ज्ञानवापी के साइंटिफिक सर्वेक्षण का आज अंतिम दिन, ASI कल सौंपेंगे सीलबंद रिपोर्ट

ज्ञानवापी के साइंटिफिक सर्वेक्षण का आज अंतिम दिन, ASI कल सौंपेंगे सीलबंद रिपोर्ट

वाराणसी। वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जिला कोर्ट के आदेश के बाद जारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साइंटिफिक सर्वेक्षण का आज अंतिम दिन है। 100 दिन से अधिक चले ASI सर्वे के बाद कल ज्ञानवापी की सच्चाई सामने आएगी। ASI ने सर्वे के दौरान मिले 250 अवशेष को डीएम की निगरानी में लॉकर में जमा करा दिया है। 

वहीं आज शाम सर्वे के बाद अन्य अवशेष सुपुर्द कर सूची सौंप देगी। सर्वेक्षण का रिजल्ट यानी स्टडी रिपोर्ट कल 17 नवंबर को जिला कोर्ट में पेश होगी। एएसआई की टीम ने स्टडी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे सील बंद लिफाफे में जिला जज के सामने पेश किया जाएगा। 

वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बीते 21 जुलाई को ज्ञानवापी मस्जिद के सील वजूखाने को छोड़कर बाकी सभी हिस्से और तहखानों के सर्वे का आदेश दिया था। तीन दिन बाद ही 24 जुलाई को ASI ने सर्वे शुरू कर दिया था लेकिन शाम तक मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली तो देशभर से आए विशेषज्ञों ने सर्वे शुरू किया। 4 अगस्त से जारी सर्वे आज पूरा हो रहा है। पहले दो महीने की अनुमति लेकर उतरी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुरोध पर अदालत ने सर्वे पूरा करने और रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन बार समय बढ़ाया। हालांकि इन दिनों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ज्ञानवापी के सघन सर्वेक्षण में ऐतिहासिक साक्ष्य जुटाए हैं। 

ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) ने बदल दी तस्वीर 
मस्जिद के ज्यादातर हिस्से के सर्वे की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, मस्जिद और तहखानों के नीचे दबे ढांचे की ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) की जांच हैदराबाद की स्पेशल टीम ने की है। जीपीआर में कानपुर के भी विशेषज्ञ शामिल रहे। चार जगहों पर लगाई गई जीपीआर मशीन से सामने आई सच्चाई ने एएसआई की उम्मीद बढ़ाई और वर्तमान तस्वीर को बदल दिया। नई तस्वीरों से ज्ञानवापी की सच्चाई बयां कर दी, जिसे ASI के एडीशनल डायरेक्टर कल कोर्ट में पेश करेंगे।

खंडित मूर्तियां, घड़ा, चिह्न व आकृतियां लॉकर में रखवाए

ज्ञानवापी परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वे से मिलीं खंडित मूर्तियां, चिह्न, आकृतियां, दरवाजे और घड़े के टुकड़े सहित अन्य सामग्रियां कोषागार के लॉकर में रखवाई गईं। एसएसआई ने प्रमाण के तौर पर 250 से ज्यादा सामग्रियां जुटाई हैं, जिसे जिलाधिकारी की सुपुर्दगी में दिया गया। कोषागार के डबल लॉक रूम में संरक्षित कर पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। सूत्रों के मुताबिक, ज्ञानवापी परिसर में 100 दिन तक चले एएसआई के सर्वे में सजावटी ईंटें, दैवीय युगल, चौखट के अवशेष, दरवाजे के टुकड़े सहित कई सामग्रियां मिली हैं। प्रमाण के तौर पर संरक्षित की गई सामग्रियों में मगरमच्छ, कच्छप, घोड़ा, यामिनी, कलश, हाथी, सर्प आदि के टुकड़े भी शामिल हैं। 

