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                <title>Kite flying - Amrit Vichar</title>
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                <description>Kite flying RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चाइनीज मांझा बना पक्षियों की मौत की डोर, चिड़ियाघर प्रशासन और वन विभाग ने की अपील, पतंगबाजी करें, लेकिन...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार: </strong>लखनऊ चिड़ियाघर में चाइनीज मांझे से घायल हो रहे बेजुबान पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन कोई न कोई पक्षी पतंग के मांझे में फंसकर गंभीर रूप से घायल हो रहा है। यह मांझा पक्षियों की गर्दन से लेकर पंख तक काट देता है, जिससे उनकी उड़ने की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है और कई मामलों में उनकी जान चली जाती है। चिड़ियाघर प्रशासन ने दर्शकों और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करें और बेजुबान पक्षियों को बचाएं। प्रशासन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568737/chinese-manja-has-become-the-death-trap-for-birds--zoo-administration-and-forest-department-appealed--fly-kites--but-"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(4)13.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार: </strong>लखनऊ चिड़ियाघर में चाइनीज मांझे से घायल हो रहे बेजुबान पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन कोई न कोई पक्षी पतंग के मांझे में फंसकर गंभीर रूप से घायल हो रहा है। यह मांझा पक्षियों की गर्दन से लेकर पंख तक काट देता है, जिससे उनकी उड़ने की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है और कई मामलों में उनकी जान चली जाती है। चिड़ियाघर प्रशासन ने दर्शकों और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करें और बेजुबान पक्षियों को बचाएं। प्रशासन का कहना है कि पक्षियों की संख्या में कमी से पर्यावरण की स्थिरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। चिड़ियाघर की निदेशक डॉ. अदिति शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति, वसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस जैसे पर्वों पर पतंगबाजी का चलन बढ़ जाता है। उन्होंने पेंच लड़ाने वालों से खास अपील करते हुए कहा कि चाइनीज मांझे का प्रयोग न करें। आसमान में उड़ रहे पक्षी इस डोर में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं।</span></p>
<h3><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">मकर संक्रांति पर बढ़ीं घटनाएं</span></strong></h3>
<p>मकर संक्रांति के आसपास चाइनीज मांझे से जुड़ी घटनाओं में तेजी देखी गई। 16 जनवरी 2026 को अलीगंज इलाके में एक उल्लू पेड़ पर चाइनीज मांझे में फंसा हुआ मिला। वहीं 15 जनवरी को एक चील और राष्ट्रीय पक्षी मोर चाइनीज मांझे से गंभीर रूप से घायल पाए गए।</p>
<h3><strong>हर साल 1000 से 1500 पक्षी बनते हैं शिकार</strong></h3>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के अनुसार, लखनऊ में हर पर्व पर पतंगबाजी की परंपरा है। इस दौरान चाइनीज मांझा आसमान में उड़ने वाले पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होता है। अनुमान है कि हर साल लखनऊ में करीब 1000 से 1500 पक्षी या तो घायल हो जाते हैं या अपनी जान गंवा देते हैं।</span></p>
<h3><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">वन विभाग की हर रेंज में मामले</span></strong></h3>
<p>लखनऊ में वन विभाग की कुल 10 रेंज हैं। प्रत्येक रेंज में चाइनीज मांझे से हर महीने औसतन 8 से 10 मामले सामने आ रहे हैं। कई पक्षियों के पंख कट जाते हैं तो कई की मौके पर ही मौत हो जाती है।</p>
<h3><strong>अस्थायी रेस्क्यू सेंटर बना सहारा</strong></h3>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">वन विभाग ने विक्रमादित्यमार्ग स्थित हनुमान स्वामी मंदिर के पीछे एक अस्थायी रेस्क्यू सेंटर बनाया है। यहां हर साल चाइनीज मांझे से घायल 90 से 100 पक्षियों को लाया जाता है। सेंटर सदस्य रामतीर्थ यादव के अनुसार उल्लू, कौवा, चील, कबूतर के साथ-साथ राष्ट्रीय पक्षी मोर भी अक्सर इसकी चपेट में आ जाते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद इन पक्षियों को चिड़ियाघर भेजा जाता है।</span></p>
<h3><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">जू में घायल पक्षियों के लिए अलग बाड़ा</span></strong></h3>
<p>चिड़ियाघर में चाइनीज मांझे से घायल पक्षियों के लिए अलग से बाड़ा बनाया गया है। वॉलेंटियर और आम लोग जब घायल पक्षी लेकर आते हैं तो उनका इलाज जू में ही किया जाता है। कम घायल पक्षियों को स्वस्थ होने पर उड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है, जबकि ज्यादा घायल पक्षियों को बाड़े में रखकर इलाज किया जाता है। वर्तमान में करीब 20 पक्षियों का उपचार जू में चल रहा है।</p>
<h3><strong>2015 से प्रतिबंध, फिर भी जारी खतरा</strong></h3>
<p><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा एजीटी ने प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर सात साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया था। बावजूद इसके, चाइनीज मांझे की बिक्री और उत्पादन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। इसका खामियाजा बेजुबान पक्षियों को अपनी गर्दन और पंख कटवाकर भुगतना पड़ रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 09:04:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुराने लखनऊ में जमकर हुई पतंगबाजी... असफ-उद-दौला उड़ातें थे झुल-झुल पतंग, जानिए क्या है खास नवाबी कनेक्शन </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>नए शहर की अपेक्षा पुराने लखनऊ में पतंगबाजी ज्यादा देखने को मिली। छतों पर बच्चे, युवा, बुजुर्गों के साथ महिलाओं ने भी पतंग उठाई। कई सार्वजनिक स्थलों पर भी पतंगबाजी की गई। अद्धी, स्टार, पट्टीदार, प्रिंट कागज, तिरंगा डिजाइन वाली पतंगें ज्यादा उड़ती दिखीं। इन पतंगों की कीमत 10 से 25 रुपये के बीच है, जबकि कुछ खास डिजाइन वाली पतंगें 35 रुपये तक बिक रही हैं। वहीं, मांझा भरी चरखियों की कीमत 100 रुपये से शुरू होकर 1500 रुपये तक पहुंच रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">नवाबी दौर से जुड़ी है पतंगबाजी की परंपरा</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/untitled-design-(13).png" alt="Untitled design (13)" width="1200" height="720" /></p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ में पतंगबाजी नवाबों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567934/kite-flying-galore-in-old-lucknow---wazir-asaf-ud-daula-used-to-fly-elaborate-kites--know-the-special-nawab-connection"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(12).