1- स्ट्रोक

अगर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते हैं तो दुनियाभर में वर्ष 2050 तक आघात यानी स्ट्रोक से मरने वाले लोगों की संख्या 50 फीसदी बढ़कर प्रतिवर्ष 97 लाख तक होने का अनुमान है।

2- अध्ययन

लांसेट न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। 2020 से 2050 के बीच स्ट्रोक के कारण स्वास्थ्य की समस्या एवं आर्थिक प्रभावों में तेजी आएगी और खास तौर पर निम्न तथा मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) पर आघात का प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। तथ्य आधारित दिशा-निर्देशों की समीक्षा, हालिया सर्वे और दुनियाभर के स्ट्रोक विशेषज्ञों के साथ साक्षात्कार के आधार पर लेखकों ने तथ्य-आधारित व्यावहारिक सिफारिशें की है ताकि वैश्विक बोझ को कम किया जा सके।

3- दोगुने हुए स्ट्रोक के मामले

लेखकों का कहना है कि स्ट्रोक से जूझने वाले लोगों की संख्या, स्ट्रोक से मौत या फिर इस स्थिति से परेशानी में रहने के मामले दुनियाभर में बीते 30 वर्षों में करीब दोगुने हो चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों से हैं। लेखकों के मुताबिक, उच्च आय वाले देशों की तुलना में स्ट्रोक की दर कम आय वाले देशों में बहुत तेजी से बढ़ रही है।

4- सतत विकास लक्ष्य

सतत विकास लक्ष्य 3.4 का मकसद 2030 तक स्ट्रोक सहित गैर संचारी रोगों से, समय पूर्व होने वाली 4.10 करोड़ मौतों में एक तिहाई कमी लाना है। न्यूजीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर वलेरी एल. फिजिन ने कहा, ''वैश्विक आबादी पर स्ट्रोक का बहुत भारी असर पड़ता है, जिसकी वजह से हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवाते हैं या फिर स्थायी अक्षमता का शिकार होते हैं।