1- कुशल स्वास्थ्यकर्मियों

सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने और 2030 के बाद भी वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती देने के लिए दुनिया को और भी अधिक तथा बेहतर कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत है। कोविड-19 महामारी और ज्यादा समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति नहीं रह सकती है, लेकिन इसके बावजूद दुनिया अब भी स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है। यह सतत विकास लक्ष्य-तीन को हासिल करने के रास्ते में बाधा बन सकता है।

2- जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य संबंधित कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं जैसे- अत्याधिक गर्मी के प्रभाव और मौसम के कारण हुई घटनाओं से मच्छर जनित बीमारियों और खाद्य पदार्थों का सकंट बढ़ा है। ऐसे में संक्रामक रोगों को खत्म करने में मिली पिछली कामयाबी पर भी असर पड़ सकता है। गैर-संचारी रोग भी बढ़ रहे हैं।

3- कुपोषण और मोटापा

कुपोषण के साथ अल्पपोषण और मोटापे की बढ़ती महामारी पर काबू पाने की जरूरत है। सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निर्धारित 15 वर्ष में से सात वर्ष गुजर चुके हैं। ऐसे में लक्ष्यों की प्रगति का जायजा लेने, चुनौतियों का आकलन करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए फिर से प्रतिबद्ध होने की जरूरत है। स्वास्थ्य पर 2015 में एसडीजी-3 को अपनाया गया था।

4- एसडीजी का लक्ष्य

एसडीजी के लक्ष्य हासिल करने के लिए अब सिर्फ सात वर्ष ही बचे हैं। ऐसे में प्राथमिक देखभाल को लेकर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, स्वास्थ्य नीतियों और कार्यक्रमों के सभी चरणों में समुदायों की सक्रिय भागीदारी जैसे प्रयासों पर ध्यान केंद्र करने की जरूरत है। इसके लिए स्वास्थ्य कार्यबल को और अधिक कुशल बनाने की जरूरत है।