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>नए शहर की अपेक्षा पुराने लखनऊ में पतंगबाजी ज्यादा देखने को मिली। छतों पर बच्चे, युवा, बुजुर्गों के साथ महिलाओं ने भी पतंग उठाई। कई सार्वजनिक स्थलों पर भी पतंगबाजी की गई। अद्धी, स्टार, पट्टीदार, प्रिंट कागज, तिरंगा डिजाइन वाली पतंगें ज्यादा उड़ती दिखीं। इन पतंगों की कीमत 10 से 25 रुपये के बीच है, जबकि कुछ खास डिजाइन वाली पतंगें 35 रुपये तक बिक रही हैं। वहीं, मांझा भरी चरखियों की कीमत 100 रुपये से शुरू होकर 1500 रुपये तक पहुंच रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">नवाबी दौर से जुड़ी है पतंगबाजी की परंपरा</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/untitled-design-(13).png" alt="Untitled design (13)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ में पतंगबाजी नवाबों के जमाने से होती आ रही है। चौक निवासी रामसजीवन ने बताया कि गुजरात और राजस्थान से आए लोगों ने यहां मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे ये परंपरा लखनऊवासियों ने भी अपना लिया और ये त्योहार का अभिन्न हिस्सा बन गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;">झुल-झुल पतंग’ उड़ाते थे नवाब</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/untitled-design-(14).png" alt="Untitled design (14)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">दुकानदार हाजी सुबराती बताते हैं कि नवाब वजीर असफ-उद-दौला को पतंग उड़ाने का विशेष शौक था। रूमी दरवाजा जैसी भव्य इमारतों के निर्माण के साथ-साथ वे ‘झुल-झुल पतंग’ उड़ाया करते थे, जिनमें सोना-चांदी जड़ा रहता था। खासतौर पर दीपावली के मौके पर ये पतंगें उड़ाई जाती थीं। कहा जाता है कि अगर ऐसी पतंग किसी के घर गिर जाती थी, तो उसके परिवार की दीपावली का खर्च निकल आता था। पतंग लूटने वाले को उस समय 5 रुपये का इनाम दिया जाता था।</p>
<h5 style="text-align:justify;">चाइनीज मांझे से बचने की अपील</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-01/untitled-design-(15).png" alt="Untitled design (15)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इन दिनों चाइनीज मांझे का चलन बढ़ने से लोग चिंतित हैं। पतंगबाजों और दुकानदारों ने इसे खतरनाक बताते हुए इसके इस्तेमाल से बचने की अपील की है, ताकि कोई हादसा न हो और त्योहार खुशी-खुशी मनाया जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/567930/a-cockroach-was-served-with-noodles-at-a-restaurant-in-lucknow--the-manager-apologized--the-family-had-come-to-celebrate-their-child-s-birthday"><span class="t-red">लखनऊ के रेस्टोरेंट में नूडल्स के साथ परोस दिया कॉकरोच: </span>मैनेजर ने मांगी माफ़ी, बच्चे का जन्मदिन मानाने आया था परिवार</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567934/kite-flying-galore-in-old-lucknow---wazir-asaf-ud-daula-used-to-fly-elaborate-kites--know-the-special-nawab-connection</link>
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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 12:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> यूपी मे प्रतिबंध बेअसर....चाइनीज़ माझे की खरीद-फरोख्त बंद कराये योगी सरकार, हाई कोर्ट की फटकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पतंगबाजी में चीनी मांझे के उपयोग के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि राज्य सरकार इस अदालत द्वारा पहले ही जारी निर्देशों का अनुपालन करने को बाध्य है। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश पुन: दिया कि पतंगबाजी जब अपने चरम पर हो तो इस अवधि के दौरान सरकारी तंत्र यह सुनिश्चित करे कि मानव जीवन और पक्षियों का जीवन खतरे में डालने वाले चीनी मांझा का विनिर्माण, उपयोग और बिक्री ना हो। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567910/ban-ineffective-in-up----yogi-government-ordered-to-stop-the-sale-and-purchase-of-chinese-kite-string--high-court-reprimands-government"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(2).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पतंगबाजी में चीनी मांझे के उपयोग के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि राज्य सरकार इस अदालत द्वारा पहले ही जारी निर्देशों का अनुपालन करने को बाध्य है। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश पुन: दिया कि पतंगबाजी जब अपने चरम पर हो तो इस अवधि के दौरान सरकारी तंत्र यह सुनिश्चित करे कि मानव जीवन और पक्षियों का जीवन खतरे में डालने वाले चीनी मांझा का विनिर्माण, उपयोग और बिक्री ना हो। