कि वे व्हिप का सख्ती से पालन करें और सदन में अपनी निर्बाध उपस्थिति सुनिश्चित करें। आपके सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद।" </p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि इस संशोधन को पारित कराने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए और अधिक से अधिक सांसदों को इस विषय पर संसद में अपने विचार रखने चाहिए। उन्होंने इसे किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर का विषय बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार को लिखे गए अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक ऐतिहासिक चर्चा शुरू होने जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने तथा सभी को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता को दोहराने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने के अवसर मिलते हैं। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को आवश्यक बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और भारत की बेटियां अंतरिक्ष, खेल, सशस्त्र बलों और स्टार्ट-अप जैसे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। वे अपने परिश्रम, संकल्प और बड़े सोच के साथ निरंतर सफलता हासिल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा, "हम सभी साक्षी हैं कि सार्वजनिक जीवन में हमारी बहनों-बेटियों की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। भारत की बेटियां स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स और सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप्स तक, हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। अपनी बड़ी सोच और पूरे जज्बे के साथ वे कड़ी मेहनत करती हैं और खुद को साबित कर रही हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 13:58:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए महाबोधि मंदिर का प्रबंधन, राज्यसभा में सपा सांसद ने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/लखनऊ। </strong>राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने बृहस्पतिवार को बिहार के बोध गया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि इसका नियंत्रण बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुमन ने कहा कि महाबोधि मंदिर अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है और यह वही स्थान माना जाता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है और लगभग 55 करोड़ लोग यानी दुनिया की लगभग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577257/management-of-mahabodhi-temple-should-be-handed-over-to-followers-of-buddhism--sp-mp-demands-in-rajya-sabha"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/02.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/लखनऊ। </strong>राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने बृहस्पतिवार को बिहार के बोध गया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि इसका नियंत्रण बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुमन ने कहा कि महाबोधि मंदिर अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है और यह वही स्थान माना जाता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है और लगभग 55 करोड़ लोग यानी दुनिया की लगभग सात प्रतिशत आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है। अन्य धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल किया, "क्या अयोध्या मंदिर की प्रबंधन समिति में कोई मुस्लिम, सिख या ईसाई सदस्य है?" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आम तौर पर धार्मिक स्थलों का प्रबंधन उसी धर्म के लोगों को सौंपा जाता है और यही सिद्धांत महाबोधि मंदिर पर भी लागू होना चाहिए। सपा सदस्य सुमन ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर को खासा राजस्व मिलता है, लेकिन इसके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने गया के हवाई अड्डे का नाम गौतम बुद्ध के नाम पर रखने की मांग भी की तथा इसे सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक भावना से जुड़ा विषय बताया। वर्तमान में मंदिर का प्रबंधन महाबोधि मंदिर प्रबंधन अधिनियम 1949 के तहत गठित समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें बौद्ध और गैर-बौद्ध दोनों सदस्य शामिल होते हैं। यह व्यवस्था लंबे समय से देशभर के बौद्ध समुदाय के बीच विवाद का विषय रही है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 14:18:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा में बोले अमित शाह- नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है... </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश में नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त बनाने के प्रयास पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के दौरान अनुच्छेद 370 हटाने, राममंदिर का निर्माण और कई बड़े काम हुए तथा अब नक्सल मुक्त भारत भी इसी सरकार के शासन काल में बनने जा रहा है। </p>