अब तक सर्वे में ASI ने क्या-क्या जुटाया

ASI ने चार सेक्टर बनाकर ज्ञानवापी के तीनों गुंबदों और परिसर का सर्वे पूरा किया | ASI ने व्यास तहखाने में पैमाइश की, दीवारों की 3 डी फोटोग्राफी और स्कैनिंग करवाई। चार्ट में दीवारों पर मिली कलाकृतियों के पॉइंट्स नोट किए। 100 मीटर एरियल व्यू फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में पश्चिमी दीवारों के निशान, दीवार पर सफेदी, ईंट में राख और चूने की जुड़ाई समेत मिट्टी के सैंपल जुटाए हैं। इसमें पत्थर के टुकड़े, दीवार की प्राचीनता, नींव और दीवारों की कलाकृतियां, मिट्टी और उसका रंग, अवशेष की प्राचीनता सहित अन्न के दाने का सैंपल जुटाया है। इसके अलावा, टूटी मिली प्रतिमा का एक टुकड़ा भी ASI ने सैंपल में शामिल किया है। डिजिटल नक्शे में अंदर की वर्तमान स्थिति को भी अंकित किया जा रहा है।

पीआर के साथ अन्य मशीनें भी लगाई

ज्ञानवापी परिसर की सतह की माप के लिए जीपीआर के अलावा डायल टेस्ट इंडिकेटर लगाया गया। डेप्थ माइक्रोमीटर से भी अलग-अलग हिस्सों की माप की । कॉम्बिनेशन सेंट वर्नियर बैवल प्रोट्रेक्टर से परिसर में हुए निर्माण की बनावट, कलाकृतियों आदि की जांच की। दीवारों की 3-डी फोटोग्राफी और स्कैनिंग के लिए मशीनें और कैमरे लगाए। इसमें ASI टीम तैयार किए नक्शे के आधार पर इन मापों को रिकॉर्ड में दर्ज किया। 

16 मई को दायर याचिका पर 21 जुलाई को जजमेंट

एएसआई सर्वेक्षण की मांग को लेकर 16 मई को याचिका दायर की गई थी। इसे दायर करने वाली चार महिलाओं की अगुवाई अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन की थी। हिन्दू पक्ष के वकील ने वहां हिन्दू मंदिर के प्रतीक चिह्न मिलने का दावा किया था। वकीलों की दलील और पक्षों की सुनवाई के बाद ज्ञानवापी परिसर में विवादित वजूखाने को छोड़कर पूरे मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के लिए वाराणसी जिला जज की ओर से 21 जुलाई को आदेश आया। कोर्ट वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। एएसआई की टीम ने 24 जुलाई को वाराणसी पहुंचकर सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया। ASI से 50 लोग, हिंदू पक्ष से 8 लोग और मुस्लिम पक्ष से 3 लोग शामिल हुए थे।

तीन बार बढ़ी अवधि 17 को हर हाल में रिपोर्ट तलब

वाराणसी कोर्ट ने 21 जुलाई को आदेश में एएसआई सर्वे का शीघ्र पूरा कर 4 अगस्त को रिपोर्ट मांग थी, मामला अटका तो कोर्ट ने तीन बार समय भी बढ़ाया। अब 17 नवंबर को सर्वेक्षण को पूरा करने पर एएसआई को सीलबंद रिपोर्ट जिला जज की अदालत में पेश करनी होगी। टीम ने GPR के साथ मैग्नेटोमीटर और टोटल स्टेशन जैसे उपकरणों की भी मदद ली, इसमें तीनों गुंबद और मीनारों के कंगूरे तक जांच की। टीम ने संरचना, वास्तु शैली को परखने के साथ ही माप को शामिल किया।