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने बुधवार को यह निर्देश जारी करते हुए हिमांशु श्रीवास्तव और दो अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका निस्तारित कर दी। इस याचिका में चीनी मांझा के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में कहा गया था कि 19 नवंबर, 2015 को एक जनहित याचिका में इस अदालत द्वारा पहले ही एक आदेश पारित किया गया था जिसमें राज्य सरकार को कानून के मुताबिक किसी भी रूप में चीनी मांझा के विनिर्माण, बिक्री और उपयोग रोकने के लिए सभी उचित कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/567852/mock-drill-at-bahraich-medical-college--rescue-and-control-techniques-in-disaster-situations-demonstrated"><span class="t-red">बहराइच मेडिकल कॉलेज में मॉक ड्रिल,</span> सिखाये गए आपदा की स्थिति में बचाव एवं नियंत्रण के गुण </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567910/ban-ineffective-in-up----yogi-government-ordered-to-stop-the-sale-and-purchase-of-chinese-kite-string--high-court-reprimands-government</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/567910/ban-ineffective-in-up----yogi-government-ordered-to-stop-the-sale-and-purchase-of-chinese-kite-string--high-court-reprimands-government</guid>
                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 10:48:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly : मकर संक्रांति पर खूब बिकी पतंग, 50 लाख का कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> मकर संक्राति के मौके पर शहर में पतंग और मांझे का कारोबार उछाल पर रहा। पतंगों की बिक्री के साथ शहर से लेकर देहात तक में पतंगबाजी भी खूब हुई। मकर संक्रांति के मौके पर शहर में करीब 50 लाख रुपये का पतंग और माझे का कारोबार किया गया, जिससे दुकानदार काफी खुश नजर आ रहे हैं।</p><p>बरेली के मांझा अपनी तेज धार के लिए देश ही नहीं विदेश में भी मशहूर है। शहरी क्षेत्र में आजमनगर, बासमंडी, किला, पुराना शहर, कुतुबखाना में पतंग और मांझे के करीब 70 दुकानदार है। आजमनगर निवासी पतंग और मांझा विक्रेता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567948/bareilly-kites-sold-in-abundance-on-makar-sankranti-business-worth"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/211.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> मकर संक्राति के मौके पर शहर में पतंग और मांझे का कारोबार उछाल पर रहा। पतंगों की बिक्री के साथ शहर से लेकर देहात तक में पतंगबाजी भी खूब हुई। मकर संक्रांति के मौके पर शहर में करीब 50 लाख रुपये का पतंग और माझे का कारोबार किया गया, जिससे दुकानदार काफी खुश नजर आ रहे हैं।</p><p>बरेली के मांझा अपनी तेज धार के लिए देश ही नहीं विदेश में भी मशहूर है। शहरी क्षेत्र में आजमनगर, बासमंडी, किला, पुराना शहर, कुतुबखाना में पतंग और मांझे के करीब 70 दुकानदार है। आजमनगर निवासी पतंग और मांझा विक्रेता इनाम अली ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति पर काम पहले की सालों में अधिक रहा। दुकानों पर माल खत्म हो गया। जयपुर, मुरादाबाद, रामपुर, मेरठ और आसपास के जिले के लोग भी पतंग और मांझा खरीदने के लिए शहर पहुंचे थे। मकर संक्रांति पर गुरुवार को शहर में बड़ी संख्या में लोगों ने पतंगबाजी की। वहीं, सभी थाना क्षेत्रों में एसएसपी के आदेश पर पुलिस चाइनीज मांझा बेचने वालों की तलाश में रही, लेकिन कहीं भी चाइनीज मांझा नहीं पकड़ा गया।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567948/bareilly-kites-sold-in-abundance-on-makar-sankranti-business-worth</link>
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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 07:30:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ मेट्रो की अपील :  ट्रैक के पास पतंगबाजी से बचें, चीनी मांझा बन सकता है बड़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के मौके पर होने वाली पतंगबाजी के बढ़ने के बीच लखनऊ मेट्रो ने आमजन से अपील की है कि मेट्रो कॉरिडोर, ट्रैक के आसपास पतंग न उड़ाएं। मेट्रो प्रशासन का कहना है कि पहले भी पतंगबाजी के कारण मेट्रो संचालन प्रभावित हुआ है, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। </p>
<p>लखनऊ मेट्रो ने कहा कि चीनी मांझा और धातुयुक्त धागा बिजली का सुचालक होता है। इससे शॉर्ट सर्किट हो सकता है, जो न सिर्फ लोगों की जान-माल के लिए खतरा बनता है, बल्कि मेट्रो की ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) प्रणाली को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567717/lucknow-metro-s-appeal--avoid-flying-kites-near-the-tracks--chinese-kite-string-can-be-a-major-hazard"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(21)8.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के मौके पर होने वाली पतंगबाजी के बढ़ने के बीच लखनऊ मेट्रो ने आमजन से अपील की है कि मेट्रो कॉरिडोर, ट्रैक के आसपास पतंग न उड़ाएं। मेट्रो प्रशासन का कहना है कि पहले भी पतंगबाजी के कारण मेट्रो संचालन प्रभावित हुआ है, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। </p>
<p>लखनऊ मेट्रो ने कहा कि चीनी मांझा और धातुयुक्त धागा बिजली का सुचालक होता है। इससे शॉर्ट सर्किट हो सकता है, जो न सिर्फ लोगों की जान-माल के लिए खतरा बनता है, बल्कि मेट्रो की ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) प्रणाली को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। </p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि यदि धातुयुक्त धागा ओएचई लाइन में फंस जाए तो ट्रिपिंग की स्थिति बनती है, जिसके चलते बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है और मेट्रो सेवाएं रोकनी पड़ सकती हैं। कई मामलों में पतंग उड़ाने वाले लोग भी घायल हुए हैं। </p>
<p>मेट्रो ने चेतावनी दी है कि नियमों के तहत मेट्रो संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर मेट्रो रेलवे अधिनियम 2002 की धारा 78 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। लखनऊ मेट्रो ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि चीनी मांझा या तांबे के तार का प्रयोग न करें और मेट्रो कॉरिडोर के पास पतंग उड़ाने से परहेज करें, ताकि यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे और मेट्रो संचालन बिना रुकावट जारी रहे। </p>