<p>शाह ने कहा कि भोले-भाले आदिवासियों के सामने यह गलत विमर्श रखा गया था कि उन्हें न्याय दिलाने और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576980/amit-shah-speaks-in-the-lok-sabha--the-root-cause-of-naxalism-is-not-a-lack-of-development-or-injustice--but-rather-ideology"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/cats214.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश में नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त बनाने के प्रयास पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के दौरान अनुच्छेद 370 हटाने, राममंदिर का निर्माण और कई बड़े काम हुए तथा अब नक्सल मुक्त भारत भी इसी सरकार के शासन काल में बनने जा रहा है। </p>
<p>शाह ने कहा कि भोले-भाले आदिवासियों के सामने यह गलत विमर्श रखा गया था कि उन्हें न्याय दिलाने और उनके अधिकार की खातिर यह लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ''नक्सल का मूल कारण विकास की मांग, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है।'' गृह मंत्री ने कहा कि अन्याय होने पर हथियार उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है और ऐसी गतिविधि मोदी सरकार के दौरान कभी स्वीकार्य नहीं होगी। </p>
<p>उन्होंने कहा, ''बस्तर क्षेत्र के लोग सरकार की सुविधाओं से छूट गए थे क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी। आज परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।'' उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि 70 साल में आदिवासी विकास से उपेक्षित रह गए तो दोषी कौन है? </p>
<p>शाह ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में भी विकास पहुंचा। शाह ने उल्लेख किया कि कई सारे महत्ववूर्ण कार्य मोदी सरकार के दौरान हुए हैं और नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी इसी सरकार में हो रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और उग्रवाद समाप्त हो रहा है तो उसका पूरा श्रेय अर्धसैनिक बलों, विशेष कर कोबरा बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और राज्यों की पुलिस तथा स्थानीय आदिवासियों को जाता है।</p>
<p>गृह मंत्री ने कुछ विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा की तुलना नक्सलियों से करने की कोशिश की गई, जो पूरी तरह अनुचित है। शाह ने कहा कि नक्सलियों द्वारा 'रेड कॉरिडोर' को इसलिए चुना गया था कि वहां शासन व्यवस्था की पहुंच कम थी। गृह मंत्री ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने प्रभावित क्षेत्रों में विकास को नहीं पहुंचने दिया, जहां अब मोदी सरकार विकास को घर-घर पहुंचा रही है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 19:00:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Parliament Session:  IBC संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में पारित, बोलीं वित्त मंत्री- इससे बढ़ेगा निवेशकों का भरोसा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>लोकसभा में सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करने के मुख्य उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद कंपनियों के दिवाला मामलों का अदालत के बाहर समाधान किया जा सकेगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह विधेयक अगस्त 2025 में लोक सभा में लाया गया था, तथा इसे प्रवर समिति को भेज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576948/parliament-session--ibc-amendment-bill-2025-passed-in-lok-sabha--finance-minister-states--it-will-boost-investor-confidence"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/cats212.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>लोकसभा में सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करने के मुख्य उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद कंपनियों के दिवाला मामलों का अदालत के बाहर समाधान किया जा सकेगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह विधेयक अगस्त 2025 में लोक सभा में लाया गया था, तथा इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया था। प्रवर समिति ने गहनता और गंभीरता से विचार करने के बाद 11 संशोधन सुझाये हैं और सभी को इसमें शामिल कर लिया गया है। इसमें क्रेडिटर को अधिक अधिकार दिये गये हैं। क्रेडिटर समाधानकर्ता की चयन प्रक्रिया में अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लायी जा सकेगी और समाधान प्रक्रिया तेज होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक में प्रावधान किये गये हैं कि एनसीएलएटी में अपील के बाद तीन महीने के अंदर उसका फैसला आ जाये। उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक में बीमार कंपनियों के समाधान में देरी से बचने के पर्याप्त उपाय किये गये हैं। इसमें कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। उनकी जितनी देयता है, उसे प्राथमिकता पर रखा जायेगा। 