शाहजहांपुर: तीन माह का बकाया, फिर भी ड्यूटी करने को मजबूर कंडक्टर

इलेक्ट्रिक बसों के कंडक्टरों का छलका दर्द

शाहजहांपुर: तीन माह का बकाया, फिर भी ड्यूटी करने को मजबूर कंडक्टर

शाहजहांपुर, अमृत विचार। इलेक्ट्रिक बस में कंडक्टरों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। रोजगार पाने के लिए जैसे-तैसे ड्यूटी ज्वाइन की लेकिन अब इन्हें वेतन के लिए तीन-तीन, चार-चार माह इंतजार करना पड़ रहा है। 

दाम नहीं तो काम नहीं की चेतावनी भी नहीं दे सकते हैं क्योंकि 50 बसों पर 80 कंडक्टर पहले से ही तैनात हैं, जरा सी गलती या धमकी इन लोगों पर भारी पड़ जाती है। तीन माह का बकाया होने के बाद भी ड्यूटी करने को मजबूर हैं, अधिकारी आश्वासन देकर टरका देते हैं। 

नगर निगम की ओर से संचालित इलेक्ट्रिक बस के कंडक्टरों ने बताया कि उन्हें केएसजे सिक्योरिटी डाइनामिक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जरिये संविदा पर रखा गया। चार रुपये 11 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से कंडक्टरों का वेतन बनता है, जिसमें से एसआई, पीएफ की कटौती होने पर तीन रुपये 11 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से बैंक खाते में भुगतान दिया जाता है लेकिन जिले में जब से इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की व्यवस्था की गई, तब से कंडक्टरों को प्रतिमाह निर्धारित समय पर वेतन देने की व्यवस्था नहीं गई। 

कंडक्टरों ने बताया कि जनवरी माह का वेतन छह अप्रैल को बैंक खाते में डाला गया लेकिन इसके बाद फरवरी मार्च, अप्रैल के वेतन देने की अभी तक व्यवस्था नहीं की गई। फरवरी माह का वेतन 20 मई को बैंक खाते में डाले जाने की बात कही गई लेकिन वेतन पांच कंडक्टर के खाते में पहुंचा, बाकी के खाते निल हैं। 

वेतन नहीं मिलने से परेशान कंडक्टरों ने बताया कि प्रतिदिन 202 किलोमीटर का निर्धारित लक्ष्य पूरा होने पर माह में 18,846.60 रुपये बनते हैं। यह पूरा वेतन 30 दिन की ड्यूटी पूरी होने पर बनता है। आरोप लगाया कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की व्यवस्था देख रहे जिम्मेदार किसी भी कंडक्टर को पूरे माह की ड्यूटी करने नहीं देते है, बमुश्किल 26 दिन ही ड्यूटी मिल पाती है। 

कंडक्टरों ने बताया कि कुछ कंडक्टरों का वेतन से चार माह का भी बकाया चल रहा है। बेरोजगारी से निजात पाने के लिए जैसे-तैसे रोजगार मिला भी, तो अब समय से वेतन नहीं मिलने पर घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत गैर जनपद से आकर ड्यूटी करने वाले कंडक्टरों को हो रही है, उन्हें कमरे का किराया भी चुकता करने के लिए लोगों से उधार लेना पड़ जाता है। 

दिक्कत ही दिक्कत
बैंक खाते में वेतन नहीं आने पर स्टेटमेंट मांगा जाता है, जिसके लिए काम से छुट्टी लेनी पड़ती है, यानि एक दिन की कमाई मारी जाती है और बैंक पहुंचने पर स्टेटमेंट के नाम पर 118 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। हालत यह है कि किसी से पीड़ा भी नहीं कह सकते।

बकाया वेतन भी मिलेगा। फरवरी माह का वेतन भेज दिया गया है। सभी के खाते में आरटीजीएस के तहत रुपये भेजे जाते हैं, ऐसा हो नहीं सकता है कि खाते में रुपये न पहुंचे हों, फिर भी दिखवाया जाएगा।-सीपी पांडेय, परिचालन प्रबंधक, इलेक्ट्रिक बस, नगर निगम

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