<h5>ये भी पढ़ें :  </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/567716/cruise-operator-fined-rs-5-000--show-cause-notice-issued--for-dumping-sewage-in-the-ganges-as-seen-in-a-viral-video"><span class="t-red">क्रूज संचालक पर 5 हजार का जुर्माना, </span>कारण बताओ नोटिस जारी, वायरल वीडियो में गंगा में मल गिराने का प्रकरण </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567717/lucknow-metro-s-appeal--avoid-flying-kites-near-the-tracks--chinese-kite-string-can-be-a-major-hazard</link>
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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 14:31:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मकर संक्रांति :  इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा, ऐतिहासिक महत्व, यहां जानें क्या है कनेक्शन </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>पटना। </strong>मकर संक्रांति के दिन उमंग, उत्साह और मस्ती का प्रतीक पतंग उड़ाने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा मौजूदा दौर में काफी बदलाव के बाद भी बरकरार है। आधुनिक जीवन की भाग-दौड़ में भले ही लोगों में पतंगबाजी का शौक कम हो गया है, लेकिन मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा आज भी बरकारार है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">पतंग उड़ाने का वर्णन रामचरित मानस के बालकांड</h5>
<p style="text-align:justify;">इसी परंपरा की वजह से मकर संक्रांति को पतंग पर्व भी कहा जाता है। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का वर्णन रामचरित मानस के बालकांड में मिलता है। तुलसीदास ने इसका वर्णन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/567697/makar-sankranti--the-tradition-of-flying-kites-on-this-day--its-historical-significance--and-the-connection-%E2%80%93-learn-all-about-it-here"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(13)9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना। </strong>मकर संक्रांति के दिन उमंग, उत्साह और मस्ती का प्रतीक पतंग उड़ाने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा मौजूदा दौर में काफी बदलाव के बाद भी बरकरार है। आधुनिक जीवन की भाग-दौड़ में भले ही लोगों में पतंगबाजी का शौक कम हो गया है, लेकिन मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा आज भी बरकारार है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">पतंग उड़ाने का वर्णन रामचरित मानस के बालकांड</h5>
<p style="text-align:justify;">इसी परंपरा की वजह से मकर संक्रांति को पतंग पर्व भी कहा जाता है। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का वर्णन रामचरित मानस के बालकांड में मिलता है। तुलसीदास ने इसका वर्णन करते हुए लिखा है कि 'राम इन दिन चंग उड़ाई, इंद्रलोक में पहुंची जाई।' मान्यता है कि मकर संक्रांति पर जब भगवान राम ने पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक पहुंच गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">उस समय से लेकर आज तक पतंग उड़ाने की परंपरा चली आ रही है। भगवान कृष्ण के पतंग उड़ाने की परंपरा का उल्लेख भारतीय लोककथाओं और भजनों में मिलता है। कुछ भजनों और कहानियों में बताया गया है भगवान कृष्ण ने अपने मित्रों के साथ पतंग उड़ाई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">एक बार अर्जुन ने भगवान कृष्ण से 'सफल जीवन' के बारे में पूछा तो कृष्ण ने उन्हें पतंग उड़ाने के माध्यम से समझाया कि कैसे जीवन के धागे को सही दिशा में ले जाना चाहिए. कुछ भजनों में राधा का भी उल्लेख है, जिसमें वह कृष्ण की पतंग काटती हैं, जो इस खेल को और भी रोचक बनाता है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">वर्षों पुरानी यह परंपरा </h5>
<p style="text-align:justify;">वर्षों पुरानी यह परंपरा वर्तमान समय में भी बरकरार है। आकाश में रंग-बिरंगी अठखेलियां करती पतंग को देख हर किसी का मन पतंग उड़ाने के लिए लालायित हो उठता है। प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन लोग चूड़ा-दही खाने के बाद मकानों की छतों तथा खुले मैदानों की ओर दौड़े चले जाते हैं तथा पतंग उड़ाकर दिन का मजा लेते हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">यूपी के इन जिलों में आती है खास डिमांड </h5>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में कागज एवं प्लास्टिक की पतंगों का प्रचलन है। इनकी कीमत एक रुपए से पंद्रह रुपए तक है। पतंग खरीददारी का जुनून युवा एवं बच्चों में काफी देखा जा रहा है। पतंग उत्तर प्रदेश के बनारस, लटाई मुरादाबाद और मांझे लखनऊ से मंगाए जाते हैं। पतंग के एक अन्य थोक व्यापारी ने कहा कि युवाओं में भी मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने का क्रेज जोरों पर है। अपने प्यार का इजहार करने के लिए युवा वर्ग दिल और आई लव यू वाली पतंगों के प्रति आकर्षित होते दिख रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फिल्मी सितारों की तस्वीर वाली पतंगों की भी काफी मांग है। बाजार में पांच रुपये से लेकर 50 रुपये तक की पतंग बिक रही हैं, जबकिलटाई (परेता या चकरी) की कीमत 10 से 300 रुपये तक है। डोरेमोन, मोटू पतलू, शिन-चैन, मिकी माउस, स्पाइडर मैन जैसी पतंगें खास तौर पर बच्चों के बीच लोकप्रिय हैं। इन आकर्षक पतंगों के कारण बच्चों का उत्साह दोगुना हो गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">मकर संक्रांति के दिन लोग एक साथ मिलकर पतंग उड़ाते हैं, जिससे सामाजिक एकता बढ़ती है। पतंग उड़ाना बच्चों के लिए एक मजेदार खेल है। इससे उनके बचपन में यादें बनती हैं और बड़ों की बचपन की यादें ताजा होती हैं।पतंग उड़ाने को शुभता और खुशी का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए इस दिन बच्चों से लेकर बड़े तक हर कोई पतंग उड़ाने के लिए बेहद उत्सुक नजर आता है। </p>