'कर्मचारियों के हितों से हम बिलकुल समझौता नहीं करेंगे।' विधेयक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">सीतारमण ने कहा कि 2016 में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता कानून लाये जाने के बाद से जो संकटग्रस्त कंपनियों का समाधान प्रक्रिया से गुजरी हैं, वे बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। बीमार कंपनियों से बैंकों का डूबा पैसा निकालने के प्रतिशत में बहुत बढ़ोतरी हो गयी है और अब यह 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि बैंक धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) ने 1105 केसों की जांच की, जिसमें 64920 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर 150 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">भगोड़े आर्थिक अपराधी के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की गयी है और ऐसे मामलों के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय समस्या को भी समाधान करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा न्यायिक अधिकार में लेनदारों के मामले में काफ़ी सुरक्षा के उपाय किया गये हैं। अब लेनदार या देनदार का किसी भी तरीके से ग़लत उपयोग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी कंपनी या क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है और सभी को एक तरह से डील किया जाता है। श्रीमती सीतारमण के जवाब के बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:32:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद सत्र : सभी भारतीय भाषाओं में हो यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा... DMK सांसद ने राज्यसभा में की माग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने पर असंतोष जाहिर करते हुए सोमवार को राज्यसभा में द्रमुक (DMK) सदस्य पी विल्सन ने कहा कि इस स्थिति में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी मेधावी छात्र परेशानी महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए विल्सन ने कहा ''यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना हर विद्यार्थी का सपना होता है क्योंकि यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जीवन की बड़ी चुनौती का हल मिल जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में छात्र यूपीएससी की परीक्षा देते हैं''। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा ''लेकिन दिक्कत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576936/parliament-session--upsc-preliminary-examination-should-be-conducted-in-all-indian-languages%E2%80%94dmk-mp-demands-in-rajya-sabha"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/dmk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने पर असंतोष जाहिर करते हुए सोमवार को राज्यसभा में द्रमुक (DMK) सदस्य पी विल्सन ने कहा कि इस स्थिति में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी मेधावी छात्र परेशानी महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए विल्सन ने कहा ''यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना हर विद्यार्थी का सपना होता है क्योंकि यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जीवन की बड़ी चुनौती का हल मिल जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में छात्र यूपीएससी की परीक्षा देते हैं''। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा ''लेकिन दिक्कत यह है कि यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होती है जबकि मुख्य परीक्षा 22 अधिसूचित भाषाओं में होती है। प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी होशियार छात्र इसमें परेशानी महसूस करते हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">द्रमुक सदस्य ने कहा कि यूपीएससी के लिए छात्र एक साल मेहनत करते हैं और उनके पास न होने पर यह साल खराब हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को चक्रीय व्यवस्था के तहत लिया जाना चाहिए ताकि छात्रों का साल खराब न हो। उन्होंने मांग की कि संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में लिया जाना चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तित्व परीक्षा बंद होना चाहिए। द्रमुक सदस्य ने दावा किया कि यूपीएससी परीक्षा में अंक लाने की पद्धति अंग्रेजी को प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि पास होने के बाद साक्षात्कार में सबसे कम अंक मिलते हैं। उन्होंने कहा ''ओबीसी छात्रों, एससी, एसटी के साथ खास तौर पर ऐसा होता है।'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:32:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद ने आम बजट 2026-27 को दी मंजूरी : वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- लॉकडाउन की गुंजाइश नहीं, गलतफहमी फैलाना बंद करें नेता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>संसद ने शुक्रवार को आम बजट 2026-27 को मंजूरी दे दी तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य आसमान छूने के मद्देनजर दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है तथा इसे लेकर गलतफहमी नहीं फैलायी जानी चाहिए। राज्यसभा ने वित्त मंत्री के जवाब के बाद वित्त विधेयक 2026-27 को ध्वनिमत से लौटा दिया। इसी के साथ उच्च सदन ने अनुदान की अनुपूरक मांगों और उससे जुड़े विनियोग विधेयक को भी ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इनको पहले ही मंजूरी दे चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576670/parliament-approves-general-budget-2026-27--finance-minister-sitharaman-states%E2%80%94no-scope-for-a-lockdown--leaders-must-stop-spreading-misinformation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/26.