अयोध्या: सिंचाई के अभाव में सूख रही धान की नर्सरी,‌ किसान परेशान, बीजों के भाव छू रहे आसमान

अयोध्या: सिंचाई के अभाव में सूख रही धान की नर्सरी,‌ किसान परेशान, बीजों के भाव छू रहे आसमान

मसौधा/अयोध्या, अमृत विचार। चिलचिलाती धूप और बढ़े तापमान में जनजीवन बेहाल है।‌ नहरों में उड़ती धूल और विद्युत आंख मिचौली से सिंचाई के संसाधन भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। ऐसे में किसानों की जीविका खेती किसानी चौपट हो रही है। सिंचाई के अभाव में धान की नर्सरी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे। आर्थिक रूप से कमजोर किसान जिनके पास सिंचाई संसाधनों का अभाव है उनके खेतों की हरियाली तो बर्बादी के कगार पर है। रही सही कसर नकदी फसल के रूप में बोई जाने वाली साग भाजी की फसलें नष्ट हो रही हैं।

जिसका सीधा प्रभाव सब्जी मंडियों में सब्जियों के भाव पर पड़ रहा है। दूसरी तरफ बरसात के मौसम में उगाई जाने वाली धान की नर्सरी बीजों के दामों में वृद्धि से 50 प्रतिशत किसानों ने  अभी रोपाई के लिए धान की नर्सरी भी नहीं उगाई है।किसानों का कहना है कि यदि मानसून आने में पखवाड़ा भर से अधिक समय लगा, तो धान की नर्सरी रोपाई के काबिल ही नहीं रह पायेगी। जिसका सीधा प्रभाव धान के उत्पादन पर पड़ेगा।

खेती किसानी की बदौलत परिवार की जीविका चलाने वाले किसान राममिलन बताते हैं कि इस बार जैसे हालात पिछले कई वर्षों में भी देखने को नहीं मिले थे। धान की नर्सरी तैयार करने के पीक आवर्स में नहरों में धूल उड़ रही है। विद्युत आंख मिचौली से नलकूपों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।

बनके गांव बृजेश कुमार, पलिया रिसाली के राम कलप वर्मा, अंकवारा के राम धनी पटेल, माधवपुर के कपिल देव सहित कई किसानों ने  एक तो मानसून में देरी के संकेत दूसरे नहरों में पानी‌ नहीं, तीसरे डीजल संचालित नलकूपों पर तेल की महंगाई की मार‌, इस साल खेती किसानी पर भारी पड़ रही है। धान की अच्छी पैदावार करने वाले किसान वंश बहादुर वर्मा व प्रदीप मौर्या बताते हैं कि इस बार बीते सालों के मुकाबले धान की नर्सरी के बीजों के भाव‌ बढ़े हैं। हालात बता रहे हैं कि इस साल किसान धान की नर्सरी ही नहीं तैयार कर पाएगें तो उत्पादन प्रभावित होना स्वाभाविक है।

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