<p style="text-align:justify;">मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाकर लोग अपने जीवन में खुशहाली और सफलता की कामना करते हैं। माना जाता है कि पतंग उड़ाने से बुरी शक्तियां दूर होती हैं। पतंग का आसमान में उड़ना शुभता और नई ऊंचाइयों का प्रतीक है। यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। पतंगबाजी मकर संक्रांति का सांस्कृतिक हिस्सा है। </p>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन समय से ही राजा-महाराजा और आम जन इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। समय के साथ यह परंपरा और भी प्रचलित हो गई। मकर संक्रांति के दिन लोग अलग-अलग रंगों और डिजाइनों की पतंगों से आसमान को सजाते हैं। 'काइट फेस्टिवल' जैसे आयोजन गुजरात के अहमदाबाद और राजस्थान के जयपुर में बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। यह न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास भी है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/567665/delhi--fire-breaks-out-at-bjp-mp-ravi-shankar-prasad-s-official-residence--3-fire-tenders-present-at-the-spot"><span class="t-red">दिल्ली :</span> BJP सांसद रविशंकर प्रसाद के आधिकारिक आवास में आग लगी, दमकल की 3 गाड़ियां मौके पर मौजूद </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/567697/makar-sankranti--the-tradition-of-flying-kites-on-this-day--its-historical-significance--and-the-connection-%E2%80%93-learn-all-about-it-here</link>
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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 12:50:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतंगबाजी में चाइनीज मांझे का किया इस्तेमाल तो होगी सजा, भोपाल में पूर्ण प्रतिबंध का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर की सीमा में पतंगबाजी के दौरान चाइनीज मांझे के उपयोग, उसके विक्रय, क्रय एवं भंडारण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 (2) के तहत यह आदेश जारी किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार, भोपाल शहर में किसी भी प्रकार से चाइनीज मांझे का इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध होगा। जो भी व्यक्ति चाइनीज मांझे के साथ पकड़ा जाएगा, उसके विरुद्ध पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/564868/-using-chinese-kite-string-will-result-in-punishment--a-complete-ban-has-been-ordered-in-bhopal--effective-immediately"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/untitled-design-(78)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर की सीमा में पतंगबाजी के दौरान चाइनीज मांझे के उपयोग, उसके विक्रय, क्रय एवं भंडारण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 (2) के तहत यह आदेश जारी किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार, भोपाल शहर में किसी भी प्रकार से चाइनीज मांझे का इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध होगा। जो भी व्यक्ति चाइनीज मांझे के साथ पकड़ा जाएगा, उसके विरुद्ध पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने यह निर्णय पक्षियों, राहगीरों एवं दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">हर वर्ष चाइनीज मांझे के कारण कई गंभीर हादसे सामने आते रहे हैं, जिनमें अनेक लोगों को जानलेवा चोटें आई हैं और कई मामलों में जान भी गई है। भोपाल पुलिस ने दुकानदारों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सुरक्षित और मानक मंझे का ही उपयोग करें। साथ ही यदि कहीं भी चाइनीज मांझे का विक्रय, भंडारण या उपयोग होता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़े : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/564839/vijay-hazare-trophy-matches-will-not-be-held-at-chinnaswamy-stadium--allegations-of-disregard-for-security-protocols">चिन्नास्वामी में नहीं होंगे विजय हजारे ट्रॉफी के मैच, सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/564868/-using-chinese-kite-string-will-result-in-punishment--a-complete-ban-has-been-ordered-in-bhopal--effective-immediately</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/564868/-using-chinese-kite-string-will-result-in-punishment--a-complete-ban-has-been-ordered-in-bhopal--effective-immediately</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:07:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामपुर: पतंगबाजी पड़ी जान पर भारी...छत से गिरकर युवक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>टांडा,अमृत विचार। </strong>नगर के युवक की उत्तराखंड के हल्द्वानी में छत से पतंग उड़ाते समय मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।</p>
<p>नगर के मोहल्ला भब्बलपुरी निवासी हामिद पुत्र जाहिद अली 30 उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित मलिक के बगीचे में किराये के मकान पर रहता था, गुरुवार को छत पर पतंग उडाने के लिए गया था। तभी अचानक पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने के कारण वह छत से घर की तीसरी मंजिल से गिरने के कारण बुरी तरह घायल हो गया था। अधिक खून बह जाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547609/rampur-kite-flying-and-death-of-a-young-man-falls"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/छत-से-गिरकर-मौत.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टांडा,अमृत विचार। </strong>नगर के युवक की उत्तराखंड के हल्द्वानी में छत से पतंग उड़ाते समय मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।</p>
<p>नगर के मोहल्ला भब्बलपुरी निवासी हामिद पुत्र जाहिद अली 30 उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित मलिक के बगीचे में किराये के मकान पर रहता था, गुरुवार को छत पर पतंग उडाने के लिए गया था। तभी अचानक पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने के कारण वह छत से घर की तीसरी मंजिल से गिरने के कारण बुरी तरह घायल हो गया था। अधिक खून बह जाने से युवक नें मौके पर ही दम तोड़ दिया। </p>
