चुन्नमल हवेली

दिल्ली की सबसे व्यस्त गलियों में स्थित होने की वजह से, ये हवेली कहीं खो चुकी है। लेकिन चांदनी चौक में होने के बाबजूद भी ये इमारत आज भी देश की शोभा और आकर्षण का प्रतीक बनी हुई है। दिल्ली की ये छुपी हुई जगह, लगभग 140 दुकानों से घिरी हुई है। मार्केट में शॉपिंग करने के दौरान आपको यहां घूमने के लिए जरूर जाना चाहिए।

हिजड़ों का खानकाही

व्यस्त महरौली बाजार के बीच में बसा ये आकर्षण ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, लेकिन निश्चित रूप से देखने लायक जगहों में से एक है। हिजड़ों का खानकाह के नाम से जाना जाने वाला यह स्थान किन्नरों के सम्मान में बना एक स्मारक है। लोदी युग में बनी इस जगह के आसपास का शांत वातावरण देखने लायक है। अगर आप एकांत में किसी स्थान पर घूमना चाहते हैं, तो बार यहां जरूर जाएं।

भारद्वाज झील असोला

दिल्ली जैसे शहर में झील सुनने में आपको थोड़ा अजीब लगे, लेकिन ये दक्षिणी छोर में बसा एक छुपा हुआ रत्न है। यह झील असोला वन्यजीव अभयारण्य में स्थित है, ये एक ऐसा क्षेत्र है जो दिल्ली वन्यजीव विभाग द्वारा आरक्षित है। यहां काफी संख्या में पक्षी और जानवर देखे जा सकते हैं।

मजनू का टीला: तिब्बती कॉलोनी

मजनू का टीला को 'द लिटिल तिब्बत' भी कहा जाता है। ये जगह तिब्बत के शरणार्थियों का घर रहा है। उत्तरी दिल्ली का ये स्थान मंदिरों, कैफे, रेस्टोरेंट, किताबों की दुकानों और गेस्ट हाउस के रूप में भी काफी ज्यादा फेमस है।

छोटा कुतुब मीनार

दिल्ली में हस्तसाल गांव के केंद्र में स्थित छोटा कुतुब मीनार है, जो मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा निर्मित एक टावर है। 1650 में निर्मित, लाल बलुआ पत्थर से बना ये मीनार तीन मंजिला लंबा है। छोटा मीनार अपनी स्थापत्य शैली और संरचना में कुतुब मीनार जैसा दिखता है। टॉवर शुरू में 5 मंजिला लंबा था, जिसमें गुंबद के ऊपर दो मंजिलें थीं। टॉवर को शुरू में सम्राट के लिए एक मनोरंजन क्षेत्र के रूप में बनाया गया था। छोटा मीनार की वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व इसे दिल्ली के सबसे प्रमुख ऑफबीट स्थानों में से एक बनाती है।

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