हल्द्वानी: गौला नदी से 210 करोड़ की कमाई के लक्ष्य पर वाहन स्वामियों का अड़ंगा

हल्द्वानी: गौला नदी से 210 करोड़ की कमाई के लक्ष्य पर वाहन स्वामियों का अड़ंगा

हल्द्वानी, अमृत विचार। गौला नदी में खनन सत्र 2023-24 में कमाई का लक्ष्य 210 करोड़ रुपये तय हुआ है। वन विकास निगम और वन विभाग ने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कमर कस ली है लेकिन इस कमाई में खनन वाहन स्वामियों के विरोध का अड़ंगा लग गया है। वाहन स्वामी वाहनों की फिटनेस के निजीकरण और जीपीएस की अनिवार्यता के विरोध में मुखर हो गए हैं।

कुमाऊं, खासकर हल्द्वानी की आर्थिक रीढ़ गौला नदी कही जाती है। गौला नदी से सरकार को खासा राजस्व मिलता है। वर्ष 2022 में तकरीबन 185 और 2021 में करीब 165 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था जबकि 10 हजार से अधिक श्रमिकों, 7,452 वाहन स्वामियों, चालकों को यह नदी रोजगार देती है। खनन वाहनों के डीजल, मैकेनिक, ऑटो स्पेयर पार्ट्स वगैरह से बाजार में लगभग 800 से 1,000 करोड़ की आर्थिकी घूमती है। 

अमूमन खनन सत्र 1 अक्टूबर से 31 मई तक होता है। इस साल दिवाली व छठ पूजा देरी से होने की वजह से नवंबर में भी खनन शुरू होता  नहीं दिख रहा है। वन विकास निगम दिसंबर के पहले सप्ताह में खनन शुरू करने का दावा कर रहा है हालांकि खनन वाहन स्वामियों ने विरोध का बिगुल बजा दिया है। दरअसल, अब की बार खनन वाहनों की फिटनेस आरटीओ के बजाय निजी फिटनेस केंद्र में की जाएगी।

एक वाहन की फिटनेस पर करीब 2 हजार रुपये खर्च होता है लेकिन निजी केंद्र में यही शुल्क बढ़कर 20 से 25 हजार पहुंच सकता है। इसके अलावा वाहनों पर जीपीएस अनिवार्य कर दिया है। इसको लेकर खनन वाहन स्वामी मुखर हो गए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि यदि वाहनों की फिटनेस पहले की तरह नहीं की गई तो खनन का विरोध किया जाएगा। उनका कहना हैकि खनन वाहन महज 8 से 10 किमी ही चलते हैं, इन वाहनों का परमिट भी मैदानी क्षेत्रों का है ऐसे में जीपीएस की अनिवार्यता समाप्त होनी चाहिए। चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो कोई भी वाहन नदी में नहीं उतारा जाएगा। 

क्या कहते हैं खनन वाहन स्वामी 
वाहनों के निजी केंद्र पर फिटनेस का पुरजोर विरोध किया जा रहा है। यदि पहले की तरह आरटीओ ने फिटनेस नहीं की तो खनन का विरोध होगा। एक भी वाहन नदी में खनन के लिए नहीं उतरेगा।
= राजेंद्र सिंह बिष्ट, अध्यक्ष गौला खनन मजदूर संघर्ष समिति


सरकारी केंद्र में वाहन की फिटनेस करीब 2 हजार रुपये में होती है जबकि निजी केंद्र पर इसका 10 गुना शुल्क देना पड़ेगा। आमदनी इतनी नहीं है जितनी वाहन की फिटनेस में चली जाएगी। यदि निजी केंद्र पर फिटनेस की अनिवार्यता थोपी गई तो वाहन स्वामी नदी में खनन वाहन नहीं जाने देंगे।
= पम्मी सैफी, अध्यक्ष गौला खनन संघर्ष समिति 


जीपीएस और वाहनों की फिटनेस के निजीकरण का विरोध किया जा रहा है। इसको लेकर आरटीओ का घेराव भी किया था। यदि समय  रहते हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो वाहन  नदी में नहीं उतारा जाएगा। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। 
= रमेश चंद्र जोशी, अध्यक्ष, गौला खनन मजदूर उत्थान समिति

क्या बोले अफसर 
वन विकास निगम ने तैयारियां पूरी कर ली हैं, हमारा लक्ष्य 25 से 30 नवंबर के बीच खनन शुरू करना है। इलेक्ट्रॉनिक कांटों को लेकर सोमवार तक फैसला आ जाएगा। वाहनों के निजी केंद्र में फिटनेस को लेकर विवाद चल रहा है, इसका समाधान हो जाए तो खनन जल्द शुरू हो सकता है।

= धीरेश बिष्ट, डीएलएम वन विकास निगम

वाहन साढ़े सात हजार नवीनीकरण 500 का हुआ
वन विकास निगम के डीएलएम धीरेश बिष्ट ने बताया कि प्रत्येक खनन सत्र में वाहनों का नवीनीकरण होता है तभी वाहन नदी में जाते हैं। नदी में खनन के लिए 7452 वाहन पंजीकृत हैं लेकिन नवीनीकरण के लिए करीब 500 आवेदन आए हैं जबकि बाकी वाहन स्वामियों ने अभी वाहनों की फिटनेस ही नहीं कराई है। यदि समय से खनन शुरू नहीं हुआ तो सत्र प्रभावित होगा।

एक सर्वे हुआ, दूसरा बाकी
केंद्र ने गौला नदी में अधिकतम 54.25 लाख घनमीटर उपखनिज निकासी की अनुमति दी है हालांकि इससे पूर्व केंद्रीय एजेंसी से आरबीएम का आकलन कराना जरूरी है। वन विकास निगम की ओर से केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान ने सितंबर में पहला सर्वे कर दिया था लेकिन दूसरा अभी बाकी है। दूसरे सर्वे के बाद ही नदी में खनन के लिए आरबीएम की मात्रा का आकलन होता है।

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