हिल साइड सेफ्टी कमेटी की सुनी होती, तो नहीं दरकता नैनीताल

984 में प्राधिकरण के गठन के बाद आज तक इस कमेटी की बैठक तक नहीं की गई

हिल साइड सेफ्टी कमेटी की सुनी होती, तो नहीं दरकता नैनीताल

चंद्रेक बिष्ट, नैनीताल,अमृत विचार। सरोवर नगरी नैनीताल की संवेदनशीलता को देखते हुए अंग्रेजों ने वर्ष 1867 में निर्माणों पर प्रतिबंध लगाते हुए हिल साइड सेफ्टी कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की सिफारिश पर नैनीताल में 62 किमी नालों व उपनालों का निर्माण कराया गया था।

संवेदनशील स्थानों में भवन निर्माण की इजाजत नहीं थी। 1980 तक इसकी नियमित बैठकें भी हुआ करती थीं। लेकिन, झील विकास प्राधिकरण के वर्ष 1984 में गठन के बाद आज तक इस कमेटी की बैठक तक नहीं की गई। अगर इस कमेटी की मानी होती, तो नैनीताल चारों ओर से आज नहीं दरकता।

बरसात के दौरान नैनीताल में जगह-जगह भूस्खलन होना आम बात है। लेकिन बिना बरसात बलियानाला से लेकर अन्य स्थानों में नैनीताल दरक रहा है। कमेटी के नियमों के अनुसार, हरे वृक्षों और इन नालों के पांच मीटर की परिधि में निर्माण कार्य प्रतिबंधित किए गए थे। लेकिन आजादी के बाद इस कमेटी का औचित्य ही समाप्त जैसा हो गया।

पूर्व राज्यपाल केके पाल के आदेश पर  2015 में कमेटी के अध्यक्ष व तत्कालीन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट की अध्यक्षता में बैठक करवाई थी, लेकिन इस बैठक के बाद आज तक कोई बैठक नहीं हुई। नैनी झील व नगर को हिल सेफ्टी कमेटी ही संरक्षण दे सकती है। बता दें कि पी बैरन ने 1841 में नैनीताल की खोज की। वर्ष 1842 को नैनीताल में पहला भवन पिलग्रिम लाज का निर्माण किया गया। इसके बाद नैनीताल में अनियोजित तरीके से भवनों का निर्माण होने लगा। वर्ष 1866 में वर्तमान चार्टन लाज इलाके में पहला भूस्खलन हुआ।

इस क्षेत्र में अनियोजित भवन निर्माण के साथ ही जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस तरह पहली बार अंग्रेजी शासकों ने नैनीताल की संवेदनशीलता को पहचाना। वर्ष 1867 में हिल सेफ्टी कमेटी का गठन कर दिया गया। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। इसके बावजूद वर्ष 1880 में आल्मा पहाड़ी में जबरदस्त भू-स्खलन हुआ।

इसके बाद हिल सेफ्टी कमेटी की सिफारिश पर नैनीताल की तीनों पहाड़ियों में 60 से अधिक नालों व उपनालों का निर्माण किया गया। कमेटी के नियमों के अनुसार, नैनी झील के जलागमों में छेड़छाड़ की भी अनुमति नहीं थी। इसके अलावा नैनीताल के अंतरिम सड़कों को पक्का तक नहीं किए जाने के नियम थे। लेकिन आज हिल सेफ्टी कमेटी के नियमों का पालन तक नहीं किया जा रहा। यही कारण है कि नैनीताल अपने सबसे अधिक दुर्दशा के दिन देख रहा है और चारों ओर से दरक रहा है।

कमेटी ने लगाया था ग्रीन बेल्ट व डेंजर जोन में निर्माण पर प्रतिबंध
नैनीताल। हिल सेफ्टी कमेटी गठन के बाद ही नैनीताल में ग्रीन बेल्ट व डेंजर जोन को चिन्हित कर निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। जब तक अंग्रेज नैनीताल में रहे, तब तक इसका कठोरता से पालन हुआ। इसके बाद 1984 के दशक तक हिल सेफ्टी कमेटी की बैठकों में समीक्षा होती रही।

इसी दौरान झील विकास प्राधिकरण का गठन हुआ तो हिल सेफ्टी कमेटी के बनाए नियमों को ताक में रख दिया गया। तब से आज तक नैनीताल में शहर के ग्रीन बेल्ट व डेंजर जोन में नक्शा पास नहीं होने के बाद भी निर्माणकर्ताओं में इतना साहस हो गया है कि वह किसी के आदेशों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं और न ही शासन-प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझ रहा है। सच यह भी है कि सरोवर नगरी सत्ता, धनाढ्य वर्ग व व्यावसायिक मानसिकता की तिकड़ी के भंवर में पूरी तरह उलझ गया है।

निमार्ण कार्यों में रोक नहीं, तो कमेटी का औचित्य नहीं: रावत
नैनीताल। शहर में अवैध निर्माण कार्यों में रोक व नालों को बचाए जाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत ने कहा कि सरोवर नगरी नैनीताल की संवेदनशीलता को देखते हुए अंग्रेजों ने वर्ष 1867 में निर्माणों पर प्रतिबंध लगाते हुए हिल साइड सेफ्टी कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की सिफारिश पर नैनीताल में नालों का निर्माण कराया गया था। संवेदनशील स्थानों में भवन निर्माण का इजाजत नहीं थी।

आज तक नैनीताल में जिस तरह नियमों को ताक में रखकर अवैध निर्माण किए गए हैं। इन निर्माणों में राजनीतिक पहुंच का लाभ उठाया जा रहा है। कमेटी के नियमों का पालन आजादी के बाद से नहीं किया गया। यही कारण है कि संवेदनशील नैनीताल चारों ओर से खतरे की जद में है।

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