17 नवंबर ऐतिहासिक तारीख, हर दावे पर लगेगी मुहर

वकील विष्णु शंकर जैन कहते हैं कि एएसआई ने अपना सर्वेक्षण कार्य पेशेवर ढंग से पूरा कर लिया है। 17 नवंबर एक ऐतिहासिक दिन होगा, जब एएसआई अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। हमें उम्मीद है कि रिपोर्ट मई 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद के अदालत के आदेश पर हुए एडवोकेट कमिश्नर की अगुआई वाले सर्वेक्षण से अधिक तथ्य लाएगी। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस में 2022 में पहली बार जिला कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर की अगुआई में सर्वेक्षण का कार्य कराने का आदेश दिया था। सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में एक शिवलिंग की तरह की आकृति मिली। हिंदू वादी की ओर से दावा किया गया कि यह शिवलिंग है। वहीं, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद इसे तालाब में लगा फव्वारा बताती रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देवताओं की पूजा करने के अधिकार की मांग की जा रही है, जिसकी जल्द ही अनुमति मिलेगी। 

सर्वे के दौरान आते रहे अवरोध और उतार-चढ़ाव

ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे के बाद कई अवरोध भी आते रहे। सबसे पहले मसाजिद कमेटी ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाकर सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दाखिल की। याचिका खारिज हुई तो स्थानीय स्तर पर सर्वे में शामिल नहीं होकर विरोध दर्ज कराया। कोर्ट की सख्ती के बाद मुस्लिम पक्षकार और वकील शामिल हुए तो मीडिया रिपोर्टस पर नाराजगी जताई। जिला जज की अदालत में मीडिया कवरेज के विरोध में याचिका डाली और रोक लगवा दी। मुस्लिम पक्ष ने चार अगस्त को अवधि नहीं बढ़ने पर सर्वे कार्य रोक दिया और एएसआई टीम का विरोध भी किया। इसके बाद एक महीने का समय लेकर गई एएसआई ने फिर एक महीने और तीसरी बार 15 दिन का समय मांगा। हालांकि आज सर्वे पूरा हो जाएगा, जिसके परिणाम पर पूरे देश की निगाहें टकी हुई हैं।

5 पॉइंट्स पर रोक लगाने की अदालत से की थी मांग

• न्यायालय ने आदेश के बाद अब तक वजूस्थल को छोड़कर संपूर्ण परिसर के सर्वे के लिए ASI को कोई रिट जारी नहीं किया ।

• प्रतिवादी को भी सर्वे की कोई लिखित या मौखिक सूचना नहीं दी गई। इसलिए प्रतिवादी की सहमति तक सर्वे रोका जाए।

• वादियों ने ASI के सर्वे के लिए होने वाले व्यय को भी अग्रिम धनराशि के रूप में जमा नहीं कराया। जबकि मांग करने के बाद यह अनिवार्य था, जो नियमावली का उल्लंघन है।

• वादीगणों को ASI के लिए पैरवी करने का भी कोई आदेश नहीं दिया गया। हालांकि कोर्ट ने इन सभी को खारिज कर दिया।

• मुस्लिम पक्ष की ओर से ज्ञानवापी सर्वे में मीडिया कवरेज को लेकर रोक लगाने की अपील भी इसमें शामिल है। जिसे स्वीकार कर बिना आधिकारिक वर्जन के कवरेज पर रोक लगा दी।

ASI की स्टडी रिपोर्ट में इन सवालों के मिलेंगे जवाब

• - क्या मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर की संरचना के ऊपर किया गया है?

ज्ञानवापी मस्जिद की पश्चिमी दीवार की उम्र और प्रकृति ।

• - मस्जिद के तीन गुंबदों और उसके नीचे के हिस्से की प्रकृति ।

• - नंदी के सामने के व्यास समेत अन्य सभी तहखानों की सचाई ।

• इमारत की उम्र, निर्माण और दीवारों पर मौजूद कलाकृतियों की उम्र और प्रकृति का निर्धारण ।

• मस्जिद के विभिन्न हिस्सों और संरचना के नीचे मौजूद ऐतिहासिक, धार्मिक महत्व की कलाकृतियां और अन्य वस्तुएं क्या हैं? 

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