1- सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल

एक शोध में सामने आया कि सोशल मीडिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से छात्र आत्मविश्वास की कमी और मानसिक रोग के शिकार बन रहे हैं और स्मार्टफोन से दूर रहने के डर के कारण वे अवसाद की समस्या से भी जूझ रहे हैं।

2- शोध में पाया गया

शोध में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया के सभी प्रभाव नकारात्मक नहीं होते, लेकिन जो लोग सोशल मीडिया की लत का शिकार हैं उन्हें मदद की जरूरत है। यह शोध चीन, ताइवान और मलेशियाई विश्वविद्यालय के छात्रों पर किया गया। ऑनलाइन सर्वेक्षण में 622 छात्रों ने भाग लिया। पाया गया कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा उपयोग करने वालों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधित बीमारी हो सकती है। विशेष रूप से, छात्र नोमोफोबिया से जूझ रहे है।

3- नोमोफोबिया

नोमोफोबिया से ग्रस्त लोगों के मन में मोबाइल यह डर रहता है कि उनका स्मार्टफोन संचालन योग्य नहीं है। इसके अलावा कई छात्र वजन से संबंधित समस्या को लेकर भी चिंता से जूझते रहते हैं। वजन को लेकर कुछ लोग उन्हें कमतर आंकते हैं। ऐसे लोग जो वजन से संबंधित अपराधबोध से जूझ रहे हैं उनमें कम आत्मसम्मान, कम आत्मविश्वास और नकारात्मक भावनाएं जैसे लक्षण पाए जाते हैं।

4- मलेशियाई विश्वविद्यालयों अध्ययन

मलेशियाई विश्वविद्यालयों के 380 छात्रों पर किए गए एक अन्य शोध में पाया गया कि सोशल मीडिया के अत्याधिक उपयोग से छात्र अवसाद, घबराहट और तनाव जूझ रहे हैं। पहले अध्ययन में देखा गया कि जो छात्र प्रतिदिन औसतन लगभग पौने पांच घंटे सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, उनमें 40 फीसदी से अधिक में सोशल मीडिया की लत का जोखिम रहता है।