1- दिल के दौरा की दवा

लोगों को पहली बार दिल का दौरा पड़ने पर आम तौर पर ‘क्लोपिडोग्रेल’ दवा दी जाती है, जो दोबारा हृदयाघात के जोखिम को कम कर देती है। एक ओर यह दवा दोबारा दिल का दौरा पड़ने को रोकने में काफी कारगर है, तो दूसरी ओर यह केवल तभी काम कर सकती है जब शरीर का सीवाईपी2सी19 एंजाइम इसे सक्रिय कर चुका हो।

2- प्रभावी नहीं क्लोपिडोग्रेल

अनुमान है कि यूरोपीय वंश के तीन में से एक व्यक्ति में इन आनुवंशिक विविधताओं में से एक पाई जाती है- और कुछ जातीय समूहों में यह काफी ज्यादा आम होती हैं। इसलिए, अगर ‘क्लोपिडोग्रेल’ दवा दी जाए तो उन्हें बाद में दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक होता है। हमारे नए अध्ययन से यह भी पता चला है कि ‘क्लोपिडोग्रेल’ कई ब्रिटिश दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रभावी नहीं हो सकती।

3- अध्ययन

यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूनाइटेड किंगडम (यूके) में दक्षिण एशियाई लोगों के हृदय रोग से पीड़ित होने की दर उच्च है। हमने अपना अध्ययन 44,396 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण करके शुरू किया, जिन्होंने ब्रिटिश-पाकिस्तानी और ब्रिटिश-बांग्लादेशी लोगों पर किए गए अध्ययन ‘जीन एंड हेल्थ’ में भाग लिया था।

4- अध्ययन में आया

इस अध्ययन में स्वास्थ्य समस्याओं और दवाओं के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को अनुवांशिक आंकड़ों से जोड़कर देखा गया था। हमने पाया कि हर दस में से लगभग छह लोगों (57 प्रतिशत) में