रंगोली
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शालू के मालिनी अवस्थी में बदलने का सफर
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By Deepak Mishra
भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में एक शाम मालिनी अवस्थी के नाम से भी सजी। खचाखच भरे राज बिसारिया प्रेक्षागृह में प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अभिनय, नृत्य और गायिकी में गुंथी जिंदगी के सफर की...
लोकायन: रंग, रिश्ते और रिवाजों का जनजातीय उत्सव
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By Anjali Singh
गुजरात के उत्तर-पूर्वी अंचल में जब रंग, संगीत और उत्साह एक साथ सजीव हो उठते हैं, तब कवंत का जनजातीय उत्सव अपने पूरे वैभव के साथ सामने आता है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि रथवा जनजाति के जीवन, संस्कृति...
अनोखी परंपरा: पीढ़ियों का विश्वास, राम जन्म कुंडली वाचन
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By Anjali Singh
राजस्थान के बीकानेर शहर में एक ऐसी अनूठी धार्मिक परंपरा जीवित है, जो समय के साथ न केवल संरक्षित रही है, बल्कि आज भी लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई है। तेलीवाड़ा चौक स्थित रघुनाथ मंदिर में पिछले...
यशोदा और कृष्ण : भारतीय कला की पुनर्पहचान
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By Anjali Singh
कला जगत की ताज़ा खबर यह है कि वैक्सीन उद्योग के अरबपति सायरस पूनावाला ने राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध कृति “यशोदा और कृष्ण” को 17.9 मिलियन डॉलर (लगभग 1672 करोड़ रुपये) में खरीदकर भारतीय चित्रकला की नीलामी का नया...
इंसानियत सीखाती कठपुतलियां
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By Anjali Singh
आदिम काल से लेकर आज तक मनुष्य अपने फुर्सत के समय में किसी न किसी तरह के मनोरंजन के साधनों को अपनाता रहा है। कठपुतली नाट्य कला मनुष्य द्वारा अपनाए जाने वाले साधनों में एक स्वस्थ, संदेशप्रद, शालीन, सभ्य, नैतिकता...
गुरु-शिष्य परंपरा और कलागुरु बीरेश्वर भट्टाचार्य
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By Anjali Singh
गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय शिक्षा-संस्कृति की आधारशिला रही है, जिसका प्रभाव कला-शिक्षा में विशेष रूप से दृष्टिगोचर होता है। प्राचीन भारत में ज्ञान का संप्रेषण मुख्यतः व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित था, जहां गुरु केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि, संवेदना...
अनोखी परंपरा, भिटौलीः पहाड़ की बेटियों तक पहुंचता मायके का स्नेह
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By Anjali Singh
उत्तराखंड की वादियों में जब चैत्र का महीना दस्तक देता है, तो सिर्फ मौसम ही नहीं बदलता, रिश्तों की मिठास भी एक बार फिर ताजा हो जाती है। उत्तराखंड की इसी मिट्टी से निकली एक परंपरा है भिटौली। एक ऐसा...
आर्ट गैलरी
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By Anjali Singh
‘नंबर 26’ जैक्सन पोलॉक द्वारा 1949 में बनाई गई एक महत्वपूर्ण कलाकृति है, जो एक्शन पेंटिंग नामक कला आंदोलन के अंतर्गत आती है, जो अमूर्त कला की व्यापक शैली का एक हिस्सा है। यह कृति पोलॉक की कैनवास पर अपनाई...
आस्था, परंपरा का अद्भुत संगम चैती मेला
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By Anjali Singh
गोला गोकर्णनाथ की पावन धरती पर जब चैत्र की मंद बयार बहती है, तो वातावरण में भक्ति, उल्लास और लोकजीवन की मधुर गूंज एक साथ सुनाई देने लगती है। गोकर्णनाथ महादेव मंदिर की घंटियों की अनुगूंज के बीच सजी यह...
आर्ट गैलरी : महिषासुर, एक कालजयी कृति
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By Anjali Singh
महिषासुर, तैयब मेहता की सबसे चर्चित और ऐतिहासिक कृतियों में से एक है, जिसने भारतीय आधुनिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पेंटिंग पारंपरिक पौराणिक चित्रणों से अलग एक नई दृष्टि प्रस्तुत करती है। इस चित्र...
लोकायन: होलकी माई, लोक-आस्था और नारी शक्ति का अनूठा संगम
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By Anjali Singh
ग्रामीण भारत में होली का उत्सव केवल रंगों और उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि लोकपरंपराओं और आस्था की जीवंत विरासत का भी प्रतीक है। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में प्रचलित ‘होलकी माई’ की परंपरा इसी सांस्कृतिक विविधता का एक...
विश्व रंगमंच दिवस : रंगमंच की साझा विरासत
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By Anjali Singh
हर साल 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस कला का है, जो बिना किसी पर्दे के दर्शकों से आमने-सामने बात करती है। उत्तराखंड के नैनीताल में रहने वाले रंगकर्मी जहूर आलम को इस कला...
