रंगोली

आर्ट गैलरी : महिषासुर, एक कालजयी कृति

आर्ट गैलरी :  महिषासुर, एक कालजयी कृति
महिषासुर, तैयब मेहता की सबसे चर्चित और ऐतिहासिक कृतियों में से एक है, जिसने भारतीय आधुनिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पेंटिंग पारंपरिक पौराणिक चित्रणों से अलग एक नई दृष्टि प्रस्तुत करती है। इस चित्र...

लोकायन: होलकी माई, लोक-आस्था और नारी शक्ति का अनूठा संगम

ग्रामीण भारत में होली का उत्सव केवल रंगों और उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि लोकपरंपराओं और आस्था की जीवंत विरासत का भी प्रतीक है। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में प्रचलित ‘होलकी माई’ की परंपरा इसी सांस्कृतिक विविधता का एक...
विशेष लेख  रंगोली 

विश्व रंगमंच दिवस : रंगमंच की साझा विरासत

हर साल 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस कला का है, जो बिना किसी पर्दे के दर्शकों से आमने-सामने बात करती है। उत्तराखंड के नैनीताल में रहने वाले रंगकर्मी जहूर आलम को इस कला...
विशेष लेख  रंगोली 

अनोखी परंपरा: थापों में बसी विदाई, आदिवासी जीवन का सत्य

राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में स्थित बांसवाड़ा का आदिवासी जीवन अपनी विशिष्ट परंपराओं और गहरी लोकमान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां जीवन के हर पड़ाव जन्म से लेकर मृत्यु तक संस्कारों की एक अलग ही छवि देखने को मिलती...
विशेष लेख  रंगोली 

टिकुली पेंटिंग: परंपरा से आधुनिक कला तक की रचनात्मक यात्रा

बिहार में प्रचलित टिकुली पेंटिंग एक ऐसी विशिष्ट लोक कला परंपरा है, जिसकी जड़ें भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में गहराई तक समाई हुई हैं। इसका संबंध केवल चित्रकला से ही नहीं, बल्कि भारतीय स्त्री-सौंदर्य, सामाजिक परंपराओं और व्यापारिक इतिहास से भी...
विशेष लेख  रंगोली 

आर्ट गैलरी: पियरे-अगस्त रेनॉयर की पेंटिंग ‘वोमेन वेयरिंग ए रोज एंड्री’

यह कलाकृति, प्रसिद्ध इंप्रेशनिस्ट चित्रकार पियरे-अगस्त रेनॉयर ने 1919 में बनाई थी। यह कैनवस पर तैल रंगों से बना एक चित्र है, जो इंप्रेशनिस्ट आंदोलन की विशिष्ट तकनीकों और सौंदर्यशास्त्र को दर्शाता है। वर्तमान में, यह पेंटिंग एक निजी संग्रह...
विशेष लेख  रंगोली 

अनोखी परंपरा दापा प्रथा:  बिना शादी के दांपत्य जीवन की शुरुआत

दुनियाभर में अनेक ऐसी परंपराएं देखने को मिलती हैं, जिनके बारे में जानकर आश्चर्य होता है। भारत अपनी विविध संस्कृति और परंपराओं के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में जीवन के अपने-अपने नियम और सामाजिक...
विशेष लेख  रंगोली 

केवल देखने तक सीमित नहीं कला का अनुभव 

एक प्रचलित कहावत है “सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है”। स्पष्ट है यह कहावत दृष्टिबाधितों द्वारा रंगों की समझ और अनुभूति पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। दूसरी तरफ विज्ञान उन चुनौतियों को भी स्वीकारता चला आ रहा है,...
विशेष लेख  रंगोली 

लोकायन: साल के फूलों संग खिलता सरहुल का उल्लास

झारखंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाने वाला सरहुल पर्व आदिवासी समाज के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और कृतज्ञता का प्रतीक...
विशेष लेख  रंगोली 

डिजिटल और ग्लोबल हुआ लोक गीत-संगीत

भले ही आज की युवा पीढ़ी के बड़े हिस्से को लोक गीत और संगीत उबाऊ, बेमानी और उसके प्रशंसक दिखावटी लगते हों, लेकिन यह भी सच है कि युवाओं की ही तमाम टोलियां लोक गीत-संगीत को सांस्कृतिक धरोहर मानकर आधुनिकता...
विशेष लेख  रंगोली 

प्रकृति का सूक्ष्म संगीत और चैत्र

चैत्र और वसंत के संधिकाल में जब प्रकृति अपने नवजीवन की आभा से भर उठती है, तब आम के वृक्षों पर आने वाले बौर एक अद्भुत सौंदर्य और सुगंध का संसार रच देते हैं। यह दृश्य केवल एक वृक्ष के...
विशेष लेख  रंगोली 

लोकायन: कलाबाजी, संगीत और आस्था का अनोखा संगम 

उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति में अनेक पारंपरिक नृत्य रूप शामिल हैं, जो यहां की आस्था, जीवनशैली और सामुदायिक उत्सवों को जीवंत बनाते हैं। इन्हीं में से एक है लांगवीर नृत्य, जो राज्य के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में विशेष रूप से...
विशेष लेख  रंगोली