<p>आसपास के लोगों नें युवक के गिरने की जानकारी पुलिस को दी। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने मामले से परिवार को अवगत कराकर शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिवार वालों ने बताया कि हामिद हल्द्वानी में ऑटो रिक्शा चलाता था। मृतक की शादी दो साल पहले हुई थी। उसके एक लड़की भी है। हामिद के गिरने की खबर आई तो परिवार में कोहराम मच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मुरादाबाद</category>
                                            <category>रामपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 11:16:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली: पतंगबाजी बनी ट्रेनों की राह की रुकावट, ओएचई लाइन में फंसा रहा मांझा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार: </strong>पतंगबाजी ट्रेन संचालन में बाधा बन रही है। उत्तर पूर्व रेलवे (एनईआर) के इज्जतनगर मंडल के अंतर्गत कई रेलमार्गों पर पतंग के मांझे ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन में उलझ कर समस्या पैदा कर रहे हैं। इससे ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है। यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>सबसे अधिक प्रभावित खंडों में बरेली सिटी–कलेक्टरबकगंज, रामपुर–चामरा और हल्दी रोड–लालकुआं रेल खंड शामिल है। इन इलाकों के आसपास के रिहायशी क्षेत्रों से आए दिन पतंगबाजी की जा रही है। जब पतंग कटकर उड़ती है, तो उसका नायलॉन या चाइनीज मांझा ओएचई तारों में उलझ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536322/bareilly--kite-flying-becomes-an-obstacle-for-trains--manjha-stuck-in-ohe-line"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/सायन-और-नीला-ग्रंज-संगीत-youtube-थंबनेल---2025-05-03t101502.124.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार: </strong>पतंगबाजी ट्रेन संचालन में बाधा बन रही है। उत्तर पूर्व रेलवे (एनईआर) के इज्जतनगर मंडल के अंतर्गत कई रेलमार्गों पर पतंग के मांझे ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन में उलझ कर समस्या पैदा कर रहे हैं। इससे ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है। यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>सबसे अधिक प्रभावित खंडों में बरेली सिटी–कलेक्टरबकगंज, रामपुर–चामरा और हल्दी रोड–लालकुआं रेल खंड शामिल है। इन इलाकों के आसपास के रिहायशी क्षेत्रों से आए दिन पतंगबाजी की जा रही है। जब पतंग कटकर उड़ती है, तो उसका नायलॉन या चाइनीज मांझा ओएचई तारों में उलझ जाता है।</p>
<p>यह न केवल विद्युत प्रवाह में रुकावट पैदा करता है, बल्कि शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ाता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ओएचई लाइन में मांझा फंसने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।</p>
<p>इससे न केवल ट्रेनें देरी से चल रही हैं, बल्कि कई बार उन्हें बीच रास्ते में रोकना पड़ता है। रेलवे की तकनीकी टीमें इन घटनाओं से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन बार-बार की परेशानी से संचालन व्यवस्था गड़बड़ा रही है।</p>
<p>मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज सिंह ने बताया कि रेलवे ट्रैक के आसपास पतंगबाजी न करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि जानमाल का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। रेल प्रशासन ने जिला प्रशासन से भी इस संबंध में सहयोग मांगा है,</p>
<p>ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा सके। रेलवे ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति ओएचई क्षेत्र के आसपास पतंग उड़ाते हुए पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-<span style="color:rgb(224,62,45);"> </span></strong><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/536319/bareilly--success-in-the-fourth-attempt--solid-waste-management-plant-expected-to-start">बरेली: चौथी कोशिश में मिली कामयाबी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू होने की उम्मीद</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 10:15:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Preeti Kohli]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीलीभीत: सिस्टम सख्त तो रिस्क पर काम...ये कहकर बढ़ा दिए चाइनीज मांझे के दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पीलीभीत, अमृत विचार।</strong> बसंत पंचमी को लेकर प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की डिमांड के साथ ही दामों में भी उछाल है। एक तरफ पुलिस प्रशासन की ओर से धरपकड़ के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है। सुनगढ़ी क्षेत्र को छोड़ अन्य कहीं पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इधर, धरपकड़ और निगरानी का शोर बढ़ने पर धंधेबाजों ने तीन गुना तक दाम बढ़ा दिए हैं। 120 रुपये में बिकने वाला प्रतिबंधित चाइनीज मांझा का पिंडा का दाम 350 से 400 रुपये तक वसूला जा रहा है। जिम्मेदार न तो कालाबाजारी रोक सके हैं, न ही बड़े धंधेबाजों पर शिकंजा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/519752/pilibhit-system-strictly-increased-the-price-of-chinese-manj"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-02/582.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पीलीभीत, अमृत विचार।</strong> बसंत पंचमी को लेकर प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की डिमांड के साथ ही दामों में भी उछाल है। एक तरफ पुलिस प्रशासन की ओर से धरपकड़ के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है। सुनगढ़ी क्षेत्र को छोड़ अन्य कहीं पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इधर, धरपकड़ और निगरानी का शोर बढ़ने पर धंधेबाजों ने तीन गुना तक दाम बढ़ा दिए हैं। 120 रुपये में बिकने वाला प्रतिबंधित चाइनीज मांझा का पिंडा का दाम 350 से 400 रुपये तक वसूला जा रहा है। जिम्मेदार न तो कालाबाजारी रोक सके हैं, न ही बड़े धंधेबाजों पर शिकंजा कसा जा सका है।</p>