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>संसद ने शुक्रवार को आम बजट 2026-27 को मंजूरी दे दी तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य आसमान छूने के मद्देनजर दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है तथा इसे लेकर गलतफहमी नहीं फैलायी जानी चाहिए। राज्यसभा ने वित्त मंत्री के जवाब के बाद वित्त विधेयक 2026-27 को ध्वनिमत से लौटा दिया। इसी के साथ उच्च सदन ने अनुदान की अनुपूरक मांगों और उससे जुड़े विनियोग विधेयक को भी ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इनको पहले ही मंजूरी दे चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा में वित्त मंत्री सीतारमण ने वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश को विकसित बनाने और 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की अकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने यह प्रश्न किया था कि पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद कर घटाये जाने के बाद सरकार 2026 वित्त वर्ष में 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को कैसे हासिल करेगी? इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के कुल राजस्व में उत्पाद शुल्क से होने वाले राजस्व का योगदान करीब 10 प्रतिशत होता है। </p>
<p style="text-align:justify;">सीतारमण ने कहा कि अतिरिक्त साधनों को जुटाना, विकास को बढ़ावा देने वाले व्यय को प्राथमिकता देना, कल्याणकारी व्यय को बेहतर तरीके से लक्षित करना तथा राजकोषीय कामकाज में अधिक पारदर्शिता रखना, सरकार की महत्वपूर्ण पहचान रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनका पालन करते हुए सरकार राजकोषीय रुख को कायम रख पायेगी। उन्होंने उम्मीद जतायी कि गैर कर राजस्व के माध्यम से अधिक कोष एकत्र करके भी इसकी भरपाई कर ली जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने उम्मीद जतायी कि सरकार इस स्थिति का सामना कर लेगी क्योंकि 'हम काफी सतर्क हैं।' उन्होंने ध्यान दिलाया कि विश्व भर में पश्चिम एशिया संकट के बाद विभिन्न देशों में तेल के दाम 30 से 50 प्रतिशत बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में रूस एवं यूक्रेन के बाद कच्चे तेल एवं उर्वरकों के दामों पर जबरदस्त दबाव पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने कहा कि किंतु सरकार की सारी नीतियों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह वाक्य मार्गदर्शक साबित हो रहा है कि 'हमारे नागरिक पर बोझ नहीं पड़े।' उन्होंने कहा कि सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है जिसमें पेट्रोल पर लगने वाले उत्पाद कर को 13 रूपये से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया जबकि डीजल पर लगने वाले 10 रूपये प्रति लीटर कर को शून्य कर दिया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">सीतारमण ने कहा कि इसका परिणाम है कि भारत में पेट्रोल एवं डीजल के दाम अपरिवर्तित बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद है कि कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में होने वाले उतार चढ़ाव और इसकी आपूर्ति में अनियमितता के प्रभावों से देश में आम आदमी को बचाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत में जो तेल शोधक कंपनी तेल शोधन के बाद बाहर भेज रही है, उन पर निर्यात शुल्क बढ़ाया गया है। वित्त मंत्री ने पाकिस्तान आदि पड़ोसी देशों में पेट्रोल एवं डीजल के बढ़ते दामों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता इस बात को लेकर गलतफहमी फैला रहे हैं कि लॉकडाउन लगाया जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''भारत में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है। यह गलतफहमी फैलाना नेताओं को छोड़ना चाहिए। निराधार अफवाहें.. जनता के मन में भय फैलाने के लिए कुछ भी कह दो। लॉकडाउन पाकिस्तान में हो रहा है, भारत में नहीं।'' उन्होंने सरकार द्वारा गरीबों पर अधिक कर लगाने और अमीरों को इसमें राहत देने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चाहे परोक्ष करों की बात हो या जीएसटी की बात हो, किसी में भी अमीर या गरीब के बीच भेदभाव नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार उपकर और अधिभार के माध्यम से जो भी धन एकत्र करती है, उससे अधिक खर्च कर देती है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल एवं जीएसटी मुआवजे को निकाल देते तो कुल मिलाकर उपकर वसूली अनुमानित 23.34 लाख करोड़ रही जबकि सरकार ने इन क्षेत्रों में 24.82 लाख करोड़ रूपये व्यय किए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक फरवरी को आम बजट पेश किया था और उसी के साथ संसद में बजट पारित होने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आज वित्त विधेयक पारित होने के साथ यह प्रक्रिया संपन्न हो गयी। आम बजट 2026-27 में 53.47 लाख करोड़ रुपये के कुल व्यय की प्रस्तावना की गयी है, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगले वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित कुल पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये है। इसमें 44.04 लाख करोड़ रुपये का सकल कर राजस्व संग्रह और 17.2 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी का प्रस्ताव है। बजट में आगामी वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत से कम है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 18:09:18 +0530</pubDate>
