हरदोई: देश की झोली में एक हाथ से स्वर्ण पदक डालने के लिए बेचैन हैं विशाल

हरदोई: देश की झोली में एक हाथ से स्वर्ण पदक डालने के लिए बेचैन हैं विशाल

हरदोई। हौंसला हो तो पहाड़ भी चींटी सा नज़र आता है। ठीक उसी तरह विशाल सिंह अपने हौंसले को उड़ान देते हुए आसमां छूने का जज़्बा रखते हैं। अपना दाहिना हाथ खोने के बाद भी विशाल सिंह की तमन्ना है कि एक बार देश की झोली में सोना ज़रूर डालें। हर कोई विशाल के इसी …

हरदोई। हौंसला हो तो पहाड़ भी चींटी सा नज़र आता है। ठीक उसी तरह विशाल सिंह अपने हौंसले को उड़ान देते हुए आसमां छूने का जज़्बा रखते हैं। अपना दाहिना हाथ खोने के बाद भी विशाल सिंह की तमन्ना है कि एक बार देश की झोली में सोना ज़रूर डालें। हर कोई विशाल के इसी हौंसले को उठ कर सलाम कर रहा है। शहर के विशाल सिंह ने 2010 में हुए एक हादसे में अपना दाहिना हाथ खो दिया था।

अपनी हिम्मत के बूते खेल के मैदान में उतरे विशाल ने क्रास बो शूटिंग से खेल की शुरुआत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर 10 मेडल हासिल करते हुए हर किसी को चौंका दिया। इसके बाद 2015 में एथलीट प्रतियोगिता में शामिल हुए और 400 मीटर मे स्वर्ण व 100 मीटर में कांस्य पदक हासिल करते हुए पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। इसके बाद उनका हौंसला और बढ़ा तो उन्होंने 2018 में एयर पिस्टल शूटिंग की तैयारी में जुट गए। जनवरी 2019 में 41 वीं यूपी स्टेट चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया।

उसके बाद जुलाई 2019 में प्री यूपी स्टेट शूटिंग में स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। विशाल सिंह ने बताया है कि उनका बस एक ही ख्वाब है कि वे नेशनल खेलों में शामिल होते हुए एक बार देश की झोली में सोना डाल दें। अपनी हिम्मत और हौसले के लिए विशाल सिंह ने अपनी जो पहचान बनाई है,वह अब किसी की मोहताज नहीं है। लोग उनके हौंसले और हिम्मत को उठ कर सलाम कर रहें हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ की खेलों की कढ़ाई
हरदोई। एक हाथ खोने के बाद भी विशाल सिंह ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने ट्यूशन पढ़ाते हुए खेलों की तैयारी जारी रखी। अपने कुछ दोस्तो से मदद लें कर पिस्टल खरीदी और फिर उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।आज भी विशाल सिंह का हौसला चट्टान की तरह मज़बूत है।

बड़े होने की बखूबी निभा रहें हैं ज़िम्मेदारी
हरदोई। तमाम तरह की उलझनों में उलझे हुए विशाल सिंह जहां देश के बहुत कुछ सोंच रहें हैं, वहीं इसके अलावा अपने तीन भाई और दो बहनों की पढ़ाई -लिखाई की पूरा ज़िम्मेदारी बखूबी निभा रहें हैं। उन्होंने बताया कि घर में बड़े होने का फर्ज़ निभाना भी ज़रूरी है, वहीं फर्ज़ निभा रहा हूं।

नौकरी की तलाश के लिए भटकना बन गया मजबूरी
हरदोई। माली हालत से कमज़ोर विशाल सिंह को अभी तक सरकार से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली।यार -दोस्तों के अलावा किसी और उनके ऊपर ज़रा भी तरस नहीं खाया। विशाल सिंह का कहना है कि एक अदद नौकरी के लिए उन्होंने न जाने कहां -कहां की दूरी तय की, लेकिन उनका मकसद पूरा नहीं हो सका।

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