<p>तराई के जनपद पीलीभीत में बसंत पंचमी पर पूजा अर्चना के साथ ही पतंगबाजी का रिवाज है।  इस दिन हर वर्ग के लोग छतों पर पतंगबाजी करते नजर आते हैं। पूरा आसमान पतंगों से पटा रहता है। बीते कुछ सालों में पतंगबाजी में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। एक तरह से कहें तो पतंग उड़ाने के शौकीन मौत की इस डोर का इस्तेमाल करने में लगे हैं। जबकि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा पक्षियों के साथ ही इंसानों के लिए भी खतरनाक साबित होता रहा है। कई राहगीर जनपद में चाइनीज मांझे की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। वहीं, कुछ समय पहले ही शाहजहांपुर जनपद में एक सिपाही की जान तक चली गई थी। अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने चाइनीज मांझे की धड़ल्ले से हो रही बिक्री के खिलाफ ज्ञापन भी दिया लेकिन कार्रवाई औपचारिकता में सिमटकर रह गई थी। अब बसंत पंचमी को लेकर बिक्री तेज हो गई। मगर कार्रवाई की सुस्त चाल को बढ़ाया नहीं जा सका है। शहर के कई इलाकों में धंधेबाजों ने बड़ा स्टॉक कर माल की बिक्री की। </p>
<p><strong>शौकीन बोले: 120 वाला पिंडा कर दिया 350 से 400 रुपये </strong><br />प्रतिबंधित चाइनीज मांझा की कालाबाजारी बढ़ गई है। पतंग उड़ाने के शौकीन युवकों की मानें तो सख्ती के नाम पर भले ठोस कार्रवाई न हो सकी हो। मगर, 120 रुपये में बिकने वाला चाइनीज मांझे का पिंडा पहले 200 -250 रुपये तक बेचा जाता रहा। इसके बाद शहरी क्षेत्र में कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई तो धंधेबाज घबराए लेकिन बिक्री चलती रही। अब आलम ये है कि छिपकर चल रही चाइनीज मांझे की बिक्री के दौरान एक पिंडा 350-400 रुपये तक बेचा जा रहा है। इसे लेकर सवाल किया जाए तो धंधेबाजों का एक ही जवाब है कि सख्ती बहुत है, रिस्क पर काम कर रहे हैं। इसलिए दाम बढ़ा दिए हैं। फिलहाल हादसे का सबब बन रहे प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री नहीं रुक सकी है।</p>
<p><strong>कोतवाली क्षेत्र में कई धंघेबाज..सुनगढ़ी ने दो और किए गिरफ्तार</strong><br />शहरी क्षेत्र की बात करें तो सुनगढ़ी और कोतवाली क्षेत्र में कई पतंग की दुकानें हैं। पतंग उड़ाने वाले शौकीनों की बात करें तो अधिकांश दुकानदार छिपकर घर या फिर अन्य स्थानों पर स्टॉक करके चाइनीज मांझा अधिक दाम पर बेच रहे हैं। मगर, कोतवाली पुलिस कोई गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। सुनगढ़ी पुलिस ने जरूर इसे लेकर एक और कार्रवाई की है। एक दिन पहले ही 80 बंडल प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बरामद करते हुए दो धंधेबाज गिरफ्तार किए थे। जो कि बरेली से चाइनीज मांझे की खेप लाकर धंधा कर रहे थे। इसके बाद अब सुनगढ़ी पुलिस के दरोगा राहुल शर्मा ने टीम के साथ दबिश देकर बल्लभ नगर कॉलोनी के निवासी  शिवम यादव और दीपक यादव को नौगवां चौराहा के पास से गिरफ्तार किया है। उनके पास से 41 बंडल प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बरामद किया गया है। जिसका वजन करीब 21.36 किग्रा है। दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईअर दर्ज कर कार्रवाई की गई है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/519613/what-happened-while-blessing-pilibhit-bride-and-groom-is-such">पीलीभीत: वर-वधु को आशीर्वाद देते वक्त क्या हुआ ऐसा कि छा गया मातम..जानिए पूरा मामला</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>पीलीभीत</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/519752/pilibhit-system-strictly-increased-the-price-of-chinese-manj</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 17:56:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीलीभीत: प्रतिबंध बेअसर...धड़ल्ले से हो रही चाइनीज मांझा की बिक्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पीलीभीत, अमृत विचार।</strong> प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा की बिक्री पर जिम्मेदार रोक नहीं लगा सके हैं। बसंत पंचमी नजदीक आने के बाद इसकी बिक्री में और तेजी आ चुकी है। पुलिस प्रशासन की ओर से शिकंजा कसने के नाम पर एक दिन निभाई गई औपचारिकता का कोई असर धरातल पर नहीं है। सख्ती का असर सिर्फ इतना है कि दुकानों से चाइनीज मांझा का स्टॉक हटाया जा चुका है। आसपास ही घर व गोदाम से इसकी बिक्री छिपकर की जा रही है। मगर, उसके भी मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। नतीजतन इस मौत की डोर (चाइनीज मांझा) के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/519368/pilibhit-ban-sales-of-chinese-manjha-is-being-done-by"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/536.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पीलीभीत, अमृत विचार।</strong> प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा की बिक्री पर जिम्मेदार रोक नहीं लगा सके हैं। बसंत पंचमी नजदीक आने के बाद इसकी बिक्री में और तेजी आ चुकी है। पुलिस प्रशासन की ओर से शिकंजा कसने के नाम पर एक दिन निभाई गई औपचारिकता का कोई असर धरातल पर नहीं है। सख्ती का असर सिर्फ इतना है कि दुकानों से चाइनीज मांझा का स्टॉक हटाया जा चुका है। आसपास ही घर व गोदाम से इसकी बिक्री छिपकर की जा रही है। मगर, उसके भी मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। नतीजतन इस मौत की डोर (चाइनीज मांझा) के धंधेबाज पर्यावरण और लोगों की जान से खिलवाड़ कर मुनाफा कमाने में जुटे हुए हैं।</p>