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                <title>अभिभावकों पर बोझ डाल रहे निजी स्कूल... सपा सांसद इकरा ने सदन में उठाया निजी स्कूलों से जुड़ा मुद्दा, सरकार से की यह बड़ी मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी ने शुक्रवार को लोकसभा में सरकार से आग्रह किया कि निजी स्कूलों में किताबों और यूनिफॉर्म की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया। उत्तर प्रदेश के कैराना से लोकसभा सदस्य ने यह मांग भी की कि महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इकरा ने कहा, ''सीबीएसई बोर्ड के कई स्कूल अभिभावकों पर बोझ डाल रहे हैं। स्कूल प्रबंधन किसी एक किताब विक्रेता को तय कर देते हैं जहां से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576665/private-schools-burdening-parents----sp-mp-iqra-raises-issue-related-to-private-schools-in-the-house--makes-major-demand-of-the-government"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/0137.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी ने शुक्रवार को लोकसभा में सरकार से आग्रह किया कि निजी स्कूलों में किताबों और यूनिफॉर्म की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया। उत्तर प्रदेश के कैराना से लोकसभा सदस्य ने यह मांग भी की कि महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इकरा ने कहा, ''सीबीएसई बोर्ड के कई स्कूल अभिभावकों पर बोझ डाल रहे हैं। स्कूल प्रबंधन किसी एक किताब विक्रेता को तय कर देते हैं जहां से ही अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ती हैं।'' उन्होंने कहा, ''सरकार से मेरा आग्रह है कि निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों पर रोक लगाई जाए, किसी एक विक्रेता से खरीद को अनिवार्य बनाने पर रोक लगे, यूनिफॉर्म और किताबों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किया जाए और अभिभावकों की शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा दी जाए।'' </p>
<p style="text-align:justify;">इकरा ने कहा कि शिकायतों पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सपा सांसद आनंद भदौरिया ने शाहजहांपुर में स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह की मूर्तियों को कथित तौर पर तोड़े जाने का विषय उठाया और कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 17:36:15 +0530</pubDate>
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                <title>संसद सत्र: मुख्य सचिव को हटाने पर TMC सासंदों ने किया राज्यसभा से वॉकआउट, किरेन रिजिजू बोले- यह ठीक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। ये सांसद चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने का विरोध कर रहे थे। तृणमूल सांसदों ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताते हुए पूरे दिन के लिए सदन से वॉक आउट करने का फैसला किया। </p>
<p>गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी गई है। रविवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा की थी। सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने के थोड़ी देर बाद ही तृणमूल कांग्रेस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575202/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0--%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A4%86%E0%A4%89%E0%A4%9F--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%82-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87--%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%A0%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/314.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। ये सांसद चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने का विरोध कर रहे थे। तृणमूल सांसदों ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताते हुए पूरे दिन के लिए सदन से वॉक आउट करने का फैसला किया। </p>
<p>गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी गई है। रविवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा की थी। सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने के थोड़ी देर बाद ही तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने यह विषय सदन में उठाया।</p>
<p>उन्होंने सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा कि हम शून्यकाल में कोई व्यवधान नहीं डालना चाहते। इसलिए हमें 30 सेकंड का समय दीजिए, क्योंकि हमारा उद्देश्य सदन की कार्यवाही को बाधित करना नहीं है। उन्होंने सदन में कहा कि बीती रात के अंधेरे में पश्चिम बंगाल राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को निर्वाचन आयोग द्वारा हटा दिया गया है। </p>
<p>डेरेक ओ ब्रॉयन ने कहा कि चुनाव आयोग के पास ऐसा करने की पूरी शक्ति है। डेरेक ओ ब्रॉयन ने सभापति से कहा, “महोदय, उनके (चुनाव आयोग) के पास यह अधिकार है कि वे ऐसा करें। वे यह भी कह सकते हैं कि मैं सफेद शर्ट की जगह नीली शर्ट पहनूं।” </p>
