कैसे पड़ा 'शिमला' शहर का नाम

शिमला का नाम एक हिंदू देवी श्यामला के प्रतिष्ठान के बाद पड़ा है। ब्रिटिश राज्य के दौरान, भारत के वायसराय जॉन लॉरेंस ने शिमला को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था। शिमला में जनरल पोस्ट ऑफिस करके उत्तरी भारत का सबसे पुराना डाकघर है, जिसे 1882 में स्थापित किया गया था।

कैसे पड़ा शिमला मिर्च का नाम

शिमला मिर्च का संबंध भी शिमला से है। बहुत पहले ब्रिटिश शासकों द्वारा शिमला मिर्च को लाया गया था और उसे शिमला में अत्यधिक मात्रा में उगाने का फैसला किया गया था। तब से ही उस मिर्च को शिमला मिर्च के नाम से जाना जाता है।

अर्की किला

अर्की किला, ऐतिहासिक इमारत है जिसका निर्माण वर्ष 1660 हुआ था। इसका निर्माण राजपूत और मुगल दोनों वास्तुकला में किया गया है। इस इमारत की सबसे बड़ी खासियत उसके अंदर मौजूद पेंटिंग्स है, जो बहुत पुरानी है।

कुल्लू

कुल्लू, 1230 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चारों ओर से देवदार की पहाड़ियों से घिरा एक राजसी पहाड़ियों के साथ एक खुली घाटी है, जो लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। कुल्लू घाटी को देवताओं की घाटी भी कहा जाता है, जो विज नदी के किनारे बसा हुआ है।

नालदेहरा

समुद्र तल से 2044 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवदार के पेड़ से घिरा हुआ नालदेहरा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह हिल स्टेशन सूर्योदय और सूर्यास्त साइट के लिए बहुत ही लोकप्रिय है। यहां पर सुंदर व्यू देखने के साथ अपने कैमरे में कैप्चर कर सकते हैं। वहीं, घुड़सवारी का आनंद ले सकते हैं।

शिमला राज्य संग्रहालय

संग्रहालय का निर्माण औपनिवेशिक शैली में वर्ष 1974 में सांस्कृतिक समृद्धि को सुरक्षित रखने व अतीत को दर्ज करने के उद्देश्य से किया गया था। इसमें पुस्तकालय, मूर्ति, पेंटिग्स, सिक्के, हस्तशिल्प भी संग्रहित हैं।

मनाली

खूबसूरत हिल स्टेशन मनाली शहर तीन समीपवर्ती पहाड़ियों का एक संग्रह है। प्रत्येक में एक गांव और एक पुराना मंदिर स्थित है। यहां पर मनु मंदिर, वशिष्ठ मंदिर और हडिम्बा मंदिर है। हडिंबा मंदिर को देवदार की लकड़ियों से बनाया गया है, जो विशाल आकार में है, जो काफी पुराना है। पर्वतारोहण, ट्रैकिंग, स्कीइंग का पर्यटक लुफ़्त उठाते हैं।

क्राइस्ट चर्च शिमला

द रिज पर स्थित क्राइस्ट चर्च उत्तरी भारत का दूसरा सबसे पुराना चर्च है, जिसका निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल में किया गया था। कर्नल जेटी बोयलियो ने चर्च का डिजाइन किया था। जिसके निर्माण में कुल 13 साल का समय लगा था। 1844 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था और 1857 में यह बनकर खत्म हुआ था। ये हर रविवार को खुला रहता है।

माल रोड शिमला

माल रोड, शिमला के केंद्र में स्थित एक भीड़भाड़ वाला बाजार है, जो कई कैफे, रेस्तरां, पुस्तक की दुकान और कई आकर्षक चीजों को बेचने वाली दुकानों से भरा हुआ है। यहाँ पर मनोरंजन के लिए क्लब भी है।

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