रंगोली
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अनोखी परंपरा: दुल्हन-दूल्हे की “ब्लैकनिंग”
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By Anjali Singh
शादी हर व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है और हर संस्कृति में इसे खास महत्व दिया जाता है। दुनिया के अलग-अलग देशों में विवाह को मनाने की परंपराएं अलग हैं, जिनमें से कई पहली नजर में अजीब...
मिट्टी की खुशबू और कन्नौज की सदियों पुरानी रिवायत
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By Anjali Singh
बारिश में कुछ बूंदें पृथ्वी का पहला स्पर्श करती हैं और पूरा वातावरण एक मोहक सुगंध से भर जाता है। मिट्टी की इस खुशबू को पेट्रिचोर कहते हैं। कई लोगों के लिए यह मिट्टी की खुशबू बचपन के बेफिक्र दिनों...
आर्ट गैलरी : समकालीन कला के विशिष्ट चित्रकार
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By Anjali Singh
जोगेन चौधरी के चित्रों में ग्रामीण जीवन और कोलकाता के विभिन्न पक्षों का चित्र दिखाई देता है। उनकी निजी चित्र शैली में क्रमशः परिवर्तन होता हुआ दिखाई देता है। बाद में उनकी चित्र शैली में मछली, तितली, सांप आदि को...
लोकायन लावणी: महाराष्ट्र की जीवंत लोक कला
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By Anjali Singh
लावणी अपने जोरदार लयबद्ध अंदाज़ के कारण भारत के सबसे लोकप्रिय लोक नृत्यों में से एक है। यह महाराष्ट्र में विशेष रूप से प्रसिद्ध है और इसमें संगीत, गीत और नृत्य का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। लावणी की...
अनोखी परंपरा कोरबा : जहां बेटी को दहेज में दिए जाते हैं जहरीले सांप
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By Anjali Singh
शादी-विवाह में दहेज की प्रथा भारतीय समाज की एक कड़वी सच्चाई रही है। आमतौर पर दुल्हन के पिता अपनी बेटी को दहेज के रूप में महंगे तोहफे, कीमती सामान, सोने-चांदी के गहने और नकदी देते हैं। कई परिवार तो इस...
हिंदी भाषा में कला विषयक लेखन: चुनौतियां, संभावनाएं और यथार्थ
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By Anjali Singh
हिंदी भाषा में कला विषयक लेखन आज भी एक सहज और स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं बन पाया है। जबकि हिंदी भारत की सबसे व्यापक रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषा है, फिर भी कला विमर्श के क्षेत्र में उसका...
समझना होगा कला और हस्तशिल्प के अंतर को
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By Anjali Singh
हस्तशिल्प और कला इन दोनों के बीच बहुत महीन विभाजन रेखा है और यह दोनों ही एक-दूसरे में रूपांतरित हो सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे पानी और भाप। एक निश्चित तापमान के बाद पानी स्वतः ही भाप में परिवर्तित...
आर्ट गैलरी: अतियथार्थ का स्वप्नलोक
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By Anjali Singh
1929 में निर्मित साल्वाडोर डाली की प्रसिद्ध कृति “प्रकाशित सुख” अतियथार्थवादी कला की एक महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है। यह चित्र केवल दृश्य सौंदर्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दर्शक को अवचेतन मन की रहस्यमय और जटिल परतों में प्रवेश...
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समकालीन कला का संकट
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By Anjali Singh
भारतीय कला इतिहास की चर्चा करते समय प्रायः यह स्वीकार किया जाता है कि सदियों तक यह परंपरा पुरुषसत्ता, राजसत्ता और धर्मसत्ता के प्रभाव में संचालित होती रही। वरिष्ठ कलाकार और कला समीक्षक अशोक भौमिक के अनुसार, इसी कारण भारतीय...
पोंगल : तमिल परंपरा का जीवंत उत्सव
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By Anjali Singh
तमिलनाडु का शस्योत्सव अथवा फसल कटाई का पर्व पोंगल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और जीवन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सांस्कृतिक उत्सव है। यह पर्व नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस शुभ अवसर पर...
घुघुतिया पर्व: लोकसंस्कृति और उत्तरायणी की आत्मा
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By Anjali Singh
‘काले कौवा आ ले घुघुति माला खा ले- घुघुति माला खा ले’ कभी ये आवाज उत्तराखंड के सुदूर ग्रामीण अंचलों, उत्तराखंड के विकसित क्षेत्रों सहित प्रत्येक उत्तराखंडी परिवार का बहुत ही लोकप्रिय गीत हुआ करता था। प्रत्येक उत्तराखंडी परिवार चाहे...
आर्ट गैलरी : फ्रीडा की ‘पोर्ट्रेट ऑफ़ एलिसिया गैलेंट’
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By Anjali Singh
‘पोर्ट्रेट ऑफ़ एलिसिया गैलेंट’ नाम की यह कलाकृति मशहूर कलाकार फ्रीडा काहलो ने 1927 में बनाई थी। यह पेंटिंग कैनवास पर ऑयल कलर से बनाई गई है। यह नैव आर्ट मूवमेंट, खासकर प्रिमिटिविज़्म से जुड़ी है। इसमें एक पोर्ट्रेट दिखाया...