<p>तृणमूल सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन आयुक्त जो कर रहे हैं उसके विरोध में राज्यसभा में उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस सोमवार के लिए सदन से वॉकआउट कर रही है। डेरेक ओ'ब्रायन के इस वक्तव्य व तृणमूल सांसदों के वॉकआउट के उपरांत संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू इसका जवाब देने के लिए खड़े हुए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि माननीय सदस्य (डेरेक ओ ब्रॉयन) सदन में अचानक खड़े हो गए हैं, जबकि उनका मुद्दा कार्यसूची में सूचीबद्ध नहीं है। वे एक संवैधानिक प्राधिकरण से जुड़े विषय को उठा रहे हैं, जिसका इस सदन या सरकार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा, "यदि हर सदस्य न्यायालय या चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक प्राधिकरणों के निर्णयों पर यहां सवाल उठाने लगे, तो यह उचित नहीं होगा। चुनाव आयोग की शक्तियां अलग हैं।"</p>
<p>चुनाव आयोग को यह अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है। इसलिए इस विषय को सदन में उठाने का कोई औचित्य नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा, "मेरा मानना है कि सभी को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और इंडियन नेशनल कांग्रेस ने हमेशा ही संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने की आदत बना ली है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यह ठीक नहीं है और इससे सदन के समय का भी दुरुपयोग हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 15:04:29 +0530</pubDate>
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                <title>संसद सत्र : रसोई गैस आपूर्ति पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में भिड़ंत, नड्डा बोले- विपत्ति के समय भी लोगों को भड़का रही कांग्रेस </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने का मुद्दा सोमवार को सदन में उठाया जिस पर नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने यह कहते हुए विरोध किया कि कांग्रेस विपत्ति के समय भी राजनीति कर लोगों को भड़का रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">  खड़गे ने शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण हाहाकार मचा है और इससे विशेष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग तथा छोटे रेस्तरां प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा</p>
<p style="text-align:justify;">खड़गे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575160/parliament-session--ruling-and-opposition-parties-clash-in-rajya-sabha-over-cooking-gas-supply--nadda-alleges-congress-is-inciting-people-even-during-times-of-crisis"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/cats122.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने का मुद्दा सोमवार को सदन में उठाया जिस पर नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने यह कहते हुए विरोध किया कि कांग्रेस विपत्ति के समय भी राजनीति कर लोगों को भड़का रही है। </p>
<p style="text-align:justify;"> खड़गे ने शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण हाहाकार मचा है और इससे विशेष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग तथा छोटे रेस्तरां प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत की 60 प्रतिशत रसोई गैस आयात करता है और इसमें से भी 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। </p>
<p style="text-align:justify;">खड़गे ने कहा कि आपूर्ति प्रभावित होने से सामुदायिक किचन बंद करने पड़ रहे हैं और सिलेंडर की कीमत भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि देश में गैस सिलेंडर की कमी नहीं है और लोग अफवाहों पर ध्यान ना दें तो फिर यह लाइन क्यों लग रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के मध्य नजर जब सरकार वहां रह रहे भारतीयों के लिए परामर्श जारी कर रही थी तो आपूर्ति के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई और आपूर्ति क्यों नहीं बढ़ाई गई। </p>
<p style="text-align:justify;">सदन के नेता नड्डा ने कहा कि यह शून्य काल है और इसमें हर सदस्य को तीन मिनट का समय अपनी बात कहने के लिए दिया जाता है लेकिन खरगे नेता विपक्ष होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। सभापति द्वारा खरगे को अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद उनके बोलते रहने पर नड्डा ने कहा कि यह वैश्विक विपत्ति का समय है और इसमें भारत की कोई भूमिका नहीं है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विपत्ति के समय भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है । उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सदन में पूरी स्थिति की जानकारी दी है लेकिन कांग्रेस के सदस्यों ने उसे समय उनकी बातों को नहीं सुना। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश में शांतिपूर्ण स्थिति को भड़काकर अराजकता लाने का प्रयास कर रही है यह बहुत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक नेता सिलेंडर की जमाखोरी के मामले में भी पकड़ा गया है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य जोर-जोर से एक दूसरे का प्रतिवाद करते रहे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:37:07 +0530</pubDate>
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