<p>वैसे तो चाइनीज मांझा पहले से ही प्रतिबंधित है। हर साल इसकी बिक्री शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक होती रही है। कार्रवाई के नाम पर छिटपुट धरपकड़ की जाती है और जिम्मेदार आंकड़ेबाजी तक सीमित रहते हैं। पीलीभीत में बसंत पंचमी के मौके पर पतंगबाजी होती है। इस दिन को पतंग उड़ाने के शौकीन पतंगबाजी के लिए ही खास मानते हैं। इस बार भी चाइनीज मांझा ही पतंगबाजी के शौकीनों की पसंद बना हुआ है। बीते माह पड़ोसी जनपद शाहजहांपुर में एक सिपाही की जान चाइनीज मांझा की चपेट में आकर चली गई। जनपद में भी कई लोग इस मौत की डोर की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। इसके अलावा अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने शहर की कई पतंग की दुकानों पर पहुंचकर जांच पड़ताल के नाम पर औपचारिकता निभाई लेकिन मांझा बरामद नहीं किया जा सका है। इस पर अधिकारियों ने चेतावनी देकर ही कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। इधर, सुनगढ़ी पुलिस ने एक युवक को चाइनीज मांझे की बरामदगी कर गिरफ्तार किया था। इसके बाद दाम तो बढ़ गए लेकिन बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ सका है। शहर में बीस से अधिक पतंग की दुकानें है। बताते हैं कि बसंत पंचमी को चार दिन का समय बाकी है। ऐसे में डिमांड को देखते हुए कई बड़े धंधेबाजों ने इसका स्टॉक भी मंगा लिया है। मगर, इसकी बिक्री घर और गोदाम से छिपकर कराई जा रही है। मगर, इसकी धरपकड़ के लिए कोई प्रयास भी अब नहीं किए जा रहे हैं। चाइनीज मांझा की बिक्री हो रही है। इसका आकलन इसी से किया जा सकता है कि आसमान में उड़ती हर पतंग चाइनीज मांझे से बंधी हुई है। अब अगर इसकी बिक्री ही नहीं हो रही है और दुकानों पर चाइनीज मांझा नहीं है तो पतंग के शौकीन कहां से ला रहे हैं।</p>
<p><strong>बेबसी या फिर कुछ और...नुकसान न पहुंचा दे मौत की डोर</strong><br />चाइनीज मांझा की बिक्री की जा रही है। यह बात तो जिम्मेदार भी स्वीकार रहे हैं। मगर, इस पर शिकंजा कस पाने में असफल है। इसे लेकर उनका भी अपना तर्क है। घर, गोदाम या फिर अन्य किसी स्थान से छिपकर बिक्री की जा रही है। दुकानों पर मांझा न मिलने की बात कहकर जिम्मेदार कार्रवाई करने से पल्ला झाड़ गए हैं। अब ये बेबसी है या फिर कुछ और..। आखिर बसंत पंचमी के नजदीक आने के बाद भी पुलिस प्रशासनिक स्तर से चाइनीज मांझे के धंधेबाजों पर सख्ती करने को कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। अधिकारी एक बार पतंग की दुकानों पर गए और चेतावनी देकर लौट आए। इसके बाद दोबारा झांकने के लिए भी नहीं पहुंचे। न ही किसी तरह की कोई निगरानी कराई जा रही है। एक तरह से चाइनीज मांझे के रुप में पतंगों में बंधी मौत की इस डोर की बिक्री पर कैसे शिकंजा कसा जाएगा।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>पीलीभीत</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/519368/pilibhit-ban-sales-of-chinese-manjha-is-being-done-by</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2025 19:13:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pradeep Kumar]]></dc:creator>
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                <title>इंदौरः पतंग के धागे से 20 वर्षीय छात्र की मौत, परिजनों का आरोप- &quot;प्रतिबंधित चीनी मांझे से गई जान&quot; </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंदौर, अमृत विचारः</strong> इंदौर में मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग के मांझे से गला कटने के कारण एक महाविद्यालय के 20 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। द्वारकापुरी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि मोटरसाइकिल चला रहे हिमांशु सोलंकी (20) का गला मंगलवार शाम फूटी कोठी क्षेत्र के फ्लाईओवर पर पतंग के मांझे से कट गया। उन्होंने बताया कि यह हादसा तब हुआ, जब सोलंकी अपने एक दोस्त के साथ रसोई गैस का सिलेंडर लेने जा रहा था। </p>
<p>अधिकारी ने बताया कि हादसे में बुरी तरह घायल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/516658/indore-20-year-old-student-dies-due-to-kite-thread"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/untitled-design-(16)3.png" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर, अमृत विचारः</strong> इंदौर में मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग के मांझे से गला कटने के कारण एक महाविद्यालय के 20 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। द्वारकापुरी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि मोटरसाइकिल चला रहे हिमांशु सोलंकी (20) का गला मंगलवार शाम फूटी कोठी क्षेत्र के फ्लाईओवर पर पतंग के मांझे से कट गया। उन्होंने बताया कि यह हादसा तब हुआ, जब सोलंकी अपने एक दोस्त के साथ रसोई गैस का सिलेंडर लेने जा रहा था। </p>
<p>अधिकारी ने बताया कि हादसे में बुरी तरह घायल सोलंकी को एक नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन ज्यादा खून बह जाने से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि सोलंकी के शव का बुधवार को पोस्टमॉर्टम कराया गया। सोलंकी, एक स्थानीय महाविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र था। उसके परिजनों का आरोप है कि प्रतिबंधित, ‘‘चीनी मांझे’’ (नायलॉन का तीखा धागा) के कारण इस नौजवान की जान गई। </p>
<p>अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने कहा, ‘‘जिस मांझे से सोलंकी की गर्दन कटी, उसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही कहा जा सकेगा कि यह प्रतिबंधित मांझा था या नहीं।’’ उन्होंने कहा कि जांच के बाद सोलंकी की मौत के मामले में उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। नायलॉन से बना या कुचले हुए कांच से लेपित मांझा इतना तीखा होता है कि इससे जानलेवा घाव हो सकता है। प्रतिबंधित होने के बावजूद, पतंगबाजी के शौकीन इस मांझे को अपने प्रतिद्वंद्वियों की पतंग काटने के लिए इस्तेमाल करते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2025 15:14:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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