अलखनाथ मंदिर : यहां जो जिस भाव से आया, भोलेनाथ ने उसी भाव से अपनाया

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Published By Anjali Singh
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मुगल आक्रमण के समय धर्मरक्षा का केंद्र रहे मंदिर का बेहद प्राचीन है। इतिहास आनंद अखाड़ा के नागा बाबा अलखिया के नाम पर पड़ा अलखनाथ मंदिर नाम किला रोड स्थित 84 बीघे में फैला बेहद प्राचीन इतिहास को समेटे हुए है। मुगलों के आक्रमण के समय धर्मरक्षा का केंद्र था यह मंदिर।

बताते हैं कि वट वृक्ष के बीचो-बीच शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए थे। मुगल शासकों के आक्रमण के समय में मंदिर व धर्म की साख बचाने के लिए आनंद अखाड़ा ने नागा बाबा अलखिया को यहां भेजा था। उन्होंने न सिर्फ मंदिर परिसर मुगल आक्रांताओं से सुरक्षित रखा, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा शुरू कर अलखनाथ मंदिर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित कर दिया। बाबा अलखिया ने यहां पर रहकर तपस्या की फिर मंदिर की स्थापना भी कराई। 

अलखनाथ मंदिर में वट वृक्ष के बीचो-बीच प्रकट हुए शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मंदिर के पुजारी सलोने श्याम बताते हैं कि यहां पर भक्त जिस भाव से आते हैं भोलेनाथ भी उसकी  इच्छा उसी भाव से पूरी करते हैं। अलखिया बाबा के बाद 1008 सूरज गिरि, नागा बाबा दत्त गिरि और कमल गिरि ने मंदिर की गद्दी संभाली फिर देव गिरि महाराज 24 वर्ष तक गद्दी पर विराजमान रहे। धर्म गिरि और इनके बाद बालक गिरि ने 9 वर्ष की आयु में यहां आकर अपना पूरा जीवन लगा दिया। अब उनके शिष्य कालू गिरि महाराज 2016 से मंदिर की व्यवस्था देख रहे हैं। मंदिर परिसर में ही मंदिर की गद्दी संभालने वाले महंतों की समाधियां भी बनी हैं।

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पुजारी सलोने श्याम के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में मंदिर का विकास तेजी से हुआ है। वर्ष 2022 में नाथ मंदिरों में शामिल किए जाने के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था भी दुरुस्त की गई है। मंदिर परिसर में राम-सीता का दरबार, शनि मंदिर, शिव विवाह की झांकी, विष्णु दरबार की झांकियां बनी हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर हनुमान की 51 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर परिसर में सावन, शिवरात्रि आदि त्योहारों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर परिसर में करीब 25 संत-महंत रहते हैं।

भक्तों के लिए सीधे-सच्चे हैं बाबा अलखनाथ 

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पिछले 40 साल से मंदिर आने वाली 60 वर्षीय सुमन ने बताया कि बाबा अलखनाथ बहुत सच्चे हैं। जीवन में जो मांगा आज तक सब कुछ मिला है। इस उम्र में भी यहां रोजाना आती हूं। रमेश ने बताया ठेले पर सामान बेचता था, कभी उन्नति नहीं हुई। पांच साल से बाबा के दर्शन के बाद ही काम पर जाता हूं, अब अपनी कमाई से संतुष्ट हूं। बाबा पर पूरा भरोसा है। मंदिर में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है। अलखनाथ मंदिर के बाहर मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित लिखा है। हालांकि मंदिर के पुजारी सलोने श्याम के अनुसार ये बोर्ड तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए लगाया गया था। वर्तमान में मंदिर में केवल असामाजिक तत्वों का आना मना है।