बरेली: कस्टम अधिकारी बनकर माइक्रोसाॅफ्ट कंपनी के पूर्व कर्मी को किया डिजिटल अरेस्ट, 13 लाख रुपए ठगे

बरेली: कस्टम अधिकारी बनकर माइक्रोसाॅफ्ट कंपनी के पूर्व कर्मी को किया डिजिटल अरेस्ट, 13 लाख रुपए ठगे

बरेली, अमृत विचार: थाना बारादरी क्षेत्र के रहने वाले पूर्व माइक्रोसाॅफ्ट कंपनी के कर्मचारी को ठगों ने कस्टम अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। ठगों ने कर्मचारी से 13 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाना में शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

ग्रीन पार्क निवासी एक युवक करीब दो साल पहले दिल्ली में रहकर माइक्रोसाॅफ्ट कंपनी में नौकरी करता था। नौकरी के दौरान ही युवक को ब्रेन हेमरेज हुआ। युवक ने इलाज के बाद नौकरी छोड़ दी और घर से ही अपना ऑनलाइन काम शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक पिछले दिनों युवक के पास एक फोन आया और फोन करने वाले ने कहा कि वह कस्टम अधिकारी बोल रहा है। उसने धमकाया कि युवक ने एक कंपनी का कोरियर भेजा है, जिसमें नशीली दवाएं, ड्रग्स और कई पासपोर्ट हैं। 

इसके बाद ठगों ने युवक को फोन पर ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया और धमकी दी कि फोन नहीं काटना है। ठग तीन दिनों तक युवक को फोन पर उलझाए रहे और कहा कि फोन काटा तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद ठगों ने कई बार में आरटीजीएस के माध्यम से 13 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। युवक ने साइबर क्राइम थाना में आरोपियों के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है। एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान के आदेश पर मामले में रिपोर्ट दर्ज कर कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

साइबर ठगों ने मेडिकल छात्रा को भी किया था डिजिटल अरेस्ट
21 फरवरी को बरेली के एक मेडिकल कॉलेज की परास्नातक छात्रा को भी साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट किया था। ठगों ने छात्रा का आधार कार्ड महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा बताकर धमकाया था और जांच के बहाने आठ लाख से ज्यादा रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर करा लिए थे। छात्रा ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत की थी।

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी करने का नया तरीका है। साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह के मुताबिक डिजिटल अरेस्ट के शिकार वह लोग होते हैं जो अधिक पढ़े-लिखे और कंप्यूटर फ्रेंडली होते हैं। इसका मतलब है कि कोई आपको ऑनलाइन धमकी देकर वीडियो कॉलिंग के जरिए आप पर नजर रख रहा है। अक्सर डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठग खुद को पुलिस या किसी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को धमकाते और अपना शिकार बनाते हैं।

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